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  • फेसबुक-ट्विटर को भारत के कायदे-कानूनों की हद में होगा रहना, लेना होगा लाइसेंस

    फेसबुक-ट्विटर को भारत के कायदे-कानूनों की हद में होगा रहना, लेना होगा लाइसेंस

    नई दिल्ली। फेसबुक-ट्विटर और व्हाट्स एप जैसे  सोशल मीडिया कंपनियों को भारत में अपनी सेवा देने के लिए लाइसेंस लेना होगा। सोशल मीडिया कंपनियों ने अमेरिका की ट्रंप सरकार के माध्यम से भारत पर ऐसा नहीं करने का दबाव बनाया गया था। हालांकि, भारत ने अमेरिका से साफ कह दिया कि वह देशहित से जुड़े इस मामले में कोई समझौता नहीं करेगा।

    भारत में फेसबुक-ट्विटर और व्हाट्स एप जैसी सोशल मीडिया को भारत के कायदे-कानूनों की हद में रह करही काम करने का मौका मिलेगा। फेसबुक-ट्विटर और व्हाट्स एप के लिए भारत सबसे बड़ी मार्केट है और इसका साइज आने वाले दिनों में लगातार बढ़ने की संभावना है। फेसबुक और ट्विटर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के माध्यम से भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की थी लेकिन भारत ने साफ कह दिया कि देश हित से जुड़े मामलों में कोई समझौता नहीं करेगा।

    भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि इससे जुड़ा नया कानून अगले महीने आ सकता है, जिसमें आईटी कंपनियों के लिए जरूरी बदलाव किए जाने का प्रस्ताव है। ध्यान रहे, अभी भारत-अमेरिका में जिन अहम मुद्दों पर टकराव हुआ था। उनमें सोशल मीडिया कंपनियों को देश के भीतर लाइसेंस लेने की शर्त को हटाने के अलावा चीनी कंपनी हुवावे पर प्रतिबंध भी शामिल था। दरअसल सोशल मीडिया कंपनियों की ओर से पूरा सहयोग नहीं देने के बाद केंद्र सरकार ने नए कानून बनाने की पहल की है जिसमें कहा कि इन सभी कंपनियों को भारत से जुड़े यूजर्स का डेटा भारत में ही रखना होगा।

    सरकार का तर्क है कि ये कंपनियां देश में कानूनी प्रक्रिया से इसलिए बच जाती हैं क्योंकि इनका लाइसेंस देश में नहीं लिया गया है। लेकिन इसके लिए अब तक ये कंपनियां तैयार नहीं हो रही हैं। उनका तर्क है कि अगर भारत की मांग को मान लिया जाए, तो दूसरे देश भी ऐसी मांग करेंगे। सभी देशों में ऐसा करना संभव नहीं होगा। बता दें कि ज्यादातर सोशल मीडिया कंपनियां अमेरिका की हैं और उन्हें वहीं से लाइसेंस प्राप्त हुआ है. इनमें फेसबुक, ट्विटर जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।

    केंद्र सरकार और वॉट्सऐप के बीच भी पिछले कई महीनों से तनातनी चल रही है। सरकार वॉट्सऐप पर चलने वाले नफरत भरे और फेक न्यूज पर अंकुश लगाने के लिए आईटी ऐक्ट में बदलाव लाना चाहती है, जिससे कि उसे वॉट्सऐप पर चलने वाले मेसेज को ट्रैक करने का अधिकार हो। लेकिन फेसबुक की स्वामित्व वाली वॉट्सऐप कंपनी इसके लिए तैयार नहीं है। कंपनी ने सरकार से कहा है कि चूंकि वह यूजर्स की निजता से समझौता नहीं कर सकती है। इस कारण वह इसके लिए तैयार नहीं है।

  • ITR फाइल करने की बढ़ी तारीख, जानें आप पर क्या पड़ेगा असर

    ITR फाइल करने की बढ़ी तारीख, जानें आप पर क्या पड़ेगा असर

    फाइनेंशियल ईयर 2019-20 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न की तारीख बढ़ गई है। इसे 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त तक कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को प्रेस रिलीज जारी कर इसकी सूचना दी। वित्त मंत्रालय ने इसे ट्वीट भी किया है। रिटर्न फाइलिंग की तारीख आगे बढ़ाने से टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिली है क्योंकि रिटर्न फाइल करत समय उन्हें काफी दिक्कतें आ रहीं थी। आईटीआर फॉर्म में बदलाव और फॉर्म 16 के देरी से मिलने के कारण भी टैक्सपेयर्स परेशान हो रहे हैं।

    कई इनकम टैक्स एक्सपर्ट भी सरकार से तारीख बढ़ाने की मांग कर रहे थे। ताकि, टैक्सपेयर्स आईटीआर फाइल करने का समय मिल जाए। एक्सपर्ट के मुताबिक ये तारीख सभी तरह के टैक्सपेयर्स के लिए बढ़ाई गई है। जिनका अकाउंट चार्टेड अकाउंटेंड ने ऑडिट नहीं करना है उनके लिए भी यह समयसीमा बढ़ाई गई है।

    सभी कंपनी, पार्टनरशिप बिजनेस, को-ऑपरेटिव सोसाइटी जिसका टर्नओवर 1 करोड़ रुपये से अधिक है उन्हें अपना अकाउंट सीए से ऑडिट कराना पड़ेगा। ऐसे संस्थानों को वित्त वर्ष 2018-19 के लिए आईटीआर 30 सितंबर तक फाइल करना होगा। बाकी सभी को 31 अगस्त तक आईटीआर फाइल करना है।

    इस साल सीबीडीटी को कर्मचारियों के लिए टीडीएस रिटर्न 31 मई से 30 जून तक के लिए बढ़ा दिया था। इस कारण कर्मचारियों का फॉर्म 16 की तारीख भी बढ़ाई गई। इस कारण कर्मचारियों के पास आईटीआर फाइन करने के लिए कम समय बचा। अब समयसीमा बढ़ने से टैक्सपेयर्स को एक महीने का समय मिल गया है।

  • आईफोन मिलेंगे पेटीएम मॉल पर, एप्पल ने पेटीएम मॉल से मिलाया हाथ

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    ई-कॉमर्स कंपनी पेटीएम मॉल ने अपने प्लेटफॉर्म पर नए आईफोन और आईपैड उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अमेरिकी कंपनी एप्पल के साथ साझेदारी की है।
    कंपनी ने गुरूवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि इस साझेदारी के तहत उसके प्लेटफॅार्म पर सूचीबद्ध सभी उत्पादों में एक अधिकृत टैग होगा, जो केवल ब्रांड अधिकृत विक्रेताओं को दिया जाता है और यह वास्तविक उत्पाद का एक चिह्न है।

    पेटीएम मॉल देश में मोबाइल फोन के प्रमुख विक्रेताओं में से एक के रूप में उभर रहा है। इसके मद्देनजर प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदने के इच्छुक ग्राहकों को बेहतर विकल्प प्रदान करने के उद्देश्य से यह साझेदारी की गयी है। केवल अधिकृत विक्रेताओं को ही प्लेटफ़ॉर्म पर एप्पल उत्पादों को बेचने की अनुमति दी जाएगी। पेटीएम मॉल पर अपने उत्पादों को सूचीबद्ध करने से पहले किसी अन्य स्वतंत्र विक्रेता को एप्पल से अधिकृत विक्रेता का प्रमाण पत्र देना होगा।

    उसने कहा कि ग्राहकों को उचित मूल्य पर केवल वास्तविक उत्पाद मिल सके इसको सुनिश्चित करने के लिए ऐसा किया गया है। इसके अलावा एप्पल अपनी वेबसाइट पर भारत में अपने उत्पादों के लिए अधिकृत पुनर्विक्रेता के रूप में पेटीएम मॉल का उल्लेख करेगा।

  • Share Market: मामूली बढ़त के साथ खुला शुरुआती कारोबार में मार्केट

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    विदेशी निवेशकों की जारी निकासी तथा नरम वैश्विक संकेतों के बीच शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजारों ने कारोबार की सतर्क शुरुआत की।  बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 3.11 अंक यानी 0.01 प्रतिशत की मामूली तेजी के साथ 37,834.09 अंक पर रहा। निफ्टी 11,252.15 अंक पर स्थिर रहा। पिछले कारोबारी दिवस में सेंसेक्स 16.67 अंक यानी 0.04 प्रतिशत गिरकर 37,830.98 अंक पर रहा। निफ्टी भी 19.15 अंक यानी 0.17 प्रतिशत गिरकर 11,252.15 अंक पर रहा।

