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  • रोज़गार सृजन नहीं हुआ तो भावी पीढ़ी माफ़ नहीं करेगी: गंगवार

    रोज़गार सृजन नहीं हुआ तो भावी पीढ़ी माफ़ नहीं करेगी: गंगवार

     

     

    श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने बुधवार को कहा कि यदि हम
    रोज़गार सृजन के कदम उठाने में असफल रहे तो भावी पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी. उन्होंने कहा कि भारत में युवाओं की आबादी दुनिया में सबसे ज्यादा है और प्रत्येक युवा को रोज़गार चाहिए.

    गंगवार ने कहा, ‘यदि रोज़गार सृजन की दिशा में तुरंत आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगी.’ गंगवार बुधवार को नोएडा स्थित वीवी गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान में रोजगार सृजन रणनीति पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे.

    केन्द्रीय श्रम मंत्रालय की यहां जारी विज्ञप्ति के अनुसार गंगवार ने कहा कि उनका मंत्रालय खुद सीधे तौर पर रोजगार सृजन नहीं करता है बल्कि नियोक्ताओं और कर्मचारियों के लिए उपयुक्त माहौल बनाता है. उन्होंने कहा कि कौशल विकास और रोज़गार सृजन के मामले में सरकार सही दिशा में आगे बढ़ रही है.

    गंगवार ने अपने संबोधन में नोटबंदी का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि नोटबंदी से पिछले एक साल के दौरान कई बेहतर परिणाम सामने आए हैं. सरकार ने आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी की घोषणा की थी.गंगवार ने इस दौरान वीवी गिरी राष्ट्रीय श्रम संस्थान के चार प्रकाशनों को भी जारी किया और संस्थान के मरम्मत के बाद नए तैयार किए गए सेमिनार ब्लॉक का भी उद्घाटन किया.

    सम्मेलन में श्रम सचिव एम सत्यवती ने कहा कि हर साल एक करोड़ युवा रोज़गार चाहने वालों की दौड़ में शामिल हो जाते हैं. उन्होंने कहा, ‘दुर्भाग्य की बात है कि आज बाज़ार में नौकरी पाने के लिए कई युवाओं के पास ज़रूरी कौशल नहीं होता है. सरकार इस कमी को पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है.’

    उन्होंने कहा, ‘हाल में करीब 1.17 करोड़ युवाओं को विभिन्न प्रकार के कौशल में प्रशिक्षित किया गया और इन युवाओं को उद्योगों और संस्थानों में रोज़गार दिलाने के लिए 920 रोज़गार मेलों का आयोजन किया गया.’ सचिव ने मिहला कर्मचारियों को 26 हफ्ते का मातृत्व अवकाश दिए जाने संबंधी महत्वपूर्ण विधेयक के बारे में कहा कि कई नियोक्ता वेतन सहित 26 हफ्ते के अवकाश को देने के पक्ष में नहीं हैं. उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों को इस मुद्दे का समाधान बताना चाहिए.

  • अगर चूहे ने कतरी जिरॉक्स मशीन तो महाराष्ट्र सरकार कतरेगी कर्मचारियों की जेब

    अगर चूहे ने कतरी जिरॉक्स मशीन तो महाराष्ट्र सरकार कतरेगी कर्मचारियों की जेब

     

     

    इन दिनों महाराष्ट्र सरकार के एक आदेश से बवाल मचा हुआ है. सरकार के आदेश से अधिकारी दहशत में हैं और अपना काम छोड़कर जिरॉक्स मशीनों की निगरानी कर रहे हैं. दरअसल महाराष्ट्र सरकार ने एक शासनादेश निकाला है कि अगर जिरॉक्स मशीनें खराब हुईं और बड़े अधिकारियों को इस मामले का पता चला तो उस कर्मचारी की सैलरी से मरम्मत का पैसा काट लिया जाएगा.

    6 नवंबर को निकले इस शासनादेश के बाद अब अधिकारी काम कम जिरॉक्स मशीनों की निगरानी ज्यादा कर रहे हैं. सरकार ने अपने शासनादेश में कहा है कि फोटोकापी मशीनों को सही और सुरक्षित स्थान पर रखा जाए और अगर यह पाया गया कि कर्मचारी की गलती और लापरवाही से फोटोकापी मशीनें खराब हुई हैं तो कर्मचारी की सैलरी से उसके मरम्मत का खर्च काट लिया जाएगा.

