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  • साल 2026 तक 5G कनेक्टिविटी होगी भारत के 35 करोड़ लोगों के पास : रिपोर्ट

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    नई दिल्ली. दुनियाभर में 5G इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से  विस्तार हो रहा है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि साल 2026 तक ग्लोबली करीब 3.5 बिलियन यानी 350 करोड़ लोगों के पास 5G कनेक्शन पहुंच जाएगा। इसका खुलासा Ericsson की लेटेस्ट Ericsson Mobility रिपोर्ट से हुआ है। साथ ही दावा किया गया है कि साल 2026 तक 60 फीसदी कवरेज एरिया तक 5G कनेक्शन की पहुंच हो जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2026 तक दुनियाभर में 10 में से 4 स्मार्टफोन्स में 5G कनेक्टिविटी होगी। वही साल यानी 2020 के आखिरी तक करीब 100 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास 5G कवरेज का एक्सेस होगा।

    क्या होगी भारत की 5G कनेक्टिविटी 

    रिपोर्ट के मुताबिक साल 2026 तक भारत में करीब 35 करोड़ लोगों के पास 5G कनेक्टिविटी होगी। हालांकि भारत की 5G कनेक्टिविटी का भविष्य काफी हद तक 5G स्पेक्ट्रम नीलामी पर निर्भर होगा। अगर साल 2021 की शुरुआत में भारत में 5G स्पेक्ट्रम नीलामी की प्रक्रिया शुरू हो जाती है, तो भारत साल 2026 तक 3.5 करोड़ 5G कनेक्शन के आंकड़े तक पहुंच सकता है। उस हालात में भारत में साल 2026 तक कुल स्मार्टफोन यूजर्स में से 27 फीसदी लोगों के पास 5G सब्सक्रिप्शन होगा।

    5G कनेक्शन में ज्यादा इजाफा नही 

    भारत की मौजूदा जनसंख्या करीब 135 करोड़ है। ऐसे मे 6 साल बाद भी केवल 27 फीसदी 5G कनेक्शन होगा, उसके लिए भी तय समय पर 5G स्पेक्ट्रम नीलामी का होना अनिवार्य होगा। इसका सीधा मतलब है कि 6 साल बाद भी ज्यादा हालात बदलने वाले नही हैं। भारत में 6 साल बाद भी LTE नेटवर्क का कब्जा बरकरार रहेगा। इस दौरान तक करीब 63 फीसदी यूजर्स को LTE नेटवर्क पर ही काम चलाना होगा। लेकिन इन 6 वर्षों के दौरान इंटरनेट की खपत में काफी बढ़ोतरी हो जाएगी।

     

  • एफपीआई ने रिकॉर्ड बनाया नवंबर में निवेश का, एफडीआई 62,951 करोड़ रुपये के करीब आया

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    नई दिल्ली। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) ने नवंबर में निवेश का रिकॉर्ड बनाया है। डिपॉजिटरी आंकड़ों के मुताबिक 3-27 नवंबर के दौरान एफपीआइ ने भारतीय बाजार में 62,951 करोड़ रुपये का निवेश किया है। आंकड़ों के अनुसार एफपीआइ ने इस अवधि में शेयरों में शुद्ध रूप से 60,358 करोड़ व डेट यानी कर्ज या बांड बाजार में 2,593 करोड़ रुपये निवेश किया है। इस तरह तीन से 27 नवंबर के दौरान भारतीय बाजारों में एफपीआइ ने 62,951 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड द्वारा जब से ये आंकड़े उपलब्ध कराए जा रहे हैं तब से शेयर बाजारों में एफपीआइ निवेश का यह उच्च स्तर है।

    ग्रो के सह-संस्थापक एवं मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) हर्ष जैन ने कहा कि वैश्विक निवेशक पूंजी लगाने के मामले में विकसित बाजारों के मुकाबले उभरते बाजारों पर ज्यादा भरोसा करते हैं। इसकी वजह है कि उभरते बाजारों में उन्हें लाभ होने की अधिक संभावना होती है। जैन के मुताबिक एफपीआइ का ज्यादातर निवेश बैंकिंग क्षेत्र में आया है। इसके साथ ही उन्होंने चुनिंदा बड़ी कंपनियों में निवेश किया है। ऐसे में कहा जा सकता है कि निवेश का प्रवाह कुछ शेयरों में केंद्रित है।

    मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर-मैनेजर रिसर्च हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति को लेकर बनी अनिश्चितता नवंबर में खत्म हो गई है। वहीं, डॉलर में कमजोरी के चलते भी निवेशक भारतीय बाजारों में पूंजी लगा रहे हैं। जहां तक भविष्य का सवाल है, तो बहुत कुछ इस पर निर्भर करेगा कि कोरोना संकट और उससे निपटने के लिए विकसित हो रहे टीके से जुड़ी खबरें कौन सा मोड़ लेती हैं।

    सिंगापुर से आया सबसे अधिक एफडीआइ

    कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) के तहत मौजूदा वित्त वर्ष (2020-21) की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में भारत में 8.30 अरब डॉलर के साथ सबसे अधिक निवेश सिंगापुर से आया। इसके बाद 7.12 अरब डॉलर के साथ दूसरे स्थान पर अमेरिका रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह स्थान मॉरीशस का था, जो इस वर्ष चौथे स्थान पर आ गया। मॉरीशस से एफडीआइ के रूप में दो अरब डॉलर का निवेश किया गया।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआइआइटी) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली। देश में चालू वित्त वर्ष के शुरुआती छह महीनों में कैमन आइलैंड्स से 2.1 अरब डॉलर का निवेश आया। इसके बाद नीदरलैंड्स (1.5 अरब डॉलर), ब्रिटेन (1.35 अरब डॉलर), फ्रांस (1.13 अरब डॉलर), जापान (65.3 करोड़ डॉलर) और जर्मनी (20.2 करोड़ डॉलर) का स्थान रहा। अमेरिका से एफडीआइ बढ़ने को भारत के साथ उसके रिश्ते और मजबूत होने से जोड़कर देखा जा रहा है।

     

  • तेज हुए प्रयास जीएसटी रिटर्न डिफाल्टर से रिटर्न दाखिल कराने के….

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    नई दिल्ली। जीएसटी संग्रह में बढ़ोतरी के लिए राजस्व विभाग की कोशिश तेज हो गई है। इसके तहत उन सभी कारोबारियों से जीएसटीआर-3बी रिटर्न भरने के लिए राजस्व विभाग के अधिकारी निजी तौर पर संपर्क कर रहे हैं जिन्होंने पिछले महीने रिटर्न दाखिल किया था, लेकिन नवंबर माह में उन्होंने जीएसटीआर-3बी रिटर्न दाखिल नहीं किया है। रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 20 नवंबर थी।

    अब राजस्व विभाग के अधिकारी इन कारोबारियों से 30 नवंबर तक रिटर्न दाखिल करवाने की कोशिश में जुटे हैं। ऐसे कारोबारियों की संख्या 25,000 बताई जा रही हैं। इन कारोबारियों की पहचान पिछले महीने के रिटर्न के आंकड़ों से की गई। जीएसटी रिटर्न नहीं भरने वाले कारोबारियों को एसएमएस और ई-मेल के जरिए भी रिटर्न भरने के लिए कहा जा रहा है।

    पांच करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले कारोबारियों को हर महीने 20 तारीख तक जीएसटीआर-3बी रिटर्न दाखिल करना होता है। राजस्व विभाग की कोशिश से नवंबर का जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ के पार जाने की उम्मीद है। अक्टूबर में जीएसटी संग्रह 1.05 लाख करोड़ रुपए का था।

    डीम्ड जीएसटी पंजीकरण के भौतिक सत्यापन का आदेश

    केंद्रीय परोक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआइसी) ने टैक्स अधिकारियों से 21 अगस्त से 16 नवंबर के दौरान डीम्ड यानी मान्य जीएसटी पंजीकरण हासिल करने वाले कारोबारियों और उनके व्यवसायों का भौतिक सत्यापन करने को कहा है। इसका मकसद उनकी वास्तविक स्थिति का पता लगाना है। सीबीआइसी ने अधिकारियों से यह भी कहा है कि जिन आवेदकों ने आधार सत्यापन का विकल्प नहीं चुना है या जिनका सत्यापन विफल हो गया है, उनका डीम्ड आधार पर जीएसटी पंजीकरण नहीं किया जाए।

    जीएसटी के मौजूदा प्रावधानों के तहत अगर आवेदन के 21 दिनों के भीतर अधिकारी आवेदक को कोई नोटिस जारी नहीं करते हैं तो उसका पंजीकरण स्वीकार्य मान लिया जाता है, जिसे डीम्ड पंजीकरण कहा जाता है। सीबीआइसी ने कहा है कि आंकड़ों के मुताबिक 21 अगस्त से 16 नवंबर के बीच कई डीम्ड जीएसटी पंजीकरण जारी किए गए, जिनमें आधार सत्यापन का विकल्प नहीं लिया गया। बोर्ड यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ये पंजीकरण वर्तमान में चल रहे कारोबार के लिए हैं या कारोबारियों का जल्द कारोबार शुरू करने का इरादा है।

     

  • उद्योग के लिए वित्तीय सहायता जारी रहेगी, कई और क्षेत्रों को प्रोत्साहन मिल सकता है

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    नई दिल्ली। भारत को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने के लिए उद्योग जगत को सरकार की तरफ से वित्तीय मदद का सिलसिला जारी रहेगा। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय कुछ और सेक्टर को इंसेंटिव व अन्य मदद देने पर विचार कर रहा है। मंत्रालय की तरफ से इन सेक्टर की पहचान का काम चल रहा है। सरकार इंसेंटिव के साथ इन सेक्टर में मैन्यूफैक्चरिंग को आसान बनाने के लिए कई नियामक नियमों में भी बदलाव कर सकती है। हाल ही में सरकार की तरफ से 10 औद्योगिक सेक्टर को प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआइ) देने की घोषणा की गई है।

    वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय के मुताबिक 2 लाख करोड़ के पीएलआइ से 20 लाख करोड़ का मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार होगा। इसके तहत प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से 3 करोड़ लोगों को नौकरी मिलने का अनुमान है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक आत्मनिर्भर भारत अभियान में मैन्यूफैक्चरिंग के तहत 24 सेक्टर का चयन किया गया है जिन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। 10 सेक्टर के लिए पीएलआइ की घोषणा हो चुकी है, बाकी सेक्टर को इंसेंटिव देने के तरीके पर विचार किया जा रहा है। वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय औद्योगिक संगठनों के साथ मिलकर वैसे सेक्टर की भी पहचान कर रहा है जिनमें भारत दुनिया के बाजार में आसानी से मुकाबला कर सकता है और जिनकी उत्पादन लागत अन्य देशों के मुकाबले कम हो।

    मंत्रालय के मुताबिक मैन्यूफैक्चरिंग के प्रोत्साहन के लिए वस्तुओं की गुणवत्ता और उत्पादकता का भी ध्यान रखा जा रहा है। हर औद्योगिक सेक्टर को अपने उत्पाद की गुणवत्ता पर फोकस करने के लिए कहा जा रहा है। मंत्रालय के मुताबिक अगले महीने हर सेक्टर को किसी एक दिन अपने उत्पाद की गुणवत्ता के लिए प्रतिबद्धता दिवस के रूप में मनाना होगा। मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट शुरू करने की प्रक्रिया को बिल्कुल आसान बनाने के लिए मंत्रालय सिंगल विंडो सिस्टम भी तैयार कर रहा है जिसकी शुरुआत अगले वित्त वर्ष में हो सकती है।

    विकसित देशों से एफटीए

    वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय वैसे विकसित देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) करने पर फोकस कर रहा है जिन्हें भारत जैसे बड़े बाजार की जरूरत है और जो देश बदले में भारत को उच्च तकनीक वाले उत्पाद मुहैया कराने के लिए तैयार हो। वे देश भारत के विशेष उत्पादों के लिए अपने बाजार के दरवाजे भी खोलने के लिए तत्पर हो।

     

