Category: business

  • मिल सकती है राहत IT-ITES इंडस्ट्री को, GST काउंसिल की बैठक में आज

    [object Promise]

    गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (GST) काउंसिल आज विचार करेगी कि आउटसोर्सिंग सर्विसेज बिजनस की किन प्रक्रियाओं को निर्यात का दर्जा देकर 18 पर्सेंट GST से बाहर निकाला जाए। इससे 167 अरब डॉलर की IT और ITES इंडस्ट्री को राहत मिलेगी।

    सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘हमें प्रस्ताव मिले हैं। लॉ कमिटी ने मामले की जांच की है।’ सरकार ने इस मुद्दे पर जुलाई में तस्वीर साफ की थी। हालांकि सर्कुलर के एक हिस्से से यह पता नहीं चल पा रहा था कि इंटरमीडियरी सर्विसेज या एक्सपोर्ट को 18 पर्सेंट टैक्स के दायरे के बाहर रखा गया है या नहीं? इसके बाद कुछ टैक्स अधिकारियों ने IT कंपनियों को नोटिस जारी करने के लिए इस हिस्से पर स्पष्टीकरण मांगा था। सर्कुलर में बताया गया था कि BPO सर्विसेज को तब तक इंटरमीडियरी नहीं माना जाएगा, जब तक सेवा का प्रावधान उसके खुद के खाते में है।

    इंटरमीडियरी वह फर्म होती है, जो गुड्स ऐंड सर्विसेज मुहैया कराती है। EY के पार्टनर बिपिन सपरा ने बताया, ‘GST कानून में इंटरमीडियरी का मतलब स्पष्ट नहीं है। सर्कुलर में दी गई परिभाषा के मुताबिक, सभी IT और ITES एक्सपोर्ट को इंटरमीडियरी सर्विस माना गया है, जिसके चलते उन सभी को देश में GST चुकाना होगा। इससे देश में काम कर रहीं सभी STP और SEZ यूनिटों का एक्सपोर्ट स्टेटस खत्म हो जाएगा।’

    नैस्कॉम और अन्य इंडस्ट्री संगठनों ने इस मुद्दे को सरकार और काउंसिल के सामने रखा था। वहीं, BPO सेक्टर ने महाराष्ट्र की अपीलेट अथॉरिटी फॉर अडवांस रूलिंग के सामने पक्ष रखा है कि बैक-ऑफिस सपॉर्ट को सर्विस एक्सपोर्ट का दर्जा नहीं दिया जाता। इसमें अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और उनके ग्राहकों को गुड्स और सर्विसेज मुहैया कराई जाती हैं। उन्होंने कहा कि ये सेवाएं इंटरमीडियरी सर्विसेज का हिस्सा हैं और इन पर GST लागू होता है। आमतौर पर निर्यातकों को टैक्स रिफंड किया जाता है क्योंकि इन्हें विदेश में कन्ज्यूम किया जाता है। पुराने टैक्स रूल्स में भी बैक-ऑफिस सर्विस को यह स्टेटस हासिल था।

    देश में 500 से अधिक ग्लोबल इन-हाउस डिलिवरी सेंटर हैं, जिनमें 3,50,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं। इंडस्ट्री के मुताबिक, 18 पर्सेंट GST से बैक-ऑफिस का बिजनस मॉडल हिल जाएगा। अन्य देशों में बेहतर नियमों के चलते वहां की सर्विस सस्ती है। इसके चलते इस मॉडल को देश में बहुत कम मार्जिन पर काम करना पड़ता है। सपरा ने कहा कि यह साफ करना जरूरी है कि ऐसी सेवाएं दायरे में शामिल नहीं की गई हैं।

  • …तो कॉर्पोरेट टैक्स ट्रेड वॉर के कारण चीन से शिफ्ट होने वाली कंपनियों को भारत लाने के लिए घटाया!

    [object Promise]

    सरकार ने नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए 15 प्रतिशत के कॉर्पोरेट टैक्स की घोषणा की है। इसका मकसद चीन में काम करने वाली उन कंपनियों को लुभाना है, जो अमेरिका के साथ चल रहे व्यापार युद्ध के कारण कहीं और शिफ्ट होना चाहती हैं। जानकारों ने सरकार के इस कदम की तारीफ तो की है, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इस मकसद को हासिल करने के लिए और उपाय करने होंगे।

    सेस और सरचार्ज के साथ ऐसी कंपनियों को 17 प्रतिशत का टैक्स चुकाना पड़ेगा। इस पहल के साथ भारत में मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए टैक्स वियतनाम और म्यांमार जैसे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बराबर हो जाएगा। इन देशों में 15 से 20 प्रतिशत का टैक्स कंपनियों पर लगता है।

    पिछले एक साल में ऐपल, डेल और एचपी सहित 50 से अधिक बहुराष्ट्रीय कंपनियां चीन से आंशिक तौर पर निकली हैं या अपना प्रॉडक्शन बेस किसी अन्य देश में शिफ्ट कर रही हैं। यहां तक कि चीन की मल्टीनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी टीसीएल के भी टीवी प्रॉडक्शन को वियतनाम शिफ्ट करने की खबरें आई हैं। चीन की साइलुन टायर भी मैन्युफैक्चरिंग थाइलैंड ले जा रही है। इस मामले में क्रिसिल के प्रिंसिपल इकनॉमिस्ट डीके जोशी ने कहा, ‘नई कंपनियों के लिए 15 प्रतिशत का कॉर्पोरेट टैक्स बहुत बड़ी रियायत है। जो कंपनियां चीन से भारत आना चाहती हैं, उनके लिए यह मध्यम अवधि में निर्णायक साबित होगा।’

    अभी और बहुत कुछ करना है
    उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अभी कारोबारी सुगमता बढ़ाने के लिए बहुत कुछ करना है क्योंकि इस मामले में दूसरे देश भारत से काफी आगे हैं। हाल में आई खबरों से पता चला कि अमेरिका-चीन के व्यापार युद्ध का अधिक लाभ वियतनाम, ताइवान, थाइलैंड और मलयेशिया जैसे देशों को मिला है, न कि भारत को। यह बात हैरान करने वाली है क्योंकि भारत का घरेलू मार्केट इन देशों की तुलना में बहुत बड़ा है।

    जानकारों का कहना है कि अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर, जमीन खरीदने में देरी, सख्त श्रम कानून और ऊंची टैक्स दरों के कारण भारत के बजाय बहुराष्ट्रीय कंपनियां दूसरे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में प्लांट लगाना पसंद करती हैं। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन बिबेक देबरॉय ने कहा, ‘मेक इन इंडिया मुख्यतौर पर मैन्युफैक्चरिंग के बारे में है, जो जमीन अधिग्रहण और श्रम सुधारों जैसी कई चीजों पर निर्भर करता है। भारत में जमीन राज्य के अधिकारक्षेत्र में आता है। श्रम का मामला भी ऐसा ही है। हमें इन सब चीजों को मिलाकर देखना होगा।’

     

  • लेट फाइलिंग को मिलेगा बढ़ावा GST फॉर्म टलने से!

    [object Promise]

    गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (GST) में सुधार और सहूलियत के नाम पर कई प्रक्रियाओं को टालते जाने से अब आशंका जताई जा रही है कि इससे लेट फाइलिंग कल्चर को बढ़ावा मिलेगा और कंप्लायंस में जुटे कारोबारियों का मनोबल गिरेगा। 2 करोड़ तक टर्नओवर वालों के लिए सालाना रिटर्न (GSTR-9) दो वित्त वर्ष के लिए ऑप्शनल किए जाने के बाद जहां इसकी फाइलिंग निल होने के आसार बढ़ गए हैं, वहीं अक्टूबर से नए रिटर्न सिस्टम की तैयारियों पर खर्च करती आ रहीं फर्मों को झटका लगा है।

