Category: business

  • चीन, इजिप्ट और रूस से प्याज आयात करने पर बन रहा विचार…

    [object Promise]

    प्याज सेब से भी ज्यादा महंगा हो गया है। जहां एक महीने पहले 100 रुपये तक बिकने वाला सेब अब 50 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है, वहीं अप्रैल-मई में 15 से 20 रुपये तक बिकने वाला प्याज अब 80 रुपये किलो तक बिक रहा है। कई साल बाद प्याज की कीमतों में इतना उछाल देखने को मिला है।

    इस स्थिति से निपटने के लिए सरकारी कंपनी MMTC चीन, इजिप्ट और रूस से प्याज आयात करने पर विचार कर रही है। ट्रेडर्स ने बताया कि दिल्ली में थोक भाव दोगुना बढ़कर 40 रुपये किलो हो गया है। सरकारी एजेंसी NAFED रोजाना 400-500 टन प्याज बाजार में भेज रही है। इसके बावजूद देश के अन्य हिस्सों में दाम इसी रेंज में चल रहे हैं।

    वहीं दिल्ली के आजादपुर मंडी के प्याज व्यापारियों ने अफगानिस्तान से प्याज मंगाना भी शुरू कर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि अटारी बॉर्डर के रास्ते अफगानिस्तान से मंगलवार को 4 ट्रक प्याज मंगाए गए हैं। आने वाले दिनों में प्याज की आवक और बढ़ेगी। इससे रिटेल मार्केट में प्याज के दामों में गिरावट आएगी।

    विदेशों से मंगाया जा रहा प्याज
    MMTC के एक एग्जिक्यूटिव ने कहा, ‘सप्लाई में मौसमी गिरावट से प्याज के खुदरा भाव तेजी से बढ़ रहे हैं। हम इसके आयात की संभावनाएं तलाश रहे हैं।’ उन्होंने बताया कि दुबई और सिंगापुर की ट्रेडिंग कंपनियां प्याज आयात के टेंडर के लिए बोली लगा सकती हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें बताया गया है कि चीन, इजिप्ट और रूस से आयात किफायती और उपयुक्त होगा।’

    कारोबारियों ने बताया कि किसान और स्टॉकिस्ट धीरे-धीरे स्टॉक रिलीज कर रहे हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक में भारी बारिश से नई फसल की आवक में देरी हुई है। आजादपुर मंडी में पीएम अनियन ट्रेडिंग कंपनी के मोतीलाल ने कहा, ‘थोक मंडी में प्याज 40 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। रोजाना 20-25 टन के 50-60 ट्रक आ रहे हैं। अगर मौसम साफ रहता है तो हमें इसमें बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।’ इसी तरह नासिक में लासलगांव के ऐग्रिकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमिटी (APMC) में प्याज 36 रुपये किलो बिक रहा था।

    प्याज की कीमतों को काबू करने के लिए सरकार का कदम
    लासलगांव ट्रेडर्स असोसिएशन के अध्यक्ष नंदुसेठ धागा ने कहा, ‘प्याज की कीमत कर्नाटक की नई फसल पर निर्भर करेगी। आयात में अभी समय लगेगा क्योंकि कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के 45 दिनों के बाद ही शिपमेंट आएगी।’ दिल्ली में NAFED के एमडी संजीव कुमार चड्ढा ने कहा कि उनके पास 30,000 टन प्याज है। इनसे पश्चिम बंगाल, पंजाब, ओडिशा, असम नई दिल्ली और केरल जैसे राज्यों की जरूरतें पूरी हो रही हैं। उन्होंने कहा, ‘देश में पर्याप्त स्टॉक है। यह स्थिति ट्रेडर्स की बनाई हुई है क्योंकि वे फसल रिलीज नहीं कर रहे हैं।’

    इसी बीच सरकार प्याज की कीमतों पर काबू पाने के लिए बफर स्टॉक खाली कर रही है। इसके बाद भी अगर प्याज के खुदरा दामों में गिरावट नहीं आती है तो केंद्र सरकार प्याज व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट तय करने पर विचार करेगी। खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने मंगलवार को यह बात कही। पासवान ने कहा कि सरकार किसानों के हितों के लिए भी बराबर चिंतित है, इसलिए वह स्टॉक लिमिट लागू करने से पहले कुछ समय के लिए कीमतों में सुधार होने का इंतजार करेगी।

