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  • दिल्ली-NCR में फिर से खतरनाक स्तर पर पहुँच चुका है वायु प्रदूषण! जानिए क्या है GRAP III और इससे कैसे बचें

    दिल्ली-NCR में फिर से खतरनाक स्तर पर पहुँच चुका है वायु प्रदूषण! जानिए क्या है GRAP III और इससे कैसे बचें

    दिल्ली-NCR में फिर से खतरनाक स्तर पर पहुँच चुका है वायु प्रदूषण! जानिए क्या है GRAP III और इससे कैसे बचें

    दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण का स्तर फिर से गंभीर स्थिति में पहुँच गया है जिसके कारण GRAP III लागू कर दिया गया है। सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 450 तक पहुँच गया, जो ‘बेहद गंभीर’ श्रेणी में आता है। क्या आप जानते हैं कि GRAP III क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है? इस लेख में हम इसी पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

    GRAP III: दिल्ली-NCR की वायु प्रदूषण से लड़ने की रणनीति

    GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) एक व्यापक योजना है जिसका उद्देश्य दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है। GRAP III, योजना का तीसरा चरण है, जो सबसे गंभीर स्तर के प्रदूषण के लिए सक्रिय होता है। यह योजना कई तरह के कदमों पर जोर देती है, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:

    स्कूलों में हाइब्रिड कक्षाएं

    GRAP III के तहत, दिल्ली-NCR के सभी स्कूलों को कक्षा V तक की कक्षाओं के लिए हाइब्रिड क्लास मोड पर स्विच करना होगा। इसका मतलब है कि छात्रों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही कक्षाओं में भाग लेने का विकल्प दिया जाएगा, जिससे वायु प्रदूषण से उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके।

    निर्माण कार्यों पर रोक

    इस योजना के तहत निर्माण कार्य, तोड़फोड़ और खुदाई का काम भी रोक दिया गया है, क्योंकि ये गतिविधियाँ हवा में धूल और प्रदूषणकारी कणों का उत्सर्जन करती हैं।

    वाहनों पर प्रतिबंध

    बीएस-IV सर्टिफिकेशन से नीचे के इंजन वाले माल वाहन नहीं चल सकते हैं, और राष्ट्रीय राजधानी के बाहर पंजीकृत माल वाहन भी शहर में प्रवेश नहीं कर सकते, यदि उनका इंजन बीएस-IV सर्टिफिकेशन वाला नहीं है। डीजल से चलने वाले कमर्शियल व्हीकल के प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

    वायु प्रदूषण से खुद को कैसे बचाएं?

    जब AQI उच्च स्तर पर हो तो अपनी सुरक्षा करना बेहद ज़रूरी है। यहां कुछ सुझाव दिए गए हैं:

    घर पर रहें

    यदि संभव हो, तो घर पर ही रहें, खासकर जब AQI बहुत खराब या गंभीर श्रेणी में हो।

    मास्क पहनें

    बाहर निकलना ज़रूरी हो तो N95 मास्क पहनें। यह मास्क हवा में मौजूद ज़्यादातर हानिकारक कणों को फ़िल्टर कर देता है।

    खिड़कियाँ और दरवाज़े बंद रखें

    अपने घर की खिड़कियाँ और दरवाज़े बंद रखें ताकि प्रदूषित हवा अंदर न आ सके।

    हवा शुद्ध करने वाले उपकरण का उपयोग करें

    आप हवा शुद्ध करने वाले उपकरण (एयर प्यूरिफायर) का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

    क्या सरकार पर्याप्त कर रही है?

    सरकार ने GRAP III जैसे उपायों से यह साबित करने की कोशिश की है कि वह वायु प्रदूषण से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन क्या ये कदम पर्याप्त हैं? क्या इससे प्रदूषण के स्तर में स्थायी रूप से कमी आएगी? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिन पर विचार करना ज़रूरी है। सतत विकास के लिए दीर्घकालिक और व्यापक समाधानों की आवश्यकता है।

    क्या आप जानते हैं?

    • GRAP, या ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान, वायु गुणवत्ता के आधार पर लागू होने वाले कदमों की एक व्यापक योजना है।
    • GRAP III गंभीर वायु प्रदूषण की स्थिति में सक्रिय होता है।
    • AQI या वायु गुणवत्ता सूचकांक वायु की गुणवत्ता को मापता है। यह जितना ज़्यादा होगा, प्रदूषण उतना ही ज़्यादा होगा।

    Take Away Points

    • दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण फिर से गंभीर स्थिति में है।
    • GRAP III के तहत कई तरह के उपाय लागू किए गए हैं।
    • आप स्वयं को प्रदूषण से बचाने के लिए कई कदम उठा सकते हैं।
    • दीर्घकालिक और व्यापक समाधानों की आवश्यकता है ताकि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके।
  • क्या एकनाथ शिंदे हुए इस्तेमाल? महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़

    क्या एकनाथ शिंदे हुए इस्तेमाल? महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मोड़

    महाराष्ट्र की सियासत में हुआ है बड़ा धमाका! क्या एकनाथ शिंदे हुए हैं इस्तेमाल?

    महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों खूब हलचल मची हुई है। हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या एकनाथ शिंदे वास्तव में बीजेपी के हाथों इस्तेमाल हो रहे हैं? क्या अजित पवार ने शरद पवार को धोखा दिया? क्या बीजेपी अब महाराष्ट्र में अपनी सत्ता को मजबूत करने में कामयाब हो गई है? इन सभी सवालों के जवाब इस लेख में जानेंगे।

    एकनाथ शिंदे: क्या बीजेपी ने किया इस्तेमाल?

    एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत करके बीजेपी का साथ दिया और सरकार बनाई। लेकिन अब उनके हाथों में सत्ता का कितना वास्तविक अधिकार है, यह एक बड़ा सवाल है। मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें उम्मीद के मुताबिक विभाग नहीं मिले। मुख्यमंत्री पद की रेस में भी उन्हें पीछे छोड़ दिया गया। क्या बीजेपी ने उनका इस्तेमाल करके अब किनारे कर दिया है?

    शिंदे की मुश्किलें

    शिंदे महाराष्ट्र की राजनीति में पूरी तरह से फंस चुके हैं। एक तरफ बीजेपी का दबाव है, तो दूसरी तरफ उनके समर्थक उनसे अपनी उम्मीदें रखे हुए हैं। विधानसभा चुनाव में शिवसेना ने 57 सीटें जीती, जबकि 2019 के विधानसभा चुनावों में शिवसेना को केवल 56 सीटें मिली थीं। लेकिन यह बीजेपी की 132 सीटों के मुकाबले काफी कम हैं। इस तरह से शिंदे के लिए पार्टी बदलना भी बेहद मुश्किल हो गया है, उन्हें जो बीजेपी कहेगी, वो ही मानना होगा।

    मुख्यमंत्री पद से वंचित

    शिंदे मुख्यमंत्री बनना चाहते थे, लेकिन बीजेपी ने उन्हें इस पद से वंचित रखा। उन्हें गृह और राजस्व मंत्रालय की भी उम्मीद थी, लेकिन बीजेपी ने यह मंत्रालय भी खुद ही रख लिया। अब जो कुछ शिंदे को मिला है, उसी में उनको संतोष करना है। उनकी महत्वाकांक्षाओं पर बीजेपी ने पूरी तरह से पानी फेर दिया है।

    महाराष्ट्र में नए समीकरण

    मंत्रिमंडल विस्तार के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, और उपमुख्यमंत्री अजित पवार एक साथ मंच पर थे। लेकिन मंच पर उन तीनों की बैठने की व्यवस्था ने एक बड़ा सन्देश दिया। फडणवीस और पवार साथ बैठे थे, शिंदे दूर बैठे थे। इससे समझा जा सकता है कि अब नए समीकरण सामने आ गए हैं, जहाँ शिंदे का महत्व कम हो गया है।

    अजित पवार का उदय

    अजित पवार ने भी शरद पवार के साथ मतभेद के बाद बीजेपी का समर्थन किया। उनकी यह हरकत उन्हें महाराष्ट्र की सत्ता में प्रमुख भूमिका दिलाने में कामयाब हुई है। क्या उनके साथ भी शिंदे जैसा ही व्यवहार होगा भविष्य में?

    एकनाथ शिंदे और अजित पवार: अस्तित्व की लड़ाई

    एकनाथ शिंदे का आज जो हाल है, अजित पवार का भविष्य भी वैसा ही दिखता है। दोनों ने अपने ही दलों में बगावत करके बीजेपी को सत्ता दिलाई। शिंदे ने उद्धव ठाकरे, और पवार ने शरद पवार को किनारे किया। लेकिन अब यह देखना है कि आगे चलकर बीजेपी इन दोनों के साथ कैसे व्यवहार करेगी।

    बीजेपी का अगला कदम

    बीजेपी ने महाराष्ट्र में शिंदे और पवार का भरपूर इस्तेमाल किया, लेकिन अब इन दोनों की उपयोगिता कम होती जा रही है। अब उनका क्या होगा यह आने वाला वक्त ही बता पाएगा।

    Take Away Points

    • महाराष्ट्र की सियासत में आए बड़े बदलाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
    • क्या एकनाथ शिंदे का सियासी भविष्य खतरे में है?
    • अजित पवार का उभार शिंदे के लिए चेतावनी है या फिर एक संयोग?
    • बीजेपी महाराष्ट्र में कैसे अपने भविष्य की योजना बना रही है?
  • संभल की हिंसा: 1947 से 209 हिंदुओं की निर्मम हत्या का सच?

    संभल की हिंसा: 1947 से 209 हिंदुओं की निर्मम हत्या का सच?

    संभल की हिंसा: 1947 से 209 हिंदुओं की निर्मम हत्या का सच?

    क्या आप जानते हैं? उत्तर प्रदेश के संभल में 1947 से अब तक 209 हिंदुओं की निर्मम हत्या की गई है! मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में इस सनसनीखेज खुलासे से सबको हैरान कर दिया। यह कोई आम घटना नहीं, बल्कि एक ऐसी त्रासदी है जिसने पीढ़ियों को तबाह कर दिया। क्या यह हिंसा का सिलसिला अब भी जारी है? आइए जानते हैं संभल में हुए दंगों की पूरी कहानी और क्या योगी सरकार इस हिंसा के पीछे के सच को उजागर करने में सफल होगी?

    1947 से लेकर अब तक का हिंसा का इतिहास

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में संभल में हुए दंगों का विस्तृत इतिहास पेश किया। उन्होंने बताया कि कैसे 1947 से लेकर अब तक, विभिन्न वर्षों में 209 हिंदुओं की निर्मम हत्या हुई। 1948 में 6, 1958 में, 1962 में, 1976 में 5, और 1978 में तो 184 हिंदुओं को सामूहिक रूप से जला दिया गया था। यह एक ऐसा सच है जिस पर आज भी कई लोग चुप्पी साधते हैं। लेकिन क्या यह चुप्पी हमेशा के लिए जारी रहेगी?

    1980 से लेकर 1996 तक, विभिन्न वर्षों में संभल में हिंसा जारी रही, जिसमें कई निर्दोष हिंदुओं ने अपनी जान गंवाई। योगी जी ने कहा, “ये लोग सौहार्द की बात करते हैं” यह सवाल हैरान कर देने वाला है: यदि ये लोग सौहार्द की बात करते हैं, तो क्या उन्हें न्याय नहीं मिलना चाहिए?

    1978 के दंगों की भयावहता: एक वैश्य की निर्मम हत्या

    सीएम योगी ने 1978 के दंगों की एक दिल दहला देने वाली घटना का भी जिक्र किया। एक वैश्य, जिसने अपने आस-पास के हिंदुओं को पैसा उधार दिया था, उसे भीड़ ने घेर लिया और उसके हाथ-पैर काटकर निर्मम तरीके से मार डाला गया। इस घटना से यह साफ होता है कि कैसे संभल में हिंसा ने एक ऐसे वातावरण का निर्माण किया जहाँ किसी को भी सुरक्षित नहीं माना जा सकता था। क्या इस भयावह घटना पर पर्याप्त कार्रवाई की जाएगी?

