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  • RBI गवर्नर शक्तिकांत दास: इस समय की सर्वोच्च प्राथमिकता आर्थिक वृद्धि

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    रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि आर्थिक वृद्धि इस समय की सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर नीति निर्माता इसे लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि सुस्ती के संकेतों के साथ उम्मीद से कम वृद्धि वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए प्रमुख जोखिम है। हालांकि, बैंकों को झटके सहने के लिए अधिक लचीला बनाया जा रहा है।

    रिजर्व बैंक गवर्नर ने कहा कि दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में संशोधन सार्वजनिक बैंकों की मदद करेगा ; सरकार पर निर्भर होने के बजाए बाजार से पूंजी लेने में सक्षम बनाएगा।

    उन्होंने कहा कि आरबीआई बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के परस्पर संबंधों पर करीब से नजर रख रहा है। राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) की ओर से पेश सभी नियम आवास वित्त कंपनियों के लिए जारी रहेंगे; रिजर्व बैंक कुछ नियमों की समीक्षा कर रहा है। आरबीआई गवर्नर ने ज्यादा से ज्यादा बैकों के रेपो आधारित ऋण की ओर बढ़ने की उम्मीद जताई ।

    आरबीआई के गवर्नर दास ने फिलहाल एनबीएफसी की परिसंपत्ति की गुणवत्ता की समीक्षा से इनकार किया ।

     

  • आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को केंद्र सरकार दे सकती है राहत

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    केंद्र सरकार आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग के छोटे कर्जदारों का ऋण माफ करने की योजना पर काम कर रही है। इस योजना पर सरकार करीब दस हजार करोड़ रुपये खर्च कर सकती है। कॉरपोरेट मामलों के सचिव इंजेती श्रीनिवास ने रविवार को कहा कि आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग के छोटे कर्जदारों के लिए प्रस्तावित कर्जमाफी की शर्तों को लेकर सूक्ष्मवित्त उद्योग के साथ चर्चा की गई है।  यह कर्जमाफी व्यक्तिगत दिवाला एवं ऋणशोधन के तहत होगी और यह ईब्ल्यूएस श्रेणी के सबसे बदहाल मामलों के लिए होगी। प्रस्तावित कर्जमाफी की पेशकश ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवाला संहिता (आईबीसी) के तहत नई शुरुआत योजना के तहत होगी।

    श्रीनिवास ने कहा कि यदि आपने एक बार नई शुरुआत के प्रावधान का लाभ उठा लिया तो आप अगले पांच साल तक इसका लाभ नहीं उठा सकेंगे।  यह बकाया कर्ज को कम करने जैसा होगा। पूरे देश भर में तीन से चार साल की अवधि में यह 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगा। उन्होंने बताया कि हमने सूक्ष्मवित्त उद्योग के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की है और उनकी चिंताओं पर गौर किया है। हमारा मकसद है कि पात्रता के आधार पर छोटे कर्जदारों का कर्ज माफ किया जाए।

    60 हजार रुपये आय वालों को मिल सकता है लाभ
    दिवाला एवं शोधन अक्षमता के तहत ‘नई शुरुआत’ योजना में कई नियम-शर्तें हैं, इसमें एक यह भी है कि कर्जदार की सालाना आय 60 हजार रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। साथ ही कर्जदार की कुल संपत्ति 20 हजार रुपये से ज्यादा नहीं हो और ब्याज और अन्य देनदारियों को जोड़कर कर्ज 35 हजार रुपये से ज्यादा नहीं होना चाहिए। किसी व्यक्ति के पास घर है तो भी उसे इसका लाभ नहीं मिलेगा।

    10 हजार करोड़ रुपये योजना पर खर्च कर सकती है सरकार।
    05 साल तक दोबारा लाभ नहीं ले पाएंगे कर्ज माफी पाने के बाद।

    गांव-कस्बों के लोगों को मिलेगा फायदा
    सूक्ष्म वित्त उद्योग समूह की कंपनी गांव-कस्बों में छोटे-छोटे कर्ज बांटती हैं। इसमें पशु खरीदने, छोटी दुकान खोलने से लेकर कारोबारी ऋण शामिल है। ऐसे में यह राहत दी जाती है तो उद्योग समूह के साथ कर्जदाता को बड़ी राहत मिलेगी। गौरतलब है कि गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में सूक्ष्म वित्तीय उद्योग समूहों के लिए कर्ज जुटाना काफी महंगा हो गया है।

  • बैंक रेपो प्लान लागू करें सस्ते कर्ज के लिए- आरबीआई गवर्नर

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    आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने ग्राहकों को सस्ता कर्ज देने के लिए बैंकों से रेपो दर आधारित योजना अपनाने को कहा है। दास ने सोमवार को कहा कि बैंक इसका लाभ आम जनता तक पहुंचाएं। आने वाले कुछ हफ्ते में केंद्रीय बैंक जरूरी होगा तो इसके लिए कदम भी उठाएगा।

    आरबीआई गवर्नर ने इंडियन बैंक्स एसोसिएशनके कार्यक्रम में कहा कि सिर्फ मौद्रिक नीति में ब्याज दर घटाना पर्याप्त नहीं होगा, जब तक कि बैंकों द्वारा इस ब्याज दर को अपनाया न जाए। दिसंबर 2018 में आरबीआई ने संकेत दिया था कि एक अप्रैल से वह बैंकों की होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्ज की दरों को रेपो दर से जोड़ने के लिए दिशानिर्देश जारी करेगा। लेकिन बैंकों के कड़े ऐतराज के बाद  यह टल गया। एसबीआई ने होम लोन, ऑटो लोन के पुराने ग्राहकों को भी रेपो दर आधारित प्लान की पेशकश करने पर विचार कर रहा है। इससे उन ग्राहकों की ईएमआई में काफी कमी आना तय है।

    शीर्ष 50 एनबीएफसी को डूबने नहीं देंगे : रिजर्व बैंक के गवर्नर दोहराया कि किसी भी बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) को डूबने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने बड़ी एनबीएफसी कंपनियों की परिसंपत्ति गुणवत्ता की समीक्षा से इन्कार किया और कहा कि नियामक शीर्ष 50 एनबीएफसी कंपनियों को डूबने नहीं देगा।  आईएलएंडएफएस संकट के बाद से 12,000 से ज्यादा एनबीएफसी और उनकी आवास वित्त सहयोगी कंपनियों को पूंजी से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन कंपनियों का ऋण बाजार के एक चौथाई हिस्से पर नियंत्रण है।

    रेपो दर में ग्राहकों को ज्यादा लाभ
    आरबीआई गवर्नर ने रेपो दर में कमी का लाभ ग्राहकों को देने को कहा है, लेकिन रेपो रेट आधारित कर्ज दरों का यह मतलब नहीं है कि होम या अन्य लोन की दर रेपो दर के बराबर हो जाएगी। रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को कम अवधि के लिए दी जाने वाली रकम पर तय ब्याज को रेपो दर (आरएलएलआर) कहते हैं। रेपो दर अभी 5.40% है। कर्ज की दर रेपो रेट से कम से कम 2.25% ज्यादा होती है। इसको जोड़कर आरएलएलआर 7.65% हो जाती है। इसके ऊपर बैंक लागत के अनुसार 0.40 से 0.55 फीसदी का प्रीमियम लगाते हैं, फिर भी यह मौजूदा दर से कम होती है।

    अवसरों पर ध्यान दें, निराशा का राग छोड़ें
    दास ने माना कि अर्थव्यवस्था की गति धीमी पड़ रही है और आंतरिक और बाहरी स्तर पर कई चुनौतियां हैं। उन्होंने सभी को निराशा के राग में सुर से सुर मिलाने की जगह आगे के अवसरों को देखने की सलाह दी। दास का यह वक्तव्य ऐसे समय आया है जब बड़े कारोबारी निराशाजनक प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

    अभी ये व्यवस्था लागू
    बैंकों के फ्लोटिंग रेट पर जितने  लोन चल रहे हैं, वे सीमांत लागत कोष की दरों (एमसीएलआर) पर आधारित होते हैं। एमसीएलआर न्यूनतम कर्ज दर सीमा है और बैंक इसमें लागत को जोड़कर अभी होम लोन, ऑटो लोन आदि की पेशकश करते हैं। इस बार रेपो दर में आरबीआई ने 0.35 फीसदी की कटौती की है, लेकिन बैंकों ने 0.15 से 0.20 फीसदी तक ही कर्ज सस्ता किया है। ऐसे में कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों को नहीं मिला।

