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  • बदलने जा रहा है अगले हफ्ते से पैसों के लेन-देन से जुड़ा ये नियम

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    मुंबई । रिजर्व बैंक ने व्यवसायों के अनुकूल एक कदम की घोषणा करते हुए शुक्रवार को कहा कि बड़े लेन-देन के लिये प्रयोग में आने वाली आरटीजीएस प्रणाली अगले कुछ दिनों में चौबीसों घंटे काम करने लगेगी। रिजर्व बैंक ने दिसंबर 2019 में नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर (एनईएफटी) प्रणाली को चौबीसों घंटे के लिये उपलब्ध बनाया था। अभी रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) प्रणाली हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छोड़ सप्ताह के सभी कार्य दिवसों में सुबह के सात बजे से शाम के छह बजे तक काम करती है। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की द्वैमासिक समीक्षा बैठक के बाद कहा कि आरटीजीएस प्रणाली अगले कुछ दिनों में चौबीसों घंटे काम करने लगेगी। ऐसा होने से पहले की तुलना में पांच दिन के बजाय अब सातों दिन एईपीएस, आईएमपीएस, एनईटीसी, एनएफएस, रुपे, यूपीआई लेन-देन के निपटान के क्रियान्वयन से स्वाभाविक जोखिम व दबाव कम होने का अनुमान है।

    यह भुगतान की पारिस्थितिकी को अधिक दक्ष बनायेगा।’’ दास ने कहा कि डिजिटल भुगतान को सुरक्षित तरीके से बढ़ाने के लिये यह निर्णय लिया गया है कि यूपीआई अथवा कार्ड के जरिये बिना संपर्क के किये जा सकने वाले भुगतान के मामलों में प्रति लेन-देन की सीमा को एक जनवरी 2021 से दो हजार रुपये से बढ़ाकर पांच हजार रुपये किया जाये। उन्होंने कहा कि यह ग्राहकों की इच्छा पर निर्भर करेगा। रिजर्व बैंक ने कहा कि इससे संबंधित परिचालन के दिशानिर्देश अलग से जारी किये जायेंगे। उल्लेखनीय है कि देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिये रिजर्व बैंक ने जुलाई 2019 से एनईएफटी व आरटीजीएस के माध्यम से किये जाने वाले लेन-देन पर शुल्क लेना बंद कर दिया है। एनईएफटी का इस्तेमाल दो लाख रुपये तक के लेन-देन में किया जाता है, जबकि बड़े लेन-देन आरटीजीएस के माध्यम से किये जाते हैं। दास ने कहा कि लोगों के बीच वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देने के लिये वित्तीय साक्षरता केंद्र (सीएफएल) अभी 100 प्रखंडों में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चरणबद्ध तरीके से मार्च 2024 तक सभी प्रखंडों में ऐसे केंद्र बनाये जायेंगे।

  • RBI ने कोविद के प्रभाव पर विचार करने के बाद बैंकों के लिए लिया ये निर्णय…

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    नई दिल्ली। कभी बैंकों के पीछे लाभांश अदाएगी के लिए पड़ा रहने वाला आरबीआइ ने ऐलान किया है कि वाणिज्यिक व सहकारी बैंकों को पिछले वित्त वर्ष (2019-20) के लिए कोई लाभांश नहीं देना होगा। आरबीआइ का कहना है कि चूंकि कोविड-19 महामारी की वजह से बैंकों का वित्तीय स्वास्थ्य बिगड़ा हुआ है, ऐसे में उन्हें अतिरिक्त राशि की जरूरत होगी। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की तरफ से लाभांश देने के नियम बनाने की घोषणा की है। अभी एनबीएफसी सेक्टर के लिए लाभांश घोषित करने की कोई नीति नहीं है।

    मौद्रिक नीति की समीक्षा करने के साथ ही आरबीआइ गवर्नर ने डॉ. शक्तिकांत दास ने कहा कि, ‘बैंकों के बैलेंस शीट्स को मजबूत करने और उनके पास कर्ज वितरण के लिए ज्यादा राशि उपलब्ध कराने के उद्धेश्य से यह फैसला किया गया है कि सूचीबद्ध वाणिज्यिक बैंक व सहकारी बैंक पिछले वित्त वर्ष के लिए लाभांश नहीं देंगे।