    शुरुआती कारोबार में महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा मोटर्स, भारतीय स्टेट बैंक, येस बैंक, टाटा स्टील, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स और आईटीसी के शेयर दो प्रतिशत तक की तेजी में रहे। इनके अलावा भारती एयरटेल, ओएनजीसी, टेक महिंद्रा, इंफोसिस, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक के शेयर 1.84 प्रतिशत की गिरावट में रहे। कारोबारियों ने कहा कि कंपनियों के तिमाही परिणाम, विदेशी निवेशकों की बिकवाली तथा वैश्विक बाजारों के नरम संकेतों ने निवेशकों की धारणा प्रभावित की। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, बृहस्पतिवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक 126.65 करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल रहे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 398.53 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की।
    इस बीच कारोबार के दौरान चीन के शंघाई कंपोजिट, हांग कांग के हैंग सेंग, जापान के निक्की और दक्षिण कोरिया के कोस्पी समेत सभी मुख्य एशियाई बाजार लाल निशान में चल रहे थे। बृहस्पतिवार को वाल स्ट्रीट भी गिरावट में बंद हुआ था।

  • आम्रपाली, ICICI रियल एस्टेट फंड ने मिलकर की फंड की हेराफेरी

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    आम्रपाली मामले में इस सप्ताह ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने नामी वैश्विक व घरेलू कॉरपोरेट कंपनियों समेत मामले में शामिल लोगों के खिलाफ तीखी टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रमुख कंपनियों में आईसीआईसीआई रियल एस्टेट फंड ने अम्रपाली समूह की मिलीभगत से फंड की हेराफेरी की।

    रियल्टी फर्म की फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट का जिक्र करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल रियल एस्टेट ने वित्त वर्ष 2011-12 के दौरान करीब 74 करोड़ रुपये की राशि आम्रपाली सैफायर डेवलपर्स प्राइवेंट लिमिटेड द्वारा जारी ऋणपत्र खाते में दिया।

    ऋणपत्र पर सालाना 17 फीसदी की ब्याज दर तय की गई थी। फॉरेंसिक ऑडिट में 16 दिसंबर 2010 की तिथि को किए गए निवेशक सह अंशधारक करार में ग्रॉस नॉन-कंप्लायंस पाया गया। निदेशकों की नियुक्ति नहीं की गई थी, निवेशक के संयुक्त हस्ताक्षर से बैंक खाते का संचालन नहीं किया गया था।

    निवेश सह अंशधारक करार और 3,420 रुपये प्रति वर्ग फुट की ब्रिकी योग्य एरिया से कम के फ्लैट की बिक्री के अनुसार, फंड का इस्तेमाल नहीं किया गया था।आदेश में कहा गया कि करार के कई अन्य उपबंधों का न तो अनुपालन किया गया था और न ही उनका उपयोग निवेशक द्वारा सुनिश्चित किया गया था।

  • TATA MOTORS की 30 स्टील कंपनियों में लगा ताला, दिखने लगी मंदी की मार

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    नई दिल्ली। टाटा मोटर्स के जमशेदपुर स्थित प्लांट में उत्पादन ठप कर दिया गया है। सरकार कुछ भी दावे कर ले, लेकिन देश भर में अब मंदी की मार दिखने लगी है। हालत यह हैं कि देश की 30 स्टील कंपनियों पर ताला लटक गया है। वहीं दूसरी तरफ  जमशेदपुर के आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित 12 स्टील कंपनियों पर गुरुवार को ताला लग गया।

    वहीं 30 अन्य कंपनियों पर भी आने वाले दिनों में ताला लग सकता है। यह सभी कंपनियां टाटा मोटर्स को गाड़ियों के कई पार्ट्स सप्लाई करती हैं।

    मांग न होने के चलते टाटा मोटर्स ने पिछले महीने से लगातार चौथी बार अपने उत्पादन को ठप कर दिया है। इस बार कंपनी ने गुरुवार से लेकर के शनिवार तक उत्पादन को बंद किया है। वहीं कंपनी में रविवार को छुट्टी रहती है।

