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  • Health Insurance को लेकर आपके मन में भी है ये 4 मिथक, तो कर दीजिये दूर

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    नई दिल्ली। हर व्यक्ति के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी होना जरूरी है। स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के जरिये पॉलिसीधारक का चिकित्सा व्यय कवर करता है। कोई भी ग्राहक कवरेज का चयन करने के बाद बीमा कंपनी को प्रीमियम का भुगतान करता है। दावे के समय बीमाधारक को उपचार के लिए किए गए खर्चों की प्रतिपूर्ति की जाती है। कभी भी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लें तो थोड़ा सोच समझकर लें, आप किसी मिथकों के चक्कर में न पड़ें।

    स्वास्थ्य बीमा और तथ्यों के बारे में कुछ सामान्य मिथक हैं, इन्हें जानिये

    Group Health Insurance Plan पर्याप्त है

    कंपनियों की ओर से पेश की गई समूह की योजनाएं फायदेमंद हैं, लेकिन वृद्ध माता-पिता और आश्रितों के लिए कवरेज का विस्तार नहीं हो सकता है। पॉलिसीधारक जैसे ही नौकरी छोड़ता है, पॉलिसी अमान्य हो जाती है। इसलिए, समूह स्वास्थ्य बीमा को केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा में ऐड-ऑन के रूप में लिया जाना चाहिए।

    स्वास्थ्य बीमा योजनाएं गर्भावस्था को कवर नहीं करती हैं

    कई बीमा कंपनियों ने कुछ शर्तों के साथ, गर्भधारण के लिए कवरेज शुरू कर दिया है। इनमें एक विशिष्ट अवधि की प्रतीक्षा अवधि शामिल है। ऐसा नहीं है, इसलिए ऐसे मिथक से बचें।

    सर्जरी से ठीक पहले स्वास्थ्य बीमा योजना खरीद सकते हैं

    स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों में वेटिंग पीरियड के रूप में जाना जाने वाला क्लॉज शामिल होता है। इस क्लॉज के अनुसार, पहले से मौजूद बीमारियों को खरीदे गए प्लान के बाद 2-4 साल (योजना के आधार पर) कवर किया जाता है। इस अवधि के दौरान किसी भी दावे को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

    धूम्रपान करने वालों को स्वास्थ्य बीमा योजना नहीं मिलती है

    धूम्रपान करने वाले और शराबी उच्च स्वास्थ्य जोखिम में हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि वे स्वास्थ्य बीमा के लिए अयोग्य हैं। वे भी कुछ कंपनियों के साथ थोड़ा ज्यादा पैसे खर्च करके और सख्त स्वास्थ्य जांच का भुगतान करके स्वास्थ्य बीमा खरीद सकते हैं।

  • घर बैठे चेक कर सकते हैं LIC Policy Status, जानिए हर एक जानकारी

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    नई दिल्ली। जीवन बीमा पॉलिसी (LIC) यूजर्स इसकी वेबसाइट से ऑनलाइन पॉलिसी की स्थिति की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा मोबाइल के जरिये ग्राहक अपनी नीति या प्रीमियम भुगतान स्थिति जान सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय-समय पर पॉलिसी की स्थिति की जांच करना उतना ही जरूरी है जितना कि पॉलिसी खरीदना। कई बार ऐसा होता है कि ग्राहक प्रीमियम भुगतान से चूक जाते हैं। इससे बचने के लिए पॉलिसीधारकों को जीवन बीमा पॉलिसी की समय पर जांच करनी चाहिए और आने वाले प्रीमियम भुगतान के बारे में अपडेट रहना चाहिए।

    ऑनलाइन स्टेटस जांच करने के लिए पहली बार यूजर्स को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरने और लॉगिन क्रेडेंशियल चुनना होगा। रजिस्ट्रेशन पूरा होने पर एक पुष्टिकरण मेल रजिस्टर्ड ईमेल एड्रेस पर भेजा जाएगा।

    LIC की वेबसाइट पर रजिस्टर कैसे करें।

    licindia.in पर जाएं और ‘नए यूजर’ पर क्लिक करें।

    यूजर-आईडी, पासवर्ड चुनें और सभी आवश्यक जानकारी दें।

    ई-सेवाओं का लाभ उठाने के लिए ‘ई-सेवाओं’ पर क्लिक करें, बनाई गई यूजर-आईडी के साथ लॉग इन करें और दिए किए गए फॉर्म को भरकर ई-सेवाओं का लाभ उठाने के लिए पॉलिसी को रजिस्टर करें।

    • फॉर्म को प्रिंट करें, उस पर हस्ताक्षर करें और फॉर्म की स्कैन की गई कॉपी अपलोड करें।
    • पैन कार्ड या आधार कार्ड या पासपोर्ट की स्कैन की गई कॉपी अपलोड करें।
    • ऑफिस से सत्यापन के बाद एक पावती ई-मेल और एसएमएस पॉलिसीधारक को भेजी जाएगी।

    LIC policy status online कैसे करें चेक

    • एलआईसी की वेबसाइट खोलें और ऑनलाइन सेवाओं के तहत ‘ग्राहक पोर्टल’ पर क्लिक करें।
    • रजिस्टर उपयोगकर्ता विकल्प का चयन करें।
    • अब यूजर का नाम, जन्म तिथि, पासवर्ड दर्ज करें और ‘Go’ पर क्लिक करें।
    • रजिस्टर ग्राहकों के लिए पॉलिसी टूल को लिस्टेड करने वाला एक पेज खुल जाएगा।
    • अब, ‘एनरोल की गई पॉलिसी देखें विकल्प चुनें।
    • नामांकन की तारीख, प्रीमियम राशि और बोनस के साथ सभी रजिस्टर्ड पॉलिसी वाला एक पेज खुलेगा।
    • ग्राहक पॉलिसी नंबर पर क्लिक करके पॉलिसी की स्थिति देख सकते हैं।

  • घर बैठे चेक कर सकते हैं LIC Policy Status, जानिए हर एक जानकारी

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    नई दिल्ली। जीवन बीमा पॉलिसी (LIC) यूजर्स इसकी वेबसाइट से ऑनलाइन पॉलिसी की स्थिति की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा मोबाइल के जरिये ग्राहक अपनी नीति या प्रीमियम भुगतान स्थिति जान सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, समय-समय पर पॉलिसी की स्थिति की जांच करना उतना ही जरूरी है जितना कि पॉलिसी खरीदना। कई बार ऐसा होता है कि ग्राहक प्रीमियम भुगतान से चूक जाते हैं। इससे बचने के लिए पॉलिसीधारकों को जीवन बीमा पॉलिसी की समय पर जांच करनी चाहिए और आने वाले प्रीमियम भुगतान के बारे में अपडेट रहना चाहिए।

    ऑनलाइन स्टेटस जांच करने के लिए पहली बार यूजर्स को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरने और लॉगिन क्रेडेंशियल चुनना होगा। रजिस्ट्रेशन पूरा होने पर एक पुष्टिकरण मेल रजिस्टर्ड ईमेल एड्रेस पर भेजा जाएगा।

    LIC की वेबसाइट पर रजिस्टर कैसे करें।

    licindia.in पर जाएं और ‘नए यूजर’ पर क्लिक करें।

    यूजर-आईडी, पासवर्ड चुनें और सभी आवश्यक जानकारी दें।

    ई-सेवाओं का लाभ उठाने के लिए ‘ई-सेवाओं’ पर क्लिक करें, बनाई गई यूजर-आईडी के साथ लॉग इन करें और दिए किए गए फॉर्म को भरकर ई-सेवाओं का लाभ उठाने के लिए पॉलिसी को रजिस्टर करें।

    • फॉर्म को प्रिंट करें, उस पर हस्ताक्षर करें और फॉर्म की स्कैन की गई कॉपी अपलोड करें।
    • पैन कार्ड या आधार कार्ड या पासपोर्ट की स्कैन की गई कॉपी अपलोड करें।
    • ऑफिस से सत्यापन के बाद एक पावती ई-मेल और एसएमएस पॉलिसीधारक को भेजी जाएगी।

    LIC policy status online कैसे करें चेक

    • एलआईसी की वेबसाइट खोलें और ऑनलाइन सेवाओं के तहत ‘ग्राहक पोर्टल’ पर क्लिक करें।
    • रजिस्टर उपयोगकर्ता विकल्प का चयन करें।
    • अब यूजर का नाम, जन्म तिथि, पासवर्ड दर्ज करें और ‘Go’ पर क्लिक करें।
    • रजिस्टर ग्राहकों के लिए पॉलिसी टूल को लिस्टेड करने वाला एक पेज खुल जाएगा।
    • अब, ‘एनरोल की गई पॉलिसी देखें विकल्प चुनें।
    • नामांकन की तारीख, प्रीमियम राशि और बोनस के साथ सभी रजिस्टर्ड पॉलिसी वाला एक पेज खुलेगा।
    • ग्राहक पॉलिसी नंबर पर क्लिक करके पॉलिसी की स्थिति देख सकते हैं।

  • योनो एप से शॉपिंग करने पर मिलेगा जानिए कब तक है मौका, भारी डिस्काउंट व कैशबैक

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    नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े कर्जदाता भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने यूनिक शॉपिंग कार्निवल योनो सुपर सेविंग डेज (YONO Super Saving Days) के दूसरे संस्करण की लॉन्चिंज की घोषणा कर दी है। चार मार्च से शुरू होने जा रहा यह चार दिवसीय शॉपिंग कार्निवल 7 मार्च तक चलेगा। इस कार्निवल में एसबीआई बैंकिंग और लाइफस्टाइल प्लेटफॉर्म योनो के यूजर्स के लिए आकर्षक डिस्काउंट और कैशबैक ऑफर होंगे।

    एसबीआई द्वारा योनो सुपर सेविंग डेज सेल योनो यूजर्स और मर्चेंट पार्टनर्स की जबर्दस्त प्रतिक्रिया के चलते लगातार दूसरे महीने लायी गई है। इस शॉपिंग कार्निवल के पहले संस्करण 4 से 7 फरवरी, 2021 के दौरान ट्रांजेक्शन वॉल्यूम में भारी उछाल देखने को मिला था।

    चार मार्च से शुरू हो रहे दूसरे संस्करण में यात्रा, आतिथ्य, स्वास्थ्य, परिधानों और ऑनलाइन शॉपिंग सहित प्रमुख श्रेणियों में बेहद आकर्षक ऑफर देखने को मिलेंगे। इस शॉपिंग फेस्टिवल के दौरान अपने 36 मिलियन से अधिक यूजर्स को शानदार खरीदारी का मौका देने के लिए, योनो ने Amazon, Apollo 24I7, EaseMyTrip, OYO, Vedantu और Raymond सहित कुछ टॉप मर्चेंट्स के साथ भागीदारी की है।

    योनो सुपर सेविंग डेज के इस मार्च 2021 संस्करण में ग्राहक होटल बुकिंग, फ़्लाइट बुकिंग और परिधानों, स्वास्थ्य श्रेणियों पर 50 फीसद तक छूट प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही अमेजन पर अतिरिक्त 7.5 फीसद असीमित कैशबैक का लाभ उठा सकते हैं।

  • अधिक निकासी व जमा पर लगेगा शुल्क, नकद निकासी व नकद जमा के नियम, IPPB एक अप्रैल से बदलने जा रहा है

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    नई दिल्ली। इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक (आइपीपीबी) आगामी पहली अप्रैल से नकद निकासी व नकद जमा करने के नियम बदलने जा रहा है। उस दिन से तय सीमा से अधिक बार नकद निकासी एवं नगद जमा पर ग्राहकों को अलग से शुल्क देना होगा। इस संबंध में इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक ने नोटिस जारी कर दिया है।

