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बैंक में नया खाता खोलने या कर्ज लेने में कई तरह की कागजी प्रक्रिया करनी होती है। सिर्फ बैंकों में ही नहीं बल्कि किसी भी तरह के वित्तीय लेनदेन जैसे जीवन बीमा पॉलिसी खरीदने, म्यूचुअल फंड, शेयर आदि में निवेश के लिए भी हस्ताक्षरित दस्तावेज जमा करने होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में वक्त भी लगता है और डाटा चोरी के साथ फर्जीवाड़ा होने का भी खतरा होता है। लेकिन, अब यह बीते दिनों की बात होने वाली है। भारतीय विशिष्ट पहचान संख्या प्राधिकर (आधार) के पूर्व अध्यक्ष नंदन नीलेकणि की अगुवाई में एक डिजिटल प्लेफॉर्म ‘सहमति’ तैयार किया गया है। इसमें उपभोक्ताओं को अपने जरूरी दस्तावेज आसानी से साझा करने की सहूलियत दी गई है। वहीं बैंक, बीमा कंपनियां, फंड हाउस बिना कागजी प्रक्रिया पूरी किए लोन, निवेश संबंधी काम पूरा करने में सक्षम होंगे। डिजिटल प्लफॉर्म ‘सहमति’ से वित्तीय लेनदेन सरल और सुरक्षित होगा पर पेश है रिपोर्ट।
आरबीआई की पहल पर बना यह मंच
सितंबर 2016 में, रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक अकाउंट एग्रीगेटर की स्थापना का प्रस्ताव दिया था। इसका उद्देश्य एक डिजटल प्लेटफॉर्म बनाना था जो एक ही मंच से सभी वित्तीय जरूरत को पूरा कर सके। अकाउंट एग्रीगेटर से आम उपभोक्ताओं और कारोबारियों को सुरक्षित लेन-देन और तीसरे पक्ष के साथ अपने वित्तीय डेटा को साझा करने में मदद देना मूल लक्ष्य था। इसके बाद इस पर काम शुरू हुआ। देश के चार प्रमुख वित्तीय नियामकों के बीच इसको लेकर सहयोग हुआ जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), बीमा नियामक और विकास एजेंसी (इरदा) और भविष्य निधि नियामक और विकास एजेंसी (पीएफआरडीए) शामिल है।‘सहमति’नाम से वह अब सभी के सामने आया है।
इस तरह आप उठा सकते हैं फायदा
‘सहमति’ एक अकाउंट एग्रीगेटर (खाता समूहक) है। इसके जरिए अगर आप कोई नया वित्तीय लेनदेन या निवेश करने की तैयारी कर हैं तो केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें)और हस्ताक्षरित दस्तावेज की जरूरत आपको बैंक या म्यूचुअल फंड हाउस को नहीं देनी होगी। आप ‘सहमति’को जिस बैंक से डाटा साझा करने अनुमति देंगे वह चंद मिनटों में उसके साथ आपके डाटा को साझा कर देगा। उदाहरण के लिए अगर आप बैंक से लोन लेना चाहते हैं और बैंक आपके खाता का विवरण मांगता तो आपको इसकी जानकारी ‘सहमति’ को देनी होगी कि वह आपके खात संबंधी जानकारी बैंक को मुहैया करा देगा। इसी तरह म्यूचुअल फंड में निवेश, बीमा खरीदने में आपकी जानकारी उस फंड हाउस या बीमा कंपनी को मुहैया हो जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में आपके के पास अधिकार होगा कि आप अपना डाटा किसके साथ साझा करना चाहता हैं। .
आपके डाटा से छेड़छाड़ अब संभव नहीं
‘सहमति’के जरिए डाटा साझा करने का सबसे बड़ा फायदा मिलेगा कि उपभोक्ताओं के डाटा के साथ छेड़छाड़ करना संभव नहीं होगा। ऐसा इसलिए कि किसी भी व्यक्ति का डाटा वित्तीय जानकारी प्रदाता से वित्तीय जानकारी उपयोगकर्ता को भेजा जाएगा वह ए्क्रिरप्ट (कूट भाषा) में होगा। इससे खाता एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म को भी डाटा तक पहुंच नहीं होगी। वहीं डाटा बिना उपभोक्ता के मंजूरी के साझा करना मुमकिन नहीं होगा। उपभोक्ता के पास डाटा साझा करने की सहमति, समीक्षा, ऑडिट और कितना डाटा साझा करने का अधिकार होगा। वह डाटा साझा को रद्द भी कर सकता है। .
वित्तीय फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक
वित्तीय लेनदेन में फर्जी दस्तावेज के इस्तेमाल से धोखाधड़ी की जाती है। कई ऐसे मामले हाल के दिनों में आए हैं जिसमें बैंक से फर्जी दस्तावेज पर बड़े कर्ज ले लिए गए हैं। ‘सहमति’ के जरिए डाटा साझा करने की शुरुआत से फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल पूरी तरह से रोकने में मदद मिलेगी क्योंकि इसमें उसी व्यक्ति या संस्थान का डाटा साझा करना संभव होगा जो वास्तविक में होगा। इससे न सिर्फ उपभोक्ताओं को बल्कि वित्तीय संस्थानों को बड़ा फायदा मिलेगा। .
आसानी से वित्तीय योजना बना पाएंगे
अगर आप अपनी वित्तयी योजना बनाना चाहते हैं तो किसी फाइनेंशियल प्लानर से मदद लेते हैं। मौजूदा समय में किसी वित्तीय योजनाकार आपसे अभी तक के सभी निवेश की जानकारी मांगता है। आप सभी दस्तावेज मेल से या वाट्सअप के जरिए भेजते हैं। इसमें काफी वक्त लगता है। लेकिन ‘सहमति’ के जरिए आप अपने सभी डाटा को आसानी से उस वित्तीय योजनाकर के साथ चंद मिनटों में साझा कर पाएंगे। इसमें वक्त भी कम लगेगा और सही योजना बनाने में मदद भी मिलेगी।
वित्तीय बाजार में अनुशासन आएगा
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि ‘सहमति’ के आने से वित्तीय बाजार में अनुशासन आएगा। इसके आने से वित्तीय कंपनियों को सही डाटा आसानी से मिलेगी, जिससे वह अपने काम को तेजी से पूरा कर पाएंगे। इससे लोन, कर्ज, वित्तीय समावेशन, निवेश आदि काम में तेजी आएगी। बैंक या वित्तीय संस्थान एक समय-सीमा के अंदर अपने काम को पूरा कर पाएंगे।
स्वास्थ्य -दूरसंचार क्षेत्र में भी विस्तार
‘सहमति’ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अकाउंट एग्रीगेटर (एए) मॉडल को पहले वित्तीय क्षेत्र में लागू किया जाएगा। इसके बाद इसे दूरसंचार, स्वास्थ्य सेवा और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है। गौरतलब है कि इस डिजिटल मॉडल के लिए काम आरबीआई, सेबी, इरदा और पीएफआरडी के अनुमति मिलने के बाद चार साल पहले शुरू किया गया था।