    दरअसल मंत्रालय में महंगी जिरॉक्स मशीनें लगाई गई हैं जिनके लगातार खराब होने की शिकायतें शासन के बड़े अधिकारियों के पास पहुंच रही थी. शासन ने एक सर्वे करवाया जिसमें पाया गया कि अधिकतर जिरॉक्स मशीनों के आस-पास या ऊपर खाने-पीने का सामान रख दिया जाता है जिससे चूहे आ जाते हैं और मशीनों को नुकसान पहुंचाते हैं.

    इससे तंग आकर सरकार ने एक शासनादेश निकालकर कर्मचारियों को हिदायत दी है कि अगर गलती हुई तो कर्मचारियों की सैलरी से उसका खर्च काटा जाएगा जिसके बाद अब कर्मचारी काम कम और जिरॉक्स मशीनों की निगरानी ज्यादा कर रहे हैं.ये भी पढ़ें-
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  • दिल्ली, सियोल ने ‘दोस्ती समझौते’ को मंजूरी दी

    दिल्ली, सियोल ने ‘दोस्ती समझौते’ को मंजूरी दी

     

     

    दिल्ली सरकार के बयान के अनुसार, ‘दोस्त’ बनने की दिशा में पहला कदम में, दिल्ली और सियोल की सरकारों ने बुधवार को एक “दोस्ती शहर समझौते” के मसौदे को मंजूरी दी थी।

    सियोल मेट्रोपॉलिटन सरकार का एक प्रतिनिधिमंडल, जो मेयर पार्क के नेतृत्व में चला गया, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से मिला। मसौदा समझौते के अनुसार, दोनों शहरों में स्मार्ट सिटी, ई-गवर्नेंस, परिवहन, संस्कृति, पर्यटन, जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के क्षेत्र में एक्सचेंजों को सहयोग और बाहर ले जाना होगा।

    इससे पहले कि आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए जा सकें, इससे पहले विदेश मंत्रालय द्वारा इस समझौते को मंजूरी देनी होगी। हालांकि उनके शहर औपचारिक रूप से अभी भी दोस्त नहीं हो सकते हैं, लेकिन केजरीवाल और श्री पार्क को यह पता चला कि वे पहले मिले थे। दोनों को 2006 में रमन मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और समारोह के लिए मनीला में मिले थे।

  • भारत में ड्रग्स-हथियारों की तस्करी के लिए हो सकता है ड्रोन का इस्तेमाल!

    भारत में ड्रग्स-हथियारों की तस्करी के लिए हो सकता है ड्रोन का इस्तेमाल!

     

     

    पाकिस्तान के आतंकवादी और तस्कर भारत में आतंक फैलाने के लिए नई-नई तकनीक अपना रहे हैं. पाक आतंकी और तस्कर सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचने के लिए नशीले पदार्थों और हथियारों को भारतीय सीमा पर गिराने के लिए ड्रोन और पैराग्लाइडर्स का इस्तेमाल कर सकते हैं. मल्टी एजेंसी ग्रुप की ओर से एक खुफिया रिपोर्ट में ये बातें कही गई हैं.

    ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी ने संबंधित रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है. इस रिपोर्ट में पंजाब में आतंकवादी गतिविधियां फिर से शुरू होने की कोशिशों पर चिंता जताई गई है. साथ ही आने वाले दिनों में सीमा पार से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के कैसे ट्रेंड हो सकते हैं, इसपर चर्चा की गई है.

    इस खुफिया रिपोर्ट को तैयार करने वाले ग्रुप में सरकार के अधिकारी, आर्मी, बीएसएफ और पंजाब पुलिस के अधिकारी शामिल थे. रिपोर्ट में सीमा पार से नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी पर चिंता जाहिर की गई है. साथ ही ये आशंका जताई गई है कि कैसे पाक आतंकी ड्रोन के जरिए भारत में ड्रग्स और हथियार गिरा सकते हैं और जीपीएस से उसे ट्रैक कर सकते हैं.

    बीएसएफ ने इस तरह के 40 मामले दर्ज किए हैं. इनमें से 36 मामले तो सिर्फ अमृतसर सेक्टर से हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब में घुसपैठ में कैसे सिख और कश्मीरी आतंकवादी मदद कर रहे हैं.रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि सीमापार इलाकों में कैसे अफसरों को फंसाकर उनके जरिए तस्करी कराने के लिए कुछ महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, ‘दोनों तरफ से गतिविधियां तेज होने पर तस्कर अपना काम निकालने के लिए बीएसएफ रेंजर्स को फंसा सकते हैं.’

    यही नहीं, बीएसएफ के मुताबिक, तस्कर और आतंकवादी आपस में बातचीत करने के लिए फेसबुक, व्हाट्सऐप, स्काइप, आईएमओ और मैसेंजर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती है.

