Category: business

  • एक और झटका आम जनता को, खुदरा के बाद बढ़ी थोक महंगाई दर

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    नई दिल्ली। थोक महंगाई दर के जारी आंकड़ों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जनवरी में थोक महंगाई दर दिसंबर के 2.59 फीसदी से बढ़कर 3.1 फीसदी पर पहुंच गई है। थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आधिकारिक आंकड़े आज जारी कर दिए गए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य पर आधारित मुद्रास्फीति जनवरी 2020 में 3.1 फीसदी पर आ गई है। साल 2019 की समान अवधि में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 2.76 फीसदी थी। इससे पिछले महीने दिसंबर में यह 2.59 फीसदी थी। नवंबर में यह 0.58 फीसदी पर थी। अक्टूबर में यह 0.16 फीसदी थी, सितंबर में 0.33 फीसदी और अगस्त में यह 1.17 फीसदी थी। यानी लगातार तीन महीनों से इसमें इजाफा हो रहा है। महीने दर महीने के आधार पर जनवरी में थोक खाद्य महंगाई दर दिसंबर के 11.05 फीसदी के मुकाबले 10.12 फीसदी रही है।


    खुदरा महंगाई दर 7.59 फीसदी पर पहुंची …
    खाने-पीने का सामान महंगा होने से जनवरी में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 7.59 फीसदी पर पहुंच गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति दिसंबर 2019 में 7.35 फीसदी रही थी। वहीं पिछले साल जनवरी महीने में यह 1.97 फीसदी रही थी।

     

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  • सरकार का दूरसंचार कंपनियों पर शिकंजा! करना होगा रात 12 बजे तक 1.47 लाख करोड़ का भुगतान

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    नई दिल्ली। दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद टेलिकॉम कंपनियों से कहा है कि वे आज रात 12 बजे से पहले तक एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) बकाया का भुगतान करे। बकाया 1.47 लाख करोड़ रुपए की राशि में 92642 करोड़ लाइसेंस फीस है और बकाया 55054 करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम चार्जेज हैं। एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक डीओटी इन टेलिकॉम कंपनियों को जोन और सर्किल आधारित बकाया नोटिस भेज रहा है। यूपी वेस्ट टेलिकॉम सर्किल ने सभी बकायेदारों से भुगतान करने का आदेश दिया है।

    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सरकार को 1.47 लाख करोड़ रुपए का बकाया नहीं देने को लेकर दूरसंचार कंपनियों को फटकार लगाई और इन सभी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों को तलब कर यह बताने के लिए कहा कि बकाये को चुकाने को लेकर शीर्ष अदालत के आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया।

    न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने दूरसंचार कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अदालत उनके व सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ आदेश नहीं मानने के लिए अवमानना की कार्यवाही शुरू कर सकती है। शीर्ष अदालत ने भारती एयरटेल, वोडाफोन, एमटीएनएल, बीएसएनएल, रिलायंस कम्युनिकेशन, टाटा कम्युनिकेशन और अन्य कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को 17 मार्च को अदालत के समक्ष पेश होने के आदेश दिए।

    शीर्ष अदालत ने केंद्र को यह भी निर्देश दिया कि वह तत्काल अपने डेस्क अधिकारी की ओर से पास आदेश को वापस ले, जिसमें दूरसंचार कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं करने को कहा गया था। न्यायमूर्ति मिश्रा ने यह भी कहा कि दूरसंचार कंपनियों ने एक रुपया भी नहीं चुकाया और सरकारी अधिकारी आदेश पर रोक चाहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर उस आदेश को एक घंटे के अंदर वापस नहीं लिया गया तो, यह अधिकारी को जेल भेजे जाने योग्य है। 16 जनवरी को, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की पीठ ने दूरसंचार कंपनियों को सरकार को एजीआर चुकाने के आदेश दिए थे।

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  • जताई आशा शक्तिकांत दास ने, 6 फीसदी होगी अगले साल वृद्धि दर

