रत्न-आभूषण उद्योग ने बजट में सोने पर आयात शुल्क घटाकर चार प्रतिशत करने की मांग की

[object Promise]

नई दिल्ली। 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश होना है। रत्न एवं आभूषण उद्योग ने बजट में सोने पर सीमा शुल्क को घटाकर चार प्रतिशत करने की मांग की है, साथ ही स्रोत पर एकत्र किये गये कर (टीसीएस) को भी वापस लिये जाने की मांग की गई है, इन मांगों में पॉलिस किए हुए बहुमूल्य एवं अर्ध-मूल्यवान रत्नों पर आयात शुल्क में कटौती किये जाना भी शामिल है।

अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण घरेलू रत्न एवं आभूषण परिषद (जीजेसी) के अध्यक्ष आशीष पेठे ने कहा, ‘हमारा आग्रह है कि सरकार सोने पर सीमा शुल्क को मौजूदा 12.5 प्रतिशत से घटाकर चार प्रतिशत करे। अगर कर की दर इस स्तर पर नहीं आई तो इससे तस्करी को बढ़ावा और लोगों को असंगठित व्यापार करने के लिए प्रोत्साहित मिलेगा।

आशीष पेठे ने आग्रह किया कि सरकार आने वाले समय में एचसीएन -71 (हार्मोनाइज्ड सिस्टम नोमेनक्लेचर) के तहत आने वाली जिसों को संग्रहित कर (टीसीएस) प्रावधानों के दायरे से बाहर रखे। उन्होंने कहा कि टीसीएस में जो धनराशि ब्लॉक है वह आयकर का भुगतान करने की क्षमता से 6.67 गुना अधिक है।

जीजेईपीसी की मांग

रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) के अध्यक्ष कॉलिन शाह ने कहा कि सरकार कीमती और अर्ध-कीमती रत्नों पर आयात शुल्क जो मौजूदा समय में 7.5 प्रतिशत है, इसे घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दे। उन्होंने बजट सिफारिशों में और बाते जोड़ी जिनमें सिंथेटिक रूप से तराशे और पॉलिश किए गए रत्नों पर आयात शुल्क को पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया जाए।

वहीं, जीजेसी के अध्यक्ष के मुताबिक, रत्नों और आभूषण उद्योग के लिए कर्ज पर ईएमआई की सुविधा मिले और नकद खरीद की सीमा को मौजूदा 10,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये करना चाहिए।

 

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *