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  • मथुरा आश्रय गृह मौत: पांच महीने की बच्ची की मौत से हड़कंप

    मथुरा आश्रय गृह मौत: पांच महीने की बच्ची की मौत से हड़कंप

    पांच महीने की बच्ची की मौत: सरकारी आश्रय गृह में हुई दर्दनाक मौत, मथुरा प्रशासन जाँच में जुटा

    क्या आप जानते हैं कि मथुरा के एक सरकारी आश्रय गृह में रहने वाली मात्र पांच महीने की एक मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई? इस घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। बच्ची की मौत से जुड़े कई सवाल उठ रहे हैं और प्रशासन मामले की जाँच में जुटा हुआ है। इस घटना ने एक बार फिर से सरकारी आश्रय गृहों की व्यवस्थाओं पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। आइये, जानते हैं इस पूरी घटना के बारे में विस्तार से।

    घटनाक्रम:

    यह घटना मथुरा जिले के एक सरकारी आश्रय गृह में हुई। पांच महीने की बच्ची पिछले कुछ महीनों से इसी आश्रय गृह में रह रही थी। मंगलवार की रात को बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उसे आगरा रेफर कर दिया। परन्तु, आगरा पहुंचने से पहले ही रास्ते में बच्ची की मौत हो गई। बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

    प्रशासन की कार्रवाई:

    इस घटना के बाद मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट पुलकित खरे ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने कहा है कि घटना की मजिस्ट्रेट जांच कराई जाएगी, ताकि मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों को अपेक्षा की जा रही है कि वो पूछताछ के निष्कर्षों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी आश्रय गृहों में बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    सरकारी आश्रय गृहों की सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर चिंता:

    इस घटना से एक बार फिर यह सवाल उठता है कि क्या सरकारी आश्रय गृह बच्चों के लिए सुरक्षित हैं? क्या इन गृहों में बच्चों को उचित स्वास्थ्य सेवाएँ मिल पाती हैं? क्या इन गृहों में बच्चों की देखभाल के लिए पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन मौजूद हैं? ऐसी घटनाएँ यह बताती हैं कि अभी भी इन क्षेत्रों में सुधार की काफी गुंजाइश है। सरकार को इन आश्रय गृहों की निगरानी और व्यवस्थाओं में सुधार करने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएँ न हों।

    बच्चों की देखभाल के लिए सुझाव:

    • सभी सरकारी आश्रय गृहों में नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करें।
    • बच्चों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती करें।
    • बच्चों के लिए पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराएँ।
    • आश्रय गृहों की नियमित निगरानी करें।

    मौत का कारण अब भी रहस्य:

    फिलहाल, बच्ची की मौत का सही कारण अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। प्राथमिक जाँच में डॉक्टरों ने बच्ची के फेफड़ों में संक्रमण की आशंका जताई है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही सामने आ पाएगा। जांच जारी है, और इससे सच्चाई सामने आएगी और उचित कदम उठाए जा सकेंगे।

    आगे क्या?

    इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, सरकार और प्रशासन को इस पर त्वरित कार्रवाई करने की आवश्यकता है। आश्रय गृहों में सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के मानकों में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समुचित प्रबंधन करना बहुत ज़रूरी है। समाज में इस तरह की दुखद घटनाएं लोगों के मन में सरकारी व्यवस्थाओं के प्रति सवाल खड़ा करती हैं, जिन पर तुरंत ध्यान दिया जाना आवश्यक है।

    टेक अवे पॉइंट्स:

    • मथुरा में एक पांच महीने की बच्ची की सरकारी आश्रय गृह में मौत हो गई।
    • प्रशासन ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।
    • बच्ची की मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
    • इस घटना ने सरकारी आश्रय गृहों में सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
    • सरकार को आश्रय गृहों की निगरानी और व्यवस्था में सुधार करने की जरूरत है।
  • कर्क राशिफल: चुनौतियों का सामना और सफलता का मार्ग

    कर्क राशिफल: चुनौतियों का सामना और सफलता का मार्ग

    कर्क राशिफल: तनाव, संघर्ष और आशा की किरण

    क्या आप कर्क राशि के हैं और जीवन में आ रही चुनौतियों से जूझ रहे हैं? क्या लगातार परेशानियाँ आपको मानसिक तनाव में डाल रही हैं? अगर हाँ, तो घबराएँ नहीं! यह लेख आपके लिए है, जहाँ हम कर्क राशि के जातकों के लिए वर्तमान समय में आ रही चुनौतियों, उनके समाधान और उज्जवल भविष्य की ओर ले जाने वाले मार्ग पर प्रकाश डालेंगे। हम जानेंगे कि कैसे आप अपने जीवन में आ रहे तूफ़ानों का सामना कर सकते हैं और एक शांत, समृद्ध जीवन जी सकते हैं।

    मानसिक तनाव और समाधान

    कर्क राशि के जातकों के लिए वर्तमान समय मानसिक तनाव से भरा हुआ है। नौ नौ स्वॉर्ड कार्ड इंगित करता है कि लगातार आ रही परेशानियों ने आपको मानसिक रूप से काफी प्रभावित किया है। छोटी-छोटी समस्याएं आपके मन में बड़ा रूप ले चुकी हैं, जिससे निराशा और नकारात्मकता का भाव जाग रहा है। याद रखें, आप अकेले नहीं हैं। बहुत से लोग ऐसे ही संघर्षों से गुज़रते हैं। इसलिए, यह ज़रूरी है कि आप अपनी मानसिक शांति के लिए ध्यान दें। ध्यान, योग, और प्राणायाम जैसे तरीके आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। अपनी समस्याओं को हल करने के लिए एक योजना बनाएँ। याद रखें धैर्य और संयम से ही सफलता मिलती है।