    सरकार की ट्रेडर्स पर स्टॉक लिमिट लगाने की योजना
    वहीं कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, NAFED जैसी एजेंसियों की ओर से घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाई जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अगले कुछ हफ्तों में प्याज के दाम कम हो जाएंगे। उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए NAFED और NCCF जैसी केंद्रीय एजेंसियां बफर स्टॉक से 22-23 रुपये प्रति किलो के भाव पर प्याज बेच रही हैं। वहीं मदर डेयरी के सफल स्टोर्स राष्ट्रीय राजधानी में 23.90 रुपये किलो पर प्याज की बिक्री कर रहे हैं। ट्रेड के आंकड़ों से पता चला है कि सप्लाई में कमी से राजधानी में प्याज की खुदरा कीमतें 70-80 रुपये प्रति किलो हो गई हैं। देश के अन्य हिस्सों में भी इसके दाम इसी रेंज में चल रहे हैं।

    पासवान ने कहा, ‘हमने प्याज की सप्लाई बढ़ाने और दाम नियंत्रित करने के लिए बेहतर उपाय किए हैं। अगर कीमतों की मौजूदा स्थिति ऐसी ही बनी रहती है तो हमें स्टॉक लिमिट जैसे अन्य उपायों पर विचार करना होगा।’ उन्होंने कहा कि बफर स्टॉक खत्म होने के बाद सरकार ट्रेडर्स पर स्टॉक लिमिट लगाने के बारे में सोचेगी।

    कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई
    पासवान ने कहा, ‘हम कालाबाजारी करने वालों और जमाखोरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी करेंगे।’ पासवान ने कहा कि सरकार कंज्यूमर्स और किसानों, दोनों के हित को ध्यान में रखते हुए संतुलित ढंग से काम कर रही है। सरकार ने 50,000 टन का बफर स्टॉक बनाया है जिसमें से 15,000 टन घरेलू मार्केट में भेजा जा चुका है। पासवान ने बताया कि वह प्याज के विषय पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से लगातार संपर्क में हैं।

    एक अन्य कार्यक्रम में कृषि मंत्री ने कहा, ‘अगले कुछ दिनों में प्याज की कीमतों में सुधार होगा। सहकारी NAFED सेंट्रल बफर से कम दाम में स्टॉक जारी कर रही है। हमारे पास प्याज का पर्याप्त स्टॉक है।’ उन्होंने कहा, ‘कभी-कभी उपभोक्ताओं को कृषि उत्पादों के लिए ज्यादा दाम देना पड़ता है और कभी-कभी किसानों को उनकी फसल के कम दाम मिलते हैं। इसमें संतुलन बनाना हमारा काम है। हमें स्थिति की जानकारी है और हम कई उपाय कर रहे हैं।

  • सिर्फ छोटे प्रॉडक्ट ही नहीं, सोफा, ‌वॉशिंग मशीन जैसे बड़े प्रॉडक्ट्स भी किये जा रहे ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में डिलिवर

    [object Promise]

    ऑनलाइन रिटेल कंपनियां नए बाजार और नए कस्टमर पाने के लिए लगातार अपना विस्तार कर रही हैं। अब उनका फोकस देश के दूर-दराज वाले इलाकों पर हैं। सिर्फ छोटे प्रॉडक्ट नहीं, बल्कि सोफा, ‌वॉशिंग मशीन जैसे बड़े प्रॉडक्ट्स भी ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में डिलिवर किए जा रहे हैं। यह ट्रेंड पूरे देश को जोड़ने के साथ उसे एक सिंगल मार्केट में तब्दील कर रहा है। हालांकि भारत की विशाल और कठिन भौगोलिक स्थिति में यह एक चुनौतीपूर्ण काम है फिर भी कंपनियों के डिलिवरी बॉय इस काम को पूरा करके कस्टमर की मुश्किल दूर कर रहे हैं। दो हफ्ते पहले, दार्जिलिंग जिले में कर्सियॉन्ग की पहाड़ी पर रहने वाले बुजुर्ग कपिल नाथ के यहां जब सोफा की होम डिलिवरी हुई तो उन्हें यकीन नहीं हुआ।

    5 हजार फीट की ऊंचाई वाले इस इलाके में होम डिलिवरी करना इतना आसान नहीं, जितना दिल्ली जैसे बड़े शहरों में है। कपिल को कुछ हफ्तों से एक अच्छे सोफा की जरूरत थी लेकिन कर्सियॉन्ग का बाजार छोटा है। कई सारे प्रॉडक्ट वहां नहीं मिलते। ऐसे में कपिल के सामने एक ही रास्ता था कि वह 45 किलोमीटर दूर (पहाड़ों से नीचे जाकर) सिलिगुड़ी से सोफा खरीदें लेकिन इस काम में मेहनत लगती और पूरा दिन खर्च हो जाता।

    कपिल के बेटे को जब पिता की इस मुश्किल का पता लगा तो उन्होंने फ्लिपकार्ट से एक सोफा ऑर्डर किया। फिर कुछ ही दिनों बाद होम डिलिवरी हो गई। सोफा रिसीव करते हुए कपिल ने डिलिवरी बॉय टिंकू को धन्यवाद कहा। 30 साल के टिंकू ने डेढ़ साल पहले फ्लिपकार्ट में नौकरी शुरू की थी। ऑफिस सिलिगुड़ी में है। टीम में 12 डिलिवरी बॉय हैं, जो आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों (मिरिक, कर्सियॉन्ग, कालिम्पॉन्ग) में सामान पहुंचाते हैं। अपने काम के बारे में टिंकू ने बताया, ‘बड़े सामानों की डिलिवरी पिकअप वैन से की जाती है। एक डिलिवरी में करीब 4 से 5 घंटे का समय लग जाता है। मौसम खराब हुआ तो पूरा दिन भी लग जाता है, क्योंकि यहां कभी भी तेज बारिश होने लगती है।’

    फ्लिपकार्ट के चीफ कॉर्पोरेट अफेयर्स अधिकारी रजनीश कुमार ने बताया, ‘ऊंचे इलाकों में होम डिलिवरी शुरू होने से कस्टमर को बराबरी का अहसास हो रहा है। आने वाले फेस्टिव सीजन में ऐसे क्षेत्रों से ऑर्डर और बढ़ेंगे। वहां के लोग मान चुके हैं कि ई-कॉमर्स उनके दरवाजे पर पहुंच चुका है। अब पहाड़ों के लोग भी दिल्ली-मुंबई की तरह खरीदारी करेंगे और रिश्तेदारों-दोस्तों को गिफ्ट भेजेंगे।’

  • PMC बैंकः बैंक ने फिर दिया 2500 करोड़ के डिफॉल्टेर को 96.5 करोड़ का लोन

    [object Promise]

    पंजाब ऐंड महाराष्ट्र कॉर्पोरेशन (PMC) बैंक को 2,500 करोड़ रुपये न चुकाने वाले बिल्डर को ही बैंक ने एक महीने पहले फिर लोन जारी कर दिया। बैंक ने HDIL के वाइस चेयरमैन के नाम 96.5 करोड़ रुपये का पर्सनल लोन जारी कर दिया। हमारे सहयोगी अखबार मुंबई मिरर ने बैंक से जुड़े कुछ दस्तावेज देखे तो इस बात का खुलासा हुआ। मुंबई मिरर ने पाया कि अगस्त के महीने में कर्ज में डूबी हाउसिंग डिवेलपमेंट ऐंड इंफ्रास्ट्रक्चर (HDIL)के वाइस चेयरमैन व एमडी सारंग वाधवान को बैंक ने 96.5 करोड़ रुपये का पर्सनल लोन दिया। यह राशि 2500 करोड़ रुपये के उस लोन के इतर थी, जिसे चुकाना सारंग ने बंद कर दिया था। यही वह लोन है जिसे पीएमसी बैंक ने आरबीआई की गाइडलाइंस के बावजूद एनपीए में नहीं डाला था।

    गुरुवार को रिजर्व बैंक ने पीएमसी बैंक के खाताधारकों को बड़ी राहत देते हुए पाबंदी की अवधि के दौरान विदड्रॉल की सीमा को 1 हजार से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया।

    दिवालिया हो चुकी कंपनी पर बकाया इस लोन को बैंक ने तब भी एनपीए में नहीं डाला था जबकि कंपनी लोन चुकाने में लगातार फेल होती रही थी। बावजूद इसके, कंपनी के वाइस चेयरमैन को फिर पर्सनल लोन जारी कर दिया गया। 

    गुरुवार को रिजर्व बैंक ने पीएमसी बैंक के खाताधारकों को बड़ी राहत देते हुए पाबंदी की अवधि के दौरान विदड्रॉल की सीमा को 1 हजार से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दिया। केंद्रीय बैंक ने 24 सितंबर को बैंक के बैंक पर ऑपरेश्नल रोक लगाई थी, जिसके बाद से बैंक के ग्राहक खासे परेशान हैं। बता दें कि मुंबई मिरर ने ही सबसे पहले यह खबर दी थी कि सिर्फ एक खाते (HDIL) के कारण कैसे 35 साल पुराना PMC बैंक खस्ताहाल हो गया। बाद में बैंक के एमडी जॉय थॉमस ने भी इस बात की पुष्टि की थी।

    अब यह बात सामने आई है कि HDIL और सारंग वाधवान, दोनों ने बैंक ऑफ इंडिया (BoI) से लिया कर्ज चुकाने के लिए PMC बैंक से कर्ज लिया था। इसी के बाद कंपनी के खिलाफ बैंकरप्सी प्रोसीडिंग्स शुरू हुईं। BoI मामले को लेकर NCLT पहुंचा था। हालांकि बाद में बैंक ने अपनी याचिका वापस ले ली क्योंकि दोनों के बीच अकाउंट सेटल करने को लेकर समझौता हो गया था। इसके बाद अगस्त में बैंक ने नई याचिका दायर की क्योंकि कंपनी वादे मुताबिक अगस्त 2019 तक अकाउंट सेटल नहीं कर पाई।

    31 अगस्त को BoI ने कहा कि उसने HDIL के खिलाफ बैंकरप्सी के मामले को 2 हफ्तों के लिए टाल दिया है क्योंकि कंपनी ने उसे 96.5 करोड़ रुपये के दो पेऑर्डर दिए हैं। ये पेऑर्डर PMC बैंक की ओर से जारी किए गए थे।

    RBI के सूत्रों ने बताया कि PMC बैंक ने कुल 8,300 करोड़ रुपये के कर्ज दिए हैं, जिसमें से 31% HDIL को जारी किया गया। RBI की गाइडलाइन्स के मुताबिक, बैंक किसी व्यक्ति या कंपनी को 15% से ज्यादा लोन जारी नहीं कर सकता। बहरहाल, PMC बैंक का मामला देख रहे RBI ऐडमिनिस्ट्रेटर जेबी बोहरा ने इस बात की पुष्टि करने से इनकार कर दिया कि बैंक के खिलाफ ऐक्शन शुरू किए जाने का ट्रिगर सारंग वाधवा को दिया गया 96.5 करोड़ रुपये का पर्सनल लोन था या नहीं।

  • इंडियन ऑयल के साथ मिलकर HDFC ने लॉन्च किया क्रेडिट कार्ड, जानिये फायदे

    [object Promise]

    देशभर में लगातार पेट्रोल और डीजल के दामों में इजाफा हो रहा है। इस बीच अगर हम आपसे कहें कि आप 50 लीटर पेट्रोल फ्री में पा सकते हैं तो शायद आप भरोसा न करें, लेकिन सच में यह मौका आपको एचडीएफसी बैंक और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन दे रहे हैं।

    एचडीएफसी बैंक ने इंडियन ऑयल कार्पोरेशन(IOC) के साथ मिलकर एक क्रेडिट कार्ड लॉन्च किया है। इस क्रेडिट कार्ड की मदद से आप सालभर में 50 लीटर फ्यूल मुफ्त में हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा इस कार्ड का इस्तेमाल करके आप हर दिन ग्रॉसरी और बिल पेमेंट में आकर्षक छूट भी पा सकते हैं। 

    मिलते हैं ‘फ्यूल पॉइंट्स’ 
    यह क्रेडिट कार्ड नॉन मेट्रो शहरों और कस्बों के लिए लॉन्च किया गया है। इंडियन ऑयल के करीब 27,000 आउटलेट्स पर ग्राहक फ्यूल पॉइंट हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा ग्रॉसरी खरीदने , बिल पेमेंट और शॉपिंग के दौरान इस कार्ड का इस्तेमाल करने पर भी फ्यूल पॉइंट मिलता है। इन पॉइंट्स को भुनाकर ग्राहक हर साल 50 लीटर पेट्रोल या डीजल बिल्कुल फ्री में हासिल कर सकते हैं।

    इस ऑफर के तहत आप फ्यूल डलवाते समय जितने पैसे खर्च करते हैं उसका 5 फीसदी हिस्सा आपको फ्यूल पॉइंट के रूप में मिलेगा। इंडियन ऑयल के आउटलेट पर पहले 6 महीनों में आपको हर महाने अधिकतम 250 फ्यूल पॉइंट्स मिल सकते हैं। 6 महीने के बाद आप अधिकतम 150 फ्यूल पॉइंट्स हासिल कर सकते हैं। वहीं हर बार 150 रुपये खर्च करने पर आपको 1 फ्यूल पॉइंट मिलेगा।

    वहीं अगर आप एक साल में कम से कम 50 हजार रुपये खर्च करते हैं तो आपको इस क्रेडिट कार्ड को रि-न्यू कराने के लिए भी कोई शुल्क नहीं देना होगा।

    इस ऑफर के तहत मिले पॉइंट्स को आप अलग-अलग तरीके से भुना सकते हैं। आप चाहें तो इसे इंडियन ऑयल के IXRP प्रोग्राम मेंबरशिप के तहत इसे भुना सकते हैं। आप इन पॉइंट्स को एचडीएफसी नेटबैंकिंग के जरिए भी भुना सकते हैं। आप चाहें तो इन पॉइंट्स को अपने इंडियन ऑयल एचडीएफसी बैंक क्रेडिट कार्ड में कैशबैक की तरह भी भुना सकते हैं।