    संभल हिंसा में शामिल किसी को नहीं बख्शा जाएगा: सीएम योगी का ऐलान

    सीएम योगी ने संभल में 48 साल बाद खोदकर निकाले गए एक मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदुओं को अपने ही धार्मिक स्थलों तक जाने से वंचित रखा गया। इस अवधि में 22 कुएँ बंद किए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संभल में पत्थरबाजी में शामिल हर एक व्यक्ति को सजा मिलेगी। यह दृढ़ संकल्प कितना कारगर साबित होगा? क्या इससे वास्तव में संभल में शांति कायम होगी? हम जानने के लिए उत्सुक हैं।

    कुंदरकी की बीजेपी की जीत और संभल हिंसा का आपसी संबंध?

    सीएम योगी ने विधानसभा में कुंदरकी में बीजेपी की जीत पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी और इस जीत को ‘वोट की लूट’ बताने वालों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि हिंदुओं की उत्पीड़न की घटनाओं के बीच हुए इस चुनाव परिणाम से साफ पता चलता है कि लोगों का भरोसा योगी आदित्यनाथ और बीजेपी में कितना दृढ़ है। इस जीत को कई लोग बहुसंख्यक समुदाय की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा और इस हिंसा का मुकाबला करने की उम्मीद से जोड़कर देख रहे हैं।

    बहराइच हिंसा पर सीएम योगी का रुख

    बहराइच में शोभा यात्रा के दौरान हुई हिंसा पर, सीएम योगी ने कहा कि निर्दोष रामगोपाल मिश्रा की हत्या एक योजनाबद्ध षड्यंत्र के तहत हुई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि मुस्लिम पर्वों के जुलूस हिंदू इलाकों से निकल सकते हैं, तो हिंदू पर्वों के जुलूस मुस्लिम इलाकों से क्यों नहीं निकल सकते?

    टेक अवे पॉइंट्स:

    • संभल में 1947 से अब तक 209 हिंदुओं की निर्मम हत्या की घटना ने एक ऐसे सवाल को उठाया है जिस पर देश के हर व्यक्ति को गंभीरता से सोचने की जरुरत है।
    • सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस हिंसा के पीछे के सच को उजागर करने की दिशा में एक कठोर रुख अपनाया है, जिससे पीड़ितों के परिवारों और समाज को उम्मीद मिली है।
    • संभल और बहराइच जैसी घटनाओं से यह स्पष्ट है कि धार्मिक सौहार्द बनाए रखना, सांप्रदायिक एकता को बढ़ावा देना, और ऐसे लोगों को सज़ा देना आवश्यक है जो सामाजिक सामंजस्य बिगाड़ते हैं।
  • दो सिरों वाले बच्चे का चमत्कारिक ऑपरेशन: प्रयागराज के डॉक्टरों ने रचा इतिहास!

    दो सिरों वाले बच्चे का चमत्कारिक ऑपरेशन: प्रयागराज के डॉक्टरों ने रचा इतिहास!

    दो सिरों वाले बच्चे का चमत्कारिक ऑपरेशन: प्रयागराज के डॉक्टरों ने रचा इतिहास!

    क्या आपने कभी सुना है कि दो सिरों वाले बच्चे का सफल ऑपरेशन हुआ हो? जी हाँ, आपने सही सुना! प्रयागराज के डॉक्टरों ने एक ऐसे ही अद्भुत काम को अंजाम दिया है जिसने सभी को हैरान कर दिया है। इस लेख में हम आपको इस चमत्कारिक ऑपरेशन की पूरी कहानी बताएँगे जो विश्व स्तर पर एक नया कीर्तिमान स्थापित करने जा रही है।

    एक साधारण परिवार की असाधारण कहानी

    उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में रहने वाले पवन कुमार और उनकी पत्नी रचना के घर तीन बेटियों के बाद एक बेटे का जन्म हुआ था। परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, लेकिन जैसे ही उन्होंने बच्चे के दो सिर देखे, उनकी खुशी शोक में बदल गई। बच्चा ‘एन्सेफेलोसिल’ नामक दुर्लभ बीमारी से ग्रस्त था, जिसे लाइलाज भी माना जाता है।

    परिवार के लोग बच्चे को लेकर कई अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन सभी डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। आखिर में उन्होंने प्रयागराज के नारायण स्वरूप हॉस्पिटल का रुख किया, जहाँ डॉक्टर राजीव सिंह ने एक ऐसी करिश्माई सर्जरी की, जिसकी दुनिया दंग है।

    साढ़े चार घंटे का करिश्माई ऑपरेशन

    डॉक्टर राजीव सिंह की टीम ने 21 दिन के बच्चे का साढ़े चार घंटे तक चला ये अत्यंत जटिल ऑपरेशन किया। यह ऑपरेशन इतना कठिन था कि पहले तो डॉक्टरों की टीम भी इसे करने में झिझक रही थी, लेकिन बच्चे की जिंदगी को बचाने की उम्मीद ने उनमें नया जोश भर दिया।

    दुनिया भर में गूंज उठेगा ‘वैभव’ का नाम

    सफल ऑपरेशन के बाद बच्चे का एक सिर अलग कर दिया गया और उसे पूरी तरह से ठीक कर दिया गया है। अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। परिवार वालों ने अपने बेटे का नाम ‘वैभव’ रखा है, जोकि अपने आप में ही इस असाधारण घटना की ओर इशारा करता है। डॉक्टरों की टीम इस सफल ऑपरेशन को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की तैयारी कर रही है, और हमें विश्वास है कि ‘वैभव’ का नाम दुनिया भर में गूंज उठेगा।

    एन्सेफेलोसिल: एक दुर्लभ और जानलेवा बीमारी

    एन्सेफेलोसिल एक बेहद दुर्लभ बीमारी है जो करोड़ों में सिर्फ एक बच्चे को होती है। यह बीमारी गर्भ में ही बच्चे को अपनी चपेट में ले लेती है और इसकी वजह से बच्चे का जन्म दो सिरों वाला हो सकता है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चे का ऑपरेशन बेहद जटिल होता है और बचने की गुंजाइश बेहद कम होती है। ‘वैभव’ का सफल ऑपरेशन एक बड़ी सफलता है जो मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

    चमत्कारिक इलाज ने दी नई उम्मीद

    ‘वैभव’ का ऑपरेशन कई मायनों में एक चमत्कार से कम नहीं है। इस ऑपरेशन ने उन हजारों परिवारों को एक नई उम्मीद दी है जो इस दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं। इस घटना ने दुनिया भर के डॉक्टरों को इस बीमारी से निपटने के नए तरीके खोजने की प्रेरणा दी है।

    ‘वैभव’: एक प्रेरणादायक कहानी

    ‘वैभव’ की कहानी न केवल एक चमत्कारिक ऑपरेशन की कहानी है बल्कि यह हिम्मत और आशा की भी एक प्रेरणादायक कहानी है। इस कहानी ने साबित किया है कि अगर हिम्मत न हारी जाए तो हर मुश्किल परिस्थिति का सामना किया जा सकता है। ‘वैभव’ की इस सफलता ने मेडिकल जगत में एक नई क्रांति ला दी है और इस क्षेत्र में काम कर रहे सभी डॉक्टरों को नया उत्साह प्रदान किया है।

    आगे का रास्ता

    ‘वैभव’ जैसे अद्भुत कामों को देखकर यह आशा की जा सकती है कि मेडिकल साइंस में और भी अद्भुत काम होंगे और ऐसे ही असाधारण परिणाम आएंगे जो इंसानों को स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जीने में मदद करेंगे।

    Take Away Points

    • दो सिरों वाले बच्चे ‘वैभव’ का सफल ऑपरेशन एक अद्भुत उपलब्धि है।
    • इस ऑपरेशन ने एन्सेफेलोसिल नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बच्चों को एक नई उम्मीद दी है।
    • डॉक्टर राजीव सिंह और उनकी टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम देकर मेडिकल जगत में इतिहास रच दिया है।
    • ‘वैभव’ की कहानी हिम्मत और आशा की एक प्रेरणादायक कहानी है।
  • हरियाणा का 80 करोड़ का नया हेलीकॉप्टर: विकास की उड़ान या महंगा शौक?

    हरियाणा का 80 करोड़ का नया हेलीकॉप्टर: विकास की उड़ान या महंगा शौक?

    हरियाणा में 80 करोड़ का नया हेलीकॉप्टर: विकास को मिलेगी रफ्तार?

    हरियाणा सरकार ने हाल ही में एक नया 80 करोड़ रुपये का हेलीकॉप्टर खरीदा है, जिससे राज्य में विकास की गति तेज होने की उम्मीद है। क्या ये वाकई विकास का नया अध्याय है या सिर्फ़ एक महंगा शौक? आइए जानते हैं इस ख़रीद के बारे में और इससे जुड़ी सभी ज़रूरी बातें।

    नया हेलीकॉप्टर: 80 करोड़ की लागत और 15 साल पुराने हेलीकॉप्टर की जगह

    हरियाणा सरकार ने 15 साल पुराने हेलीकॉप्टर को बदलकर एक नया Airbus H145-D3 मॉडल खरीदा है जिसकी लागत 80 करोड़ रुपये है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और अन्य मंत्रियों ने सोमवार को नए हेलीकॉप्टर के लिए पूजा समारोह में भाग लिया। यह हेलीकॉप्टर आधुनिक तकनीक से लैस है और राज्य के विकास कार्यो में तेज़ी लाने में मदद करेगा।

    पुराने हेलीकॉप्टर की स्थिति और नई खरीदारी का औचित्य

    नागरिक उड्डयन मंत्री ने स्पष्ट किया कि पुराना हेलीकॉप्टर काफी पुराना हो गया था, जिसके कारण नये हेलीकॉप्टर की खरीदारी ज़रूरी हो गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग द्वारा पिछले वर्ष ही इस आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया था। हालांकि, 80 करोड़ रुपये की लागत पर विवाद हो सकता है। मंत्री ने बताया कि पुराने हेलीकॉप्टर को बेचने के बाद वास्तविक लागत का आकलन किया जाएगा।

    क्या है इस ख़रीद का प्रभाव? विकास में तेज़ी या महंगा शौक?

    मुख्यमंत्री का मानना है कि यह नया हेलीकॉप्टर राज्य के विकास में तेज़ी लाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करते हुए इस खरीदारी को ‘नॉन-स्टॉप सरकार’ की पहल बताया है। लेकिन, क्या ये खर्चा वाकई उचित है? इस बारे में लोगों में अलग-अलग राय हो सकती है।

    राज्य की आर्थिक स्थिति और इस खरीदारी का असर

    हरियाणा की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए, इस 80 करोड़ रुपये की खरीदारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या इस धनराशि का उपयोग राज्य की अन्य विकास योजनाओं और जनहित के कार्यों में किया जा सकता था?

    हेलीकॉप्टर का उपयोग और पारदर्शिता

    सरकार को इस नए हेलीकॉप्टर के उपयोग की पूरी जानकारी जनता को देनी चाहिए। इससे पारदर्शिता बनाए रखने में मदद मिलेगी। हेलीकॉप्टर का किस प्रकार उपयोग होगा? किन कामों और कार्यक्रमों में शामिल होगा ? ये सवाल जनमानस के मन में हैं, जिनके जवाबों का इंतज़ार जनता को है।

    पुराने हेलीकॉप्टर का इतिहास और तुलना

    वर्तमान में उपयोग किया जा रहा ट्विन-इंजन वाला हेलीकॉप्टर 2009 में लगभग 33 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। 6 साल पहले भाजपा सरकार ने एक और विमान – बीचक्राफ्ट किंग एयर 250 – भी अधिग्रहित किया था। नए हेलीकॉप्टर और पुराने के बीच तुलना करने से इसके फायदे-नुकसान साफ होंगे।

    तकनीकी उन्नयन और आधुनिक सुविधाएँ

    क्या नए हेलीकॉप्टर में ऐसी आधुनिक सुविधाएं हैं जो पुराने हेलीकॉप्टर में नहीं थीं? क्या इससे यात्रा समय में कमी और सुरक्षा में सुधार होगा? इन सब बातों की सार्वजनिक रूप से जांच-परख होनी चाहिए।

    Take Away Points

    • हरियाणा सरकार ने 80 करोड़ रुपये में एक नया Airbus H145-D3 हेलीकॉप्टर खरीदा है।
    • यह 15 साल पुराने हेलीकॉप्टर के स्थान पर है।
    • सरकार का कहना है कि नए हेलीकॉप्टर से राज्य के विकास कार्यो में तेजी आएगी।
    • इस खरीदारी की लागत पर जनता में विभिन्न राय और चर्चाएं हो रही हैं।
    • सरकार को इस खरीदारी और नए हेलीकॉप्टर के उपयोग के बारे में पूरी पारदर्शिता बनाए रखनी चाहिए।
  • मिथुन राशिफल आज: सफलता, खुशियां और आर्थिक लाभ से भरपूर दिन!