    आर्थिक चुनौतियाँ और उनका सामना

    आर्थिक समस्याएं भी कर्क राशि के जातकों को परेशान कर रही हैं। कार्यक्षेत्र में आत्मविश्वास की कमी से कार्य में सफलता नहीं मिल पा रही है और धन की आवक कम हो रही है। कर्ज की अधिकता भी चिंता का विषय बन सकती है। ऐसे में यह बेहद ज़रूरी है कि आप अपने खर्चों पर नियंत्रण रखें और अपने बजट का ध्यान रखें। अतिरिक्त आय के स्त्रोत तलाशें और बचत पर ध्यान दें। याद रखें, कि समस्याओं का समाधान किसी जादू से नहीं होगा, बल्कि आपके प्रयासों और योजनाबद्ध कार्यों से ही होगा। अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए धैर्य और मेहनत से काम लें।

    रिश्तों में संतुलन और सामंजस्य

    रिश्तों में भी कुछ उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। प्रिय की दखलअंदाजी से आप थोड़ी दूरी बना सकते हैं। परंतु यह समय अपने परिवार के साथ समय बिताने का है। अपने प्रियजनों के साथ अधिक समय बिताने का प्रयास करें, उनसे अपनी भावनाओं को साझा करें और अपने रिश्तों को मजबूत बनाने में समय लगाएँ। याद रखें, सच्चे रिश्ते संघर्षों को पार करके ही मजबूत बनते हैं। मित्रों के साथ लंबे समय से टली हुई यात्रा की योजना को पूरा करने का प्रयास करें। यह आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होगा।

    स्वास्थ्य पर ध्यान और आत्म-देखभाल

    स्वास्थ्य पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है। मानसिक तनाव और आर्थिक समस्याओं का आपके शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें। ध्यान, योग और प्राणायाम जैसी तकनीकों से आप मानसिक शांति और शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्त कर सकते हैं। अपने शरीर को सुनें और ज़रूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।

    Take Away Points

    • कर्क राशि के जातकों के लिए वर्तमान समय चुनौतियों से भरा है, परंतु निराश होने की आवश्यकता नहीं है।
    • मानसिक शांति के लिए ध्यान, योग और प्राणायाम का प्रयोग करें।
    • आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए बजट बनाएँ और बचत पर ध्यान दें।
    • रिश्तों में सामंजस्य बनाए रखने के लिए संवाद और समय महत्वपूर्ण है।
    • अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएँ।
  • डिजिटल डब्बा ट्रेडिंग: ऑनलाइन ठगी का नया रूप और इससे बचाव

    डिजिटल डब्बा ट्रेडिंग: ऑनलाइन ठगी का नया रूप और इससे बचाव

    डिजिटल डब्बा ट्रेडिंग: ऑनलाइन ठगी का नया रूप?

    क्या आप जानते हैं कि ऑनलाइन दुनिया में एक नया ठगी का जाल बिछाया जा रहा है, जो आपके बैंक बैलेंस को चंद मिनटों में साफ कर सकता है? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं डिजिटल डब्बा ट्रेडिंग की, जो कि पारंपरिक डब्बा ट्रेडिंग का ही एक ऑनलाइन और बेहद खतरनाक रूप है। इस लेख में, हम आपको इस खतरनाक धोखाधड़ी के बारे में बताएंगे और आपको इससे बचने के तरीके सिखाएंगे। क्या आप तैयार हैं अपनी जेब को सुरक्षित रखने के लिए?

    डब्बा ट्रेडिंग क्या है?

    डब्बा ट्रेडिंग एक गैर-कानूनी तरीका है जिसमें शेयर बाजार में बिना वास्तविक ट्रेडिंग किए, मुनाफा कमाने का झांसा दिया जाता है। यह एक प्रकार का सट्टा है जहाँ एक ऑपरेटर ट्रेडिंग का दावा करता है परन्तु वास्तव में किसी एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं करता है। यह अविश्वसनीय रूप से जोखिम भरा है क्योंकि इसमें आपका पैसा गायब हो सकता है और कोई कानूनी सुरक्षा नहीं है।

    डिजिटल डब्बा ट्रेडिंग का खेल कैसे चलता है?

    डिजिटल डब्बा ट्रेडिंग में, धोखेबाज आकर्षक वेबसाइटें और मोबाइल ऐप्स बनाते हैं जो नामी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स की नकल करते हैं। वे सोशल मीडिया जैसे WhatsApp, Telegram और Facebook पर विज्ञापन देकर निवेशकों को आकर्षित करते हैं। शुरूआत में, ये धोखेबाज कम निवेश पर उच्च रिटर्न का वादा करते हैं, जिससे निवेशकों का विश्वास जीता जाता है। लेकिन जैसे ही निवेशकों का पैसा इकट्ठा होता है, वेबसाइट या ऐप गायब हो जाते हैं, और निवेशकों के पैसे का कोई पता नहीं लगता है।

    कैसे पहचाने डिजिटल डब्बा ट्रेडिंग के जाल को?

    यहाँ कुछ खास बातें हैं जिन पर ध्यान देकर आप इस जाल से बच सकते हैं:

    • अत्यधिक रिटर्न का वादा: यदि कोई प्लेटफ़ॉर्म असामान्य रूप से उच्च रिटर्न का वादा करता है, तो सावधान हो जाएं। शेयर बाज़ार में जोखिम होता है और तुरंत अमीर बनने का कोई गारंटी नहीं होती।
    • अज्ञात या गैर-नियमित वेबसाइट: अगर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की वेबसाइट या ऐप ऑफिशियल ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं है, तो वह संदिग्ध हो सकता है।
    • सोशल मीडिया पर विज्ञापन: सोशल मीडिया पर आने वाले ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के विज्ञापनों पर ध्यान से विचार करें और उनकी जाँच ज़रूर करें।
    • अनियमित बैंक अकाउंट: अगर पैसा भेजने के लिए किसी अपरिचित या अज्ञात बैंक खाते का उपयोग करने के लिए कहा जा रहा है तो वह संदिग्ध हो सकता है।

    डिजिटल डब्बा ट्रेडिंग से कैसे बचें?

    • हमेशा केवल विश्वसनीय और विनियमित ब्रोकरेज फ़र्म के साथ ट्रेड करें।
    • किसी भी अनजान वेबसाइट या ऐप पर निवेश करने से पहले पूरी तरह से उसकी जाँच करें और इसकी समीक्षाएँ देखें।
    • सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले किसी भी प्लेटफ़ॉर्म पर तुरंत निवेश न करें।
    • अत्यधिक रिटर्न का वादा करने वाले दावों पर विश्वास न करें।
    • किसी भी निवेश निर्णय से पहले वित्तीय सलाहकार से बात करें।

    निष्कर्ष

    डिजिटल डब्बा ट्रेडिंग एक बेहद खतरनाक धोखाधड़ी है जिससे आपका पैसा गायब हो सकता है। यह आवश्यक है कि हम सावधान रहें और इस तरह के जाल से बचने के लिए उचित कदम उठाएँ। यदि आप ऑनलाइन ट्रेडिंग करने की योजना बना रहे हैं, तो केवल विश्वसनीय और नियमित प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करें और अपने निवेश से पहले पूरी तरह से जाँच-पड़ताल कर लें।

    टेक अवे पॉइंट्स

    • डिजिटल डब्बा ट्रेडिंग एक खतरनाक धोखाधड़ी है।
    • केवल विनियमित और विश्वसनीय प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करें।
    • उच्च रिटर्न के वादों से सावधान रहें।
    • निवेश करने से पहले पूरी तरह से जाँच करें।
    • किसी भी संदेह की स्थिति में एक वित्तीय सलाहकार से संपर्क करें।
  • मथुरा में सरकारी सेल्टर होम में बच्ची की मौत: जांच के आदेश

    मथुरा में सरकारी सेल्टर होम में बच्ची की मौत: जांच के आदेश

    पाँच महीने की बच्ची की मौत: मथुरा में सरकारी सेल्टर होम की लापरवाही आई सामने

    क्या आप जानते हैं कि मथुरा के एक सरकारी सेल्टर होम में रहने वाली मात्र पाँच महीने की एक मासूम बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई? यह घटना पूरे इलाके में सदमे की लहर दौड़ा गई है और लोगों में आक्रोश है। इस घटना ने एक बार फिर से सरकारी संस्थानों में बच्चों की देखभाल और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आइये जानते हैं इस पूरे मामले के बारे में विस्तार से।

    घटना का विवरण

    मंगलवार की रात को बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि डॉक्टरों ने उसे आगरा रेफर कर दिया। मगर, आगरा पहुंचने से पहले ही रास्ते में बच्ची की मौत हो गई। बच्ची की मौत से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है।

    प्रशासन की कार्रवाई

    इस घटना के बाद प्रशासन हरकत में आया है। मथुरा के जिला मजिस्ट्रेट पुलकित खरे ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। जांच में पता लगाया जाएगा कि क्या बच्ची की मौत लापरवाही या किसी अन्य कारण से हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है ताकि मौत का सही कारण पता चल सके। डॉक्टरों के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, बच्ची के फेफड़ों में संक्रमण हो सकता है।

    सरकारी सेल्टर होमों की सुरक्षा और देखभाल पर उठ रहे सवाल

    यह घटना एक बार फिर सरकारी सेल्टर होमों में बच्चों की सुरक्षा और देखभाल के लिए बनाए गए नियमों और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाती है। क्या ये संस्थान बच्चों के लिए सुरक्षित हैं? क्या इनमें बच्चों की देखभाल के लिए पर्याप्त इंतज़ाम हैं? इन सवालों का जवाब ढूंढना ज़रूरी है। इस घटना के बाद बच्चों की देखभाल करने वाले सभी संस्थानों को अपने काम करने के तरीके पर पुनर्विचार करने की ज़रूरत है।

    आगे क्या होगा?

    जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि बच्ची की मौत के पीछे क्या कारण था। यदि लापरवाही या किसी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है, तो दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने एक बार फिर से सरकारी सेल्टर होमों में बच्चों की सुरक्षा के महत्व पर ज़ोर दिया है। हमें यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि सभी बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण मिले।

    टेक अवे पॉइंट्स

    • पाँच महीने की बच्ची की मौत से मथुरा में शोक की लहर दौड़ गई है।
    • प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।
    • पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है।
    • घटना ने सरकारी सेल्टर होमों में बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं।
    • दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठ रही है।
  • सिंह राशिफल: जीवन की चुनौतियों को पार करने का रहस्य

    सिंह राशिफल: जीवन की चुनौतियों को पार करने का रहस्य

    सिंह राशिफल: जीवन के चुनौतीपूर्ण रास्तों पर कैसे आगे बढ़ें?

