चमका सोना अमेरिकी केंद्रीय बैंक के फैसले से, चांदी भी सुधरी

चमका सोना अमेरिकी केंद्रीय बैंक के फैसले से, चांदी भी सुधरी

नई दिल्ली। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती के फैसले से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोमवार को सोने और चांदी की चमक बढ़ गई। कॉमेक्स पर सोना दो फीसदी से ज्यादा उछला और चांदी में भी तेजी लौटी। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में महंगी धातुओं के दाम में तेजी आने से भारत के सरार्फा बाजार में भी सोने और चांदी में तेजी का रुझान देखने को मिल सकता है।

कोरोना के कहर के चलते शेयर बाजार में आई भारी गिरावट के बाद निवेशकों ने अपने मार्जिन कॉल को पूरा करने के लिए पिछले सप्ताह सोने में भारी बिकवाली की जिससे भारतीय वायदा बाजार में पिछले सप्ताह सोने में तकरीबन 4000 रुपये प्रति 10 ग्राम जबकि चांदी में 6,000 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई थी।

 

बाजार के जानकारों की माने तो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पीली धातु की तेजी से भारतीय सरार्फा बाजार में भी तेजी का माहौल देखने को मिलेगा।

कॉमेक्स पर सोने अप्रैल अनुबंध में पिछले सत्र से 29.25 डॉलर यानी 1.93 फीसदी की तेजी के साथ 1,545.95 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था जबकि इससे पहले सोने का भाव 1,574.70 डॉलर प्रति औंस तक उछला। कमोडिटी बाजार विशेषज्ञ बताते हैं कि फेड के फैसले से सोना वापस 1,600 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है और सोने में तेजी का फायदा चांदी को भी मिल रहा है। चांदी के मई अनुबंध में पिछले सत्र से 1.50 फीसदी की तेजी के साथ 14.17 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार चल रहा था जबकि इससे पहले चांदी का भाव 15.24 डॉलर प्रति औंस तक उछला।

फेडरल रिजर्व ने कोरोना के कहर से निपटने की दिशा में कदम उठाते हुए अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अचानक ब्याज दर में बड़ी कटौती की। फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर घटाकर शून्य के करीब कर दिया। कोरोना वायरस के संकट और मंदी के खतरों से जूझ रही अमेरिकी अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने के मकसद से फेड ने यह कदम उठाया है।

फेड ने बेंचमार्क ब्याज दर जो एक फीसदी से 1.25 फीसदी था उसे घटाकर शून्य से 0.25 फीसदी कर दिया है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर में एक फीसदी की कटौती की है। इससे पहले तीन मार्च को फेड ने ब्याज दर में 0.5 फीसदी की कटौती की थी।

फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने रविवार की शाम में कहा कि ब्याज दर में कटौती व अन्य कदम जो उठाए गए हैं उनका मकसद अमेरिकी अर्थव्यवस्था को इस कठिन दौर से निकालने में मदद करना है।

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