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  • जुगाड़ से बनाया ऑटो और पूरे परिवार को लेकर निकल गया 1400 किलोमीटर के सफर पर बिहारी मजदूर 

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    सासाराम : 1400 किलोमीटर की दूरी तय कर पंजाब के मुक्तसर से एक बिहारी मजदूर का पूरा परिवार बिहारी जुगाड़ टेक्नोलॉजी की गाड़ी से बिहार अपने गांव पहुंचा। मोटरसाइकिल से ठेलानुमा गाड़ी को जोड़कर जुगाड़ टेक्नोलॉजी से बनाया आवागमन का साधन। लॉकडाउन और करोना महामारी के कारण मजबूर होकर पंजाब से बिहार आया मजदूर का परिवार।

    मजदूर का परिवार चार दिनों का सफर तय कर बिहार के रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम पहुंचा। कभी दिन भर तो कभी रात रात भर गाड़ी को चला कर बाल बच्चों के साथ पूरे परिवार के साथ अपने घर पहुंचा गया। खाने-पीने का राशन और सब्जी साथ लेकर जगह-जगह रुककर खाना बनाकर पहुंचा मजदूर परिवार बिहार। रास्ते में कई जगहों पर पुलिस की जल्दी पड़ी परेशानियां।

    रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम का है। देश के विभिन्न राज्यों में लगाया गया लॉकडाउन से बेबस मजदूरों का पलायन देखने को मिल रहा है। पंजाब के मुक्तसर से एक मजदूर परिवार जुगाड़ गाड़ी से ही चलकर बिहार के मुंगेर जा रहा है। जो सासाराम होकर गुजरा, पंजाब के मुक्तसर जिला से एक मजदूर का परिवार अपने बच्चों को लेकर जुगाड़ गाड़ी से 4 दिन में 1400 किलोमीटर से अधिक का सफर तय कर सासाराम पहुंचा।

    अब यहां से 250 किलोमीटर और इसे मुंगेर जाना है। आप समझ सकते हैं किस प्रकार अपने परिवार को लेकर यह लोग अपने गांव की तरफ निकले हैं। बातचीत करने पर लोगों ने बताया कि पिछले कई हफ्तों से काम धाम बंद है। इससे पहले कि सारा जमा पूंजी खत्म हो जाए और सड़क पर दिन गुजारना परे।

    उससे पहले ही वह लोग अपने जुगाड़ गाड़ी से अपने गांव की ओर निकल पड़े हैं। 4 दिन और कभी-कभी तो रात रात भर गाड़ियां चलाई। तब जाकर बिहार में तक पहुंचे हैं। अब ढाई सौ किलोमीटर मुंगेर भी की ओर जाना है। कई जगह लॉकडाउन के कारण पुलिस के लोग परेशान भी किए। लेकिन विवशता ऐसी कि उसे गांव की ओर खींच लाया। मोटरसाइकिल तथा ठेला गाड़ी को जोड़कर जुगाड़ गाड़ी बनाकर यह लोग पंजाब से बिहार आ गए हैं।

  • विदेशी सोशल मीडिया कंपनियों के लिए तय नियमों की डेडलाइन खत्म, क्या बंद हो जायेंगी सोशल मीडिया कंपनिया ?

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    केंद्र सरकार ने कंपनियों को दिशा-निर्देश देते हुए कहा था कि ऐसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म देश में थ्री-टायर सेल्फ-रेगुलेट्री फ्रेम वर्क के तहत तीन अफसर (resident grievance officer, chief compliance officer और nodal contact person) तैनात करें, जिनकी हर मामले में जवाबदेही हो, साथ में किसी शिकायत का तुरंत निपटान किया जा सके।

    इसके अलावा आपत्तिजनक कंटेंट की निगरानी और उस सामग्री को हटाने जैसे नियम भी लागू करने को कहे गए थे। केंद्र सरकार द्वारा 25 फरवरी 2021 को देश के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आइटी मंत्रालय की तरफ से डिजिटल कंटेंट को रेग्यूलेट करने के लिए तीन महीने के अंदर ग्रीवांस आफिसर, कंप्लायंस आफिसर, नोडल आफिसर की तैनाती की जिम्मेदारी दी गई थी और इन सभी का कार्यक्षेत्र भारत में होना चाहिए था। केंद्र की तरफ से दिए गए आदेश के तहत कंपनियों को कंप्लायंस अधिकारी की नियुक्ति करनी होगी और उनका नाम व कॉन्टैक्ट एड्रेस भारत का होना चाहिए, 15 दिन के अंदर शिकायत का निपटारा करने की व्यवस्था, आपत्तिजनक पोस्ट की निगरानी जैसी सामान्य व्यवस्था जैसी चीजें नए नियमों में शामिल हैं।

