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  • प्लॉट बेचने का झांसा देकर छह शातिरों ने चिकित्सक से की 2.26 करोड़ की धोखाधड़ी

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    देहरादून। क्लेमेनटाउन क्षेत्र में प्लॉट बेचने के झांसा देकर छह शातिरों ने चिकित्सक से 2.26 करोड़ की धोखाधड़ी कर दी। क्लेमेनटाउन थाना पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। बहादराबाद हरिद्वार निवासी बृजेश कुमार चौहान का बहादराबाद में क्लीनिक है। जनवरी 2018 में उनके परिचित तरनजीत सिंह ने कहा कि क्लेमेनटाउन में उसका 250 गज का एक प्लाट है, जिस पर उसने लोन ले रखा है। उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, इसलिए वह प्लॉट अच्छे रेट पर बेच देगा।

    तरनजीत सिंह के जानने वाले संजय दीक्षित, शरद चौहान, गोपाल तोमर ने बृजेश को भरोसा दिलाया कि प्लॉट पूरी तरह से साफ सुथरा है। बृजेश ने तरनजीत सिंह से प्लॉट का सौदा 49.90 लाख रुपये में तय किया। 25 जनवरी 2018 को प्लॉट की रजिस्ट्री तरनजीत ने बृजेश के नाम कर दी। प्लॉट पर तरनजीत सिंह ने 36.50 लाख रुपये का लोन था, ऐसे में बृजेश ने प्लॉट खरीदने के लिए 21.75 लाख रुपये का लोन लिया और 14.75 लाख रुपये अपने पास से देकर लोन पूरा कर दिया।

    बाकी बचे 13.39 लाख रुपये तरनजीत सिंह को दे दिए। विक्रेताओं ने 28 जनवरी को बृजेश को देहरादून बुलाया और कहा कि जो प्लॉट आपने खरीदा है उसके बगल में ही शरद चौहान का प्लॉट है वह भी अच्छे रेट में मिल जाएगा। बातों में आकर बृजेश ने उस प्लॉट का एग्रीमेंट भी बना दिया और बयाने के तौर पर शरद चौहान को 26 लाख रुपये दे दिए।

    नवंबर 2018 में तरनजीत सिंह ने बृजेश से कहा कि भारूवाला में जो प्लॉट आपने खरीदा है उसके बगल में ही 500 गज का प्लॉट है। प्लॉट बैंक में बंधक है। एक बार फिर बृजेश ने प्लाट का सौदा डेढ़ करोड़ रुपये में कर दिया। 19 नवंबर को प्लॉट की रजिस्ट्री तरनजीत सिंह ने बृजेश के नाम कर दी। बृजेश ने जब तरनजीत व शरद चौहान से प्लॉटों का दाखिल खारिज करवाने की बात कही। इस पर वह बहलाते रहे। इसके बाद तरनजीत सिंह ने बृजेश से कहा कि दो प्लॉट को तीन करोड़ में बिकवा देते हैं।

    बृजेश ने 23 दिसंबर को विजय गुप्ता निवासी देहरादून के साथ बयाना कर दिया और 45 लाख रुपये ले लिए। इस बीच बृजेश को  पता लगा कि दोनों प्लॉट पर केस कोर्ट में चल रहा है। तरनजीत सिंह ने जिस विद्या सिंह नाम की महिला से जमीन को खरीदना बताया वह भी फर्जी है।

    इसके अलावा शरद चौहान ने बृजेश ने जिस जमीन की एग्रीमेंट किया था, उस जमीन की पहले ही रजिस्ट्री विजय गुप्ता के नाम कर दी है। एसओ धर्मेंद्र रौतेला ने बताया कि आरोपित तरनजीत सिंह निवासी सहदेवपुर ज्वालापुर हरिद्वार, संजय दीक्षित निवासी किशनपुर सहस्रधारा रोड राजपुर, शरद चौहान निवासी क्लेमेनटाउन, गोपाल तोमर निवासी सुभाष नगर क्लेमेनटाउन व फर्जी विद्या सिंह उर्फ सावित्री निवासी जाखन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

  • मलबे से मिला एक और शव, 7 अब भी लापता, रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन जारी

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    गोपेश्वर। उत्तराखंड के चमोली जिले में चीन-तिब्बत सीमा पर सुमना-दो में आए हिमस्खलन में अब भी कुछ लोग लापता है। उनकी तलाश के लिए सेना रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई है। लापता लोगों की संख्या आठ बताई जा रही है। खोज अभियान में डॉग स्क्वायड की भी मदद ली जा रही है। हादसे के बाद से अब तक 11 व्यक्तियों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि सात घायलों को सेना अस्पताल जोशीमठ में उपचार चल रहा है। वहीं, घायलों में से गंभीर एक को देहरादून के सेना अस्पताल भेजा गया है।

    जोशीमठ के सुमना-दो बीआरओ कैंप में शुक्रवार दोपहर बाद हिमस्खलन हुआ। इस दौरान बीआरओ के दो कैंप पूरी तरह तबाह हो गए। इसके बाद से लापता लोगों की तलाश के लिए रविवार को फिर से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। सेना के अधिकारी और जवान इसके लिए खोजी कुत्तों की भी मदद ले रहे हैं।

    रेस्क्यू का काम तड़के ही शुरू हो गया। सेना ने बीआरओ से अपने श्रमिकों और कर्मचारियों की सूची मांगी है, जिसके अनुसार लापता व्यक्तियों की खोज की जा रही है। सुमना‌ तक सड़क मार्ग खोलने का काम भी जारी है। मौके पर मदद के लिए सेना के हेलीकॉप्टर तैयार हैं।

  • भाजयुमो जिला अध्यक्ष के निर्देशानुसार मंडल स्तर पर भुपेश सरकार के खिलाफ वर्चुअल आंदोलन किया गया ।

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    लव कौशिक की रिपोर्ट

    बलौदा‌ जांजगीर चाम्पा

    धरने का कुछ नारा इस प्रकार हैं

    इलाज व्यवस्था दुरुस्त करो । अस्पताल म बिस्तर,इलाज बर दवाई के दरकार हे ।
    मरे बर छोड़ दिस ये भूपेश सरकार हे ।
    हर छानी आँसू, हर दुवारी पुकार हे,
    मरे बर छोड़ दिस, ये भूपेश सरकार हे ।

    ना दवाई हे ना इलाज हे ,
    इही भूपेश के राज़ हे
    हर आँसू हर दर्द का हिसाब रखा जाएगा ।
    भूपेश तेरी नाकामी को याद रखा जाएगा , दवाई की काला बाजारी
    सत्ता और लालच का मेल है

    अपने प्राण खुद बचाओ
    ना बाबा है ना बघेल है।
    छत्तीसगढ़ रोवत हे ,
    भूपेश हर सोवत हे ।

    कोरोना हो गया पन्द्रह हजार पार
    अब तो जागो निकम्मी भूपेश सरकार ।

    इन्हीं नारों‌ को तख्ती में लिखकर एवं भाजपा का झंडा लगाकर भुपेश सरकार के खिलाफ वर्जुवल आंदोलन किया गया साथ ही इस लॉक डाउन, सोशल डिस्टेंसिंग एवं धारा 144 का पालन करते हुए उक्त कार्यक्रम को सफल किया गया ।

  • कोरोना संबंधी अव्यवस्था को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने किया प्रदेश स्तरीय धरना-प्रदर्शन

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    लव कौशिक की रिपोर्ट

    जांजगीर में भाजपा नेता प्रशांत सिंह ठाकुर ने भूपेश बघेल के प्रतीकात्मक पुतले को बल्ले के साथ क्रिकेट पिच पर खड़ा कर किया प्रदर्शन

    जांजगीर । भाजपा नेता प्रशांत सिंह ठाकुर ने इस प्रदर्शन के माध्यम से छत्तीसगढ़ में व्याप्त स्वास्थ्य संबंधी असुविधा के लिए वर्तमान कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया .

    ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमित मरीज और मौत के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। इस विषय पर प्रतिदिन हर जिले से चौकानेवाले और आक्रोश बढ़ाने वाले समाचार सामने आ रहे हैं।

    निधन के पश्चात सम्मानजनक विदाई के बजाय मृत देह को कचरे की गाड़ियों में ले जाया जाना हृदय को तार तार करती है और शासन की समझ और संवेदना पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है।

    गत 1 वर्षों से संक्रमण का चक्र चल रहा है उसके बाद भी कोरोना से लड़ने के लिए व्यवस्था शून्य साबित हो रही है ।आज लगभग प्रदेश के आधे से ज्यादा जिलों में आरटी -पीसीआर टेस्ट ही नहीं हो रहा। सरकार के द्वारा कोविड-19 संबंधी बनाए गए जिला स्तरीय अस्पतालों में सही ढंग से ऑक्सीजन प्लांट भी नहीं लग सका है।

    ऐसा नहीं है की सरकार के पास अर्थाभाव हो। इस 1 वर्ष की अवधि में पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितता की शिकायत मिलती रही। जांजगीर-चांपा जिले में ही बड़ी संख्या में यात्री प्रतीक्षालय बनाए गए, जो आज किसी काम के नहीं है । इन यात्री प्रतिक्षालय में लोग बैठकर शराब पी रहे हैं । यात्री प्रतीक्षालय बनाए जाने के लिए डीएमएफ की राशि का दुरुपयोग किया गया। 1-1 यात्री प्रतीक्षालय के लिए 6 लाख तक खर्च किए गए ।इन्हीं सब राशि से अस्पतालों की दशा सुधारी जा सकती थी ।

    यह दुर्भाग्यपूर्ण है जब प्रदेश में कोरोना के आंकड़े बढ़ रहे थे तब प्रदेश के मुखिया असम में चुनाव प्रचार कर रहे थे। दूसरी ओर संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने पर एक तरफ पूरे प्रदेश में प्रशासन द्वारा होली परनसार्वजनिक कार्यक्रमों को प्रतिबंधित कर दिया गया ,वहीं दूसरी तरफ रायपुर में रोड सेफ्टी क्रिकेट का आयोजन कराया गया। इस क्रिकेट प्रतियोगिता में प्रतिदिन कोरोना संबंधी प्रोटोकाल का खुलेआम उल्लंघन किया गया। हजारों की भीड़ को बिना समुचित सुरक्षा व्यवस्था के इकट्ठा किया गया।
    आज पूरे प्रदेश में कोरोना ने जो महामारी का रूप ले लिया है ,उसका कारण कहीं ना कहीं सरकार द्वारा क्रिकेट के आयोजन के संबंध में हुई बड़ी चूक ही है ।

    समय रहते सरकार को महाराष्ट्र सीमा को सील किया जाना था, वह भी नहीं किया ।असम में 6 अप्रैल को अंतिम चरण के चुनाव के पश्चात सरकार थोड़ी बहुत हरकत में आई परंतु वह भी अपर्याप्त और जिम्मेदारी से भागने वाला ही साबित हुआ। शासन ने पूरी जवाबदारी जिला स्तर पर प्रशासन के ऊपर छोड़ दिया ।
    लॉकडाउन से लेकर सभी प्रकार की व्यवस्था से यह सरकार भागती नजर आई। वर्तमान संकट काल में भी सरकार के दो ही काम रह गए हैं ,पहला अपनी खुद की पीठ थपथपाना ,डींगें हांकना और दूसरा काम सारा दोष दूसरों पर मढ देना।

    सरकार की इस नाकामी का शिकार प्रदेश की भोली भाली जनता हो रही है। भारतीय जनता पार्टी भूपेश सरकार की इस अकर्मण्य और अव्यवस्थित नीति की निंदा करती है।