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  • इंदिरा गांधी जिला अस्पताल को E-hospital का दर्जा

    इंदिरा गांधी जिला अस्पताल को E-hospital का दर्जा

     

     

    कोरबा का आईएसओ प्रमाणित इंदिरा गांधी जिला अस्पताल को ई-हॉस्पिटल का दर्जा मिला है. अब यहां पंजीयन से लेकर सारे काम ऑनलाइन हो गए हैं. जिला अस्पताल की मॉनीटरिंग सीधे दिल्ली से होगी.

    अस्पताल के ई-हॉस्पिटल बनने से सुविधाओं में इजाफ़ा होने की बात जिम्मेदार कह रहे हैं. बता दें कि इंदिरा गांधी जिला अस्पताल को कायाकल्प योजना के पहले चरण में प्रथम पुरस्कार मिल चुका है. अब ई-हॉस्पिटल का दर्जा भी मिल गया है.

    दरअसल डिजिटल भारत के तहत केंद्रीय स्वास्थय विभाग प्रदेश के चुनिंदा 9 जिला अस्पतालों को ई-हॉस्प्टिकल बनाने की कवायद कर रहा है. कोरबा के सीएमएचओ डॉ. पीएस सिसोदिया ने बताया कि जिला अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों के पंजीयन, उपचार से लेकर सारे काम और डाटा ऑनलाइन होंगे. मरीजों के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए यूनिक आईडी नंबर मिलेगा, जिसमें मरीज का सारा रिकॉर्ड दर्ज होगा.

  • भारत की दो-टूक: पाक को बात करनी है तो आतंक को सपोर्ट करें बंद

    भारत की दो-टूक: पाक को बात करनी है तो आतंक को सपोर्ट करें बंद

     

     

    भारत ने यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए उपयुक्त माहौल जरूरी है जो आतंक, आतंकवाद और आतंकवादियों को पाकिस्तान की ओर से समर्थन देना बंद करने से ही पैदा की जा सकती है.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘पाकिस्तान के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के बारे में हमारा रुख अभी भी पहले की तरह है. हमने हमेशा कहा है कि पड़ोसी देश से बातचीत के लिए उपयुक्त माहौल होना चाहिए. यह माहौल आतंक, आतंकवाद और आतंकवादियों को पाकिस्तान की ओर से समर्थन देना बंद करके ही बनाई जा सकती है.’ विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से पाकिस्तान से आई उस खबर के बारे में पूछा गया था जो भारत-पाक वार्ता फिर से शुरू करने के विषय से संबंधित थी.

    उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान ने दिसंबर 2015 में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान समग्र द्विपक्षीय वार्ता प्रारूप के तहत बातचीत शुरू करने की घोषणा की थी, हालांकि 2016 में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन की ओर से पठानकोठ हमले के बाद वार्ता रूक गई थी.

    यह पूछे जाने पर वार्ता शुरू करने के लिए क्या कोई समयसीमा है, कुमार ने कहा कि कोई भी कृत्रिम समयसीमा तय नहीं की जा सकती. जब तक उपयुक्त माहौल नहीं बनेगा, तब तक क्या कहा जा सकता है.दक्षेस के बारे में एक सवाल के जवाब में प्रवक्ता ने कहा कि एक देश है जिसे माहौल बनाना है जहां अर्थपूर्ण बातचीत हो सकती है और वह सफल हो सकती है.

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  • क्या हिमाचल में टूटेगा 2003 की वोटिंग का रिकॉर्ड?

    क्या हिमाचल में टूटेगा 2003 की वोटिंग का रिकॉर्ड?

     

     

    हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में हमेशा मतदान प्रतिशत अन्य राज्यों से अधिक रहा है. चाहे जितना भी दुर्गम क्षेत्र हो लोग अपने अधिकार का इस्तेमाल करते रहे हैं.

    हिमाचल के चुनावी इतिहास में सबसे ज्यादा 74.51 फीसदी मतदान 2003 के चुनाव में हुआ था. जबकि 1977 में सबसे कम 58.57 फीसदी वोट पड़े थे.
    इस बार चुनाव आयोग ने लोगों को मतदान करने के लिए काफी प्रेरित किया है. 1990 के चुनाव में 67.76 फीसदी वोट डाले गए थे.

