Category: business

  • फर्जी कम्पनियों ने मोदी सरकार की जीएसटी में लगायी सेंध, ऐसे लगाया 60 करोड़ का चूना

    [object Promise]

    लखनऊ । जीएसटी की आड़ में फर्जी बिल बनाकर 60 करोड़ रुपये से ज्यादा का चूना लगाने वाले गिरोह का डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआई) की टीम ने गुरुवार को पर्दाफाश करने का दावा किया है। डीजीजीआई की टीम के अनुसार, कानपुर के व्यापारियों- मनोज कुमार जैन और चन्द्र प्रकाश तायल के अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी के दौरान यह टैक्स चोरी सामने आई है। इससे पहले गुजरात और राजस्थान में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस तरह का पहला मामला पकड़ा गया है।

    जीएसटी इंटेलिजेंस के अधिकारियों के मुताबिक, जीएसटी लागू होने के एक साल के भीतर दोनों व्यापारियों ने अलग-अलग फर्मों के नाम से 400 करोड़ रुपये के बोगस इनवॉयस प्रदेश के कई जिलों के कारोबारियों के लिए काटे। इस बोगस इनवॉयस के जरिए उन कारोबारियों और कम्पनियों ने अपनी लागत बढ़ी हुई दिखाकर गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया। साथ ही मुनाफा कम दिखाकर इनकम टैक्स की चोरी भी की। फर्जी इनवॉयस के एवज में मनोज और चन्द्र प्रकाश उन कम्पनियों से इनवॉयस की कुल रकम का एक से दो प्रतिशत कमिशन लेते थे।

    बोगस कम्पनियों के नाम से काटे बिल
    अधिकारियों के अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों के कारोबारियों को बोगस इनवॉयस देने के लिए मनोज और चन्द्र प्रकाश ने कई बोगस कम्पनियां बना रखीं थीं। इन कागजी कम्पनियों के जरिए सीमेन्ट, बिटुमिन, प्लास्टिक दाना, मेटल, प्लास्टिक एवं धातु की चादरों की आपूर्ति दिखाकर इनवॉयस इशू होता था। सच यह था कि जिस सामान की खरीद इनवॉयस में दिखाई जाती थी, वह सामान कोई कम्पनी खरीदती ही नहीं थीं। सिर्फ इनपुट कॉस्ट बढ़ाने के लिए फर्जी इनवॉयस लगा दिया जाता था। दोनों कारोबारी 6 कम्पनियों के नाम पर फर्जी इनवॉयस इशू करते थे। इनके नाम बिहार जी डिवलपर्स, गोपाल जी इंपैक्स, राधे-राधे डेवलपर्स, श्री राधे ट्रेडर्स, ज्ञान ट्रेडर्स और एस के उद्योग बताए गए हैं।

    फर्जी ट्रांसपोर्ट सिस्टम भी बनाया
    फर्जी कम्पनियां और इनवॉयस बनाने के अलावा दोनों व्यापारियों ने पकड़े जाने से बचने के लिए एक फर्जी ट्रांसपोर्ट सिस्टम भी बनाया। इसके तहत ट्रांसपोर्ट मालिकों की मिलीभगत से माल ढुलाई के लिए फर्जी ई-वे बिल बनाए गए। फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ न हो, इसके लिए ट्रांसपोर्ट मालिकों को आरटीजीएस के जरिए वास्तविकता में पेमेंट भी किया जाता था। ट्रांसपोर्ट मालिक इसमें से अपना कमिशन लेकर बाकी पैसा मनोज और चंद्र प्रकाश को कैश में वापस कर देते थे। फर्जीवाड़ा करने वाले दोनों व्यापारियों को गुरुवार दोपहर कैसरबाग स्थित इकोनॉमिक ऑफेंस कोर्ट में पेश किया गया। यहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

    एक कमरे से कट गए करोड़ों के बिल
    इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ करने के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस के अडिशनल डायरेक्टर जनरल राजेन्द्र सिंह की अगुआई में टीम डेढ़ महीने से लगी हुई थी। कम्पनियों को जिस पते पर रजिस्टर किया गया था, वहां कुछ भी न होने की वजह से फर्जी बिल कहां से काटे जाते हैं यह पता करने में काफी समय लगा। मनोज कुमार जैन और चन्द्र प्रकाश तायल ने एक कमरे में ही बैठकर 6 कंपनियों के नाम से करोड़ों रुपये के फर्जी बिल जारी कर दिए। इस काम को अंजाम देने वाली टीम में डीजीजीआई के डिप्टी डायरेक्टर कमलेश कुमार, एसआईओ पीके त्रिपाठी, बृजेश त्रिपाठी, आईओ उपदेश सिंह समेत लखनऊ यूनिट के 20 से ज्यादा अधिकारी लगे हुए थे।

  • दवाओं की मुनाफाखोरी पर लगाम लगेगी, अब हर दवा की कीमत तय करेगी सरकार

    [object Promise]

    नई दिल्ली. नीति आयोग एक फॉर्मूला तैयार कर रहा है, जिसमें ट्रेड मार्जिन के आधार पर दवाओं के दाम कंट्रोल किए जा सकेंगे. अब हर दवा की कीमत तय करने की जिम्मेबारी सरकार की होगी. सरकार अब सभी तरह की दवाओं के दाम तय करने की दिशा में जल्द कदम उठाने जा रही है. जानकारी के मुताबिक, नीति आयोग एक फॉर्मूला तैयार कर रहा है, जिसमें सरकार फिलहाल चुनिंदा दवाओं के दाम तय करती है. यह प्रयोग सफल रहा तो सभी प्रकार के दवाओं के दाम सरकार के द्वारा ही तय किए जाएंगे.

    दवाओं की कीमत में अनियंत्रित मुनाफाखोरी को रोकने के लिए सरकार तेजी से काम कर रही है. नीति आयोग की अगुवाई में स्वास्थ्य मंत्रालय और फार्मा मंत्रालय के अधिकारी फॉर्मूला तैयार करने में जुटे हैं. नीति आयोग के सदस्य डॉ. विनोद पॉल ने कहा कि जल्द ही फॉमूलज़ तैयार कर लिया जाएगा. आपको बता दें कि कंपनियां एक ही सॉल्ट को अलग-अलग ब्रांड नेम से अलग-अलग प्रॉफिट मार्जिन पर अस्पतालों और रिटेलर्स को बेचते हैं.

    नतीजा यह होता है कि जो ब्रांच ज्यादा मुनाफा देता है, कई बार डॉक्टर और अस्पताल उसी दवा को रिकमेंड करते हैं और उसकी बिक्री बढ़ जाती है. इस कंपटीशन में मरीजों को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है. क्यों उठाया जा रहा है ये कदम- सूत्रों के मुताबिक, नीति आयोग दवाओं की कीमत को फस्र्ट प्वाइंट ऑफ सेल या यूं कहें कि बिक्री की पहली जगह पर ट्रेड माजिज़्न तय करना चाहती है. इससे कंपनी और अस्पतालों की मुनाफाखोरी पर लगाम लगेगी और मरीजों को उपयुक्‍त दर पर दवाएं मुहैया की जा सकेंगी.

    सरकार दवाओं की कीमत निर्धारित करने वाली संस्था एनपीपीए के माध्यम से सिर्फ जीवनरक्षक दवाओं की कीमत निर्धारित करती है लेकिन हमारे देश में दवाओं का घरेलू उद्योग करीब 1 लाख करोड़ का है जिसका सिर्फ 17 फीसदी ही कीमत नियंत्रण के दायरे में है.

  • Google पर लगा 4.3 अरब यूरो का जुर्माना

    [object Promise]
     ब्रुसेल्स. यूरोपीय संघ ने बाजार में एंड्रायड प्रणाली के वर्चश्व की स्थिति का दुरुपयोग करने को लेकर इंटरनेट सेवाएं देने वाली कंपनी गूगल पर बुधवार को 4.34 अरब यूरो (करीब पांच अरब डॉलर) का जुर्माना लगा दिया. यह प्रतिस्पर्धा प्रावधानों के उल्लंघन को लेकर यूरोपीय संघ द्वारा किसी भी कंपनी पर लगाया गया अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना है. ऐसी आशंका है कि इससे अमेरिका और यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापार को लेकर तनाव बढ़ सकता है.