    इस बारे में पहली बार घोषणा अप्रैल, 2020 में ही की गई थी और कहा गया था कि सितंबर, 2020 में इसकी समीक्षा की जाएगी। एनबीएफसी के लिए लाभांश देने के नए नियम बनाने के साथ ही उन्होंने इनके नियमन को और सख्त करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में एनबीएफसी के आकार व उनकी गतिविधियों में काफी तेजी से विस्तार हुआ है। उनके समक्ष आये नए जोखिमों के संदर्भ में नियमन व्यवस्था में बदलाव करने की जरूरत है। सनद रहे कि पिछले वर्ष आईएलएंडएफएस और उसके बाद दीवान हाउसिंग फाइनेंस में भारी संकट के बाद एनबीएफसी पर आरबीआइ ने निगरानी बढ़ा दी है। आरबीआइ अब बड़े एनबीएफसी को बैंकिंग लाइसेंस देने के सुझाव पर विचार कर रहा है, इस लिहाज से भी उनकी निगरानी व नियमन बढ़ाने की जरुरत है।

    आरबीआइ ने यह भी कहा है कि वह एनबीएफसी और सहकारी बैंकों पर नियमन का स्तर दूसरे वाणिज्यिक बैंकों की तरह ही लागू करने के लक्ष्य के साथ काम कर रहा है। इस संदर्भ में उक्त दोनों के लिए जोखिम आधारित आतंरिक ऑडिटिंग करने की नीति लागू की गई है। यानी एनबीएफसी व सहकारी बैंकों के पास अपनी आंतरिक ऑडिटिंग टीम भी होगी। इसे बैंकिंग सेक्टर में सुरक्षा का तीसरा कवच कहा जाता है।

    पंजाब व महाराष्ट्र सहकारी बैंक का संकट सामने आने के बाद सहकारी बैंकों के नियमन को चाक चौबंद करने की कई स्तरों पर कोशिश की जा रही है। केंद्रीय बैंक ने यह भी फैसला किया है कि वाणिज्यिक बैंक, एनबीएफसी और सहकारी बैंकों पर वैधानिक ऑडिटर्स नियुक्त करने का एक समान नियम लागू होगा।

     

  • मंजूरी मिली RIL की इकाई की समाधान योजना को, कर्जदाताओं को मिलेंगे 4400 करोड़ रुपये

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    नयी दिल्ली । राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी)की मुंबई शाखा ने रिलायंस इंफ्राटेल के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज की एक इकाई द्वारा पेश समाधान योजना को मंजूरी प्रदान कर दी। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस संबंध में शेयर बाजार को जानकारी दी। कंपनी ने कहा कि एनसीएलटी-मुंबई ने उसके पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई रिलायंस प्रोजेक्ट्स एंड प्रॉपर्टी मैनेजमेंट सर्विसेस लिमिटेड के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स विभाग द्वारा रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड के लिए पेश की गयी समाधान योजना को तीन दिसंबर को मंजूरी दे दी।

    रिलायंस टेलिकम्युनिकेशंस के दूरसंचार बुनियादी ढांचा इकाई रिलायंस इंफ्राटेल के देशभर में 43,000 टॉवर और 1,72,000 किलोमीटर की फाइबर लाइन है। सूत्रों ने इससे पहले बताया कि इस समाधान प्रक्रिया से कंपनी के कर्जदाताओं को करीब 4,400 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। कर्जदाताओं की समिति की ओर से इस समाधान योजना को 100 प्रतिशत मत मिले हैं। सूत्रों ने बताया कि समाधान योजना के तहत राशि का वितरण इस मामले में दोहा बैंक के हस्तक्षेप आवेदन के निपटारे पर निर्भर करेगा।

  • ईंधन की कीमतों में वृद्धि बंद नहीं हुई, आज फिर से पेट्रोल, डीजल महंगा हो गया

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    नई दिल्ली। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला लगातार जारी है। सरकारी तेल कंपनियों ने आज पेट्रोल के दाम में 20 पैसे तो डीजल के दाम में 26 पैसे की बढ़ोतरी की। दिल्ली में सोमवार को पेट्रोल 83.71 रुपये और डीजल 73.87 रुपये प्रति लीटर पर आ गया। इससे पहले बीते अगस्त में डीजल 73 रुपये से ऊपर चल रहा था।

    इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल की कीमतें बढ़कर क्रमश: 83.71 रुपये, 85.19 रुपये, 90.34 रुपये और 86.51 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं। वहीं, चारों महानगरों में डीजल की कीमतें बढ़कर क्रमश: 73.87 रुपये, 77.44 रुपये, 80.51 रुपये और 79.21 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं।

