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  • सीबीआई ने एचसी के हवाले से कहा

    सीबीआई ने एचसी के हवाले से कहा

     

     

    केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पाया है कि दिल्ली पुलिस ने कथित तौर पर पिछले साल अक्टूबर में गायब होने से पहले जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र नजीब अहमद को देखा था कि एक बयान देने के लिए ऑटो रिक्शा चालक को मजबूर कर दिया।

    कॉल रिकॉर्ड

    जानकारी एक दिन जब एजेंसी ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक स्थिति रिपोर्ट दर्ज की थी। सीबीआई ने यह भी निवेदन किया कि वह नौ जेएनयू छात्रों के मोबाइल फोन पर फोरेंसिक रिपोर्टों का इंतजार कर रहे थे, जो नजीब के ठिकाने का पता लगाने के लिए जांच के तहत जब्त किए गए थे। उनके कॉल रिकॉर्ड की जांच भी की जा रही है।

    सीबीआई ने लेट डिटेक्टर टेस्ट के लिए संदिग्ध छात्रों की सहमति मांगने के लिए आवेदन एक परीक्षण अदालत के पास लंबित है, जो बुधवार को मामला उठाए जाने के लिए निर्धारित है।

    इस मामले को शुरू में दिल्ली पुलिस ने अपनाया था। हालांकि, पुलिस एक सफलता हासिल नहीं कर सका। इस बीच, नाजीब के परिवार ने अदालत से मदद की मांग की। मामला 16 मई को सीबीआई को सौंप दिया गया था।

    JNUSU प्रतिक्रिया देता है

    सीबीआई की स्थिति रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया करते हुए, जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूयूयूयू) ने कहा कि पुलिस ने कथित रूप से एक ऑटो रिक्शा चालक को एक वक्तव्य देने के लिए कथित तौर पर कथित तौर पर दोहराया कि वे दिन से कह रहे हैं कि नजीब “गायब नहीं” लेकिन “अपहरण” किया गया था।

    “आज [अदालत में] नजीब की मां अदालत में टूट गई क्योंकि अब वह सुस्त तरीके से निराश हो गई है जिसमें सीबीआई जांच कर रही है। मुख्य आरोपी, जिसने रात को [वह गायब हो गया] पहले रात में नजीब के साथ झगड़ा हुआ था, वे आज़ादी से घूम रहे हैं और पूछताछ नहीं किए गए हैं। इसके बजाय, पुलिस और मीडिया बेतुका सिद्धांतों के साथ बाहर आ रहे हैं। ”

    अक्टूबर में, उच्च न्यायालय ने “हित की पूर्ण कमी” के लिए सीबीआई को ऊपर खींच लिया था और इस मामले में कोई परिणाम नहीं दिखाया था। नजीब, एमएससी के एक प्रथम वर्ष के छात्र बायोटेक्नोलॉजी, पिछले साल 15 अक्टूबर को जेएनयू से कुछ छात्रों के साथ झड़पों के बाद गायब हो गई थी। तब आरोप लगाया गया था कि वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े थे।

  • दिल्ली में अगले आदेश तक ट्रकों के प्रवेश पर लागू प्रतिबंध जारी रहेगा

    दिल्ली में अगले आदेश तक ट्रकों के प्रवेश पर लागू प्रतिबंध जारी रहेगा

     

     

    वायु प्रदूषण के स्तर में उतार-चढ़ाव के कारण राष्ट्रीय राजधानी में ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध को अगले आदेशों तक जारी रखने का मंगलवार को फैसला किया गया. हालांकि आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई करने वाले भारी वाहनों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है.

    दिल्ली में प्रदूषण के ‘अत्यंत गंभीर’ स्तर तक पहुंचने के बाद नौ नवंबर को रात के 11 बजे के बाद शहर में ट्रकों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया गया था. प्रतिबंध की मियाद 12 नवंबर के रात 11 बजे समाप्त हो गई थी.