    सरकार के द्वारा स्वास्थ्य सम्बन्धी व्यवस्था खड़ा कर पाने में असफलता के विरोध में आज भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रदेश भर के सभी पोलिंग बूथ पर सरकार विरोधी प्रदर्शन किया गया।

    जांजगीर जिला मुख्यालय में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रतिनिधि (प्रशिक्षण) प्रशांत सिंह ठाकुर ने अपने निवास में भूपेश बघेल के प्रतीकात्मक पुतले को बल्ले के साथ क्रिकेट पिच पर खड़ा कर प्रदर्शन किया ।इस अनोखे प्रदर्शन में उन्होंने दिखाया की प्रदेश की भूपेश सरकार क्रिकेट खेलने में व्यस्त है । उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की नासमझ ‘पोपटलाल’ की सरकार ने गोकुल धाम रूपी छत्तीसगढ़ की पूरी व्यवस्था को उल्टा- पुल्टा कर दिया है।

  • 20 साल से किराये पर रहने वाले लोग बनेंगे मालिक, चुकानी होगी निर्धारित कीमत

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    चंडीगढ़। हरियाणा में स्थानीय निकायों की दुकानों और मकानों पर 20 साल से कब्जा जमाए बैठे लोगों को अब सरकार मालिकाना हक देगी। इसके लिए उन्हें निर्धारित शुल्क चुकाना होगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। नगर निकायों द्वारा दुकानों व मकानों की बिक्री के लिए नीति इसलिए बनाई गई है क्योंकि दुकानों व मकानों के रूप में बड़ी संख्या में ऐसी परिसंपत्तियां 20 वर्षों से भी अधिक समय से विभिन्न संस्थाओं या व्यक्तियों के कब्जे में हैं ।

    नगर निकायों को ऐसी परिसंपत्तियों के प्रबंधन में कठिनाई आ रही है, क्योंकि अनेक मामलों में ऐसी परिसंपत्तियों का स्वामित्व/कब्जा अनेक बार परिवर्तित हो चुका है। निकायों के पास संबंधित प्रमाणित दस्तावेजों का भी अभाव है। यहां तक कि नगर निकाय बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियों से किराया वसूलने में भी असमर्थ हैं।

    नई नीति के अनुसार कब्जाधारियों को यह संपत्तियां बेची जाएंगी। इससे छोटे दुकानदारों और अन्य पट्टेदारों को संपत्तियों के स्वामित्व का अधिकार मिल जाएगा। नीति के अनुसार जहां नगर निकाय या उसके पूर्ववर्ती द्वारा भूमि पर बनाए गई मकान या दुकान और भूमि को केवल एक ही व्यक्ति को हस्तांतरित किया जाना है (वहां बनाई गई मंजिलों की संख्या के बावजूद), वहां आधार दर प्रभार्य कीमत होगी।

    इसी प्रकार दोमंजिला भवन की दोनों मंजिलों को अलग-अलग कब्जाधारक को स्थानांतरित करने की स्थिति में भूतल के लिए प्रभार्य कीमत आधार दर का 60 प्रतिशत और प्रथम तल के कब्जाधारक के लिए आधार दर का 40 प्रतिशत होगी। तीन मंजिला भवन की स्थिति में भूतल के कब्जाधारक के लिए प्रभार्य कीमत आधार दर का 50 प्रतिशत, प्रथम तल के कब्जाधारक के लिए 30 प्रतिशत और द्वितीय तल के कब्जाधारक के लिए आधार दर का 20 प्रतिशत होगी।

    प्रभार्य मूल्य की गणना (वर्ग गज की इकाई में दर्शाए गए कुल कारपेट क्षेत्र) को एक हजार रुपये से गुणा करके की जाएगी। संपत्ति हस्तांतरित कराने वाले आवेदक को सभी बकाया राशि के साथ ही किराया, लाइसेंस शुल्क, संपत्ति कर, अग्नि कर, पेशा कर, व्यापार कर, काङ्क्षलग एवं रोजगार कर, लाइसेंस फीस, तहबाजारी, पट्टा राशि का भुगतान भी करना होगा।