    वहीँ अन्य शहरों की बात करें तो नोएडा में पेट्रोल 83.67 रुपये प्रति लीटर, पटना में पेट्रोल की कीमत 86.25 रुपये प्रति लीटर, रांची में पेट्रोल 82.80 रुपये प्रति लीटर और लखनऊ में 83.59 रुपये प्रति लीटर में बिक रहा है। अगर डीजल की बात की जाए तो नोएडा में डीजल 74.29 रुपये प्रति लीटर, पटना में डीजल 79.04 रुपये प्रति लीटर, रांची में एक लीटर डीजल की कीमत 78.17 और लखनऊ में डीजल 74.21 रुपये प्रति लीटर में बिक रहा है।

    सरकार द्वारा संचालित तेल मार्केटिंग कंपनियां – इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम हर दिन सुबह 6 बजे से कीमतों में किसी भी बदलाव को लागू करती हैं। पेट्रोल-डीजल के भाव रोजाना बदलते हैं और सुबह 6 बजे अपडेट हो जाते हैं। आप इसकी जानकारी SMS के जरिये ले सकते हैं।

    पेट्रोल व डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है। विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें क्या हैं, इस आधार पर रोज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है।

    दुनिया भर में कोविड-19 के मामले बढ़ने से कुछ देशों में लॉकडाउन हो सकता है। लेकिन, चीन में क्रूड की मांग बढ़ रही है। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में हल्की तेजी दिख रही है।

     

  • ऑनलाइन खुलवा सकते हैं NPS खाता, जानिए इसका सबसे आसान तरीका

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    नई दिल्ली। नेशनल पेंशन सिस्‍टम (NPS) का अकाउंट ऑनलाइन भी खुलवा सकते हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म eNPS पोर्टल से यूजर एनपीएस अकाउंट में नेट बैंकिंग और डेबिट/क्रेडिट कार्ड के जरिए योगदान कर सकते हैं। एनपीएस के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जाकर टियर 1 और टियर 2 अकाउंट खुलवाया जा सकता है। एनपीएस सरकार की तरफ से प्रायोजित रिटायरमेंट के लिए पैसे बचाने का एक साधन है जिसका नियमन पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) करता है।

    ईएनपीएस के जरिए कैसे खुलवाएं एनपीएस अकाउंट जानिए

    अकाउंट खोलने के लिए यूजर के पास मोबाइल नंबर, ईमेल और नेट बैंकिंग की सुविधा के साथ बैंक अकाउंट होना चाहिए।

    ईएनपीएस पोर्टल के अनुसार, एनपीएस अकाउंट खोलने के लिए आवेदक को पैन कार्ड की जानकारी देना जरूरी है।

    आवेदक को एनपीएस अकाउंट शुरू करने के लिए या मौजूदा एनपीएस अकाउंट को ऑनलाइन चलाने के लिए पीआरएएन को एक्टिवेट करना जरूरी है।

    ईएनपीएस पोर्टल के जरिए एनपीएस अकाउंट कैसे खोलें-

    यूजर सबसे पहले ईएनपीएस पोर्टल के नेशनल पेंशन सिस्टम सेक्शन पर जाएं।

    ईएनपीएस पोर्टल रजिस्ट्रेशन और राशि जमा करने का ऑप्शन देता है, इसके साथ एनपीएस सेक्शन के तहत टियर 2 अकाउंट को एक्टिवेट भी करता है।

    एप्लिकेशन को पूरा करने के लिए यूजर को सभी जरूरी जानकारियों को भरना होगा और दिए गए दो ऑप्शन में से एक टियर 1 और टियर 2 अकाउंट और टियर 1 अकाउंट का चयन करना होगा।

    जरूरी जानकारी दर्ज करने के बाद यूजर को अपने हस्‍ताक्षर की फोटो के साथ स्कैन की गई अपनी तस्‍वीर भी अपलोड करें।

    यह स्टेज पूरी हो जाने के बाद यूजर को एनपीएस अकाउंट में भुगतान करने के लिए गेटवे के लिए निर्देशित किया जाता है।

    ईएनपीएस पोर्टल के अनुसार, परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) मिलने के बाद ग्राहक को 30 दिनों के अंदर पूरा फॉर्म सेंट्रल कॉर्डकीपिंग एजेंसी (CRA) को भेजना होता है। अगर तय समय में ऐसा नहीं किया जाता है तो पहचान संख्या को जमा नहीं किया जाता है।