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    नई दिल्ली। केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने रिजर्व बैंक ने फरवरी की मौद्रिक समीक्षा बैठक में रेपो रेट कटौती नहीं की हो लेकिन आगे स्थिति में सुधार के संकेत दिए हैं। इसके साथ ही आरबीआई गवर्नर ने मॉनिटरिंग पॉलिसी फ्रेमवर्क में बदलाव की भी बात रखी। शक्तिकांत दास ने आगे कहा कि नीतिगत दर में कटौती का नीचे तक पहुंचने की रफ्तार आने वाले दिनों में और सुधरेगी। साथ ही अर्थव्यवस्था में ऋण उठाने की गतिविधियां भी बेहतर हुई है। हमने अगले वर्ष के लिए 6 फीसदी की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है, जो आर्थिक सर्वेक्षण प्रक्षेपण के अनुरूप है।

    शक्‍तिकांत दास ने बताया कि मॉनिटरिंग पॉलिसी फ्रेमवर्क (MPF) पिछले तीन साल से काम कर रहा है लेकिन केंद्रीय बैंक आंतरिक तौर पर इस बात का विश्लेषण कर रहा है कि MPC फ्रेमवर्क कितना कारगर रहा है। इस बारे में जरूरत पड़ने केंद्रीय बैंक सरकार के साथ बातचीत करेगा। आपको बताते जाए कि मॉनिटरिंग पॉलिसी फ्रेमवर्क के तहत आरबीआई हर दो महीने पर देश की इकोनॉमी को लेकर चर्चा करता है, यह बैठक 3 दिनों तक चलती है और इसकी अध्‍यक्षता केंद्रीय बैंक के गवर्नर करते हैं। इसी बैठक में रेपो रेट कटौती को लेकर निर्णय लिए जाते हैं।

    केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि रेपो रेट कटौती की रफ्तार में काफी सुधार हुआ है, उम्‍मीद है कि आगे कटौती की रफ्तार तेज होगी। आरबीआई गवर्नर ने ये बात वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आरबीआई सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक के बाद कही।

    आपको बताते जाए कि महंगाई और राजको‍षीय घाटा के अनुमान संशोधन की वजह से आरबीआई ने इस बार रेपो रेट को स्थिर रखा है। यह लगातार दूसरी बार है जब आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है।

    यहां देखें, रेपो रेट कटौती का मतलब…

    केंद्रीय बैंक आरबीआई रेपो रेट के आधार पर ही बैंकों को कर्ज देता है। रेपो रेट जितना कम होता है, बैंकों के लिए उतना ही फायदेमंद होता है। रेपो रेट कटौती होने के बाद बैंकों पर ब्‍याज दर कम करने का दबाव बनता है। ब्‍याज कम होने का मतलब ये है कि आपकी ईएमआई और लोन सस्‍ता हो जाएगा, आरबीआई हर दो महीने पर होने वाली मौद्रिक नीति की बैठक में रेपो रेट की समीक्षा करता है।

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  • कोरोना का क्रूड पर कहर, रोजाना 4 लाख बैरल मांग घटने के आसार, बना रहेगा कीमतों पर दबाव!

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    मुंबई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में बीते सप्ताह तेजी लौटी, लेकिन चीन में कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण तेल की मांग नरम रहने से कीमतों में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं दिख रही है। उधर, इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) का अनुमान है कि इस साल की पहली तिमाही में कच्चे तेल की वैश्विक खपत मांग पिछले साल के मुकाबले 4.35 लाख बैरल घट सकती है। चीन में कोरोना वायरस का प्रकोप महामारी का रूप ले चुका है और इसकी चपेट में आने से 1600 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

    तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक और रूस द्वारा कच्चे तेल के उत्पादन में अतिरिक्त कटौती करने के संकेत दिए जाने से बीते सप्ताह कीमतों में तेजी आई, लेकिन जानकार बताते हैं कि मांग घटने के कारण कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने कहा कि कोरोनावायरस से चीन में परिवहन व्यवस्था और उद्योग-धंधे प्रभावित हुए हैं, जिसके कारण कच्चे तेल की मांग काफी घट गई है। इसलिए कीमतों पर दबाव बना रहेगा।

    तेल की घटती कीमतों को थामने के मकसद से ओपेक और रूस द्वारा उत्पादन में छह लाख बैरल अतिरिक्त कटौती करने के संकेत दिए जाने से कीमतों पर पडऩे वाले असर को लेकर पूछे गए सवाल पर तनेजा ने कहा, ओपेक और रूस द्वारा तेल के उत्पादन में अगर कटौती की जाती है तो भी मुझे नहीं लगता है कि तेल की कीमत वापस 60 डॉलर प्रति बैरल तक जाएगी। ओपेक और रूस अगर अतिरिक्त छह लाख बैरल रोजाना तेल के उत्पादन में कटौती का फैसला लेता है तो उत्पादन में उसकी कुल कटौती 23 लाख बैरल रोजाना हो जाएगी, यही कारण है कि बीते सप्ताह तेल के दाम में तेजी देखने को मिली।

    हालांकि तनेजा का कहना है कि कोरोनावायरस के प्रकोप के असर से जब तक चीन की अर्थव्यवस्था उबरकर वापस पटरी पर नहीं आएगी तब तक तेल के दाम पर दबाव बना रहेगा। उन्होंने कहा कि तेल का लिंक बहरहाल चीन में कोरोनावायरस और अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में इस साल राष्ट्रपति चुनाव है और वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चाहेंगे कि तेल कीमतें नियंत्रण में रहे, क्योंकि अमेरिका में वहीं राष्ट्रपति दोबारा चुना जाता है जो तेल के दाम को नीचे रखता है।

    इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में 2020 की पहली तिमाही में तेल की वैश्विक मांग अनुमान में पिछले साल के मुकाबले 4.35 लाख बैरल की कटौती की है। बीते एक दशक में यह पहला मौका होगा, जब तेल की सालाना मांग में कमी दर्ज की जाएगी। इससे पहले एजेंसी ने तेल की खपत मांग में पिछले साल के मुकाबले आठ लाख बैरल रोजाना का इजाफा होने का अनुमान लगाया था।

    आईईए के अनुसार, 2020 में पूरे साल के दौरान तेल की मांग में वृद्धि महज 8.25 लाख बैरल रोजाना होने का अनुमान है, जोकि पिछले अनुमान से 3.65 लाख बैरल कम है। इस प्रकार 2011 के बाद तेल की सालाना मांग में यह सबसे कम वृद्धि होगी। अंतर्राष्ट्रीय बाजार इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज (आईसीई) पर बीते सप्ताह शुक्रवार को बेंट क्रूड का अप्रैल अनुबंध 57.33 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि सप्ताह के आरंभ में सोमवार को ब्रेंट क्रूड का भाव 53.27 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था।

    वहीं, न्यूयार्क मर्केंटाइल एक्सचेंज (नायमैक्स) पर अमेरिकी लाइट क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) का मार्च अनुबंध शुक्रवार को 52.23 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि सोमवार को 50 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे गिरकर 49.94 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था।

  • मंदी से जूझ रहे प्रॉपर्टी मार्केट के लिए बड़ा झटका, UP में संपत्ति का रजिस्ट्रेशन हुआ महंगा

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    नोएडा । उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्री कराना 13 फरवरी से महंगा हो चुका है. सरकार ने रजिस्ट्रेशन फीस में बढ़ोतरी कर दी है. पहले ये फीस 20 हजार रुपये थी, लेकिन 13 फरवरी को जारी शासनादेश के बाद इसे प्रॉपर्टी की कीमत का एक फीसदी कर दिया गया है। मंदी से जूझ रहे दिल्ली-एनसीआर के प्रॉपर्टी मार्केट के लिए इसे बड़ा झटका माना जा रहा है. 14 फरवरी को संपत्तियों की रजिस्ट्रियों में नए रजिस्ट्रेशन शुल्क लागू हो गए हैं।

    रजिस्ट्री में वकील के खर्च के अलावा आपको दो जगह पैसा देना होता है, एक- स्टांप ड्यूटी यानी स्टांप पेपर और दूसरा रजिस्ट्री ऑफिस में रजिस्ट्रेशन शुल्क। अभी उत्तर प्रदेश में 10 लाख रुपये कीमत तक की संपत्ति पर 6 फीसदी की दर से स्टांप ड्यूटी लगती है जबकि 10 लाख से महंगी संपत्ति पर ये दर 7 फीसदी है।

