मिल सकती है राहत IT-ITES इंडस्ट्री को, GST काउंसिल की बैठक में आज

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गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (GST) काउंसिल आज विचार करेगी कि आउटसोर्सिंग सर्विसेज बिजनस की किन प्रक्रियाओं को निर्यात का दर्जा देकर 18 पर्सेंट GST से बाहर निकाला जाए। इससे 167 अरब डॉलर की IT और ITES इंडस्ट्री को राहत मिलेगी।

सरकारी अधिकारी ने बताया, ‘हमें प्रस्ताव मिले हैं। लॉ कमिटी ने मामले की जांच की है।’ सरकार ने इस मुद्दे पर जुलाई में तस्वीर साफ की थी। हालांकि सर्कुलर के एक हिस्से से यह पता नहीं चल पा रहा था कि इंटरमीडियरी सर्विसेज या एक्सपोर्ट को 18 पर्सेंट टैक्स के दायरे के बाहर रखा गया है या नहीं? इसके बाद कुछ टैक्स अधिकारियों ने IT कंपनियों को नोटिस जारी करने के लिए इस हिस्से पर स्पष्टीकरण मांगा था। सर्कुलर में बताया गया था कि BPO सर्विसेज को तब तक इंटरमीडियरी नहीं माना जाएगा, जब तक सेवा का प्रावधान उसके खुद के खाते में है।

इंटरमीडियरी वह फर्म होती है, जो गुड्स ऐंड सर्विसेज मुहैया कराती है। EY के पार्टनर बिपिन सपरा ने बताया, ‘GST कानून में इंटरमीडियरी का मतलब स्पष्ट नहीं है। सर्कुलर में दी गई परिभाषा के मुताबिक, सभी IT और ITES एक्सपोर्ट को इंटरमीडियरी सर्विस माना गया है, जिसके चलते उन सभी को देश में GST चुकाना होगा। इससे देश में काम कर रहीं सभी STP और SEZ यूनिटों का एक्सपोर्ट स्टेटस खत्म हो जाएगा।’

नैस्कॉम और अन्य इंडस्ट्री संगठनों ने इस मुद्दे को सरकार और काउंसिल के सामने रखा था। वहीं, BPO सेक्टर ने महाराष्ट्र की अपीलेट अथॉरिटी फॉर अडवांस रूलिंग के सामने पक्ष रखा है कि बैक-ऑफिस सपॉर्ट को सर्विस एक्सपोर्ट का दर्जा नहीं दिया जाता। इसमें अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और उनके ग्राहकों को गुड्स और सर्विसेज मुहैया कराई जाती हैं। उन्होंने कहा कि ये सेवाएं इंटरमीडियरी सर्विसेज का हिस्सा हैं और इन पर GST लागू होता है। आमतौर पर निर्यातकों को टैक्स रिफंड किया जाता है क्योंकि इन्हें विदेश में कन्ज्यूम किया जाता है। पुराने टैक्स रूल्स में भी बैक-ऑफिस सर्विस को यह स्टेटस हासिल था।

देश में 500 से अधिक ग्लोबल इन-हाउस डिलिवरी सेंटर हैं, जिनमें 3,50,000 से ज्यादा लोग काम करते हैं। इंडस्ट्री के मुताबिक, 18 पर्सेंट GST से बैक-ऑफिस का बिजनस मॉडल हिल जाएगा। अन्य देशों में बेहतर नियमों के चलते वहां की सर्विस सस्ती है। इसके चलते इस मॉडल को देश में बहुत कम मार्जिन पर काम करना पड़ता है। सपरा ने कहा कि यह साफ करना जरूरी है कि ऐसी सेवाएं दायरे में शामिल नहीं की गई हैं।

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