    अधिकारी ने बताया, ‘ट्रकों पर प्रतिबंध की अवधि के बाद भी वायु प्रदूषण के स्तर में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. इसे अगले आदेश तक के लिए जारी रखने का फैसला किया गया है और इस आशय की अधिसूचना जारी कर दी गई है.’ अधिसूचना में दिल्ली यातायात पुलिस और दिल्ली के नगर निगमों को आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई करने वाले भारी वाहनों को छोड़कर अन्य मध्यम एवं भारी वाहनों को दिल्ली में प्रवेश से रोकने के लिए कहा गया है.

    दिल्ली में लागू श्रेणीबद्ध प्रतिक्रिया कार्रवाई योजना (जीआरएपी) के अनुसार पीएम 2.5 के 300 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 10 के 500 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के स्तर के ऊपर पहुंचने के बाद दिल्ली में ट्रक के प्रवेश पर प्रतिबंध प्रभावी हो जाता है.

  • देना बैंक ने SBI को पछाड़ा, दे रहा सबसे सस्‍ता होम लोन

    देना बैंक ने SBI को पछाड़ा, दे रहा सबसे सस्‍ता होम लोन

     

     

    सार्वजनिक क्षेत्र के देना बैंक ने 8.25 प्रतिशत पर आवास ऋण उपलब्ध कराने की बुधवार को घोषणा की. इस मामले में उसने प्रमुख बैंक एसबीआई को भी पीछे छोड़ दिया है. देश का सबसे बड़ा बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने नवंबर महीने की शुरूआत में 8.3 प्रतिशत पर कर्ज देने की घोषणा की थी. उस समय तक यह सबसे सस्ता कर्ज था.

    देना बैंक की यह पेशकश खुदरा कर्ज कार्निवल का हिस्सा है जो गुरुवार से शुरू हो रहा है और यह इस साल के अंत तक रहेगा. देना खुदरा कर्ज कार्निवल के तहत 16 नवंबर 2017 से 31 दिसंबर 2017 तक आवास कर्ज 8.25 प्रतिशत से लेकर 9.0 प्रतिशत ब्याज पर दिया जाएगा.

    बैंक ने कहा कि आवास ओर वाहन कर्ज को बढ़ावा देने के लिये ‘कार्निवल’ की शुरूआत की जा रही है. इसके तहत 75 लाख रुपये तक का कर्ज 8.25 प्रतिशत तथा कार ऋध्स 9 प्रतिशत सालाना ब्याज पर दिया जाएगा. हालांकि महिलाओं को वाहन के लिये कर्ज 8.9 प्रतिशत ब्याज पर मिलेगा. देना बैंक ने कहा कि वह इस अवधि में कर्ज के लिये कोई प्रसंस्करण शुल्क नहीं लेगा.

  • उमर अब्दुल्ला ने गुजारा भत्ता सुनवाई को चुनौती दी, कोर्ट ने पायल से मांगा जवाब

    उमर अब्दुल्ला ने गुजारा भत्ता सुनवाई को चुनौती दी, कोर्ट ने पायल से मांगा जवाब

     

     

    दिल्ली हाईकोर्ट ने जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की उस अर्जी पर उनसे अलग रह रही उनकी पत्नी पायल अब्दुल्ला से जवाब मांगा जिसमें उन्होंने यहां की एक परिवार अदालत में गुजारा भत्ता अर्जी की सुनवाई को चुनौती दी है.

    जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल ने पायल से उमर की उस अर्जी पर 24 नवंबर तक जवाब दायर करने को कहा जिसमें दावा किया गया है कि गुजारा भत्ते की मांग को लेकर उनके और उनके दो बेटों की ओर से दायर अर्जी विचारणीय नहीं है.

    सुनवाई के दौरान उमर के वकील ने हाईकोर्ट के सामने दलील दी कि पायल का अपना स्वयं का व्यापार और राष्ट्रीय राजधानी में एक मकान है, इसलिए राहत का हकदार होने के लिए पहले उन्हें यह साबित करना होगा कि वह स्वयं अपना भरण-पोषण नहीं सकती. वकील ने यह भी दलील दी कि पायल के दोनों बेटे बालिग हैं और इसलिए वे भी गुजारा भत्ता की मांग नहीं कर सकते.