    ऐसे पा सकते हैं ‘इंडियन ऑयल एचडीएफसी बैंक क्रेडिट कार्ड’
    इस क्रेडिट कार्ड के लिए आप एचडीएफसी बैंक की ऑफिशल वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। आप चाहें तो अपने पास की एचडीएफसी शाखा पर जाकर भी इस क्रेडिट कार्ड को पा सकते हैं।

    आईओसीएल के एग्जिक्युटिव डायरेक्टर (रीटेल सेल्स) विज्ञान कुमार ने बताया कि डिजिटल या कैशलेश ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि अभी हमारे पेट्रोल स्टेशन पर 27 फीसदी से अधिक लेनदेन डिजिटल माध्यम से होते हैं। हमें विश्वास है कि एचडीएफसी के साथ इस करार से डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

  • बाजार में बढ़ती दिखी लिवाली, ओपनिंग हुई हरे निशान के साथ, सेंसेक्स में 300 से ज्यादा अंकों की तेजी

    [object Promise]

    बुधवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ शेयर बाजार गुरुवार को हरे निशान पर खुला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स 106 अंक ऊपर 38,700.48 पर और एनएसई बेंचमार्क निफ्टी 44 अंक ऊपर 11,484.15 पर खुला था। शुरुआती कारोबार में बाजार में लिवाली बढ़ती दिखी और सुबह 10 बजे सेंसेक्स 38, 958.65 पर देखा गया। वहीं निफ्टी में भी 0.90% से ज्यादा की तेजी देखी गई और इंडेक्स 11,550 पर देखा गया।

    सेंसेक्स के जिन शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त देखने को मिल रही है उनमें आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, एम ऐंड एम, इंडसइंड बैंक और ओएनजीसी प्रमुख हैं। वहीं टीसीएस, एचसीएल टेक, यस बैंक और इन्फोसिस में गिरावट है।

    शुरुआती कारोबार में निफ्टी के बढ़ने वाले शेयरों की बात करें तो आईओसी, आईसीआईसीआई बैंक, इंडियाबुल्स हाउसिंग, यूपीएल औक इंडसइंड बैंक प्रमुख रहे। गिरने वाले शेयरों में सबसे आगे यस बैंक, एचसीएल टेक, इन्फोसिस और एचडीएफसी रहे।

    बुधवार को बाजार का हाल
    बुधवार को शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 503.62 अंक (1.29%) लुढ़ककर 38,593.52 पर बंद हुआ। अमेरिका में छाई राजनीतिक अनिश्चितता, भारी बिकवाली तथा एशियाई विकास बैंक (एडीबी) द्वारा एशियाई अर्थव्यवस्था में सुस्ती के संकेत के बाद शेयर बाजार ढह गया। एनएसई का निफ्टी 148.00 अंकों (1.28%) की गिरावट के साथ 11,440.20 पर बंद हुआ।

  • रिजर्व बैंक के PMC बैंक पर एक्शन से बढ़ती दिखी दूसरे बैंकों के खाताधारकों की चिंता

    [object Promise]

    पंजाब और महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (PMC) के हजारों डिपॉजिटर्स को कुछ सूझ नहीं रहा। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इस बैंक के छह महीने तक कोई भी बिजनस करने और डिपॉजिटर्स के बैंक से पैसा निकालने पर रोक लगा दी है। लोग हैरान हैं। खासतौर पर कारोबारी, सेल्फ-एंप्लॉयड या दिहाड़ी मजदूरों में घबराहट बढ़ गई है। रिजर्व बैंक की तरफ से नियुक्त किए गए ऐडमिनिस्ट्रेटर जे बी भोरिया ने बताया, ‘लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। देश में डिपॉजिट इंश्योरेंस ऐंड क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन (DICGC) की व्यवस्था है, जिसमें बैंकों में जमा एक लाख रुपये की रकम की सरकार गारंटी देती है।’

    उन्होंने सभी डिपॉजिटर्स को आश्वस्त करते हुए कहा कि इसके अलावा बैंक के पास अपनी संपत्तियां भी हैं। उन्होंने कहा, ‘हम स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। पहली नजर में PMC के साथ कुछ बैड लोन का मसला दिख रहा है, लेकिन मैं यह भी कहना चाहूंगा कि बैंक ने सारे लोन जमानत पर दिए हैं।’ क्या इस मामले से किसी सामान्य डिपॉजिटर या खाताधारक को परेशान होना चाहिए? क्या ऐसा सिर्फ छोटे या को-ऑपरेटिव बैंकों के साथ ही होता है? इस पर रिजर्व बैंक के रूल्स क्या कहते हैं?