    जबकि अन्य सभा विधानसभा चुनावों में वोटिंग प्रतिशत 70 फीसदी से अधिक रहा है. 2012 में भी 73.51 प्रतिशत लोगों ने मताधिकार का इस्तेमाल किया.हिमाचल विधानसभा चुनाव में पहली बार थर्ड जेंडर भी वोट डालेंगे. वे 20 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान करेंगे. मतदान का अधिकार मिलने के बाद ऐसे कुल 29 मतदाताओं ने अपना नाम दर्ज कराया है.

    धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र से करीब आठ सौ तिब्बती समुदाय के लोगों के नाम भी मतदाता सूची में दर्ज हैं. मालूम हो कि हिमाचल प्रदेश के श्याम शरण नेगी देश के पहले मतदाता और चुनाव आयोग के ब्रांड अंबेसडर भी हैं. जिनके वोट डालने के लिए चुनाव आयोग ने मतदान केंद्र पर रेड कारपेट बिछाया है.

    कुल मिलाकर हिमाचल में वोटिंग को लेकर लोगों में खासा उत्साह है. लेकिन क्या 2003 का रिकॉर्ड टूट पाएगा, यह बड़ा सवाल है.

  • केंद्रीय कर्मचारियों को नई सौगात, सरकार ने HBA की सीमा बढ़ाई

    केंद्रीय कर्मचारियों को नई सौगात, सरकार ने HBA की सीमा बढ़ाई

     

     

    केन्द्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने केन्द्रीय कर्मचारियों के लिये हाउस बिल्डिंग एडवांस नियमों में बदलाव किया है. अब वह एक करोड़ रुपये तक की कीमत वाले घर बनाने या खरीदने के लिये 25 लाख रुपये तक का एडवांस ले सकेंगे. इससे पहले यह सीमा तीस लाख रुपए तक के मकान के लिए 7.50 लाख रुपए थी.

    मंत्रालय ने केन्द्रीय कर्मचारियों के लिये आवास हेतु भवन निर्माण के लिये एडवांस राशि जारी करने के नियमों (एचबीए) में बदलाव कर यह सुविधा शुरू की है. मौजूदा व्यवस्था में भवन निर्माण या खरीद के लिये मकान की अधिकतम कीमत 30 लाख रुपये थी और इसके लिये 7.50 लाख रुपये तक का ही एडवांस मिलता था.

    मंत्रालय की ओर से नियमों में संशोधन की आज जारी जानकारी के मुताबिक इससे लगभग 50 लाख केन्द्रीय कर्मचारियों को लाभ होगा. नये नियमों के मुताबिक पति और पत्नी, दोनों के केन्द्रीय कर्मचारी होने की स्थिति में दोनों को एक साथ या अलग-अलग एडवांस लेने की छूट दी गयी है. इससे पहले सिर्फ पति या पत्नी को ही एडवांस राशि लेने का विकल्प दिया गया था. हालांकि केन्द्रीय कर्मचारी को उसके जीवनकाल में एक ही बार एडवांस राशि लेने का नियम अब भी बरकरार है.

    मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि आवास की बढ़ती जरूरतों को देखते हुये सरकार ने एचबीए नियमों को आसान बनाने की पहल की है. इससे भवन निर्माण क्षेत्र में छायी मंदी से भी उबरने में मदद मिलेगी.ये भी पढ़ें-
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  • आपातकालीन योजना के रूप में हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ करने के लिए dips

    आपातकालीन योजना के रूप में हवा की गुणवत्ता ‘गंभीर’ करने के लिए dips

     

     

    राजधानी में बुधवार को प्राथमिक स्कूलों को बंद करने सहित कड़े उत्सर्जन नियंत्रण उपायों और स्वास्थ्य की सावधानी बरतने के लिए मंगलवार को राजधानी में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच गया।

    केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मुताबिक, दिल्ली के लिए वायु गुणवत्ता सूचकांक (एएयूआई) 4:00 बजे से 448 था, जिससे यह ‘गंभीर’ हो गया – यह सबसे खराब श्रेणी और चेतावनी के साथ आता है जो स्वस्थ लोगों से भी प्रभावित होता है। विषाक्त हवा

    15 निगरानी स्टेशनों से डेटा का उपयोग करने वाले एएयूआई ने यह भी बताया कि दिल्ली में प्रमुख प्रदूषक थे, जो कि छोटे पीएम -2.5 और मोटे पीएम 10 दोनों के बीच कणिक पदार्थ थे। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, फरीदाबाद, गाजियाबाद और नोएडा में भी गंभीर प्रदूषण हुआ था, जबकि गुरुग्राम में बहुत कम हवा की गुणवत्ता थी।