    नए नियमों के अनुसार, इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म को सरकार के निर्देश या कानूनी आदेश के बाद 36 घंटे के भीतर आपत्तिजनक सामग्री को हटाना होगा। नए नियमों में कहा गया है कि सोशल मीडिया मध्यस्थ समेत सभी मध्यस्थों को यूजर्स या पीड़ितों से शिकायतें प्राप्त करने या उन्हें सुलझाने के लिए एक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना चाहिए। केवल घरेलू माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म कू (Koo) द्वारा नए आइटी नियम 2021 की अनुपालन आवश्यकताओं को पूरा किया गया है। कू ने कहा कि उसने एक भारतीय निवासी चीफ कंप्लायंस ऑफिसर, नोडल अधिकारी और ग्रीवांस अधिकारी द्वारा समर्थित एक शिकायत निवारण तंत्र को भी लागू किया है।

  • रसेल : जैविक रूप से सुरक्षित माहौल में रहने से मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ा

    अबुधाबी, तीन जून वेस्टइंडीज के आक्रामक आलराउंडर आंद्रे रसेल ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के दौरान लंबे समय तक जैविक रूप से सुरक्षित माहौल में रहने से उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ा है।

    रसेल पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) के बाकी बचे हिस्से में खेलने के लिए अभी यूएई में हैं। जैविक रूप से सुरक्षित माहौल में कोविड-19 संक्रमण के मामले आने के बाद मार्च में पीएसएल को निलंबित कर दिया गया था।

    रसेल ने अबुधाबी से जियो न्यूज से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि इसका (जैविक रूप से सुरक्षित माहौल) मुझ पर असर पड़ रहा है।’’

    इंडियन प्रीमियर लीग में कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से खेलने वाले रसेल ने कहा, ‘‘मैं किसी और खिलाड़ी या कोच या पृथकवास से गुजरने वाले किसी अन्य के बारे में नहीं कह सकता।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन निश्चित तौर पर इसका मेरे मानसिक स्वास्थ्य पर असर पडा है, एक जैविक रूप से सुरक्षित माहौल से दूसरे में जाना, कमरे में बंद रहना, आप बाहर नहीं जा सकते, आप किसी अन्य जगह नहीं जा सकते, आप लोगों से नहीं मिल सकते, यह पूरी तरह से अलग है। ’’

    रसेल पीएसएल में क्वेटा ग्लैडिएटर्स की ओर से खेलते हैं।

  • बिसाहूलाल सिंह ने जिले को दी सर्व सुविधायुक्त एंबुलेंस कहा – महामारी से बचाव के लिये कृतसंकल्पित

    अनूपपुर / मप्र सरकार महामारी से बचाव के लिये कृत संकल्पित है। जनता की रक्षा और सेवा के लिये हम हर आवश्यक कदम उठा रहे हैं। म प्र शासन के खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री बिसाहूलाल सिंह ने भोपाल स्थित निवास से अनूपपुर हेतु एंबुलेंस रवाना करते हुए उपरोक्त विचार व्यक्त किये।

    3 जून ,गुरुवार को मंत्री श्री सिंह ने जिले के मरीजों के लिये 7.50 लाख की कीमत वाले सर्व सुविधायुक्त एक एंबुलेंस को रवाना किया। विशेष उल्लेखनीय यह है कि यह राशि उनकी निजी बचत से एकत्रित की गयी। जनता के लिये समर्पण की ऐसी मिसाल विरले ही देखने को मिला है। पूर्व में भी बिसाहूलाल सिंह द्वारा अनूपपुर की जनता के बेहतर स्वास्थ्य हेतु कई कदम उठाए गये हैं। जिला चिकित्सालय का निर्माण तेजी से जारी है। महामारी के बीच पत्रकारों, कार्यकर्ताओं ,आम जनता के सुझावों एवं मांग पर हमेशा सहयोगात्मक रुख अपनाते हुए संवेदनशीलता का परिचय दिया है।