  • हुआवेई 5जी टेलीकॉम पर ब्रिटेन ने सितंबर 2021 से लगाया प्रतिबंध

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    ब्रिटेन सरकार ने सोमवार को घोषणा की है कि चीनी टेक्नॉलॉजी दिग्गज हुआवेई सितंबर 2021 से देश में अपने 5जी उपकरण स्थापित नहीं कर पाएगी। डिजिटल, संस्कृति, मीडिया और खेल विभाग ने कहा कि अपने पहले के फैसले के अनुसार, यूके कैरियर्स अब सितंबर 2021 से हुआवेई उपकरण देश में स्थापित नहीं कर पाएंगे।

    सीएनईटी की रिपोर्ट के अनुसार, यूके सरकार ने एक रोडमैप तैयार किया है जिसके तहत 2027 तक देश के 5जी नेटवर्क से हुआवेई समेत सभी ‘उच्च जोखिम वाले विक्रेताओं’ द्वारा बनाए गए सभी दूरसंचार उपकरणों को हटा दिए जाएंगे।

    इस साल जुलाई में यूके सरकार ने अगले साल से 5जी के लिए नए हुआवेई किट की खरीद पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी और कहा था कि 2027 के अंत तक इसके उपकरण 5जी नेटवर्क से पूरी तरह से हटा दिए जाएंगे।

    टेलिकॉम ऑपरेटर्स के पास 5जी इंफ्रास्ट्रक्च र से 2 बिलियन पाउंड की अनुमानित कीमत पर इसकी मौजूदा तकनीक को हटाने के लिए 7 साल का समय है। टेलीकम्युनिकेशन वेंडर के खिलाफ यह प्रतिबंध लगाने का निर्णय अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव पर नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर (एनसीएससी) की सलाह के बाद लिया गया है। अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (एफससी) ने चीनी दूरसंचार कंपनियों, हुआवेई और जेडटीई को अमेरिका के संचार नेटवर्क के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम के तौर पर बताया है।

    हुआवेई ने इस निर्णय को ‘ब्रिटेन में मोबाइल फोन उपयोगकर्ता के लिए बुरी खबर’ कहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के मद्देनजर अपने व्यवसाय को बनाए रखने में संघर्ष कर रही हुआवेई ने अपनी हॉनर स्मार्टफोन बिजनेस की चीन की कुछ संपत्तियों को इसी महीने बेचने की घोषणा की है, जिनकी कीमत लगभग 15 बिलियन डॉलर हो सकती है।

  • शेयर बज़ार में उतार- चढाव, सेंसेक्स 76 अंक नीचे, निफ्टी 13000 के पार

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    नई दिल्ली। आज यानी बुधवार को शेयर बाजार गिरावट पर खुला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 76.33 अंक नीचे 44,579.11 के स्तर पर खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी की शुरुआत 18.30 अंकों की गिरावट के साथ 13,090.70 पर हुई। गुरु नानक जयंती के उपलक्ष्य पर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार, बॉन्ड और मुद्रा बाजार बंद थे।

    पिछले सप्ताह शेयर बाजार में साप्ताहिक बढ़त रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक 267.47 अंक साप्ताहिक बढ़त के साथ 44,149.72 अंक पर और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 109.90 अंक उछलकर 12,968.95 अंक पर पहुंच गया।

    आज के प्रमुख शेयरों में यूपीएल, टाटा मोटर्स, गेल एनटीपीसी और विप्रो की शुरुआत तेजी पर हुई। वहीं इंफोसिस, एचडीएफसी बैंर, बजाज फाइनेंस, ग्रासिम और एचडीएफसी के शेयर लाल निशान पर खुले।सेक्टोरियल इंडेक्स की बात करें तो आज फाइनेंस सर्विसेज, प्राइवेट बैंक और बैंक के अतिरिक्त सभी सेक्टर्स हरे निशान पर खुले। इनमें आईटी, एफएमसीजी, रियल्टी, ऑटो, फार्मा, पीएसयू बैंक, मेटल और मीडिया शामिल हैं।

     

  • आज फिर पेट्रोल डीजल के दाम बढ़े…

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    नई दिल्ली। घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के दाम में पिछले दो दिनों तक शांति रहने के बाद आज फिर दाम बढ़ गए। सरकारी तेल कंपनियों ने आज पेट्रोल के दाम में 15 पैसे तो डीजल के दाम में 23 पैसे की बढ़ोतरी की। दिल्ली में बुधवार को पेट्रोल 82.49 रुपये पर तो डीजल 72.65 रुपये प्रति लीटर पर चला गया।