    आइपीपीबी के नए नियम के मुताबिक बेसिक सेविंग खाते से एक महीने में चार बार नकद निकासी करने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इसके बाद अगर नकद निकासी की जाती है तो निकासी का 0.50 फीसद या कम से कम 25 रुपये प्रति निकासी शुल्क के रूप में देना होगा।

    सेविंग और करंट अकाउंट के मामले में हर महीने 25,000 रुपये तक की नकद निकासी बिना किसी शुल्क के हो सकेगी। इससे अधिक की नकद निकासी पर खाताधारकों को निकासी का 0.50 फीसद या कम से कम 25 रुपये शुल्क देना होगा।

    सेविंग या करंट खाताधारकों को तय सीमा से अधिक नकद जमा पर भी शुल्क देना होगा। ये खाताधारक हर महीने बिना किसी शुल्क के 10,000 रुपये नकद अपने खाते में जमा कर सकेंगे। इससे अधिक जमा करने पर उन्हें जमा होने वाली राशि का 0.50 फीसद या कम से कम 25 रुपये हर जमा पर शुल्क देने होंगे।

    हालांकि, बेसिक सेविंग खाताधारकों के लिए नकद जमा की सीमा तय नहीं की गई है। आइपीपीबी ने अपने आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (एईपीएस) के नियमों में भी बदलाव किया है जो पहली अप्रैल से लागू होंगे।

  • भरोसा कर आगे बढ़ने पर,छह हजार कारोबारी नियम करेंगे खत्म, पीएम: सरकार का जोर देश के नागरिकों पर

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    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि हर चीज में सरकार का दखल समाधान की जगह व्यवधान ज्यादा पैदा करता है। इसलिए सरकार का प्रयास इस साल केंद्र और राज्य स्तर के 6,000 से अधिक कारोबारी नियमों (अनुपालन) को कम करने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि नियमों के पालन का बोझ घटना चाहिए और सरकार इसे लेकर काफी गंभीर है। उन्होंने कहा कि अब टेक्नोलॉजी आ गई है। इसलिए हर चीज के लिए बार-बार फॉर्म भरने की प्रक्रिया को सरकार खत्म करना चाहती है।

    प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआइ) स्कीम पर एक वेबिनार के संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का जोर देश के नागरिकों पर भरोसा कर आगे बढ़ने पर है। इसलिए स्व नियामक, स्व सत्यापन और स्व प्रमाणीकरण पर जोर दिया जा रहा है। बजट में पीएलआइ स्कीम से जुड़ी योजनाओं के लिए दो लाख करोड़ रुपये के प्रविधान का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि पीएलआइ स्कीम द्वारा ही आने वाले पांच वर्षों के दौरान देश में लगभग 520 अरब डॉलर यानी लगभग 40 लाख करोड़ रुपये मूल्य के उत्पादन का अनुमान है।

    पीएलआइ स्कीम से जुड़े क्षेत्रों में रोजगार के भी दोगुना होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि पीएलआइ स्कीम से एमएसएमई को काफी लाभ मिलेगा, क्योंकि हर सेक्टर में प्रमुख यूनिट लगेंगे और प्रमुख यूनिटों को सप्लाई चेन की जरूरत होगी, जो एमएसएमई पूरी करेंगे।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वैक्सीन की लाखों डोज की सप्लाई से भी भारत का एक ब्रांड बन रहा है, भारत की पहचान बन रही है और इसका फायदा कारोबार में भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि जो विमान वैक्सीन की लाखों डोज लेकर दुनिया भर में जा रहे हैं, वे खाली नहीं आ रहे हैं। वे अपने साथ भारत के प्रति बढ़ा हुआ भरोसा, आत्मीयता और भारत के साथ एक भावनात्मक लगाव भी ला रहे हैं।

    मोदी ने कहा कि आज भारत एक ब्रांड बन चुका है। अब उद्यमियों को सिर्फ अपने उत्पाद की पहचान बनानी है। सस्ता माल जल्दी बिकने की बात अपनी जगह सही हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता की ताकत बड़ी होती है।