    उमर ने अपनी अर्जी में फैमिली कोर्ट को यह निर्देश देने की मांग की है कि वह अंतरिम गुजारा भत्ता के मुद्दे पर निर्णय से पहले यह फैसला करे कि पायल की अर्जी विचारणीय है या नहीं. उन्होंने फैमिली कोर्ट के नौ सितंबर 2016 के उस आदेश को भी चुनौती दी है जिसमें उसने गुजारा भत्ता मामले में उन्हें सम्मन जारी किए हैं.वकील ने अदालत को बताया कि परिवार अदालत के समक्ष मामले की अगली सुनवाई की तिथि नौ दिसंबर है. इसके बाद अदालत ने मामले को 29 नवंबर को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया.

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  • फारूक बोले: PoK इनके बाप का नहीं, पाक ने चूड़ियां नहीं पहनी है

    फारूक बोले: PoK इनके बाप का नहीं, पाक ने चूड़ियां नहीं पहनी है

     

     

    नेशनल कांफ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने आज एक और विवादास्पद बयान देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं और उसके पास भी परमाणु बम है, वह भारत को जम्मू-कश्मीर के अपने कब्जे वाले हिस्से पर नियंत्रण नहीं करने देगा.

    पिछले हफ्ते उन्होंने कहा था कि ‘पीओके पाकिस्तान का है.’ उत्तर कश्मीर के बारामूला जिले के उरी सेक्टर में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हम कब तक कहते रहेंगे कि पीओके हमारा हिस्सा है? यह (पीओके) उनके बाप की जागीर नहीं है. पीओके पाकिस्तान में है और यह (जम्मू-कश्मीर) भारत में है.’

    उन्होंने कहा कि 70 वर्ष हो गए लेकिन ‘वे (भारत) इसे (पीओके) हासिल नहीं कर सके.’ अब्दुल्ला ने कहा, ‘आज, वे (भारत) दावा करते हैं कि ये हमारा है. तो इसे (पीओके) हासिल कर लीजिए, हम भी कह रहे हैं कि कृपया इसे (पाकिस्तान से) हासिल कर लीजिए. हम भी देखेंगे. वे (पाकिस्तान) इतने कमजोर नहीं हैं और उन्होंने कोई चूड़ियां नहीं पहन रखी हैं. उनके पास भी एटम बम है. युद्ध के बारे में सोचने से पहले हमें सोचना होगा कि इंसान के रूप में हम कैसे रहेंगे?’

    श्रीनगर से लोकसभा के सांसद ने पिछले हफ्ते भी विवादास्पद टिप्पणी की थी जब उन्होंने कहा था कि पीओके पाकिस्तान का है और दोनों देश कितना भी लड़ लें, ये बदलने वाला नहीं है.

    उन्होंने कहा था, ‘मैं न केवल भारत के लोगों बल्कि दुनिया से भी सीधे शब्दों में कहता हूं कि जम्मू-कश्मीर का जो हिस्सा पाकिस्तान के पास है (पीओके) वह पाकिस्तान का है और इस तरफ का हिस्सा भारत का है. यह नहीं बदलेगा. वे चाहे जितनी लड़ाइयां लड़ लें. इसमें बदलाव नहीं होगा.’ उनके बयान पर भाजपा ने भी तीखी प्रतिक्रिया जताई थी और बिहार में उनके खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ था.

    उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, ‘मेरे खिलाफ मामला दर्ज हुआ है. वह भी एक मुस्लिम ने दर्ज करवाया है, अल्लाह उसे सलामत रखे. उसकी दशा देखिए, वह कश्मीर के बारे में नहीं जानता. वह हमारी स्थिति के बारे में नहीं जानता. वे (पाकिस्तान) बम गिराते हैं तो यहां (कश्मीर में) आम आदमी और सैनिक मरते हैं और जब बम यहां से गिराया जाता है तो वहां (पीओके) भी हमारे लोग और सैनिक मरते हैं. कब तक यह बवाल चलेगा? कब तक निर्दोष लोगों का खून बहेगा?’

    उन्होंने उम्मीद जताई कि वह दिन भी आएगा जब लोग नियंत्रण रेखा के आर-पार उन्मुक्त होकर आ-जा सकेंगे. उन्होंने कहा, ‘ऐसा दिन आएगा जब लोग नियंत्रण रेखा इस तरह से पार करेंगे जैसे एक घर से दूसरे घर में जा रहे हैं. विश्वास रखिए ऐसा दिन आएगा और इसके बगैर इस देश में शांति कायम नहीं होगी.’

    फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश
    बिहार के पश्चिम चंपारण जिला की एक अदालत ने जम्मु-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने का आदेश दिया है. मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी जयराम प्रसाद ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को लेकर फारूक अब्दुल्लाह द्वारा हाल में दिए गए बयान को लेकर अधिवक्ता मुराद अली के द्वारा दायर एक परिवाद पत्र की कल सुनवाई करते हुए नगर थाना को प्राथमिकी दर्ज करने आदेश दिया.

    एफआईआर में अली ने आरोप लगाया है कि गत 12 नवम्बर को फारूक अब्दुल्ला का पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को लेकर दिया गया बयान राष्ट्रीय अखंडता के खिलाफ है और देश के नागरिकों का अपमान है. नगर थाना अध्यक्ष नित्यानंद चौहान ने आज बताया कि अदालत के आदेश की प्रति उन्हें अब तक प्राप्त नहीं हुई है. प्राप्त होते ही प्राथमिकी दर्ज कर अग्रतर कार्रवाई की जाएगी.

    (एजेंसी इनपुट के साथ)

  • ‘आलू घुसेगा, सोना निकलेगा’, राहुल नहीं, मोदी के हैं ये शब्द

    ‘आलू घुसेगा, सोना निकलेगा’, राहुल नहीं, मोदी के हैं ये शब्द

     

     

    कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के पाटन रैली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वो कहते नजर आ रहे हैं कि ‘ऐसी मशीन लगाऊंगा कि इस साइड से आलू घुसेगा और दूसरे साइड से सोना निकलेगा. इस साइड से आलू डालो उस साइड से सोना निकालो. इतना पैसा बनेगा कि आपको पता नहीं होगा पैसे क्या करना है.’

    इस वीडियो को तेजी से शेयर किया जा रहा है. इसे लेकर लोग राहुल का मजाक भी बना रहे हैं. ये वीडियो बीजेपी के राष्ट्रीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी प्रभारी अमित मालवीय ने पोस्ट किया है. लेकिन उनके इस वीडियो के बाद एक दूसरा वीडियो भी सामने आया है जिसमें राहुल गांधी का पूरा वर्जन है. इसमें राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बातों को दोहराते नजर आ रहे हैं.

    ये है अमित मालवीय का ट्वीट…

    45 सेकेंड के इस वीडियो में वो कहते नजर आ रहे हैं कि ‘कुछ महीने पहले यहां बाढ़ आई, 500 करोड़ रुपए दूंगा, एक रुपया नहीं दिया. आलू के किसानों को कहा, ऐसी मशीन लगाऊंगा, इस साइड से आलू घुसेगा उस साइड से सोना निकलेगा. इस साइड से आलू डालो उस साइड से सोना निकालो. इतना पैसा बनेगा कि आपको पता नहीं होगा पैसे क्या करना है. मेरे शब्द नहीं हैं, नरेंद्र मोदी जी के शब्द हैं. 15 लाख रुपये हर बैंक अकाउंट में और अब बैंक अकाउंट खोलने के लिए तीन हजार रुपये दो.’

    इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोग राहुल गांधी के पक्ष में पोस्ट कर रहे हैं वहीं कुछ उनके भाषण के छोटे हिस्से को शेयर कर मजाक भी बना रहे हैं.

  • पद्मावती विवाद: थरूर ने कहा- अंग्रेजों के आगे भाग खड़े हुए थे ये ‘महाराजा’

    पद्मावती विवाद: थरूर ने कहा- अंग्रेजों के आगे भाग खड़े हुए थे ये ‘महाराजा’

     

     

    पद्मावती फिल्म को लेकर मचे हंगामे के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने आज दावा किया कि आज जो ये ‘तथाकथित जाबांज महाराजा’ एक फिल्मकार के पीछे पड़े हैं और दावा कर रहे हैं कि उनका सम्मान दांव पर लग गया है, यही महाराजा उस समय भाग खड़े हुए थे जब ब्रिटिश शासकों ने उनके मान सम्मान को ‘रौंद’ दिया था.

    यहां एक समारोह में शशि थरूर से सवाल किया गया था कि उनकी किताब ‘एन एरा ऑफ डार्कनेस : द ब्रिटिश एम्पायर इन इंडिया’ में ‘पीड़ा का भाव ’ क्यों है जबकि उनकी राय यह है कि भारतीयों ने अंग्रेजों का साथ दिया था.

    थरूर ने कहा, ‘यह हमारी गलती है और मैं यह कहता हूं. सही मायने में तो मैं पीड़ा को सही नहीं ठहराता हूं. किताब में दर्जनों जगहों पर मैं खुद पर बहुत सख्त रहा हूं. कुछ ब्रिटिश समीक्षकों ने कहा है, ‘वह इस बात की व्याख्या क्यों नहीं करते कि ब्रिटिश कैसे जीत गए? और ये बेहद उचित सवाल है.’

    उन्होंने कहा, ‘असलियत तो यह है कि इन तथाकथित महाराजाओं में हर एक जो आज मुंबई के एक फिल्मकार के पीछे हाथ धोकर पड़े हैं, उन्हें उस समय अपने मान सम्मान की कोई चिंता नहीं थी जब ब्रिटिश इनके मान सम्मान को पैरों तले रौंद रहे थे. वे खुद को बचाने के लिए भाग खड़े हुए थे. तो इस सचाई का सामना करो, इसलिए ये सवाल ही नहीं है कि हमारी मिलीभगत थी.’कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. श्री राजपूत सेना और कुछ अन्य संगठनों ने फिल्मकार पर इतिहास को तोड़ मरोड़ कर परोसने और हिंदू भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया है.

    इस बीच, थरूर ने कहा कि उनकी किताब ‘याचना नहीं करती कि ओह, हम बेचारे पीड़ित हैं, हमें क्षमादान दे दो. यह पूरी तरह इस बात को केंद्र में रखती है कि ब्रिटिश साम्राज्य वो नहीं है जैसा कि लोगों को समझा दिया गया.’ उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने ब्रिटिश शासकों को आईना दिखाया था. उन्हें अहसास कराया था कि वे क्या कर रहे हैं.

    उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने उन्हें आईना दिखा कर कहा था, ‘खुद को देखो, तुम खुद को शर्मसार कर रहे हो, क्या यही तुम्हारे मूल्य हैं? सौभाग्य से, ब्रिटिश शासकों को खुद पर शर्मिन्दगी हुई.’ थरूर यहां टाटा लिटरेचर लाइव के आठवें संस्करण में प्रोफेसर पीटर फ्रैंकोपैन के साथ उद्घाटन समारोह में चर्चा कर रहे थे.

  • एसडीएमसी ने आज से बढ़ाकर पार्किंग दरों को वापस लेने के लिए

    एसडीएमसी ने आज से बढ़ाकर पार्किंग दरों को वापस लेने के लिए

     

     

    राजधानी में प्रदूषण के स्तर में गिरावट देखने से दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) ने ग्रेडिंग रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप रिस्पांस एक्शन प्लान) के तहत अपने लॉट्स में फुलाया पार्किंग शुल्क वापस ले लिया है।

    बुधवार को एसडीएमसी द्वारा जारी एक बयान में, नागरिक निकाय ने कहा कि पुराने पार्किंग शुल्क गुरुवार से लागू होगा। दक्षिण दिल्ली के मेयर कमलजीत सेहराव द्वारा पारित किए गए आदेश पर निर्णय लिया गया है।