    PMC बैंक जैसा हो किसी बैंक के साथ, तो क्या है RBI के नियम?
    रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के मुताबिक, सभी कमर्शल और सहकारी बैंकों में जमा एक लाख रुपये तक की रकम DICGC के तहत इंश्योर्ड है। इसका लाभ सिर्फ प्राइमरी को-ऑपरेटिव सोसायटी को नहीं मिलता। इस बारे में MyMoneyMantra.in के संस्थापक और मैनेजिंग डायरेक्टर राज खोसला ने कहा, ‘PMC बैंक को अगर लिक्विडेट भी किया जाता है, तो उसके डिपॉजिटर्स को एक लाख रुपये तक की जमा राशि वापस की जाएगी। हालांकि, ऐसी स्थिति में पैसा मिलने में काफी वक्त लग सकता है।’

    चालू खाता, बचत खाता, फिक्स्ड डिपॉजिट सबका बीमा
    DICGC रूल्स के मुताबिक, एक लाख रुपये के जमा और उस पर मिलने वाला ब्याज इंश्योर्ड होता है। इसमें चालू खाता, बचत खाता, फिक्स्ड डिपॉजिट आदि सभी कवर होते हैं। अगर आपने एक लाख रुपये से अधिक रकम जमा की हुई है तो बैंक के दिवालिया होने पर आपको ब्याज सहित एक लाख रुपये का डिपॉजिट ही वापस मिलेगा।

    इसमें किस तरह के डिपॉजिट कवर होते हैं
    DICGC में बचत, फिक्स्ड, चालू, रेकरिंग खाते में जमा रकम कवर होती है। इनमें विदेशी सरकार के डिपॉजिट, केंद्र-राज्य सरकार के डिपॉजिट, इंटरबैंक डिपॉजिट, स्टेट लैंड डिवेलपमेंट बैंकों, जैसे- राज्यों के सहकारी बैंकों के डिपॉजिट, देश से बाहर बैंक में जमा की गई रकम आदि कवर नहीं होती।

    उसी बैंक की अलग ब्रांच में अगर आपका खाता है, तब क्या होगा?
    DICGC के तहत एक बैंक की सभी ब्रांच में एक लाख रुपये तक का कवर मिलता है। इसलिए अगर आपका किसी बैंक में एक से अधिक खाता है, तब भी आपको लाख रुपये ही वापस मिलेंगे। हालांकि, अगर आपने एक बैंक में लाख रुपये और दूसरे में भी उतनी ही रकम जमा की है और दोनों दिवालिया हो जाएं तो आपको दो लाख रुपये वापस मिलेंगे।

    जॉइंट अकाउंट के मामले में क्या होगा?

    रिजर्व बैंक का नियम कहता है कि DICGC योजना के तहत सिंगल और जॉइंट अकाउंट अलग-अलग कवर होंगे।

    SIP और अन्य ECS मैन्डेट का क्या होगा?
    खोसला ने बताया, ‘अगर आपने SIP, इंश्योरेंस प्रीमियम और अन्य मंथली बिल के लिए ECS मैन्डेट दिया है तो आपके PMC बैंक अका‌उंट से वह रकम नहीं कटेगी।’ इसलिए आपको इनके लिए नए बैंक में ECS का रजिस्ट्रेशन कराना होगा।

    आपको क्या करना चाहिए?
    पिछले छह महीनों में डिफॉल्ट के कारण PMC बैंक को अपनी देनदारी चुकाने में दिक्कत हो रही है। उसने कई रियल एस्टेट कंपनियों को कर्ज दिए थे, जिन पर बिल्डर डिफॉल्ट कर चुके हैं। आपको पता होना चाहिए कि सहकारी बैंकों में भले ही सरकारी और निजी बैंकों की तुलना में जमा रकम पर अधिक ब्याज मिलता है, लेकिन इनका रेगुलेशन राज्य सरकारें और रिजर्व बैंक करते हैं। डिपॉजिटर होने के नाते आपको अपने बैंक की वित्तीय सेहत पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। खासतौर पर अगर आपने किसी सहकारी बैंक में पैसा जमा किया है। आप उसकी वित्तीय सेहत का पता रिटर्न ऑन ऐसेट, नेट एनपीए रेशियो आदि से लगा सकते हैं।

  • पूंजी सृजनकर्ताओं और सरकार बीच बढ़ रहा अविश्वास: पिरामल

    [object Promise]

    पिरामल समूह के प्रमुख और जाने-माने अजय पिरामल ने कारोबारियों के खिलाफ सरकारी एजेंसियों की ओर से छापेमारी और लुकआउट नोटिस जारी किए जाने के मामलों की रफ्तार बढ़ने की शुक्रवार को आलोचना की और कहा कि इससे कारोबारी समुदाय के मन में अविश्वास बढ़ रहा है। पिरामल ने जापानी निवेशक सॉफ्टबैंक के उनकी एनबीएफसी कंपनी के साथ प्रस्तावित सौदे से पीछे हटने की खबरों पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से इनकार किया।