    मिथुन राशिफल आज: सफलता, खुशियां और आर्थिक लाभ से भरपूर दिन!

    मिथुन राशि वालों के लिए आज का राशिफल: जीवन स्तर में सुधार, रचनात्मकता में वृद्धि, और आर्थिक लाभ के अवसरों से भरपूर दिन!

    क्या आप जानना चाहते हैं कि आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा? यहाँ मिथुन राशिफल में बताया गया है कि कैसे आज आप अपने जीवन के विभिन्न पहलुओं में सफलता प्राप्त कर सकते हैं, और किन बातों का ध्यान रखना आपके लिए जरूरी है। अपनी कुंडली के अनुसार आज का राशिफल जानने के लिए तैयार हो जाइए, यह एक ऐसा राशिफल है जिसे आप मिस नहीं करना चाहेंगे!

    आज का राशिफल: मिथुन (Gemini/Mithun)

    आज का दिन आपके लिए बेहद शुभ रहने वाला है। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में आपको सफलता और खुशियां प्राप्त होंगी। आपकी रचनात्मकता चरम पर होगी, जिससे आप नए-नए विचारों और योजनाओं से भरपूर रहेंगे। अपने काम में बेहतरीन प्रदर्शन करें और अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए दृढ़ रहें।

    पेशेवर जीवन

    कार्यक्षेत्र में आपको सफलता मिलेगी, खासकर यदि आप किसी अनुबंध पर काम कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों से भेंट होने की संभावना है, जिससे आपको कई नए अवसर मिल सकते हैं। अपने विचारों और सुझावों को साफ-साफ व्यक्त करें ताकि आपको बेहतर समझा जा सके। एक महत्वपूर्ण सलाह, आज अहंकार और आत्मविश्वास में संतुलन बनाए रखें, इससे सफलता और अधिक पास होगी।

    आर्थिक स्थिति

    आज आर्थिक रूप से भी अच्छा दिन है। आपको अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। लेकिन ज़्यादा खर्चों से बचें और अपनी बचत पर ध्यान दें। निवेश से जुड़े फैसलों में सावधानी बरतें और अपने रास्ते को सतर्कता से देखें। सुनिश्चित करें कि आप पैसे के प्रबंधन में ज़्यादा समझदार हैं। एक अच्छे वित्तीय निर्णय में धैर्य और बुद्धिमानी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

    प्रेम और पारिवारिक जीवन

    आपके प्रियजनों के साथ आपके संबंध मज़बूत होंगे। परिवार के साथ समय बिताएं और उनकी भावनाओं का सम्मान करें। अतिथियों के आगमन से घर में खुशियों का माहौल रहेगा। आपके पारिवारिक रिश्ते और भी मजबूत होंगे और घर का माहौल बेहतरीन रहेगा, अपने पार्टनर के साथ समय बिताएं और उनके प्रति अपनी प्यार दिखाएँ। एक सुन्दर और प्यार से भरपूर दिन बिताएं।

    स्वास्थ्य और मनोबल

    आज आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आप ऊर्जावान और उत्साहित रहेंगे। अपने मनोबल को बनाए रखें और सकारात्मक रहें। लेकिन कुछ समय योग, ध्यान या व्यायाम के लिए निकालें ताकि शरीर और मन दोनों स्वस्थ और ताज़ा रहे। नियमित स्वास्थ्य देखभाल आपके अच्छे स्वास्थ्य की नींव होती है।

    आज के लिए शुभ अंक और रंग

    • शुभ अंक: 2, 5, और 7
    • शुभ रंग: एक्वा ब्लू

    आज का उपाय

    भगवान शिव की पूजा करें और ओम नमः शिवाय का जाप करें। यह आपको सकारात्मक ऊर्जा देगा और आपके दिन को और भी अच्छा बनाएगा। अपनी रचनात्मकता को बढ़ावा दें और आज के दिन की सफलता का आनंद लें।

    Take Away Points

    • मिथुन राशि वालों के लिए आज का दिन बहुत अच्छा है।
    • काम में सफलता, आर्थिक लाभ, और पारिवारिक सुख मिलेगा।
    • स्वास्थ्य का ध्यान रखें और सकारात्मक रहें।
    • भगवान शिव की पूजा करें और सृजन को बढ़ावा दें।
  • भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया तीसरा टेस्ट: रोमांच का अनोखा खेल

    भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया तीसरा टेस्ट: रोमांच का अनोखा खेल

    भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया तीसरा टेस्ट: क्या रोहित की टीम जीत की हैट्रिक लगा पाएगी?

    ऑस्ट्रेलिया में भारत का दबदबा लगातार बढ़ता ही जा रहा है! पिछली दो सीरीज में जीत के बाद, अब टीम इंडिया ऑस्ट्रेलियाई सरज़मीं पर टेस्ट सीरीज में हैट्रिक जीत के लिए तैयार है। लेकिन क्या ब्रिस्बेन का गाबा टेस्ट रोहित शर्मा और उनकी टीम के लिए एक और चुनौती साबित होगा? तीसरे दिन के रोमांचक खेल के बाद, आइए जानते हैं क्या हुआ और क्या आगे होने वाला है।

    तीसरे दिन की कहानी: बारिश, विकेट और रोमांच

    तीसरे दिन का खेल बारिश की वजह से काफी प्रभावित रहा। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाज़ों को जमने नहीं दिया और चार महत्वपूर्ण विकेट चटका दिए। भारत ने पहली पारी में चार विकेट पर सिर्फ 51 रन बनाए, जिसमें केएल राहुल (33 रन) ही एकमात्र उम्मीद की किरण नज़र आ रहे हैं। रोहित शर्मा बिना कोई रन बनाये आउट हो गए। अब दो दिन का खेल बाकी है, और भारत फॉलोऑन से बचने के लिए कड़ी मेहनत करने पर मजबूर है! यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय बल्लेबाज़ी ऑस्ट्रेलिया के तेज़ गेंदबाजों के खिलाफ कैसा प्रदर्शन करती है।

    ऑस्ट्रेलिया की पहली पारी: स्मिथ-हेड की जोड़ी ने गेंदबाजों को किया परेशान

    ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 445 रनों का विशाल स्कोर बनाया। स्टीव स्मिथ (101 रन) और ट्रेविस हेड (152 रन) के शानदार शतकों ने भारतीय गेंदबाजों को जमकर परेशान किया। इन दोनों ने चौथे विकेट के लिए 241 रनों की अभूतपूर्व साझेदारी की। जसप्रीत बुमराह ने 6 विकेट लेकर भारतीय गेंदबाजी में अकेले दम दिखाया। क्या यह प्रदर्शन आने वाले दिनों में भी जारी रहेगा? ऑस्ट्रेलियाई टीम की बल्लेबाजी पर एक बार फिर ध्यान दिया गया। क्या यह एक अच्छा संकेत है?

    भारतीय गेंदबाजों का प्रदर्शन: बुमराह का जलवा

    जसप्रीत बुमराह ने ऑस्ट्रेलियाई पारी में 6 विकेट चटका कर एक बार फिर अपनी काबिलियत दिखा दी। मोहम्मद सिराज ने भी 2 अहम विकेट हासिल किए। हालांकि, बाकी गेंदबाजों को बेहतर प्रदर्शन करने की ज़रूरत है।

    भारत की वापसी: क्या होगा अगला कदम?

    अब भारत पर है प्रेशर, क्योंकि उन्हें फॉलोऑन से बचने और फिर मैच को जीतने के लिए बहुत कुछ करने की ज़रूरत है। क्या भारतीय टीम ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के खिलाफ वापसी कर पाएगी? क्या रोहित शर्मा अपनी टीम को जीत के रास्ते पर ले जा पाएंगे?

    बुमराह की वापसी और आकाश दीप की सफलता

    टीम इंडिया में जसप्रीत बुमराह की वापसी ने टीम के आत्मविश्वास को बढ़ाया है। वहीं, आकाश दीप ने अपनी शानदार गेंदबाजी से प्रभावित किया। टीम की उम्मीदें अब इसी प्रकार के प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं। क्या टीम अगले दो दिनों में यह कर दिखा पाएगी?

    निष्कर्ष: रोमांच का समापन

    यह गाबा टेस्ट अभी तक बेहद रोमांचक और अनिश्चित साबित हुआ है। बारिश का लगातार खलल डालना तो और भी सस्पेंस बढ़ा रहा है। आने वाले दो दिन, इस महामुकाबले को किसी भी तरफ मोड़ सकते हैं। क्या भारत ऑस्ट्रेलिया पर फिर से जीत का परचम फहराएगा या ऑस्ट्रेलिया जीत की हैट्रिक को रोक लेगा? यह तय करना बाकी है।

    टेकअवे पॉइंट्स

    • तीसरे दिन बारिश के चलते खेल काफी प्रभावित रहा।
    • ऑस्ट्रेलिया ने पहली पारी में 445 रन बनाए। स्मिथ और हेड के शतकों ने टीम को मजबूत बनाया।
    • भारत की पहली पारी में चार विकेट पर 51 रन। रोहित शर्मा जल्दी ही आउट हो गए।
    • जसप्रीत बुमराह ने 6 विकेट चटकाए।
    • भारत के पास ऑस्ट्रेलिया को हराकर टेस्ट सीरीज में हैट्रिक जीत का मौका है।
  • वन नेशन वन इलेक्शन: क्या यह व्यवहारिक है?

    वन नेशन वन इलेक्शन: क्या यह व्यवहारिक है?

    क्या आप जानते हैं “वन नेशन वन इलेक्शन”? यह एक ऐसा विचार है जो भारत के राजनीतिक परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल सकता है! इस लेख में, हम इस विधेयक के सभी पहलुओं पर गहराई से विचार करेंगे, साथ ही उन अद्भुत संभावनाओं पर भी चर्चा करेंगे जो इससे जुड़ी हैं, और साथ ही उन चुनौतियों पर भी जो हमारे रास्ते में आ सकती हैं। तैयार हो जाइए, क्योंकि यह राजनीतिक हलचल से भरा एक रोमांचक सफर होने वाला है!

    वन नेशन वन इलेक्शन: क्या है यह विधेयक?

    यह विधेयक, जिसे संविधान (129वां संशोधन) विधेयक 2024 के नाम से भी जाना जाता है, एक साथ देशभर में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव कराने का प्रस्ताव रखता है। कल्पना कीजिए: एक ही समय पर, पूरे देश में मतदान! इससे मतदान प्रक्रिया में समय और संसाधनों की भारी बचत होगी। इस विधेयक के साथ, चुनावों के लगातार दौर को अलविदा कहने का वक़्त आ गया है।

    विधेयक के प्रमुख बिंदु

    • एक साथ चुनाव: यह विधेयक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ करने का प्रस्ताव करता है, जिससे समय और धन की बचत होगी।
    • नया अनुच्छेद 82A: इस विधेयक में संविधान में एक नए अनुच्छेद 82A को शामिल करने का प्रस्ताव है, जो एक साथ चुनाव कराने का प्रावधान करेगा।
    • संविधान में संशोधन: इसमें मौजूदा अनुच्छेद 83, 172 और 327 में भी संशोधन किए जाने का प्रस्ताव है ताकि एक साथ चुनाव कराने का रास्ता साफ हो सके।
    • अपवाद: विधेयक में यह प्रावधान भी है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में, राज्य विधानसभाओं का चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ न हो, इसके लिए एक अलग से व्यवस्था है। राष्ट्रपति आदेश जारी कर ऐसे चुनाव करवा सकेंगे।

