Category: business

  • अब जरूरी नहीं अटेंडेंस सिस्टम के लिए आधार कार्ड, संदेश एप, जीवन प्रमाण पत्र

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    नई दिल्ली। अब पेंशनरों को डिजिटल तौर पर जीवन प्रमाण पत्र लेने के लिए आधार को स्वैच्छिक बना दिया गया है। सरकार ने पेंशन लेने वाले बुजुर्गों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र पाने के संबंध में नये नियम बताये हैं। सरकार की ओर से त्वरित संदेश समाधान वाली एप ‘संदेश’ और सार्वजनिक कार्यालयों में हाजिरी लगाने के लिए आधार प्रमाणीकरण को स्वैच्छिक कर दिया गया है।

    इलेक्ट्रानिक्स और आईटी मंत्रालय ने 18 मार्च को जारी अधिसूचना में कहा, जीवन प्रमाण के लिए आधार की प्रामाणिकता स्वैच्छिक आधार पर होगी, इसका इस्तेमाल करने वाले संगठनों को जीवन प्रमाणपत्र देने के लिए वैकल्पिक तरीके निकालने चाहिये। जब कई बुजुर्गों को पेंशन लेने के लिए अपनी जीवित होने की सत्यता के लिए लंबी यात्रा कर पेंशन वितरित करने वाली एजेंसी के समक्ष उपस्थित होना पड़ता था तब पेंशनरों के लिए जीवन प्रमाण पत्र की शुरुआत तब की गई। या फिर वह जहां नौकरी करते रहे हैं वहां से उन्हें जीवन प्रमाणपत्र लाना होता था और उसे पेंशन वितरण एजेंसी के पास जमा काराना होता था।

    मालूम हो कि डिजिटल तरीके से जीवन प्रमाणपत्र जारी करने की सुविधा मिलने के बाद पेंशनरों को खुद लंबी यात्रा कर संबंधित संगठन अथवा एजेंसी के सामने उपस्थित होने की अनिवार्यता से राहत मिल गई। लेकिन कई पेंशनरों की अब इस मामले में शिकायत है कि आधार कार्ड नहीं होने की वजह से उन्हें पेंशन मिलने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है और उनके अंगूठे का निशान मेल नहीं खा रहा है।

    अधिसूचना में कहा गया, इस मामले में एनआईसी को आधार कानून 2016, आधार नियमन 2016 और कार्यालय ज्ञापन तथा यूआईडीएआई द्वारा समय समय पर जारी सकुर्लर और दिशानिर्देशों का अनुपालन करना होगा।

    इसके लिए कुछ सरकारी संगठनों ने 2018 में वैकल्पिक रास्ता निकाला था वहीं अब जारी अधिसूचना के जरिये आधार को डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जारी करने के लिए स्वैच्छिक बना दिया गया है।

     

  • फायदे में रहेंगे आप, इन बातों का अवश्य रखें ध्यान Health Insurance पॉलिसी खरीदने जा रहे हैं तो

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    नई दिल्ली। महामारी के इस दौर में स्वास्थ्य बीमा हर किसी के पास होना आवश्यक है। खास तौर पर सीनियर सिटीजंस के लिए स्वास्थ्य बीमा की जरूरत बहुत अधिक बढ़ जाती है। हम सब जानते हैं कि स्वास्थ्य खर्च तेजी से बढ़ रहा है। कोई भी गंभीर बिमारी व्यक्ति को आर्थिक संकट में ढ़केलने के लिए पर्याप्त होती है। इससे बचने के लिए स्वास्थ्य बीमा जरूरी है। बाजार में कई सारी कंपनियां विभिन्न प्रकार की स्वास्थ बीमा पॉलिसीज की पेशकश करती हैं, लेकिन स्वास्थ्य बीमा लेते समय ग्राहक को कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए।

