आज आप करोड़पति होते अगर लगाए होते मिंडा में 5 साल पहले ‌7.5 लाख रुपये

[object Promise]

मिंडा इंडस्ट्रीज में जिन लोगों ने पांच साल पहले सिर्फ 7.5 लाख रुपये लगाए थे, वे आज करोड़पति बन चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि आर्थिक सुस्ती की सबसे अधिक मार ऑटो और ऑटो ऐंसिलरी कंपनियों पर बनी है। मिंडा इंडस्ट्रीज इसी सेक्टर की कंपनी है, लेकिन अब तक इस कंपनी का स्टॉक डटा हुआ है। हाल में दूसरी ऑटो कंपनियों की तरह मिंडा के शेयर प्राइस में भी गिरावट आई है।

शेयर विश्लेषकों का कहना है कि इस करेक्शन की वजह से अगली दो-तीन तिमाहियों में कंपनी की ग्रोथ कम होने का असर मिंडा पर पड़ चुका है। उनका कहना है कि कंपनी के शेयर प्राइस में अभी भी तेजी की गुंजाइश बची हुई है क्योंकि बीएस-VI नॉर्म्स के लागू होने से इसके ‘कॉ़न्टेंट पर वीइकल’ यानी प्रति गाड़ी कंपनी के पार्ट्स की खपत बढ़ेगी। नए एमिशन नॉर्म्स अगले साल से लागू होने वाले हैं।

ऑटो इंडेक्स स्थिर, 5 साल में मिंडा का शेयर 1,244% चढ़ा
पिछले पांच साल में मिंडा के शेयर प्राइस में 1,244 प्रतिशत की तेजी आई है। इस दौरान बीएसई ऑटो इंडेक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अगर पिछले एक साल में कंपनी के शेयर प्राइस में 27 प्रतिशत की गिरावट नहीं आई होती तो पांच साल की अवधि में इसका रिटर्न 1,700 प्रतिशत रहता।

5 साल में 3.7 गुना बढ़ी कंपनी की बिक्री

मिंडा देश की शीर्ष ऑटो कंपोनेंट कंपनियों में शामिल है। चारपहिया सेगमेंट में कंपनी इलेक्ट्रॉनिक और मकैनिकल सिक्यॉरिटी सिस्टम, इमोबिलाइजर, डोर हैंडल, इलेक्ट्रॉनिक बॉडी कंट्रोलर, स्टार्ट सिस्टम, पावर क्लोजर सिस्टम, एलईडी सॉफ्ट टच और कैमरा मॉड्युल्स सहित दूसरे पार्ट्स बनाती है। दोपहिया गाड़ियों के लिए यह इग्निशन स्विच-कम-स्टीयरिंग लॉक, फ्यूल टैंक कैप, लैच और केबल, टूल बॉक्स, लॉक, इमोबिलाइजर और मैग्नेटिक मॉड्युल्स सहित दूसरे पार्ट्स बनाती है। कंपनी की बिक्री वित्त वर्ष 2014 से 2019 के बीच 3.7 गुना बढ़कर 5,908 करोड़ और मुनाफा 5.3 करोड़ रुपये से बढ़कर 320 करोड़ रुपये हो गया। विश्लेषकों का कहना है कि पिछले एक दशक में मिंडा की ग्रोथ इंडस्ट्री की औसत ग्रोथ से अधिक रही है। इसलिए आगे भी कंपनी का उम्दा प्रदर्शन जारी रह सकता है।

स्टॉक को किन चीजों से हो सकता है फायदा? 

चोलामंडलम सिक्यॉरिटीज का कहना है कि कंपनी ने मुश्किल वक्त में दमदार प्रदर्शन किया है। ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि अप्रैल 2020 से नए एमिशन नॉर्म्स लागू होने से इसके इंजन-रिलेटेड सेंसर्स, अडवांस फिल्ट्रेशन, सीट बेल्ट रिमाइंडर्स जैसे प्रॉडक्ट्स की मांग बढ़ सकती है। कंपनी के एलईडी और अलॉय व्हील जैसे प्रीमियम पार्ट्स की मांग भी बढ़ रही है। विश्लेषकों का कहना है कि मिंडा को इन बदलावों का बड़ा फायदा मिलेगा और इससे उसकी प्रॉफिट ग्रोथ तेज हो सकती है।

सुस्ती का साया 
कंपनी की ग्रोथ के लिए बड़ा रिस्क ऑटो सेल्स में सुस्ती है। जून तिमाही में कंपनी के कंसॉलिडेटेड प्रॉफिट में 23 प्रतिशत की गिरावट आई और उसकी बिक्री 0.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1,439.75 करोड़ रुपये हो गई। इस तिमाही में ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स की औसत ग्रोथ में 11 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके बावजूद मिंडा की बिक्री में बढ़ोतरी हुई। नार्नोलिया फाइनैंशल के मुताबिक, ‘विदेश में बिक्री बढ़ने और अलॉय व्हील सेगमेंट में ऊंची ग्रोथ के कारण हमें कंपनी का मार्जिन 12-12.5 प्रतिशत के बीच रहने की उम्मीद है।’

ब्रोकरेज हाउस ने कहा कि कंपनी को लंबी अवधि में बड़े पोर्टफोलियो का फायदा होगा, लेकिन वह ऑटो कंपनियों को बड़े पैमाने पर पार्ट्स की सप्लाई करती है। इसलिए शॉर्ट टर्म में ऑटो मार्केट में सुस्ती का उस पर बुरा असर पड़ सकता है। कंपनी इस वित्त वर्ष के अंत तक अपनी चार सब्सिडियरी को मिलाने जा रही है। हरिता सीटिंग्स का मर्जर वित्त वर्ष 2020 की चौथी तिमाही तक पूरा हो सकता है। आनंद राठी ने मिंडा के लिए 388 रुपये, चोलामंडलम में 375 रुपये और नार्नोलिया ने 343 रुपये का टारगेट कंपनी है।

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *