Category: business

  • 2.5 फीसदी बढ़ा मोबाइल पुर्जो पर आयात शुल्क , महंगे होंगे फोन

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    नई दिल्ली। घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक और कदम उठाते हुए सरकार ने सोमवार को मोबाइल चार्जर और कुछ अन्य छोटे पुर्जो पर आयात (सीमा) शुल्क में 2.5 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की। इस कदम के साथ ही अब देश में मोबाइल फोन महंगे हो जाएंगे।

    वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण के दौरान कहा, “चार्जर और मोबाइल फोन के कुछ पार्ट्स पर छूट वापस लेने से स्मार्टफोन के स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। घरेलू इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण तेजी से बढ़ा है। अब हम मोबाइल और चार्जर जैसी वस्तुओं का निर्यात कर रहे हैं।”

    उन्होंने कहा, “अधिक घरेलू मूल्य संवर्धन के लिए, हम चार्जर के कुछ पार्ट्स और मोबाइल फोन के छोटे पुर्जो पर कुछ छूट वापस ले रहे हैं। अब मोबाइल के कुछ पार्ट्स के दाम ‘शून्य’ से 2.5 प्रतिशत की दर तक बढ़ जाएंगे।”

    केंद्र ने पहले ही विशेष रूप से मोबाइल फोन निर्माण के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र के लिए उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शुरू की है, ताकि आयात पर अंकुश लगाया जा सके।

    पिछले साल अक्टूबर में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने पीएलआई योजना के तहत भारत में मोबाइल फोन के निर्माण के लिए अंतर्राष्ट्रीय आवेदकों में से सैमसंग, फॉक्सकॉन होन हेई, पेगाट्रॉन, राइजिंग स्टार और विस्ट्रॉन की आवेदन को मंजूरी दी थी।

    योजना के तहत मोबाइल फोन निर्माण के लिए स्वीकृत घरेलू कंपनियों में लावा, भगवती (माइक्रोमैक्स), पैडगेट इलेक्ट्रॉनिक्स, यूटीएल नियोलिंक और ऑप्टिमस इलेक्ट्रॉनिक्स शामिल हैं।

    बता दें कि फिलहाल ज्यादातर कंपनियां चीन और दूसरे देशों से कलपुर्जे मंगवाकर भारत में असेंबल करती हैं। ऐसे में बजट का असर असेंबल होने वाले मेक इन इंडिया मोबाइल पर पड़ेगा। हालांकि इससे लंबी अवधि में भारत में मोबाइल विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और भारत में भी ये कंपनियां कलपुर्जे तैयार करने के लिए प्रोत्साहित होंगी।

  • विफल रहेगा महंगाई पर अंकुश लगाने में बजट 2021

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    नई दिल्ली। देश के अधिकांश लोगों ने सोमवार को संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2021 से असंतोष व्यक्त किया। लोगों का कहना है कि बजट महंगाई को कम करने में सक्षम नहीं होगा। लोगों ने एक सर्वेक्षण के दौरान अपने विचार व्यक्त किए। यह सर्वेक्षण देश के विभिन्न हिस्सों में 1,200 से अधिक लोगों के बीच या²च्छिक (रेंडमली) किया गया। सीतारमण की ओर से लोकसभा में बजट पेश किए जाने के तुरंत बाद यह सर्वेक्षण किया गया।

    सर्वेक्षण में शामिल लोगों से सवाल पूछा गया कि क्या आपको लगता है कि इस बजट के बाद कीमतें (महंगाई) कम हो जाएंगी, इस पर 46.1 प्रतिशत लोगों ने कहा, “बिल्कुल नहीं।”

    पिछले साल बजट 2020 के बाद जब लोगों से यही सवाल पूछा गया था तो लगभग 43.3 प्रतिशत लोगों ने यही जवाब दिया था।

    अन्य पिछले बजटों के साथ इस बार के बजट की तुलना की जाए तो पता चलता है कि 2015 में 47 प्रतिशत ने यही जवाब दिया था, जबकि 2016 में 46.5 प्रतिशत, 2017 में 47 प्रतिशत, 2018 में 56.8 प्रतिशत और 2019 में 44.4 प्रतिशत लोगों ने ऐसा ही जवाब दिया था।