    क्लेम की राशि

    बीमा पॉलिसी में गंभीर बीमारी के लिए क्लेम की राशि अधिक होनी चाहिए। बाजार में उपलब्ध कई बीमा कंपनियों की पॉलिसीज में कुछ गंभीर बीमारियों पर क्लेम की राशि अपेक्षाकृत कम होती है। ग्राहक को बीमा पॉलिसी लेने से पहले इस बारे में पता कर लेना चाहिए। इसके लिए ग्राहक को गंभीर बीमारी की कवर लिस्ट सहित सभी दस्तावेजों को ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए।

    भुगतान की सीमा

    ग्राहक के लिए हमेशा ऐसी इंश्योरेंस पॉलिसीज चुनना बेहतर साबित होता है, जो अस्पताल में भर्ती होने के बाद का पूरा खर्च कवर करे। बाजार में उपलब्ध कई बीमा कंपनियों की पॉलिसीज में एक सीमा के बाद कमरे या आईसीयू का भुगतान पॉलिसीधारक को स्वयं ही करना पड़ता है। इसलिए पॉलिसी लेने से पहले ग्राहक को इस बारे में जान लेना चाहिए

    एक साथ प्रीमियम जमा कराने पर छूट

    बाजार में उपलब्ध कई बीमा पॉलिसीज में अधिकतम पॉलिसी टर्म पर एकमुश्त  प्रीमियम जमा कराने पर छूट दी जाती है। पॉलिसी टर्म अधिकतम तीन साल का हो सकता है। ग्राहक एक साथ प्रीमियम जमा कर इस छूट का लाभ ले सकते हैं।

    मौजूदा बीमारी कवर हो

    ग्राहक को स्वास्थ्य बीमा लेने से पहले यह जान लेना चाहिए कि पॉलिसी में मौजूदा बीमारी कवर हो रही है या नहीं। कुछ कंपनियां तो अपनी पॉलिसीज में बीमाधारक की मौजूदा बीमारी को कवर करती है और कुछ नहीं करती। हमेशा उस बीमा योजना का चुनाव करना अच्छा होता है, जो ग्राहक की मौजूदा बीमारी को कवर करती हो और जिसमें कम वेटिंग पीरियड हो।

    को-पेमेंट क्लॉज

    को-पेमेंट वह राशि होती है, जिसका भुगतान स्वयं पॉलिसीधारक को बीमित सेवाओं के लिए करना होता है। यह राशि पहले से तय होती है। सीनियर सिटीजंस के लिए बाजार में उपबल्ध अधिकांश बीमा पॉलिसीज को-पेमेंट की शर्त के साथ ही आती हैं। ऐसे में ग्राहक को वह बीमा पॉलिसी चुननी चाहिए, जिसमें उसे कम से कम को-पमेंट देना पड़े। इसके अलावा ग्राहक को-पमेंट की शर्त को हटाने का विकल्प भी चुन सकते हैं। इसके लिए ग्राहक को अतिरिक्त प्रीमियम देना होता है।

  • गिरावट के साथ खुला बाजार, निफ्टी 14700 के नीचे आया, सेंसेक्स 250 अंक से ज्यादा टूटा

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    नई दिल्ली। आज सप्ताह के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला। सुबह 09:16 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 258.32 अंक की गिरावट के साथ 49,599.92 के स्तर पर खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 73.25 अंक टूटकर 14,670.75 के स्तर पर खुला। निफ्टी के 50 शेयरों में से 19 शेयर हरे निशान, 30 शेयर लाल निशान और 1 शेयर बिना बदलाव के कारोबार कर रहे थे।

    घरेलू शेयर बाजार शुक्रवार को एक फीसद से अधिक तेजी के साथ बंद हुए। इससे पिछले पांच सत्र से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया। BSE का 30 शेयरों पर आधारित Sensex सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्र में 641.72 अंक यानी 1.30 फीसद के उछाल के साथ 49,858.24 अंक के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह NSE Nifty भी 186.15 अंक यानी 1.28 फीसद की तेजी के साथ 14,744 अंक के स्तर पर बंद हुआ। सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान के साथ बंद हुए। इसमें निफ्टी एनर्जी इंडेक्स सर्वाधिक तीन फीसद की बढ़त के साथ बंद हुआ।

