Author: admin

  • झारखंड मंत्रिमंडल विस्तार: क्या है पूरा मामला?

    झारखंड मंत्रिमंडल विस्तार: क्या है पूरा मामला?

    झारखंड मंत्रिमंडल विस्तार: क्या है पूरा मामला?

    झारखंड में हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री पद पर शपथ लेने के बाद से ही मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं. यह सिर्फ़ एक सामान्य राजनैतिक घटना नहीं है, बल्कि राज्य के भविष्य और विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम है. आइये, जानते हैं इस पूरी कहानी में क्या है खास? क्या इस विस्तार से झारखंड के नागरिकों को कुछ फायदा मिलेगा? क्या ये राज्य के लिए एक नया युग लेकर आएगा या फिर पुरानी गलतियों की पुनरावृत्ति होगी?

    मंत्रिमंडल विस्तार: कब होगा और किन-किन का होगा समावेश?

    झारखंड विधानसभा चुनावों में हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने शानदार जीत हासिल की. इस जीत के बाद से ही कांग्रेस और राजद के साथ मिलकर सरकार बनाने की अटकलें शुरू हो गई थीं. यह सरकार अब अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने वाली है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह विस्तार कब होगा और इसमें किन नेताओं को जगह मिलेगी?

    बहुत सी अटकलें हैं कि यह मंत्रिमंडल विस्तार 9 दिसंबर से पहले ही हो जाएगा, जब झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र शुरू होने वाला है. सूत्रों की मानें तो जेएमएम ने अपनी तरफ से 6 मंत्रियों के नाम लगभग तय कर लिये हैं. अब कांग्रेस और राजद के पास ये चुनौती है कि वे अपने-अपने कोटे के मंत्रियों का चयन करें. कांग्रेस को चार और राजद को एक मंत्री पद मिलने की उम्मीद है.

    कांग्रेस में मंथन जारी

    कांग्रेस में मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए कई नेता दावेदारी कर रहे हैं. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने हाल ही में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की और इस मामले पर चर्चा की. यह एक महत्वपूर्ण बैठक थी, जिससे कांग्रेस के मंत्रियों के नाम तय करने में मदद मिलेगी. यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि क्षेत्रवार, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला, अल्पसंख्यक और सामान्य सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व इस विस्तार में कैसे होगा। दिल्ली में भी इस मुद्दे पर कई बैठकें हो रही हैं ताकि इस मामले में फैसला लिया जा सके।

    झारखंड मंत्रिमंडल का भविष्य: एक नई शुरुआत या फिर पुरानी नीतियों का दोहराव?

    इस बार CPM (माले) ने भी राज्य में 2 सीटें जीती हैं. हालाँकि, उन्होंने सरकार में शामिल होने से साफ़ मना कर दिया है, और हेमंत सोरेन सरकार को बाहर से समर्थन देने का ऐलान किया है। इसलिए मंत्रिमंडल में जेएमएम के 7, कांग्रेस के 4 और राजद के 1 मंत्री शामिल होने की सम्भावना है.

    यह मंत्रिमंडल विस्तार झारखंड के लिए एक नई शुरुआत साबित हो सकता है, लेकिन इसके साथ ही कुछ महत्वपूर्ण सवाल भी उठ रहे हैं. क्या यह सरकार पिछली सरकारों की तरह ही काम करेगी, या फिर इस बार राज्य के विकास और समृद्धि के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जाएंगे? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब समय ही देगा. मुख्यमंत्री के तौर पर हेमंत सोरेन के पहले कार्यकाल के कामों को ध्यान में रखते हुए लोग उनसे इस बार उम्मीदें काफी ज्यादा लगाए हुए हैं.

    विकास की ओर कदम?

    आने वाले दिनों में देखना होगा कि ये मंत्रिमंडल विस्तार झारखंड के विकास के लिए किन नीतियों और योजनाओं को लागू करेगा. क्या यह राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार के क्षेत्र में सुधार ला पाएगा? क्या यह राज्य के आदिवासी और पिछड़े वर्गों के विकास के लिए कुछ ठोस कदम उठा पाएगा? यह सब समय के साथ पता चलेगा.