    इस वर्ष के बजट के बाद लगभग 21 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इस साल के बजट से महंगाई में थोड़ी कमी आएगी। वहीं 2020 में 31 प्रतिशत लोगों ने इसी तरह की राय रखी थी। इसके अलावा 2015 के बजट के बाद लगभग 31.3 प्रतिशत, 2016 के बजट के बाद 29.1, 2017 में 32.8 प्रतिशत, 2018 में 26.3 प्रतिशत और 2019 में 29.1 प्रतिशत लोगों ने ऐसे ही विचार प्रकट किए थे।

    वहीं इस बार 18 प्रतिशत लोगों का एक समूह ऐसा भी देखने को मिला, जो बजट के लिए सकारात्मक सोच रखता है, क्योंकि इन 18 प्रतिशत लोगों का मानना है कि यह बजट ‘काफी हद तक’ महंगाई पर लगाम कसेगा। इसके अलावा 14.8 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे ‘नहीं जानते या कह नहीं सकते’ कि यह बजट महंगाई को कम करने में मदद कर पाएगा।

  • आम आदमी पार्टी – चमड़ा उद्योग के लिए है विनाशकारी है आम बजट

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    ‘आप’ नेताओं ने कहा कि स्थानीय उद्योगों को केंद्रीय बजट से कोरोना के कारण होने वाले आर्थिक संकट से कुछ हद तक राहत की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने छोटे व्यवसायों परआंखे मूंद ली।

    उन्होंने कहा कि इस बजट से स्थानीय चमड़ा उद्योग को नुकसान होगा। लेदर और स्पोट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को बजट में कोई राहत नहीं दी गई। यह बजट स्थानीय उद्योग पर बोझ डालेगा जो पहले से ही गंभीर संकट का सामना कर रहा है। फुटवियर उद्योग चमड़े के आयात पर 90 प्रतिशत निर्भर था। बजट में गीला नीले चमड़े पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया गया है, पहले गीला नीले चमड़े पर कोई आयात शुल्क नहीं था। चमड़े पर आयात शुल्क लगाने से लोकल लेदर इंडस्ट्री खत्म होने के कगार पर पहुंच जाएगी।

    आप नेताओं ने कहा, लघु उद्योगों की इस तरह की उपेक्षा न केवल उद्योगों पर अधिक बोझ डालेगी बल्कि कर्मचारियों की नौकरी को भी खतरे में डालेगी। केंद्र सरकार को उद्योगों के लिए एक विशेष राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए ताकि उन्हें कोरोना के कारण होने वाले आर्थिक संकट से निजात मिले। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल मोदी के साथी उद्दोगपतियों को लाभ पहुंचाने वाला है। यह बजट महंगाई के साथ-साथ आम आदमी की समस्याओं को भी बढ़ाने का काम करेगा। बजट में डीजल और पेट्रोल पर कृषि सेस लगाया गया है जो उद्योग को और प्रभावित करेगा। परिवहन और ट्रांसपोर्टेशन इससे महंगा होगा, जिससे महंगाई बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि यह बेहद आश्चर्यजनक है कि किसान भारी मात्रा में खेती के लिए डीजल का उपभोग करते हैं और उनके विकास के लिए ही डीजल पर सेस लगाया गया है। युवाओं को रोजगार देने के लिए भी बजट में कुछ नहीं किया गया और पंजाब को तो बजट में पूरी तरह से नजरअंदाज ही कर दिया गया। पंजाब के लिए कोई राहत पैकेज की घोषणा नहीं की गई है। बजट देखकर साफ पता चलता है कि मोदी सरकार पंजाब के साथ भेदभाव कर रही है।

  • केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- एयरो इंडिया में भाग लेने वाले 45 MSMES को पहले ही 203 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिला

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    नई दिल्ली। बेंगलुरु में ‘स्टार्टअप मंथन’ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि यह कार्यक्रम कोरोना के बाद हमारे क्षमता को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। ‘स्टार्टअप मंथन’ के 3 प्रमुख स्तंभों पर आधारित है- सिम्पलीफिकेशन एंड हैंडहोल्डिंग,फंडिंग एंड इंसेंटिव और इंडस्ट्री एकेडमी ऑफ पार्टनरशिप।