  • कोरोना कर्फ्यूकाल में मीडिया एवं कार्यालय को रहेगी छूट: पुलिस अधीक्षक

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    छतरपुर-पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने छतरपुर जिले में संचार एवं मीडिया प्रतिनिधि एवं उनसे संबंधित कार्यालय को कोरोना कर्फ्यू से छूट प्रदान की है। पुलिस प्रशासन जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि कोरोना महामारी के संक्रमण की रोकथाम के लिए छतरपुर जिले में भी 30 अप्रैल तक कोरोना कर्फ्यू बढ़ाया गया है। इस अवधि में संचार एवं मीडिया से संबंधित कार्यालय को कोरोना कर्फ्यू से छूट प्रदान की गई है। यह कार्यालय पूरी क्षमता के साथ कार्य करेंगे और कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए मास्क लगाएंगे और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य होगा।

  • 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को मुफ्त वैक्सीन लगाने के निर्णय को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बताया बुद्धिमतापूर्ण

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    देहरादून। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के 18 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को मुफ्त वैक्सीन लगाने के निर्णय को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बुद्धिमतापूर्ण बताया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इंटरनेट मीडिया में लिखा की उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों को मुफ्त टीका लगाने की साहसपूर्ण घोषणा की है।

    उन्होंने कहा कि जितना नुकसान लाकडाउन आदि में होता है, यदि उसको जीडीपी की तुलना में कुल नुकसान को देखें तो टीकाकरण में आने वाला खर्च कम पड़ेगा। इस कारण यह निर्णय बुद्धिमतापूर्ण है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पहले भी सरकार के अच्छे कार्यों की इंटरनेट मीडिया में प्रशंसा करते रहे हैं। नेतृत्व परिवर्तन के बाद यह पहली बार है, जब उन्होंने सरकार के कदम को सराहा है।

    प्रदेश सरकार ने बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए पेंशनरों व पारिवारिक पेंशनरों को जीवन प्रमाण पत्र जमा करने में बड़ी राहत दी है। उन्हें प्रमाण पत्र जमा करने के लिए के लिए 30 जून तक छूट रहेगी। प्रदेश में कोेरोना संक्रमण के मद्देनजर सरकार ने पेंशनरों को बीते वर्ष से प्रमाण पत्र जमा करने की छूट दी थी। यह छूट फरवरी में समाप्त हो गई थी।

    इस अवधि में कई पेंशनरों ने पेंशन स्वीकृति के लिए जिला कोषागार व उपकोषागार जाकर अपने दस्तावेज जमा भी कराए। अब कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर बड़ी तेजी से बढ़ रही है। इसे देखते हुए शासन ने पेंशनरों व पारिवारिक पेंशनरों के लिए जीवन प्रमाण पत्र जमा करने की छूट बढ़ाकर 30 जून तक कर दी है। इस संबंध में सचिव वित्त अमित नेगी द्वारा निदेशक कोषागार, पेंशन व हकदारी का पत्र भेजकर छूट की सीमा बढ़ाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

  • NIA ने क्राइम ब्रांच के तीसरे पुलिसकर्मी को किया गिरफ्तार

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    मुंबई। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने शुक्रवार को उद्योगपति मुकेश अंबानी और ठाणे के व्यवसायी मनसुख हिरेन की हत्या मामले में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा के निरीक्षक सुनील माने को गिरफ्तार किया गया है। माने को गुरुवार को पूछताछ के लिए बुलाया था। उन्होंने बताया कि मामले में संलिप्तता का पता चलने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार-निलंबित सहायक पुलिस निरीक्षक सचिन वाजे और अन्य की मदद करने का संदेह है।

    उन्हें बाद में एक विशेष एनआईए अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा, साथ ही अन्य दो गिरफ्तार किए गए पुलिस, वाजे और रियाजुद्दीन काजी – जिनकी रिमांड शुक्रवार को समाप्त हो जाएगी।