    क्या आप सिंह राशि के हैं और जीवन में कुछ कठिन मोड़ों का सामना कर रहे हैं? क्या आपको सही रास्ता चुनने में परेशानी हो रही है? अगर हाँ, तो आप बिल्कुल अकेले नहीं हैं! यह लेख सिंह राशि के जातकों के लिए जीवन की चुनौतियों से निपटने और सफलता प्राप्त करने के तरीके बताएगा। हम आपके लिए एक व्यापक राशिफल लेकर आए हैं जो आपके जीवन के विभिन्न पहलुओं, जैसे करियर, स्वास्थ्य, वित्त और रिश्तों पर प्रकाश डालेगा।

    करियर में सफलता की राह

    कार्ड्स के अनुसार, सिंह राशि के जातकों के लिए सही रास्ते का चुनाव चुनौतीपूर्ण हो सकता है। लेकिन घबराएँ नहीं! एक अनुभवी व्यक्ति का मार्गदर्शन इस चुनौती को पार करने में मदद कर सकता है। कई बार, अपने स्वभाव की पारंपरिकता को बदलने की आवश्यकता होती है। जमा-जमाए रास्तों पर चलने के बजाय, नए विचारों को अपनाने से आप अपने व्यवसाय को नई ऊँचाइयों पर ले जा सकते हैं। थोड़ा जोखिम लेने से आपको सफलता मिल सकती है। अगर कोई काम करने का सही समय नहीं लगता, तो धैर्य रखें और थोड़ा इंतज़ार करें। याद रखें, कठिन परिश्रम और लगन से ही सफलता मिलती है।

    स्वास्थ्य पर ध्यान दें

    अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दें। अगर आपको नींद नहीं आ रही है, तो योगा और ध्यान साधना को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। एक स्वस्थ शरीर और मन सफल जीवन के लिए आवश्यक हैं। यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और नियमित रूप से व्यायाम करें। तनाव से बचने के उपाय भी करें।

    वित्तीय स्थिरता बनाए रखें

    आपकी आर्थिक स्थिति फिलहाल अच्छी चल रही है, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है। कर्ज से संबंधित चिंताएँ आपको परेशान कर सकती हैं, इसलिए अपने खर्चों की योजना बनाएँ और बचत करें। निवेश करने से पहले अच्छी तरह से रिसर्च करें। अपने पैसे का सही प्रबंधन आपके भविष्य की सुरक्षा करेगा।

    रिश्तों को मजबूत बनाएँ

    अपने रिश्तों में आ रही परेशानियों को सुलझाने का प्रयास करें। अपने परिवार के साथ समय बिताएँ और उन्हें महत्व दें। रिश्तों में आपसी समझ और संचार बहुत जरूरी है। खुलेपन और ईमानदारी से अपने रिश्तों को और मजबूत बना सकते हैं।

    टेक अवे पॉइंट्स

    • सिंह राशि के जातकों के लिए जीवन की चुनौतियों का सामना करना सामान्य है।
    • अनुभवी व्यक्तियों का मार्गदर्शन और नये विचारों को अपनाना सफलता की कुंजी है।
    • स्वास्थ्य पर ध्यान देना और वित्तीय स्थिरता बनाए रखना जरुरी है।
    • रिश्तों में आपसी समझ और संचार महत्वपूर्ण है।

    यह राशिफल केवल एक मार्गदर्शन है, और आपकी व्यक्तिगत परिस्थितियाँ भिन्न हो सकती हैं। हमेशा सकारात्मक रहें और जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करें!

  • पाटण डमी परीक्षार्थी मामले में 7 साल बाद सजा

    पाटण डमी परीक्षार्थी मामले में 7 साल बाद सजा

    पाटण में डमी परीक्षार्थियों को मिली सजा: 7 साल बाद हुआ न्याय!

    क्या आप जानते हैं कि गुजरात के पाटण में सात साल पहले हुए एक चौंकाने वाले डमी कैंडिडेट मामले में आखिरकार न्याय हुआ है? जी हाँ, इस दिलचस्प मामले में तीन आरोपियों को एक साल की सज़ा सुनाई गई है! यह मामला 2018 में लॉर्ड कृष्णा साइंस स्कूल के परीक्षा केंद्र से जुड़ा है, जहां तीन डमी परीक्षार्थियों ने गुजरात शिक्षा बोर्ड की कक्षा 10 की परीक्षा दी थी। क्या हुआ इस केस में? आइये जानते है विस्तार से!