    रजिस्ट्री का गणित ऐसे समझिए कि अगर एक संपत्ति 40 लाख रुपये की है तो उस पर आपको 7 फीसदी स्टांप ड्यूटी (स्टांप पेपर खरीदना पड़ेगा) और रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में संपत्ति का 1 फीसदी यानी 40 हजार रुपये देने पड़ेंगे। ये 40 हजार रुपये शुल्क 14 फरवरी से पहले 20 हजार रुपये था. इसी तरह 50 लाख के मकान पर आपको 30 हजार रुपये बतौर रजिस्ट्रेशन शुल्क ज्यादा देने पड़ेंगे यानी कुल रजिस्ट्रेशन शुल्क 1 फीसदी (50 हजार रुपये) लगेगा जो कि 13 फरवरी से पहले 20 हजार रुपये ही देना पड़ता था।

    गाजियाबाद तहसील ऑफिस बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और वकील रामानंद गोयल ने बताया कि सरकार मनमानी पर आमादा है। आम आदमी संपत्ति खरीदने से पहले सौ बार सोचने लगेगा. सरकार ने 1 फीसदी का चार्ज लगाकर बहुत अन्याय किया है। पहले 10 लाख तक की संपत्ति पर 2 फीसदी या 20 हजार रुपये का रजिस्ट्रेशन चार्ज था। नए शासनादेश से 10 लाख तक की संपत्ति खरीदने वालों को तो थोड़ा फायदा है। लेकिन ऐसे मकानों और प्लॉटों की संख्या काफी कम है। 10 लाख रुपये तक की संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वालों की संख्या 10 फीसदी से भी कम है।सरकार के नए आदेशों से गाजियाबाद, मेरठ और नोएडा में प्रॉपर्टी मार्केट पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। पश्चिमी यूपी के 22 जिलों पर इसका काफी असर दिखेगा।

    दरअसल, सरकार के फैसले लगातार प्रॉपर्टी मार्केट पर प्रतिकूल असर डालने वाले रहे हैं। प्रदेश में प्रॉपर्टी मार्केट पहले ही मंदी की मार झेल रहा है. दिल्ली एनसीआर में मकानों की इन्वेंट्री पहले से बढ़ी हुई है. नोटबंदी ने देश के पूरे प्रॉपर्टी मार्केट की कमर तोड़ दी थी। नोटबंदी के सदमे से प्रॉपर्टी बाजार उबरा भी नहीं था कि सरकार ने रियल एस्टेट नियमाक कानून (रेरा) लागू कर दिया। इससे हालांकि फर्जी बिल्डर मार्केट से बाहर हो गए लेकिन प्रॉपर्टी बाजार को और धक्का पहुंचा. इसके बाद रही सही कसर जीएसटी ने पूरी कर दी।

    प्रदेश सरकार के फैसले भी लगातार प्रॉपर्टी बाजार को धक्का पहुंचाते रहे हैं । उत्तर प्रदेश में नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ के अलावा लखनऊ और कानपुर ही बड़े बाजार माने जाते हैं । सरकार ने महिलाओं को रजिस्ट्री पर दी जाने वाली छूट को पहले ही सीमित कर दिया है। अब महिलाओं को 1 फीसदी छूट सिर्फ 10 लाख रुपये से कम की संपत्ति पर ही मिल रही है। 10 लाख से ऊपर की सभी संपत्तियों की रजिस्ट्री 7 फीसदी की दर से हो रही है यानी इसमें महिला-पुरुष का भेद नहीं है। 7 फीसदी का रेट आवासीय ही नहीं वाणिज्यिक और अन्य सभी तरह की संपत्ति पर लागू है।

  • 3 साल तक रहेगा दुनिया के स्टील बाजार पर कोरोना का असर : प्रधान

    3 साल तक रहेगा दुनिया के स्टील बाजार पर कोरोना का असर : प्रधान

    नई दिल्ली। केंद्रीय इस्पात मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने सोमवार को कहा कि चीन में नोवेल कोरोना वायरस (कोविड-19) के संक्रमण के प्रकोप का असर दुनियाभर के स्टील बाजार पर अगले दो से तीन साल तक रहेगा। यहां एक कार्यक्रम के मौके पर धर्मेद्र प्रधान ने कहा कि इससे चीन में स्टील के उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा।