    जरूरी दस्तावेज (KYC)

    पीआरएन के एक्टिवेशन के लिए केवाईसी की जरूरत पड़ती है जो कि पीओपी के जरिए होती है। इसके लिए आवेदक का नाम और पता पीओपी रिकॉर्ड में दर्ज नाम और पते से मैच करना चाहिए। ये पूरी जानकारी ईएनपीएस पोर्टल पर उपलब्ध है।

    केवाईसी प्रक्रिया बैंक या पीओपी के जरिए की जाती है। इनमें से जिसका चुनाव प्रक्रिया के दौरान आवेदक की ओर से किया जाता है।

     

  • प्रमुख कॉर्पोरेट घरानों ने दिखाई दिलचस्पी एयर इंडिया को खरीदने में

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    नई दिल्ली। एयर इंडिया के लिए बोली लगाने की समय सीमा सोमवार को समाप्त हो रही है। इस बीच ऐसी खबरें आ रही हैं कि प्रमुख कॉर्पोरेट घरानों टाटा, अडानी और हिंदुजा की इसे खरीदने में दिलचस्पी है। एयर इंडिया के लिए बोली लगाने की अंतिम तिथि 14 दिसंबर है और सरकार ने समय सीमा नहीं बढ़ाई है।
    हालांकि, सरकार ने एयर इंडिया के लिए बोली लगाने वालों के लिए इन्टीमेशन तारीख को बढ़ाकर 5 जनवरी तक कर दिया है, जो पहले 29 दिसंबर तक थी।
    यह शॉर्टलिस्ट किए गए बिडर्स के नामों की घोषणा करने की तारीख है। फिजिकल बिड 29 दिसंबर तक होनी चाहिए।
    अब इसमें तीन बड़े कर्पोरेट घरानों की रुचि होने की खबरें आई हैं। रिपोटरें से पता है कि टाटा समूह, अडानी और हिंदुजा व कई अन्य एयर इंडिया के लिए बोली लगाने के इच्छुक हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इनमें से किसी ने भी ऐसा नहीं कहा है।
    इस बीच, एयर इंडिया के 209 कर्मचारियों का एक समूह एक निजी फाइनेंसर के साथ साझेदारी में राष्ट्रीय वाहक के लिए बोली लगाने की तैयारी कर रहा है।
    जैसा कि पहले बताया गया है, एयर इंडिया के कर्मचारी एक निजी इक्विटी फंड के साथ साझेदारी में राष्ट्रीय वाहक के लिए बोली लगाने की तैयारी कर रहे हैं और प्रत्येक कर्मचारी को बोली के लिए 1 लाख रुपये का योगदान करने के लिए कहा जाएगा।
    बोली प्रक्रिया का नेतृत्व एयर इंडिया की कॉमर्शियल डायरेक्टर मीनाक्षी मल्लिक कर रही हैं।
    हालांकि, पायलटों और केबिन क्रू का प्रतिनिधित्व करने वाले यूनियनों ने अपने सदस्यों को कर्मचारी बोली में भाग नहीं लेने की सलाह दी है।

  • आज प्रधानमंत्री मोदी करेंगे संबोधित इंस्पायर्ड इंडिया थीम पर आधारित FICCI की 93 वीं AGM को

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    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को फिक्की (FICCI) की 93 वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) का वर्चुअली उद्घाटन करेंगे। इस एजीएम में पीएम मोदी ‘इंस्पायर्ड इंडिया’ के निर्माण में उद्योग जगत की भूमिका के लिए अपने विचार और दृष्टिकोण साझा करेंगे। फिक्की ने यह जानकारी दी है। यह एजीएम इंस्पायर्ड इंडिया थीम पर आधारित है। इस एजीएम में देश के प्रमुख नीति निर्धारक और दुनिया भर के 10,000 प्रतिनिधि भाग लेंगे।

    गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सड़क परिवहन और राजमार्ग व सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री नितिन गडकरी, वाणिज्य, उद्योग व रेल मंत्री पीयूष गोयल, विदेश मंत्री एस जयशंकर और इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी व संचार एवं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद सहित प्रमुख नीति निर्धारकों के इस कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है।

    फिक्की की इस साल की एजीएम के वक्ताओं में सत्या नडेला, माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ, अल्फाबेट के पूर्व चेयरमैन Eric Schmidt, टाटा ग्रुप के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन, कैडिला हेल्थकेयर के चेयरमैन पंकज पटेल और ओयो होटल्स होम्स के संस्थापक व ग्रुप सीईओ रितेश अग्रवाल जैसे प्रमुख बिजनेस लीडर्स शामिल हैं। इस मेगा इवेंट में दुनिया भर से लगभग 10,000 से अधिक प्रतिनिधियों के वर्चुअली भाग लेने की उम्मीद है।

     

  • सचिवों के साथ आत्मनिर्भर भारत के क्रियान्वयन की वित्त मंत्री ने समीक्षा की

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    नई दिल्ली। बैंकों ने इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ईसीएलजीएस) के तहत 80,93,491 कर्जदारों को 2,05,563 करोड़ रुपये की अतिरिक्त ऋण राशि मंजूर की है। महामारी के समय में मझोले और छोटे सेक्टरों को लिक्विडिटी सपोर्ट प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा 3 लाख करोड़ रुपये की ईसीएलजीएस योजना को इस वर्ष की शुरुआत में आत्मनिर्भर भारत पैकेज (एएनबीपी) के हिस्से के रूप में घोषित किया गया था।

    केंद्र द्वारा की गई इस संबंध में प्रगति के अनुसार, 4 दिसंबर तक, निजी क्षेत्र के 23 शीर्ष बैंक और 31 एनबीएफसी द्वारा अतिरिक्त क्रेडिट राशि 2,05,563 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जबकि 1,58,626 करोड़ रुपये 40,49,489 कर्जदारों को दिए गए हैं।

    इस योजना में 26 नवंबर को संशोधन किया गया था और इसकी अवधि अब 31 दिसंबर, 2021 तक बढ़ा दी गई है। इसके अलावा, निर्धारित टर्नओवर सीमा को हटा दिया गया है।

    यह उम्मीद की जाती है कि 45 लाख इकाइयां इस योजना के माध्यम से व्यावसायिक गतिविधि को फिर से शुरू कर सकती हैं और नौकरियों की सुरक्षा कर सकती हैं।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को विभिन्न मंत्रालयों / विभागों के सचिवों के साथ एएनबीपी की व्यापक समीक्षा की। समीक्षा में मुख्य क्रियान्वयन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया गया ताकि पैकेज वांछित परिणाम उत्पन्न कर सके।

    4 दिसंबर की समीक्षा के दौरान प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) ने 27,794 करोड़ रुपये की पोर्टफोलियो खरीद को मंजूरी दी है और वर्तमान में 45,000 करोड़ रुपये की आंशिक क्रेडिट गारंटी योजना 2.0 के तहत 1,400 करोड़ रुपये के लिए अनुमोदन / वार्ता की प्रक्रिया में हैं। बॉन्ड या वाणिज्यिक पत्रों (सीपी) की खरीद की समय सीमा को आगे बढ़ाकर 31 दिसंबर 2020 तक कर दिया गया है। 4 दिसंबर तक, इस विशेष सुविधा से 25,000 करोड़ रुपये का वितरण किया गया है। शेष राशि 5,000 करोड़ रुपये स्पेशल लिक्विडिटी फैसिलिटी के तहत छोटी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों-माइक्रो फाइनेंस संस्थानों (एनबीएफसी-एमएफआई) के लिए आरबीआई द्वारा नाबार्ड को आवंटित किए गए।

    इसके अलावा, नाबार्ड ने छोटे एनबीएफसी और एनबीएफसी-एमएफआई के लिए एसएलएफ से संवितरण को शुरू करने के लिए 6 अक्टूबर को दिशानिर्देश जारी किए थे।

  • मनमानी कीमत वसूल रही थीं कंपनियां 11 साल से बीयर की, CCI ने किया खुलासा

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    नई दिल्ली। बीयर बनाने वाली प्रमुख कंपनियों Carlsberg, SABMiller और भारत की  United Breweries (UB) के बीच गुटबंदी की बात सामने आई है। भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट को रायटर्स द्वारा देखा गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक इन तीनों कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने कॉमर्शियल रूप से संवेदनशील जानकारी एक-दूसरे से साझा की। रिपोर्ट के अनुसार इन तीनों कंपनियों ने भारत में 11 साल से अधिक समय तक बीयर के दाम को आपसी गठजोड़ से फिक्स रखा और मनमानी कीमत वसूल की।

    भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 2018 में तीन बीयर कंपनियों के कार्यालयों पर छापेमारी की थी और जांच शुरू की थी। इस जांच में जो बातें सामने आई हैं, उससे इन तीनों कंपनियों को लेकर कई सवाल उत्पन्न हो गए हैं। भारत के सात बिलियन डॉलर के बीयर मार्केट में इन तीनों कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 88 फीसद के आसपास है। हालांकि, इस मामले में कोई अंतिम फैसला अभी नहीं आया है।

    इस मामले से अवगत दो सूत्रों ने जानकारी दी है कि CCI के वरिष्ठ सदस्य अब इस रिपोर्ट पर गौर करेंगे और इन कंपनियों पर 25 करोड़ डॉलर से अधिक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इस रिपोर्ट को मार्च में तैयार किया गया था।

    इस रिपोर्ट में शीर्ष अधिकारियों के बीच की बातचीत, व्हाट्सएप मैसेज और ईमेल को भी रिकॉर्ड में रखा गया है। बातचीत के इन रिकॉर्ड्स के मुताबिक इन कंपनियों ने एक-दूसरे के साथ गुटबंदी कर कई राज्यों में समय-समय पर कीमतों में बढ़ोत्तरी की।

    सीसीआई की इस रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियों ने कीमतों पर एकसाथ निर्णय करने के लिए All India Brewers Association (AIBA) जैसे साझा मंचों का इस्तेमाल किया। इसके बाद स्थानीय समूहों ने कीमतों में वृद्धि के लिए इन कंपनियों की ओर से लॉबिंग का सहारा लिया।

    इस रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि कम-से-कम तीन बार अधिकारियों ने एक-दूसरे को संदेश भेजकर इन योजनाओं को पूरी तरह से गुप्त रखने को कहा है।

    इस रिपोर्ट में दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2016 में AIBA के महानिदेशक ने इन तीनों के अधिकारियों को एक ईमेल लिखकर कहा था, ”हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम पकड़े ना जाएं।”

    सीसीआई की 248 पृष्ठ की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन तीनों कंपनियों ने आपसी गुटबंदी से सरकारी मशीनरी को गुमराह किया। साथ ही वे इस बात से अवगत थे कि एसोसिएशन (AIBA) के साथ मिलकर वे जो काम कर रहे हैं, उससे प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन हो रहा है।

    CCI ने इस संदर्भ में रायटर्स द्वारा भेजे गए सवालों का जवाब नहीं दिया है। वहीं, AIBA और Carlsberg ने यह कहते हुए किसी भी तरह की टिप्पणी से इनकार कर दिया कि इस मामले में सीसीआई में कार्यवाही चल रही है।

     

  • BSE ई-कृषि बाजार का शुभारंभ, देश भर के किसानों के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक बाजार …

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    नई दिल्ली। अब देश भर के किसान अपनी उपज की बिक्री एक जगह पर कर सकेंगे। शुक्रवार को बांबे स्टॉक एक्सचेंज की तरफ से इस सुविधा की शुरुआत की गई। यह हाजिर बाजार इलेक्ट्रॉनिक होगा जहां किसानों की उपज रजिस्ट्रर्ड की जाएगी और बिक्री के लिए उसकी नीलामी की जाएगी जिसमें देश भर के खरीदार हिस्सा ले सकेंगे।

    इस बाजार का नाम बीएसई ई-एग्रीकल्चरल मार्केट्स (बीम) दिया गया है। बीम कृषि उत्पाद की बिक्री के लिए राष्ट्रीय स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक स्पॉट प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा जहां किसान अपनी उपज को इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखेंगे जिसकी नीलामी की जाएगी।

    किसानों को इसका फायदा यह मिलेगा कि जाए बगैर दूसरे राज्य के खरीदार भी उनकी उपज की कीमत लगा सकेंगे और उपज की गुणवत्ता के मुताबिक किसानों को कीमत मिल सकेगी। बीएसई के मुताबिक देश भर के किसानों के लिए एक बाजार के प्रधानमंत्री के सपने के मुताबिक बीम की शुरुआत की गई है।

    बीएसई के एमडी आशीष कुमार चौहान के मुताबिक, बीएसई राष्ट्रीय स्तर पर वस्तुओं के वितरण का नेटवर्क तैयार कर रहा है। यहां पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से वस्तुओं की खरीदारी की जाएगी और उसमें कोई निजी हित शामिल नहीं होगा। उपज की खरीद की रकम सीधे तौर पर विक्रेता के खाते में जाएगी।