    सात साल लंबी कानूनी लड़ाई का अंत

    यह मामला साल 2018 का है जब पाटण के लॉर्ड कृष्णा साइंस स्कूल में तीन युवकों ने दूसरे छात्रों की जगह परीक्षा दी थी। स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बाद से यह मामला स्थानीय न्यायिक अदालत में लंबित था। सात साल बाद, अदालत ने तीनों आरोपियों, गोविंद ठाकोर, आसिफ मालेक और भरत चौधरी को एक-एक साल के साधारण कारावास की सज़ा सुनाई है, साथ ही 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने पर उन्हें दो महीने की अतिरिक्त सज़ा काटनी होगी। यह फैसला वास्तव में कानून के लंबे इंतज़ार के बाद आया है और एक सबक भी बन गया है।

    धोखाधड़ी का मामला साफ तौर पर साबित हुआ

    न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि दोनों पक्षों के बयानों पर गौर करने के बाद, साबित हुआ है कि आरोपियों ने नकल करने की नीयत से परीक्षा में बैठे छात्रों की जगह परीक्षा दी थी। इससे स्कूल और परीक्षा बोर्ड की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुँचा है। अदालत का मानना है कि इस प्रकार के अपराधों में बढ़ोतरी को देखते हुए, आरोपियों को प्रोबेशन का लाभ नहीं दिया जा सकता और समाज के लिए एक उदाहरण स्थापित करना जरुरी है।

    सरकारी वकील का जोरदार तर्क

    सरकारी वकील ने अदालत में जोरदार तर्क रखा और बताया कि आरोपियों ने गलत नाम और दस्तावेजों के साथ दूसरे छात्रों की जगह परीक्षा दी थी। उन्होंने जानबूझकर धोखाधड़ी की और दस्तावेजों में छेड़छाड़ की। वकील के दावों से अदालत पूरी तरह सहमत हुई।

    सज़ा का संदेश : ईमानदारी ही सफलता की कुंजी!

    इस मामले में मिली सजा न केवल अपराधियों के लिए बल्कि सभी परीक्षा देने वालों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। परीक्षा में ईमानदारी बरतना ही सफलता का सबसे सही तरीका है। धोखाधड़ी और नकल से दूर रहना चाहिए।

    परीक्षा में ईमानदारी : एक जरूरी विचार

    कक्षा 10 की परीक्षा छात्रों के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होती है और डमी कैंडिडेट द्वारा धोखाधड़ी का मामला परीक्षा प्रणाली की गंभीरता को दर्शाता है। शिक्षा बोर्ड को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और कड़े कदम उठाने चाहिए। स्कूलों को भी जांच प्रणाली को और सख्त बनाने की आवश्यकता है।

    अभिभावकों की भूमिका अहम!

    छात्रों के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण है उनके अभिभावकों का मार्गदर्शन। अभिभावकों को बच्चों को ईमानदारी, मेहनत और कड़ी पढ़ाई से सफलता पाने का प्रोत्साहन देना चाहिए।

    आगे का रास्ता

    इस मामले से यह पता चलता है कि शिक्षा प्रणाली में सुधार और धोखाधड़ी रोकने के लिए सख्त कदमों की जरूरत है। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि डमी परीक्षा देने के मामलों की जांच कैसे की जाती है। इससे यह पता चलता है कि अपराध में संलिप्त लोगों को उनके कार्यों का जवाब देना होता है, चाहे समय कितना ही लग जाए।

    टेकअवे पॉइंट्स:

    • सात साल बाद पाटण के डमी कैंडिडेट मामले में तीन आरोपियों को एक साल की सजा।
    • न्यायालय ने धोखाधड़ी के आरोप को सही पाया।
    • शिक्षा प्रणाली में ईमानदारी बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर।
    • अभिभावकों और स्कूलों की भूमिका अहम।
  • सात साल के मासूम की हत्या: पड़ोसी ने की निर्मम हत्या

    सात साल के मासूम की हत्या: पड़ोसी ने की निर्मम हत्या

    सात साल के मासूम की हत्या: पड़ोसी ने की निर्मम हत्या, जानिए क्या है पूरा मामला

    उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है जहाँ एक 7 साल के मासूम की उसके ही पड़ोसी ने निर्मम हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। आरोपी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने बच्चे को इसलिए मारा क्योंकि उसके पड़ोसी उसका और उसकी पत्नी का बच्चा न होने के लिए चिढ़ाते थे।

    क्रूरता की पराकाष्ठा: 7 साल के मासूम की गला दबाकर हत्या

    यह दिल दहला देने वाली घटना मंगलवार को हुई जब आरोपी, दीपू नाम का व्यक्ति, 7 साल के मासूम अरुण को अपने साथ खेत में ले गया और उसका गला दबाकर हत्या कर दी। आरोपी की पत्नी से शादी के 3 साल बाद भी संतान नहीं हुई, जिसके कारण पड़ोसी उसे और उसकी पत्नी को चिढ़ाते थे। आरोपी ने बताया कि कई झाड़-फूंक करने वालों ने पड़ोसियों पर ही टोटका करने का आरोप लगाया था। यह सुनकर आरोपी ने गुस्से में आकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया।

    क्या थे हत्या के पीछे के कारण?

    पुलिस द्वारा की जा रही पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसके पड़ोसी मेलेराम और उनकी पत्नी पूनम उसे और उसकी पत्नी को निरंतर चिढ़ाते थे, क्योंकि उनके कोई संतान नहीं थी। मृतक मासूम अरुण मेलेराम और पूनम का बेटा था, यह एक और दुर्भाग्यपूर्ण पहलू है। इसके अलावा आरोपी ने यह भी स्वीकार किया कि झाड़-फूंक करने वालों ने बताया था कि उसके पड़ोसियों ने टोटका किया है। उसने आरोप लगाया कि उसके पड़ोसियों ने ही बच्चा न होने की वजह से उसका और उसकी पत्नी का मजाक उड़ाते थे।

    पुलिस की तत्परता: आरोपी की गिरफ्तारी

    श्रावस्ती पुलिस और एसओजी टीम ने घटना के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी दीपू को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाए और पूरे मामले की गहन जाँच की। घटना के बाद से ही पुलिस लगातार इस मामले की जांच में जुटी थी। दीपू ने घटना के बाद भागने की कोशिश की थी लेकिन पुलिस की सूझबूझ से उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस की जाँच में क्या हुआ?