    सुरक्षित सीमा से परे

    दिल्ली में, हानिकारक पीएम 2.5 का स्तर, जो फेफड़ों में गंभीर श्वसन संबंधी बीमारी पैदा करने में काफी छोटा होता है, प्रति घन मीटर (ug / m3) 60 माइक्रोग्राम के स्तर पर कई बार होता था। दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण समिति के स्टेशन पर, आनंद विहार में, पीएम2.5 की 7.10 पीएम की एकाग्रता एक बहुत बड़ी 732 ug / m3 या 12 बार सुरक्षित स्तर से अधिक था।

    पीएम 10 के सांद्रण भी 100 डिग्री / एम 3 के मानक से ऊपर थे, आर.के. पुरम स्टेशन 835 ug / m3 के साथ 7.20 पीएम के रूप में रिकॉर्ड किया गया था।

    दिल्लीवासियों को जल्द ही राहत मिलने की संभावना नहीं है, क्योंकि राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र (एनडब्ल्यूएफसी) ने कहा है कि मंगलवार को घने कोहरे को तीन दिन तक जारी रहने की संभावना है, इससे पूर्व में दृश्यता कम हो सकती है क्योंकि मौसम कोहरे के गठन के लिए अनुकूल है।

    मंगलवार को प्रदूषण के स्तर ने ग्रेडिंग रिस्पांस एक्शन प्लान की ‘गंभीर’ श्रेणी के तहत उपायों को लागू करने के लिए पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) को प्रेरित किया, जो पहले से ही लागू है।

    योजना के अनुसार, एनसीआर राज्य सरकारों को सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना होगा और धूल और वाहनों के प्रदूषण पर नीचे दबाना होगा।

    ‘दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता’

    इसके अलावा, दिल्ली सरकार ने बुधवार को सभी प्राथमिक स्कूलों को बंद करने की घोषणा की।

    विशेषज्ञों ने हालांकि, कहा कि उत्सर्जन को कम करने की दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है। ईपीसीए के एक सदस्य और विज्ञान और पर्यावरण केंद्र के निर्देशक, सुनीता नारायण ने कहा कि यदि ईपीसीए द्वारा पहले से पहचाने गए और सुझाए गए दीर्घकालीन उपाय लागू नहीं किए गए हैं, तो “हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो सकता”।

  • प्रदूषण से जंग: दिल्‍ली BJP अध्‍यक्ष मनोज तिवारी ने बांटे 1500 मास्‍क

    प्रदूषण से जंग: दिल्‍ली BJP अध्‍यक्ष मनोज तिवारी ने बांटे 1500 मास्‍क

     

     

    दिल्‍ली का दम फुला रहे प्रदूषण से लड़ने के लिए जहां दिल्‍ली सरकार ऑड-ईवन फॉर्मूला लागू करने की तैयारी कर रही है. वहीं भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष ने भी प्रदूषण से परेशान लोगों को 1500 मास्‍क बांटकर राहत दी.

    दिल्‍ली के कनॉट प्‍लेस में दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने लोगों को मास्‍क बांटने के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए भी जागरुक किया. वहीं शत्रुघ्‍न सिन्‍हा के ट्वीट पर कहा कि वे खुद दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल से 7 महीने से वक्‍त मांग रहे हैं.

    उन्‍होंने कहा कि वे भी सरकार के ही आदमी हैं. वे भी प्रदूषण को लेकर चि‍ंतित हैं. जो भी ट्वीट कर रहे है वे यह पहलू भी देखें. साथ ही तिवारी ने कहा कि पराली जलाने से रोकने के लिए पंजाब सरकार का बजट पास नही किया गया इसपर भी उन्‍होंने ऐसे NGO से बात की है जो पराली के बदले पैसे देने को तैयार है.तो ये सब महज बातें हैं  और सभी राजनीति कर रहे है.

    वहीं स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने केजरीवाल के ऑड-ईवन फॉर्मूले को लागू करने के मसले पर केजरीवाल का सहयोग करने की बात कही. उन्‍होंने कहा कि दिल्ली में अचानक स्थिति गंभीर हो गयी है. स्वास्थ्य मंत्रालय लगातार इस पर पर्यावरण मंत्रालय से चर्चा कर रहा है.पर्यावरण राज्यमंत्री महेश शर्मा ने इस पर मीटिंग भी बुलाई थी और मंत्रालय इस पर लगातार काम कर रहा है कि इन हालातों को सामान्‍य किया जाए. वहीं केजरीवाल सरकार के ऑड-ईवन फॉर्मूले पर वे बोलीं कि प्रदूषण को कम करने की किसी भी पहल की सराहना होनी चाहिए.