    उन्होंने कहा कि भारत की स्टील कंपनियों को चीन में स्टील के उत्पादन में आने वाली गिरावट का फायदा उठाना चाहिए।

    इससे पहले, भारतीय उद्योग परिसंध (सीआईआई) द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘इंडियन स्टील : फोस्टरिंग स्टील यूसीज इन रेलवेज एंड डिफेंस सेक्टर्स’ को संबोधित करते हुए प्रधान ने कहा कि रेलवे और रक्षा क्षेत्रों में स्टील का इस्तेमाल बढ़ाने के रणनीतिक आशय के साथ-साथ इसके बड़े आर्थिक व सामाजिक पहलू हैं।

    इस्पात उद्योग और रेलवे व रक्षा क्षेत्रों के बीच सेतु के तौर पर इस्पात मंत्रालय की भूमिा पर प्रकाश डालते हुए प्रधान ने घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए इस्पात उद्योग के साथ एक कार्ययोजना बनाने के लिए इन क्षेत्रों की लंबी अवधि की जरूरतों को लेकर एक रणनीतिक पत्र की आवश्यकता बताई।

    आयात कम करने को लेकर उन्होंने रेलवे और रक्षा क्षेत्रों में आयात घटाकर शून्य करने पर जोर दिया।

    उन्होंने स्वदेशी उपयोग को बढ़ावा देने के मकसद से घरेलू उद्योग को उद्योग की जरूरतों के मुताबिक उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया।

  • लॉन्च हुई हुंडई वेन्यू बीएस6 1.5 लीटर डीजल, जानें कीमत

    लॉन्च हुई हुंडई वेन्यू बीएस6 1.5 लीटर डीजल, जानें कीमत

    बीएस6 हुंडई वेन्यू को लॉन्च कर दिया गया है। इसके पेट्रोल वेरिएंट की कीमत 6.7 लाख रुपए से शुरू होती है। नया 1.5 लीटर डीजल मॉडल 8.0 लाख रुपए के स्टार्टिंग प्राइस में लॉन्च किया गया है, जो पहले की तुलना में 55000 रुपए ज्यादा है। नया 1.5 लीटर डीजल इंजन, 1.4 लीटर ऑप्शन ऑफ द प्रीवियस मॉडल को रिप्लेस करेगा। रिपोट्र्स के अनुसार 1.0 लीटर पेट्रोल वेरिएंट की कीमत 8.4 लाख रुपए है, जो 24000 रुपए ज्यादा है।

    डीजल इंजन वेरिएंट अब एसएक्स (ओ) डुअल टोन ट्रिम का प्राइस 11.4 लाख रुपए है। सरकार ने सभी ऑटोमेकर्स के लिए एक अप्रैल से बीएस6 विकल मैनुफैक्चरर, सेल और रजिस्टर करना जरूरी कर दिया है। नई 1.5 लीटर डीजल मोटर में 6 स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन ही है। किया सेल्टोस के लिए मोटर 115पीएस व 250एनएम डवलप करती है, जबकि वेन्यू के लिए 100पीएस और 230एनएम एक्सपेक्टेड है। हुंडई वेन्यू की टक्कर मारुति वितारा ब्रेजा से है।

  • गिरावट दर्ज शेयर बाजार में, 161 अंक नीचे सेंसेक्स

    गिरावट दर्ज शेयर बाजार में, 161 अंक नीचे सेंसेक्स

    मुंबई। देश के शेयर बाजारों में मंगलवार को गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 161.31 अंकों की गिरावट के साथ 40,894.38 पर और निफ्टी 53.30 अंकों की गिरावट के साथ 11,992.50 पर बंद हुआ। बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स सुबह 13.23 अंकों की गिरावट के साथ 41,042.46 पर खुला और 161.31 अंकों या 0.39 फीसदी की गिरावट के साथ 40,894.38 पर बंद हुआ। दिन भर के कारोबार में सेंसेक्स ने 41,042.46 के ऊपरी स्तर और 40,610.95 के निचले स्तर को छुआ।