    • 0.15 से 0.25 फीसदी सस्ता है रेपो रेट लिंक्ड प्लान अभी।
    • 1.10 फीसदी की कटौती की आरबीआई ने फरवरी से अगस्त में।
    • 0.35 से 0.55%ब्याज दर ही घटाई बैंकों ने।

    ये बैंक योजना से जुड़े
    एसबीआई
    बैंक ऑफ बड़ौदा
    सिंडिकेट बैंक
    आंध्र बैंक
    केनरा बैंक
    इंडियन बैंक
    इलाहाबाद बैंक
    बैंक ऑफ इंडिया
    यूनियन बैंक

     

  • जानिये कैसे करें घर बैठे इनकम टैक्स रिटर्न ऑनलाइन फाइल करने का तरीका

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    इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने में अब कुछ ही दिन ही बचे हैं। अगर आप भी आखिरी समय की जल्दबाजी से बचना चाहते हैं तो अपना रिटर्न जल्द फाइल कर दें। आखिरी समय में कई बार जल्दबाजी के कारण गलती होने की आशंका बनी रहती है। वित्त वर्ष 2018-19 (आकलन वर्ष 2019-20) के लिए आईटीआर फाइल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2019 है। आइए जानते हैं कैसे आईटीआर फाइल कर सकते हैं।

    आनलाइन आईटीआर फाइल करने की प्रक्रिया दो पार्ट- पार्ट ए (Part A) और पार्ट बी (Part B) में पूरी होती है।

    • http://www.incometaxindiaefilinggovin पर जाएं और संबंधित आकलन वर्ष के लिए ‘डाउनलोड’ सेक्शन (दायीं तरफ, पेज के बीच में) से आईटी रिटर्न प्रिपेयरेशन साफ्टवेयर डाउनलोड करें। या इस लिंक का इस्तेमाल करें (https://wwwincometaxindiaefilinggovin/downloads/incomeTaxReturnUtilities?lang=eng)
    •  आकलन वर्ष का चुनाव करें और डाउनलोड व zip फाइल को निकाल लें इस फोल्डर में JAR (Java Archive) फाइल पर क्लिक कर यूटिलिटी ओपन करें।
    • डाउनलोडेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करें, इसमें अपनी इनकम, टैक्स पेमेंट्स, डिडक्शन आदि की पूरी जानकारी भरें ‘Pre-fill’ बटन क्लिक कर पर्सनल डिटेल और टैक्स पेमेंट्स या टीडीएस की जानकारी भी भरें यह देख लें कि कोई जानकारी छूट तो नहीं गई है।
    • सभी डेटा भरने के बाद टैक्स व ब्याज देनदारी और रिफंड की अंतिम स्थिति जानने के लिए ‘कैलकुलेट’ पर क्लिक करें।
    • यदि टैक्स देनदारी बनती है तो उसे तुरंत पेमेंट करना न भूलें तय फॉर्मेट में यह डिटेल सबमिट करें इसके बाद ऊपर के स्टेप दोबारा करें जिससे टैक्स देनदारी शून्य हो जाए।
    • अपने कम्प्यूटर पर इनकम टैक्स रिटर्न डेटा जेनरेट कर सेव कर लें।

    ऐसे भरेंगे पार्ट-बी 
    – अपनी आईडी, पासवर्ड, जन्मतिथि और कैप्चा कोड एंटर कर ई-फाइलिंग वेबसाइट पर लॉगइन करें
    – ई-फाइल पर जाएं और ‘अपलोड रिटर्न’ पर क्लिक करें।
    – उपयुक्त आईटीआर, आकलन वर्ष और पहले से सेव XML फाइल को सलेक्ट करें
    – यदि जरूरी हो तो डिलिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) अपलोड करें
    – यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि DSC ई-फाइलिंग से रजिस्टर्ड हो
    – सबमिट के बट पर क्लिक करें। सफलतपूर्वक सबमिशन होने पर ITR-V दिखाई देगा। इस लिंक पर क्लिक कर ITR-V डाउनलोड करें ITR-V आपके रजिस्टर्ड ईमेल आ जाएगा।