    बीते हफ्ते सेंसेक्स की टॉप-10 कंपनियों में से आठ कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में कुल 1,38,976.88 करोड़ रुपये की गिरावट रही। बीते हफ्ते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के संवेदी सूचकांक सेंसेक्स में 933.84 अंक या 1.83 फीसद गिरावट दर्ज हुई थी। सबसे अधिक घाटा रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक को हुआ।

    बीते हफ्ते हिंदुस्तान यूनिलीवर का बाजार पूंजीकरण 25,294.91 करोड़ रुपये बढ़कर 5,43,560.03 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसके अलावा टीसीएस का बाजार पूंजीकरण 2,348.9 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी के साथ 11,33,111.91 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

  • होगा फायदा, अगर होम लोन मिलने में आ रही है दिक्कत, इन बातों पर दें ध्यान

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    नई दिल्ली। होम लोन लेने से पहले ग्राहक को बाजार में उपलब्ध सभी होम लोन ऑफर्स की जानकारी ले लेनी चाहिए और तुलनात्मक रूप से जो सबसे कम महंगा हो, उसे लेना चाहिए। हालांकि, होम लोन मिलना आसान नहीं होता। कई ग्राहकों को होम लोन लेने में बहुत सी परेशानी आती है। आइए आज कुछ ऐसी बातें जानते हैं, जिनसे ग्राहक अपनी होम लोन पाने की योग्यता को बढ़ा सकते हैं।

    सिबिल स्कोर

    ग्राहक का सिबिल स्कोर अच्छा है, तो वह आसानी से होम लोन प्राप्त कर सकता है। 750 से ऊपर का सिबिल स्कोर अच्छा माना जाता है। इससे ग्राहक को कर्जदाता के लिए विश्वासपात्र और जोखिम-मुक्त देनदार समझा जाता है। सिबिल स्कोर बेहतर होने पर ग्राहक के लिए होम लोन पर ब्याज दर भी कम हो सकती है।

    सह-आवेदक

    अगर आपके पति/पत्नी भी कामकाजी हैं और उनका सिबिल स्कोर अच्छा है, तो एक ज्वाइंट होम लोन के लिए आवेदन में सह-आवेदक के रूप में उनका नाम जोड़ा जा सकता है। इससे ग्राहक की लोन पाने की योग्यता बढ़ जाएगी। साथ ही बड़ा लोन अमाउंट भी मिल सकता है।

    लंबी अवधि

    होम लोन चुकाने के लिए लंबी अवधि का चुनाव कर आप अपनी होम लोन पाने की योग्यता को बढ़ा सकते है। लंबी अवधि से ग्राहक को लोन चुकाने के लिए अतिरिक्त समय मिल जाता है। इससे किस्तें भी कम राशि की बनती है। ऐसे में कर्जदाता इस बात के लिए अधिक आश्वस्त हो जाता है कि ग्राहक समय पर लोन चुका सकता है। इससे कर्जदाता का जोखिम घट जाता है।

    मौजूदा लोन का समय से पूर्व भुगतान

    होम लोन के लिए आवेदन करने से पहले ग्राहक को अपने मौजूदा लोन का पूर्व भुगतान कर देना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होगा, तो कर्जदाता ऐसा सोच सकता है कि ग्राहक पर पहले से ही मौजूदा लोन की ईएमआई का बोझ है। ऐसे में अगर होम लोन भी ले लिया जाए, तो ग्राहक पर ईएमआई का बोझ बढ़ जाएगा और वह किस्तों के भुगतान में देरी कर सकता है। इस तरह भविष्य में कर्जदाता के लिए जोखिम काफी बढ़ सकता है। वहीं, ग्राहक के पास पहले से कोई लोन होने की स्थिति में कर्जदाता होम लोन का अमाउंट भी कम कर सकता है। इसलिए अपनी होम लोन योग्यता को बढ़ाने के लिए ग्राहक को अपने मौजूदा लोन्स का पूर्व भुगतान कर देना चाहिए।