    सेंसेक्स के 30 में से 10 शेयरों में तेजी रही। भारतीय स्टेट बैंक (1.08 फीसदी), इंफोसिस (1.02 फीसदी), पॉवरग्रिड (0.82 फीसदी), टेक महिंद्रा (0.65 फीसदी) व टीसीएस (0.55 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही।

    सेंसेक्स के गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे -भारती एयरटेल (3.05 फीसदी), इंडसइंड बैंक (2.44 फीसदी), मारुति (1.92 फीसदी), हीरो मोटो कॉर्प (1.35 फीसदी) व टाटा स्टील (1.19 फीसदी)।

    बीएसई के मिडकैप व स्मॉलकैप सूचकांक में गिरावट रही। बीएसई का मिडकैप सूचकांक 93.43 अंकों की गिरावट के साथ 15,425.51 पर और स्मॉलकैप सूचकांक 65.02 अंकों की गिरावट के साथ 14,467.43 पर बंद हुआ।

    नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 17.55 अंकों की गिरावट के साथ 12,028.25 पर खुला और 53.30 अंकों या 0.44 फीसदी की गिरावट के साथ 11,992.50 पर बंद हुआ। दिन भर के कारोबार में निफ्टी ने 12,030.75 के ऊपरी स्तर और 11,908.05 के निचले स्तर को छुआ।

    बीएसई के 19 में से चार सेक्टरों में तेजी रही। सूचना प्रौद्योगिकी (0.52 फीसदी), तेल एवं गैस (0.21 फीसदी), पूंजीगत वस्तुएं (0.12 फीसदी) व स्वास्थ्य सेवाएं (0.01 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही।

    बीएसई के गिरावट वाले सेक्टरों में प्रमुख रहे -दूरसंचार (4.23 फीसदी), धातु (1.19 फीसदी), ऑटो (1.08 फीसदी), रियल्टी (0.97 फीसदी) व आधारभूत सामग्री (0.91फीसदी)।

    बीएसई में कारोबार का रुझान नकारात्मक रहा। कुल 845 शेयरों में तेजी और 1655 में गिरावट रही, जबकि 154 शेयरों के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ।

  • बीएस6 कंप्लिएंट फिगो लॉन्च की फोर्ड इंडिया ने , फ्रीस्टाइल और एस्पायर

    बीएस6 कंप्लिएंट फिगो लॉन्च की फोर्ड इंडिया ने , फ्रीस्टाइल और एस्पायर

     

    भारत में फोर्ड फिगो, फ्रीस्टाइल और एस्पायर के बीएस6 कंप्लिएंट वर्जंस लॉन्च कर दिए गए हैं। बीएस फोर्ड फिगो और फ्रीस्टाइल अब क्रमश: 5.39 लाख और 5.89 लाख कीमत में अवलेबल रहेगी। बीएस6 एस्पायर की कीमत 5.99 लाख रुपए से शुरू होगी। कंपनी ने फ्लीट ऑनर्स के लिए बीएस6 कंप्लिएंट एस्पायर डीजल इंट्रोड्यूस की है।

    इसकी कीमत 7.07 लाख रुपए से शुरू होती है। ये सभी कीमतें दिल्ली में एक्स शोरूम की हैं। फोर्ड फिगो, फ्रीस्टाइल और एस्पायर लाइनअप अब तीन साल की स्टैंडर्ड वारंटी या एक लाख किलोमीटर के साथ ऑफर की जाएगी। ऑफर में फोर्डपास कनेक्टिविटी भी है। क्लाउड कनेक्टेड डिवाइस फोर्डपास स्मार्टफोन एप्लिकेशन के वाया रियल टाइम में विकल ऑनर्स को कम्यूनिकेट करेगा। फिगो के सभी बीएस6 कंप्लिएंट विकल्स में यह फीचर स्टैंडर्ड के रूप में अवलेबल रहेगा।

    फोर्डपास कनेक्टिविटी सेवेरल विकल ऑपरेटिंग परफोर्म करेगा। इसमें विकल के लॉकिंग या अनलॉकिंग, फ्यूल लेवल्स, डिस्टेंस टू एम्पटी एंड लोकेटिंग द विकल रिमोटली वाया द एप इनक्लूड है। एक्जिस्टिंग फोर्ड ऑनर्स भी फोर्डपास एप यूज करने के लिए एबल रहेंगे टू लोकेट डीलर्स, फाइंड डायरेक्शंस एंड एसेस सर्विस हिस्ट्री।