  • बिहार : सवा लाख शिक्षकों को 15 अगस्त तक मिल सकता है नियुक्ति पत्र

    पटना उच्च न्यायालय द्वारा गुरुवार को राज्य के प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक तक के विद्यालयों में छठे चरण के नियोजन में आवेदन नहीं करने वाले दिव्यांगों को मौका देने के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने तत्काल आगे की तैयारी आरंभ कर दी है। नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने में दो से तीन महीने लगेंगे। शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने तीन दिनों के भीतर आवेदन के लिए विज्ञापन जारी करने के संकेत दिये। आवेदन जमा करने के लिए दिव्यांगों को 15 दिन का समय दिया जाएगा। आवेदन से लेकर नियुक्ति पत्र बांटे जाने तक में कुल 60 से 70 दिन लगेंगे। नये आवेदनों के शामिल होने से मेधा सूची भी नए सिरे से बनेगी। फिर उसपर आपत्तियां ली जाएंगी। इसके बाद अंतिम मेधा सूची बनेगी। उसके बाद काउंसिलिंग, फिर नियुक्ति पत्र बंटेगा। उम्मीद है, 15 अगस्त से पहले सवा लाख शिक्षकों को नियुक्ति पत्र बंट जाए। 

    उच्च न्यायालय के फैसले का शिक्षा मंत्री ने स्वागत किया। ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में कहा कि सरकार ने पिछले बजट सत्र में घोषणा की थी कि शिक्षक नियुक्ति मामले में सरकार विशेष प्रयास कर न्यायालय से नियुक्ति की इजाजत मांगेगी। कोरोनाकाल और कोर्टबंदी में भी वर्चुअल माध्यम से महाधिवक्ता द्वारा लगातार मुख्य न्यायाधीश को कोर्ट में विशेष उल्लेख किया जाता रहा और आज इस मामले में हमें राहत मिली। राज्य में शिक्षक के लाखों पद रिक्त थे। शिक्षक योग्यता परीक्षा पास अभ्यर्थी सड़क पर घूम रहे थे। सरकार इसे बहुत ही कष्टदायक स्थिति मानती है। इसलिए हम न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हैं। 

    बिहार के शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा, ‘वैसे तो सरकार एक सप्ताह में नियुक्ति पूरी कर लेने की तैयारी में थी, लेकिन कोर्ट के आदेश से अब हम जल्द दिव्यांगों को अवसर देने के लिए विज्ञापन निकालेंगे। दिव्यांगों को आवेदन के लिए 15 दिन का समय देना है। आवेदन के बाद नया मेरिट लिस्ट बनेगा। नियोजन की पूरी कार्रवाई पूरी होने में दो से तीन महीने लग जायेंगे।’

    बदल जाएगी कई बार के प्रयास से तैयार मेधा सूची 

    छठे चरण के तहत राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में करीब 94 हजार और माध्यमिक-उच्च माध्यमिक स्कूलों में 30020 पदों पर बहाली की प्रक्रिया लम्बे समय से चल रही है। दोनों नियुक्तियों की अधिसूचनाएं 1 व 5 जुलाई 2019 को जारी हुई है। इस दौरान आधा दर्जन बार नियुक्ति के शिड्यूल जारी हुए, लेकिन विभिन्न कारणों से इसे अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका। दिव्यांगों की अपील पर हाईकोर्ट के आदेश पर अगस्त 2020 में नियोजन प्रक्रिया स्थगित की गई। इससे पूर्व बहाली के लिए सभी नियोजन इकाइयों द्वारा मेधा सूची बनायी जा चुकी थी। अब दिव्यांगों के नए आवेदन आने के बाद मेधा सूची पूरी तरह बदलनी पड़ेगी। शिक्षा विभाग प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्तर पर सभी जिलों में दिव्यांगों के लिए आवंटित पद, उनके विरुद्ध कार्यरत दिव्यांग और उनके हिस्से के रिक्त पदों का ब्योरा जुटा चुका है। 