    वन नेशन वन इलेक्शन के फायदे और नुकसान

    इस क्रांतिकारी विचार के कई फायदे हैं, जैसे कि लागत में कमी, प्रशासनिक सुगमता, और निरंतर राजनीतिक स्थिरता। लेकिन, इसमें चुनौतियाँ भी हैं जिन पर विचार करना ज़रूरी है। क्या हर पार्टी को इसका समर्थन मिलेगा? क्या सभी राज्यों के लिए यह व्यवहारिक होगा? क्या इससे छोटी पार्टियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा? इन सारे सवालों का जवाब जानना बेहद जरूरी है।

    वन नेशन वन इलेक्शन के फायदे:

    • आर्थिक बचत: बार-बार चुनावों से होने वाले खर्च को कम करना।
    • समय की बचत: चुनाव प्रक्रिया को तेज करना और लगातार चुनावी माहौल से बचना।
    • प्रशासनिक सुगमता: चुनाव आयोग और अन्य सरकारी एजेंसियों के लिए काम आसान होगा।
    • निरंतरता: इससे नीति निर्माण की प्रक्रिया और कार्यक्रमों के क्रियान्वयन में स्थिरता आ सकती है।

    वन नेशन वन इलेक्शन के नुकसान:

    • राजनीतिक चुनौतियां: अलग-अलग पार्टियों और राज्यों के बीच मतभेदों को सुलझाना मुश्किल हो सकता है।
    • व्यावहारिक कठिनाइयाँ: इतने बड़े पैमाने पर चुनावों को व्यवस्थित करना एक चुनौतीपूर्ण काम हो सकता है।
    • अल्पकालिक सरकारें: यह कुछ छोटी और क्षेत्रीय पार्टियों को नुकसान पहुँचा सकती हैं।
    • जनता की भागीदारी: जनता की राय को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है, और हो सकता है कि हर कोई इस प्रणाली को सहज ना पाए।

    क्या यह व्यवहारिक है?

    यह एक ऐसा सवाल है जो सभी के मन में है। वन नेशन वन इलेक्शन की अवधारणा बड़ी है और कई चुनौतियों से जूझनी पड़ सकती है। इसमें चुनाव आयोग को अतिरिक्त कार्यभार, समय और संसाधनों की आवश्यकता पड़ेगी।

    चुनाव आयोग की भूमिका

    चुनाव आयोग को इस कार्य के लिए पूरी तैयारी करनी होगी और उसे पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए विशेष योजना बनाने की जरूरत होगी। समय सीमा और प्रशासनिक तंत्र दोनों में बड़ी मात्रा में समायोजन करने होंगे।

    क्या जनता इसे स्वीकार करेगी?

    जनता की राय इस पूरे मसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह महत्वपूर्ण है कि सभी धड़ों और राजनीतिक पार्टियों से उनकी बातें सुनी जाएं। एक जनतांत्रिक व्यवस्था में, जनता की राय सबसे ऊपर है।

    निष्कर्ष: आगे का रास्ता

    यह देखना होगा कि आगे क्या होता है। वन नेशन वन इलेक्शन एक बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव है जिस पर ध्यान देने और विस्तार से विचार करने की आवश्यकता है। हमें जनता की राय को महत्व देते हुए इस मामले को सावधानी से आगे बढ़ाना चाहिए ताकि देश के हितों की रक्षा हो सके।

    Take Away Points:

    • वन नेशन वन इलेक्शन एक क्रांतिकारी विचार है जिसमें कई फायदे और चुनौतियां हैं।
    • इससे समय और धन की बचत हो सकती है, लेकिन इसका कुछ राजनीतिक और व्यावहारिक परिणाम भी हो सकते हैं।
    • इस पर निर्णय लेते समय सभी के हितों पर विचार करना बेहद ज़रूरी है।
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    क्या आप कल्पना कर सकते हैं? दीपावली की खुशियाँ मनाने घर लौट रहे एक शख्स की रास्ते में ही जान चली जाए, और वो भी महज 200 रुपये के लिए! जी हाँ, ऐसा ही दर्दनाक वाकया हुआ जबलपुर में, जहाँ गुजरात से अपने भांजे के साथ घर लौट रहे चंद्रभान रैदास की निर्मम हत्या कर दी गई. यह दिल दहला देने वाली घटना पूरे शहर को हिलाकर रख गई है. आइये जानते हैं इस दिल को झकझोर देने वाली घटना की पूरी कहानी.

    चंद्रभान का सपना टूटा: दीपावली की खुशियां बदल गईं मातम में

    चंद्रभान रैदास, गुजरात में एक साड़ी फैक्ट्री में काम करते थे. दीपावली का त्योहार आ रहा था, और वह अपने भांजे वासु के साथ अपने पुश्तैनी घर उत्तर प्रदेश के बांदा जाने के लिए निकले थे. गुजरात से ट्रेन में सफर करते हुए जबलपुर स्टेशन पर वह कुछ देर के लिए रुके, क्योंकि आगे की ट्रेन यहीं से थी. यह रुकना उनके जीवन का आखिरी पड़ाव बन गया. सोचिये, कैसे उनके दीपावली के सपने धुएँ में मिल गए.

    प्लेटफॉर्म पर हुई निर्मम हत्या: मौत बन गई थी इंतजार

    ट्रेन आने में एक घंटे का समय था. चंद्रभान अपने भांजे के साथ प्लेटफार्म नंबर-6 के बाहर चाय पीने निकले. इसी दौरान, चार बदमाशों ने उनसे शराब के लिए 200 रुपये माँगे. जब चंद्रभान ने मना कर दिया, तो उन बदमाशों ने बेरहमी से चाकूओं से गोदकर उनकी जान ले ली. दिनदहाड़े हुई इस घटना ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है. यह घटना कितनी भयावह थी इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इस वारदात का वीडियो भी सामने आया है.

    गिरफ्तारी और जांच: पुलिस ने दबोचे तीन आरोपियों

    जबलपुर पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपियों की पहचान ओमती इलाके के रहने वाले शातिर बदमाश मूसा उर्फ धनराज, राहुल सोनकर, और विक्की लोधी के रूप में हुई है. एक अन्य नाबालिग भी शामिल था. पुलिस अब मुख्य आरोपी मूसा और धनराज की तलाश में जुटी हुई है. सभी आरोपी पहले से ही कई मामलों में आरोपी हैं और नशे के आदी हैं। इस हत्याकांड में पुलिस की जांच अभी भी जारी है. लेकिन इन सवालों के जवाब ढूंढे जाने हैं:

    • क्या स्टेशन पर सुरक्षा के इतने चूक थे ?
    • क्या ऐसे मामलों को रोकने के लिए कोई कड़ी से कड़ी कार्ययोजना नहीं है?
    • आरोपियों को मिली सज़ा इतनी सख्त होगी कि यह दूसरों को सबक सिखा सके?