    यूरोपीय संघ की प्रतिस्पर्धा आयुक्त मार्गरेट वेस्टगर ने कहा कि गूगल ने अपने ब्राउजर और सर्च इंजन के बाजार के विस्तार के लिए एंड्रायड के दबदबे का दुरुपयोग किया है. यह निर्णय तीन साल की जांच के बाद ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका द्वारा इस्पात एवं अल्युमिनीयम पर शुल्क लगाने के कारण अमेरिका के साथ यूरोपीय संघ का पहले ही विवाद चल रहा है.

    वेस्टगर ने यहां एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि यूरोपीय संघ ने प्रतिस्पर्धा नियमों के उल्लंघन को लेकर गूगल पर 4.34 अरब यूरो का जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा कि गूगल इंटरनेट सर्च में अपनी हिस्सेदारी को मजबूत करने के लिए अवैध गतिविधियों में संलिप्त है. उसे 90 दिनों के भीतर या तो गतिविधियां बंद करनी होगी, वर्ना उसे औसत दैनिक राजस्व का पांच फीसदी जुर्माना के तौर पर भुगतान करना होगा.

    इससे पहले गूगल पर खरीदारी के एक मामले में 2017 में यूरोपीय संघ रिकॉर्ड 2.4 अरब डॉलर का जुर्माना लगा चुका है. गूगल के प्रवक्ता अल वर्नी ने एक बयान में कहा कि कंपनी इस जुर्माने के खिलाफ अपील करेगी. उन्होंने कहा कि एंड्रायड ने लोगों के लिए अधिक मौके सृजित किये हैं, कम नहीं किये. वर्नी ने कहा कि मजबूत पारिस्थितिकी, तेज नवाचार और कम कीमतें शानदार प्रतिस्पर्धा के पारंपरिक सूचक हैं. हम यूरोपीय संघ के निर्णय के खिलाफ अपील करेंगे.

    वेस्टगर ने जुर्माने के निर्णय की अग्रिम सूचना देने के लिए मंगलवार की रात गूगल सीईओ सुंदर पिचाई से फोन पर बातें की थी. वेस्टगर ने कहा कि गूगल ने सैमसंग और हुआई जैसी स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों के साथ गठजोड़ कर स्मार्टफोनों में अपना ब्राउजर और सर्च इंजन प्रीइंस्टॉल करा प्रतिस्पर्धियों के मौके छीने. उन्होंने कहा कि गूगल ने अपनी कई अन्य एप एवं सेवाओं के इस्तेमाल के बदले गूगल सर्च को डिफॉल्ट सर्चइंजन बनाने की बाध्यता रखी.

    इनके अलावा, उसने गूगल सर्च को प्री-इंस्टॉल कराने के लिए स्मार्टफोन निर्माताओं एवं मोबाइल नेटवर्क कंपनियों को वित्तीय प्रोत्साहन भी दिये. इससे पहले यूरोपीय संघ अमेरिका की दो अन्य बड़ी कंपनियों एप्पल और फेसबुक पर भी भारी-भरकम जुर्माना लगा चुका है. अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार शुल्क को लेकर जारी तनाव के बीच इस निर्णय से तनाव नये उच्च स्तर तक पहुंच सकता है.

  • कल से लाखों ट्रक और बसों का चक्काजाम

    [object Promise]

    नई दिल्ली । सरकार की ओर से ट्रांसपोर्टर्स को मनाने और कुछ नई रियायतों की पेशकश के बाद भी लाखों ट्रक और बस ऑपरेटर्स ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला लिया है। ट्रक और बस ऑपरेटर्स के संगठन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने अपनी पुरानी और बड़ी मांगों के साथ 20 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। सभी शहरों में बड़े सप्लाई केंद्रों पर बुधवार से ही नई लोडिंग और बुकिंग बंद होती दिखी और शुक्रवार से करीब 90 लाख ट्रक और 50 लाख बसें सड़कों से बाहर हो सकते हैं।