    यह बिहार के दिव्यांगों की जीत : संघ

    नेशनल ब्लांइड एसोसिएशन ने पटना उच्च न्यायालय के फैसले को बिहार के दिव्यांगों और खासतौर से नेत्रहीनों की जीत बताया है। राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ की बिहार शाखा के महासचिव डॉ. विनय कुमार ने हाईकोर्ट व राज्य सरकार का आभार जताया है। कहा कि संघ द्वारा दायर दो याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश ने ऐतिहासिक फैसला दिया। एक याचिका शिक्षक नियोजन से संबंधित थी। जिस पर कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि दिव्यांगों का फॉर्म फिर से भरवाया जाए। आरक्षण का पालन सही तरीके से करते हुए सामान्य अभ्यर्थियों के साथ उनकी नियुक्ति की जाए। दूसरी याचिका बैकलॉग से संबंधित थी जिसमें कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि 1995 से 2017 तक जितनी नियुक्तियां हुईं उनकी गणना कर दिव्यांगों के लिए कितनी सीट बनती है, इसकी सूची राष्ट्रीय दृष्टिहीन संघ को 4 माह में उपलब्ध करायी जाय।

    मुख्य बिंदु

    3.52 लाख हैं राज्य में नियोजित शिक्षक

    1.24 लाख की नियुक्ति होनी है छठे चरण में  

    4.76 लाख नियोजित शिक्षक हो जाएंगे बहाली पूर्ण होने पर

  • आई एस एम पटना के विद्यार्थी ऑनलाइन विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर प्रतियोगिता, और लोगों को जागरूक करने में भी अव्वल

    रिपोर्ट – शान्तनु कुमार सिंह

    जिला – पटना

    जब हम तंबाकू से बाहर निकलते हैं, तो हम खुद को और अपने परिवार को जीवन का सबसे खूबसूरत उपहार देते हैं।  “तंबाकू धूम्रपान करने के लिए जीवन बहुत कीमती है और इसलिए हमें इससे खुद को बचाना चाहिए।”

    इंटरनेशनल स्कूल ऑफ मैनेजमेंट पटना हमेशा तंबाकू से बचने और जीवन बचाने को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। इसलिए आईएसएम पटना का स्पोर्ट्स क्लब ने कई श्रेणियों के लिए “वर्ल्ड नो टोबैको डे” विषय पर ऑनलाइन प्रतियोगिता आयोजित किया जिसमे संस्थान के सैकड़ो छात्र और छात्राओ ने हिस्सा लिया और कई तरह के कविता और पोस्टर के माध्यम से समाज को जागरूक करने का सफल प्रयास किया। गौरतलब है कि दिनांक 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के दिन संस्थान के सहायक प्रोफेसर श्री नयन रंजन सिन्हा के नेतृत्व में सभी बच्चों ने अपने अपने परिवार में सबको जागरूक किया और उन्हें शपथ भी दिलाई की न वो तंबाकू का इस्तेमाल करेंगे और न ही किसी को करके देंगे, इसके बाबत सबको सरकारी शपथ का सर्टिफिकेट भी मिला जो की नारकोटिक्स कंट्रोल  ब्यूरो मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स से मान्यता प्राप्त है। इस प्रतियोगिता के जज के रूप में संस्थान के सहायक प्राध्यापक सौम्या शुक्ला और डा. तुषार आर्या ने अपना योगदान दिया। विद्यार्थियों के तरफ से मुख्य भूमिका में आदित्य किशोर ने वॉलंटियर के रूप में योगदान दिया और प्रतियोगिता संचालन में सबको जागरूक कर ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को भाग लेने के लिए प्रेरित किया।

    विजेताओं के नाम 

    कविता प्रतियोगिता का परिणाम में
    रैंक 1 अमृता कल्याणी बीबीए 2ए और प्रेरणा कुमारी बीबीए द्वितीय सेमेस्टर, रैंक 2 दीपा राज बीबीए 2ए और रजनी कुमारी बीबीए 4ए रैंक 3 संध्या सुमन बीबीए 4ए और सिमरन कुमारी पीजीडीएम3 के चुने गए।

    पोस्टर प्रतियोगिता का परिणाम में रैंक 1 तान्या वत्सला BBA2A और शालिनी सिंह BBA 4B, रैंक 2 अनंत कुमारी बीबीए 2ए और अभिषेक कुमार रजक बीसीए 2ए तथा आयुषी शर्मा बीसीए 2ए रहें। रैंक 3 सुमित माथुर BBA2 A और चंचल कुमारी PGDM3 हुए। तकनीकी टूल का उपयोग करते हुए पोस्टर बनाए में रैंक 1 मोहित रंजन पीजीडीएम 3, रैंक 2 कौशल कुमार PGDM3 के विजेता बने।
    सभी विजेताओं को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं।