    17 साल के भांजे का डर और सहम: बेबस गवाह बना एक बच्चा

    चंद्रभान के 17 वर्षीय भांजे वासु, इस सारी घटना के मूकदर्शक रहे। उन्होंने अपने मामा की निर्मम हत्या अपनी आँखों के सामने देखी. वह पूरी घटना से डरा और सहमा हुआ है. इस बच्चे के मानस पर इस घटना के क्या प्रभाव पड़ेंगे, यह एक चिंता का विषय है। यह एक ऐसा मंजर था जिसने वासु की जिंदगी बदल कर रख दी. ऐसे दर्दनाक मंजर हर बच्चे को झेलने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए.

    Take Away Points

    • जबलपुर में हुई इस घटना से न केवल एक परिवार बल्कि पूरा समाज हिल गया है।
    • कानून और व्यवस्था को बनाए रखने की और कड़ी सुरक्षा और निगरानी की जरूरत है।
    • पुलिस द्वारा समय रहते आरोपियों की गिरफ्तारी सराहनीय कदम है. आशा है दोषियों को सख्त सजा मिलेगी
    • 200 रूपये के लिए किसी की जिन्दगी खत्म होना, एक सोचने वाला विषय है। हमें अपराधों के प्रति सजग रहने और सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने की जरुरत है।
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    गुजरात विश्वविद्यालय के प्रोफेसर दंपत्ति का दिल दहला देने वाला मामला: ट्रिपल तलाक और घरेलू हिंसा

    क्या आप जानते हैं एक ऐसी कहानी जिसमे एक प्रोफेसर पत्नी को अपने ही पति द्वारा 13 साल की शादी के बाद ट्रिपल तलाक दिया गया? और यह सब कैसे हुआ, जानने के लिए पढ़ें यह पूरी कहानी। एक उच्च शिक्षित, प्रतिष्ठित महिला प्रोफेसर जिसकी ज़िन्दगी एक सपने की तरह शुरू हुई थी, लेकिन अचानक बुरे सपने में बदल गई. इस सच्ची घटना के बारे में जानकर आप हैरान हो जाएंगे और सोचने पर मजबूर हो जाएंगे की आज के जमाने में भी ऐसा हो सकता है?

    शुरुआत में प्यार, फिर यातना की दास्तां

    गुजरात के अहमदाबाद में स्थित साइंस कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर और गुजरात यूनिवर्सिटी के उर्दू पर्शियन विभाग में प्रोफेसर महिला की शादी साल 2001 में हुई थी। शुरुआत में सब कुछ अच्छा रहा होगा लेकिन, शादी के कुछ ही दिनों बाद पति का असली चेहरा सामने आया। पति अपनी पत्नी के साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना करता था. पत्नी का आरोप है कि पति, अपनी पत्नी के पैसे से ऐशो-आराम करता था और उसका एटीएम कार्ड और चेकबुक का इस्तेमाल अपनी मर्जी से करता था। यहाँ तक की अपनी बहन की पढ़ाई और शादी का खर्च भी पत्नी के पैसे से चलाता था। इतना ही नहीं, पति की क्रूरता इतनी बढ़ गई की उसने अपनी पत्नी को लगातार मानसिक और शारीरिक यातना देनी शुरू कर दी।

    बेटियों का जन्म और बढ़ती यातना

    प्रोफेसर पत्नी के पहले बच्चे का जन्म होने के बाद, जब वह दूसरी बार गर्भवती हुई, तो पति ने कहा कि अगर दूसरी बच्ची हुई तो वो उसे और बच्चों को जान से मार देगा। दूसरी बच्ची होने पर प्रताड़ना और बढ़ गई। तीसरी बार गर्भवती होने पर भी यही धमकी दोहराई गई। हालांकि, तीसरे बच्चे के रूप में एक बेटा हुआ, लेकिन पति का अत्याचार कम नहीं हुआ। छोटी-छोटी बातों पर गाली-गलौज, शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना जारी रही। पति कहता था, “तुम मुझे पसंद नहीं हो, तुम मुझे अच्छी नहीं लगती हो, तुम मेरे लिए बोझ बन गई हो, मुझे दूसरी शादी करनी है, तो तलाक के पेपर पर हस्ताक्षर करके तलाक दे दो।”

    2014 में नौकरी मिलने पर अत्याचार और बढ़ा

    साल 2014 में, जब पत्नी को गुजरात यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की नौकरी मिली, तो पति और भी ज़्यादा आक्रामक हो गया। वह काम पर भी उसे नीचा दिखाता और अपमानित करता था। 2017 में पति ने पत्नी और बच्चों को छोड़ दिया लेकिन कोरोना महामारी के दौरान वह वापस लौटा, और फिर से सबको छोड़कर चला गया. 2023 में दोस्तों के समझाने पर वह फिर वापस आया, पर फिर वही अत्याचार, गाली-गलौज और मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना शुरू हो गई।

    ट्रिपल तलाक और पुलिस में शिकायत

    अक्टूबर 2023 में, पति एक और महिला के साथ रहने लगा। जब पत्नी अपनी बेटी के साथ उससे मिलने गई तो पति ने वहीं पर, दूसरी महिला और कुछ गवाहों के सामने, अपनी पत्नी को तीन बार तलाक देकर ट्रिपल तलाक दे दिया. पहले तो पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई, पर बाद में पति के फिर से अलग होने के बाद गोमतीपुर पुलिस थाने में प्रोफेसर पत्नी ने एफआईआर दर्ज करवाई, और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    टेक अवे पॉइंट्स

    • यह घटना भारत में घरेलू हिंसा और ट्रिपल तलाक के महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर करती है।
    • महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना बहुत ज़रूरी है।
    • ऐसे मामलों में पुलिस और कानून का सहारा लेना चाहिए।
    • महिलाओं को चाहिए कि घरेलू हिंसा को बर्दाश्त न करें और मदद लें।