    जोड़ें आय का अतिरिक्त स्रोत 

    आपके पास अगर पार्ट-टाइम बिजनेस या किराये से प्राप्त आय जैसे अतिरिक्त आय के स्रोत हैं, तो इससे आपकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है। अगर आपके पास ऐसे स्रोत हैं, तो लोन आवेदन करते समय इनकी जानकारी जरूर दें। इससे ग्राहक की लोन पाने की योग्यता बढ़ जाएगी। इसके अलावा ग्राहक को बड़ा लोन अमाउंट भी मिल सकता है।

    स्टेप-अप लोन

    स्टेप-अप लोन कम मासिक आय वाले लोगों के लिए बेहतर होता है। इसमें ग्राहक को बड़ी लोन ईएमआई नहीं देनी होती है। इस तरह के लोन में कर्जदाता कम राशि की ईएमआई वाले लोन की पेशकश करता है। इससे देनदार वित्तीय रूप से अधिक स्थिर रह पाता है।

  • ऐसे करेगी सरकार आपकी मदद, स्‍टार्टअप से सपनों को नई उड़ान

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    नई दिल्ली। देश में तेजी से उभर रहे स्टार्ट-अप के माहौल को देखते हुए पूंजी बाजार नियामक सेबी ने इन्हें शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने को कई नए कदम उठाए हैं। इनमें स्टार्ट-अप को अपने स्तर पर 60 फीसद तक की हिस्सेदारी के शेयर बांटने का अधिकार भी दिया है। इससे पहले कंपनियों के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं था।

    अपने निदेशक मंडल के निर्णय से अवगत कराते हुए सेबी ने गुरुवार को स्टार्ट-अप से संबंधित अन्य कई छूट की सूचना दी। सेबी ने बताया कि प्री-इश्यू कैपिटल के 25 फीसद हिस्से को होल्ंिडग श्रेणी में रखने का प्रविधान घटाकर अब एक साल कर दिया गया है। इससे पहले इस मद की होल्ंिडग अवधि दो वर्षो की थी। हालांकि, इसमें प्री-इश्यू की हिस्सेदारी 10 फीसद थी।

    एक अन्य बदलाव में एक्रिडिटेड इंवेस्टर का नाम बदलकर इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म किया गया है। ओपन ऑफर का दायरा भी 25 फीसद से बढ़ाकर 49 फीसद कर दिया गया है। एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव में स्टार्ट-अप को उनके लिए तैयार विशेष इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म (आइजीपी) से निकलकर मुख्य बोर्ड में आने की छूट भी दी गई है। स्टार्ट-अप्स फिलहाल आइजीपी पर सूचीबद्ध होती हैं।

  • चेक करना न भूलें, Credit Card इस्तेमाल करते हैं तो स्टेटमेंट में शामिल होती हैं ये जानकारियां

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    नई दिल्ली। अगर आप क्रेडिट कार्ड यूज करते हैं तो एक निश्चित तारीख को आपको इसका स्टेटमेंट मिलता होगा। स्टेटमेंट में से इस बात की जानकारी मिलती है कि ग्राहकों ने बिलिंग अवधि के लिए क्रेडिट कार्ड का उपयोग कैसे किया है। क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट देखना इसलिए जरूरी है क्योंकि अस्पष्ट और संदिग्ध लेनदेन का इससे पता चल जाएगा। एक्सपर्ट बताते हैं कि क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट से यूजर्स क्रेडिट स्कोर को बेहतर बनाए रख सकते हैं।

    कई बार बैंक स्वीकृत सीमा से अधिक खर्च करने पर शुल्क लेते हैं और साथ ही अवैतनिक राशियों पर ब्याज भी लेते हैं। इसलिए यूजर्स को क्रेडिट कार्ड के बिल के साथ आने वाले शुल्कों को अच्छे से जांचना और समझना चाहिए। कई बार बैंक अन्य शुल्क भी ले सकते हैं, जैसे कि देर से भुगतान शुल्क और प्रोसेसिंग फीस। क्रेडिट कार्ड डिटेल पर नजर रखने से यूजर्स को मदद मिलती है।

    गैर-मान्यता प्राप्त लेनदेन

    स्टेटमेंट से यूजर ये पहचान सकते हैं कि उनसे कोई गैर-मान्यता प्राप्त लेनदेन तो नहीं हुआ।