    मुझे यह घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है कि एयरो इंडिया में भाग लेने वाले 45 MSMEs को पहले ही 203 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिल चुके हैं। यह एक बहुत अच्छी खबर है और मुझे यकीन है कि आने वाले समय में ये और बढ़ेगा।

  • एचसीएल कम्पनी कर्मचारियों को 700 करोड़ का बोनस देगी, कंपनी के 1.59 लाख से अधिक कर्मियों को फायदा होगा

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    नई दिल्ली। नोएडा स्थित बहुराष्ट्रीय आइटी कंपनी एचसीएल (HCL) टेक्नोलॉजीज ने अपने कर्मचारियों को 700 करोड़ रुपये से अधिक का बोनस देने का निर्णय लिया है। कंपनी 10 अरब डॉलर (करीब 72,900 करोड़ रुपये) का राजस्व लक्ष्य हासिल करने की खुशी में कर्मचारियों को यह वन-टाइम बोनस दे रही है।

    सोमवार को इसकी जानकारी देते हुए कंपनी की ओर से कहा गया कि बोनस की राशि का वितरण भारत समेत अन्य देशों में कार्यरत कर्मचारियों के बीच इसी माह कर दिया जाएगा। इसमें कर्मचारियों को उनके 10 दिनों के वेतन के बराबर राशि दी जा रही है।

    कंपनी द्वारा जारी बयान में कहा गया कि 10 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य कर्मचारियों की बदौलत पूरा हुआ है। एचसीएल के चीफ ह्यूमन रिसोर्सेज ऑफिसर अप्पाराव वीवी ने कहा कि कोरोना महामारी की कठिन घड़ी में भी कर्मचारियों की कार्य के प्रति प्रतिबद्धता बरकरार रही।

    कंपनी ने बयान में कहा कि कर्मचारियों के जुनून की बदौलत ही कंपनी ने राजस्व को नई ऊंचाई पर ले जाने में कामयाबी हासिल की। बोनस के जरिये कंपनी ने कर्मचारियों के प्रति अपना आभार जताया है। इसका लाभ कंपनी के 1.59 लाख से अधिक कर्मियों को प्राप्त होगा।

    यह स्पेशल बोनस कर्मचारियों को फरवरी, 2021 में मिलेगा। एचसीएल टेक्नोलॉजीज के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी अप्पाराव वी वी ने कहा, ‘महामारी के बावजूद एचसीएल परिवार के हर सदस्य ने अपनी जोरदार प्रतिबद्धता और जुनून को दर्शाया और संगठन के विकास में योगदान दिया।’ बता दें कि 31 दिसंबर 2020 तक के आंकड़ों के अनुसार, एचसीएल के फुल टाइम कर्मचारियों की संख्या 159682 थी।

  • चालू वित्त वर्ष में घाटा 9.5 फीसदी पर पहुँच जाने का अनुमान है, सरकार की राजकोषीय घटे पर पैनी नजर : वित्त मंत्री

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    नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि की राजकोषीय घाटे की स्थिति पर पैनी नजर है। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा 9.5 फीसद पर पहुंच जाने का अनुमान है। उद्योग संगठन पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का ‘मूल मंत्र’ यह है कि राजकोषीय घाटे से बचना संभव नहीं है। लेकिन इस संकट के सावधानीपूर्वक निदान की जरूरत है।

    कोरोना संकट के चलते सरकार ने चालू वित्त वर्ष में कई राहत पैकेज घोषित किए हैं। इससे देश का राजकोषीय घाटा 3.5 फीसद के अनुमान से काफी आगे निकल चुका है। चालू वित्त वर्ष के लिए संशोधित अनुमानों के मुताबिक राजकोषीय घाटा जीडीपी का 9.5 फीसद रहने वाला है। इस वर्ष पहली अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष के लिए सरकार ने राजकोषीय घाटा 6.8 फीसद रहने का अनुमान लगाया है।

    वित्त मंत्री ने कहा कि बजट पूरी तरह पारदर्शी है और सरकार ने कुछ भी छुपाया नहीं है। सरकार का जो भी आमदनी-खर्च है, वह सबके सामने है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसी एक डीएफआइ नहीं, बल्कि कई निजी डेवलपमेंट फाइनेंस इंस्टीट्यूशन (डीएफआइ) की जरूरत है।

