Category: business

  • ‘आत्मनिर्भर निवेशक मित्र’ पोर्टल, घरेलू निवेशकों को विशेष पोर्टल पर मिलेगी सभी जरूरी जानकारी, केंद्र सरकार तैयार कर रही

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    नई दिल्ली। केंद्र सरकार घरेलू निवेशकों की कारोबारी सहूलियतों को ध्यान में रखकर एक विशेष पोर्टल तैयार कर रही है। इससे जुड़कर स्थानीय कारोबारी उचित मार्गदर्शन से लेकर बिजनेस से संबंधित सभी नवीनतम सूचनाएं हासिल कर सकेंगे। आत्मनिर्भर निवेशक मित्र नाम के इस पोर्टल को पहली मई को लांच किए जाने की तैयारी है।

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि यह काम उसके उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआइआइटी) की निगरानी में तेजी से किया जा रहा है। पोर्टल को देश की विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में बनाया जाएगा व इसका मोबाइल एप वर्जन भी जल्द लांच किया जाएगा। मंत्रालय ने बताया कि आत्मनिर्भर निवेशक मित्र के जरिये घरेलू निवेशक रोजाना केंद्र व राज्य सरकारों के नीतिगत फैसलों से अवगत होंगे। इस पोर्टल के माध्यम से उन्हें अनुमोदन, लाइसेंस व मंजूरी, मैन्यूफैक्च¨रग क्लस्टर्स, कारोबार के लिए जमीन की उपलब्धता व टैक्स नियमों से जुड़ी सूचनाएं भी दी जाएंगी।

    सरकार की विभिन्न योजनाओं व उसके अंतर्गत प्रोत्साहन संबंधी अनेक सुविधाओं की जानकारी भी घरेलू निवेशक पोर्टल पर पा सकेंगे। घरेलू कारोबारियों को आत्मनिर्भर निवेशक मित्र के जरिये निवेश से संबंधित नए मौके, फंडिंग की सुविधा व कारोबार के लिए कच्चे माल की उपलब्धता संबंधित डाटा भी मुहैया कराए जाएंगे। इसके अलावा निविदाओं, प्रबंधन की व्यवस्था व प्रशिक्षण जैसी जरूरतें पूरी करने के लिए मार्गदर्शन किया जाएगा। पोर्टल को डीपीआइआइटी के गैर-लाभकारी उपक्रम इंवेस्ट इंडिया से जोड़ने का काम भी चल रहा है।

  • एचएसएन कोड की बाध्यता से कारोबारी चिंतित, जीएसटी रिटर्न के लिए पहली अप्रैल से यह कोड हो रहा अनिवार्य

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    नई दिल्ली। आगामी पहली अप्रैल से सभी कारोबारियों के लिए जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के लिए हार्मोनाइज्ड सिस्टम ऑफ नोमेनक्लेचर (एचएसएन) कोड का उल्लेख करना अनिवार्य कर दिया गया है। छोटे कारोबारियों का कहना है कि इससे उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि एचएसएन कोड में जरा भी गलती होने पर उन्हें 50,000 रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है। आगामी पहली अप्रैल से कारोबारियों को सभी टैक्स इनवॉयस और जीएसटीआर-1 दाखिल करने के दौरान एचएसएन कोड का उल्लेख करना पड़ेगा।

    जीएसटी विशेषज्ञों के मुताबिक वर्तमान में सालाना 1.5 करोड़ तक का कारोबार करने वाले कारोबारियों को एचएसएन कोड से मुक्त रखा गया है। 1.5 करोड़ से पांच करोड़ रुपये तक का सालाना कारोबार करने वालों को दो डिजिट वाले एचएसएन कोड का इस्तेमाल करना होता है। वहीं पांच करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले कारोबारियों को चार डिजिट का एचएसएन कोड देना पड़ता है।

    आगामी पहली अप्रैल से सालाना पांच करोड़ तक के कारोबार करने वाले सभी कारोबारियों को चार डिजिट और पांच करोड़ से अधिक टर्नओवर वालों को छह डिजिट के एचएसएन कोड का उल्लेख करना होगा। निर्यातकों के लिए आठ डिजिट के एचएसएन कोड होंगे। सालाना पांच करोड़ तक के टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए बिजनेस-टु-बिजनेस (बीटुबी) में एचएसएन कोड अनिवार्य होगा, जबकि बिजनेस-टु-कंज्यूमर (बीटुसी) में यह वैकल्पिक होगा। लेकिन पांच करोड़ से अधिक के कारोबार वालों के लिए सभी प्रकार के बिजनेस में यह अनिवार्य होगा।

    जीएसटी विशेषज्ञ एवं चार्टर्ड अकाउंटेंट राजिंदर अरोड़ा ने बताया कि कस्टम टैरिफ एक्ट (सीमा शुल्क कानून) से एचएसएन कोड निकलता है और यह वस्तुओं के वर्गीकरण के हिसाब से निर्धारित होता है। वस्तुओं के वर्गीकरण से ही टैक्स की दरें तय होती है। अरोड़ा ने बताया कि कारोबारी एचएसएन कोड में गलती करता है तो उसकी टैक्स की दर अलग हो जाएगी। बाद में पकड़े जाने पर कारोबारी पर जीएसटी एक्ट के सेक्शन 125 के तहत 50,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

  • इन बचत योजनाओं में मिलता है आयकर का लाभ, जानिए इनके बारे में

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    नई दिल्ली। इंडिया पोस्ट की कई बचत योजनाओं में निवेश पर आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत आयकर लाभ मिलता है। इन योजनाओं में निवेश करके आप कर योग्य आय से एक वित्तीय वर्ष में 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं।

    पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट स्कीम में कोई व्यक्ति एक निश्चित अवधि के लिए एकमुश्त पैसा जमा कर सकता है और गारंटी रिटर्न और ब्याज भुगतान की पसंद जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकता है। एक साल, दो साल और तीन साल की मैच्योरिटी अवधि की जमा राशि पर 5.5 फीसद की दर से ब्याज मिलता है। पांच साल के जमा खाते में 6.7 फीसद का रिटर्न मिलता है और यह आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80 सी के लाभ के लिए छूट प्राप्त करने के योग्य है। ब्याज सालाना देय होता है लेकिन इसकी गणना तिमाही के हिसाब से की जाती है।

    सार्वजनिक भविष्य निधि योजना: पोस्ट ऑफिस पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF) एक रिटायरमेंट प्लानिंग-फोकस्ड इंस्ट्रूमेंट है। यह खाता टैक्स की स्थिति की ‘छूट, छूट, छूट’ (EEE) श्रेणी के अंतर्गत आता है, जिसका अर्थ है कि रिटर्न, मैच्योरिटी राशि और ब्याज आय को आयकर से छूट प्राप्त है। यह योजना प्रति वर्ष 7.1 फीसद  की ब्याज दर से ब्याज देती है, जो वार्षिक रूप से मिश्रित होती है।

    राष्ट्रीय बचत पत्र: राष्ट्रीय बचत पत्र या NSC प्रति वर्ष 6.8 फीसद  की ब्याज दर देता है। यह ब्याज सालाना मैच्योर होता है लेकिन मैच्योरिटी पर देय होता है। राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र में जमा आयकर अधिनियम की धारा 80 सी के तहत कटौती के लिए योग्य है।

    वरिष्ठ नागरिक बचत योजना: वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) एक निवेश एवेन्यू के रूप में कार्य करती है और रिटायरमेंट जीवन के लिए पैसे एकत्रित करने में मदद करती है। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु का व्यक्ति योजना के लिए पात्र है। इस योजना में प्रति वर्ष 7.4 फीसद  की ब्याज दर मिलता है।

  •  कामकाज रहेगा प्रभावित SBI सहित कई सरकारी बैंकों में , बैंकों में आज से दो दिन की हड़ताल

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    नई दिल्ली। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बैनर तले 9 यूनियनों ने सोमवार, 15 मार्च यानी आज से दो दिन की बैंक हड़ताल का आह्वान किया है। यूनियंस ने दो सरकारी बैंकों के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में यह हड़ताल बुलाई है। ऑल इंडिया बैंक एम्पलाॉइज एसोसिएशन (AIBEA) के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने दावा किया कि इस हड़ताल में बैंकों के करीब 10 लाख कर्मचारी और बैंक अधिकारी शामिल होंगे। यह हड़ताल 15 और 16 मार्च को होनी है।

    एसबीआई, केनरा बैंक सहित कई बैंकों की सेवाएं होंगी प्रभावित

    भारतीय स्टेट बैंक (SBI), केनरा बैंक (Canara Bank) सहित कई बैंकों ने अपने ग्राहकों को ब्रांचों और कार्यालयों में कामकाज प्रभावित रहने की सूचना दी है। बैंकों ने यह भी कहा है कि वे प्रस्तावित हड़ताल के दिनों में कार्यालयों और बैंक ब्रांचों के कामकाज को सुचारू बनाने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं।

    यूएफबीयू के सदस्यों में ऑल इंडिया बैंक एम्पलाॉइज एसोसिएशन (All India Bank Employees Association-AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडेरेशन (All India Bank Officers Confederation -AIBOC), नेशनल कॉन्फेडेरेशन ऑफ बैंक एम्पलॉइज (National Confederation of Bank Employees -NCBE), ऑल बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (All India Bank Officers Association -AIBOA) और बैंक एम्पलॉइज कॉन्फेडेरेशन ऑफ इंडिया (Bank Employees Confederation of India -BEFI) शामिल हैं। इसके अलावा अन्य में आईएनबीईएफ (INBEF), आईएनबीओसी  (INBOC), एनओबीडब्ल्यू (NOBW) और एनओबीओ (NOBO) हैं।

  • पब्लिक ऑफर से जुड़े इन रोचक तथ्यों को भी जानिए, इन पांच बातों को ध्यान में रखें आईपीओ में निवेश करते समय

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    नई दिल्ली। क्या आप एक रोचक तथ्य जानना चाहते हैं? 2020 में लॉन्च किए गए 15 प्रमुख आईपीओ में से 14 स्टॉक के अभी अपने इश्यू प्राइस से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। कई मामलों में, रिटर्न 200% से अधिक है और कुछ में 400% भी है। 11 शेयरों ने अपने लिस्टिंग के दिन से लाभ देना शुरू कर दिया और 6 स्टॉक ने पहले दिन 70% से अधिक का रिटर्न दिया। हालांकि, आईपीओ में निवेश कोई आसान काम नहीं हैं। ऐसे कई पहलू हैं, जिनके आधार पर आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आप जिस आईपीओ में निवेश करने जा रहे हैं, वो आपको फायदा देने वाला है या नुकसान।

    आईपीओ में निवेश करने से पहले इन पांच बातों को ध्यान में रखना है जरूरीः

    1. विस्तृत रिसर्च करना है जरूरी

    आईपीओ तब जारी होता है जब कोई कंपनी अपने शेयर को पहली बार स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करती है। लिस्टिंग के बाद कंपनियों को तिमाही आधार पर अपने प्रमुख वित्तीय आंकड़ों की रिपोर्ट को प्रस्तुत करना होता है। हालांकि, कंपनी के सार्वजनिक होने से पहले की जानकारी आसानी से उपलब्ध नहीं होती है। कंपनी के सभी प्रासंगिक आंकड़े वास्तव में डीआरएचपी या ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में होते हैं। बस ध्यान रखें कि इस तरह के ड्राफ्ट कंपनियां खुद ही फंड जुटाने के उद्देश्य से बनाती हैं। यह ड्राफ्ट निष्पक्ष बाजार इकाई की ओर से तैयार नहीं किया जाता है।

    इस वजह से आपको पूरी तरह से अनुसंधान करना चाहिए और कंपनी, उसके प्रमोटरों, उनके आपराधिक रिकॉर्ड (यदि कोई हो), वित्तपोषण, प्रतियोगियों, मीडिया कवरेज और बड़े पैमाने पर इसकी औद्योगिक गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटानी चाहिए।

