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  • बर्थडे पर राजनैतिक पार्टी का ऐलान कर सकते हैं रजनीकांत

    बर्थडे पर राजनैतिक पार्टी का ऐलान कर सकते हैं रजनीकांत

     

     

    सुपरस्टार रजनीकांत अपने 67वें जन्मदिन 12 दिसंबर पर राजनैतिक पार्टी बनाने का ऐलान कर सकते हैं. नाम नहीं बताने की शर्त पर उनके करीबी सूत्रों ने सीएनएन न्यूज 18 को यह जानकारी दी है.

    सूत्रों के अनुसार, रजनीकांत पहले अपनी पार्टी बनाएंगे फिर बीजेपी से गठबंधन कर लेंगे. रजनीकांत ने जबसे राजनैतिक पार्टी बनाने या राजनीति में एंट्री करने का संकेत दिया है, तबसे भगवा पार्टी उन्हें लुभाने की कोशिश कर रही है.

    रजनीकांत के समकालीन एक्टर कमल हासन ने पहले कहा था कि वे अपने जन्मदिन 7 नवंबर पर कोई बड़ा ऐलान करेंगे. इस दौरान ये संभावना जताई जा रही थी कि वे अपनी नई पार्टी का ऐलान करेंगे. हालांकि, उन्होंने इस दिन सिर्फ लोगों से जुड़ने के लिए एक ऐप लॉन्च किया और दूसरा कोई ऐलान नहीं किया.

    बता दें कि कमल हासन राजनैतिक एंट्री के लिए रजनीकांत से ज्यादा सक्रिय दिखते रहे हैं. मर्सेल रिलीज और नोटबंदी पर उन्होंने एआईडीएमके और बीजेपी से बात भी की थी. वहीं ‘भगवान आतंक’ का उनका बयान काफी चर्चा में था, जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि वे बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे.हालांकि, रजनीकांत इन दिनों अपनी फिल्म 2.0 के रिलीज को लेकर ही व्यस्त हैं. फिर भी मर्सेल को लेकर उन्होंने कुछ ट्वीट जरूर किए हैं. वह हासन के साथ भी हंसी-मजाक करते दिखे थे. जब उन्होंने कहा था कि राजनीति में प्रवेश के लिए नाम और प्रसिद्धि ही जरूरी नहीं है. आपको राजनीति में सफल होना है तो प्रसिद्धि और पैसे से भी ज्यादा चीजों की आवश्यक्ता होती है. एक कलाकार को राजनीति में जाने के लिए कुछ बड़ा करना होता है.

  • PM मोदी ने मौलाना आजाद और आचार्य कृपलानी को दी श्रद्धांजलि

    PM मोदी ने मौलाना आजाद और आचार्य कृपलानी को दी श्रद्धांजलि

     

     

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को मौलाना अबुल कलाम आजाद और आचार्य जे.बी. कृपलानी को उनकी जयंतियों पर श्रद्धांजलि अर्पित की. मोदी ने अपने ट्वीट में कहा, भारतीय इतिहास के दो दिग्गजों को श्रद्धांजलि, भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और उसके बाद देश के निर्माण में उनके योगदान बेहद लाभदायक रहे.

    एक शिक्षाविद और स्वतंत्रता सेनानी आजाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री थे, जिन्होंने शिक्षित राष्ट्र की नींव रखी. मरणोपरांत उन्हें सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया. साल 2008 से उनकी जयंती राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में मनाई जा रही है.

    अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दिन के रूप में आजाद का जन्म 1888 में मक्का में हुआ था. दिल्ली में 22 फरवरी 1958 को उनका इंतकाल हुआ.

    वहीं, जीवटराम भगवानदास कृपलानी का जन्म भी 1888 में हैदराबाद में हुआ था, जो अब पाकिस्तान के सिंध प्रांत में है. साल 1917 में कृपलानी सबसे पहले चम्पारण सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी के संपर्क में आए, जिसके बाद वह एक पूर्ण समर्पित राष्ट्रवादी बन गए.

    ब्रिटिश राज से 1947 में सत्ता के हस्तांतरण के दौरान वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष थे. 19 मार्च 1982 को आचार्य कृपलानी का देहांत हो गया.

  • दिल्ली में आर्टिफिशियल बारिश करवाने के लिए इस कंपनी ने की ‘हां’

    दिल्ली में आर्टिफिशियल बारिश करवाने के लिए इस कंपनी ने की ‘हां’

     

     

    दिल्ली में प्रदूषण जनित धुंध से निजात पाने के लिये हेलीकॉप्टर से कृत्रिम बारिश करने के केजरीवाल सरकार के प्रस्ताव पर हेलीकॉप्टर सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी पवनहंस ने सहमति दे दी है. केजरीवाल सरकार को कृत्रिम छिड़काव के लिये हेलीकॉप्टर मुहैया कराने में कोई मदद करने में केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा असमर्थता जताने के बाद दिल्ली सरकार ने अपने स्तर पर पवनहंस से संपर्क किया था. कंपनी की ओर से सरकार को आज भेजे गए जवाबी पत्र में इस काम को अंजाम देने पर सहमति जतायी गयी है.

    पवनहंस के महाप्रबंधक वी एच दोडिया ने दिल्ली के पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन के निजी सचिव श्रवण बगड़िया को भेजे पत्र में कहा है कि दिल्ली में हेलीकॉटर द्वारा कृत्रिम बारिश के लिये विस्तृत कार्ययोजना बनानी होगी. साथ ही इस काम के लिये विमानपत्तन प्राधिकरण, नागरिक उड्ययन महानिदेशालय और रक्षा मंत्रालय सहित केन्द्र और राज्य सरकार की तमाम एजेंसियों से पूर्व अनुमित लेनी होगी.

    इसकी पूरी कार्य योजना बनाने के लिये दोडिया ने दिल्ली सरकार और पवनहंस के अधिकारियों का संयुक्त कार्यदल बनाने की बात कही है. दिल्ली सरकार के सूत्रों ने बताया कि इस बाबत संयुक्त कार्यदल गठित कर दिया गया है जो इस परियोजना पर कल से काम शुरू कर देगा.

    उल्लेखनीय है कि दिल्ली में प्रदूषण के गहराये संकट से निजात दिलाने के लिये केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा गठित समिति ने कल अपनी पहली बैठक में ही कृत्रिम बारिश कराने की केजरीवाल सरकार की पहल पर कोई मदद नहीं किये जा सकने की बात कही थी. हुसैन ने हाल ही में डा. हर्षवर्धन को पत्र लिखकर कृत्रिम बारिश कराने के लिये केन्द्र सरकार से हेलीकॉप्टर मुहैया कराने में मदद करने का आह्वान किया था.दिल्ली सरकार ने इस काम पर खर्च होने वाली राशि का वहन राज्य सरकार द्वारा करने की पहल करते हुये केन्द्र सरकार से रक्षा मंत्रालय या उड्डयन मंत्रालय से हेलीकॉप्टर मुहैया कराने में मदद की अपील की थी. समझा जाता है कि केन्द्रीय समिति ने दिल्ली सरकार की इस कवायद में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा कोई मदद कर पाने में असमर्थता जताते हुये कहा है कि राज्य सरकार यदि चाहे तो अपने स्तर पर यह काम कर सकती है.

    इसके बाद ही दिल्ली सरकार ने पवनहंस से इस बाबत कल ही संपर्क किया था. हुसैन ने आज शाम ट्वीट कर बताया कि कृत्रिम बारिश कराने के लिये पवनहंस से संपर्क किया गया है जिससे दिल्ली में पानी का छिड़काव कर हवा में जमा पार्टिकुलेट तत्वों को जमीन पर लाया जा सके.

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  • 24 घंटे बिजली नहीं देने पर कंपनियों पर लगेेेेगा जुर्माना!

    24 घंटे बिजली नहीं देने पर कंपनियों पर लगेेेेगा जुर्माना!

     

     

    बिजली उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने देश में हर घर को बिजली की 24 घंटे अनवरत आपूर्ति करने के सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए बिजली कंपनियों पर बिजली कटौती के लिए जुर्माना और सख्त नियमन व्यवस्था के साथ-साथ उनकी माली हालत मजबूत रखने के उपाय किए जाने पर बल दिया है.

    सरकार ने दिसंबर 2018 तक घर-घर बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. वह बाकी बचे सभी गांवों के विद्युतीकरण का काम समय से पहले इस साल दिसंबर तक पूरा करने का प्रयास कर रही है. इसके साथ ही मार्च 2019 तक सभी घरों को 24 घंटे अनवरत बिजली सुलभ कराने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है.

    टाटा पावर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और प्रबंध निदेशक अनिल सरदाना ने कहा, ‘इस लक्ष्य के लिए जरूरी है कि बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति बेहतर हो.’ उन्होंने उदय योजना को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है. उज्जवल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) सरकार की बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार की योजना है.

    उद्योग मंडल सीआईआई के बिजली पर राष्ट्रीय समिति के चेयरमैन सरदाना ने कहा, ‘बिजली अपूर्ति में सकल तकनीकी व वाणिज्यिक नुकसान में कमी, लागत और कीमत के बीच का अंतर कम करने तथा नियमित तरीके से बिजली दरों में संशोधन से कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी. कंपनियों की हालत ठीक रहने से हर घर को अनवरत बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी.’दिल्ली के कुछ हिस्सों में बिजली वितरण का जिम्मा संभाल रही टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लि. (टाटा पावर डीडीएल) के प्रवक्ता ने कहा, ‘देश की राजधानी दिल्ली जैसे कुछ शहरों में बिजली कटौती पर जुर्माने का प्रावधान है. सभी घरों को सातों दिन 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिए इसी प्रावधान को देश में सभी बिजली कंपनियों पर लागू किए जाने की जरूरत है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वितरण कंपनियां वित्तीय समस्याओं या अकुशलता की आड़ में बिना सोच विचार के बिजली कटौती नहीं करें.’

    पीपीए के अनुपालन को अनिवार्य बनाया जाएगा

    केंद्रीय बिजली मंत्री आरके सिंह ने हाल में कहा था कि सरकार बिजली कानून संशोधन विधेयक को अंतिम रूप दे रही है जिसमें अन्य बातों के अलावा बिजली कंपनियों को लाइसेंस नवीनीकरण से पहले अपने क्षेत्र की 100 प्रतिशत बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए बिजली खरीद समझौता (पीपीए) करना होगा. साथ ही पीपीए के अनुपालन को अनिवार्य बनाया जाएगा और ऐसा नहीं करने पर जुर्माने का प्रावधान होगा.

    बीएसईएस राजधानी पावर लि. के निदेशक गोपाल सक्सेना ने कहा, ‘देश भर में वितरण कंपनियों पर हर जगह बिजली की आपूर्ति करने का दायित्व (यूएसओ) रहता है. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और अहमदाबाद जैसे शहरों में मजबूत नियामकीय ढांचा और स्थापित मानक हैं.’

    उन्होंने कहा कि अन्य शहरों में भी नियामकीय व्यवस्था मजबूत बनाकर और कड़ाई से लागू कर 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

    हर घर को बिजली मिले

    सरदाना ने कहा, ‘निजी वितरण कंपनियां अपने लाइसेंस क्षेत्र में यह सुनिश्चित कर रही हैं कि प्रत्येक परिवार को अनवरत बिजली मिले. हमारा मानना है कि सरकार के इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियों से भी इसी प्रकार की प्रतिबद्धता जरूरी है.’

    बिजली मंत्रालय के गर्व पोर्टल के अनुसार बिजली सुविधाओं से वंचित 18,452 गांवों में से 14,911 गांवों में बिजली पहुंचाई जा चुकी है जबकि 2,508 गांवों में बिजली पहुंचाने का काम जारी है. वहीं 1,033 गांव ऐसे हैं जहां कोई नहीं रहता है. इस लक्ष्य को दिसंबर 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य है. पहले इसके लिए मई 2018 तक का लक्ष्य रखा गया था.

    सरकार ने दिसंबर 2018 तक सभी घरों को बिजली पहुंचाने के लिए सौभाग्य योजना शुरू की है. इसके तहत बिजली सुविधा से वंचित करीब चार करोड़ परिवारों को बिजली उपलब्ध कराया जाना है.

  • BJP इन वादों के सहारे जीतना चाहती है चुनाव !

    लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी ने रविवार को नगर निगम चुनाव के लिए अपना घोषणा पत्र जारी किया। विधानसभा के घोषणा पत्र की तर्ज पर इसे भी बीजेपी ने संकल्प पत्र का नाम दिया है। घोषणा पत्र में शहरों की अच्छी सड़कें, साफ पीने का पानी, जगमगाती स्ट्रीट लाइटें और साफ सुथरे शहर करने के वादे किए गए हैं। इसके आलावा पार्कों के सौन्दर्यकरण के साथ शहर के मुख्य सार्वजानिक स्थलों पर निशुल्क वाईफाई व्यवस्था प्रदान करने की बात कही गयी है। इस मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ , डिप्टी सीएम केशव मौर्या, डिप्टी सीएम डॉ दिनेश शर्मा , प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पांडेय और नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना मौजूद रहे।?त?दखास बात यह है कि इस संकल्प पत्र में सभी विभागों ने संयुक्तरूप से सहयोगात्मक रवैया अपनाया है। नगर विकास के अलावा आवास विभाग, लोक निर्माण विभाग, बिजली विभाग और स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की झलक भी इस संकल्प पत्र में देखी जा सकती है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्रनाथ ने कहा कि भाजपा हर चुनाव उद्देश्य के साथ लडती है। हमारा उद्देश्य जनसेवा होता है। सत्ता का उपभोग हमारा उद्देश्य नही। हम विधानसभा में भी संकल्प पत्र के साथ उतरे थे आज भी हम उद्देश्य के साथ उतरे है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश की 16 नगर निगमो में सभी स्ट्रीट लाइट को एलईडी स्ट्रीट लाइट में बदला जाएगा। वाराणसी और इलाहाबाद में ये कार्य लगभग पूरे भी हो चुके हैं। नगर निकाय बोर्ड का गठन भाजपा के नेतृत्व में होगा तो दिल्ली से निकली सुविधाएं समाज के अंतिम पायदान पर पहुँच सकेगी। मुख्य बिंदुसफाई को विशेष महत्व, स्वच्छ नगर, हरित नगर, स्वस्थ्य नगर, बेहतर सड़कें, बेहतर पेयजल व्यवस्था, एलईडी स्ट्रीट लाइट, निशुल्क सामुदायिक शौचालय, महिलाओं के लिए पिंग टॉयलट की व्यवस्था, आदर्श नगर पंचायत व्यवस्था, हर घर में फ्री पानी का कनेक्शन, सुदृढ़ नगर बस सेवा, घुमंतू पशुओं के लिए कांजी हाउस की व्यवस्था दोबारा दुरुस्त, पटरी दुकानदारों को प्रभावी संरक्षण, प्रशासन में पारदर्शिता होगी और वह जनता के प्रति उत्तरदाई होगी, सभी प्रभाव प्रकारों के देन की ऑनलाइन व्यवस्था, नगरों को स्मार्ट सिटी के रूप में विकास, वाहन पार्किंग की समुचित व्यवस्था।?

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                   युवा चौकड़ी BJP की राह में रोड़ा, Gujarat में Congress की पहली रणनीतिक जीत

  • लोढ़ा समिति की रिपोर्ट ने देश के क्रिकेट को बर्बाद किया

    लोढ़ा समिति की रिपोर्ट ने देश के क्रिकेट को बर्बाद किया

     

     

    एनसीपी प्रमुख और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष शरद पवार ने गुरुवार को आरोप लगाया कि लोढ़ा समिति की रिपोर्ट ने क्रिकेट को ‘निश्चित तौर पर बर्बाद’ किया. न्यायमूर्ति लोढ़ा पैनल ने बीसीसीआई में आमूलचूल बदलावों की सिफारिश की थी जिन्हें उच्चतम न्यायालय ने मंजूरी दी थी.

    पवार से जब पैनल की सिफारिशों के बारे में पूछा गया, उन्होंने पत्रकारों से कहा कि रिपोर्ट ने निश्चित तौर पर क्रिकेट को बर्बाद किया. पवार अंतरराट्रीय क्रिकेट परिषद के भी अध्यक्ष रह चुके हैं.

    लोढ़ा समिति की जिन विवादास्पद सिफारिशों से उन्हें आपत्ति है उनमें एक राज्य एक वोट, राष्ट्रीय चयनसमिति में सदस्य संख्या की सीमा, बोर्ड परिषद में सदस्य संख्या की सीमा, अधिकारियों की आयु और कार्यकाल को सीमित करना और अधिकारियों की ताकत और कार्यों को विभाजित करना शामिल है.

    लोढ़ा समिति की सिफारिशों के मुताबिक 70 साल से अधिक आयु के अधिकारी बीसीसीआई या किसी राज्य संघ में पद नहीं संभाल सकते. साथ ही समिति ने दो कार्यकाल के बीच तीन साल के अंतराल की बात भी कही है.यह भी पढ़ें-
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  • हिमाचल चुनाव में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं ने किया मतदान

    हिमाचल चुनाव में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं ने किया मतदान

     

     

    हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार पुरुषों से ज्यादा महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.
    विधानसभा चुनाव में कुल 74.61 फीसदी मतदान दर्ज़ किया गया.

    पहाड़ी राज्य में 19,10,582 महिला मतदाताओं ने मतदान किया, जबकि 18,11,061 पुरुष मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. मतदाता सूची में पुरुष मतदाताओं की संख्या महिला मतदाताओं की संख्या से करीब 74,200 ज्यादा है.

    राज्य के 68 विधानसभा क्षेत्रों में से 48 में महिलाओं का मत प्रतिशत पुरुषों की तुलना में ज्यादा रही, जबकि केवल 15 सीटों पर महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से ज्यादा है.

    सबसे बड़े कांगड़ा जिले में 4,61,278 महिलाओं ने और 3,96,208 पुरुषों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. इसी तरह मंडी जिले में 2,96,898 महिलाओं ने मतदान किया. वहीं 2,71,725 पुरुष मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया.

  • पायलट ने प्लेन उड़ाने से किया इनकार, लोगों ने ऐसे तय किया फासला

    पायलट ने प्लेन उड़ाने से किया इनकार, लोगों ने ऐसे तय किया फासला

     

     

    एयर इंडिया के एक पायलट ने बुधवार रात ऐनवक्त पर विमान उड़ाने से इनकार कर दिया. विमान के कुछ यात्रियों को सड़क मार्ग से और कुछ यात्रियों को गुरुवार को दूसरे एयरलाइंस के विमान से दिल्ली भेजा गया.

    सांगानेर हवाई अड्डे के निर्देशक जी एस बल्हारा के अनुसार दिल्ली से जयपुर आने वाली एयर इंडिया का विमान किन्हीं कारणों से देर रात डेढ़ बजे जयपुर पहुंचा था.

    उन्होंने बताया कि यही विमान उड़ान संख्या 9 आई 644 तकरीबन चालीस यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को लेकर दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाला था, लेकिन विमान के पायलट ने अपने ड्यूटी समय समाप्त होने की वजह से विमान उड़ाने से इनकार कर दिया.

    निदेशक के अनुसार विमान के कुछ यात्रियों को रात में होटल में रुकवाया गया, कुछ को सड़क मार्ग से भेजा गया. उन्होंने कहा कि रात में रुके यात्रियों को आज दूसरे एयरलाइंस के विमान से दिल्ली भेजा गया है. इधर, एयर इंडिया के स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन सम्पर्क नहीं हुआ.ये भी पढ़ें-
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  • 300 धूल प्रदूषण के लिए 3 दिनों में जुर्माना लगाया गया

    300 धूल प्रदूषण के लिए 3 दिनों में जुर्माना लगाया गया

     

     

    दिल्ली में तीन नगर पालिकाओं ने बुधवार से धूल प्रदूषण के लिए 300 से अधिक जुर्माना जारी किए हैं, जब शहर के प्रदूषण के स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंचने के बाद वर्गीकृत कार्य योजना लागू हुई। धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए मानदंडों का पालन करने में विफल रहे निर्माण स्थलों पर जुर्माना जारी किया गया था।

    की जा रहा कार्रवाई

    उत्तर निगम ने पिछले तीन दिनों में 156 जुर्माना जारी किए हैं। इनमें से 25 बुधवार को जारी किए गए थे, गुरुवार को 100 और शुक्रवार को 31। एसडीएमसी ने कुल 18 9 जुर्माना जारी किया और ईडीएमसी ने 101 जुर्माना जारी किया।

    दक्षिण निगम ने बुधवार को 86 जुर्माना, गुरुवार को 70, और शुक्रवार को 33 को जारी किया। ईडीएमसी ने बुधवार को 20, गुरुवार को गुरुवार और शुक्रवार को 26 को जारी किया।