    विशेष सत्र और विश्वास मत

    झारखंड में 9 दिसंबर को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है. इस सत्र से पहले ही मंत्रिमंडल विस्तार पूरा होने की उम्मीद है. इस सत्र में सरकार को विश्वास मत हासिल करना होगा, ताकि उसकी स्थिरता सुनिश्चित हो सके.

    मुख्य बिन्दु (Take Away Points)

    • झारखंड में मंत्रिमंडल विस्तार जल्द होने की उम्मीद है.
    • जेएमएम, कांग्रेस और राजद नेताओं के बीच चल रहे हैं विचार-विमर्श.
    • 9 दिसंबर से पहले मंत्रिमंडल विस्तार पूरा होने की उम्मीद है.
    • इस विस्तार में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर जोर है.
    • 9 दिसंबर से होने वाले विधानसभा के विशेष सत्र में सरकार को विश्वास मत हासिल करना होगा.
  • चैंपियंस ट्रॉफी 2025:  क्या होगा आगे?

    चैंपियंस ट्रॉफी 2025: क्या होगा आगे?

    क्या आप जानते हैं कि चैंपियंस ट्रॉफी 2025 को लेकर आईसीसी की बैठक में क्या हुआ?

    चैंपियंस ट्रॉफी 2025: पाकिस्तान में होने वाले इस मेगा इवेंट को लेकर आईसीसी ने बड़ी बैठक की, जिसमें कई अहम फैसले लिए गए. क्या आपको पता है कि आखिर क्या फैसले लिए गए और क्या-क्या मुश्किलें आईसीसी के सामने हैं?

    आईसीसी की बैठक: क्या हुआ और क्यों मच रहा है बवाल?

    भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के चलते, 2025 चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी को लेकर काफी विवाद है. भारत सरकार पहले ही साफ कर चुकी है कि भारतीय टीम पाकिस्तान नहीं जाएगी. इससे आईसीसी को हाइब्रिड मॉडल अपनाने पर मजबूर होना पड़ सकता है. इसमें कुछ मैच पाकिस्तान में और कुछ अन्य देशों में आयोजित किए जाएँगे. लेकिन, अब पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने हाइब्रिड मॉडल को ठुकरा दिया है जिससे आईसीसी के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं।

    हाइब्रिड मॉडल: क्या है इसमें पाकिस्तान को इतनी दिक्कत?

    पीसीबी का कहना है कि हाइब्रिड मॉडल से भारत को फायदा होगा और ये पाकिस्तान के खिलाफ है. वो चाहता है कि सभी मैच पाकिस्तान में ही खेले जाएँ. अगर हाइब्रिड मॉडल को ठुकरा दिया जाता है तो आईसीसी को चैंपियंस ट्रॉफी का आयोजन दूसरे देश में शिफ्ट करना होगा, जो एक बड़ा झटका होगा. 2031 के वनडे विश्व कप पर भी खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि वो भारत और बांग्लादेश की संयुक्त मेजबानी में होगा. इस स्थिति में क्या भारत को विश्व कप में भी हिस्सा लेने से मना करना पड़ेगा?

    क्या होगा आगे?

    आईसीसी की बैठक में ये तय किया जाना था कि आखिरकार 2025 चैंपियंस ट्रॉफी कहाँ होगी और क्या ये हाइब्रिड मॉडल में होगी या नहीं. बैठक में आईसीसी के सभी बोर्ड सदस्य शामिल हुए. अब देखना यह होगा कि आईसीसी इस विवादित स्थिति से कैसे निपटेगा. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इस विवाद के गंभीर परिणाम हो सकते हैं और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के भविष्य को खतरा हो सकता है।

    टूर्नामेंट को दूसरे देश में शिफ्ट करने की संभावना:

    अगर पाकिस्तान अपने फैसले पर अड़ा रहा तो आईसीसी को टूर्नामेंट दूसरी जगह ले जाने का निर्णय लेना पड़ सकता है. लेकिन इसे पाकिस्तान के लिए भारी नुकसान होगा और पीसीबी के साथ विश्व क्रिकेट बोर्डों का रिश्ता भी तनावपूर्ण हो जाएगा.

    क्या है समाधान?

    यह स्थिति क्रिकेट के प्रशंसकों के लिए निराशाजनक है. इस मामले का समाधान तलाशना आवश्यक है जो दोनों देशों को स्वीकार्य हो और साथ ही अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के खेल को नुकसान न पहुंचाए। डिप्लोमेसी के जरिए ही इस मुश्किल से बाहर निकला जा सकता है। बातचीत के जरिए इस मामले का समाधान करना होगा.

    भावी कदम:

    आईसीसी को और भारत एवं पाकिस्तान को राजनैतिक एवं कूटनीतिक दखल से काम लेते हुए मिलकर बात करनी चाहिए और ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जो सबके लिए उचित हो। विश्व क्रिकेट की मजबूती एवं इसकी भविष्य की रणनीति के लिए यह ज़रूरी है.

    टेक अवे पॉइंट्स:

    • चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की मेजबानी को लेकर बड़ा विवाद.
    • भारत ने अपनी टीम को पाकिस्तान भेजने से किया इनकार.
    • पाकिस्तान ने हाइब्रिड मॉडल को किया रिजेक्ट.
    • आईसीसी टूर्नामेंट को दूसरे देश में शिफ्ट करने पर विचार कर सकता है.
    • भारत और पाकिस्तान को मिलकर इस मुद्दे का समाधान खोजना होगा.
  • नयनतारा: संघर्ष से सफलता तक का सफ़र

    नयनतारा: संघर्ष से सफलता तक का सफ़र

    नयनतारा: एक सितारे का उदय और संघर्ष!

    साउथ इंडियन सिनेमा की खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्री नयनतारा का सफ़र आसान नहीं रहा है। शुरुआती दौर में ट्रोलिंग से लेकर अपने रिश्तों को लेकर मीडिया की निगाहों में रहना, नयनतारा ने सब कुछ झेला है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उन्होंने अपने सबसे मुश्किल दौर को कैसे पार किया? आइए जानते हैं उनके संघर्ष और सफलता की कहानी!

    गजनी से बिल्ला तक का सफ़र

    2005 में आई फिल्म ‘गजनी’ नयनतारा के करियर का टर्निंग पॉइंट तो बन गई, लेकिन इसी फिल्म ने उन्हें ट्रोलिंग का भी शिकार बना दिया। उनके वज़न को लेकर कई भद्दी टिप्पणियां की गईं। नयनतारा ने अपनी नेटफ्लिक्स डॉक्यूमेंट्री ‘नयनतारा: बियॉन्ड द फेयरीटेल’ में बताया है कि उस वक़्त उनका मन कितना टूटा था। लोगों के कमेंट्स उन्हें काफी आहत करते थे। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

    ट्रोलिंग के तूफ़ान का सामना

    सोशल मीडिया पर उनके वज़न और लुक को लेकर जो बातें कही गईं, वो बेहद निराशाजनक थीं। नयनतारा बताती हैं कि लोग कहते थे कि वो एक्टिंग के लायक नहीं हैं, उनके मोटापे की वजह से उन्हें फिल्मों में काम नहीं करना चाहिए। ऐसे कमेंट्स पढ़कर उन्हें बहुत बुरा लगता था। लेकिन उन्होंने इन बातों को अनदेखा कर अपना काम जारी रखा।

    बिकनी सीन ने बदली क़िस्मत

    2007 में आई फिल्म ‘बिल्ला’ के बिकनी सीन ने नयनतारा के करियर को एक नया मोड़ दिया। यह सीन कई विवादों से घिरा रहा, लेकिन नयनतारा का मानना था कि यहीं से चीजें बदलने वाली थीं। उनका कहना है कि उन्होंने ये सीन इसलिए नहीं किया क्योंकि उन्हें कुछ साबित करना था, बल्कि इसलिए किया क्योंकि डायरेक्टर ने कहा था। उन्होंने अपने फैसले को सही साबित किया।

    मुश्किलों से लड़कर बनाई पहचान

    ‘गजनी’ और ‘बिल्ला’ जैसी फिल्मों के अलावा, नयनतारा ने कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया। हालांकि, इन सफलताओं के पीछे संघर्ष और निराशा की लंबी कहानी है। उन्होंने कई बार अपने काम और व्यक्तिगत जीवन को लेकर आलोचनाओं का सामना किया। लेकिन उन्होंने इन चुनौतियों को हँसते हुए पार किया।