    2. मूल्यांकन पर ध्यान दें

    यह देखा गया है कि शेयरों का आवंटन प्राप्त करने के लिए जल्दबाजी में बहुत से निवेशक किसी कंपनी या उसके मौलिक विश्लेषण के मूल्यांकन पर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं। हालांकि, डीआरएचपी में जो कुछ भी दिया गया है, उसके अलावा किसी कंपनी के लिए मौलिक विश्लेषण करने के लिए कोई अन्य डेटा पॉइंट्स उपलब्ध नहीं होते हैं। सार्वजनिक होने वाली कंपनियां आमतौर पर अपने निवेशकों से बहुत ज्यादा मूल्यांकन की उम्मीद करती है। आप हमेशा इसके बारे में सटीक विचार प्राप्त करने के लिए उस उद्योग में उसके समकक्षों या सामान्य प्रवृत्ति को परख सकते हैं। यदि सार्वजनिक होने वाली कंपनी अपनी तरह की पहली है, तो ऐसे में प्रतिस्पर्धी विश्लेषण करना और भी कठिन हो जाता है।

    3. क्यूआईबी भागीदारी को मॉनिटर करें

    सार्वजनिक होने वाली कोई भी कंपनी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) या पात्र संस्थागत खरीदारों के लिए विशेष पिच बनाती है। क्यूआईबी सेबी-रजिस्टर्ड फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन, बैंक, म्यूचुअल फंड और एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशक) हैं जो आमतौर पर दूसरों की ओर से धन का निवेश करते हैं। स्टॉक की क्षमता का पता लगाने के लिए समर्पित नेटवर्क होने के साथ-साथ इस प्रक्रिया में एक पार्टी होने के नाते क्यूआईबी की भागीदारी को अक्सर स्टॉक के भविष्य के प्रदर्शन का बैरोमीटर माना जाता है। हालांकि, आपको इस आंकड़े पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए क्योंकि क्यूआईबी का भी इसमें अपना नफा-नुकसान हो सकता है।

    4. डीआरएचपी को अच्छे-से पढ़ें

    सभी कंपनियों के लिए सार्वजनिक रूप से अपने बिजनेस ऑपरेशंस, राजस्व, संपत्ति, देनदारियों, बाजार परिदृश्य का विस्तृत विवरण देना अनिवार्य है और वे अपने रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में अपनी बढ़ी हुई पूंजी का उपयोग कैसे करेंगे, यह भी बताना होता है। निवेशकों को हर चीज के बारे में जानकारी देनी होती है ताकि वे सूचित निर्णय ले सकें। हालांकि, डीआरएचपी में भी कई तथ्य छिपे होते हैं, यदि आप विवरण को विस्तार से और गहराई से देखते हैं, तो आप निश्चित तौर पर महत्वपूर्ण टेकअवे भी प्राप्त कर सकते हैं। ऐतिहासिक प्रदर्शन जैसे फेक्टर के साथ ही कंपनी अपने फंड का उपयोग कैसे करेगी, इस पर विशेष ध्यान दें।

    5. टेक्नोलॉजी का लाभ उठाएं

    आईपीओ और इन-डेप्थ एनालिसिस में जिस डायनामिज्म की आवश्यकता होती है, उसे देखते हुए त्रुटियों के लिए कम गुंजाइश छोड़ते हुए किसी को काम करने देना बेहतर होगा। आज, भारत में निवेश की सिफारिश करने वाले इंजन हैं जो 1 बिलियन से अधिक डेटा पॉइंट्स का विश्लेषण करके बेंचमार्क नतीजों को सामने रखते हैं। अच्छी खबर यह है कि वे आईपीओ-केंद्रित सलाह भी देते हैं।

  • चांदी में आई गिरावट, बढ़ गए सोने के भाव, जानिए क्या हैं कीमतें

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    नई दिल्ली। सोने के घरेलू हाजिर भाव में बुधवार को बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। एचडीएफसी सिक्युरिटीज के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बुधवार को सोने के हाजिर भाव में 60 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़त दर्ज की गई। इस तेजी से सोने का भाव बढ़कर 44,519 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया है। सिक्युरिटीज के अनुसार, सोने की वैश्विक कीमतों में मजबूती और रुपये में गिरावट के चलते घरेलू स्तर पर सोने की कीमत में तेजी आई है। गौरतलब है कि पिछले सत्र में सोना 44,459 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था।