    सालाना रिटर्न के तीन फॉर्म GSTR-9, GSTR-9A और GSTR-9C भरे जाने थे। काउंसिल ने कंपोजिशन डीलर्स (GSTR-9A) को वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 के लिए इससे पूरी तरह मुक्त कर दिया है, जबकि सामान्य डीलर्स को 2 करोड़ तक टर्नओवर पर भरें या न भरें कि छूट दे रखी है। 2 करोड़ से ऊपर ऑडिट रिपोर्ट अनिवार्य होने से GSTR-9C सबको भरना है।

    वित्त मंत्रालय की ओर से 25 जून को जारी जीएसटी ऑडिट प्लॉन के तहत सभी राज्यों और कमिश्नरेट में इसकी तैयारियां जोरों पर हैं और कई जगह रिटर्न और एनुअल रिटर्न भर चुके कारोबारियों को जांच के नोटिस भी मिल रहे हैं। जीएसटी कंसल्टेंट राकेश गुप्ता ने बताया, ‘सरकारी सर्कुलर में कहा गया है कि ऑडिट जांच उन्हीं लोगों की होगी, जिन्होंने ऐनुअल रिटर्न भर दिया है। चूंकि ऑडिट प्लान वापस नहीं लिया गया है, अब कोई कारोबारी ऑप्शनल GSTR-9 भरकर ऑडिट या जांच के झंझट में क्यों फंसेगा? इसे शायद ही कोई भरे, क्योंकि गलतियां होने की आशंका ज्यादा हैं।’ इसके पहले जॉब वर्क का फॉर्म ITC-4 भी आखिरी समय में खत्म किया गया था। अब अनुशासित तरीके से कंप्लायंस करने वाले भी अपने टैक्स प्रफेशनल्स पर दबाव बनाएंगे कि जल्दबाजी में फाइलिंग न करें और इंतजार करें।

    सीए राकेश भंडुला के मुताबिक 1 अक्टूबर से आ रहे नए रिटर्न्स फॉर्म और सिस्टम की तैयारी में हजारों कंपनियों और डीलर्स ने वक्त और पैसा लगाया है। अब यह फॉर्म बिना किसी सुगबुगाहट के छह महीने के लिए आगे खिसका दिया गया। ऐसे में ईमानदारी से अनुपालन करने वाले हतोत्साहित होंगे। एक तरह से सरकार जाने-अनजाने में लास्ट आवर फाइलिंग को बढ़ावा दे रही है, जो आगे चलकर पूरे सिस्टम के लिए घातक होगा। इनकम टैक्स ऑडिट फाइलिंग की आखिरी डेट 30 सितंबर है और नए जीएसटी रिटर्न की तैयारी में लगे कारोबारियों की शिकायत है कि उन्हें पहले से पता होता तो वे नए रिटर्न में समय न गंवाकर आईटी ऑडिट की फाइलिंग पर फोकस करते। इसके लिए अब दस दिन से भी कम समय बचा है।

  • शेयर बाजार में दिखा कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती का जश्न सोमवार को भी, सेंसेक्स में 1300 अंकों की तेजी

    [object Promise]

    कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती का जश्न जारी है। शेयर बाजार सोमवार को फिर बड़े उछाल के साथ खुला। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सूचकांक सेंक्सस 829.38 अंकों के छलांग के साथ 38,844 पर खुला और कुछ ही पलों में तेजी 1000 अंकों को पार कर गई। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी ने 268 (2.79%) अंक उछल 11,542.70 पर कारोबार की शुरुआत की।

    सत्र के शुरुआती कुछ मिनटों में ही सेंसेक्स में 1300 अंकों तक की तेजी देखी गई, निफ्टी भी 11,600 के पार चला गया। आईटीसी, एचडीएफसी बैंक और एलऐंटी, एक्सिस बैंक और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के शेयरों में 5 पर्सेंट से ज्यादा तेजी रही। हालांकि, एक बार फिर आईटी के शेयरों में कमजोरी रही।

    9:20 पर सेंसेक्स के शेयरों का हाल

    [object Promise]