    उत्तर निगम के अधिकारियों ने कहा कि नागरिक शरीर पहले से ही उच्च स्तर के प्रदूषण को आगे बढ़ने से रोकने के लिए अपना काम कर रहा है। “दिशानिर्देशों का कहना है कि सभी निर्माण स्थलों को क्षेत्र के पैनल या मोटी चादरों की सीमाओं को कवर करना चाहिए। उन्होंने उड़ान से धूल से बचने के लिए भी साइटों को पानी से छिड़क दिया है। ”

    आधिकारिक ने कहा कि शुक्रवार से, प्रवर्तन दल शहर में निर्माण गतिविधियों पर अस्थायी प्रतिबंध सुनिश्चित करेंगे।

  • Love story: पद्मजा नायडू से शादी करने वाले थे नेहरू!

    Love story: पद्मजा नायडू से शादी करने वाले थे नेहरू!

     

     

    13 नवंबर 1962 को अमेरिका के भारत स्थित राजदूत जॉन कैनेथ गालब्रेथ ने अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी को एक पत्र लिखा. भारत और चीन के बीच युद्ध के बादल मंडरा रहे थे. पत्र में गालब्रेथ ने ये लाइन भी लिखी, यहां नेहरू को छोड़कर कोई एेसा नेता नहीं है, जो बहुत लोकप्रिय हो. लेकिन उनके लचीले चरित्र और नेतृत्व को लेकर ढेर सारी बातें प्रचारित हैंं.

    ये वो दौर था जब प्रधानमंत्री हाउस की कहानियां राजनयिक सर्कल में काफी रस लेकर सुनाई जाती थीं. जवाहर लाल नेहरू की तमाम प्रेम कथाएं चर्चा का विषय थीं. उनके जीवन में एक नहीं कई महिलाएं थीं. नेहरू को लेकर महिलाओं में गजब का क्रेज भी था. वो उनकी ओर खींची चली आती थीं.

    ऐसी ही एक कहानी मुझे 50 के दशक तक देश के शीर्ष उद्योगपति रहे रामकृष्ण डालमिया की बेटी नीलिमा डालमिया अधर ने सुनाई. उन्होंने बताया कि उनकी मां दिनेश नंदिनी राजस्थान की उभरती हुई कवियित्री थीं. तब तक उनकी डालमिया से शादी नहीं हुई थी. वह नेहरू के प्यार में पागल थीं. हालांकि ये एकतरफा प्यार था.

    उन्हें पता चला कि नेहरू वर्धा में गांधी आश्रम आए हुए हैं. वह उनसे मिलने अकेली ही नागपुर से वर्धा पहुंच गईं. उन्होंने सीधे-सीधे नेहरू से प्यार का इजहार कर डाला. वह अपना घर तक छोड़ने को तैयार थीं. उन्होंने नेहरू से अनुरोध किया कि वह उनके साथ रहकर काम करना चाहती हैं. नेहरू तैयार नहीं हुए. ये लिखने का तात्पर्य केवल इतना है कि बताया जा सके कि उस समय शिक्षित और अभिजात्य महिलाओं में नेहरू का किस कदर क्रेज था. यही कारण भी है कि उनके जीवन में कई प्रेम कथाएं हैं, कई नायिकाएं, जो उन पर अधिकार जताती रहीं. उनके करीब रहीं.मृदुला साराभाई से निकटता
    मृदुला गुजरात के प्रसिद्ध उद्योगपति और धनाढ्य साराभाई परिवार की बेटी थीं. वह कांग्रेस की समर्पित कार्यकर्ता थीं. नेहरू के बहुत करीब थीं. हालांकि 1946 तक नेहरू उनमें दिलचस्पी खो चुके थे. एम ओ मथाई ने अपनी किताब रिमिनिसेंस ऑफ द नेहरू एज में उन्हें अजीबोगरीब महिला बताया. बाद में वह कश्मीर में शेख अब्दुल्ला के साथ काम करने लगीं. उन्हें कथित देशविरोधी गतिविधियों के लिए गिरफ्तार करके जेल में भी डाला गया.

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    सरोजिनी नायडू की बड़ी बेटी थीं पद्मजा नायडू.

    पद्मजा नायडू से रिश्ते
    पद्मजा देश की स्वर कोकिला कही जाने वाली सरोजिनी नायडू की बड़ी बेटी थीं. वह पहले हैदराबाद के नवाब सालार जंग के प्यार में दीवानी हुईं. फिर नेहरू के करीब आ गईं. मथाई लिखते हैं, 1946 जब मैं उनसे इलाहाबाद में मिला, तब वह नेहरू के घर को संभालने में लगी हुईं थीं. फिर दिल्ली में उन्होंने यही किया. वह हमेशा नेहरू के बगल के कमरे में रहने पर जोर देती थीं. नवंबर के पहले हफ्ते में वह हमेशा हैदराबाद से नेहरू के आवास पर आ जाती थीं. ताकि नेहरू (14नवंबर), इंदिरा (19 नवंबर) और अपना (17 नवंबर) बर्थ-डे साथ मना सकें. इंदिरा को उनका आना अच्छा नहीं लगता था. न ही उनका वहां लंबा ठहरना. ये वो समय भी था, जब नेहरू की करीबी लेडी माउंटबेटन से भी बनी हुई थी.

    खबरें थीं कि नेहरू शादी के लिए प्रोपोज करेंगे
    1947 के जाड़ों में नेहरू को लखनऊ जाना था. सरोजिनी नायडू उत्तर प्रदेश की राज्यपाल थीं. खबरें फैलने लगीं कि नेहरूजी पद्मजा को शादी के लिए प्रोपोज करेंगे. नेहरू लखनऊ आए लेकिन लेडी माउंटबेटन के साथ. ये बात वहां पहले से मौजूद पद्मजा को खराब लगी. एक साल बाद जब उन्होंने नेहरू के बेडरूम में एडविना के दो फोटोग्राफ देखे तो खासी नाराज और आहत हुईं कि वहां उनकी कोई फोटो क्यों नहीं है. उन्होंने तुरंत वहां अपनी एक छोटी सी फोटो लगा दी.

    वह नेहरू से शादी करना चाहती थीं
    1948 में पद्मजा जब हैदराबाद से सांसद चुनी गईं तो दिल्ली में प्रधानमंत्री हाउस में ठहरीं, वो भी नेहरू के बगल के कमरे में. बाद में उन्हें किसी तरह से वहां से भेजा गया. मथाई का मानना था कि वह नेहरू से शादी करना चाहती थीं लेकिन जब उन्हें लगा कि नेहरू के जीवन में केवल वही नहीं बल्कि कई स्त्रियां हैं. तो वह काफी उदास भी हुईं. हालांकि बाद में पद्मजा को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया. उन्होंने इस पद पर खुद को बेहतर भी साबित किया. हालांकि कहा जाता है कि अगर इंदिरा बीच में नहीं होतीं तो नेहरू उनसे शादी कर सकते थे. यह बात खुद नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित ने इंदिरा की करीबी दोस्त पुपुल जयकर को बताई थी.

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    नेहरू की बहन विजय लक्ष्मी पंडित ने पुपुल जयकर को बताया था कि नेहरू अपनी बेटी इंदिरा को दुखी नहीं करना चाहते थे इसलिए उन्होंने पद्मजा से शादी नहीं की.

    क्यों नहीं की शादी
    पुपुल ने अपनी किताब में लिखा, आधी सदी बाद मैंने विजयलक्ष्मी पंडित से नेहरू और पद्मजा के संबंधों के बारे में पूछा. उनका जवाब था, ‘तुम्हें क्या पता नहीं पुपुल कि वे वर्षों तक साथ रहे?’ यह पूछने पर कि उन्होंने पद्मजा से शादी क्यों नहीं की, उन्होंने जवाब दिया, ‘उन्हें लगा कि इंदु पहले ही बहुत सदमा झेल चुकी है, वे उसे और चोट नहीं पहुंचाना चाहते थे.’

    जब पद्मजा को गुस्सा आया
    नेहरू के महिलाओं के प्रति अनुराग को लेकर भी काफी कुछ लिखा और कहा गया. प्रधानमंत्री हाउस के चीफ सेक्यूरिटी अफसर रूस्तम जी ने अपनी किताब में लिखा कि नेहरू को महिलाओं का साथ यकीनन भाता था. लेकिन आमतौर पर वो महिलाएं प्रखर औऱ मेघा वाली थीं. ‘इंडियन समरः द सीक्रेट हिस्ट्री ऑन एंड ऑफ एन एम्पायर’ के लेखक अलेक्स वॉन टेजमन ने कुछ समय पहले एक इंटरव्यू में कहा, एक बार पद्मजा ने गुस्से में एडविना की तस्वीर फेंक दी.