  • Death of humanity : श्राद्ध का भोज खाने आ गए 150 लोग, मासूम बेटियों मां की लाश उठाने कोई नहीं आया

    यह वाकया अररिया जिले की बिशनपुर पंचायत का है। मधुलता निवासी वीरेन मेहता के परिवार में अचानक कोरोना ने दस्तक दी। वीरेन पेशे से चिकित्सक थे। गांव वालों का इलाज करते-करते वो कब वायरस की चपेट में आ गए उन्हें पता भी नहीं लग सका। उनके जरिए संक्रमण पत्नी को भी हो गया। पहले वीरेन ने दम तोड़ा और उसके चार दिन बाद पत्नी भी दुनिया को अलविदा कह गईं। पीछे रह गई गमजदा मासूम बेटियां। हालांकि, अकेली लड़की के अपनी मां को दफनाने की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। उसकी छोटी बहन के बिलखने का वीडियो भी खूब देखा गया। अलबत्ता न तो गांव के लोग और न ही सिस्टम से जुड़ा कोई व्यक्ति उनका दुख बांटने अभी तक उनके पास नहीं पहुंचा।

    अकेली लड़की ने पीपीई किट पहनकर अपनी मां के शरीर को दफन किया। यहां दम तोड़ चुके सिस्टम के बीच इंसानियत का जनाजा भी निकलते देखा गया। कोरोना संक्रमित होने के बाद एक महिला की मौत हुई तो अंतिम संस्कार के लिए गांव का कोई व्यक्ति उनके दर पर नहीं पहुंचा। लेकिन जब श्राद्ध हुआ तो 150 से ज्यादा लोग उसमें शरीक होने आ गए। लोगों को न तो इस बात का डर था कि जिस घर में पकवान का लुत्फ उठा रहे हैं वहां दो लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है।

    हां, जब मौतें हुईं तो लोग दूरी बनाए रहे। हालांकि, अकेली लड़की के अपनी मां को दफनाने की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। उसकी छोटी बहन के बिलखने का वीडियो भी खूब देखा गया। अलबत्ता न तो गांव के लोग और न ही सिस्टम से जुड़ा कोई व्यक्ति उनका दुख बांटने अभी तक उनके पास नहीं पहुंचा। आलम यह था कि जिन दो बेटियों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया वो श्राद्ध के खर्चे का कर्ज चुकाने के लिए यहां वहां भटक रही है, क्योंकि देनदार अपना पैसा वापस करने को कह रहे हैं।

    पंचायत के मुखिया सरोज कुमार मेहता के मुताबिक- वो खुद भी संक्रमित हैं। पिछले 15 दिनों में दो ग्रामीण चिकित्सकों समेत चार लोगों की करोना से मौत हुई है। उधर, गांव वालों का कहना था कि डॉक्टर दंपति की मौत के बाद तकरीबन 150 लोग दोनों बेटियों को ढाढस बंधाने पहुंचे थे। उनका कहना है कि गांव में 800-900 लोग भोज खाने आते हैं। डॉक्टर के परिवार केस प्रति उनकी पूरी सहानुभूति है। बड़ी बेटी सोनी से वो हालचाल लेते रहते हैं।

    अभी वो ही अपनी छोटी बहन चांदनी और भाई नीतीश का ख्याल रख रही है। गांव के मुखिया सरोज मेहता बताते हैं कि 9 हजार वोटर वाले गांव में 10 से 12 फीसदी लोगों की ही जांच हो सकी है। टीके की बात करें तो 200 लोग ही ऐसे खुशनसीब हैं जो वैक्सीन ले चुके हैं। उधर, सरकारी रिकार्ड की बात करें तो अररिया में 12 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हैं जबकि 34 अपनी जान गंवा चुके हैं। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। मौत का आंकड़ा 100 के पार है। सिस्टम की बदहाली का आलम ये है कि कोरोना संक्रमितों को इलाज ही नहीं मिल रहा है।

  • बस्तर की नैना सिंह धाकड़ को सीएम बघेल ने दी बधाई, विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को नैना सिंह ने किया फतह

    रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बस्तर की पर्वतारोही नैना सिंह धाकड़ द्वारा विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह करने पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। नैना छत्तीसगढ़ की पहली माउंट एवरेस्ट में चढ़ने वाली महिला पर्वतारोही बन चुकी है।
    मुख्यमंत्री बघेल ने नैना के उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए कहा है  की नैना ने अपने दृढ़ संकल्प, इच्छाशक्ति तथा अदम्य साहस से विश्व की सबसे ऊंची पर्वत चोटी पर विजय प्राप्त कर अपनी इस उपलब्धि से छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है।

  • बिहार: 16 जून से ‘प्रधान’ कहे जाएंगे मुखिया जी ,बदल जाएगा सिस्टम

    पटना. आगामी 15 जून को त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था का वर्तमान कार्यकाल समाप्त हो रहा है. कोरोना की वजह से चुनाव नहीं करवाए जा सके इसलिए अब बिहार सरकार ने पंचायती राज अधिनियम 2006 में संशोधन कर राज्य में नई वैकल्पिक व्यवस्था कर दी है. राज्यपाल से सहमति मिलने के बाद सरकार ने अध्यादेश जारी कर दिया है. अब इसके तहत पंचायत सिस्टम में पदों के भी नए नाम हो गए हैं.

    बिहार सरकार के अध्यादेश के अनुसार ग्राम पंचायत- ग्राम परामर्शी समिति, पंचायत समिति- पंचायत परामर्शी समिति और जिला परिषद- जिला परामर्शी समिति बन जाएगी. मुखिया कहे जाएंगे- प्रधान, परामर्शी समिति, ग्राम पंचायत. प्रमुख कहे जाएंगे- प्रधान, परामर्श समिति, पंचायत समिति. जिला परिषद अध्यक्ष कहे जाएंगे- प्रधान परामर्शी समिति, जिला परिषद.

    ऐसे बदल जाएगी पूरी व्यवस्था

    बिहार पंचायत राज संशोधन अध्यादेश-2021 के जरिये अब वार्ड, पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद का काम परामर्शी समितियों के जिम्मे होगा. 16 जून से पंचायत के मुखिया परामर्शी समिति के अध्यक्ष होंगे. विघटित पंचायत के सभी निर्वाचित वार्ड सदस्य, पंचायत सचिव, प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी ग्राम पंचायत के प्रधान सदस्य रहेंगे. मुखिया का पदनाम प्रधान परामर्शी समिति ग्राम पंचायत होगा. प्रधान परामर्शी समिति वो सभी काम करेगी, जो एक निर्वाचित मुखिया करते हैं.

    इसी तरह तरह प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी, अंचल निरीक्षक और प्रखंड समन्वयक कार्यकारी समिति में सरकार के प्रतिनिधि के रूप में रहेंगे. समिति की बैठक में मौजूद रहेंगे. इन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा. योजनाओं में अनियमितता को रोकने और विभाग के संज्ञान में लाने की जिम्मेदारी इनकी होगी.

    बिहार सरकार के अध्यादेश के अनुसार ग्राम पंचायत- ग्राम परामर्शी समिति, पंचायत समिति- पंचायत परामर्शी समिति और जिला परिषद- जिला परामर्शी समिति बन जाएगी. मुखिया कहे जाएंगे- प्रधान, परामर्शी समिति, ग्राम पंचायत. प्रमुख कहे जाएंगे- प्रधान, परामर्श समिति, पंचायत समिति. जिला परिषद अध्यक्ष कहे जाएंगे- प्रधान परामर्शी समिति, जिला परिषद.

    राज्य सरकार के अध्यादेश से नया सिस्टम

    बता दें कि बिहार पंचायत राज संशोधन अध्यादेश-2021, बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 की धारा में संशोधन कर नई उप धारा 5 जोड़ी गई है. इसके तहत 5 वर्षों की अवधि खत्म होने से पहले अगर किसी कारण से किसी ग्राम पंचायत का आम निर्वाचन कराना संभव नहीं हो तो उस अवधि के पूरा होने पर वह ग्राम पंचायत भंग हो जाएगी. इस अधिनियम के तहत ग्राम पंचायत में निहित सभी शक्ति प्रयोग या संपादन ऐसी परामर्शी समिति करेगी जिसे राज्य सरकार के अधिसूचना से गठित किया गया हो.