    हालांकि सरकारी सूत्रों का कहना है कि ट्रांसपोर्टर्स को मनाने की कोशिशें जारी हैं और गुरुवार को निर्णायक सहमति बन सकती है। दो दिन पहले ही ट्रकों की लोडिंग सीमा बढ़ाकर ट्रांसपोर्टर्स को लुभाने वाली रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्ट्री ने अब दो ड्राइवरों की अनिवार्यता, फिटनेस सर्टिफिकेट और ओवरलोडिंग पर कुछ रियायतों की पेशकश की है, लेकिन ट्रांसपोर्टर्स ने साफ कर दिया है कि उनकी हड़ताल डीजल कीमतों, ईवे बिल, थर्ड पार्टी प्रीमियम और टीडीएस जैसे बड़े नीतिगत बदलावों की मांग को लेकर है।

    एईएमटीसी के प्रेजिडेंट एस.के. मित्तल ने सभी पदाधिकारियों के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि शुक्रवार से पूरे देश में सभी ट्रक, बस, लॉरी मालिक अपनी गाड़ियां सड़कों से दूर रखेंगे। उन्होंने मांग की है कि सरकार डीजल कीमतों में कमी के लिए इसे जीएसटी के दायरे में लाए या मौजूदा केंद्रीय व राज्य करों में कटौती करे। उन्होंने कहा कि टोल कलेक्शन सिस्टम बदलने की जरूरत है। टोल प्लाजा पर ईंधन और समय के नुकसान से सालाना 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। थर्ड पार्टी बीमा प्रीमियम पर जीएसटी की छूट मिले और एजेंटों को होने वाला अतिरिक्त कमिशन खत्म हो। बसों और पर्यटन वाहनों के लिए नैशनल परमिट मिले।

    टीडीएस बंद करने और ई-वे बिल में संशोधन की मांग
    इनकम टैक्स ऐक्ट के सेक्शन 44एई में प्रिजेंप्टिव इनकम के तहत टीडीएस बंद हो। ई-वे बिल में संशोधन हो। इसके पहले ट्रांसपोर्ट मंत्री नितिन गडकरी ने मीडिया से बातचीत में संकेत दिए कि सरकार नैशनल परमिट पर दो ड्राइवर रखने की अनिवार्यता में छूट देते हुए एक ड्राइवर का प्रावधान कर सकती है। फिटनेस हर साल के बजाय एक साल छोड़कर कराने की रियायत और ओवरलोडिंग पर 10 गुना टोल चार्ज के बजाय लोड ग्रेडिंग के आधार पर पेनाल्टी पर विचार किया जा रहा है।

  • चुनाव आयोग से वॉट्सऐप ने किया वादा, लगायेगी फेक न्यूज पर लगाम

    [object Promise]

    बेंगलुरु/नई दिल्ली । वॉट्सऐप के अमेरिकी मुख्यालय और भारतीय कामकाज से जुड़े सीनियर अधिकारियों ने चुनाव आयोग ़ के अलावा बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं से मुलाकात की है। वॉट्सऐप का कहना है कि भारत में आगामी चुनावों के दौरान अपने प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग रोकने की कोशिश के तहत उसने ये मुलाकातें की हैं। वॉट्सऐप ने आयोग से कहा है कि फेसबुक ़ की तरह वह इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आपत्तिजनक कंटेंट को सक्रियता के साथ फिल्टर करेगी, खासतौर से मतदान के 48 घंटे पहले। इस मेसेजिंग सर्विस पर फेसबुक का ही मालिकाना हक है। उसने कहा कि वह भारत में फेक न्यूज वेरिफिकेशन मॉडल (वेरिफिकैडो) का इस्तेमाल करेगी। इसका उपयोग उसने हाल में मेक्सिको के आम चुनाव में किया था।

    वॉट्सऐप में चल रहे घटनाक्रम से वाकिफ एक शख्स ने बताया कि आयोग, कांग्रेस और बीजेपी के साथ मीटिंग करने वाली टीम में रिसर्चरों के अलावा पब्लिक पॉलिसी, कस्टमर ऑपरेशंस और बिजनेस डिवेलपमेंट से डील करने वाले अधिकारी थे। आयोग के अधिकारियों ने ईटी को बताया कि वॉट्सऐप ़ आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू रहने के दौरान सतर्कता बनाए रखने पर राजी हुई है और वह चुनाव के हर चरण में मतदान से 48 घंटे पहले अपने प्रयास तेज कर देगी।

