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  • जानें कैसे दस हजार रुपए से शुरू कर सकते है मोतियों की खेती और मुनाफा लाखों का !

    महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के रहने वाले संजय गंडाते एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता पारंपरिक खेती करते थे। संजय ने कुछ साल सरकारी नौकरी की तैयारी की। सफलता नहीं मिली तो मोतियों की खेती करना शुरू किया। पिछले 7 साल से वे मोतियों की फार्मिंग (Pearl Farming) और मार्केटिंग का काम कर रहे हैं। भारत के साथ ही इटली, अमेरिका जैसे देशों में भी उनके मोतियों की डिमांड है। अभी इससे वे सालाना 10 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं।

    38 साल के संजय बताते हैं कि मेरा लगाव बचपन से मोतियों से रहा है। गांव के पास ही नदी होने से अक्सर हम अपने दोस्तों के साथ सीपियां चुनने जाते थे। हालांकि कभी इसके बिजनेस के बारे में नहीं सोचा था और कोई खास जानकारी भी नहीं थी। कुछ साल सरकारी टीचर बनने की तैयारी की, लेकिन जब सिलेक्शन नहीं हुआ तो प्लान किया कि कहीं कंपनी में काम करने से अच्छा है खेती बाड़ी की जाए।

    नौकरी नहीं मिली तो मोतियों की खेती शुरू की
    संजय पारंपरिक खेती नहीं करना चाहते थे। वे कुछ नया करने का प्लान कर रहे थे। तभी उन्हें ख्याल आया कि जो सीपें उनके गांव की नदी में भरपूर मात्रा में उपलब्ध हैं, उनसे वे कुछ तैयार कर सकते हैं क्या? इसके बाद वे पास के कृषि विज्ञान केंद्र पहुंचे। वहां से संजय को पता चला कि इन सीपियों की मदद से मोती तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि इसकी प्रोसेस के बारे में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं मिली।

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    Credit – social media

    संजय ने गांव की नदी के सीपियों से ही मोतियों की खेती की शुरुआत की थी। तस्वीर में वे नदी के पास खड़े हैं।

    संजय कहते हैं कि सीपियों से मेरा लगाव था ही इसलिए तय किया कि अब जो भी नफा-नुकसान हो अपने पैशन को ही प्रोफेशन में बदलेंगे। इसके बाद उन्होंने इस संबंध में गांव के कुछ लोगों से और कुछ पत्र-पत्रिकाओं के जरिए जानकारी जुटाई। फिर नदी से वे कुछ सीपी लेकर आए और किराए पर तालाब लेकर काम शुरू कर दिया। तब उन्होंने ज्यादातर संसाधन खुद ही डेवलप किया था। इसलिए उनकी लगात 10 हजार रुपए से भी कम लगी थी।

    शुरुआत में घाटा हुआ, लेकिन हार नहीं मानी
    संजय चूंकि नए-नए थे। उन्हें इसका कोई खास तौर तरीका पता नहीं था। इसके चलते उन्हें शुरुआत में नुकसान उठाना पड़ा। ज्यादातर सीपियां मर गईं। इसके बाद भी उन्होंने इरादा नहीं बदला। उन्होंने इसकी प्रोसेस को समझने के लिए थोड़ा और वक्त लिया। इंटरनेट के माध्यम से जानकारी जुटाई। कुछ रिसर्च किया। और फिर से मोतियों की खेती शुरू की। इस बार उनका काम चल गया और काफी अच्छी संख्या में मोती तैयार हुए।

    इसके बाद संजय ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। धीरे-धीरे वे अपने काम का दायरा बढ़ाते गए। आज उन्होंने घर पर ही एक तालाब बना लिया है। जिसमें अभी पांच हजार सीपियां हैं। इनसे वे एक दर्जन से ज्यादा डिजाइन की अलग-अलग वैराइटी की मोतियां तैयार कर रहे हैं।

    मार्केटिंग के लिए क्या तरीका अपनाया?