    पिछले दो महीनों में इन मामलों में वाजे और काजी को गिरफ्तार करने के बाद माने तीसरे क्राइम ब्रांच के अधिकारी हैं।

    25 फरवरी को, 20 जिलेटिन की छड़ें के साथ एक स्कॉर्पियो एसयूवी और अंबानी के घर एंटीलिया के पास एक धमकी भरा पत्र बरामद किया गया था, और 5 मार्च को हिरेन के शरीर को ठाणे क्रीक में उनता शव मिला था।

    दो अन्य दोषी पूर्व सैनिक विनायक शिंदे और एक क्रिकेट सट्टेबाज नरेश गोर को भी इन मामलों में गिरफ्तार किया गया।

    बाद में, सरकार ने पुलिस फोर्स को हिला दिया था, जिसमें तत्कालीन पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह को कमांडेंट जनरल, राज्य होमगार्ड में ट्रांसफर किया गया, जबकि आईपीएस अधिकारी हेमंत नागराले ने उन्हें शहर पुलिस प्रमुख बनाया।

  • बिटकॉइन कम्पनी के भविष्य पर संकट के काले बादल, जानिए कैसे

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    नई दिल्ली। कोरोना संकट के बीच बिटकॉइन को लेकर जुनून बढ़ता दिख रहा है। इसके पक्ष और विपक्ष में तरह-तरह के तर्क दिए जा रहे हैं। मगर सच यह है कि बिटकॉइन से अटकलबाजों और अपराधियों को छोड़कर किसी और को कोई फायदा नहीं है। यह कार्बन उत्सर्जन के रूप में भी दुनिया के लिए बड़ा खतरा है। ऐसे में कोई शक नहीं कि बहुत जल्द अधिकतर देशों की सरकारें इसे प्रतिबंधित कर दें।

    कोरोना महामारी के बारे में आ रही भयावह खबरों के बीच एक और कहानी चल रही है। यह कहानी है बिटकॉइन की। कोरोना महामारी बिटकॉइन कीमतों के लिए अच्छी रही है और बिटकॉइन को लेकर जूनून बढ़ रहा है। कॉइनबेस ग्लोबल नामक अमेरिकन क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज 14 अप्रैल को अपना आइपीओ लेकर आया। एक दिन एक्सचेंज के कर्मचारियों और संस्थापकों ने जरूर मोटा मुनाफा कमाया, लेकिन इसके बाद स्टॉक का दौर उतना अच्छा नहीं रहा।

    हाल ही में मैंने बिटकॉइन के बारे में एक खबर पढ़ी। इस खबर ने बिटकॉइन को लेकर मेरा ध्यान आकर्षित किया। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आइसीसी) की एंटी करप्शन यूनिट ने जिम्बाब्वे के पूर्व कप्तान हीथ स्ट्रीक के आचरण के बारे में जांच का ब्योरा जारी किया है। इस कहानी में बिटकॉइन की अहम भूमिका है।

    दिल्ली के रहने वाले मिस्टर अग्रवाल ने हीथ स्ट्रीक को दो बिटकॉइन का भुगतान किया था। यह भुगतान उन जानकारियों के बदले में था जिनका इस्तेमाल सट्टेबाजी में किया जा सकता था। स्ट्रीक ने बाद में बिटकॉइन 35,000 डॉलर में बेच दिया। उन्हें इसका गहरा अफसोस रहा होगा, क्योंकि दो बिटकॉइन की कीमत बेची गई रकम के तीन गुने से अधिक होगी।

    एक दूसरी गैर वित्तीय खबर बिटकॉइन को लेकर है। इसमें रैनसमवेयर हैक्स का उल्लेसख किया गया है। एक दिन कोई इंडिविजुअल या कंपनी पाती है कि उसके कंप्यूटर की सारी फाइल एनक्रिप्टेड है। स्क्रीन पर रैनसम नोट है जिसमें यह निर्देश दिया गया है कि फाइल वापस पाने के लिए बिटकॉइन में कैसे भुगतान करना है।