    कारोबारी मौहाल पर पिरामल ने यह बात ऐसे समय कही है जब एलऐंडटी के ए. एम . नाइक समेत अन्य कारोबारी भी चिंता जता चुके हैं। हालांकि, कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती से कारोबारी को लेकर आशा बढ़ी है। पिरामल ने यह टिप्पणी ऐसे समय की है जब नियामक और जांच एजेंसियों ने जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल को विदेश जाने से रोका और वीडियोकॉन समूह के प्रवर्तकों पर छापे इत्यादि की कार्रवाई की। 

    अजय पिरामल ने वर्ल्ड हिंदू इकॉनमिक फोरम में कहा, ‘आज मैं देख रहा हूं कि सत्ता में बैठे लोग और पूंजी सृजनकर्ताओं (कारोबारी और निवेशकों) के बीच अविश्वास बढ़ रहा है, दूरियां आ रही हैं।’ उन्होंने जोर देकर कहा, ‘यदि आप पर कोई अपराध करने का आरोप है तो क्या जरूरत है कि उसे अपराधी ठहराया जाए या अपराधीकरण किया जाए? जब पहले से ही काफी सूचनाएं उपलब्ध हैं, आंकड़े उपलब्ध हैं, तो क्या छापेमारी की जरूरत है? लुकआउट नोटिस जारी करने की जरूरत है? यह किसी भी कारोबारी के लिए सकारात्मक संकेत नहीं है।’

    उन्होंने कहा कि ‘जो महत्वपूर्ण है वह यह है कि धन-सृजन करने वालों को वह सम्मान मिले, जिसके वे हकदार हैं।’ नकदी संकट को लेकर पिरामल ने कहा कि मौजूदा समय में पूंजी की उपलब्धता भी देश के लिए एक चुनौती है।

  • अर्फोडेबल हाउस की बढ़ा सकती है लिमिट सरकार

    [object Promise]
    इकॉनमी में स्लोडाउन के बावजूद अफोर्डेबल हाउस यानी सस्ते मकान के लिए डिमांड काफी अच्छी है। यही कारण है कि अब सरकार अर्फोडेबल हाउस की सीमा को 45 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने पर जल्द फैसला ले सकती है। इस बारे में पीएमओ के साथ आरबीआई से बात की जाएगी। वहां से हरी झंडी मिलने पर इसको अमल में लाया जाएगा।

    वित्त मंत्री के साथ गुरुवार को मीटिंग में बैंकों के उच्चाधिकारियों के साथ हाउजिंग फाइनैंसिंग कंपनियों ने सस्ते मकान की परिभाषा में बदलाव करने की मांग करते हुए कहा था कि 50 लाख रुपये तक के मकान को अफोर्डेबल हाउस के दायरे में लाया जाए।

    बैंकरों ने वित्त मंत्री को दिए थे ये सुझाव
    सूत्रों के अनुसार, बैंकरों ने कहा था कि इस वक्त सबसे अधिक लोन की मांग अफोर्डेबल हाउजिंग सेक्टर के लिए है। अगर अफोर्डेबल हाउस की सीमा 50 लाख रुपये तक कर दी जाए तो इससे रियल एस्टेट में फिर से तेजी आ सकती है। बैंकरों ने यह भी कहा था कि इस सेक्टर में लोन देने में रिस्क काफी कम है। ऐसे में लोन के एनपीए बनने पर ज्यादा जोखिम नहीं बनता है।

    सूत्रों के अनुसार, बैंकरों और हाउजिंग फाइनैंस द्वारा दिये गये आंकड़ों के बाद वित्त मंत्रालय ने इस मांग पर आगे बढ़ने का फैसला किया है। एक सीनियर सरकारी अधिकारी के अनुसार, सरकार इस वक्त इकॉनमी में तेजी लाने के लिए वह सारे कदम उठाएगी, जिससे उसके खजाने पर बाेझ कम पड़े और रिस्क भी कम हो।

  • क्या अभी है सबसे सही वक्त कार खरीदने का

    [object Promise]

    ऑटो इंडस्ट्री पिछले कुछ महीनों से बेहद दबाव से गुजर रही है। बीएस-6, इलेक्ट्रिक कार, मंदी जैसे की फैक्टर्स की वजह से ग्राहकों में बेहद कन्फ्यूजन रहा है। लेकिन अब सरकार ने साफ कर दिया है कि जीएसटी कम नहीं होगा। साथ ही इकनॉमी को रफ्तार देने के लिए पैकेज भी दिया है। कुछ मिलाकर साउथ इंडिया में फेस्टिव सीजन उतना बेहतर नहीं रहा, अब नॉर्थ के सबसे बड़े फेस्टिव सीजन नवरात्र और दिवाली वाले मौके पर सबकी नजर है।