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    Credit – social media

    संजय अब मोतियों की खेती के साथ ही लोगों को ट्रेनिंग देने का भी काम करते हैं।

    संजय कहते हैं कि मैं अपने प्रोडक्ट किसी कंपनी के जरिए नहीं बेचता हूं। मिडिलमैन का रोल खत्म कर दिया है। क्योंकि इससे सही कीमत नहीं मिलती और वे लोग औने-पौने दाम पर खरीद लेते हैं। इससे बचने के लिए मैं खुद ही मार्केटिंग करता हूं।

    वे कहते हैं कि हमने सोशल मीडिया से मार्केटिंग की शुरुआत की थी। आज भी हम उस प्लेटफॉर्म का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। साथ ही हमने खुद की वेबसाइट भी शुरू की है। जहां से लोग ऑनलाइन शॉपिंग कर सकते हैं। कई लोग फोन के जरिए भी ऑर्डर करते हैं। उसके बाद हम कूरियर के जरिए उन तक मोती भेज देते हैं। वे 1200 रुपए प्रति कैरेट के हिसाब से मोती बेचते हैं।

    फार्मिंग के साथ ट्रेनिंग भी देते हैं
    संजय ने अपने घर पर ही मोतियों की खेती का एक ट्रेनिंग सेंटर खोल रखा है। जहां वे लोगों को इसकी पूरी प्रोसेस के बारे में जानकारी देते हैं। उन्होंने इसके लिए अभी 6 हजार रुपए फीस रखी है। लॉकडाउन से पहले महाराष्ट्र के साथ ही बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों से लोग उनके पास ट्रेनिंग के लिए आते थे। उन्होंने एक हजार से ज्यादा लोगों को अब तक ट्रेंड किया है। वे पूरी तरह से प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देते हैं।

    आप मोती की खेती कैसे कर सकते हैं?

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    Credit – social media(जानें कैसे दस हजार रुपए से शुरू कर सकते है मोतियों की खेती और मुनाफा लाखों का !)

    सीपी के अंदर कुछ ऐसे ही मोती तैयार होते हैं। ये मोती अलग-अलग डिजाइन और आकार के हैं।

    इसके लिए तीन चीजों का होना जरूरी है। एक कम से कम 10×15 का तालाब होना चाहिए। जिसका पानी खरा नहीं होना चाहिए यानी पीने लायक पानी होना चाहिए। दूसरी चीज सीपी हैं, जिनसे मोती बनता है। यह आप चाहें तो नदी से खुद निकाल सकते हैं या खरीद भी सकते हैं। कई किसान सीपियों की मार्केटिंग करते हैं। साउथ के राज्यों में अच्छी क्वालिटी की सीपियां मिल जाती हैं। इसके बाद जरूरत होती है मोती के बीज यानी सांचे की जिस पर कोटिंग करके अलग-अलग आकार के मोती बनाते हैं।

    ट्रेनिंग के लिए आप नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्‍चर रिसर्च के तहत एक नया विंग बनाया गया है, जो भुवनेश्वर में है। इस विंग का नाम सीफा यानी सेंट्रल इंस्‍टीट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्‍वाकल्‍चर है। यह फ्री में मोती की खेती की ट्रेनिंग देती है। इसके अलावा कई किसान भी इसकी ट्रेनिंग देते हैं।

    कैसे बनता है मोती, क्या है इसकी प्रोसेस?
    सीपी से मोती बनने में करीब 15 महीने का वक्त लगता है। इसके लिए सबसे पहले नदी से या खरीदकर सीपी लाई जाती हैं। उन्हें दो से तीन दिनों तक एक जाली में बांधकर अपने तालाब में रखा जाता है ताकि वो खुद को उस पर्यावरण के अनुकूल ढाल सकें। इससे उनकी सर्जरी में सहूलियत होती है।

    इसके बाद उन्हें वापस तालाब से निकाला जाता है। फिर एक कॉमन स्क्रू ड्राइव और पेंच की मदद से उनकी सर्जरी की जाती है। फिर सीपी का बॉक्स हल्का ओपन कर उसमें मोती का बीज यानी सांचा डाल देते हैं। इसके बाद उसे बंद कर दिया जाता है। इस दौरान अगर सीपी को ज्यादा इंजरी होती है तो उसका ट्रीटमेंट भी किया जाता है।

    इन सीपियों को एक नाइलॉन के जालीदार बैग में रखकर नेट के जरिए तालाब में एक मीटर गहरे पानी में लटका दिया जाता है। ध्यान रहे कि तालाब पर ज्यादा तेज धूप नहीं पड़े। गर्मी से बचाने के लिए आप उसे तिरपाल से कवर कर सकते हैं। बरसात के सीजन में इसकी खेती करना ज्यादा बेहतर होता है। फिर इनके भोजन के लिए कुछ एल्गी यानी कवक और गोबर के उपले डाले जाते हैं। हर 15-20 दिन पर मॉनिटरिंग की जाती है। ताकि अगर कोई सीपी मरती है तो उसे निकाल दिया जाए। वरना वो दूसरे सीपियों को नुकसान पहुंचाती है। औसतन 40% सीपी इस प्रोसेस में मर जाती हैं।