    अभी भारत में मौजूद वॉट्सऐप की यह टीम बड़े भारतीय बैंकों के प्रतिनिधियों से भी मिलेगी, जिनको इसे अपने पीयर टु पीयर डिजिटल पेमेंट्स सॉल्यूशन में पार्टनर बनाना है। आयोग और वॉट्सऐप के अधिकारियों ने बताया कि 2018 के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों के दौरान मॉनिटरिंग के प्रयासों से मिले सबक का उपयोग 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान किया जाएगा। फेसबुक के प्रतिनिधियों ने भी जून में आयोग के अधिाकरियों से इसी तरह के वादे किए थे।

    वॉट्सऐप ग्रुप्स के जरिए नफरत भरा कंटेंट और अफवाहें फैलाने के चलते देश के कई हिस्सों में लोगों को घेरकर मारने की घटनाएं सामने आई हैं। केंद्र सरकार ने वॉट्सऐप से इस संबंध में एक्शन लेने को कहा है। माना जा रहा है कि वॉट्सऐप ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से कहा है कि वह भारत में वेरिफिकैडो मॉडल लाएगी। यह कलेक्टिव फैक्ट-चेकिंग मॉडल है। ऐसा ही कदम वॉट्सऐप ब्राजील में उठा रही है, जहां 24 मीडिया संगठन वायरल कंटेंट और अफवाहों की जांच के लिए एकजुट हुए हैं।

    बीजेपी के आईटी सेल हेड अमित मालवीय ने ईटी से कहा कि वॉट्सऐप के साथ मीटिंग में वह शामिल नहीं हुए थे। सेल के दूसरे मेंबर्स ने ऐसी मीटिंग होने की पुष्टि की। कांग्रेस की आईटी सेल हेड दिव्या स्पंदन ने कहा, वाट्सऐप ने हमें भरोसा दिया है कि स्पैमी बिहेवियर पर नजर रखने के लिए वह सभी कदम उठा रही है।

  • अब salary पर भी लगेगा 18 फीसदी GST

    [object Promise]

    नयी दिल्ली. किसी कंपनी के मुख्यालय (हेडक्वार्टर) द्वारा दूसरे राज्यों में स्थित उसकी शाखाओं को दी जाने वाली एकाउंटिंग, आईटी, मानव संसाधन (एचआर) जैसी सेवाओं के लिए दिये जाने वाले salaryपर 18 फीसदी जीएसटी लगेगा. एडवांस रूलिंग अथॉरिटी (एएआर) की कर्नाटक पीठ की ओर से जारी आदेश के अनुसार, दो कार्यालयों के बीच इस तरह की गतिविधियां जीएसटी कानून के तहत आपूर्ति मानी जायेगी.

    एएआर ने कहा कि एकाउंटिंग, अन्य प्रशासनिक और आईटी प्रणाली के रखरखाव के संदर्भ में कारपोरेट कार्यालय में कार्यरत कर्मचारी अन्य राज्यों में स्थित शाखाओं के लिए जो काम करते हैं, उन पर केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर कानून-2017 (सीजीएसटी कानून) की धारा 25 (4) के तहत सीजीएसटी कानून की अनुसूची एक की प्रविष्टि दो के अंतर्गत आपूर्ति माना जायेगा.

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस व्यवस्था का मतलब है कि जिन कंपनियों के विभिन्न राज्यों में कार्यालय हैं, उन्हें मुख्य कार्यालय में कर्मचारियों द्वारा अन्य राज्यों में स्थित शाखाओं को कामकाज में मदद के एवज में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) वसूलना होगा. हालांकि, ऐसी आपूर्ति पर लिए जाने वाले जीएसटी के सदर्भ में ‘इनपुट टैक्स क्रेडिट’ (आईटीसी) का दावा किया जा सकता है. जिन कंपनियों को जीएसटी से छूट है, वे ‘क्रेडिट’ का दावा नहीं कर पायेंगी.

