जोधइया बाई: आदिवासी कला की धरोहर का अंत
आदिवासी चित्रकला की दुनिया में एक सितारे का डूबना, एक युग का अंत! 86 वर्षीय जोधइया बाई, जिन्हें ‘अम्मा’ के नाम से भी जाना जाता था, अब हमारे बीच नहीं रहीं. उनके निधन से न केवल एक महान कलाकार, बल्कि आदिवासी कला की एक अनूठी धरोहर भी समाप्त हो गई है. यह खबर सुनकर हर किसी के दिल में गम है, आइये जानते हैं इस महान कलाकार के बारे में.
अद्भुत कला और अंतर्राष्ट्रीय पहचान
जोधइया बाई उमरिया जिले के लोढ़ा गांव की रहने वाली थीं. उन्होंने अपने अद्भुत चित्रों से न सिर्फ़ भारत, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई. उनकी कला में आदिवासी जीवन की झलक साफ़ झलकती थी – वन, पहाड़, नदियाँ, और आदिवासी जीवन की रौनक. इन चित्रों में उनके अद्भुत कौशल और अनोखे दृष्टिकोण का पता चलता है. 2023 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था, जो उनकी प्रतिभा और योगदान की पहचान है. लेकिन इस सम्मान से भी बढ़कर उनकी कला है जो दुनिया में हमेशा जिंदा रहेगी. ये ख़बर इस लिए भी और ज़्यादा दुखदायी है की वह कला को इतना प्यार करती थी, यह सब उनके चित्रों को देखने से पता चलता था.
विदाई: एक शोकमय अवसर
जोधइया बाई का अंतिम संस्कार पूरे सम्मान के साथ लोढ़ा गांव में हुआ. जिला कलेक्टर धरणेंद्र कुमार जैन, पुलिस अधीक्षक निवेदिता नायडू, अन्य अधिकारी, राजनीतिक नेता और कला प्रेमी सभी उनकी आखिरी यात्रा में शामिल हुए. इस क्षण ने यह याद दिलाया की कितनी बड़ी कलाकार देश ने गँवा दी है.
शोक संदेश: एक राष्ट्र की श्रद्धांजलि
जोधइया बाई के निधन पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा शोक व्यक्त किया. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जोधइया बाई के निधन से देश ने एक ऐसी कलाकार को खो दिया, जिसने पूरा जीवन जनजातीय संस्कृति और कला को जीवंत रखा. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी उन्हें पद्मश्री पुरस्कार देकर सम्मानित किया था. इन सम्मानों और शोक संदेशों से ज़ाहिर होता है कि कितना बड़ा योगदान था जोधइया बाई का देश के प्रति और कला जगत के प्रति.
जोधइया बाई की विरासत: कला की ज्योति
जोधइया बाई के निधन से उत्पन्न शून्य को हमेशा नहीं भरा जा सकेगा, लेकिन उनकी कला की ज्योति सदैव हमारे साथ रहेगी. उनकी विरासत यह है कि हम उनकी चित्रकला के माध्यम से आदिवासी कला और संस्कृति की रक्षा करते रहे. हम उनकी रचनाओं के माध्यम से उनकी कला और संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने में सक्षम होंगे. उनके चित्र एक ज़िन्दगीभर के काम की तरह हैं.
Take Away Points
- जोधइया बाई, एक महान आदिवासी कलाकार, का निधन हुआ.
- उन्होंने आदिवासी कला को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई.
- 2023 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया.
- उनका अंतिम संस्कार सम्मान के साथ किया गया.
- उनके निधन पर नेताओं और कला प्रेमियों ने शोक व्यक्त किया.
- उनकी विरासत को आगे बढ़ाना हम सबकी जिम्मेदारी है।