     

  • एफपीआई को मिली राहत

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    नई दिल्ली 
    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की मांग को मानते हुए बजट के दौरान उनपर बढ़ाए गए सरचार्ज को वापस लेने की घोषणा की है। अब एफपीआई पर सरचार्ज बजट पूर्व 15 फीसदी ही होगा। वित्त मंत्री ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि पूंजी बाजार में निवेश को उत्साहित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार द्वारा सरचार्ज लगाने के बाद से ही एफपीआई नाराज थे और इसके कारण पिछले कुछ दिनों के दौरान शेयर बाजार से उन्होंने भारी मात्रा में पूंजी की निकासी की थी। 


    बीते तीन कारोबारी सत्रों से गिरावट झेल रहे शेयर बाजार में शुक्रवार को अंतिम कारोबारी घंटे में काफी खरीदारी देखी गई, जिसके कारण बाजार मजबूत होकर बंद हुआ। इसका कारण यह रहा कि निवेशकों को केंद्र सरकार के इस फैसले का अंदाजा हो गया था। 


    इससे पहले, सेबी ने एफपीआई की बढ़ती चिंताओं को कम करने के लिए भारत में उनके द्वारा निवेश से संबंधित नियमों को आसान कर दिया था। उसने FPI के लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस को सरल बनाया। इसके लिए व्यापक योग्यता शर्तों को खत्म कर दिया गया और निवेशकों की कैटिगरी को भी तीन से घटाकर दो कर दिया। इनके साथ सेबी की बोर्ड मीटिंग में बायबैक नियमों में बदलाव के साथ क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के लिए नियम सख्त करने सहित कई फैसले लिए गए। 

    बजट में अमीरों पर टैक्स सरचार्ज बढ़ाया गया था, जिसकी चपेट में करीब 40 प्रतिशत FPI भी आ गए थे। इससे नाराज विदेशी निवेशकों ने जुलाई और अगस्त में काफी बिकवाली की। उन्होंने सरचार्ज को लेकर वित्त मंत्री से भी शिकायत की थी। तब सरकार ने भरोसा दिलाया था कि वह उनकी चिंताएं दूर करने पर गौर करेगी। सेबी के नए नियमों और वित्त मंत्री की घोषणा को FPI का गुस्सा शांत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। 

    बता दें कि देश में निवेश करने वाले 40 पर्सेंट एफपीआई ट्रस्ट या एसोसिएशंस ऑफ पर्संस (एओपी) के रूप में रजिस्टर्ड हैं। बजट में वित्त मंत्री ने सालाना 2 से 5 करोड़ की आमदनी पर इनकम टैक्स के अलावा, सरचार्ज 15 पर्सेंट से बढ़ाकर 25 पर्सेंट और 5 करोड़ से अधिक की आमदनी पर 37 पर्सेंट कर दिया था। इससे दोनों ग्रुप पर कुल टैक्स बढ़कर क्रमश: 39 पर्सेंट और 42.74 पर्सेंट हो गया था। 

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 10 बड़े ऐलान

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    नई दिल्ली
    केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती को दूर करने के लिए शुक्रवार को कई कदम उठाने की घोषणा की। वित्त मंत्री ने उपभोक्ताओं के बीच मांग बढ़ाने से लेकर उद्योग जगत को भी राहत देने के उपाय किए हैं। पिछले कुछ महीने से ऑटोमोबाइल सहित कई अन्य उद्योगों की बिगड़ती हालत को देखते हुए वित्त मंत्रालय को ये कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए ये कदम उठाए जा रहे हैं। आइए जानते हैं, मंत्रालय के इन उपायों का आप पर क्या असर पड़ेगा।
    सस्ते होंगे होम, ऑटो लोन
    सीतारमण ने कहा कि बैंकों ने आरबीआई द्वारा रीपो रेट में की गई कटौती का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाने का फैसला किया है, इसके लिए वे रीपो रेट या एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड लोन प्रॉडक्ट्स पहले ही लॉन्च कर चुके हैं। बैंकों के इस कदम से स्पष्ट है कि ग्राहकों को अब होम और ऑटो लोन सस्ते मिलेंगे।

    30 दिनों में जीएसटी रिफंड
    जीएसटी रिफंड में देरी के कारण कारोबार में मुसीबत झेलने वाले कारोबारियों को वित्त मंत्री ने राहत दी है। तमाम लंबित जीएसटी रिफंड का भुगतान 30 दिनों के भीतर किया जाएगा। वित्त मंत्री ने यह भी कहा है कि अब भविष्य में जीएसटी रिफंड का भुगतान 60 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा।

    बीएस4 वाहनों पर राहत
    जिनके पास बीएस4 मानक वाला वाहन है, वे उसका इस्तेमाल उसे रजिस्ट्रेशन पीरियड तक कर पाएंगे। यही नहीं, मार्च 2020 तक खरीदे गए बीएस4 मानक वाले वाहन मान्य होंगे।

    वाहनों का भारी-भरकम रजिस्ट्रेशन शुल्क अभी नहीं 
    वाहनों के भारी-भरकम रजिस्ट्रेशन शुल्क को अगले साल जून तक के लिए टाल दिया गया है।

    बैंकों को मिलेगी 70 हजार करोड़ की पूंजी
    केंद्र सरकार सरकारी बैंकों में 70 हजार करोड़ रुपये की पूंजी डालेगी। केंद्र सरकार के इस कदम से बैंक अधिक से अधिक लोन बांट सकेंगे। सरकार को उम्मीद है बैंकों में 70 हजार करोड़ रुपये की पूंजी डालने से वित्तीय व्यवस्था में पांच लाख करोड़ रुपये आएंगे।

    आयकर नोटिस का जल्द निपटारा
    तमाम आयकर नोटिस का निपटारा तीन महीनों के भीतर करना होगा।

    और आसान होगी जीएसटी प्रणाली
    वित्त मंत्री ने वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली को और आसान करने का संकल्प लिया है, ताकि करदाताओं को सहूलियत हो।

    कर विभाग द्वारा उत्पीड़न पर लगेगा ब्रेक
    वित्त मंत्री ने कर अधिकारियों द्वारा करदाताओं के उत्पीड़न को खत्म के लिए कदम उठाने का संकल्प लिया है। पुराने टैक्स नोटिस पर एक अक्टूबर तक फैसला लेना होगा।

    15 दिनों में मिलेंगे लोन डॉक्युमेंट्स
    सरकारी बैंक ग्राहकों को लोन बंद होने के 15 दिनों के भीतर लोन डॉक्युमेंट्स वापस करेंगे।

    सुपररिच पर बढ़ा सरचार्ज वापस
    बजट के दौरान सुपररिच पर बढ़ाए गए सरचार्ज को वित्त मंत्रालय ने वापस लेने का फैसला लिया है। इससे एफपीआई और घरेलू निवेशकों को राहत मिलेगी और पूंजी बाजार में आई सुस्ती दूर होगी।

  • बीते 5 साल रहे सबसे खराब कॉर्पोरेट इंडिया के लिए

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    साल 2013-14 से 2017-18 की अवधि पिछले 25 वर्षों में कॉर्पोरेट इंडिया के लिए सबसे खराब पांच साल की अवधि रही है। यह बात सेल्स ग्रोथ और टैक्स के बाद लाभ दोनों पर ही लागू होता है। आश्चर्य की बात नहीं कि इस दौरान कर्मचारियों को मिल रहा मेहनताना भी काफी कम रहा। सरकारी और प्राइवेट दोनों ही कंपनियों में ऐसी स्थिति बरकरार रही। हालांकि विदेशी कंपनियों के लिए यहां थोड़ी राहत रही।

    इकनॉमिक और बिजनस डेटा पर नजर रखने वाली एजेंसी सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने पाया कि वित्त वर्ष 2017-18 के खत्म होने तक बीते पांच साल का सेल्स रेवेन्यू औसतन 6 फीसदी की दर से बढ़ा था। यह वृद्धि दर 1993-94 के बाद से किसी भी पांच साल की समयावधि के लिए सबसे कम थी।

    विदेशी कंपनियों के लिए स्थितियां थोड़ी बेहतर
    साल 2002-03 और 2007-08 के बीच पांच वर्षों में कॉर्पोरेट बिक्री में 21.2% की औसत वार्षिक वृद्धि देखी गई, जो इस अवधि में सबसे अधिक है। पिछले 5 साल की अवधि में सरकारी कंपनियों की सालाना ग्रोथ औसतन 2.6% रही, जो सबसे कम है। इस अवधि में घरेलू प्राइवेट सेक्टर ने अपने सेल्स रेवेन्यू में सालाना 6.5 फीसदी की वृद्धि की, हालांकि विदेशी कंपनियों के लिए यह आंकड़ा 13.6 प्रतिशत था।

    पिछले 5 साल में 2017-18 तक हर साल लाभ का आंकड़ा गिरकर 4.7 फीसदी (टैक्स के बाद) रहा। यहां तक कि 2007-08 और 2012-13 के बीच की अवधि में शुरुआती सालों में वैश्विक आर्थिक मंदी से प्रभावित होने के बावजूद भी टैक्स के बाद मुनाफा हर साल औसतन 1.1% की दर से बढ़ा था। ये आंकड़ें इस बात के संकेत हैं कि पिछले 5 साल की अवधि कॉर्पोरेट जगत के लिए कितनी खराब रही।

    वहीं इस समयावधि के दौरान विदेशी प्राइवेट सेक्टर में 12.2% की सालाना वृद्धि देखी गई। हालांकि सरकारी कंपनियां सबसे ज्यादा पीड़ित रहीं।

  • अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती के बीच आई एक अच्छी खबर

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    अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती के बीच एक अच्छी खबर आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार को केंद्र सरकार को लाभांश और सरप्लस फंड के मद से रेकॉर्ड 1.76 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित करने का निर्णय किया। माना जा रहा है कि इस फंड से सरकार को लोककल्याणकारी योजनाओं की फंडिंग में काफी मदद मिलेगी। सरकार इस फंड के जरिए अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए बड़े फैसले भी ले सकती है। रिजर्व बैंक ने बिमल जालान समिति की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार को रेकॉर्ड 1.76 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित करने की मंजूरी दी है। इसमें वित्त वर्ष 2018-19 (जुलाई-जून) के लिए 1,23,414 करोड़ रुपये का सरप्लस तथा 52,637 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान शामिल है।

    रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल के बिमल जालान की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों को स्वीकार करने के बाद यह कदम उठाया गया है। केंद्रीय बैंक के पूर्व गवर्नर की अध्यक्षता में समिति का गठन रिजर्व बैंक के कारोबार के लिए आर्थिक पूंजी/बफर पूंजी के उपयुक्त स्तर के निर्धारण तथा आवश्यकता से अधिक पड़ी पूंजी सरकार को हस्तांतरित करने के बारे में सिफारिश देने के लिए किया गया था।
    केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा कि आरबीआई निदेशक मंडल ने 1,76,051 करोड़ रुपये सरकार को हस्तांतरित करने का निर्णय किया है। इसमें 2018-19 के लिए रेकॉर्ड 1,23,414 करोड़ रुपये के सरप्लस और 52,637 करोड़ रुपये अतिरिक्त प्रावधान के रूप में चिन्हित किया गया है। अतिरिक्त प्रावधान की यह राशि आरबीआई की आर्थिक पूंजी से संबंधित संशोधित नियमों (ईसीएफ) के आधार पर निकाली गई है।

    RBI द्वारा सरप्लस ट्रांसफर से केंद्र सरकार को सार्वजनिक ऋण चुकाने तथा बैंकों में पूंजी डालने में मदद मिलेगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन पहले ही सरकारी बैंकों में 70 हजार करोड़ रुपये की पूंजी डालने की घोषणा कर चुकी हैं, जिससे बाजार में पांच लाख करोड़ रुपये आने की उम्मीद है।

    पिछले रेकॉर्ड से दोगुनी रकम होगी ट्रांसफर
    सरकार को दिए जाने वाले सरप्लस ट्रांसफर को ‘डिविडेंड’ (लाभांश) कहा जाता है और इस साल केंद्रीय बैंक द्वारा आरबीआई को दिया जा रहा लाभांश पिछले रेकॉर्ड 65,896 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग दोगुना है। पिछले साल आरबीआई ने सरकार को 50 हजार करोड़ रुपये, जबकि वित्त वर्ष 2016-17 में मात्र 30,659 करोड़ रुपये लाभांश के रूप में दिए थे। कुल राशि में से 28 हजार करोड़ रुपये सरकार को अंतरिम लाभांश के रूप में पहले ही ट्रांसफर किया जा चुका है। जालान समिति ने काफी कम ट्रांसफर की सिफारिश की।

    कुछ विश्लेषकों का मानना था कि समिति आरबीआई के रिजर्व में से कम से कम तीन लाख करोड़ रुपये (कॉन्टिजेंसी रिजर्व से एक लाख करोड़ रुपये और रिवैल्यूएशन रिजर्व से दो लाख करोड़ रुपये) ट्रांसफर की सिफारिश करेगी।

    26 दिसंबर, 2018 को गठित हुई समिति
    रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता में छह सदस्यों वाली समिति का गठन पिछले साल 26 दिसंबर को किया गया था। समिति का गठन रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के लिए इकनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क (ECF) की समीक्षा के लिए किया था। दरअसल, वित्त मंत्रालय चाहता था कि दुनियाभर में अपनाए गए सर्वश्रेष्ठ तौर-तरीके RBI भी अपनाए और अपने रिजर्व से सरकार को थोड़ा ज्यादा निकालकर दे।

    रिजर्व बैंक का रिजर्व आदर्श तौर पर कितना होना चाहिए, इसके बारे में बताने के लिए इससे पहले तीन समितियां बन चुकी हैं। 1997 में वी सुब्रह्मण्यम, 2004 में ऊषा थोराट और 2013 में वाय एच मालेगाम की अगुआई वाली समिति बनाई गई थी।

    रिजर्व ट्रांसफर से यह होगा फायदा 
    अगर रिजर्व बैंक का सरप्लस फंड सरकार को ट्रांसफर किया जाता है तो उससे राजकोषीय घाटा लक्ष्य हासिल करने या जनकल्याणकारी योजनाओं की फंडिंग में मदद मिलेगी या बड़े पूंजीगत खर्च कर सकेगी। सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 3.3% का फिस्कल डेफिसिट टारगेट फिक्स किया था, जिसे 2019-20 के यूनियन बजट में रिवाइज करके 3.4% कर दिया था।

    सरकार की मुश्किलें आसान होगी
    अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्र सुस्ती के हालात से जूझ रहे हैं, इसलिए सरकार सार्वजनिक निवेश बढ़ाने और वित्तपोषण के अंतर को पाटने के लिए आरबीआई के लाभांश और अधिशेष प्राप्त करने की राह देख रही थी।

  • एटीएम फ्रॉड पर लगाम की कोशिश, ट्रांज़ैक्शन के बीच 6 से 12 घंटे का करना होगा इन्तजार ?

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    एटीएम धोखाधड़ी को रोकने के लिए दिल्ली स्टेट लेवल बैंकर्स कमिटी (SLBC) ने कुछ उपाय सुझाए हैं। कमिटी ने 2 एटीएम ट्रांजैक्शन के बीच में 6 से 12 घंटे का समय रखने का सुझाव दिया है। अगर इस प्रस्ताव को मान लिया जाता है तो आप निर्धारित समय तक अपने अकाउंट से पैसे नहीं निकाल पाएंगे। हालांकि यह शुरुआती स्तर का ही सुझाव है।

    दिल्ली SLBC के संयोजक और ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के एमडी और सीईओ मुकेश कुमार जैन ने कहा, ‘एटीएम से होने वाली अधिकतर धोखाधड़ी रात के समय यानी आधी रात से लेकर तड़के सुबह तक होती है। ऐसे में एटीएम से लेनदेन पर एक खाका खींचना मददगार साबित हो सकता है।’ इस योजना पर पिछले हफ्ते 18 बैंकों के प्रतिनिधियों की बैठक में चर्चा हुई। 

    साल 2018-19 के दौरान दिल्ली में 179 एटीएम फ्रॉड केस दर्ज किए गए। इस मामले में दिल्ली, महाराष्ट्र से (233 एटीएम धोखाधड़ी के मामले) केवल कुछ कदम ही दूर है। हाल के महीनों में कार्ड की क्लोनिंग के मामले भी सामने आए हैं जिसमें बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक शामिल थे। साल 2018-19 में देशभर में फ्रॉड के मामले बढ़कर 980 हो गए, इससे पहले साल इन मामलों की संख्या 911 थी।

    जैन ने बताया कि बैंकर्स ने कई दूसरे सुझाव भी दिए हैं जिनमें अनधिकृत रूप से पैसे निकालने की कोशिश करने पर अकाउंट होल्डर्स को अलर्ट करने के लिए ओटीपी भेजी जाए। यह सिस्टम क्रेडिट या डेबिट कार्ड द्वारा होने वाले ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के ही समान होगा। इसके अलावा बैंकर्स ने एटीएम के लिए सेंट्रलाइजस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम की भी बात कही, जो OBC, SBI, PNB, IDBI बैंक और केनरा बैंक में पहले से ही लागू किया जा चुका है।

  • सेंसेक्स टुडे: दो सत्रों की तेजी पर शेयर बाजार में ब्रेक, सेंसेक्स 189 अंक लुढ़का

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    मुंबई
    कमजोर वैश्विक संकेतों तथा क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज के देश की अर्थव्यवस्था पर दिए गए बयान का असर शेयर बाजार में देखने को मिला और लगातार दो सत्रों की तेजी पर बुधवार को ब्रेक लग गया। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए जिन उपायों की घोषणा की है, उससे कारोबार तथा उपभोक्ता रुझानों में सुधार होने की उम्मीद नहीं है।

    कारोबार के दौरान निवेशकों द्वारा निवेश में ऐहतियात भरा रुख अपनाने के कारण बीएसई के 30 कंपनियों के शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 189.43 अंकों (0.50%) की गिरावट के साथ 37,451.84 पर बंद हुआ। वहीं, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 50 कंपनियों के शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 59.25 अंक (0.53%) लुढ़ककर 11,046.10 पर बंद हुआ।

    दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 37,687.82 का ऊपरी स्तर तथा 37,249.19 का निचला स्तर छुआ। वहीं, निफ्टी ने 11,129.65 का उच्च स्तर और 10,987.65 का निम्न स्तर छुआ। बीएसई पर सात कंपनियों के शेयर हरे निशान पर तो 23 कंपनियों के शेयर लाल निशान पर बंद हुए, जबकि एनएसई पर 13 कंपनियों के शेयरों में लिवाली तथा 37 कंपनियों के शेयरों में बिकवाली दर्ज की गई।

    इन शेयरों में तेजी
    बीएसई पर एचसीएल टेक के शेयर में सर्वाधिक 2.61 फीसदी, इन्फोसिस में 2.18 फीसदी, टेक महिंद्रा में 2.10 फीसदी, एचडीएफसी में 0.51 फीसदी तथा टीसीएस के शेयर में 0.18 फीसदी की मजबूती दर्ज की गई। वहीं, एनएसई पर भी एचसीएल टेक के शेयर में सर्वाधिक 2.72 फीसदी, बीपीसीएल में 2.48 फीसदी, इन्फोसिस में 2.40 फीसदी, इन्फ्राटेल में 2.20 फीसदी तथा आयशर मोटर्स के शेयर में 1.90 फीसदी की तेजी देखी गई।

    इन शेयरों में गिरावट
    बीएसई पर यस बैंक के शेयर में सबसे अधिक 7.47 फीसदी, टाटा मोटर्स डीवीआर में 4.20 फीसदी, वेदांता लिमिटेड में 4.06 फीसदी, टाटा स्टील में 4.02 फीसदी तथा ओएनजीसी में 3.62 फीसदी की कमजोरी देखी गई। एनएसई पर भी यस बैंक के शेयर में सर्वाधिक 7.13 फीसदी, टाटा स्टील में 4.29 फीसदी, जेएसडब्ल्यू स्टील में 3.82 फीसदी, वेदांता लिमिटेड में 3.77 फीसदी तथा कोल इंडिया के शेयर में 3.73 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।