    सोने से इतर चांदी की घरेलू हाजिर कीमत में बुधवार को गिरावट दर्ज की गई। चांदी के घरेलू हाजिर भाव में 200 रुपये प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट से चांदी का भाव 66,536 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है। गौरतलब है कि पिछले सत्र में चांदी 66,736 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बंद हुई थी।

    सिक्युरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (कमोडिटीज) तपन पटेल ने बताया, ‘दिल्ली में 24 कैरेट सोने के भाव में बुधवार को 60 रुपये की तेजी दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में मजबूती और रुपये में गिरावट के चलते ऐसा हुआ।’

    पटेल ने आगे कहा, ‘यूएस FOMC (फेडरल ओपन मार्केट कमेटी ) की बैठक के चलते सोने की कीमत में तेजी देखी गई है।’

    वैश्विक स्तर की बात करें, तो बुधवार को सोना बढ़त के साथ और चांदी स्थिर ट्रेड करती दिखी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का वैश्विक भाव बढ़त के साथ 1735 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखाई दिया। वहीं, चांदी का वैश्विक भाव 26 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता दिखाई दिया।

    घरेलू वायदा बाजार में बुधवार को सोने के भाव में तेजी देखी गई। एमसीएक्स एक्सचेंज पर बुधवार शाम 5 अप्रैल, 2021 के सोने का वायदा भाव 0.33 फीसद या 147 रुपये की तेजी के साथ 44,960 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखाई दिया। वहीं, 4 जून, 2021 के वायदा के सोने का भाव इस समय 0.27 फीसद या 120 रुपये की तेजी के साथ 45311 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड करता दिखा।

    वायदा बाजार में चांदी (Silver Futures Price)

    घरेलू वायदा बाजार में चांदी की वायदा कीमत में भी बढ़ोत्तरी देखी गई है। एमसीएक्स पर बुधवार शाम पांच मई, 2021 वायदा की चांदी की कीमत 0.45 फीसद या 302 रुपये की तेजी के साथ 67221 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती दिखाई दी।

  • NPS, APY के सब्सक्राइबर्स 22 फीसद बढ़े, जुड़ी खास बातें जानिए इन योजनाओं से

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    नई दिल्ली। सरकार की फ्लैगशिप स्कीम NPS और अटल पेंशन योजना (APY) के सब्सक्राइबर्स की कुल संख्या फरवरी, 2021 के आखिर में 22 फीसद बढ़कर 4.15 करोड़ पर पहुंच गई। सरकार की ओर से बुधवार को जारी आंकड़े में ऐसा कहा गया है। PFRDA की ओर से जारी एक रिलीज में कहा गया है, ”फरवरी, 2021 के आखिर में विभिन्न स्कीम के सब्सक्राइबर्स की कुल संख्या बढ़कर 414.70 पर पहुंच गई जो फरवरी, 2020 में 340.34 लाख पर थी। ये आंकड़े सालाना आधार पर 21.85 फीसद के ग्रोथ को दिखाते हैं।”

    नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और अटल पेंशन योजना (APY) के सब्सक्राइबर्स की कुल संख्या एक साल पहले 3.43 करोड़ पर थी।

    PFRDA ने कहा है कि 28 फरवरी, 2021 तक कुल पेंशन एसेट्स 5,59,594 करोड़ रुपये पर पहुंच गए। यह सालाना आधार पर 33.09 फीसद की वृद्धि को दिखाता है।

    NPS मुख्य रूप से सकारी, स्वायत्त संस्थाओं और कॉरपोरेट सेक्टर के कर्मचारियों से जुड़ी पेंशन स्कीम है। दूसरी ओर, APY मुख्य रूप से देश के असंगठित क्षेत्र की पेंशन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए लायी गई योजना है।

    NPS

    अगर आप रिटायरमेंट के बाद के लिए फंड जुटाने की सोच रहे हैं तो इस मामले में नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय है। आप देश के लगभग सभी सरकारी और निजी बैंक में जाकर नेशनल पेंशन सिस्टम के तहत अकाउंट खुलवा सकते हैं। इस स्कीम में 18 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक की आयु के लोग निवेश कर सकते हैं।