    छोटे उद्यमी आसानी से ले सकेंगे 25 लाख तक के कर्ज

    एमएसएमई क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को अब 25 लाख तक के कर्ज आसानी से मिल सकेंगे। हाल ही में आरबीआइ की नई व्यवस्था से छोटे उद्यमियों को यह लाभ मिलने जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में छह करोड़ एमएसएमई हैं और इनमें से लाखों उद्यमी अकेले ही कारोबार चला रहे हैं। ये सभी माइक्रो या सूक्ष्म उद्यमी की श्रेणी में आते हैं।

    आरबीआइ की नई व्यवस्था से मुख्य रूप से इन सूक्ष्म उद्यमियों को लाभ मिलेगा। एमएसएमई अगले 31 मार्च तक पूरी तरह से सरकारी गारंटी वाले कर्ज भी ले सकते हैं जिसकी घोषणा पिछले वर्ष मई में की गई थी। उद्यमियों ने बताया कि आरबीआइ के नए प्रविधान के मुताबिक बैंक अपने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में से एमएसएमई को 25 लाख रुपये तक के कर्ज दे सकते हैं।

  • ये बना 7000 रुपये से कम कीमत वाला भारत का सबसे भरोसेमंद स्मार्टफोन ब्रांड : CMR रिपोर्ट, Samsung छूटा पीछे

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    नई दिल्ली। भारतीय स्मार्टफोन मार्केट में 7,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन को काफी पसंद किया जाता है। अगर 7000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन ब्रांड की बात करें, तो इसमें itel ने बाजी मारी है। स्मार्टफोन ब्रांड itel ने 7000 रुपये से कम कीमत वाले बेस्ट स्मार्टफोन की लिस्ट में Samsung को पीछे छोड़कर टॉप स्पॉट हासिल किया है। CMR के सर्वे में ब्रांड ट्रस्ट के मामले में itel को 42 फीसदी के साथ पहला स्थान मिला है। जबकि 39 फीसदी ब्रांड ट्रस्ट के साथ Samsung दूसरे पायदान पर है। वही 45 फीसदी के साथ तीसरे पायदान पर Xiaomi का नाम सामने आता है। itel को प्रोडक्ट क्वॉलिटी में 42 फीसदी, अफोर्डेबिलिटी में 44 फीसदी, ट्रेंडी टेक्नोलॉजी में 42 फीसदी और लोकलाइजेशन और इनोवेटिव मार्केट अप्रोच में 42 फीसदी और सेल्स सर्विस में 43 फीसदी लोगों ने पंसद किया है।

    किस स्मार्टफोन को कितने लोगों ने किया पसंद 

    • 7000 रुपये और उससे कम कीमत के स्मार्टफोन को खरीदने से पहले 76 फीसदी ग्राहक कैमरा, 74 फीसदी ग्राहक बैटरी लाइफ और 74 फीसदी ग्राहक स्पीड के बारे में  जानकारी हासिल करते हैं। ।
    • भारत के टियर-2 और टियर-3 में 41 फीसदी ग्राहक ऑनलाइन स्मार्टफोन खरीदते हैं। जबकि 51 फीसदी लोग लोकल स्टोर से फोन खरीदते हैं।
    • फोन खरीदने के बाद Samsung के 95 फीसदी यूजर अपने फोन से पूरी तरह खुश नजर आये। जबकि Xiaomi के 94 फीसदी और itel के 93 फीसदी ग्राहक अपने फोन से खुश हैं।
    • भारतीय 7000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन के मामले में ग्राहक Samsung ब्रांड पर 49 फीसदी के साथ सबसे ज्यादा भरोसा दिखाते है। इसके बाद 47 फीसदी के साथ itel और 45 फीसदी के साथ स्मार्टफोन ब्रांड Lava का नाम आता है।
    • फ्यूचर स्मार्टफोन ब्रांड के तौर पर भारतीय सबसे ज्यादा 43 फीसदी के साथ Samsung को पसंद करते हैं। इसके बाद 36 फीसदी के साथ itel और 36 फीसदी के साथ ही Xiaomi को पसंद करते हैं।