    लगातार मेहनत और समर्पण

    अपनी लगातार मेहनत और समर्पण से नयनतारा ने न केवल दर्शकों का दिल जीता, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बनाई। उनकी सफलता एक प्रेरणादायक कहानी है जो यह बताती है कि कैसे किसी के संकल्प और लगन से मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों को पार किया जा सकता है।

    एक्ट्रेस के तौर पर विकास

    नयनतारा ने समय के साथ खुद को एक अभिनेत्री के तौर पर निखारा है। उनकी बेहतरीन अभिनय क्षमता ने उन्हें आज उस मुकाम पर पहुँचाया है, जिसके वो हमेशा हक़दार रहीं। आज वो एक सफल अभिनेत्री होने के साथ-साथ एक बिज़नेसवुमन भी हैं।

    निष्कर्ष: एक सितारे की रोमांचक यात्रा

    नयनतारा की ज़िन्दगी संघर्षों और सफलताओं से भरी हुई है। उनका सफ़र प्रेरक है क्योंकि यह हमें यह सिखाता है कि कैसे कठिनाइयों का डटकर सामना कर सफलता हासिल की जा सकती है। उनका जज़्बा और आत्मविश्वास लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।

    Take Away Points

    • नयनतारा की शुरुआती ज़िन्दगी चुनौतियों से भरी रही।
    • उन्होंने ट्रोलिंग और निजी ज़िन्दगी की आलोचनाओं का डटकर सामना किया।
    • लगातार मेहनत और समर्पण से उन्होंने सफलता हासिल की।
    • नयनतारा एक प्रेरक व्यक्तित्व हैं जो हमें कठिन परिस्थितियों में भी आशावादी बने रहने का संदेश देती हैं।
  • असीम अरुण: एनएसजी ब्लैक कैट से राजनेता तक का रोमांचक सफ़र!

    असीम अरुण: एनएसजी ब्लैक कैट से राजनेता तक का रोमांचक सफ़र!

    उत्तर प्रदेश के मंत्री और पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण की एनएसजी ब्लैक कैट कमांडो ट्रेनिंग की कहानी जानकर आप दंग रह जायेंगे! यह कहानी सिर्फ़ साहस, अनुशासन और दोस्ती की नहीं, बल्कि एक ऐसे प्रशिक्षण की है जिसने एक आईपीएस अधिकारी को एक नेता बनाया। इस दिलचस्प कहानी में हम उनके प्रशिक्षण के कठिन समय, साथियों के साथ रिश्तों, और उनकी राजनीतिक यात्रा के बारे में जानेंगे। यह कहानी आपके रोंगटे खड़े कर देगी!

    एनएसजी ब्लैक कैट कमांडो ट्रेनिंग: मौत का सामना करने की तैयारी

    2003-04 में, असीम अरुण ने दिल्ली में एनएसजी ब्लैक कैट कमांडो की बेहद कठिन ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग इतनी चुनौतीपूर्ण थी कि एडमिशन फॉर्म में ही मौत के बाद अंत्येष्टि के तरीके के बारे में भी पूछा गया! यह बात अकेले ही बताती है कि यह ट्रेनिंग कितनी जोखिम भरी थी। 33 प्रशिक्षुओं में से एकमात्र आईपीएस अधिकारी होने के नाते उन्हें किसी तरह की छूट की उम्मीद नहीं थी। उन्हें हर चुनौती का सामना अपने दम पर करना था। कठिन अभ्यासों के बीच 5-7 मिनट के विश्राम में भी, उन्हें अन्य प्रशिक्षुओं के साथ चाय बिस्कुट के लिए लाइन में लगना पड़ता था।

    कठोर प्रशिक्षण और अनोखा अनुशासन

    कठिन शारीरिक और मानसिक परीक्षाओं से भरपूर इस ट्रेनिंग में, हर एक दिन एक नई चुनौती लेकर आया था। चाहे वह बेहद थकाऊ दौड़ हो या जटिल बाधाओं को पार करना, असीम अरुण ने दृढ़ता से सभी कठिनाइयों का सामना किया। यह प्रशिक्षण सिर्फ़ शारीरिक क्षमता ही नहीं बल्कि मानसिक दृढ़ता भी परखती थी। असीम अरुण के अनुभव दर्शाते हैं कि ‘ब्लैक कैट’ बनने की राह कितनी चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण थी।