    इंडियन ऑयल की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल की कीमतें बढ़कर क्रमश: 82.49 रुपये, 84.02 रुपये, 89.16 रुपये और 85.44 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं। वहीं, चारों महानगरों में डीजल की कीमतें बढ़कर क्रमश: 72.65 रुपये, 76.22 रुपये, 79.22 रुपये और 78.06 रुपये प्रति लीटर हो गई हैं।

    सरकार द्वारा संचालित तेल मार्केटिंग कंपनियां – इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम हर दिन सुबह 6 बजे से कीमतों में किसी भी बदलाव को लागू करती हैं। पेट्रोल-डीजल के भाव रोजाना बदलते हैं और सुबह 6 बजे अपडेट हो जाते हैं। आप इसकी जानकारी SMS के जरिये ले सकते हैं।

  • एप्पल ने 2020 के 15 सर्वश्रेष्ठ ऐप की अपने ऐप स्टोर पर की घोषणा

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    नई दिल्ली। एप्पल ने अपने ऐप स्टोर बेस्ट ऑफ 2020 के विजेताओं की घोषणा की, जिसमें 15 ऐप्स और गेम्स को मान्यता दी गई, जो इस साल जीवन को आसान, स्वस्थ और लोगों से अधिक जुड़े रहने के लिए आवश्यक साबित हुए हैं। अपनी उच्च गुणवत्ता, क्रिएटिव डिजाइन, इस्तेमाल और इनोवेटिव प्रौद्योगिकी के लिए उल्लेखनीय ये ऐप और गेम समान रूप से अपने सकारात्मक सांस्कृतिक प्रभाव, सहायकता और महत्व के लिए जाने जाते हैं।

    एप्पल के सदस्य फिल शिलर ने कहा, “दुनिया भर में हमने कई सारे डेवलपर्स के उल्लेखनीय प्रयासों को देखा और 2020 के ये सर्वश्रेष्ठ विजेता उस इनोवेशन के 15 उत्कृष्ट उदाहरण हैं। अपने बच्चों की शिक्षा को ट्रैक पर रखने, भूख से लड़ने में मदद करने से लेकर कई चीजों में उनका प्रभाव हममें से कई लोगों के लिए सार्थक रहा।”

    इस साल ऐपल ने एंड्रेस कैनेला द्वारा विकसित साल के आईफोन ऐप के रूप में ‘वेकआउट’ को सम्मानित किया। वेकाउट के स्वतंत्र डेवलपर ने सभी के लिए डिजाइन किए गए हल्के-फुल्के और समावेशी गतिविधियों के साथ घर पर कार्यालयों और कक्षाओं में हल्के वर्कआउट उपलब्ध कराए हैं।

    महामारी के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप जूम को इस साल का आईपैड ऐप बनाया गया है।

    वहीं एमआई होयो से गेनशिन इम्पैक्ट और रियोट गेम्स के लीजेंड्स ऑफ द रॉट गेम्स को क्रमश: आईफोन गेम ऑफ द ईयर और आईपैड गेम ऑफ द ईयर से सम्मानित किया गया।

    डिज्नी प्लस के एक अमेरिकी सदस्यता वीडियो-ऑन-डिमांड ओवर-द-टॉप स्ट्रीमिंग सेवा का स्वामित्वको ऐप्पल टीवी ऐप का खिताब मिला।

  • शेयर बाजार में जोरदार शुरुआत हुई, सेंसेक्स 98 अंक चढ़ा, निफ्टी 13100 के पार चला गया

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    नई दिल्ली। आज सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को शेयर बाजार बढ़त पर खुला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 98.43 अंक ऊपर 44731.08 के स्तर पर खुला। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी की शुरुआत 35.30 अंकों की तेजी के साथ 13169.20 पर हुई। पिछले कारोबारी दिन सेंसेक्स-निफ्टी रिकॉर्ड ऊंचाई पर खुले थे। सेंसेक्स 148.91 अंक ऊपर 44766.95 के स्तर पर खुला था और निफ्टी की शुरुआत 47.50 अंकों की तेजी के साथ 13161.30 पर हुई थी।

