मददगार बन सकती हैं दो रियल्टी कंपनियां DHFL के लिए

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वित्तीय मुश्किलों का सामना कर रही दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) को दो रियल्टी कंपनियों से मदद मिलने की उम्मीद है। पिरामल रियल्टी और पोद्दार हाउसिंग उन स्लम रिहैबिलिटेशन प्रोजेक्ट्स (SRA) में मास्टर या लीड डिवेलपर बनने की योजना बना रही हैं जिनके लिए DHFL ने फंड दिया था। दोनों कंपनियों ने नॉन-बाइंडिंग टर्म शीट साइन की हैं। इससे उन बैंकों को भी राहत मिलेगी, DHFL का रिजॉल्यूशन प्लान फाइनल करने में जुटे हुए हैं।

पोद्दार हाउसिंग के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर विशाल कोकादवार ने बताया, ‘हमने इनमें से कुछ प्रोजेक्ट्स के मूल्यांकन के लिए नॉन-बाइंडिंग टर्म शीट साइन की है।’ इस बारे में DHFL ने ईटी की ओर से ईमेल से भेजे गए प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया। पिरामल रियल्टी ने कहा, ‘हम मार्केट की अटकलों पर टिप्पणी नहीं करते।’

DHFL के पास लगभग 40,000 करोड़ रुपये की बिल्डर लोन बुक है। इसमें से 25-30 पर्सेंट लोन SRA प्रोजेक्ट्स से जुड़े बिल्डर्स को दिए गए हैं। एक मास्टर डिवेलपर आमतौर पर प्रोजेक्ट्स के एक बड़े पूल से जुड़ा होता है। यह ऐसे प्रोजेक्ट्स में कुछ हिस्सेदारी लेकर छोटे बिल्डर्स को इन्हें पूरा करने में मदद करता है। इससे उन बिल्डर्स को मदद मिलेगी जो DHFL से लिया लोन चुका नहीं पा रहे हैं या उसके भुगतान में देरी कर रहे हैं।

मास्टर डिवेलपर ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए लोन पर कॉरपोरेट गारंटी उपलब्ध कराता है। ऐसी स्थिति में प्रोजेक्ट्स की साख मजबूत होगी और DHFL के लिए फंडिंग बढ़ेगी। DHFL इससे पहले इन लोन को बेचने की कोशिश कर रही थी। इकनॉमिक टाइम्स ने 28 मई को रिपोर्ट दी थी कि टेक्सटाइल ग्रुप वेलस्पन ऐसे SRA प्रोजेक्ट्स में कुछ हिस्सेदारी लेने में दिलचस्पी रखता है।

पिरामल ग्रुप की रियल एस्टेट डिवेलपमेंट यूनिट पिरामल रियल्टी अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स का अपना पोर्टफोलियो अगले दो वर्षों में दोगुना करने की योजना बना रही है। इकनॉमिक टाइम्स ने 16 मई को रिपोर्ट दी थी कि पिरामल रियल्टी अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए और विदेशी निवेशकों को जोड़ सकती है। पिरामल रियल्टी में गोल्डमैन सैक्स और वारबर्ग पिंकस का इनवेस्टमेंट है। कंपनी के पास मुंबई में 1.5 करोड़ स्क्वेयर फीट के अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट हैं। इसमें से 20 पर्सेंट कमर्शियल सेगमेंट में हैं।

पोद्दार हाउसिंग के पोर्टफोलियो में रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स की अधिक संख्या है। कंपनी में प्रमोटर ग्रुप के पास 61 पर्सेंट हिस्सेदारी है। DHFL के लिए लेंडर्स 25 सितंबर से पहले रिजॉल्यूशन प्लान तैयार करने में जुटे हैं। इस तिथि के बाद बैंकों को इसे नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) की कैटेगरी में रखना होगा। होम लोन फाइनेंसर DHFL ने कर्ज चुकाना बंद कर दिया था, लेकिन अब इसने दोबारा भुगतान शुरू कर दिया है। कंपनी ने कमर्शियल पेपर, शॉर्ट-टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स पर सभी बकाया रकम का भुगतान किया है। उसने हाल के दिनों में कमर्शियल पेपर और बॉन्ड के जरिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये के कर्ज का भुगतान किया है।

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