    दोस्ती की कहानी: एक अफसर और पीएसी जवानों की एकजुटता

    ट्रेनिंग के दौरान असीम अरुण के पीएसी के साथी उनके प्रति गहरा सम्मान और चिंता दिखाते थे। वे असीम अरुण को चाय बिस्कुट के लिए लाइन में लगने से रोकने की कोशिश करते थे। अरुण के विचारों से सहमत होते हुए भी उन्होंने उनसे लाइन में न लगने की अपेक्षा की। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि कठोर प्रशिक्षण के बावजूद, आपसी सम्मान और दोस्ती कितना मायने रखती है।

    मिट्टी से सने हाथों में चाय का प्याला

    पूर्व आईपीएस अधिकारी असीम अरुण अपने साथियों की भलाई और समर्थन के प्रति आभारी हैं। वे उनकी मिट्टी से सने हाथों में चाय का पेपर कप आज भी याद करते हैं। इस छोटे से उदाहरण से उन सब के बीच गहरे रिश्ते को दिखाया जाता है जो इस मुश्किल ट्रेनिंग से साथ गुज़रे थे। यह दोस्ती एक कठिन ट्रेनिंग से भी ऊपर उठती दिखती है।

    राजनीति में सफ़र: एक प्रशिक्षित कमांडो से राजनेता तक

    आईपीएस अधिकारी रहते हुए, असीम अरुण ने अपनी नौकरी छोड़कर बीजेपी ज्वाइन की और 2022 में कन्नौज से चुनाव लड़ा, जिसमें उन्होंने सपा उम्मीदवार को हराकर जीत हासिल की। आज, वे उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण राज्यमंत्री हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा यह दिखाती है कि कठोर प्रशिक्षण ने उन्हें अनुशासन, साहस और नेतृत्व के गुण सिखाये जो राजनीति में भी काम आते हैं।

    एक सफल नेता के गुण

    आईपीएस से राजनेता बनने के इस सफर ने असीम अरुण को सिर्फ़ लोकप्रियता ही नहीं दी है। इसने उन्हें उन समस्याओं और लोगों की बेहतर समझ भी दी है। उनकी कार्यशैली में आईपीएस और नेता के अनुभव दोनों शामिल है।

    टेक अवे पॉइंट्स

    • एनएसजी ब्लैक कैट कमांडो ट्रेनिंग की कठिनाई
    • साथियों के साथ असीम अरुण का अनोखा रिश्ता
    • आईपीएस से राजनेता बनने का असाधारण सफ़र
    • नेतृत्व कौशल और अनुशासन की महत्ता
  • सर्दियों की स्टाइल: महिलाओं के लिए बेहतरीन फुटवियर गाइड

    सर्दियों की स्टाइल: महिलाओं के लिए बेहतरीन फुटवियर गाइड

    सर्दियों का मौसम आ गया है और स्टाइलिश दिखने का मौका भी! ठंड से बचाव और स्टाइल, दोनों की चाह रखने वाली महिलाओं के लिए, हम आपके लिए बेहतरीन फुटवियर विकल्प लेकर आए हैं। अपने सर्दियों के लुक को एकदम परफेक्ट बनाने के लिए इस गाइड को पढ़ें।

    बूट्स (Boots): सर्दियों की स्टाइलिश गर्माहट

    बूट्स सर्दियों के लिए एक परफेक्ट चुनाव हैं – वे न सिर्फ़ आपके पैरों को ठंड से बचाते हैं, बल्कि आपके लुक में चार-चाँद भी लगाते हैं। आइए देखते हैं कुछ बेहतरीन विकल्प:

    एंकल बूट्स (Ankle Boots):

    ये छोटे और प्यारे बूट्स आपके कैज़ुअल और स्मार्ट कैज़ुअल दोनों आउटफिट्स के साथ बहुत अच्छे लगते हैं। अपने पसंदीदा जीन्स या स्कर्ट के साथ इन्हें पेयर करके एक कूल लुक पाएँ।

    ओवर-द-नी बूट्स (Over-the-Knee Boots):