  • लघु औद्योगिक इकाईयां 12 हजार लोगों को प्रदान कर रही हैं रोजगार

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    कुल्लू। जिले में कुल 2026 लघु एवं अति लघु औद्योगिक इकाईयां कार्यरत हैं जो 12018 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान कर रही हैं। इन इकाईयों में फलोर मिल्ज, स्पीनिंग मिल्ज, नेचुरल स्प्रिंग वाटर, सोडा, पैट बाॅटल्ज, बिवरेजिज, कोरूगेटिड बाॅक्स, वूलन शाॅल, वुड बेसड उद्योग, वूलन रेडिमेड गारमेन्टस तथा फल विधायन प्रमुख हैं। इनका कुल पूंजी निवेश 72.87 करोड़ रूपये का है।

    उद्योग विभाग के पास किसी इकाई का स्थाई पंजीकरण होने और इकाई में उत्पादन शुरू होने के बाद वह इकाई सभी प्रकार के प्रोत्साहनों के लिए पात्र हो जाती है। इनमें पूंजी निवेश अनुदान प्रमुख है। इकाई में कार्यरत कर्मियों में कम से कम 70 प्रतिशत हिमाचली होने जरूरी है।

    ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को रोजगार के नए-नए अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम चलाया गया है। कुल्लू जिले में इस कार्यक्रम के तहत पिछले दो सालों के दौरान 93 मामलों को स्वीकृत करके लगभग दो करोड़ की राशि वितरित की गई।

    हथकरघा बुनकरों के लिए महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना आरंभ की गई हैं जिसमें बुनकर को 330 रुपये के कुल प्रीमियम में से 80 रुपये का अंशदान देना होता है। जीवन बीमा योजना के अंतर्गत प्राकृतिक मृत्यु पर बुनकर के आश्रित को 60 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाती है। दुर्घटना व मृत्यु पर डेढ़ लाख रुपये दिए जाते हैं। बुनकरों केे बच्चों को 9वीं से जमा दो तक की कक्षाओं में पढ़ाई के लिए एक सौ रुपये प्रति माह छात्रवृति भी प्रदान की जाती है। दो वर्षों के दौरान 1750 बुनकरों का बीमा करवाया गया है।

    बुनकर क्रेडिट योजना के तहत बुनकरों को बैंकों के माध्यम से 50 हजार से पांच लाख रुपये तक की ऋण सुविधा प्रदान की जा रही है। 16 बुनकरों को 22 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई है। जिला के शमशी में 83 बीघा भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया गया है। इसमें 44 प्लाट, 12 शैड व 16 दुकानें है। वर्तमान में औद्योगिक क्षेत्र में 34 इकाईयां कार्यरत है। जिनमें 17.20 करोड़ रुपये के निवेश हैं और 460 लोगों को रोजगार दिया जा रहा है। इस क्षेत्र में स्पिनिंग मिल, फलोर मिल्स, वुडन व स्टील व फर्नीचर इत्यादि की इकाईयां कार्य कर रही हैं।

    ग्रामीण इन्जीनियरिंग बेसड ट्रेनिंग कार्यक्रम के तहत अनुसूचित जाति से संबंधित बीपीएल परिवार के बेरोजगार युवाओं को विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। नौ माह का प्रशिक्षण प्रतिष्ठित औद्योगिक इकाईयों के माध्यम से दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थी को 2400 रुपये मासिक छात्रवृति एवं प्रशिक्षण संस्थान को 500 रुपये प्रति लाभार्थी सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने के उपरांत सात हजार रुपये की टूल किट मुफ्त में देने का प्रावधान है।

    लाभार्थी अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत भी आवेदन कर सकता है। पिछले दो सालों में 43 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है और इस पर 9.16 लाख रुपये व्यय किए गए हैं। मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना के तहत जिले में बीते दो सालों में लगभग 26 करोड़ रुपये के 119 मामले स्वीकृति किए गए हैं। 53 मामलों में 2.83 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया गया है।

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