  • जानें- अब क्या होगा किराया, घरेलू विमान यात्रा हुई 30 फीसद तक महंगी

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    नई दिल्ली, प्रेट्र। सरकार ने घरेलू विमान यात्रा किराया की निचली व ऊपरी सीमा में 10 से 30 फीसद तक बढ़ोतरी की दी है। नागरिक विमानन मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि नई सीमा इस वर्ष 31 मार्च या अगले आदेश तक लागू रहेगी। नई व्यवस्था के तहत 40 मिनट से कम उड़ान समय वाली यात्रा के लिए न्यूनतम किराया अब 2,200 रुपये कर दिया गया है, जो पहले 2,000 रुपये था। इसी अवधि के लिए अब विमान कंपनियां अधिकतम 7,800 रुपये वसूल सकेंगी, जो सीमा पहले 6,000 रुपये थी। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि घरेलू विमानों में यात्रियों की अधिकतम संख्या उनकी कुल क्षमता के 80 फीसद से ज्यादा नहीं होगी। यह फैसला भी इस वर्ष 31 मार्च या अगले आदेश तक लागू रहेगा।

    जहां तक किराया का सवाल है तो अब 40-60 मिनट अवधि वाली फ्लाइट के लिए यात्रियों को कम से कम 2,800 रुपये और अधिकतम 9,800 रुपये देने होंगे। पहले यह सीमा 2,500-7,500 रुपये थी। वहीं, एक घंटे से अधिक और 90 मिनट यानी डेढ़ घंटे तक की यात्रा के लिए अब यात्रियों को 3,300-11,700 रुपये तक चुकाने पड़ेंगे। वहीं, डेढ़ घंटे से अधिक और दो घंटे तक (90-120 मिनट) की यात्रा अब कम से कम 3,900 रुपये में हो सकेगी, जबकि विमानन कंपनियां इसके लिए अधिकतम 13,000 रुपये वसूल सकेंगी। नई सीमा के तहत दो घंटे से लेकर ढाई घंटे (120-150 मिनट) तक की यात्रा के लिए अब 5,000-16,900 रुपये, ढाई घंटे से लेकर तीन घंटे (150-180 मिनट) तक के लिए 6,100-20,400 रुपये तथा तीन घंटे से लेकर साढ़े तीन घंटे (180-210 मिनट) तक की यात्रा के लिए यात्रियों को 7,200-24,200 रुपये देने पड़ेंगे। इससे पहले घरेलू विमान यात्रा के लिए किराया की अधिकतम सीमा 18,600 रुपये थी।

    पिछले वर्ष 21 मई को नागरिक विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने विमानन कंपनियों को निर्देश दिया था कि वे कम से कम 40 फीसद सीटों के लिए न्यूनतम और अधिकतम मूल्य के मध्य से कम किराया लेंगी। उदाहरण के लिए, अगर किसी समयावधि के लिए न्यूनतम किराया 5,000 रुपये और अधिकतम 10,000 रुपये था, तो विमानन कंपनियों को कम से कम 40 फीसद सीटें 7,500 रुपये से कम में उपलब्ध करानी थी। उस समय डीजीसीए ने कंपनियों से यह भी कहा था कि उनकी किसी भी फ्लाइट में कुल क्षमता के 33 फीसद से अधिक यात्री नहीं होंगे। पिछले वर्ष जून में यह सीमा बढ़ाकर 45 फीसद और धीरे-धीरे 80 फीसद कर दी। गुरुवार को डीजीसीए ने 80 फीसद की यह सीमा इस वर्ष 31 मार्च तक के लिए बरकरार रखी है।

    स्पाइसजेट शुरू करेगी 24 नई फ्लाइट

    नई दिल्ली, प्रेट्र : निजी विमानन कंपनी स्पाइसजेट ने कहा है कि वह फरवरी में वह 24 नई रूट पर विमान सेवा शुरू करेगी। इनमें अजमेर-मुंबई और अहमदाबाद-अमृतसर भी शामिल हैं, जिन पर अभी कोई विमानन कंपनी सेवा नहीं दे रही है। कंपनी ने कहा कि सीजनल फ्लाइट्स के तहत जैसलमेर को भी दिल्ली व अहमदाबाद से जोड़ा जाएगा।

  • पेट्रोल डीजल इस राज्य में 7 रुपये सस्ता हुआ, तो कुछ राज्यों में 100 रुपये के पार हुई कीमतें

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    नई दिल्ली। देश में एक तरफ जहां रोज पेट्रोल-डीजल के दाम में इजाफा हो रहा है, वहीँ मेघालय सरकार ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल पर मूल्यवर्धित कर (वैट) में और कमी कर दी जिससे राज्य में इन पेट्रोलियम ईंधनों के भाव पांच रुपये प्रति लीटर से ज्यादा घट गए। मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने इसकी घोषणा की। संगमा ने अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की, बैठक के बाद लिए गए फैसले में राज्य में पेट्रोल का भाव 91.26 रुपये रुपये से सस्ता होकर 85.86 रुपये प्रति लीटर हो गया। इसी तरह डीलज प्रति लीटर 86.23 रुपये से घट कर 79.13 रुपये पर आ गया। राज्य सरकार ने पिछले सप्ताह इन ईंधनों पर दो रुपये की छूट दी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पेट्रोल का भाव कुल मिलाकर 7.4 रुपये और डीजल 7.1 रुपये सस्ता हो गया है। मालूम हो कि राज्य में वाणिज्यिक वाहन ऑपरेटर हड़ताल पर है। हड़ताल के दूसरे दिन पेट्रोलियम ईंधन पर वैट कम किया गया।

    वैट घटाया गया

    सरकार ने पेट्रोल पर वैट 31.62 प्रतिशत से कम कर 20 प्रतिशत या 15 रुपये प्रति लीटर (दोनों में जो अधिक हो) कर कर दिया है। इसी तरह डीजल पर वैट 22.95 की जगह 12 प्रतिशत या 9 रुपये प्रति लीटर में से जो भी अधिक हो, कर दिया गया है।

    तेल के दाम में रोज इजाफे के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर हमला बोला है। विपक्ष ने सरकार से टैक्स कम किए जाने की मांग की है। उधर, बुधवार को पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संसद में कहा था कि पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क नहीं घटेगा। मंगलवार को वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 0.09 प्रतिशत घटकर 63.24 डॉलर प्रति बैरल रह गया। एक्साइज शुल्क, वैट और डीलर कमिशन आदि शुल्कों के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमत करीब तीन गुना हो जाती है।

    आज राजस्थान के श्रीगंगानगर में पेट्रोल 100.07 रुपये पर पहुंच गया। भोपाल में XP पेट्रोल 100.44 रुपये प्रति लीटर पर चला गया। राजस्थान में पेट्रोलियम उत्पादों पर वैट की दरें सबसे अधिक है। पिछले महीने राजस्थान ने पेट्रोल और डीजल पर वैट दो रुपये प्रतिलीटर कम किया था।

  • बता रहे हैं CA गौरव आर्य, इन तीन मामलों में बिना कारण बताओ नोटिस सस्पेंड हो सकता है जीएसटी रजिस्ट्रेशन

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    नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (GST) से जुड़े नियमों में हाल में कुछ प्रमुख संशोधनों की घोषणा हुई है। इन उपायों का लक्ष्य फर्जी बिलों के जरिए जीएसटी सिस्टम में होने वाली धोखाधड़ी पर अंकुश लगाना है। चार्टर्ड अकाउंटेंट गौरव आर्य ने दैनिक जागरण से खास बातचीत में कहा कि देशभर में फेक बिलिंग की समस्या बहुत तेजी से बढ़ रही थी। इस वजह से राजस्व संग्रह में कमी देखने को मिली। सरकार ने इसपर विराम लगाने के लिए कुछ मामलों में बिना किसी कारण बताओ नोटिस के जीएसटी रजिस्ट्रेशन को सस्पेंड करने का प्रावधान भी किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कड़े उपाय से बिलों के फर्जीवाड़े के जरिए फ्रॉड करने वालों पर लगाम लगेगा।