    APY

    Atal Pension Yojana का संचालन भी पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी PFRDA द्वारा किया जाता है। इस स्कीम के अंतर्गत आप हर माह 1,000 रुपये से 5,000 रुपये तक का पेंशन प्राप्त कर सकते हैं।

  • इस साल छह हजार रुपये पाना है तो अभी करा लीजिए रजिस्ट्रेशन, ये प्रोसेस बहुत आसान है

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    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) योजना के तहत केंद्र सरकार देश के पात्र किसानों के बैंक खातों में हर वित्त वर्ष में कुल 6,000 रुपये ट्रांसफर करती है। इसी कड़ी में पीएम किसान स्कीम की आठवीं किस्त और वित्त वर्ष 2021-22 की पहली किस्त अप्रैल में जारी हो सकती है। अगर आपने पहले से इस स्कीम के लिए रजिस्ट्रेशन कराया हुआ है और आपके केवाईसी से जुड़े दस्तावेज अपडेटेड हैं तो आपको इस योजना के तहत 2,000-2,000 रुपये की तीन किस्त में हर वित्त वर्ष में छह हजार रुपये मिल जाएंगे। हालांकि, अगर आपने अब तक इस स्कीम के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है तो महज 5-10 मिनट में ऐसा कर सकते हैं।

    इसके लिए सबसे पहले सरकार द्वारा तय अहर्ताओं पर ध्यान देने की जरूरत है। मसलन, डॉक्टर, सीए और वकील जैसे प्रोफेशनल अगर खेती-किसानी करते भी हैं तो उनको इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसी तरह वर्तमान या पूर्व सांसदों, विधायकों, विधान पार्षदों और मेयर जैसे जनप्रतिनिधियों को भी इस स्कीम का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा ग्रुप डी या मल्टी टास्किंग स्टाफ को छोड़कर किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी को इस स्कीम का लाभ नहीं मिलेगा। ग्रुप डी या मल्टी टास्किंग स्टाफ को छोड़कर 10,000 रुपये से ज्यादा की मासिक पेंशन प्राप्त करने वाले लोगों को भी इस स्कीम के तहत 6,000 रुपये सालाना नहीं मिलेंगे।

    अगर आप सरकार द्वारा तय एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया के अंतर्गत आते हैं तो आप PM Kisan स्कीम की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिए रजिस्ट्रेशन कराकर इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

    इसके लिए आपको नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करना होगाः

    1. PM Kisan की ऑफिशियल वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ को खोलिए।

    2. अब सबसे दाहिनी ओर आपको ‘Farmers Corner’ का ऑप्शन मिलेगा।

    3. यहां आधार नंबर के साथ कैप्चा कोड डालें।

    4. ड्रॉप डाउन लिस्ट से राज्य का चुनाव करें और फिर सर्च बटन पर क्लिक कीजिए।

    5. आपके सामने नया पेज खुलकर आएगा।

    6. नए पेज पर जरूरी जानकारी भरकर सबमिट कर दीजिए।

    पीएम किसान के रजिस्ट्रेशन फॉर्म में आपको नाम, पिता का नाम, पूरा पता, मोबाइल नंबर, अकाउंट नंबर, आईएफएससी कोड जैसी जानकारियों को भरना होगा। इसके साथ ही आपको उस भूखंड का भी विवरण देना होगा, जिस पर आप खेती करते हैं। यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि जमीन आपके नाम पर रजिस्टर्ड होनी चाहिए।

  • जानिए देश के बड़े महानगरों में, पेट्रोल और डीजल आज किस भाव बिक रहा है

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    नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में पिछले तीन महीनों के दौरान हुई वृद्धि के लिए तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड कीमतों का हवाला देती हैं। लेकिन अब कच्चे तेल के दाम गिर रहे हैं, मगर कंपनियां घरेलू उपभोक्ताओं तक राहत नहीं पहुंचा रही हैं। आम जनता के लिए गनीमत सिर्फ इतनी है कि पछले 21 दिनों से पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। वैसे, पिछले एक सप्ताह में कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 64 डॉलर प्रति बैरल रह गई है। अकेले गुरुवार को इसकी कीमतों में छह फीसद की गिरावट आई है। हालांकि, शुक्रवार को क्रूड ऑयल की कीमत में इजाफा हुआ है।