    एसडीएमसी ने एक बयान में कहा, “… इस वजह से, अराजक यातायात की स्थिति सामने आई है और कई क्षेत्रों से ट्रैफिक जाम की सूचना मिली है, हालांकि प्राधिकृत पार्किंग क्षेत्र का काफी हिस्सा खाली रहा है।”

    बयान में बताया गया है कि कई पार्किंग स्थल में आगंतुकों द्वारा हिंसा और तर्कों की रिपोर्ट की गई थी।

    उन्होंने कहा कि इन मामलों में अभ्यस्तों की भी खबर है कि इन वाहनों को पार्किंग और सड़कों और अन्य अनधिकृत स्थानों पर पार्क करने के लिए न तो तय करना है, जिससे समस्याएं पैदा हो रही हैं।

    हवा की गुणवत्ता में डुबकी

    पिछले हफ्ते शहर में हवा की गुणवत्ता में कमी के बाद लेफ्टिनेंट-गवर्नर के आदेशों के बाद, एसडीएमसी ने चार बार पार्किंग की दर बढ़ा दी थी। यह 9 नवंबर को प्रभावी हुआ

    पार्किंग के लिए ₹ 20 प्रति घंटे के खिलाफ, लोगों को एक घंटे के लिए अपनी कार पार्किंग के लिए जितना ज्यादा 80 रुपये का भुगतान करना पड़ा। यह निजी वाहनों के उपयोग से लोगों को हतोत्साहित करने के लिए किया गया था। गुरुवार से, हालांकि, प्रति घंटे 20 रुपये की पुरानी दरों को एसडीएमसी लॉट्स में लागू किया जाएगा।

    उत्तर और पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने पुष्टि की है कि एलएजी द्वारा जारी किए गए इन्हें वापस लेने के आदेशों के चलते पार्किंग की बढ़ती दरें जारी रहेगी। “जब तक हमें एल-जी से ऑर्डर प्राप्त नहीं किया जाता तब तक फुलाया दरें जारी रहेंगी उत्तर निगम के तहत सभी पार्किंग स्थल में, आगंतुकों को प्रति घंटे 80 रुपये का भुगतान करना होगा, “एक वरिष्ठ उत्तर निगम अधिकारी ने कहा।

    हालांकि हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी से फिसल गई है, लेकिन दिल्ली में प्रदूषण के स्तर अभी भी ‘बहुत खराब’ हैं।

  • जहरीला धुएं में डूबी रही दिल्‍ली, सरकार के पास पड़े रहे 1500 करोड़

    जहरीला धुएं में डूबी रही दिल्‍ली, सरकार के पास पड़े रहे 1500 करोड़

     

     

    वायु प्रदूषण से निपटने के लिए हरित कोष के तौर पर दिल्ली में अथॉरिटी के पास 1,500 करोड़ रुपये से अधिक राशि इस्तेमाल नहीं होने के कारण पड़ी हुई है जबकि दिल्ली जहरीली धुंध से राहत पाने के लिए मशक्कत कर रही है. इस रकम का बड़ा हिस्सा और 1,003 करोड़ रुपया पर्यावरण मुआवजा शुल्क (ईसीसी) से आया, जिसे उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में प्रवेश करने वाले ट्रकों पर 2015 में लगाया था वहीं, बाकी राशि प्रति लीटर डीजल बिक्री पर लगाए गए उपकर से मिला है.

    यह उपकर 2008 से प्रभावी है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने दिल्ली – एनसीआर में 2000 सीसी और इससे अधिक की क्षमता वाले इंजन के साथ डीजल कार बेचने वाले डीलरों से इकट्ठा किए एक फीसदी उपकर से 62 करोड़ रुपये जमा किए. यह कदम पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद उठाया गया था.

    सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायरनमेंट (सीएसई) में शोधार्थी उस्मान नसीम ने बताया कि दक्षिण दिल्ली नगर निगम ईसीसी एकत्र करता है और यह रकम शहर के परिवहन विभाग को हर शुक्रवार को जमा करता है.