    कंपनी ने अपने कांट्रैक्ट पर रखे गए एक हजार कर्मचारियों को महीने में 12 दिन काम पर आने से मना कर दिया है। वो 12 अगस्त को काम पर आएंगे, जबकि नियमित कर्मचारी पांच अगस्त से नौकरी पर फिर से आएंगे. पिछले दो महीने से कंपनी में केवल 15 दिन काम हो रहा है।

    झारखंड सरकार ने बिजली की कीमतों में 38 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है इस वजह से कंपनियों को अब बिजली पर ज्यादा पैसा चुकाना पड़ रहा है. इससे उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है। ।

    बता दें कि जमशेदपुर, आदित्यपुर में करीब एक हजार स्टील कंपनियां हैं। मंदी और बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते 30 हजार लोगों की नौकरी पर संकट आ गया है। अगर स्थिति में आने वाले दिनों में सुधार नहीं हुआ तो इन कर्मचारियों के परिवार पर भी असर पड़ने की संभावना है।

  • एनबीएफसी चार्ज नहीं लगा सकेंगी अब समय से पहले कर्ज की अदायगी पर , RBI ने लगाई रोक

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    रिजर्व बैंक ने व्यक्तिगत ऋण लेनदारों से समय से पहले कर्ज चुकाने पर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले दंड पर रोक लगा दी है। केंद्रीय बैंक ने अधिसूचना जारी कर कहा, ”एनबीएफसी कारोबारी उद्देश्य को छोड़कर अन्य कार्यों के लिये व्यक्तिगत तौर पर लिये गए फ्लोटिंग दर ऋण को समय से पहले चुकाने पर शुल्क या दंड नहीं लेंगे।”

    हालांकि, आरबीआई ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नए नियम कब से प्रभावी होंगे। केंद्रीय बैंक ने कहा कि इस परिवर्तन को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित नियमों को अद्यतन किया गया है। उल्लेखनीय है कि मई, 2014 में आरबीआई ने वाणिज्यिक बैंकों को बंधक ऋण पर ऐसे शुल्क लगाने से प्रतिबंधित कर दिया था। हालांकि, वे निजी ऋण जैसे बिना गारंटी वाले ऋणों पर शुल्क लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

    वहीं दूसरी ओर, रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को कहा कि उसने चालू खाता खोलने के मामले में नियमों के उल्लंघन को लेकर सार्वजनिक क्षेत्र के सात बैंकों पर सामूहिक रूप से 11 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इलाहबाद बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के ऊपर 2-2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक तथा यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया पर 1.5-1.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा है, जबकि ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

    आरबीआई ने एक विज्ञप्ति में कहा है, ”रिजर्व बैंक ने 31 जुलाई 2019 के आदेश के तहत सात बैंकों पर मौद्रिक जुर्माना लगाया है। मौद्रिक जुर्माना चालू खातों को खोलने और उसके परिचालन के लिये आचार संहिता के कुछ प्रावधानों के अनुपालन नहीं करने को लेकर लगाया गया है। एक अलग विज्ञप्ति में आरबीआई ने कहा कि उसने कॉर्पोरेशन बैंक पर साइबर सुरक्षा रूपरेखा से संबंधित नियमों का अनुपालन नहीं करने को लेकर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।

  • वित्तीय लेन-देन को करें डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘सहमति’ से सरल और सुरक्षित

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    बैंक में नया खाता खोलने या कर्ज लेने में कई तरह की कागजी प्रक्रिया करनी होती है। सिर्फ बैंकों में ही नहीं बल्कि किसी भी तरह के वित्तीय लेनदेन जैसे जीवन बीमा पॉलिसी खरीदने, म्यूचुअल फंड, शेयर आदि में निवेश के लिए भी हस्ताक्षरित दस्तावेज जमा करने होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में वक्त भी लगता है और डाटा चोरी के साथ फर्जीवाड़ा होने का भी खतरा होता है। लेकिन, अब यह बीते दिनों की बात होने वाली है। भारतीय विशिष्ट पहचान संख्या प्राधिकर (आधार) के पूर्व अध्यक्ष नंदन नीलेकणि की अगुवाई में एक डिजिटल प्लेफॉर्म ‘सहमति’ तैयार किया गया है। इसमें उपभोक्ताओं को अपने जरूरी दस्तावेज आसानी से साझा करने की सहूलियत दी गई है। वहीं बैंक, बीमा कंपनियां, फंड हाउस बिना कागजी प्रक्रिया पूरी किए लोन, निवेश संबंधी काम पूरा करने में सक्षम होंगे। डिजिटल प्लफॉर्म ‘सहमति’ से वित्तीय लेनदेन सरल और सुरक्षित होगा पर पेश है रिपोर्ट।

    आरबीआई की पहल पर बना यह मंच 

    सितंबर 2016 में, रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक अकाउंट एग्रीगेटर की स्थापना का प्रस्ताव दिया था। इसका उद्देश्य एक डिजटल प्लेटफॉर्म बनाना था जो एक ही मंच से सभी वित्तीय जरूरत को पूरा कर सके। अकाउंट एग्रीगेटर से आम उपभोक्ताओं और कारोबारियों को सुरक्षित लेन-देन और तीसरे पक्ष के साथ अपने वित्तीय डेटा को साझा करने में मदद देना मूल लक्ष्य था। इसके बाद इस पर काम शुरू हुआ। देश के चार प्रमुख वित्तीय नियामकों के बीच इसको लेकर सहयोग हुआ जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), बीमा नियामक और विकास एजेंसी (इरदा) और भविष्य निधि नियामक और विकास एजेंसी (पीएफआरडीए) शामिल है।‘सहमति’नाम से वह अब सभी के सामने आया है।

    इस तरह आप उठा सकते हैं फायदा

    ‘सहमति’ एक अकाउंट एग्रीगेटर (खाता समूहक) है। इसके जरिए अगर आप कोई नया वित्तीय लेनदेन या निवेश करने की तैयारी कर हैं तो केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें)और हस्ताक्षरित दस्तावेज की जरूरत आपको बैंक या म्यूचुअल फंड हाउस को नहीं देनी होगी। आप ‘सहमति’को जिस बैंक से डाटा साझा करने अनुमति देंगे वह चंद मिनटों में उसके साथ आपके डाटा को साझा कर देगा। उदाहरण के लिए अगर आप बैंक से लोन लेना चाहते हैं और बैंक आपके खाता का विवरण मांगता तो आपको इसकी जानकारी ‘सहमति’ को देनी होगी कि वह आपके खात संबंधी जानकारी बैंक को मुहैया करा देगा। इसी तरह म्यूचुअल फंड में निवेश, बीमा खरीदने में आपकी जानकारी उस फंड हाउस या बीमा कंपनी को मुहैया हो जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में आपके के पास अधिकार होगा कि आप अपना डाटा किसके साथ साझा करना चाहता हैं। .

    आपके डाटा से छेड़छाड़ अब संभव नहीं 

    ‘सहमति’के जरिए डाटा साझा करने का सबसे बड़ा फायदा मिलेगा कि उपभोक्ताओं के डाटा के साथ छेड़छाड़ करना संभव नहीं होगा। ऐसा इसलिए कि किसी भी व्यक्ति का डाटा वित्तीय जानकारी प्रदाता से वित्तीय जानकारी उपयोगकर्ता को भेजा जाएगा वह ए्क्रिरप्ट (कूट भाषा) में होगा। इससे खाता एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म को भी डाटा तक पहुंच नहीं होगी। वहीं डाटा बिना उपभोक्ता के मंजूरी के साझा करना मुमकिन नहीं होगा। उपभोक्ता के पास डाटा साझा करने की सहमति, समीक्षा, ऑडिट और कितना डाटा साझा करने का अधिकार होगा। वह डाटा साझा को रद्द भी कर सकता है। .

    वित्तीय फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक 

    वित्तीय लेनदेन में फर्जी दस्तावेज के इस्तेमाल से धोखाधड़ी की जाती है। कई ऐसे मामले हाल के दिनों में आए हैं जिसमें बैंक से फर्जी दस्तावेज पर बड़े कर्ज ले लिए गए हैं। ‘सहमति’ के जरिए डाटा साझा करने की शुरुआत से फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल पूरी तरह से रोकने में मदद मिलेगी क्योंकि इसमें उसी व्यक्ति या संस्थान का डाटा साझा करना संभव होगा जो वास्तविक में होगा। इससे न सिर्फ उपभोक्ताओं को बल्कि वित्तीय संस्थानों को बड़ा फायदा मिलेगा। .

    आसानी से वित्तीय योजना बना पाएंगे

    अगर आप अपनी वित्तयी योजना बनाना चाहते हैं तो किसी फाइनेंशियल प्लानर से मदद लेते हैं। मौजूदा समय में किसी वित्तीय योजनाकार आपसे अभी तक के सभी निवेश की जानकारी मांगता है। आप सभी दस्तावेज मेल से या वाट्सअप के जरिए भेजते हैं। इसमें काफी वक्त लगता है। लेकिन ‘सहमति’ के जरिए आप अपने सभी डाटा को आसानी से उस वित्तीय योजनाकर के साथ चंद मिनटों में साझा कर पाएंगे। इसमें वक्त भी कम लगेगा और सही योजना बनाने में मदद भी मिलेगी।

    वित्तीय बाजार में अनुशासन आएगा

    वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि ‘सहमति’ के आने से वित्तीय बाजार में अनुशासन आएगा। इसके आने से वित्तीय कंपनियों को सही डाटा आसानी से मिलेगी, जिससे वह अपने काम को तेजी से पूरा कर पाएंगे। इससे लोन, कर्ज, वित्तीय समावेशन, निवेश आदि काम में तेजी आएगी। बैंक या वित्तीय संस्थान एक समय-सीमा के अंदर अपने काम को पूरा कर पाएंगे।

    स्वास्थ्य -दूरसंचार क्षेत्र में भी विस्तार 

    ‘सहमति’ की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अकाउंट एग्रीगेटर (एए) मॉडल को पहले वित्तीय क्षेत्र में लागू किया जाएगा। इसके बाद इसे दूरसंचार, स्वास्थ्य सेवा और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लागू किया जा सकता है। गौरतलब है कि इस डिजिटल मॉडल के लिए काम आरबीआई, सेबी, इरदा और पीएफआरडी के अनुमति मिलने के बाद चार साल पहले शुरू किया गया था।

     

  • ऐसे करें शिकायत अगर हुए हैं म्यूचुअल फंड निवेश में धोखाधड़ी के शिकार

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    म्यूचुअल फंड में निवेश को लेकर लोगों का रुझान बढ़ा है। ऐसे में निवेशक को गलत जानकारी देकर या झूठा वादा करके निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के मामले सामने आते रहते हैं। आपके साथ अगर ऐसा कुछ हुआ है तो बाजार नियामक सेबी से आप इसकी सीधे शिकायत आप एक क्लिक पर ऑनलाइन कर सकते हैं। सेबी ने तेजी से ऐसे मामले सुलझाए हैं।

    बाजार नियामक है सेबी –

    भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और वित्तीय सलाहकारों का नियमन करता है। इसको लेकर किसी तरह की शिकायत है तो उसका निपटारा सेबी करता है। बैंकों से जुड़ी शिकायत और नियमन रिजर्व बैंक, बीमा क्षेत्र में इरडा और पेंशन क्षेत्र में पेंशन नियामक प्राधिकरण (पीएफआरडीए) है।

    इस तरह करें शिकायत – 

    सिर्फ 30 दिन में निपटान होगा –

    शिकायत निपटान के मामले में रिजर्व बैंक और इरडा समेत अन्य नियामकों से कहीं आगे है। शिकायत दर्ज कराने के 30 दिन के भीतर आपको उससे जुड़ी जानकारी दे दी जाएगी। अगर किसी वजह से आपको 30 दिन के भीतर मामले की जानकारी नहीं दी जाती है तो उसी शिकायत पोर्टल पर उसकी जानकारी दोबारा देकर शिकायत की स्थिति जान सकते हैं।

    दोबारा अपील का भी विकल्प –

    आपकी शिकायत बाजार नियामक द्वारा रद्द कर दी गई है तो 15 दिन के भीतर आप दोबारा उस पर विचार करने की अपील कर सकते हैं। वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों का  कहना है कि सेबी की यह पहल बैंक, बीमा और अन्य नियामकों की तुलना में उपभोक्ताओं के लिए ज्यादा सुविधाजनक है। बैंक और अन्य क्षेत्रों में लोकपाल से शिकायत की लंबी प्रक्रिया है जो उपभोक्ताओं के लिए बहुत थकाऊ होती है।