    खाते में बदलाव की जानकारी

    क्रेडिट कार्ड समझौते के नियमों और शर्तों में बदलाव को आम तौर पर भेजे गए महीने वाले डिटेल में पता लगाया जा सकता है, अगर आपने इन्हें नहीं देखा तो ये छूट सकता है। इसलिए इसे देखना बहुत जरूरी है।

    क्रेडिट सीमा उपलब्धता, कुल बकाया

    क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट से आपको क्रेडिट लिमिट उपलब्धता और कुल बकाया का पता चल जाएगा। कुल राशि में सभी ईएमआई शामिल होते हैं जो उन्हें दिए गए बिलिंग चक्र में लगाए गए शुल्क के साथ भुगतान करना होगा। इससे यूजर्स को किसी भी अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए प्रति माह कुल बकाया राशि का भुगतान करने का सुझाव मिलता है।

  • जानिए ब्याज के भुगतान पर राहत मिली या नहीं, आया सुप्रीम कोर्ट का फैसला Loan Moratorium Case में

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    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को लोन मोरेटोरियम मामले में अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाया। उच्चतम न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि लोन मोरेटोरियम की अवधि के ब्याज को पूरी तरह माफ करने का आदेश नहीं दिया जा सकता है। जस्टिस एम आर शाह ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि पूरे ब्याज को माफ करना इसलिए मुमकिन नहीं है क्योंकि इस फैसले का असर डिपोजिटर्स पर भी पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा आरबीआई और केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों के बाद ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि उन्होंने बॉरोअर्स की समस्याओं का समाधान नहीं किया।

  • शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध कंपनियों पर होगी लागू, सेबी ने लाभांश वितरण नीति का दायरा बढ़ाया

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    नई दिल्ली। पूंजी बाजार नियामक से शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए लाभांश वितरण नीति बनाना अनिवार्य कर दिया है। अपने निदेशक बोर्ड की बैठक के बाद सेबी ने कहा कि वर्तमान में शीर्ष 500 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए यह बाध्यता थी, जिसे बढ़ाकर 1,000 किया गया है। इसका मकसद कॉरपोरेट गवर्नेस और डिसक्लोजर मानकों को मजबूती देना है।

    निदेशक बोर्ड में लिए गए फैसलों के बारे में बताते हुए सेबी ने कहा कि कंपनियों को नतीजे जाहिर करने के दिन बोर्ड की बैठक खत्म होने के 30 मिनट के भीतर वित्तीय नतीजे बता देने होंगे। वहीं, कंपनियों में जोखिम प्रबंधन समिति (आरएमसी) के गठन से संबंधित प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है। सूचीबद्ध कंपनियों को नाम बदलने के लिए शेयर बाजारों से मंजूरी लेने की बाध्यता भी खत्म कर दी गई है।

    कंपनियों में कॉरपोरेट गवर्नेस को मजबूती देने के लिए सेबी ने लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिसक्लोजर रिक्वायरमेंट्स रेगुलेशंस (एलओडीआर) के कई प्रविधानों में बदलाव को मंजूरी दे दी। वहीं, कंपनियां अपने वित्तीय नतीजों के बाद विश्लेषकों के साथ टेलीफोन या वीडियो के माध्यम से जो बातचीत करती हैं, उसकी रिकॉर्डिग उन्हें 24 घंटों के भीतर सार्वजनिक करनी होगी।

