Category: business

  • कोरोनावायरस की वजह से अब इतने दिन पहले कर सकेंगे गैस सिलिंडर बुक

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    लॉकडाउन की वजह से लोग पैनिक हो रहे हैं जिसको रोकने के लिए सभी तरह की अपील की जा रही है। सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने भी कोरोना वायरस के मद्देनजर लोगों से ‘पैनिक बुकिंग’ नहीं कराने की अपील की है।

    लॉकडाउन की वजह से लोग पैनिक हो रहे हैं जिसको रोकने के लिए सभी तरह की अपील की जा रही है। सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने भी कोरोना वायरस के मद्देनजर लोगों से ‘पैनिक बुकिंग’ नहीं कराने की अपील की है। कंपनी का कहना है कि अब 15 दिन के अंतर पर ही रसोई गैस की बुकिंग कराई जा सकेगी। तेल कंपनी के अध्यक्ष संजीव सिंह ने एक वीडियो संदेश में आश्वस्त किया कि देश में रसोई गैस की कोई कमी नहीं है।

    इंडियन ऑयल के अध्यक्ष संजीव सिंह ने एक वीडियो संदेश में आश्वस्त किया कि देश में रसोई गैस की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति पूरे देश में सुचारू है। पेट्रोल, डीजल या रसोई गैस को लेकर कोई किल्लत या कोई दिक्कत नहीं है। विशेषकर रसोई गैस के लिए आश्वस्त करना चाहता हूं कि आप लोग निश्चिंत रहें। एलपीजी की आपूर्ति सुचारू रूप से चल रही है और चलती रहेगी। ग्राहकों से निवेदन है कि पैनिक बुकिंग न करें। इससे सिस्टम पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। हमने अब यह व्यवस्था शुरू की है कि कम से कम 15 दिन के अंतर से पहले ग्राहक रिफिल बुकिंग नहीं करा सकेंगे।

    लॉकडाउन के बाद से देश में पेट्रोल-डीजल की खपत तो कम हुई है लेकिन रसोई गैस की मांग बढ़ गई है। अब तक ग्राहकों के बुकिंग पर कोई समय सीमा लागू नहीं थी। आम उपभोक्ताओं को एक साल में पहले 12 घरेलू रसोई गैस सिलिंडर पर सब्सिडी मिलती है जबकि उसके बाद सब्सिडी नहीं मिलती।

     

  • अमीरों की ग्लोबल लिस्ट में नीचे फिसले अंबानी, अडानी टॉप 100 से बाहर

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    मुंबई । कोरोना की वजह से देश का आम आदमी तो तबाह हो ही रहा है। बड़े-बड़े कारोबारी दिग्गजों को भी इसकी वजह से भारी नुकसान हुआ है. कोरोना की वजह से ही भारत के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी की संपत्ति (नेटवर्थ) में पिछले दो माह में 28 फीसदी की भारी कमी दर्ज की गई है । हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट में यह जानकारी दी गई है। यही नहीं, गौतम अडानी, शिव नाडर और उदय कोटक कोरोना की वजह से ही दुनिया के टॉप 100 अमीरों की सूची से बाहर हो गए हैं।

    इस लिस्ट के मुताबिक, अंबानी की नेटवर्थ 30 करोड़ डॉलर प्रति दिन घटकर 31 मार्च को 48 अरब डॉलर रह गई है. इस तरह रुपये में अगर देखें तो उनकी संपत्ति करीब 1.44 लाख करोड़ घट चुकी है और अब यह 3.65 लाख करोड़ रुपये रह गई है। अंबानी के अलावा गौतम अडानी, शिव नाडर और उदय कोटक की संपत्ति में भी जबरदस्त कमी दर्ज की गई है।

    न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अंबानी की संपत्ति में कमी की बड़ी वजह शेयर बाजारों में जबरदस्त गिरावट है. हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर की संपत्ति में फरवरी-मार्च की अवधि में ही 19 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई । इस वजह से वह दुनियाभर की अमीर शख्सियतों की सूची में आठ स्थान फिसलकर 17वें पायदान पर पहुंच गए हैं।

    इस रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात के कारोबारी गौतम अडानी के नेटवर्थ में इस दौरान छह अरब डॉलर (37 फीसदी), एचसीएल के संस्थापक शिव नाडर की संपत्ति में 5 अरब डॉलर या 26 फीसदी और बैंकर उदय कोटक के नेटवर्थ में 4 अरब डॉलर या 28 फीसदी की कमी दर्ज की गई।  नई लिस्ट के मुताबिक तीनों उद्योगपति दुनिया के 100 सबसे अमीर शख्सियतों की सूची से बाहर हो गए हैं. इस सूची में अब भारत से अकेले मुकेश अंबानी का नाम है।

    असल में कोरोना संकट की वजह से भारत के शेयर बाजारों में पिछले दो माह में करीब 25 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। कोविड-19 से जुड़े मौजूदा संकट एवं दुनियाभर में शेयरों की बिकवाली के चलते शेयर बाजारों में यह गिरावट देखने को मिली है।

    हुरुन रिपोर्ट इंडिया के मैनजिंग डायरेक्टर अनस रहमान ने कहा, ‘शेयर बाजारों में 26 फीसदी की गिरावट और डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में 5.2 फीसदी की कमी के चलते भारत के शीर्ष उद्योगपतियों को झटका लगा है। मुकेश अंबानी की संपत्ति में 28 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।

  • पीलीभीत जिला अधिकारी द्वारा ड्रोन कैमरे की मदद से लिये गए लॉक डाउन के जायजे में एक क्लीनिक सील

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    पीलीभीत कोविड-19’ संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुये आज जिलाधिकारी  वैभव श्रीवास्तव द्वारा लाॅक डाउन निरीक्षण किया गया। आज निरीक्षण के दौरान माधौटांड़ा रोड़ स्थिति ग्राम कल्यानपुर में योगेश देवल व कृष्ण कुमार द्वारा अवैध रूप से क्लीनिक चलाई जा रही थी, जिस पर जिलाधिकारी द्वारा मौके पर क्लीनिक पर छापामार अवैध रूप से रखी दवाईयां पाई गई। जो लोगों को एक्सपायर्ड दवाई मरीजों को दी जा रही थी मेडिकल टीम बुला कर क्लीनिक सील कर दी गई हैं।

     

    अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 सीएम चतुर्वेदी व अन्य मेडिकल टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया गया। टीम द्वारा निरीक्षण के दौरान अवैध व एक्सपायर्ड दवाईयां पाई गई। महोदय द्वारा तत्काल मुख्य चिकित्साधिकारी व थाना प्रभारी को निर्देशित किया गया कि सम्बन्धित के खिलाफ कार्यवाही की जाये।

     

    इसके साथ ही साथ नगर क्षेत्र, पीलीभीत में ड्रोन कैमरे के माध्यम से लाॅक डाउन की स्थिति का जायजा लिया गया, निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी  श्रीनिवास मिश्र, उप जिलाधिकारी सदर अविनाश चन्द्र मौर्य, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा0 वी0बी0राम, परियोजना निदेशक  अनिल कुमार सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे।

  • अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए केंद्र सरकार एक और बड़ा राहत पैकेज का एलान करेगी

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    नई दिल्ली । लॉकडाउन से प्रभावित अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए जल्द ही केंद्र सरकार एक और बड़ा राहत पैकेज घोषित कर सकती है। सूत्रों के अनुसार घोषणा लॉकडाउन खत्म होने से पहले ही हो जाएगी। इसमें उद्योगों को विशेष राहत दी जा सकती है। सरकार का ध्यान सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों विमानन, खुदरा व्यापार, पर्यटन, टूर एवं ट्रैवल, होटल उद्योग के अलावा छोटे और मझोले उद्योगों पर है।

    उद्योग संगठन सीआईआई और एसोचैम ने उद्योगों को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार से बड़े पैकेज की मांग की है। सीआईआई की मुख्य अर्थशास्त्री विदिशा गांगुली ने बताया, ‘अर्थव्यवस्था को फिर पटरी पर लाने के लिए कम से कम 8 लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी। वहीं, एसोचैम ने 15 से 20 लाख करोड़ के पैकेज की मांग की है। पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने भी संकेत दिए थे कि सरकार को आरबीआई से करीब 5 लाख करोड़ रुपये तक का कर्ज लेना पड़ सकता है।

    पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री कार्यालय ने आर्थिक मामलों के सचिव अतानु चक्रवर्ती की अध्यक्षता में उद्योगों को नुकसान के अलावा बेरोजगार हुए लोगों की स्थिति का अध्ययन करने के लिए नौकरशाहों की एक समिति बनाई है। मोदी सरकार ने पिछले सप्ताह ही गरीबों और समाज के वंचित तबकों के लिये मुफ्त खाद्यान्न और खातों में कैश ट्रांसफर के रूप में 1.7 लाख करोड़ रुपये का राहत पैकेज घोषित किया था। लॉकडाउन से पहले सरकार उद्योगों के लिए तीन लाख करोड़ का पैकेज दे चुकी थी, लेकिन लॉकडाउन ने उद्योगों की कमर तोड़ दी है।

    बढ़ाना होगा वित्तीय घाटा
    पैकेज के लिए सरकार को रिजर्व बैंक से कर्ज लेना पड़ सकता है। इसके लिए उसे वित्तीय घाटा बढ़ाना होगा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020-21 के लिए बजट में 3.5 फीसदी घाटे का अनुमान लगाया था, लेकिन आरबीआई से कर्ज लेने के लिए इसे तीन से चार फीसदी और बढ़ाया जा सकता है। हर एक फीसदी घाटा बढ़ाने से सरकार को मिलेंगे सवा दो लाख करोड़ रुपये।

    पहले भी बढ़ाया गया वित्तीय घाटा
    2008 में लेहमन ब्रदर्स की वजह से आई वैश्विक मंदी से भारत भी प्रभावित हुआ था। तब केंद्र सरकार ने 2007-08 के बजट में वित्तीय घाटा 2.5 फीसदी को 2008-09 के बजट में 3.5 फीसदी बढ़ा कर 6 फीसदी कर दिया था।

    उपभोक्ता वस्तुएं बनाने का जिम्मा कॉरपोरेट घरानों को देने का सुझाव
    ऐसे सुझाव आए कि मौजूदा हालात में उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन की जिम्मेदारी पांच-छह बड़े कॉरपोरेट घरानों को दी जाए, ताकि मांग बढ़ने पर कमी न हो। इसके लिए किसानों को कॉरपोरेट घरानों से सीधा जोड़ा जाएगा ताकि खाद्य उत्पाद कारखानों तक पहुंचने में आसानी हो।

    राज्यों को बाजार से 3.2 लाख करोड़ उधार लेने की इजाजत
    वित्त मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को अप्रैल से दिसंबर के बीच बाजार से 3.2 लाख करोड़ रुपये उधार लेने की अनुमति दी है। रिजर्व बैंक को लिखे पत्र में मंत्रालय ने कहा है कि केंद्र सरकार ने राज्यों को बाजार से कर्ज लेने की इजाजत देने का फैसला किया है।

  • HDFC लिमिटेड के 1.75 करोड़ शेयर चीन के केंद्रीय बैंक ने खरीदे , एक फीसदी से ज्यादा का हिस्सेदार बना

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    नई दिल्ली। चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (पीबीओसी) ने मार्च की तिमाही में भारत के निजी क्षेत्र के हाउसिंग फाइनेंस लेंडर (आवासीय वित्त ऋणदाता) एचडीएफसी लिमिटेड में एक फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी हासिल की है। इसके लिए पीबीओसी ने एचडीएफसी के 1.75 करोड़ शेयर खरीदे हैं।
    माना जा रहा है कि यह विनिमय जनवरी से मार्च 2020 के बीच हुआ है। विनियामक एक्सचेंज की सूचना के मुताबिक, चीन के बैंक ने 1,74,92,909 करोड़ शेयर खरीदे हैं जिससे उसे 1.01 फीसदी की हिस्सेदारी प्राप्त हुई है।

    उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ सप्ताह में एचडीएफसी लिमिटेड के शेयर की कीमतों में गिरावट दर्ज हुई है। फरवरी के पहले सप्ताह से यह गिरावट शुरू हुई थी जिसके बाद इसकी कीमत में 41 फीसदी तक की कमी देखी गई। एचडीएफसी के उपाध्यक्ष और सीईओ केकी मिस्त्री ने कहा कि मार्च 2019 तक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना के पास 0.80 प्रतिशत हिस्सेदारी थी और मार्च 2020 में इसमें 0.20 प्रतिशत की बढ़त हुई।

    गौरतलब है कि चीन एशिया के प्रमुख देशों के वित्तीय संस्थानों में ऐसे समय पर निवेश कर रहा है जब जब प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के शेयर बाजार में गिरावट आ रही है। चीन ने हाल के वर्षों में मुख्य रूप से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और प्रौद्योगिकी कंपनियों सहित पाकिस्तान व बांग्लादेश में भी निवेश बढ़ाया है। वह लगातार एशियाई देशों में अपने आर्थिक दायरे में तेजी से बढ़ोतरी कर रहा है।

  • जॉब और सैलरी कटने वाली कंपनियों पर अब कसेगा शिकंजा, लेबर मिनिस्ट्री रिपोर्ट तैयार कर पीएम को सौंपेगी

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    नई दिल्ली। लॉकडाउन के नाम पर कर्मचारियों तथा मजदूरों को मार्च का पूरा वेतन देने में आनाकानी करने वाली बैंकिंग व बीमा कंपनियों तथा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के साथ अनुबंध पर कार्य करने वाली इकाइयों और कांट्रैक्टर्स पर केंद्र सरकार का शिकंजा कस सकता है । इस संबंध में श्रम मंत्रालय की ओर से केंद्रीय श्रमायुक्त को केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आने वाली समस्त इकाइयों के बारे में शिकायतों पर कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए गए हैं।

    दरअसल, केंद्रीय श्रम मंत्रालय को यूनियनों के अलावा कुछ कर्मचारियों की व्यक्तिगत शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि एक सरकारी कंपनी के लिए कांट्रैक्ट पर सेवाएं देने वाली उनकी कंपनी ने अब तक अनेक कर्मचारियों को मार्च का वेतन नहीं दिया है। पूछने पर लॉकडाउन का हवाला देकर मार्च का वेतन रोके जाने अथवा एक हफ्ते का वेतन काट कर देर से दिए जाने की बातें की जा रही हैं।

    बैंकिंग एवं बीमा कंपनियों और सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के अलावा रेलवे, छावनी बोर्ड, प्रमुख पोर्ट, खदानें और ऑयल फील्ड, एयरलाइन एवं एयरपोर्ट सेवाएं, सीमेंट, पेट्रोलियम जैसे नियंत्रित उद्योगों से संबंधित इकाइयां तथा केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम आदि आते हैं। ये उपक्रम तो आम तौर पर कर्मचारियों को लॉकडाउन की अवधि का विशेष अवकाश देकर मार्च का पूरा वेतन दे रहे हैं। परंतु इनके साथ अनुबंध पर कार्य करने वाली निजी क्षेत्र की कंपनियां अपने कर्मचारियों को वेतन देने में हीलाहवाली कर रही हैं।

    सूत्रों के अनुसार श्रम मंत्री संतोष गंगवार के निर्देश पर कार्यालय में विशेष कंट्रोल रूम बनाया गया है। एक सूत्र ने कहा कि आमतौर पर इकाइयों में हर माह की 10 तारीख तक वेतन दे दिया जाता है। लॉकडाउन के कारण इस बार 15 अप्रैल तक मार्च का वेतन दिए जाने की छूट दी जा सकती है। लेकिन यदि इसके बाद भी शिकायत मिलती है तो कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने लॉकडाउन की घोषणा करते वक्त सभी कंपनियों से लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों का वेतन न काटने की अपील की थी।

  • 1 मिनट में बिक गए 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के OnePlus फोन

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    नई दिल्ली। वनप्लस के नए स्मार्टफोन्स को जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला है। OnePlus 8 सीरीज के स्मार्टफोन्स की आज (17 अप्रैल) हुई सेल में सिर्फ 1 मिनट में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के फोन बिक गए। चीन में हुई सेल में बेस और OnePlus 8 Pro वेरियंट को शामिल किया गया। चीन में OnePlus 8 सीरीज के स्मार्टफोन्स की सेल 1 मिनट में 100 मिलियन युआन (करीब 109 करोड़ रुपये) से अधिक रही। चीन में OnePlus 8 सीरीज के स्मार्टफोन्स की कीमत 3,999 युआन (करीब 43,200 रुपये) से शुरू है और वनप्लस के लेटेस्ट फ्लैगशिप स्मार्टफोन को शानदार सफलता मिली है।

    OnePlus 8 सीरीज के स्मार्टफोन्स की कीमत
    17 अप्रैल को हुई सेल में 8जीबी रैम और 128जीबी स्टोरेज वाले OnePlus 8 को शामिल किया गया, जिसकी कीमत 3,999 युआन (करीब 43,200 रुपये) है। इसके अलावा, 12जीबी रैम औरर 256जीबी स्टोरेज वाले वेरियंट की कीमत 4,599 युआन (करीब 49,700 रुपये) है। जबकि 8जीबी रैम और 128जीबी स्टोरेज वाले OnePlus 8 Pro की कीमत 5,399 युआन (करीब 58,300 रुपये) है। जबकि 12जीबी रैम और 256जीबी स्टोरेज वाले वेरियंट की कीमत 5,999 युआन (करीब 64,800 रुपये) है।

     सेल में बिके 20,000 से ज्यादा फोन
    वनप्लस 8 सीरीज स्मार्टफोन्स की सेल्स में चीन के सभी प्रमुख प्लैटफॉर्म्स के सेल्स डेटा को शामिल किया गया है। इसमें ऑफलाइन फिजिकल स्टोर्स, कंपनी की ऑफिशल वेबसाइट, ई-कॉमर्स और रिटेलिंग प्लैटफॉर्म शामिल हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वनप्लस ने इस सेल में करीब 20,000 यूनिट्स की बिक्री की है। कंपनी ने OnePlus 8 सीरीज के स्मार्टफोन्स को एक ऑनलाइन इवेंट में लॉन्च किया है। कंपनी ने अभी भारतीय बाजार में इन स्मार्टफोन्स की कीमतों का खुलासा नहीं किया है।

  • जियो-फेसबुक के इस डील से गांवों का होगी कायापलट, डिजिटल इंडिया को मिलेगा बिग पुश

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    नई दिल्ली
    रिलायंस के Jio Martऔर दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग साइट Facebook के बीच हुए आज के करार से गांवों की कायापलट होने जा रही है। Jio Platforms ओर Facebook के बीच 43500 करोड़ से ज्यादा की बड़ी डील हुई है। इसके बाद अब छोटे कस्बाई इलाकों और गांवों तक रिलायंस मार्ट से सीधे सामान जाएगा क्योंकि ये गांवों के दुकानदार अब जियो मार्ट के डिलिवरी पॉइंट के रूप में काम करेंगे। रही बात ऑर्डर की तो उसकी कोई कमी नहीं होगी क्योंकि इस समय देश में वॉट्सऐप यूज करने वाले रिलायंस की पूंजी बनेंगे। इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को भरपूर साथ तो मिलेगा ही, सरकार की कर वसूली भी बढ़ने वाली है।

    डिजिटल इंडिया को मिलेगा बिग पुश
    रिलायंस ने हालांकि अभी तक इस गठजोड़ के पूरे बिजनस मॉडल का खुलासा नहीं किया है, लेकिन रिलायंस इंडस्ट्रीज के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इससे न सिर्फ गांवों का कायापलट होगा बल्कि पीएम मोदी के डिजिटल इंडिया को भी बिग पुश मिलेगा। दरअसल, अभी तक छोटे दुकानदार पूरी तरह से डिजिटल नहीं हो पाए थे। लेकिन रिलायंस की इस पहल से वे पूरी तरह डिजिटल हो जाएंगे।

    घर-घर पहुंचेगा रिलायंस मार्ट का सामान
    अधिकारी का कहना है कि जब तीन करोड़ छोटे दुकानदारों को इस नेटवर्क में शामिल किया जाएगा तो रिलायंस मार्ट का सामान गांव-गांव तक आसानी से पहुंचेगा। ये दुकानें उनके लिए डिलिवरी प्वाइंट का काम करेगा। इसके तहत होगा यह कि कोई व्यक्ति वॉट्सऐप पर ऑर्डर देगा तो उसका जहां घर है, उसके पास के दुकानदार के पास तुरंत संदेश पहुंचेगा। बस तुरंत उसके घर सामान पहुंचाने की व्यवस्था हो जाएगी। हां, इस चक्कर में पहले से स्थापित ई-कामर्स कंपनियों की बैंड बजना तय है।

    सरकार की बढ़ेगी कर वसूली
    रिलायंस के इस प्रयास से देश का इनफॉर्मल बाजार पूरी तरह से फॉर्मल हो जाएगा। रिलांयस का कहना है कि जब लोगों का ऑर्डर डिजिटल तरीके से लिया जाएगा तो भुगतान भी डिजिटल तरीके से होगा। सरकार के तमाम प्रयासों से अभी तक अर्थव्यवस्था का यह हिस्सा डिजिटल नहीं हो पाया था। जब एक बार यह हिस्सा भी डिजिटल हो जाएगा तो सरकार की कर वसूली तो अपने आप बढ़ जाएगी।

    छोटे दुकानदारों की बदलेगी माली हालत
    अभी गांवों में छोटे दुकानदारों को आधुनिक सप्लाई चेन का लाभ नहीं मिलता है। अभी भी वे दुकानदार झोला और बोरा लेकर हर रोज या एक दिन छोड़ एक दिन अपने पास के शहर से जाकर सामान लाते हैं। इसमें उनका समय तो बर्बाद होता ही है, लागत भी ज्यादा बैठती है। अब ये दुकानदार रिलायंस के सप्लाई चेन से जुड जाएंगे और उन्हें सामान लेने के लिए कहीं दौड़ लगाने की जरूरत नहीं होगी।

    किसानों को भी होगा फायदा
    रिलायंस के अधिकारी का कहना है कि फल, सब्जी एवं कुछ एग्री कमोडिटी के लिए रिलायंस सीधे किसानों से हाथ मिलाता है। इससे बिचौलियों पर लगाम लगती है और क्वालिटी अपने हाथ में रहती है। जब नए इलाकों में रिलांयस मार्ट का प्रवेश होगा तो वहां के किसानों से भी समझौता होगा। इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी।

  • कोरोना वायरस 2 मिनट में खत्म, जानें UV Light रोबोट मशीन के बारे में

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    नई दिल्ली। कोरोना वायरस का कहर पूरी दुनिया में बरपा है और अभी तक इसकी वैक्सीन बनाने पर काम चल रहा है। अब अस्पतालों को डिसइन्फेक्ट करने के लिए एक नए तरह के रोबोट का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इस मशीन से सिर्फ 2 मिनट के अंदर ही कोरोना वायरस को खत्म किया जा सकता है। भीड़भाड़ वाले इलाकों से वायरस को खत्म करने के लिए इस प्रभावी तरीके को जल्द ही ज्यादा से ज्यादा जगहों पर अपनाए जाने की उम्मीद है।

    अमेरिका में टेक्सस की Xenes Disinfection Services ने हा ही में लाइटस्ट्राइक रोबोट के सफल टेस्ट का ऐलान किया। यह रोबोट कोविड-19 के खिलाफ लड़ता है। इस मशीन को जापान में मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनी Terumo ने भी बेचा था। यह 200 से 312 नैनोमीटर के बीच वेवलेंथ पर लाइट डालता है और बेड्स, दरवाजे के हैंडल और दूसरी ऐसी जगहें जिन्हें लोग सबसे ज्यादा छूते हैं, उन्हें डिसइन्फेक्ट कर देता है।

    सिर्फ दो से 3 मिनट के अंदर ही ये अल्ट्रावॉयलट रेडिएशन वायरस को इतना मार देते हैं कि वह सामान्यतौर पर काम करने लायक नहीं बचता। दूसरे शब्दों में कहें तो यह टूट जाता है और काम नहीं कर पाता। यह रोबोट दूसरे मल्ट्री-ड्रग रेसिस्टेंट बैक्टीरिया और इबोला वायरस के खिलाफ लड़ाई में भी प्रभावी साबित हो चुका है। कोरोनावायरस N95 मास्क को ऐलिमिनेट करने में भी 99.99 प्रतिशत इफेक्टिवनेस दिखा चुका है।

    फिलहाल, दुनियाभर के 500 अस्पतालों में इस रोबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है। Terumo ने 2017 में इसके डिस्ट्रीब्यूशन अधिकार हासिल किए थे और यह 15 मिलियन येन (करीब 1 करोड़ रुपये) से ज्यादा में यह मशीन बेचती है। संकट के इस समय में उम्मीद है कि इस डिवाइस की मांग बढ़ेगी, खासतौर पर अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों में।

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  • मजदूरों में घर वापसी से कांपने लगीं सरकारें, उद्योग धंधों का क्या होगा !

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    नई दिल्ली । देश के विभिन्न औद्योगिक नगरी में फंसे प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए केंद्र सरकार द्वारा श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने के फैसले से जहां मजदूरों को फिर से घर लौटने की आस जगी है तो उद्योग जगत के चेहरे पर उदासी छा गयी है। उद्योग जगत का कहना है कि यदि मजदूर गांव लौट गए तो फिर वे फैक्ट्री कैसे चला पाएंगे। स्थिति को गंभीरता को समझते हुए केंद्रीय एमएसएमई मंत्री नितिन गडकरी ने भी मजदूरों से अपील की है कि फिलहाल वे जहां हैं, वहीं रहें। स्थिति धीरे धीरे बेहतर होगी और उनकी सुविधा का ध्यान सरकार के साथ उद्योग जगत भी रखेंगे। उधर, कर्नाटक, तेलंगाना, हरियाणा और दिल्ली की सरकारें भी मजदूरों से रुकने की गुहार लगा रही हैं।

    जैसे ही सरकार को मजदूरों के वापसी की वजह से उद्योग जगत में होने वाले संकट का आभास हुआ, सरकार तुरंत सक्रिय हो गई। केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मंझोले उद्योग (एमएसएमई) मंत्री नितिन गडकरी ने एक न्यूज चैनल के साथ बातचीत में मजदूरों से अपील की कि फिलहाल वे जहां हैं, वहीं बने रहें। सरकार और उद्योग जगत मिल कर उनका ध्यान रख रही है। धीरे धीरे स्थिति सामान्य होगी और उन्हें फिर से काम मिलेगा।

    हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि उद्योग शुरू हो गए हैं, जो नहीं खुले हैं वो भी कल से शुरू हो जाएंगे, इसलिए मैं प्रवासी श्रमिकों से अनुरोध करता हूं कि आप अभी अपने घर न जाएं, आपको यहां कोई परेशानी नहीं आएगी।

    अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर शुक्रवार को केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने एक वेबिनार का आयोजन किया जिसमें सरकारी महकमे के लोगों के साथ साथ उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस दौरान मंत्री ने मजदूरों की स्थिति, उन्हें दी जा रही सुविधा तथा उनकी दिक्कतों का जायजा लिया। उन्होंने इस दौरान उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से अपील की कि प्रवासी मजदूरों का ध्यान केंद्र और राज्य सरकारें तो रख ही रही हैं, उद्योग जगत भी इसमें बढ़ चढ़ कर हिस्सा लें।

    श्रम मंत्री के वेबिनार के दौरान बताया गया कि इस समय देश भर में करीब 12 करोड़ प्रवासी मजदूर हैं, जो कि अपने घरों से दूर औद्योगिक नगरी एवं महानगरों तथा बड़े शहरों में मजूदरी कर अपना भरन-पोषण करते हैं। इस क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इनमें से आधे से भी ज्यादा मजदूर इंफोर्मल सेक्टर में काम करते हैं। इसका मतलब है कि इनकी नौकरी का कोई ठिकाना नहीं है। इसलिए यही मजदूर कुछ दिक्कत होने पर सबसे पहले गांव का रास्ता पकड़ते हैं।