    साथ ही, इससे कंपनियों का अनुपालन बोझ बढ़ेगा, क्योंकि उन्हें अंतर-राज्यीय सेवाओं के लिए बीजक बनाना होगा. एएमआरजी एंड एसोसिएट्स पार्टनर रजत मोहन ने कहा कि इस तरह से सेवाओं की आपूर्ति पर 18 फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा. यह देशभर में काम करने वाली कंपनियों के लिए झटका है.

    रजत मोहन के मुताबिक, दिये गये जीएसटी पर कर क्रेडिट मिलेगा. हालांकि, शिक्षा, अस्पताल, अल्कोहल और पेट्रोलियम जैसे क्षेत्र को जीएसटी से छूट प्राप्त है.

  • शेयर बाजार लाल निशान में डूबा, दलाल स्ट्रीट में हाहाकार

    [object Promise]

    नई दिल्ली: मुबंई की दलाल स्ट्रीट लाल निशान में डूब गई है. शेयर बाजार औंधे मुंह गिर गया है. सेंसेक्स में करीब 550 अंक की गिरावट देखने को मिली है. वहीं, निफ्टी भी 140 अंक तक नीचे फिसल गया. पूरे दिन बाजार में बिकवाली का दबाव कायम है. सेंसेक्स 1.50 फीसदी और निफ्टी 1.31 फीसदी से ज्यादा टूटा. निफ्टी ने दिन के निचले स्तर 11,369.20 तक गोता लगाया. वहीं, सेंसेक्स 37,548.9 तक टूटा. अंत में सेंसेक्स 505 अंक यानि 1.33 फीसदी की गिरावट के साथ 37,585.51 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 137 अंक यानि 1.19 फीसदी गिरकर 11,377.75 के स्तर पर बंद हुआ.

    मिडकैप शेयरों में दबाव
    आज के कारोबार में मिडकैप शेयरों में भी दबाव देखने को मिला. साथ ही स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट दर्ज की गई. बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.5 फीसदी गिरा है, जबकि निफ्टी के मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स सपाट नजर आ रहा है.

    बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली
    बैंकिंग, फार्मा, एफएमसीजी, ऑटो, कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्युरेबल्स शेयरों में बिकवाली देखने को मिली. बैंक निफ्टी 1.25 फीसदी की गिरावट के साथ 26,820 के स्तर पर बंद हुआ. हालांकि भारी गिरावट के बीच आज आईटी और रियल्टी शेयरों में खरीदारी का माहौल नजर आया.

    इन शेयरों में दिखी गिरावट
    सन फार्मा, भारती इंफ्रा, बजाज फाइनेंस, HDFC, बजाज फिनसर्व, टाटा मोटर्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एशियन पेंट्स 2.9-2 फीसदी तक गिरकर बंद हुए. हालांकि, BPCL, HPCL, आयशर मोटर्स, टेक महिंद्रा, पावर ग्रिड, TCS और अदानी पोर्ट्स 2.7-0.3 फीसदी तक चढ़कर बंद हुए हैं.

    मिडकैप शेयरों ने भी दम तोड़ा
    मिडकैप शेयरों में L&T फाइनेंस, कमिंस, अशोक लेलैंड, मैक्स फाइनेंशियल और अमारा राजा 3.1-2.8 फीसदी तक लुढ़क कर बंद हुए. वहीं, MRPL, ओरेकल फाइनेंशियल, डिवीज लैब और टोरेंट फार्मा 6.3-2.3 फीसदी तक उछलकर बंद हुए.

  • खुशखबरी : 100 रुपये का Petrol भरवाने पर मिलेगा 40 रुपए कैशबैक

    [object Promise]

    नई दिल्ली ।  देशभर में पेट्रोल -डीजल की कीमतों में लगातार जारी बढ़ोतरी जारी है। हाल ही में 10 सितंबर को कांग्रेस ने भी पेट्रोल की बढ़ी रही कीमतों के खिलाफ भारत बंद का एेलान किया था लेकिन फिर भी आम जनता को इससे राहत  मिलती नहीं मिल रही। हालांकि देश के कुछ राज्यों में सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में कमी करके आम जनता को थोड़ी राहत दी है।

    इसी कड़ी में इंडियन ऑयल भी लोगों को राहत देने के लिए एक खास तरह का ऑफर दे रही है। इस ऑफर के तहत अगर आप 100 रुपये का पेट्रोल भरवाते है तो आप 40 रुपये का डिस्काउंट ले सकते हैं। मिली जानकारी के अनुसार यह ऑफर डिजिटल वॉलेट फोनपे एप की ओर से मिल रहा है।

    इसके तहत पेट्रोल भरवाने के बाद डिस्काउंट लेने के लिए आपको

    करना होगा। इसके बाद आपको 100 रुपये या इससे ज्यादा के पेमेंट पर 40 रुपये का कैशबैक मिलेगा।

    हालांकि आपको यह कैशबैक 10 बार पेट्रोल भरवाने पर मिलेगा यानि अगर आप 10 बार तक फोनपे पेमेंट करते हैं तो आपको कैशबैक मिलेगा इससे ज्यादा बार आपको डिस्काउंट नहीं मिलेगा। आपको बता दें कि यह खास ऑफर 30 सितंबर 2018 तक है। साथ ही इसकी शर्त यह भी है आप 1 दिन में एक में एक बार ही कैशबैक ले सकेंगे।

  • SBI INTERNET बैंकिंग हो जाएगी बंद, SBI ग्राहक ध्यान दें , 1 Dec तक कर लें ये जरूरी काम

    [object Promise]

    नई दिल्ली.  SBI में यदि आपका अकाउंट है और आप इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं तो 1 दिसंबर तक अपना मोबाइल नंबर जरूर बैंक में रजिस्टर करा लें. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आप नेट बैंकिंग सुविधा ब्लॉक हो जाएगी. बैंक ने अपने इंटरनेट बैंकिंग वेबसाइट onlinesbi’  पर ग्राहकों को जानकारी दी है कि यदि उन्होंने 1 दिसंबर तक अपने मोबाइल नंबर को ब्रान्च में जाकर रजिस्टर नहीं कराया तो आगे नेट बैंकिंग की सुविधा नहीं ले पाएंगे.

    यदि आपका नंबर बैंक में रजिस्टर है तो आपको कुछ करने की जरूरत नहीं है. SBI ने वेबसाइट पर लिखा है, ‘INB ग्राहक ध्यान दें, यदि आपने अभी तक अपना मोबाइल रजिस्टर नहीं कराया है तो कृपया ब्रान्च में जाकर तुरंत करें. ऐसा नहीं करने पर इंटरनेट बैंकिंग सुविधा 1.12.18 से बंद हो सकती है. इसलिए यदि आपका मोबाइल नंबर SBI के पास रजिस्टर नहीं है तो समय रहते ब्रान्च में जाएं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ओर से 6 जुलाई 2017 को जारी सर्कुलर में बैंकों से कहा था कि वे अपने ग्राहकों को SMS और ईमेल अलर्ट के लिए अनिवार्य रूप से रजिस्टर करने को कहें.

    [object Promise]
    State-Bank-of-India-Internet-Bankin

    यूं देखें आपका मोबाइल रजिस्टर है या नहीं

    1. www.onlinesbi.com पर जाएं. लॉग इन और पासवर्ड डिटेल एंटर करें.

    2.लॉग इन करने के बाद होमपेज पर MY Account and profile टैब क्लिक करें.

    3. My account and Profile टैब के तहत Profile पर क्लिक करें.

    4. अब Personal Details/Mobile पर क्लिक करें.

    5. अब आपको प्रोफाइल पासवर्ड मांगा जाएगा. ध्यान रखें, प्रोफाइल पासवर्ड लॉगइन पासवर्ड से अलग है.

    6. सही प्रोफाइल पासवर्ड एंटर करते ही आप मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी आंशिक रूप से देख सकते हैं. यदि आपका मोबाइल नंबर रजिस्टर नहीं है तो आपको बैंक के होम ब्रान्च में जाना होगा.