    आज के प्रमुख शेयरों में गेल, अडाणी पोर्ट्स, भारती एयरटेल और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयर तेजी पर थे। वहीं ओएनजीसी, टेक महिंद्रा, टाटा स्टील और एशियन पेंट्स के शेयर लाल निशान पर खुले। सेक्टोरियल इंडेक्स पर नजर डालें, तो आज आईटी के अतिरिक्त सभी सेक्टर्स हरे निशान पर खुले। इनमें फाइनेंस सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, बैंक एफएमसीजी, रियल्टी, ऑटो, फार्मा, पीएसयू बैंक, मेटल और मीडिया शामिल हैं।

    भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास आज मौद्रिक नीति स्टेटमेंट की घोषणा करेंगे। आरबीआइ गवर्नर डॉ. दास की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समीक्षा समिति की बैठक 2 दिसंबर से ही चालू है और तीन दिनों की बैठक के बाद इसमें लिए गए फैसलों का ऐलान आज यानी 4 दिसंबर को होगा। पिछले चार महीनों की दो मौद्रिक समीक्षाओं में आरबीआइ गवर्नर डॉ. शक्तिकांत दास ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। आज भी मौद्रिक नीति की समीक्षा के एलान में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम है।

     

  • Indigo बंद करेगी एक जनवरी से कर्मचारियों के लिए बिना वेतन अवकाश कार्यक्रम को

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    नई दिल्ली। इंडिगो ने बिना वेतन अवकाश (एलडब्ल्यूपी) कार्यक्रम को बंद करने की घोषणा की है इसके मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रोनोजॉय दत्ता ने कहा कि वरिष्ठ कर्मचारियों के लिए अगले साल एक जनवरी से बिना वेतन अवकाश (एलडब्ल्यूपी) कार्यक्रम को बंद किया जाएगा। एयरलाइन ने यह घोषणा राजस्व में सुधार की उम्मीद में की है।

    सीमित और ग्रेडेड एलडब्ल्यूपी

    कोरोना वायरस की वजह से यात्रा पर लगाए अंकुशों के बीच दत्ता ने आठ मई को कहा था कि सभी कर्मचारियों के लिए ‘सीमित और ग्रेडेड एलडब्ल्यूपी’ कार्यक्रम का क्रियान्वयन किया जाएगा। यह कार्यक्रम सबसे निचले समूह स्तर ए के कर्मचारियों के लिए नहीं होगा। महामारी के बीच सभी एयरलाइंस ने लागत कटौती मसलन वेतन में कटौती, बिना वेतन अवकाश के उपाय किए हैं।

    आठ मई को वरिष्ठ कर्मचारियों के वेतन में पांच से 25 फीसद कटौती की गई थी

    इंडिगो द्वारा लागू एलडब्ल्यूपी कर्मचारियों के समूह के हिसाब से डेढ़ से पांच दिन का है। इंडिगो ने आठ मई को अपने वरिष्ठ कर्मचारियों के वेतन में भी पांच से 25 फीसद कटौती की भी घोषण की थी। वेतन कटौती अभी लागू है। कर्मचारियों को भेजे ई-मेल में दत्ता ने कहा है कि इस समय हम सुधार की राह पर है। हमें उम्मीद है कि सरकार अगले साल से हमें घरेलू क्षमता के 100 प्रतिशत पर परिचालन की अनुमति देगी। फिलहाल भारतीय एयरलाइंस को कोविड-पूर्व के स्तर के 80 प्रतिशत के बराबर घरेलू उड़ानों के परिचालन की अनुमति है।

    23 मार्च से भारत में अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानों को निलंबित किया गया है। हालांकि, विशेष अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानें मई से वंदे भारत मिशन के तहत काम कर रही हैं। दत्ता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय यातायात चुनौतीपूर्ण है और यह चिंता का विषय है।

    दत्ता ने कहा कि पिछले छह महीने वास्तव में अस्थिर थे और एयरलाइन को बड़ा नुकसान हुआ, उन्होंने कहा कि हमें जल्द से जल्द एक बार फिर स्थिर होने की आवश्यकता है।