आरबीआई ने बैंकों, एनबीएफसी के लिए सांविधिक लेखा परीक्षकों की नियुक्ति के दिशानिर्देश जारी किए

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मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों सहित नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFCs) में स्टैचुटरी ऑडिटर्स (वैधानिक लेखा परीक्षकों) की नियुक्ति के लेकर मंगलवार को दिशा-निर्देश जारी किए। रिजर्व बैंक ने कहा कि ‘कॉमर्शियल बैंक (RRBs को छोड़कर), UCBs और NBFCs (HFCs सहित) के वैधानिक केंद्रीय लेखा परीक्षकों (SCAs)/ वैधानिक लेखा परीक्षकों (SAs) से संबंधित दिशा-निर्देश’ वित्त वर्ष 2021-22 से प्रभावी होंगे। केंद्रीय बैंक ने साथ ही स्पष्ट किया है कि 1,000 करोड़ रुपये के एसेट साइज वाले ऐसे NBFCs, जो जमा नहीं स्वीकार करते हैं, मौजूदा प्रक्रिया को अपनाना जारी रख सकते हैं।

रिजर्व बैंक ने कहा है, ”दिशा-निर्देशों में SCAs/SAs की नियुक्ति, ऑडिटर्स की संख्या, कार्यकाल की अवधि, रोटेशन इत्यादि को लेकर जरूरी इंस्ट्रक्शन दिए गए हैं।”

केंद्रीय बैंक ने कहा है कि लेखा-परीक्षकों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है।

ये दिशा-निर्देश 2021-22 से पहली बार शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) और NBFCs के लिए लागू हो रहे हैं। ऐसे में UCBs और NBFCs को चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही से इन दिशा-निर्देशों को लागू करने की छूट होगी। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि किसी तरह का अवरोध उत्पन्न ना हो।

बैंकों और शहरी सहकारी बैंकों को SCAs/SAs की नियुक्ति या पुनर्नियुक्ति के लिए सलाना आधार पर रिजर्व बैंक की मंजूरी लेनी होगी। नए दिशा-निर्देशों में ऐसा कहा गया है।

इससे पहले सोमवार को केंद्रीय बैंक ने प्राइवेट बैंकों के एमडी, सीईओ और पूर्णकालिक निदेशकों की आयुसीमा और कार्यकाल के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। केंद्रीय बैंक के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक कोई भी व्यक्ति लगातार 15 साल से अधिक समय तक प्रबंध निदेशक (MD), सीईओ (CEO) और पूर्णकालिक निदेशक के पद पर नहीं रह सकता है।

इसके साथ ही प्राइवेट बैंकों के एमडी या सीईओ 70 साल की आयु के होने के बाद अपने पदों पर बने हुए नहीं रह सकते हैं। RBI के मुताबिक प्राइवेट बैंक के चेयरमैन और नॉन-एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर के लिए 75 साल की अधिकतम उम्र सीमा निर्धारित की गई है।

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