बोकारो से संगीता की रिपोर्ट
कोरोना महामारी से जो अनाथ हुए बच्चों पर सुप्रीम कोर्ट ने आज बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कोविड-19 से अनाथ हुए बच्चों के नाम पर फंड जुटाने से रोकने के लिए राज्य सरकारें एवं केंद्रशासित प्रदेश गैर सरकारी संगठनों(एनजीओ) एवं व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि बच्चों की पहचान उजागर करने से रोकना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि के कारण जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया है,उनका पालन-पोषण और पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी सरकारों की है।
30 हजार बच्चे देश भर में हुए अनाथ :कोरोना महामारी की पहली लहर से अनाथ हुए बच्चों के बारें में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग(एनसीपीसीआर) ने सोमवार को शीर्ष अदालत में आंकड़ा पेश किया। एनसीपीसीआर ने कोर्ट को बताया कि 5 जून तक राज्यों से मिले आंकड़ों के मुताबिक कोरोना महामारी की वजह से देश भर में 30,071 बच्चे अनाथ हुए हैं। अनाथ बच्चों का आंकड़ा और बढ़ सकता है : आयोग ने कहा कि महामारी की वजह से 26,176 बच्चों ने अपने माता-पिता में से किसी एक को खो दिया और 3,621 बच्चे अनाथ हो गए हैं, जबकि 274 लोगों को उनके रिश्तेदारों ने को दिया है। आयोग का कहना है कि अनाथ बच्चों का आंकड़ा और बढ़ सकता है क्योंकि कई राज्यों में खासकर ग्रामीण इलाकों में अनाथ बच्चों से जुड़े आंकड़े एकत्र नहीं किए गए हैं। दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में आंकड़े एकत्र करने की प्रक्रिया नहीं शुरू की है। अनाथ बच्चों की उम्र ज्यादातर 0-13 साल के बीच है : आयोग की तरफ से जो पेश किए गए उनमें से वकील स्वरूपमा चतुर्वेदी ने दायर हलफनामे में कहा कि पिछले एक साल में 274 बच्चों को त्याग दिया गया जबकि अनाथ हुए बच्चों में ज्यादातर की उम्र 0-13 साल के बीच है।कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने देश में बड़ी संख्या में तबाही मचाई है। जबकि कोरोना की दूसरी लहर अब कमजोर पड़ने लगी है।
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