  • जानिए एक्सपर्ट्स से , MCLR पर Home Loan लेना है फायदे का सौदा या RLLR पर

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    नई दिल्ली। आज के समय में होम लोन की ब्याज दर घटकर 6.7 फीसद तक पर आ गई है। अगर औसतन देखा जाए तो यह रेट सात फीसद के आसपास बैठती है। Home Loan पर मौजूदा ब्याज दर की तुलना अगर पांच या सात साल पहले के रेट से किया जाए तो यह बात सामने आती है कि इस समय ब्याज दर पूर्व के मुकाबले काफी कम है। यही वजह है कि आज से कुछ साल पहले होम लोन पर मकान लेने वाले लोग अपने बचे हुए लोन के भुगतान के लिए MCLR की बजाए एक्सटर्नल बेंचमार्क यानी रेपो रेट पर आधारित ब्याज दर को अपनाना चाहते हैं। कई ऐसे लोग हैं, जो इंटरनेट पर इस बात को लेकर काफी रिसर्च करते हैं कि MCLR पर होम लोन जारी रखना सही विकल्प है कि उन्हें रेपो रेट पर आधारित ब्याज दर में स्वीच करने के ऑप्शन को देखना चाहिए। आज हमने इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश की हैः

    टैक्स एंड इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट बलवंत जैन ने इस बारे में कहा कि MCLR (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) बैंकों की सीमांत लागत पर आधारित होता है। ऐसे में बैंकिंग अक्षमता का खामियाजा भी कई बार बॉरोअर्स को उठाना पड़ता है। इसका मतलब ये है कि अगर किसी भी वजह से अगर किसी बैंक की लागत ज्यादा बैठती है तो वह अपने ग्राहकों को ज्यादा रेट पर कर्ज देगा। दूसरी ओर RLLR एक्सटर्नल बेंचमार्क यानी रेपो रेट के साथ एक खास प्रीमियम पर आधारित होते हैं। उन्होंने कहा, ‘ऐसे में मेरी राय यह है कि लोगों को MCLR की बजाय RLLR को तरजीह देना चाहिए।’

    सेबी सर्टिफाइड इंवेस्टमेंट एडवाइजर जितेंद्र सोलंकी ने भी जैन की बात को लेकर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि अगर बॉरोअर्स को MCLR से RLLR में स्वीच करने का ऑप्शन मिलता है, तो उन्हें इसे अपनाना चाहिए ये क्योंकि कहीं-ना-कहीं ज्यादा फायदेमंद है। हालांकि, ऐसे होम लोन बॉरोअर्स के लिए ज्यादा श्रेयस्कर है, जिन्होंने हाल में ही लोन लिया है और उन्हें लंबे समय तक किस्त का भुगतान करना हो क्योंकि यह दीर्घअवधि में लाभदायक साबित हो सकता है।

    जैन ने रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) की इन खास बातों को रेखांकित कियाः 

    1. बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां रेपो रेट बढ़ने पर MCLR तुरंत बढ़ा देती हैं लेकिन रेट घटने पर जल्द ऐसा नहीं करती हैं। इसके साथ ही अगर आरबीआई रेपो रेट में 0.25 फीसद की कमी करती हैं तो अतीत में यह देखा गया है कि अधिकतर बैंक या HFCs मार्जिनल कॉस्ट पर आधारित ब्याज दर में 0.05 से लेकर 0.10 फीसद की कटौती करते थे। बहुत कम ही ऐसे लेंडर हैं जो आरबीआई द्वारा रेट में की गई पूरी कमी का लाभ ग्राहकों को पास करते थे। RLLR में ऐसा नहीं है। रेपो रेट में किसी तरह की घट-बढ़ पर होम लोन रेट पर भी उसी दर से कमी या वृद्धि हो जाती है।

    2. अगर बैंक या हाउंसिग फाइनेंस कंपनी ने ज्यादा रेट से भी लोन लिया है तो RLLR में उसका प्रभाव देखने को नहीं मिलेगा, जबकि MCLR में ऐसा नहीं है।

    3. MCLR की तुलना में RLLR में ज्यादा पारदर्शिता है। इसकी वजह यह है कि बैंक का मार्जिनल कॉस्ट क्या बैठ रहा है यह किसी को पता ही नहीं चलता था। वहीं, रेपो रेट आधारित लेंडिंग रेट में आप खुद इस बात को कैलकुलेट कर सकते हैं।

  • अगले महीने से ओटीपी मिलने में हो सकती है परेशानी, SBI, ICICI और HDFC बैंक के ग्राहक हैं, तो हो जाएं सावधान