    9:27 पर निफ्टी के शेयर

    [object Promise]
    सरकार के फैसले से गदगद बाजार

    शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सबको हैरान करते हुए कॉर्पोरेट टैक्स की दरों में कटौती की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि कैपिटल गेन्स पर बढ़ा हुआ सरचार्ज लागू नहीं होगा। इससे बंबई शेयर बाजार के 30 शेयरों वाले सेंसेक्स ने शुक्रवार को 1,921 अंक की लंबी छलांग लगाई। यह एक दशक से अधिक में किसी कारोबारी दिन में सेंसेक्स की सबसे ऊंची बढ़त है। इसके अलावा जीएसटी काउंसिल ने होटल शुल्क और कुछ सामान पर भी कर की दरें घटाने की घोषणा की है। मौजूदा कंपनियों के लिए मूल कॉर्पोरेट टैक्स की दर को 30 से घटाकर 22 प्रतिशत किया गया है। वहीं एक अक्टूबर, 2019 के बाद स्थापित होने वाली नई विनिर्माण कंपनियों के लिए इसे 25 से घटाकर 15 प्रतिशत किया गया है।

    करेक्शन की भी संभावना
    सैमको सिक्योरिटीज ऐंड स्टॉकनोट के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिमीत मोदी ने कहा, ‘शुक्रवार को जोरदार तेजी के बाद अब बाजार में कुछ ‘करेक्शन’ आ सकता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक अपनी लिवाली कब शुरू करते हैं और वे करों में कटौती को किस रूप में लेते हैं।’

  • 90,000 लोगों को ऐमजॉन ने दिया रोजगार

    [object Promise]

    ई-वाणिज्य कंपनी ऐमजॉन इंडिया ने फेस्टिव सीजन में अपने आपूर्ति केंद्रों, सामान को छांटने वाले केंद्रों, डिलीवरी केंद्रों और सहयोगी नेटवर्क एवं ग्राहक देखभाल सेवा क्षेत्र में 90,000 लोगों को अस्थायी रोजगार उपलब्ध कराया है। इसका मकसद ग्राहकों को सामान की तेजी से डिलीवरी सुनिश्चित करना है।

    कंपनी ने एक बयान में कहा कि इससे आने वाले त्योहारी सीजन में ऐमजॉन की डिलीवरी क्षमता को समर्थन मिलेगा। वहीं ग्राहकों का अनुभव भी बेहतर होगा। ऐमजॉन ने अपने मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नै, बेंगलुरु, अहमदाबाद और पुणे समेत अन्य शहरों में यह रोजगार अवसर सृजित किए हैं। ऐमजॉन ने कहा कि इनके अलावा हजारों और अप्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित हुए हैं। इसमें ट्रक से सामान पहुंचाने वाले, पैकिंग करने वाले, साफ-सफाई की एजेंसिया इत्यादि सहयोगियों को भी रोजगार मिला है।

    आर्थिक सुस्ती और कंज्यूमर डिमांड में कमी की खबरों से बेपरवाह टॉप ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म एमेजॉन इंडिया का कहना है कि उसे स्लोडाउन की चिंता नहीं है और इस बार के त्योहारी सीजन में सबसे अधिक सेल्स दर्ज होने वाली है। एक साल में सेलर्स की तादाद 3.5 से 5 लाख तक पहुंच गई है।

    कंपनी की 65-70% डिमांड छोटे शहरों से आ रही है, इसलिए ईजी पेमेंट और दूरदराज के इलाकों में फास्ट डिलिवरी पर भी फोकस है। ऐमजॉन के मुताबिक भारत में बीते एक साल में उसने 40% ज्यादा सेलर जोड़े हैं और आगामी त्योहारों पर बंपर डिमांड की उम्मीद कर रही है। 28 सितंबर से 4 अक्टूबर तक चलने वाले अपने फेस्टिव सेल में ऐमजॉन का फोकस इस बार फैशन, एथनिक स्टाइल और बजट कैटिगरी पर रहने वाला है। इस सेगमेंट में भी ईटेलर ने सेलर्स, ब्रैंड्स और स्टाइल्स में काफी इजाफा किया है।