  • गंभीरता से विचार की जरूरत, उसी अनुसार बनाएं निवेश की रणनीति, आपातकालीन फंड पर

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    नई दिल्ली। कोरोना संकट के दौरान हम सबने काफी कुछ सीखा है। इस संकट ने हमें कई मायनों में आत्मनिर्भर बनने की सीख दी है। लेकिन सबसे बडी सीख पर्सनल फाइनेंस को लेकर है, क्योंकि यह महामारी खत्म हो जाने के वर्षों बाद तक हम सबके लिए प्रासंगिक रहने वाली है। सीख यह है कि मुसीबत कभी भी आ सकती है और सब पर एक साथ आ सकती है। ऐसे में बेहतर यही है कि आपातकालीन फंड को गंभीरता से लें और उस हिसाब से निवेश की रणनीति बनाएं।

    मुझे लगता है कि हम लोग महामारी से मिली सीख को लेकर थोड़ा थक गए हैं। हेल्थ की बात हो, अपना काम हो, खाना बनाना हो या खुद के बाल काटने हों। हमने महामारी के दौरान बहुत कुछ सीखा है। मुझे पता नहीं कि कितने लोगों ने खुद अपने बाल काटना सीखा है। लेकिन महामारी ने पर्सनल फाइनेंस के लिहाज से हमें सबसे ज्यादा सीखने का अवसर दिया है। बाल काटने और खाना बनाने के मुकाबले पर्सनल फाइनेंस से मिली सीख थोड़ी अलग है।

    अलग इसलिए, क्योंकि पर्सनल फाइनेंस से मिली सीख की जरूरत महामारी खत्म होने के बाद भी रहेगी। महामारी ने हमें एक बहुत अहम बात सिखाई है। आपातकालीन हालात आते हैं। और अक्सर ये हमारी उम्मीदों से कहीं ज्यादा असर डालने वाले होते हैं। इसलिए आपातकालीन फंड बनाना पर्सनल फाइनेंस की रणनीति का सबसे अहम हिस्सा होना चाहिए।

    आमतौर पर यह बात सभी लोग समझते हैं। लेकिन जब जीवन सरल-सहज तौर पर चल रहा होता है, तो अक्सर लोग इस बात को गंभीरता से नहीं लेते हैं कि उनको आपातकालीन हालात का सामना कभी भी करना पड सकता है। बहुत से लोगों को इस बात ने चौंकाया है कि आमतौर पर हर व्यक्ति, समुदाय, शहर, देश और पूरी दुनिया आपात स्थिति का सामना कर रह रही थी।

    आम तौर पर लोग सोचते हैं कि आपात स्थितियों का सामना करना भी पडा तो परिवार या दोस्तों से मदद मिल जाएगी। उनकी यह सोच इस मान्यता पर आधारित है कि इस बात की संभावना बेहद कम है कि जब उनके सामने आपात स्थितियां आएंगी उसी समय उनके परिवार के लोग और दोस्त भी आपातकालीन हालात का सामना कर रहे होंगे।

    पिछले वर्ष हम सब जिस संकट से गुजरे हैं, उसने अधिकतर लोगों की इस मान्यता को तोड़कर रख दिया है कि आपातकालीन हालात से सबका एक साथ सामना नहीं होगा। उसी तरह कारोबार से जु़ड़े लोगों को यह भरोसा होता है कि उनका रोजमर्रा का काम चलता रहेगा। यह बात शायद ही किसी ने सोची होगी कि हर चीज पर आपातकालीन हालात का असर होगा। हालांकि, तथ्य यह है कि पिछले 100 वर्षो में पूरी दुनिया में और निश्चित तौर पर भारत में ऐसे आपातकालीन हालात पैदा हुए हैं, जिनका असर पूरे समाज पर पडा है।

    वर्ष 2020 का सबसे अहम संदेश यह है कि हमें नए सिरे से इसका आकलन करने की जरूरत है कि हालात कितनी तेजी से खराब से बहुत खराब हो सकते हैं। आखिरकार हम अपने निवेश का नए सिरे से आकलन कर ही रहे हैं। ऐसा नहीं है कि निवेश बदल गया है, बल्कि हमारे हालात बदल गए हैं। और अगर हालात नहीं भी बदले हैं तो हम इस बात को लेकर चिंतित हैं कि हालात भविष्य में और बुरे हो सकते हैं।