    साफ है कि ज्यादातर पीडि़त भुगतान कर देते हैं। मैं समझता हूं कि बिटकॉइन मिस्टर अग्रवाल, हीथ स्ट्रीक और रैनसमवेयर अपराधियों की जरूरतों पर खरा उतरता है। उनको इस बात के लिए शुक्रगुजार होना चाहिए कि बिटकॉइन की खोज की गई जिससे वे अपना कारोबार ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से चला सकें। अगर ऐसा नहीं होता तो मुझे कहना पड़ता कि बिटकॉइन पूरी तरह से बेकार है।

    ऐसी कई वित्तीय योजनाएं और विचार हैं जिनके बारे में उसके समर्थक और विरोधी एक दूसरे से विपरीत राय रखते हैं। उदाहरण के लिए कोई कहता है कि सागौन का पौधा लगाना अच्छा रिटर्न देगा। कोई और कहेगा कि इससे कुछ हासिल नहीं होगा। ये बिल्कुल विपरीत विचार हैं। बिटकॉइन इस तरह से नहीं है। बिटकॉइन के समर्थक और इस पर शक करने वाले इसकी बुनियादी खासियत को लेकर सहमत हैं।

    समर्थकों के अनुसार बिटकॉइन बहुत अच्छा है, क्योंकि यह एक करेंसी है जिसे कोई सेंट्रल बैंक या सरकार नियंत्रित नहीं करती है। बिटकॉइन अनजान और ट्रेस न किए जा सकने वाले ट्रांजैक्शन की अनुमति देता है। कोई भी सरल तकनीकी प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हुए बिटकॉइन बना सकता है। विरोधी खेमे का कहना है कि बिटकॉइन एक बेकार विचार है।

    बिटकॉइन के समर्थक इस बात पर निराशा जताते हैं कि बहुत सी सरकारें इसके प्रति दुश्मनी का रवैया रखती हैं। वास्तव में क्रिप्टोकरेंसी को लेकर किसी सरकार का दुश्मनी भरा रवैया तार्किक है। दुनिया में हर सरकार अपनी करेंसी और अपने मौद्रिक परिदृश्य पर नियंत्रण रखना चाहेगी।

    जो देश ऐसा नहीं कर सकते हैं उनको आर्थिक मोर्चे पर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। उदाहरण के लिए जब भी लोग एक करेंसी में भरोसा खो देते हैं, तो वे अपनी असेट किसी और करेंसी में शिफ्ट कर देते हैं। एक तय उम्र पार कर चुके हर भारतीय को वे दिन आज भी याद हैं जब ऐसा नियमित तौर पर होता था।

    सबसे बड़ी बात माइनिंग प्रॉसेस की लगातार बढ़ रही बिजली की खपत है। यह बिटकॉइन की अंतर्निहित खासियत है। कैंब्रिज यूनीवर्सिटी की स्टडी में अनुमान लगाया गया है कि बिटकॉइन सालाना 178 टेरावाट की खपत करता है। एक तरफ हम कार्बन फुटप्रिंट और क्लाइमेट इमरजेंसी की लगातार बात करते हैं। वहीं दूसरी तरफ एक ऐसी रकम को बनाने में बड़े पैमाने पर एनर्जी को बरबाद किया जा रहा है जिसका अटकलबाजी और आपराधिक गतिविधियों के अलावा और कोई इस्तेमाल नहीं है।

    हाल में ऐसी खबरे आई थीं कि भारत सरकार क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कड़े कदम उठाने जा रही है। इसके तहत भारतीय नागरिकों के पास मौजूद सभी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाया जाना था। साफ है कि अभी सरकार की प्राथमिकताएं दूसरी हैं। लेकिन उम्मीद की जानी चाहिए कि आखिरकार सरकार इस तरह के कदम उठाएगी, जिससे दुनिया की दूसरी सरकारें बिटकॉइन को खत्म करने की दिशा में प्रेरित हों।