    पुराने मामले भी करा सकते हैं दर्ज –

    सेबी ने शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए हाल के वर्षों में कई तरह की पहल है। उपभोक्ताओं की सुविधा को देखते हुए सेबी ने अपने शिकायत पोर्टल पर तीन साल पुराने मामले को भी दर्ज कराने की सुविधा दे रखी है। साथ ही आप ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की स्थिति में नहीं हैं तो दस्तावेज (ऑफलाइन) के आधार पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

    फोन से शिकायत की भी सुविधा –

    आप ऑनलाइन या दस्तावेज के आधार पर शिकायत दर्ज कराने की स्थिति में नहीं हैं तो सेबी को टोल फ्री नंबर 1800227575 और 1800667575 पर शिकायत कर सकते हैं। इस पर सुबह नौ बजे से शाम छह बजे तक कॉल करके शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सरकारी छुट्टी के दिन इन नंबरों पर बात नहीं हो सकती है। पिछले वित्त वर्ष में सेबी को इन नंबरों पर 4.84 लाख कॉल आए। पिछले वित्त वर्ष में सेबी को 42202 शिकायते मिलीं केवल 3094 शिकायतों का निपटारा बाकी रह गया था।

     

  • 50 लाख रुपए का लगाया रिजर्व बैंक ने एसबीआई पर जुर्माना, 50-50 लाख की पेनल्टी PNB और BoB पर भी

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    भारतीय रिजर्व बैंक ने ऋण खाते से संबंधित धोखाधड़ी की सूचना देने में देरी के कारण पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स सहित विभिन्न बैंकों पर जुर्माना लगाया है। बैंकों ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। देश के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने शेयर बाजार को बताया कि आरबीआई ने उसपर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। बैंक ने कहा कि एक ऋणखाते से संबंधित धोखाधड़ी की जानकारी देने में देरी के कारण यह जुर्माना लगा है।

    रिजर्व बैंक ने पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा पर भी 50-50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। पीएनबी ने अलग से शेयर बाजार को भेजी सूचना में कहा कि किंगफिशर एयरलाइंस के एक ऋण खाते में धोखाधड़ी से संबंधित जानकारी देने में देरी के कारण यह जुर्माना लगाया गया है। इनके अलावा ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) पर डेढ़ करोड़ रुपये का जुर्माना लगा है। ओबीसी ने कहा कि उसके ऊपर भी किंगफिशर एयरलाइंस के ऋणखाते को लेकर जुर्माना लगा है।

    ओबीसी ने कहा कि आरबीआई का आदेश मिलने के 14 दिन के भीतर जुर्माने का भुगतान करने को कहा गया है। यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक ने कहा कि उन पर केंद्रीय बैंक ने एक-एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। बैंक ऑफ बड़ौदा और फेडरल बैंक ने भी 50-50 लाख रुपये का जुर्माना लगाये जाने की सूचना दी है। इसके अलावा कॉरपोरेशन बैंक और यूको बैंक ने भी आरबीआई द्वारा जुर्माना लगाये जाने की सूचना दी है।

    इससे पहले रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को कहा कि उसने चालू खाता खोलने के मामले में नियमों के उल्लंघन को लेकर सार्वजनिक क्षेत्र के सात बैंकों पर सामूहिक रूप से 11 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। इलाहबाद बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र के ऊपर 2-2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

    वहीं बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक तथा यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया पर 1.5-1.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा है, जबकि ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

    आरबीआई ने एक विज्ञप्ति में कहा है, ”रिजर्व बैंक ने 31 जुलाई 2019 के आदेश के तहत सात बैंकों पर मौद्रिक जुर्माना लगाया है। मौद्रिक जुर्माना चालू खातों को खोलने और उसके परिचालन के लिये आचार संहिता के कुछ प्रावधानों के अनुपालन नहीं करने को लेकर लगाया गया है।

    एक अलग विज्ञप्ति में आरबीआई ने कहा कि उसने कॉर्पोरेशन बैंक पर साइबर सुरक्षा रूपरेखा से संबंधित नियमों का अनुपालन नहीं करने को लेकर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।