    मोती की खेती का गणित और कमाई
    मोतियों की खेती कम लागत में कमाई का एक बेहतर विकल्प है। आप इसके जरिए कम वक्त में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। छोटे लेवल पर शुरुआत के लिए करीब एक हजार सीपियों की जरूरत होती है। अगर आप खुद नदी से सीपी लाएं तो कम खर्च होगा। हालांकि सीपी ढूंढना और उनकी पहचान करना इतना आसान नहीं होता। और आप बाहर से लाते हैं तो एक नेचुरल सीपी की कीमत 70 रुपए जबकि आर्टिफिशियल सीपी 5 से 7 रुपए में मिलती है। यानी नेचुरल मोती की खेती एक लाख और आर्टिफिशियल की 15 से 20 हजार रुपए की लागत से की जा सकती है।

    तैयार होने के बाद एक डिजाइनर नेचुरल मोती की कीमत एक हजार से लेकर दो हजार तक मिलती है। जबकि नॉर्मल मोती 100 से लेकर 500 रुपए तक में बिकता है। एक सीपी से अधिकतम दो मोती बनते हैं। संजय में मुताबिक अगर प्रोफेशनल तौर पर इसकी खेती की जाए तो 9 गुना तक मुनाफा कमाया जा सकता है। कई बड़ी कंपनियां किसानों से सीधे प्रोडक्ट खरीद लेती हैं।

  • बजरंग दल के कार्यकर्ता की हत्या मामले में हो रही सभी दृष्टिकोण से जांच

    कर्नाटक| कर्नाटक में जारी हिजाब विवाद के बीच बजरंग दल के कार्यकर्ता की हुई हत्या के बाद यहां हिस्सा ने अलग रूप से लिया है। अब इस मामले पर राज्य सरकार के एक मंत्री ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है और कहा है की इस मामले में हिजाब समेत सभी दृष्टिकोण से जांच की जा रही है। बजरंग दल कार्यकर्ता हर्ष(26) की हत्या मामले में 12 लोगों से इस मामले में पूंछताछ जारी है।

    एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) प्रताप रेड्डी ने बताया उन्होंने इस मामले में उन्होंने 2 लोगों को गिरफ्तार किया है अभी एक व्यक्ति की तलाश जारी है। आरोपी की पहचान हो गई है जल्द ही उसे गिरफ्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा, अभी हम हत्या के विषय मे कुछ विशेष जानकारी नहीं दे सकते लेकिन हां हम जल्द ही इस मामले के पीछे की गुत्थी को सुलझा लेंगे।
    वहीं कर्नाटक सरकार ने इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है की इस मामले के संदर्भ में अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है की घटना का लिंक हिजाब विवाद से है। लेकिन हिजाब संगठन को इस मामले की जांच के दायरे में रखा गया है। उन्होंने आगे कहा, कल की घटना के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं उनपर सख़्त कार्यवाही होगी। 
    बता दे कल जब हर्ष के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था। तो कुछ लोगो ने पथराव किया था और आगजनी कर हिस्सा और उपद्रव का माहौल बनाया। इस घटना में एक फोटोजर्नलिस्ट सहित 3 लोगों को चोट लगी। पुलिस ने हिंसा पर काबू पाने हेतु लोगों पर आंसू गैस के गोले फेंके है। यहां स्कूल कॉलेज को बन्द कर दिया गया है।हिंसा के माहौल में अंतिम संस्‍कार को इजाजत  देने के लिए सवालों के घेरे में आई कर्नाटक सरकार ने इस फैसले से पल्‍ला झाड़ लिया है. राज्‍य के गृह मंत्री ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा, शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने का फैसला स्थानीय प्रशासन का था। उन्होंने आगे कहा, जल्द ही इस मामले में सख्त कार्यवाही होगी और आरोपियों को सजा मिलेगी।

  • स्कूल से परेशान छात्र ने 17 वीं मंजिल से लगाई छलांग, हुई मौत

    फरीदाबाद| देश अपराध के सिलसिला तेजी से बढ़ता जा रहा है। एक तरफ सरकारें देश को अपराध मुक्त करवाने का दावा करती है। वहीं दूसरी तरफ यहां अपराध की बढ़ती कुछ और ही कहती है। खबर हरियाणा के फरीदाबाद की है जहां एक 10 वीं में पढ़ने वाली छात्र ने अपार्टमेंट की ऊपरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। 

