आयकर विभाग की टीमों ने गुरुवार को बेंगलुरु शहर और कर्नाटक के बागलकोट जिले में 50 स्थानों पर छापेमारी की, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा (B.S. Yediyurappa ) के करीबी लोग भी शामिल हैं. शहर में 300 से अधिक अधिकारियों ने उद्योगपतियों, ठेकेदारों और चार्टर्ड एकाउंटेंट के घरों और कार्यालयों पर छापा मारा. सूत्रों ने बताया कि राज्य के सिंचाई विभाग के एक अंदरूनी सूत्र से आरोपी व्यक्तियों द्वारा करों और अन्य साधनों की चोरी कर धन जमा करने की सूचना पर यह कार्रवाई की गई है. सूत्रों के मुताबिक, उमेश बीएमटीसी का ड्राइवर था और येदियुरप्पा के संपर्क में तब आया, जब वह दशकों पहले विपक्ष के नेता थे.
सूत्रों ने कहा कि उमेश ने कुछ समय के लिए येदियुरप्पा के निजी सचिव के रूप में भी काम किया है और बेंगलुरु में संपत्ति अर्जित की है.आईटी अधिकारियों ने हेगड़े नगर स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंट अमला और चामुंडेश्वरी लेआउट निवासी आर. लक्ष्मीकांत के आवासों पर भी छापेमारी की. सहकारनगर स्थित राहुल इंटरप्राइजेज के दफ्तर पर भी छापेमारी की गई है.
आईटी अधिकारियों की टीम ने ठेकेदार डी.आर. उप्पर के उत्तर कर्नाटक के बागलकोट शहर में घर पर छापा मारा. सूत्रों के अनुसार, उप्पर सभी राजनीतिक दलों के साथ अच्छे संबंध रखने में कामयाब रहे और उन्हें आकर्षक कॉन्ट्रेक्ट मिले.सभी जगहों पर छापेमारी जारी है.मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि उन्हें आईटी छापों के बारे में कुछ भी पता नहीं है और कहा कि वह उनके बारे में जानकारी प्राप्त करने के बाद प्रतिक्रिया देंगे.
येदियुरप्पा के परिवार पर भी पहुंच सकती है छापेमारी की आंच
माना जा रहा है कि इस छापेमारी की आंच येदियुरप्पा के परिवार तक भी पहुंच सकती है.
उमेश पहले एक बस कंडक्टर थे. शिमोगा भाजपा नेता अयानूर मंजूनाथ के संपर्क में आने के बाद वह राजनीति में आए और उनके पर्सनल असिस्टेंट बने. बाद में उन्होंने येदियुरप्पा के बेटे और शिमोगा के सांसद बीवाई राघवेंद्र के सहायक के रूप में काम किया. येदियुरप्पा के हालिया कार्यकाल के दौरान, उमेश ने मुख्यमंत्री कार्यालय में पीए के रूप में कार्य किया. वह कथित तौर पर येदियुरप्पा के दूसरे बेटे, बीवाई विजयेंद्र के भी करीबी हैं.
सूत्रों के अनुसार, उमेश ने सिंचाई के ठेके संभाले और आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में स्थित बड़े ठेकेदारों उनके करीबी थे. उनपर करोड़ों के कॉन्ट्रैक्ट में हेरफेर का आरोप है. उन्होंने कथित तौर पर कटौती के बदले सैकड़ों करोड़ के बड़े कॉन्ट्रैक्ट ‘फिक्स’ किए. अधिकारियों ने कहा कि छापेमारी कावेरी सिंचाई निगम और कृष्णा सिंचाई निगम में कॉन्ट्रैक्ट ‘फिक्सिंग’ में उनकी कथित संलिप्तता पर केंद्रित हैं.
सूत्रों ने कहा कि आईटी अधिकारी सिंचाई विभाग द्वारा येदियुरप्पा की अवधि में लागू की गई प्रमुख योजनाओं में बड़ी गड़बड़ियों की जांच कर रहे हैं. इस प्रक्रिया में हजारों करोड़ रुपये की रिश्वत के रूप में कहा गया है.आईटी अधिकारियों ने बेंगलुरु के भाष्यम सर्कल में स्थित उमेश के आवास से दस्तावेजों से भरे चार बैग बरामद किए हैं. कहा जाता है कि वह येदियुरप्पा के तहत तबादलों और फाइलों की आवाजाही का काम करता था. उमेश के करीबी रिश्तेदारों के 6 ठिकानों पर भी छापेमारी की गई है.
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