    डीजल पर उपकर की घोषणा शीला दीक्षित सरकार ने दिसंबर 2007 में कही थी. इसने वाहनों से होने वाले प्रदूषण के मद्देनजर वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की कोशिश के तहत यह कदम उठाई थी.नसीम ने बताया कि ‘एयर एंबीयेंस फंड’ का रखरखाव दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) करती है. इसके पास फिलहाल करीब 500 करोड़ से अधिक की राशि है.

    संपर्क किए जाने पर दिल्ली परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के लिए इस कोष का इस्तेमाल करने का फैसला कल लिया गया. ‘‘हम इलेक्ट्रिक बसों के लिए इस कोष का उपयोग करेंगे. ’’ हालांकि, फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं की गई है कि कितनी संख्या में ई-बसें खरीदने की सरकार की योजना है और इसके लिए कितनी राशि की जरूरत है.

    उच्चतम न्यायालय के साल 2016 के आदेश के मुताबिक ईसीसी से करीब 120 करोड़ रुपये का इस्तेमाल ट्रकों पर ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटीफिकेशन डिवाइस’ लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा ताकि प्रभावी और विश्वसनीय ‘लेवी’ वसूल हो सके.

    वहीं, सीपीसीबी की योजना हरित कोष का इस्तेमाल क्षेत्र में वायु गुणवत्ता में बेहतरी और प्रबंधन को लेकर अध्ययन पर खर्च करने की है.

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  • हवा की गुणवत्ता में सुधार के बाद ईपीसीए ने ‘इमरजेंसी’ उपाय हटाए

    हवा की गुणवत्ता में सुधार के बाद ईपीसीए ने ‘इमरजेंसी’ उपाय हटाए

     

     

    दिल्ली में लगातार दूसरे दिन हवा की गुणवत्ता ‘आपात’ श्रेणी से बाहर रहने के बाद उच्चतम न्यायालय द्वारा अधिकृत ईपीसीए ने निर्माण गतिविधियों, ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध और समूचे दिल्ली-एनसीआर में पार्किंग का बढ़ा हुआ शुल्क आज वापस ले लिया.

    प्रदूषण स्तरों में इजाफा के बाद इसके आपात श्रेणी में पहुंचने और धुंध की मोटी परत छाने के कारण स्तरीय प्रतिक्रिया कार्य योजना (जीआरएपी) के तहत आठ नवंबर से यह उपाय लागू किये गये थे.

    ईपीसीए के अध्यक्ष भूरे लाल ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब एवं हरियाणा के मुख्य सचिवों को आज सुबह लिखे पत्र में उन्हें निर्देश दिया कि चूंकि हवा की मौजूदा गुणवत्ता को देखते हुए ऐसी सख्त कार्रवाई आवश्यक नहीं है. इसलिए इन उपायों को ‘‘तत्काल प्रभाव’’ से हटाया जाये.

    ईपीसीए ने कहा कि जीआरएपी की ‘गंभीर’ श्रेणी के तहत लागू इन उपायों के तहत बदरपुर ताप बिजली संयंत्र को बंद करने, ईंट-भट्ठों पर प्रतिबंध, गर्म मिश्रित संयंत्र और स्टोन क्रशर्स पर प्रतिबंध बने रहेंगे.इसने कहा, ‘‘हमलोग स्थिति पर बहुत सावधानी से नजर रख रहे हैं और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग एवं भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान ने हमें सूचना उपलब्ध करायी है कि हवा में नमी बढ़ने के कारण आगामी दिनों में प्रदूषण में फिर से इजाफा हो सकता है.’’ भूरे लाल ने लिखा, ‘‘हालांकि अगर स्थिति में ऐसे ही लगातार सुधार होता रहा और हवा की गुणवत्ता स्थिर बनी रही तो हम ‘गंभीर’ श्रेणी के तहत उन उपायों की समीक्षा करेंगे और इसके मुताबिक आपको सूचित करेंगे.’’