    (लेखक वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन डॉट कॉम के सीईओ हैं। प्रकाशित विचार उनके निजी हैं।)

  • सरकार का जोर, गेहूं पैदावार बढ़ाने पर खाद्य मंत्रालय ने करीब 10 फीसद अधिक गेहूं खरीदने का तय किया लक्ष्य

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    नई दिल्ली। रबी सीजन में अच्छे मौसम और रोगों का प्रकोप न होने तथा गेहूं बोआई का रकबा बढ़ जाने की वजह से उत्पादकता के साथ कुल उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर रहने का अनुमान लगाया गया है। कृषि विज्ञानियों का दावा है गेहूं की पैदावार घोषित अनुमान के मुकाबले अधिक होगी। चालू सीजन में 10.92 करोड़ टन के साथ गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान है।

    कृषि विज्ञानियों का मानना है कि पैदावार इससे कहीं अधिक हो सकती है। चालू सीजन में गेहूं बोआई का रकबा पिछले साल के 6.20 करोड़ हेक्टेयर के मुकाबले 6.52 करोड़ हेक्टेयर हो गया है। इससे कुल उत्पादन में वृद्धि तय है। इसे देखते हुए खाद्य मंत्रालय ने आगामी खरीद सीजन में गेहूं की सरकारी खरीद का लक्ष्य लगभग 10 फीसद बढ़ा दिया है, जिसकी तैयारियों के लिए सभी राज्यों को आगाह कर दिया गया है।

    इस बार कुल खरीद 4.27 करोड़ टन के आसपास हो सकती है। इसमें पंजाब में 1.30 करोड़ टन, मध्य प्रदेश में 1.35 करोड़ टन, हरियाणा में 50 लाख टन और उत्तर प्रदेश में 55 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य है।

    करनाल स्थित भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉक्टर ज्ञानेंद्र प्रताप ने बताया पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गेहूं की फसल बहुत अच्छी है। दिन में तापमान जरूर सामान्य से अधिक हो गया है, लेकिन रात का तापमान सामान्य है। लिहाजा उत्पादकता के बहुत प्रभावित होने का खतरा नहीं है।

    बनारस हिंदू विश्वविद्याल के कृषि विज्ञानी प्रोफेसर रमेश कुमार सिंह का कहना है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में हालात बहुत अच्छे नहीं है। यहां दिन के साथ रात के तापमान में भी असामान्य वृद्धि दर्ज की जा रही है। ऐसे में इस क्षेत्र की फसल की उत्पादकता में कुछ कमी आने की आशंका बनी हुई है।

  • रखिये इनका ध्यान, EPF निकासी दावे इन 5 वजहों से हो सकते हैं खारिज

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    नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ग्राहकों को कुछ परिस्थितियों में भविष्य निधि कोष से आंशिक निकासी या ‘अग्रिम’ पैसे निकालने की अनुमति देता है। हालांकि, ग्राहकों के बैंक खातों में पैसे जमा होने में कुछ दिन का समय लगता है, लेकिन कई बार दावे खारिज हो जाते हैं।

    ईपीएफ ऑनलाइन दावे की अस्वीकृति के क्या हो सकते हैं संभावित कारण, जानिए…

    बैंक डिटेल का अपडेट न होना

    ईपीएफ निकासी दावे के ख़ारिज होने का एक कारण EPFO मेंबर पोर्टल पर बैंक खाता संख्या और आईएफएससी कोड का अपडेट न होना भी है।

    गलत मेंबर डिटेल्स

    जब मेंबर डिटेल्स स्थापना रिकॉर्ड के साथ मेल नहीं खाते हैं तो भी दावे ख़ारिज हो सकते हैं। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सदस्य का नाम और जन्मतिथि सही हो।

    चेक बुक कॉपी और हस्ताक्षर का साफ न होना

    सदस्य का हस्ताक्षर स्पष्ट होना चाहिए और कार्यालय में उपलब्ध रिकॉर्ड के साथ मेल खाना चाहिए, अन्यथा दावे अस्वीकार हो सकते हैं।

    ईपीएफ निकासी के दावे को ऑनलाइन दर्ज करते समय, ग्राहकों को ईपीएफओ रिकॉर्ड में रजिस्टर्ड बैंक खाते की जांच की स्कैन की हुई कॉपी भी देनी होती है। अस्पष्ट जांच भी अस्वीकृति का कारण बन सकते हैं।

    अधूरा केवाईसी

    ईपीएफ दावे की अस्वीकृति का एक और कारण अपूर्ण केवाईसी हो सकता है। यदि केवाईसी डिटेल पूर्ण और सत्यापित नहीं हैं, तो ईपीएफओ ईपीएफ निकासी दावे को अस्वीकार कर सकता है।

    आधार और यूएएन जुड़ा न हो

    कोरोनावायरस महामारी का हवाला देते हुए दावा दायर करने के इच्छुक व्यक्ति के लिए, आधार को सत्यापित किया जाना चाहिए और उसे यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) से जोड़ा जाना चाहिए। अगर यूएएन को आधार से लिंक नहीं किया जाता है, तो ईपीएफ निकासी दावे को खारिज किया जा सकता है।

  • संपत्ति में बढ़ोत्तरी के मामले में गौतम अदाणी ने इस साल मस्क और बेजोस को भी पछाड़ा

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    नई दिल्ली। अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी की संपत्ति में इस साल भारी बढ़ोत्तरी हुई है। संपत्ति में वृद्धि के मामले में उन्हें भारी सफलता प्राप्त हुई है। अदाणी ने इस वर्ष संपत्ति अर्जन के मामले में दुनिया के सबसे बड़े धनकुबेरों एलन मस्क, जेफ बेजोस और बिल गेट्स को भी पछाड़ दिया है। अदाणी के कारोबारों में निवेशकों द्वारा अच्छा-खासा निवेश किये जाने के चलते उनकी संपत्ति में यह इजाफा हुआ है। अदाणी ग्रुप के पास पोर्ट्स से लेकर पावर प्लांट्स तक के कारोबार हैं। सिर्फ एक को छोड़कर अदाणी समूह के सभी शेयरों में इस साल कम से कम 50 फीसद की तेजी आई है।

    ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, इस वर्ष अब तक गौतम अदाणी की संपत्ति में 15.8 बिलियन डॉलर जुड़े हैं। वहीं, अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला के सीईओ एलन मस्क की संपत्ति में इस वर्ष अब तक 8.93 बिलियन डॉलर जुड़े हैं। इसके अलावा बिल गेट्स की संपत्ति में इस साल अब तक 236 मिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है। वॉरेन बफे की बात करें, तो उनकी संपत्ति में इस साल अब तक 11.7 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है।

    ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स में गौतम अदाणी इस समय 49.6 बिलियन डॉलर की संपत्ति के साथ 26 वें स्थान पर हैं। विश्व के सबसे अमीर लोगों की इस सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के चेयरमैन मुकेश अंबानी 10वें स्थान पर हैं। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, उनकी संपत्ति इस समय 83.1 बिलियन डॉलर है। साल भर में उनकी संपत्ति में 6.37 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है।

    गौतम अदाणी की संपत्ति में यह बढ़ोतरी ऐसे वक्त में हुई है, जब उनकी कंपनी एयरपोर्ट और डाटा सेंटर जैसे कारोबारों का ओर विस्तार कर रही है। हाल ही में उन्होंने कहा था कि वारबर्ग पिंकस की शाखा विंडी लेकसाइड इंवेस्टमेंट लिमिटेड ने कंपनी में 0.49 फीसद शेयर 800 करोड़ रुपये में खरीदे हैं। पिछले एक वर्षो के दौरान अदाणी ग्रुप की ज्यादातर कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल दर्ज किया गया है।