  • इन्फोसिस फोर्ब्स की दुनिया की सम्मानित फर्मों की सूची में तीसरे स्थान पर,18 भारतीय कंपनियां सूची में शामिल

    [object Promise]

    फोर्ब्स की सम्मानित कंपनियों की सूची में 18 भारतीय फर्मों को स्थान मिला। इनमें इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और एचडीएफसी शामिल हैं। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनी इन्फोसिस को दुनिया की सम्मानित कंपनियों की सूची में तीसरा स्थान मिला है। वैश्विक भुगतान प्रौद्योगिकी कंपनी वीजा इस सूची में पहले स्थान पर और इटली की कार कंपनी फेरारी दूसरे स्थान पर हैं।

    पिछले साल 31वें स्थान पर थी इन्फोसिस
    इन्फोसिस 2018 में इस सूची में 31वें स्थान पर थी। सूची में शामिल शीर्ष 10 कंपनियों में नेटफ्लिक्स चौथे, पेपाल पांचवें, माइक्रोसॉफ्ट छठे, वाल्ट डिज्नी सातवें, टोयोटा मोटर आठवें, मास्टरकार्ड नौवें और कॉस्टको होलसेल 10वें स्थान पर हैं। सूची में शीर्ष 50 स्थानों में भारतीय कंपनी टीसीएस 22वें और टाटा मोटर्स 31वें स्थान पर हैं।

    सूची में शामिल भारतीय कंपनियां

    भारतीय कंपनी का नाम फोर्ब्स की सूची में स्थान
    इन्फोसिस 3
    टीसीएस 22
    टाटा मोटर्स 31
    टाटा स्टील 105
    लार्सन ऐंड टुब्रो 115
    महिंद्रा ऐंड महिंद्रा 117
    एचडीएफसी 135
    बजाज फिनसर्व 143
    पीरामल एंटरप्राइजेज 149
    स्टील अथॉरिटी आफ इंडिया 153
    एचसीएल टेक्नॉलजीज 155
    हिंडाल्को इंडस्ट्रीज 157
    विप्रो 168
    एचडीएफसी बैंक 204
    सनफार्मा इंडस्ट्रीज 217
    जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया 224
    आईटीसी 231
    एशियन पेंट्स 248

     

    सूची में शामिल अन्य कंपनियां हैं-टाटा स्टील (105), लार्सन एंड टुब्रो (115), महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (117), एचडीएफसी (135), बजाज फिनसर्व (143), पीरामल एंटरप्राइजेज (149), स्टील अथॉरिटी आफ इंडिया (153), एचसीएल टेक्नॉलजीज (155), हिंडाल्को इंडस्ट्रीज (157), विप्रो (168), एचडीएफसी बैंक (204), सनफार्मा इंडस्ट्रीज (217), जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (224), आईटीसी (231) और एशियन पेंट्स (248)।

    सर्वाधिक कंपनियां अमेरिका की
    दुनिया की 250 सम्मानित कंपनियों की सूची में सबसे ज्यादा 59 कंपनियां अमेरिका की हैं। उसके बाद जापान, चीन और भारत की कंपनियों का नंबर आता है। जापान, चीन और भारत की कुल मिलाकर 82 कंपनियां सूची में हैं। पिछले साल इन तीन देशों की 63 कंपनियां सूची में शामिल थीं।

  • सेंसेक्स में मामूली तेजी, शेयर बाजार बंद हुआ मिले-जुले रुख के साथ

    [object Promise]

    बीते दो सत्रों में रेकॉर्ड रैली के बाद मंगलवार को शेयर बाजार मिले-जुले रुख के साथ बंद हुआ। बीएसई के 30 कंपनियों के शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स महज 7.11 अंक (0.02%) उछलकर 39,097.14 पर बंद हुआ। वहीं, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 50 कंपनियों के शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 12.00 अंकों (0.10%) की गिरावट के साथ 11,588.20 पर बंद हुआ।

    दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 39,306.37 का ऊपरी स्तर तथा 38,913.06 का निचला स्तर छुआ, जबकि निफ्टी ने 11,655.05 का उच्च स्तर तथा 11,539.20 का निम्न स्तर छुआ।

    बीएसई पर 15 कंपनियों के शेयर हरे निशान पर तो 15 कंपनियों के शेयर लाल निशान पर बंद हुए। वहीं, एनएसई पर 22 कंपनियों के शेयरों में लिवाली तथा 28 कंपनियों के शेयरों में बिकवाली दर्ज की गई।

    [object Promise]

    इन शेयरों में तेजी
    बीएसई पर इन्फोसिस के शेयरों में सर्वाधिक 3.78 फीसदी, रिलायंस में 3.22 फीसदी, टेक महिंद्रा में 3.12 फीसदी, टाटा मोटर्स में 2.35 फीसदी तथा मारुति के शेयर में 1.60 फीसदी की मजबूती देखी गई। एनएसई पर भी इन्फोसिस के शेयर में सर्वाधिक 3.88 फीसदी, जी लिमिटेड में 3.66 फीसदी, टेक महिंद्रा में 3.11 फीसदी, रिलायंस में 3.09 फीसदी तथा टाटा मोटर्स के शेयर में 2.74 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।

    [object Promise]

    इन शेयरों में गिरावट
    बीएसई पर एसबीआई के शेयर में सर्वाधिक 3.56 फीसदी, एक्सिस बैंक में 3.13 फीसदी, एलऐंडटी में 3.03 फीसदी, हीरो मोटोकॉर्प में 2.42 फीसदी तथा ओएनजीसी के शेयर में 2.06 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई। एनएसई पर जेएसडब्ल्यू स्टील के शेयर में सर्वाधिक 4.19 फीसदी, एसबीआई में 4.06 फीसदी, आयशर मोटर्स में 3.84 फीसदी, एक्सिस बैंक में 3.08 फीसदी तथा आईओसी के शेयर में 3.08 फीसदी की गिरावट देखी गई।

  • एचडीएफसी बैंक ग्राहकों को लुभाने का बैंक ने अपनाया नया पैतरा

    [object Promise]

    देश का निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा बैंक एचडीएफसी बैंक अब बेहद लोकप्रिय चैट ऐप्लिकेशन वॉट्सऐप पर भी उपलब्ध है। इस ऐप के जरिये ग्राहक अपने अकाउंट और क्रेडिट कार्ड के विवरण की जानकारी ले सकते हैं। यही नहीं, ग्राहक वॉट्सऐप पर प्रीअप्रूव्ड ऑफर्स तथा बैंक के प्रोमोशन ऑफर्स की भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अपने युवा ग्राहकों को लुभाने के लिए बैंक अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तथा क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड्स पर आकर्षक छूट तथा कैशबैक दे रहा है।

    युवाओं के लिए स्पेशल मिलेनिया कार्ड

    बैंक युवाओं के लिए ब्रैंड नेम ‘मिलेनिया’ के तहत चार विभिन्न तरह के कार्ड्स ऑफर कर रहा है। इनमें क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, एक प्रीपेड कार्ड तथा एक ईजी ईएमआई कार्ड शामिल हैं।

    [object Promise]

    5% का कैशबैक
    HDFC बैंक अपने वॉलेट पेजैप तथा पेमेंट गेटवे स्मार्टबाय के जरिये शॉपिंग करने पर ग्राहकों को 5% का कैशबैक ऑफर कर रहा है। स्मार्टबाय एक प्लेटफॉर्म है, जहां दुकानदार द्वारा एचडीएफसी बैंक के ग्राहकों को दिया जाने वाला ऑफर्स आता है और बैंक इनमें से कोई भी उत्पाद या सेवाओं की बिक्री नहीं करता है। बैंक तमाम ऑनलाइन खरीदारियों पर 2.5% का कैशबैक और ऑफलाइन खरीदारियों पर 1% का कैशबैक ऑफर कर रहा है।