    सीओ भिनगा ने बताया कि दस दिसंबर को हरदत्त नगर गिरन्ट थाना क्षेत्र में सात वर्षीय बालक की हत्या हुई थी। पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया था। गहन जाँच के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पुलिस की सराहनीय कार्यवाही ने पूरे क्षेत्र में कानून व्यवस्था को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    मीडिया की भूमिका: घटना पर जनता का आक्रोश

    इस घटना के बाद से ही सोशल मीडिया पर लोगों ने इस जघन्य अपराध को लेकर अपनी नाराजगी ज़ाहिर की है। लोग आरोपी को कड़ी सजा देने की माँग कर रहे हैं। इस तरह की घटनाएँ समाज में बढ़ती हिंसा और क्रूरता की ओर इशारा करती हैं। इस घटना ने एक बार फिर से बच्चों की सुरक्षा और बाल संरक्षण पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    घटना से मिलने वाले सबक

    यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमें बच्चों की सुरक्षा के लिए और जागरूक होने की आवश्यकता है। हमें बच्चों को किसी भी प्रकार के खतरे से बचाने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए। साथ ही, सामाजिक बंधन मजबूत करके ही हम ऐसी घटनाओं को रोक सकते हैं।

    Take Away Points

    • सात साल के मासूम की निर्मम हत्या ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैलाया है।
    • आरोपी पड़ोसी ने बच्चे को गला दबाकर मार डाला।
    • पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
    • यह घटना बच्चों की सुरक्षा और बाल संरक्षण पर सवाल खड़े करती है।
  • अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी: शाहरुख़ ख़ान से जुड़ी है चौंकाने वाली समानता!

    अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी: शाहरुख़ ख़ान से जुड़ी है चौंकाने वाली समानता!

    अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी और शाहरुख़ ख़ान से जुड़ी समानता: क्या है पूरा मामला?

    यह खबर सुनकर हर कोई हैरान रह गया होगा! तेलुगु सिनेमा के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन को हाल ही में हैदराबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जी हाँ, आपने बिल्कुल सही सुना! ‘पुष्पा 2’ के अभिनेता अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी के बाद से देश भर में खलबली मची हुई है। उनके परिवार और चाहने वालों में भारी निराशा व्याप्त है। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि अल्लू अर्जुन के वकील ने उनकी पैरोकारी करते हुए बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख़ खान का जिक्र किया। आइए जानते हैं, पूरा मामला क्या है, और दोनों अभिनेताओं के केस में क्या समानताएं हैं।

    हैदराबाद में मची भगदड़ और अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी

    यह घटना हैदराबाद के संध्या थिएटर में घटी, जहाँ ‘पुष्पा 2’ की एक विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई थी। अल्लू अर्जुन के आने की खबर सुनकर, उनके प्रशंसकों की भारी भीड़ थिएटर के बाहर जमा हो गई। इस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज तक का सहारा लेना पड़ा। इस भीड़भाड़ के कारण एक भयानक भगदड़ मच गई जिसमे एक 35 वर्षीय महिला, रेवती की दर्दनाक मौत हो गई।

    इस घटना के बाद महिला के परिवार ने अल्लू अर्जुन, उनकी सुरक्षा टीम, और थिएटर के प्रबंधन के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 105 और 118 (1) के तहत अल्लू अर्जुन पर मामला दर्ज किया गया। इस दुखद घटना के बाद अल्लू अर्जुन ने गहरा शोक जताया और पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद देने की बात कही।

    शाहरुख़ ख़ान का केस और कानूनी लड़ाई

    अल्लू अर्जुन के वकील ने अदालत में शाहरुख़ खान के एक पुराने केस का उदाहरण देते हुए कहा की, ‘रईस’ फिल्म के प्रमोशन के दौरान हुई भगदड़ में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी जिसमे शाहरुख़ पर मामला दर्ज हुआ था लेकिन बाद में वह बरी हो गए। दोनों ही मामलों में अहम् बात यह रही की अल्लू अर्जुन और शाहरुख़ दोनों की उपस्थिति के कारण भगदड़ मची थी, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से उनकी किसी की मौत के लिए जिम्मेदारी नहीं थी।

    शाहरुख़ खान पर आईपीसी की धारा 336, 337 और 338, तथा रेलवे अधिनियम 1989 के तहत मामला दर्ज किया गया था। यह विवाद तब और बढ़ गया जब एक नेता ने शाहरुख़ खान के विरुद्ध एक मामला दर्ज करवाया। इस केस में, सोशल मीडिया पर भी खूब हंगामा हुआ। शाहरुख़ खान पर लगे आरोपों ने, उनके पीआर टीम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए।

    क्या अल्लू अर्जुन भी बच निकलेंगे?

    अल्लू अर्जुन को जमानत मिल गई है और इस मामले की सुनवाई जारी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है। दोनों ही मामलों की समानता यह है कि भगदड़ की घटना इन अभिनेताओं की उपस्थिति के कारण हुई, लेकिन क्या उन्हें उनके विरुद्ध लगे आरोपों से बरी किया जाएगा? समय ही बताएगा। यह देखना ज़रूरी है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएँगे, ताकि ऐसे दर्दनाक हादसों को दोहराने से रोका जा सके।

    Take Away Points

    • अल्लू अर्जुन की गिरफ्तारी से पूरा देश सकते में आ गया।
    • शाहरुख़ खान का पुराना केस इस मामले में समानता दर्शाता है।
    • दोनों अभिनेताओं पर भगदड़ से किसी की मृत्यु का सीधा आरोप सिद्ध करना मुश्किल है।
    • प्रशंसक भीड़ की घटनाओं को रोकने और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी जरूरी है।
  • सीरिया संकट: भारत ने सभी नागरिकों को सुरक्षित निकाला

    सीरिया संकट: भारत ने सभी नागरिकों को सुरक्षित निकाला

    क्या आप जानते हैं कि सीरिया में जारी गृहयुद्ध के बीच भारत ने अपने सभी नागरिकों को वहां से सुरक्षित बाहर निकालने में कामयाबी हासिल की है? यह एक ऐसी कहानी है जो साहस, कूटनीति और मानवीय प्रयासों की शानदार मिसाल पेश करती है। आइये, विस्तार से जानते हैं इस अभियान के बारे में और भारत सरकार ने इस मुश्किल घड़ी में कैसे अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया।

    ऑपरेशन सीरिया रेस्क्यू: कैसे हुआ संभव?

    सीरिया में बढ़ते संकट के मद्देनज़र, भारत सरकार ने तुरंत एक विशेष अभियान शुरू किया। इस अभियान में भारतीय दूतावास के कर्मचारियों और सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर काम किया। उन्होंने नागरिकों की सुरक्षा और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने पर विशेष ध्यान दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बताया, “हालिया घटनाक्रमों के बाद सीरिया में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों, जो भारत लौटना चाहते थे, को सुरक्षित बाहर निकाला गया है।” यह अभियान न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का उदाहरण है, बल्कि एक कूटनीतिक चुनौती को भी सफलतापूर्वक पार करने की कहानी भी कहता है।

    लेबनान में मददगार हाथ

    भारतीय दूतावास के कर्मचारियों ने भारतीय नागरिकों को सीरिया की सीमा तक सुरक्षित पहुँचाया। इसके बाद, लेबनान में भारतीय मिशन ने इन नागरिकों का स्वागत किया और इमिग्रेशन प्रक्रिया में पूरी सहायता प्रदान की। बेरूत में रहने, खाने और आगे के आवागमन की व्यवस्था की गई, जिससे भारतीय नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस कार्य में दोनों देशों की सरकारों के बीच बेहतरीन समन्वय का प्रमाण है।

    धार्मिक तीर्थयात्रियों का सुरक्षित निष्कासन

    सीरिया में धार्मिक तीर्थयात्रा पर गए लगभग 44 तीर्थयात्रियों को भी सुरक्षित बेरूत पहुँचाया गया। यह बताता है कि भारत सरकार ने सिर्फ़ आम नागरिकों ही नहीं, बल्कि देश के धार्मिक समुदाय को भी अपनी प्राथमिकता में रखा है। इन सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर उनकी चिंताएँ दूर की गयी। इन तीर्थयात्रियों के आगे के कार्यक्रमों के लिए भी ज़रूरी मदद की गई है।

    भारत का सीरियाई संकट पर रुख

    इस संकट के बीच भारत ने शांति और एक समावेशी राजनीतिक प्रक्रिया पर जोर दिया। विदेश मंत्रालय ने घोषणा की, “हम सीरियाई घटनाक्रमों पर नज़र रखे हुए हैं, और हम सभी पक्षों से अपील करते हैं कि वे सीरिया की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखें।” भारत की यह अपील सीरियाई संकट के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक ज़िम्मेदार कदम है।

    शांतिपूर्ण समाधान की आशा

    भारत सीरिया में शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान चाहता है। भारत सभी समुदायों के हितों को समझता है, और एक ऐसे सीरिया की परिकल्पना करता है जहाँ सभी समुदाय एक साथ शांति और सुरक्षा में रह सकें। सीरियाई नेतृत्व वाली राजनीतिक प्रक्रिया के ज़रिये ही ऐसा संभव हो सकता है।

    निष्कर्ष: एक उदाहरणीय प्रयास

    सीरिया में अपने नागरिकों के सुरक्षित निष्कासन का भारत सरकार का कार्यवाही एक उदाहरण है। यह उनके नागरिकों की सुरक्षा और उनके कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण, यह दिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी एक समर्पित कूटनीति और साझेदारी से कितनी बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।

    टेकअवे पॉइंट्स:

    • सीरियाई संकट के दौरान भारत ने सभी भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला।
    • यह ऑपरेशन एक कूटनीतिक और मानवीय कामयाबी है।
    • लेबनान में भारतीय दूतावास ने सक्रिय भूमिका निभाई।
    • भारत सरकार सीरिया में शांतिपूर्ण और समावेशी समाधान का समर्थन करती है।
  • विक्रांत मैसी: 12वीं फेल से बॉलीवुड स्टार तक का सफ़र

    विक्रांत मैसी: 12वीं फेल से बॉलीवुड स्टार तक का सफ़र

    विक्रांत मैसी: 12वीं पास नहीं, पर सफलता की कहानी ज़रूर!