    छात्रा ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है जिसमे उसने स्कूल के प्रधानाध्यापिका को जिम्मेदार ठहराया है। छात्र ने लिखा है स्कूल ने मुझे मार डाला। सुसाइड नोट के बिनाम पर प्रधानाध्यापिका और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। 
    बता दें छात्र की मां उसी स्कूल में पढ़ती थी। छात्रा ने अपार्टमेंट की 17 वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस छात्र के द्वारा लिखित सुसाइड नोट के आधार पर कार्यवाही कर रही है।

  • दाऊद इब्राहिम मनी लांड्रिंग केस नवाब मालिक की हुई गिरफ्तार, मालिक बोले

    मुंबई| महाराष्ट्र सरकार के मंत्री व राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता नवाब मालिक को मनी लांड्रिंग मामले में हिरासत में लिया गया है और उनसे अब इस मामले में सुनवाई जारी है। समाचार एजेंसी एनआईए से मिली जानकारी के अनुसार दाऊद इब्राहिम मनी लांड्रिंग केस में मालिक की गिरफ्तारी की गई है। उन्होंने इस मामले पर कहा है की मुझे अरेस्ट किया गया लेकिन मैं डरूंगा नहीं। हम लड़ेंगे और जीतेंगे। 

    बता दें आज ही पर्वतन निदेशालय द्वारा इस मामले में मालिक से पूंछताछ की गई थी। ED के अधिकारी सुबह 6 बजे मालिक के घर पहुंचे थे यहां करीब एक घण्टे की पूंछताछ के बाद अधिकारी इन्हें अपने साथ ED के कार्यालय ले गए वहां 8:30 मिनट पर वहां इनसे पूंछताछ की। बता दें ED ने अंडरवर्ल्ड से जुड़ी एक सम्पत्ति के संदर्भ में नवाब मालिक को तलब किया था। 

     

  • नए वेतन संसोधन के खिलाफ विरोध जारी

    हैदराबाद  नए वेतन संसोधन कानून के खिलाफ हैदराबाद में लाखों सरकारी कर्मचारी इस वक़्त इसका विरोध कर रहे हैं। सरकारी कर्मचारियों का यह विरोध अमरावती सचिवालय के बाहर जारी है। सभी कर्मचारी यहां बाहर बैठकर इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। आंध्र प्रदेश सरकार के हजारों कर्मचारियों ने हाल में की गई वेतन समीक्षा के खिलाफ गुरुवार को विजयवाड़ा की सड़कों पर प्रदर्शन किया था. इस दौरान शहर के बीआरटीएस रोड पर काफी लोगों की भीड़ जमा हो गई थी।

    मुख्य सचिव समीर शर्मा ने कर्मचारियों से इस हड़ताल को खत्म करने का आह्नन किया और कहा अनिश्चित काल के लिए जारी इस हड़ताल को 7 फरवरी तक वापस ले ली जाए। विशेष वित्त सचिव एस. एस. रावत और प्रधान सचिव भूषण कुमार ने एक संयुक्त बैठक ने कहा, हमने तेलंगाना की भांति महज महंगाई भत्ता दिया था। 27 फीसदी अंतरिम राहत नहीं दी होती तो, पिछले 30 महीनों में हम कम से कम 10,000 करोड़ रुपये बचा सकते थे ।

    अंतरिम राहत ब्याज मुक्त ऋण की तरह है, जिसे वापस वसूलना है, फिर आप चाहे उसे कुछ भी नाम दें. ”हालांकि, जल्दी ही शर्मा ने कहा कि सरकार इस संबंध में उच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करेगी।

  • ऐसे नेताओं के साथ चलाएंगे हरीश रावत सरकार जिन्हें नहीं मिला था टिकट

    Uttrakhand| कल यानी 10 मार्च को पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आ जायेंगे। वही आज नतीजों से पूर्व सभी राजनीतिक दल अपनी अपनी रणनीति तैयार करने में लगे हुए हैं। अब बीच कांग्रेस नेता व पूर्व सीएम हरीश रावत ने बड़े संकेत दीए है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह ऐसे नेताओं के सहयोग से सरकार चलाएंगे जिनको किसी न किसी की वजह से टिकट नहीं मिल पाया है। हरीश ने संकेत दिए हैं कि वह जीत को लेकर आश्वस्त है। लेकिन उत्तराखंड के चौमुखी विकास के लिए वह कांग्रेस के साथ साथ अन्य ऐसे नेताओं के समर्थन से सरकार चलाएंगे जिनको किसी न किसी कारण के चलते टिकट नहीं मिल पाया है।

    उन्होंने दावा किया कि हम उत्तराखंड में पूर्ण बहुमत से सरकार बना रहे हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि उत्तराखंड ने बदलाव की ओर कदम रखा है। हमारा कोई c प्लान नहीं है। हम उन नेताओं के साथ सरकार चलाएंगे जिन्हें किसी न किसी कारण वश टिकट नहीं मिल पाया। इसके साथ ही हम कांग्रेस के साथ अन्य दलों और लोगो का उपयोग सिर्फ सरकार बनाने के लिए नहीं बल्कि उत्तराखंड के विकास के लिए करेंगे।

     

    बताते दे 10 मार्च यानी कल इस बात से पर्दा हट जाएगा कि उत्तराखंड में कौन सी पार्टी सरकार बनाएगी। हालांकि एग्जिट पोल ने यह बता दिया है कि यहां कांग्रेस बाजी मारेगी। लेकिन भाजपा भी कांग्रेस के पीछे उसे कांटे की टक्कर देने के लिए खड़ी हुई है। अब देखना यह है कि उत्तराखंड की जनता ने किसपर अपना प्यार लुटाया है और वह किसके हाथों में उत्तराखंड की बागडोर सौंपेगी ।

  • बिहार हुआ 110 वर्ष पुराना, आज मनाया जा रहा बिहार दिवस

    बिहार| बिहार आज 110 वर्ष का हो जाएगा। आज बिहार में बिहार दिवस का जश्न मनाया जा रहा है। बिहार सरकार हर वर्ष 22 मार्च को बिहार दिवस मनाता है। वही यदि हम बिहार के इतिहास पर गौर करे तो वर्ष 1912 में बंगाल प्रोविंस से पृथक होकर बिहार अस्तित्व में आया था। तब अब तक के बिहार में कई परिवर्तन हुए हैं।

    वही यदि हम बिहार दिवस की बात करें तो इसका शुभारंभ नीतीश कुमार ने 2010 में किया। नीतीश की इस पहल ने बिहार को एक अलग आयाम दिया और बिहार का इतिहास लोगो के सामने आया। आज से बिहार दिवस का तीन दिवसीय कार्यक्रम चलेगा। इस बार की बिहार दिवस की थीम जल जीवन और हरियाली है। यह कार्यक्रम पटना के गांधी मैदान में तीन दिन तक कार्यक्रम चलेगा. जिसमें रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत होने के साथ-साथ कई तरह के कार्यक्रम प्रदर्शित किए जाएंगे।

  • डिजिटल इंडिया ने हर किसी की राह बनाई आसान

    भारत| डिजिटल इंडिया भारत सरकार की वह पहल है जिसका उद्देश्य एक शशक्त समाज व ज्ञान वर्धक अर्थशास्त्र का निर्माण कर देश को विकास के पथ पर अग्रसर करना है। डिजिटल इंडिया के प्रस्ताव पर 7 अगस्त 2014 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विस्तृत चर्चा की थी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर करना है। यह कार्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीईआईटीवाई) द्वारा परिकल्पित किया गया है।

    वही यदि हम पिछले कुछ वर्षों की ओर ध्यान केंद्रित करें तो इस कार्यक्रम ने देश को आगे बढ़ाने में न सिर्फ अहम भूमिका निभाई है। अपितु रोजगार के कई नए आयाम विकसित किए हैं। वर्ष 2014 से लेकर आज तक डिजिटल तकनीक आर्थिक विकास की गति को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। डिजिटल इंडिया मिशन कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जीने 1 जुलाई 2015 को लॉन्च किया था।

    जाने क्या थे डिजिटल तकनीकी के प्रमुख तीन बिंदु:- 

    1) सुरक्षित और स्थिर डिजिटल बुनियादी ढाँचे का विकास करना। 
    2) सरकारी सेवाओं को डिजिटल रूप से वितरित करना
    3) नागरिको को डिजिटल साक्षरता प्रदान करना और उन्हें तकनीकी से जोड़ना।
    इस तकनीकी ने न सिर्फ शहरों में बल्कि गावो में एक बड़ा परिवर्तन लाया। लोगो ई गवर्नेंस से जुड़े गावो में ब्रॉडकास्ट कननेक्टीविटी बेहतर हुई और डिजिटल डिवाइड जैसी समस्या में कुछ फीसदी कमी दर्ज हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाई इस योजना ने लोगो को सीधे तकनीकी से नहीं जोड़ा अपितु सरकार और उनके बीच की योजनाओं के बीच जो मध्यस्थ की भूमिका निभाता था उसका रोल समाप्त कर दिया।