    इन मामलों में बिना कारण बताओ नोटिस सस्पेंड हो सकता है जीएसटी रजिस्ट्रेशन

    आर्य ने बताया कि अगर GSTR-1 में टैक्स को लेकर दिए गए विवरण और GSTR-3B में दिए गए आंकड़ों में अगर मिलान नहीं होता है तो इस तरह के कदम उठाए जा सकते हैं। साथ ही आपने जीएसटी रिटर्न ऐसे फाइल की है, जिसमें सरकार की किसी गड़बड़ी का अंदेशा होता है, तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन सस्पेंड किया जा सकता है। इसके अलावा जिन असेसीज का टर्नओवर 50 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें अनिवार्य रूप से एक फीसद का टैक्स जमा करना है। ऐसे टैक्सपेयर्स इनपुट टैक्स से अपनी कर देनदारी पूरी नहीं कर सकते हैं। इन तीनों मामलों में जीएसटी रजिस्ट्रेशन सस्पेंड हो सकता है।

    इन नियमों में भी हुए हैं बदलाव

    आर्य ने IRN को लेकर बताया कि E-Invoicing एक अक्टूबर से प्रभावी हुई है। एक जनवरी से इसमें कुछ और चीजें प्रभावी हुई हैं। इनमें 100 करोड़ रुपये से अधिक के टर्नओवर वाले असेसीज पर भी इसे लागू किया गया है। अब बिना जीएसटी रजिस्ट्रेशन के कोई भी Invoice अवैध माना जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर आप 31 मार्च को Invoice जेनरेट कर रहे हैं तो 31 मार्च का ही रजिस्ट्रेशन होना चाहिए।

    आर्य ने इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े नियमों में हुए संशोधन के बारे में कहा कि ‘सरकार ने यह प्रावधान किया है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट तभी मिलेगा, जब वो हमारे इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल में शो होगा। अगर सप्लायर ने रिटर्न फाइल नहीं किया, हमारे पोर्टल में शो नहीं हुआ तो उसका बेनिफिट हमें नहीं मिलेगा।’

    उन्होंने जीएसटी सिस्टम की दिक्कतों को रेखांकित करते हुए कहा कि हम जीएसटी रिटर्न में किसी तरह का संशोधन नहीं कर सकते हैं। रिवीजन ना हो पाने अगले रिटर्न में उसमें संशोधन करना होता है। कई बार वह संशोधन उचित तरीके से हो नहीं पाता है।

    टैक्सपेयर्स को भरने होते हैं ये रिटर्न फॉर्म

    गौरव आर्य ने बताया कि जीएसटी में हरेक असेसी या टैक्सपेयर्स को दो रिटर्न भरने होते हैं। बकौल आर्य हर असेसी को आज के समय में GSTR-1 और GSTR-3B के रूप में दो फॉर्म भरने होते हैं। GSTR-1 सेल्स रिटर्न होता है। इसमें बिक्री की डिटेल्स देनी होती है। पांच करोड़ से कम के असेसीज को तिमाही आधार पर फाइलिंग करनी होती है। पांच करोड़ से ऊपर के असेसीज के लिए मासिक आधार पर फाइलिंग होती है। वहीं, GSTR-3B एक तरह का समरी रिटर्न होता है, जिसमें हरेक महीने का लेखा-जोखा भरना होता है। इनमें खरीद, बिक्री के साथ टैक्स की देनदारी और उनके भुगतान का विवरण भरना होता है।

    जीएसटी से परिचय

    आर्य ने कहा कि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक जुलाई, 2017 से प्रभावी है। उससे पहले 17 तरह के अप्रत्यक्ष कर हुआ करते थे। इन सभी करों के स्थान पर सरकार ने एक टैक्स का प्रावधान किया, जिसे जीएसटी कहते हैं। पहले के टैक्स सिस्टम में क्रेडिट के चेन में कई तरह की समस्याएं थीं। इन्हीं समस्याओं के निवारण के लिए सरकार जीएसटी लेकर आई। गौरव आर्य ने कहा कि जीएसटी पूरी तरह से टेक्नोलॉजी आधारित है।

    आर्य ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति नया बिजनेस शुरू करने जा रहा है, तो उसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए लेनदेन के लिए जरूरी लिमिट पर गौर करना चाहिए। सर्विसेज के लिए यह सीमा 20 लाख रुपये जबकि गुड्स के लिए 40 लाख रुपये है। जीएसटी रजिस्ट्रेशन से पहले कारोबारियों को अपने राज्य में लेनदेन की सीमा की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।