    ये श्रृद्धा माता कौन थीं
    ये 1948 की बात है. एक युवा संन्यासिन बनारस से नई दिल्ली आई. उसका नाम श्रृद्धा माता था. वह संस्कृत में विद्वान थीं. कई सांसद उनके शिष्य़ थे. वह आकर्षक काया वाली सुंदर महिला थीं. पहले तो नेहरू ने उनसे मिलने से इन्कार कर दिया. फिर जब उनकी नेहरू से पहली मुलाकात हुई तो ये लंबी चली. फिर तो मुलाकातें लगातार ही होने लगीं. कहा जाता है कि उनका नेहरू पर प्रभाव भी दिखने लगा. वह सीधे प्रधानमंत्री हाउस में आती थीं. अक्सर रात में तब आती थीं जब नेहरू अपना काम खत्म कर चुके होते थे. बाद में वह गायब हो गईं. इसके कुछ दिनों बाद फिर बेंगलुरु से प्रधानमंत्री हाउस में उनके पत्रों का एक बंडल भेजा गया, जो नेहरू ने उन्हें लिखे थे. साथ में एक डॉक्टर का पत्र आया कि ये पत्र उन्हें उस महिला से मिले हैं, जो यहां चर्च अस्पताल में एक बच्चे को जन्म देने आई थी.

    नेहरू से थे रोमांटिक रिश्ते
    बाद में कुछ समय गायब रहने के बाद उत्तर भारत लौटीं. उन्होंने जयपुर में अपना स्थायी ठिकाना बना लिया. वहां सवाई मानसिंह ने उन्हें रहने के लिए आलीशान किला दिया. बाद में जब इंडिया टुडे की एक रिपोर्टर ने उनसे मुलाकात करने में सफलता हासिल की. तब उन्होंने संकेतों में जाहिर किया कि उनके और नेहरू के बीच प्रगाढ़ रोमांटिक रिश्ते थे. बाद में कुछ लोगों ने साजिश रचकर उनके और नेहरू के बीच दूरियां बनाने की कोशिश की. हालांकि उनके जयपुर में रहने के दौरान नेहरू एक बार उनसे मिलने गए. श्रृद्धा माता का जिक्र बाद में खुशवंत सिंह ने भी अपनी किताब में किया. वह उनसे जब मिले तो श्रृद्धा माता ने उनसे नेहरू के करीबी का दावा किया.

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    पंडित जवाहर लाल नेहरु और ए़़डविना माउंटबेटन (getty)

    कैसे थे एडविना माउंटबेटन से रिश्ते
    इसमें कोई शक नहीं कि नेहरू और लेडी एडविना माउंटबेटन एक दूसरे से प्यार करते थे। हां, इन रिश्तों को कहां तक आगे ले जाकर देखा जाए, उसे लेकर जरूर भ्रम हैं. नेहरू और एडविना के बीच जो एक आत्मीयता पनपी, वो तब तक कायम रही, जब तक एडविना जिंदा रहीं. केएफ रूस्तमजी की डायरी के संपादित अंश किताब के रूप में प्रकाशित हुए. उसमें उन्होंने भी एडविना और नेहरू के प्यार पर चर्चा करते हुए लिखा, दोनों अभिजात्य थे. दोनों की रुचियां परिष्कृत थीं. दोनों एक दूसरे को काफी पसंद करते थे.

    उस अध्याय को क्यों रोका गया
    जब मथाई ने रिमिनिसेंस ऑफ नेहरू लिखी तो उसमें उन्होंने एक अध्याय खासतौर पर नेहरू के जीवन में आई महिलाओं पर था. बाद ये अध्याय उन्होंने खुद ही प्रकाशित होने से रोक दिया. इस अध्याय की जगह प्रकाशक ने एक टिप्पणी लिखी कि चूंकि ये अध्याय लेखक का नितांत व्यक्तिगत अनुभव था और इसे उन्होंने बिना किसी निरोध के डीएच लारेंस शैली में लिखा था, जिसे लेखक ने खुद ही आखिरी समय में प्रकाशन से रोक लिया.