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    नई दिल्ली। आने वाले कुछ दिन बैंक ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल 27 मार्च से 4 अप्रैल के बीच केवल दो दिन ही बैंक शाखाएं खुली रहेंगी। इस अवधि में केवल 2 कार्य दिवस ही आ रहे हैं। पूरे देश में 27, 28 व 29 मार्च को लगातार तीन दिन तक बैंक बंद (Bank Holiday) रहेंगे।

    27 मार्च को चौथा शनिवार होने के चलते बैंक बंद रहेंगे। 28 मार्च को रविवार के कारण बैंकों का सार्वजनिक अवकाश है। वहीं 29 मार्च को होली की छुट्टी है। इसके बाद 30 मार्च को पटना जोन के अलावा बाकी जगह बैंक खुले रहेंगे। इसके बाद 31 मार्च को वित्त वर्ष का आखिरी दिन होने के कारण बैंक ब्रांचों में सेवाएं नहीं मिलेंगी। 1 अप्रैल को भी अकाउंट क्लोजिंग के चलते ब्रांचों में सेवाएं नहीं मिलेगी।

    इसके बाद 2 अप्रैल को गुड फ्राइडे की छुट्टी है। 3 अप्रैल को बैंकों में काम काज होगा और उसके अगले दिन रविवार होने के चलते फिर से बैंकों की छुट्टी है। इस तरह 27 मार्च से 4 अप्रैल के बीच केवल दो दिन 30 मार्च और 3 अप्रैल को ब्रांचों पर बैंकिंग सेवाएं मिल सकती हैं।

    वहीं, एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और आईसीआईसीआई (ICICI Bank) जैसे बड़े बैंकों के ग्राहकों को एक और समस्या का सामना अगले महीने से करना पड़ सकता है। न्यूज एजेंसी पीटीआइ के अनुसार, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने शुक्रवार को 40 ऐसी ‘डिफॉल्टर’ कंपनियों की लिस्ट जारी की, जो थोक वाणिज्यिक संदेशों को लेकर नियामकीय नियमों को पूरा नहीं कर रही हैं। इन प्रमुख इकाइयों को इस बारे में ट्राई द्वारा कई बार बताया जा चुका है। इनमें एचडीएफसी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक और आईसीआईसीआई बैंक भी शामिल हैं।

    ट्राई ने इस मुद्दे पर कड़ा  रुख करते हुए कहा है कि डिफॉल्ट करने वाली इकाइयों को इन नियमों को 31 मार्च, 2021 तक पूरा करना होगा। ऐसा नहीं होने पर एक अप्रैल, 2021 से उनका ग्राहकों के साथ संचार बाधित हो सकता है।

    नियामक ने बयान में कहा, ‘‘प्रमुख इकाइयों/टेली मार्केटिंग कंपनियों को नियामकीय अनिवार्यताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त अवसर दिया जा चुका है। उपभोक्ताओं को नियामकीय लाभ से और वंचित नहीं रखा जा सकता। इसी के मद्देनजर तय किया गया है कि यदि एक अप्रैल से कोई संदेश नियामकीय जरूरतों को अनुपालन नहीं करता है, तो प्रणाली द्वारा उसे रोक दिया जाएगा।’’

    दरअसल, नियामक ने ग्राहकों को फ्रॉड एसएमएस से निजात दिलाने के उद्देश्य से कमर्शियल मैसेज पर लगाम लगाने के लिए प्रक्रिया शुरू की है। इसमें नियामक ने कंपनियों से कहा है कि वे एक फॉर्मेट में SMS को ट्राई के साथ रजिस्टर्ड कराएं, जिससे ग्राहकों तक सही मैसेज पहुंचे और वो किसी फ्रॉड का शिकार न हों। नियामक के इस आदेश को कई कंपनियां गंभीरता से नहीं ले रही हैं। इसका असर यह होगा कि अब कंपनियों की लापरवाही का खामियाजा ग्राहकों को उठाना पड़ सकता है। ऐसी कंपनियों द्वारा ग्राहकों को भेजे जाने वाले मैसेज/ओटीपी आदि को ट्राई के नए सिस्टम द्वारा अगले महीने से रिजेक्ट किया जा सकता है।