    क्या आप जानते हैं बॉलीवुड के चहेते अभिनेता विक्रांत मैसी ने 12वीं कक्षा पास नहीं की है? हाल ही में आज तक के कार्यक्रम ‘एजेंडा आजतक 2024’ में, उन्होंने अपने संघर्षों, सफलताओं और अप्रत्याशित रिटायरमेंट पोस्ट के बारे में खुलकर बात की। यह सफ़र इतना दिलचस्प है कि आप इसे ज़रूर पढ़ेंगे! उनकी कहानी हर उस शख्स को प्रेरित करेगी जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है, चाहे उसके पास डिग्री हो या नहीं।

    एक्टर विक्रांत मैसी का अनोखा सफ़र: 12वीं फेल से बॉलीवुड स्टार तक

    विक्रांत मैसी की कहानी एक आम भारतीय युवक की है जो बॉलीवुड के शिखर तक पहुँच गया। अपनी शानदार एक्टिंग स्किल्स से, उन्होंने सबके दिलों में अपनी जगह बनाई। लेकिन क्या आपको पता है, उनकी कामयाबी का सफ़र आसान नहीं था। उन्होंने 12वीं की पढ़ाई अधूरी छोड़ी, फिर भी उन्होंने बॉलीवुड में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। इसमें ज़िद, लगन, और एक मजबूत इरादा सब शामिल था। उनका यह कहानी बताता है कि कैसे कठिन परिस्थितियां भी सपनों को पूरा करने में बाधा नहीं बनती हैं।

    शुरुआती संघर्ष और कामयाबी की सीढ़ियां

    विक्रांत मैसी का शुरुआती दौर काफी चुनौतीपूर्ण था। एक आम परिवार से ताल्लुक रखने वाले विक्रांत को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन हार मानने के बजाय, उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से अपना रास्ता बनाया। उन्होंने छोटे-छोटे रोल से शुरुआत की, धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई। उनकी एक्टिंग के हुनर ने बॉलीवुड में उनके लिए खास जगह बनाई। हर फिल्म में उन्होंने अपनी बेहतरीन अभिनय क्षमता का प्रदर्शन किया है।

    सोशल मीडिया ट्रोलिंग और उससे निपटना

    सोशल मीडिया का दौर में एक्टर्स पर अक्सर बेबुनियाद आलोचना होती है। विक्रांत मैसी भी इसका शिकार हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने खुद को काफी मजबूती से संभाला है। उन्होंने ट्रोलिंग पर एकदम मजबूती से कहा कि वह सोशल मीडिया पर मजबूरी से ही आते है, उनकी प्रकृति में यह शामिल नही है।

    रिटायरमेंट पोस्ट का सच: क्यों लिया था ब्रेक?

    कुछ समय पहले विक्रांत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डालकर सबको चौंका दिया था। इस पोस्ट में उन्होंने अपने रिटायरमेंट की बात की थी। इस अचानक फैसले के पीछे का राज़ जानना बेहद रोमांचक है! उन्होंने अपने फैसले को लेकर बताया कि प्रधानमंत्री जी के साथ फिल्म देखने के बाद उन्हें खुद को और बेहतर बनाने का एहसास हुआ। लेकिन उसके साथ ही वो यह भी कहते है कि व्यस्तता की वजह से वो अपने बेटे और परिवार के साथ समय नहीं बिता पा रहे थे। इसलिए उन्होंने खुद के लिए और अपने परिवार के लिए यह कदम उठाया था।

    वर्क लाइफ बैलेंस और निजी ज़िन्दगी की अहमियत

    विक्रांत ने 280 दिन शूटिंग के बाद यह फैसला लिया। उन्होंने अपनी व्यस्तता के बीच भी अपने बच्चे और परिवार को समय देने की कोशिश की पर फिर भी वो परिवार के साथ पूरा वक्त नहीं बिता सके और इन्ही वजहों को देखते हुए उनहोंने ब्रेक लेने का फैसला किया। यह एक ऐसा निर्णय है जिससे ज़्यादातर लोग relate कर पाएंगे। उन्होंने सबको यह मैसेज दिया है कि पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ़ दोनों का एक बराबर ध्यान रखना जरुरी है।

    दमदार वापसी का वादा

    अपने ब्रेक के बाद, विक्रांत ने यह वादा किया है कि वह और बेहतर और ताकतवर वापसी करने वाले है। वह अपने काम से दर्शकों का मनोरंजन करने और खुश रखने पर पूरी तरह फोकस है। उनके फैन्स उनके इस फैसले का इंतज़ार कर रहे हैं और उन्हें अपने काम में वो ही कामयाबी मिलेगी जिसके वो हकदार है।

    Take Away Points

    • विक्रांत मैसी की कहानी बताती है कि सफलता के लिए डिग्री होना ज़रूरी नहीं है, बल्कि मेहनत और लगन ज़रूरी है।
    • वर्क-लाइफ़ बैलेंस ज़िन्दगी का अहम हिस्सा है।
    • सोशल मीडिया की आलोचनाओं से निपटना ज़रूरी है, मगर खुद को कभी कमज़ोर नहीं मानना चाहिए।
    • विक्रांत मैसी एक बेहतरीन कलाकार होने के साथ-साथ एक आदर्श परिवार के मुखिया भी हैं।