    किसे कितना पावर, यहां जानें

    बता दें कि बिहार में पंचायत समिति की कुल संख्या 11 हजार 491 है. 16 जून के बाद पंचायत समिति के कार्यों के संचालन के लिए समिति के अध्यक्ष (प्रमुख) विघटित पंचायत समिति के प्रमुख होंगे. प्रमुख और पंचायत समिति के सभी सदस्य, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी और BDO समिति के सदस्य होंगे. परामर्शी समिति के अध्यक्ष का पदनाम प्रमुख की जगह प्रधान परामर्शी समिति, पंचायत समिति होगा. ये सभी कार्य निर्वाचित प्रमुख की तरह करेंगे. सरकारी सेवक सरकार के प्रतिनिधि के रूप में रहेंगे.

    परामर्शी समिति को ही वास्तविक शक्ति

    प्रदेश में कुल 1 हजार 161 जिला परिषद हैं. विघटित जिला परिषद के अध्यक्ष ही परामर्शी समिति के अध्यक्ष होंगे. पंचायती राज अधिनियम के तहत सदस्य रहे व्यक्ति, DDC यानि कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद और जिला परिषद् के सभी सदस्य, जिला पंचायती राज पदाधिकारी परामर्शी समिति के सदस्य होंगे. अध्यक्ष का पदनाम प्रधान परामर्शी समिति, जिला परिषद होगा. ये सभी कार्य निर्वाचित प्रमुख की तरह करेंगे. सरकारी सेवक सरकार के प्रतिनिधि के रूप में रहेंगे.

    गौरतलब है कि बिहार में ग्राम पंचायत की कुल संख्या 8 हजार 442 है. हालांकि ग्राम पंचायत का विलय नगर परिषद में होने के कारण वर्तमान में ग्राम पंचायतों की संख्या 8 हजार 386 रह गई है.वार्ड सदस्यों की बात करें तो राज्य में वार्ड सदस्यों की संख्या 1 लाख 14 हजार 667 है.

  • बिजली की समस्या को सुधार करें अन्यथा चास की जनता आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे-भूतपूर्व महापौर भोलू पासवान

    बोकारो से शेखर की रिपोर्ट

    चास बिजली को लेकर लोगों में काफी नराजगी देखने को मिल रहा है कोरोना संक्रमण को देखते हुए घरों में ऑनलाइन क्लासेस हो रही है अब जब समर वेकेशन की छुट्टी हुई है बेसे में बिजली चले जाने के चलते ना तो बच्चे घर में बैठकर टीवी देख सकते हैं और ना मोबाइल पर कुछ काम कर सकते हैं। ऐसे में बिजली को लेकर लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर हैं आपको बताते जाए कि पूर्व में झारखंड युवा शक्ति के अध्यक्ष भोलू पासवान ने बिजली नहीं तो बिजली बिल भी नहीं मिलेगा घर घर जाकर उपभोक्ता से बिल नहीं जमा करने की अपील की गई थी। उन्होंने बिजली को लेकर धरना प्रदर्शन प्रदर्शन भी किया था गर्मी से लोगों का जीना मुहाल हो गया है

    बिजली विभाग के अधिकारी से मिलने पर सिर्फ सुधारने का आश्वासन देते हैं लेकिन सुधार नहीं कर रहे हैं अब जाकर फिर एक बार  झारखंड युवा शक्ति के अध्यक्ष व भूतपूर्व महापौर भोलू पासवान बिजली न रहने पर काफी चिंतित है। उन्होंने कहा कि चास में बिजली बार-बार कटने से लोगों में काफी दिखते हो रही है इसमें  भूतपूर्व महापौर ने बिजलीअधिकारी से  बातें भी की मगर कोई  सकारात्मकता जवाब  नहीं  मिला उन्होंने कहा कि बिजली विभाग के द्वारा हर बार कुर्मीडी के पावर स्टेशन बनने का हवाला हर वक्त देते आ रहे हैं। चास के भूतपूर्व महापौर भोलू पासवान ने कहा कि में  बोकारो के उपायुक्त से  मांग करता हूं कि अविलंब बिजली को लेकर एक बैठक की जाए और उसे सुधारने की प्रक्रिया करें ऐसे में गर्मी काफी है और यहा के लोगों में काफी गुस्सा भी देखे जा रहे हैं चास में बिजली जल्द से जल्द नहीं सुधारी जाएगी तो चांस के जनता सड़क पर आकर धरना प्रदर्शन करने में बाधित होगी।