  • आज होगा पुष्कर सिंह धामी का शपथ ग्रहण, ये दिग्गज करेंगे शिरकत

    Uttrakhand| पांच में से चार राज्यों में भाजपा को प्रचंड जीत हांसिल हुई है। वही आज से भाजपा का शपथ ग्रहण समाहरोह आरम्भ हुआ है। जहां 25 को उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ शपथ ग्रहण करेंगे वही आज उत्तराखंड में दूसरी बार पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करने जा रहे हैं। 

    सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पुष्कर सिंह धामी के शपथ ग्रहण समाहरोह में आज शपथ ग्रहण कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नडडा सहित कई अन्य केंद्रीय नेता मौजूद रहेंगे। 
    उत्तराखंड प्रदेश बीजेपी मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान के मुताबिक पुष्कर सिंह धामी का शपथ ग्रहण समाहरोह उत्तराखंड के देहरादून में स्थित परेड ग्राउंड में करीब 1:30 मिनट पर आरम्भ होगा। इनके शपथ ग्रहण समाहरोह में योगी आदित्यनाथ के उपस्थित होने की भी सम्भावनाये बन रही है।

  • Tata Elxsi के शेयर्स में उछाल का क्या है कारण?

    डेस्क। Tata Elxsi के शेयर की कीमत लगातार दो सत्रों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। मल्टीबैगर आईटी स्टॉक जिसने पिछले एक साल में अपने शेयरधारकों को 235 प्रतिशत रिटर्न दिया है, शुक्रवार को एक नए शिखर को छूता नज़र आ रहा है। सोमवार को एनएसई पर ₹9,160 के नए स्तर पर पहुंच गई।  पिछले दो व्यापार सत्रों में, यह मल्टीबैगर स्टॉक 18 प्रतिशत (एनएसई पर ₹7610 से ₹9010 प्रति स्तर) तक बढ़ गया है।

    शेयर बाजार के जानकारों की माने तो टाटा समूह की कंपनी के पास एक विविध पोर्टफोलियो है जो ऑटो सेक्टर में चालक रहित कार परियोजना देता है। यह अमेज़ॅन, गूगल, सीमेंस, ऑडी आदि जैसी विश्व स्तर पर प्रसिद्ध कंपनियों को एआई और डिजिटल लर्निंग सेवाएं भी प्रदान कर रहा है। जानकारों का मानना है कि इसी कारण टाटा एलेक्सी के शेयर की कीमत पर बाजार में तेजी आई है। जिसके कारण इस मल्टीबैगर स्टॉक में अचानक तेजी के प्रभाव स्वरूप में दिख रहा हैंम

    प्रॉफिटमार्ट सिक्योरिटीज के शोध प्रमुख अविनाश गोरक्षकर ने कहा, “टाटा एलेक्सी एक महत्वाकांक्षी चालक-रहित कार परियोजना को प्रदान कर रही है और यह ईवी सेगमेंट में भी अपनी सेवाएं और विशेषज्ञता प्रदान कर रही है। हाल के सत्रों में मल्टीबैगर स्टॉक की अचानक बढ़त का यह तत्काल कारण है।

     कंपनी अमेज़ॅन, Google, नेटफ्लिक्स, ऑडी, सीमेंस इत्यादि जैसी विभिन्न क्षेत्र की कंपनियों को अपनी सेवाएं और विशेषज्ञता दे रही है, जो समय के साथ विकसित किए गए मजबूत व्यापार मॉडल के बारे में भी संकेत देती है।”

    आपको बता दें कि पिछले एक महीने में, यह मल्टीबैगर स्टॉक लगभग ₹6430 से ₹9010 के स्तर तक बढ़ गया है, जो लगभग 40 प्रतिशत ऊपर है, जबकि पिछले 6 महीनों में टाटा समूह का यह स्टॉक 60 प्रतिशत के करीब बढ़ा है।  इसी तरह, साल-दर-साल, इस मल्टीबैगर टाटा समूह के स्टॉक ने अपने शेयरधारकों को 50 प्रतिशत से अधिक रिटर्न दिया है, जबकि पिछले एक साल में, यह कोविड के बाद लगभग 235 प्रतिशत तक बढ़ा है।