क्या आप भी क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते है। और मिनिमम ड्यू अमाउंट पर पेमेंट करते हैं तो जरा संभल जाइये आज हम आपको एक ऐसी बात बताएंगे जिसके बाद आप ऐसा नहीं करेंगे। क्योंकि इसमें आपका ही नुकसान है।
मिनिमम ड्यू अमाउंट पे करने वाले ग्राहकों को ऐसा करना फायदे का काम लग सकता है लेकिन अगर आप भी ऐसा करते हैं तो आप बिल्कुल गलत हैं और आज हम आपको इसी हकीकत से रूबरू करवाएंगे। क्योंकि मिनिमम पे करने के फायदे से ज्यादा नुकसान हैं।
मिनिमम ड्यू अमाउंट पे करने पर आप बड़ी राशि चुकाने के बोझ से बच जाते हैं और आपको बकाया राशि चुकाने के लिए थोड़ा बहुत समय भी मिल जाता है। इसी कारण ग्राहकों को ये तरीका लुभाता है पर इसके नुकसानो को जान लेना भी बहुत जरूरी है। जिससे आप पेमेंट को लेकर आप सही फैसला ले। और इसके नुकसान से बच सकें।
बता दें कि मिनिमम ड्यू अमाउंट पे करने का मतलब ये नहीं होता कि आपको बची हुई बकाया राशि का भुगतान नहीं करना होगा। क्योंकि आपको आगे चलकर पूरा भुगतान करना ही पड़ेगा। और इसका नुकसान ये है कि बकाया राशि को चुकाने में जितनी देरी होती जाएगी उतना ही इंटरेस्ट का बोझ बढ़ता चला जाएगा।
इसके साथ ही अगर ग्राहक मिनिमम ड्यू अमाउंट से पे करते हैं तो पूरी राशि चुकाने तक इंटरेस्ट का बोझ बढ़ता ही रहता है। साथ ही ग्राहकों को इंटरेस्ट फ्री पीरियड का लाभ भी नहीं मिलता और इंटरेस्ट खरीददारी करने के दिन से ही लगना भी शुरू हो जाता है।
जानकार की माने तो मिनिमम ड्यू अमाउंट पे करते रहने से कर्ज का अमाउंट या तो बना रहता है या बढ़ता ही जाता है। भले भी भविष्य में आप सारा ड्यू अमाउंट पे ही क्यों न कर दें बावजूद इसके सिबिल रिपोर्ट पर इसका प्रभाव पड़ता है। ऐसे में बैंक आपकी पहचान उस ग्राहक के रूप में कर लेता है जिसके पास लिक्विडिटी की कमी है।
इसके साथ ही एक सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि, मिनिमम ड्यू अमाउंट पे करते रहने से क्रेडिट लिमिट पर भी इसका असर देखने को मिलता है। लगातार कम राशि चुकता करते रहने से जितनी राशि कम पे की जाएगी उतनी ही क्रेडिट लिमिट घटती ही चली जाती है।
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