    होंडा कार्स के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट और डायरेक्टर (सेल्स ऐंड मार्केटिंग) राजेश गोयल कहते हैं कि मार्केट काफी डाउन जा चुका है और ऐसे में इस बात की उम्मीद करना सही नहीं होगा कि पिछले साल की तुलना में बड़ी ग्रोथ दिखेगी, लेकिन जिन वजहों से लोग खुद को कार खरीदने से रोक रहे थे, उनमें से ज्यादातर अब साफ हो चुकी हैं।

    अगले साल बढ़ जाएंगी कार की कीमतें
    कार की कीमतें अब और कम नहीं होने वालीं और इस वक्त लगभग सभी कंपनियों ने मैक्सिमम डिस्काउंट दे रखे हैं, इसके ऊपर डीलर भी अपने ओर से स्कीम दे रहे हैं। वह कहते हैं कि इस हिसाब से देखा जाए तो यह कार खरीदने का सबसे सही वक्त है, क्योंकि अगले साल से बीएस-6 लागू हो जाएगा जिसके बाद न सिर्फ कार की कीमतें बढ़ेंगी बल्कि ऐसे ऑफर भी नहीं मिलेंगे।

    ऑटो एक्सपर्ट रोनोजॉय मुकर्जी भी कहते हैं कि पहले लोगों में दो तरह के कन्फ्यूजन ज्यादा थे, एक तो इलेक्ट्रिक कारों को लेकर लोग सोच रहे थे कि वो एक दम से मार्केट में आ जाएंगी और पेट्रोल-डीजल कारें बंद हो जाएंगी, दूसरा यह भी कन्फ्यूजन था कि बीएस-6 आने के बाद बीएस-4 कारों का क्या होगा।

    फेस्टिव सीजन में भी मिल रही अच्छी छूट
    रोनोजॉय कहते हैं कि सरकार ने अब बिल्कुल साफ कर दिया है कि बीएस-6 आने के बाद भी बीएस-4 वाली कारों की लाइफ पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, यानी पेट्रोल 15 साल और डीजल कार 10 साल तक चल सकेगी। दूसरी ओर इलेक्ट्रिक कारों को लेकर भी बयान दिया है कि इलेक्ट्रिक और कंबस्टन इंजन दोनों तरह की कारें साथ चलेंगी। ऐसे में लोगों का कन्फ्यूजन जरूर दूर हुआ होगा और फेस्टिव सीजन में चल रहे ऑफर्स को भुनाने के लिए लोग मार्केट में उतरेंगे। दरअसल, जो लोग चाहते हैं उनके लिए इस वक्त विन-विन सिचुएशन है।

  • त्योहारी मौसम का महंगाई कर रही मजा किरकिरा! इनकी भी बढ़ी अब कीमत

    [object Promise]

    नई दिल्ली। प्याज, टमाटर, लहसुन की महंगाई की मार झेल रहे उपभोक्ताओं को अब इस त्योहारी सीजन में चीनी, चना उड़द समेत कई जरूरी वस्तुओं के लिए अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है। नवरात्र का त्योहार शुरू होते ही खासतौर से पूजा में काम आने वाली वस्तुओं में फूल और नारियल के दाम में जोरदार इजाफा हुआ है। दिल्ली में फूल का भाव जो चार दिन पहले 50-70 रुपए प्रति किलो था वह अब 200-300 रुपए प्रति किलो हो गया है।

    वहीं, 20 रुपए में बिकने वाला नारियल अब 25-30 रुपए बिकने लगा है। मखाना का भाव 800 रुपए प्रति किलो है। इसमें भी 50 रुपए प्रति किलो का इजाफा हुआ है। त्योहारी सीजन में चीनी और चने की कीमतों में भी इजाफा हुआ है।

    उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय की वेबसाइट पर दी गई खुदरा कीमतों की सूची के अनुसार, चीनी का दाम बीते एक महीने सिर्फ एक रुपया प्रति किलो की वृद्धि हुई है, लेकिन कारोबारी ने बताया कि बीते एक महीने में चीनी का थोक भाव तकरीबन 300 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ गया है। मंत्रालय की कीमत सूची के अनुसार, दिल्ली में एक सितंबर को चीनी का खुदरा मूल्य 39 रुपए प्रति किलो था, जबकि 30 सितंबर को 40 रुपए प्रति किलो।