    तेल कंपनियों ने 27 फरवरी को अंतिम बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे। अभी दिल्ली में पेट्रोल की खुदरा कीमत 91.17 रुपये प्रति लीटर और डीजल 81.47 रुपये प्रति लीटर है। माना जा रहा है कि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को देखते हुए तेल कंपनियां कीमत बढ़ाने से गुरेज कर रही थीं। शुक्रवार को क्रूड ऑयल WTI का फ्यूचर भाव 61.46 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था, जबकि ब्रेंट ऑयल का फ्यूचर भाव 64.55 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। आइए देश में पेट्रोल-डीजल की मौजूदा कीमतें जानते हैं।

    मुंबई में शनिवार को पेट्रोल की कीमत 97.57 रुपये प्रति लीटर है। वहीं, यहां डीजल का भाव 88.60 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। चेन्नई की बात करें, तो यहां शनिवार को पेट्रोल 93.11 रुपये प्रति लीटर पर और डीजल 86.45 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है। पटना की बात करें, तो यहां शनिवार को पेट्रोल का भाव 93.48 रुपये प्रति लीटर पर है और डीजल 86.73 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है।

    इसके अलावा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल शनिवार को 89.31 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है और डीजल 81.85 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है। वहीं, चंडीगढ़ में शनिवार को पेट्रोल 87.73 रुपये प्रति लीटर पर और डीजल 81.17 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। वहीं, कोलकाता में शनिवार को पेट्रोल 91.35 रुपये प्रति लीटर पर और डीजल 84.35 रुपये प्रति लीटर पर मिल रहा है।

  • 40 फीसद तक की ग्रोथ मखाना की मांग में भारी इजाफा, वैश्विक स्तर पर बढ़ने लगी है इसकी लोकप्रियता

    नई दिल्ली। घरेलू और वैश्विक बाजारों में मखाना की मांग में भारी इजाफा हुआ है, जिससे पिछले तीन सालों में इसकी विकास दर 40 फीसद तक पहुंच गई है। भारत के अलावा चीन, जापान और थाइलैंड में मखाना की जबर्दस्त मांग है। राज्यसभा में शुक्रवार को केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री नरेंद्र तोमर बताया कि मखाना और उससे तैयार उत्पादों की चौतरफा मांग निकल रही है। पिछले तीन वर्षो के दौरान इसमें भारी वृद्धि हुई है।

    एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट डवलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) के आंकड़ों का हवाला देते हुए तोमर ने बताया कि मूल्यवर्धित मखाना उत्पादों की मांग में लगातार वृद्धि हुई है। हालांकि, मखाना के निर्यात के लिए अलग से छह अंकों का हार्मोनाइज्ड सिस्टम कोड जारी नहीं किया गया है। इसी वजह से इसके आयात अथवा निर्यात के बारे में अलग से कोई आंकड़ा नहीं है। हालांकि, मखाना की मांग और लोकप्रियता को देखते हुए इस दिशा में पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।

    तोमर ने बताया है कि मखाना और उसके उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार ने बिहार के छह जिलों को चिह्नित किया है, जहां मखाने की खेती होती है। इनमें अररिया, दरभंगा, कटिहार, मधुबनी, सहरसा और सुपौल प्रमुख हैं। इन जिलों को वन डिस्टि्रक्ट वन प्रॉडक्ट (ओडीओपी) स्कीम में शामिल कर विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। एपीडा मखाना के निर्यात के लिए बॉयर-सेल मीट्स का आयोजन करता है। इसमें बताया जाता है कि मखाना स्वास्थ्य के लिए कितना लाभप्रद है। इसमें जबर्दस्त पोषक तत्व होते हैं।

    बिहार के दरभंगा में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन स्थापित किया है। इस शोध स्टेशन ने हाल ही में मखाना की उन्नत प्रजाति की ‘स्वर्ण वैदेही’ प्रजाति जारी की है। तोमर ने बताया कि मखाना की खेती के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी विकसित की गई है। इसमें मखाना आधारित इंटीग्रेटेड फार्मिग सिस्टम भी तैयार किया गया है।