  • कारोबारियों की बढ़ी टेंशन, PMC से पैसे शिफ्ट करने लगे लोग

    [object Promise]

    पंजाब ऐंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव (PMC) बैंक के ऑपरेशंस पर छह महीने की पाबंदी लगने से घटना के बाद तमाम खाताधारकों में डर का माहौल पैदा हो गया है। लोग अपने पैसे सुरक्षित स्थान पर लगाने के लिए चिंतिंत हो रहे हैं। हालांकि, इस प्रकार की चिंता से मुक्त होने का भरोसा लगातार दिया जा रहा है। अगले कुछ दिनों में कई बैंकों से लोग पैसा निकालने का इरादा बना रहे हैं।

    छोटे बैंकों से डरने लगे लोग!
    कुर्ला के एक कॉपरेटिव बैंक में खाताधारक ने कहा, ‘मैं अपना पैसा निकालकर दूसरे बड़े बैंक में जमा कर दूंगा। इतना रिस्क कौन लेगा? आखिरकार पता नहीं छोटे बैंक में क्या हो जाए! इसी तरह से कॉपरेटिव बैंक में फिक्स डिपॉजिट करने वाले भी अपना पैसा निकालने के बारे में सोच रहे हैं। एक दूसरे ग्राहक ने कहा कि अब तो हम मैं केवल सरकारी बैंक में ही पैसा जमा करूंगा।’ एक जानकार ने बताया कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती के चलते बढ़ते नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट (एनपीए) बढ़ने से चिंता बढ़ी है। इन बैंकों का दायरा अधिक बड़ा न होने से आधुनिक टेक्नॉलजी का प्रयोग भी कम ही होता है।

    [object Promise]

    दिल्ली के कारोबारी परेशान
    दिल्ली के बाजारों और कारोबारियों में भी खासी बेचैनी देखी जा रही है। एक हजार रुपये से ज्यादा की निकासी, ट्रांसफर और दूसरे ट्रांजैक्शन कम से कम छह महीने के लिए बंद होने से जहां इसके बड़े कस्टमर्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं, वहीं करंट अकाउंट के जरिए रोजाना जमा-निकासी करने वाले छोटे व्यापारी भी परेशान हैं। मंगलवार को बैंक के एमडी की ओर से कस्टमर्स को भेजे गए मेसेज के बाद दिल्ली में सेंट्रल बिजनस डिस्ट्रिक्ट्स की चार शाखाओं पर कस्टमर्स की भीड़ जुटनी शुरू हो गई।

    सदर बाजार के एक कारोबारी ने बताया, ‘बैंक में मेरे 30 लाख रुपये से ज्यादा जमा हैं। आज एक पार्टी को मनी ट्रांसफर के लिए लॉग-इन किया तो एमडी के मेसेज वाला लिंक मिला। अब हमारा पूरा काम ही रुक गया है।’

    छोटे कोऑपरेटिव बैंकों में पैसे रखने वाले ज्यादा परेशान
    सबसे ज्यादा खलबली उन कारोबारियों में है, जो थोक बाजारों में फैले छोटे कोऑपरेटिव और अनजान निजी बैंकों में पैसे रखते हैं, क्योंकि ये बैंक नो योर कस्टमर और ट्रांजैक्शंस में कई तरह की वैध-अवैध सहूलियतें देते हैं। अब इन बैकों पर गाज गिरने के डर से बड़े पैमाने पर पैसे की निकासी हो रही है।

    ब्लैकियों ने निकाली RTGS, TT की काट
    आरबीआई की ओर से को-ऑपरेटिव और छोटे निजी बैंकों पर KYC नॉर्म्स की सख्ती के बाद से इन बैंकों की साख हिलने लगी है क्योंकि बाजारों में ये कालाबाजारियों के मुफीद ठिकाने के रूप में जाने जाते हैं। एक विश्वस्त सूत्र ने बताया, ‘RTGS, TT और दूसरे ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में ब्लैकमनी का लेन-देन सबसे ज्यादा इन्हीं बैंकों से हो रहा है।

    सूत्र ने कहा, मान लीजिए कि मुझे किसी को 50 लाख रुपये देने हैं, लेकिन दूसरा पक्ष कैश नहीं लेना चाहता तो ऐसी पार्टियां उपलब्ध हैं, जो एक तय कमीशन लेकर अपनी तरफ से मेरे ग्राहक को RTGS कर देंगी। ये पार्टियां मजदूरों के या दूसरे आइडल खातों का इस्तेमाल करती हैं और गायब हो जाती हैं। ऐसी ही धांधली बड़े बिलों की पेमेंट में होती है।’ उन्होंने कुछ तेजी से बढ़ते निजी बैंकों का नाम गिनाते हुए कहा कि यहां आज भी सबसे आसानी से खाते खुल जाते हैं, बशर्ते कस्टमर एक तय ऊंची सीमा तक डिपॉजिट और ट्रांजैक्शन करे।

    PMC से सबसे ज्यादा कारोबारी जुड़े हैं
    पीएमसी शेड्यूल्ड बैंक है और दूसरे छोटे निजी बैंकों के मुकाबले उसकी साख अच्छी है, फिर भी उसमें सबसे ज्यादा एक्सपोजर कारोबारियों के ही हैं। बड़ी संख्या में कारोबारियों ने यहां से लोन भी ले रखे हैं। आरबीआई ने कुछ महीने पहले ही इन बैंकों के लिए केवाईसी की सख्त गाइडलाइंस जारी की थी।

  • कंपनियां ट्रैफिक देंगी ज्यादा सैलरी नियमों का पालन करने पर

    [object Promise]

    देश में नए मोटर वाहन कानून को अपनाने में लोगों को कुछ परेशानी हो रही है। हालांकि कई जगहों पर लोग इस कानून के समर्थन में भी हैं। वहीं गुजरात में अब कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को ट्रैफिक नियम का पालन करवाने के लिए नई-नई स्कीमें निकाली हैं। इनमें कार पूलिंग से लेकर नियमों का पालन करने वालों को ज्यादा सैलरी देने तक की बातें शामिल हैं।

    नियमों का पालन करेंगे तो बढ़ेगी सैलरी!
    वाघ बकरी ग्रुप ने कहा है कि कंपनी के 100 साल पूरे होने पर वे कम से कम प्रदूषण फैलाएं। इसके लिए उन्हें टिप्स दिए जा रहे हैं कि वे कार पूलिंग का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, कई कंपनियां देख रही हैं कि उनके कर्मचारी ट्रैफिक नियमों को कितना जानते हैं और उनका पालन कर रहे हैं कि नहीं। पालन करने वाले कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने पर विचार कर रही हैं कंपनियां।

    कारपूलिंग पर ज्यादा सैलरी

    कंपनियांअपने कर्मचारियों को कार पूलिंग अपनाने और इन आदतों को बढ़ावा देने के लिए उनकी सैलरी बढ़ाने पर भी विचार कर रही हैं।

    ट्रैफिक नियम बताएंगे तो मिलेंगे गिफ्ट
    अहमदाबाद में एक प्राइवेट अस्पताल में कंपनी ने सीसीटीवी कैमरे लगवाए हैं। अस्पताल के सीईओ डॉ. निखिल का कहना है कि हम कर्मचारियों पर नजर रखते हैं कि आते समय किसने हेल्मेट लगाया, किसने सीट बेल्ट लगा रखी थी। जो ऐसा नहीं करते हम उनकी काउंसिलिंग करते हैं। ट्रैफिक नियमों का महत्व बताते हैं। अस्पताल की योजना है कि ट्रैफिक नियमों पर क्विज कराया जाएगा। जो इस प्रतियोगिता में पास होगा उस कर्मचारी को गिफ्ट दिए जाएंगे।