    स्टाइल और गर्माहट का परफेक्ट कॉम्बिनेशन! ये बूट्स आपके ड्रेस या स्कर्ट के साथ बेहद खूबसूरत लगते हैं, और सर्दी से बचाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ते।

    लॉन्ग बूट्स (Long Boots):

    पूरे पैरों को ढकने वाले ये बूट्स आपको ठंडी हवाओं से पूरी तरह बचाएंगे। इन्हें जीन्स या लेगिंग्स के साथ पहनकर एक कम्फर्टेबल और स्टाइलिश लुक पाएँ।

    फर-लाइन सैंडल्स (Fur-Lined Sandals) और स्नीकर्स

    हल्के और आरामदायक फुटवियर की तलाश में हैं? फर-लाइन सैंडल्स आपके लिए परफेक्ट हैं। ये आपके पैरों को गर्म रखते हुए स्टाइलिश लुक भी देते हैं। इसके अलावा:

    वॉटरप्रूफ स्नीकर्स (Waterproof Sneakers):

    बारिश या बर्फ में भी अपने पैरों को सूखा और स्टाइलिश रखें! वॉटरप्रूफ स्नीकर्स कम्फर्ट और स्टाइल का बेहतरीन मेल हैं।

    क्लासिक और एलीगेंट विकल्प

    अगर आपका लुक क्लासी और एलीगेंट होना चाहिए, तो ये आपके लिए हैं:

    ऑक्सफोर्ड शूज (Oxford Shoes):

    ये शूज सर्दियों में आपके सूती और ऊनी कपड़ों के साथ बेहद अच्छे लगते हैं, और एक टाइमलेस स्टाइल देते हैं।

    चेल्सी बूट्स (Chelsea Boots):

    लेदर या फैब्रिक में आने वाले चेल्सी बूट्स हर आउटफिट के साथ खूबसूरती से जंचते हैं। इनकी क्लासिक और फैशनेबल अपील आपके लुक को निखारेगी।

    आराम और स्टाइल का पूरा पैकेज

    आराम और स्टाइल, दोनों चाहते हैं? इन विकल्पों पर नज़र डालें:

    फ्लैट बूट्स (Flat Boots):

    ये बूट्स हर आउटफिट के साथ खूबसूरती से जंचते हैं और लंबे समय तक पहनने में भी बहुत आरामदायक हैं।

    यूथ स्टाइल स्नीकर्स (Youth Style Sneakers):

    अपने लुक को यंग और ट्रेंडी बनाए रखने के लिए यूथ स्टाइल स्नीकर्स बेहतरीन विकल्प हैं। इन्हें जीन्स, जैकेट्स और कैज़ुअल कपड़ों के साथ पहनें।

    टेक अवे पॉइंट्स

    • सर्दियों के मौसम में स्टाइलिश और आरामदायक फुटवियर पहनना ज़रूरी है।
    • अपने आउटफिट और मौसम के हिसाब से फुटवियर का चुनाव करें।
    • विभिन्न प्रकार के बूट्स, स्नीकर्स और शूज के विकल्प मौजूद हैं।
    • सही एक्सेसरीज़ के साथ अपने लुक को और बेहतर बनाएँ।
  • दिसंबर 2024: व्रत-त्योहारों और ग्रह गोचर का पूरा कैलेंडर

    दिसंबर 2024: व्रत-त्योहारों और ग्रह गोचर का पूरा कैलेंडर

    दिसंबर 2024: व्रत-त्योहारों और ग्रह गोचर का मासिक कैलेंडर

    क्या आप दिसंबर 2024 में होने वाले सभी महत्वपूर्ण व्रत, त्योहार और ग्रह गोचर के बारे में जानना चाहते हैं? इस लेख में, हम आपको दिसंबर 2024 के पूरे महीने के लिए एक संपूर्ण कैलेंडर प्रदान करते हैं, जिसमें सभी प्रमुख धार्मिक अवसर और ज्योतिषीय घटनाएं शामिल हैं। इस कैलेंडर में, आपको मोक्षदा एकादशी, सफला एकादशी, विवाह पंचमी, दत्तात्रेय जयंती और क्रिसमस जैसी महत्वपूर्ण तिथियों के बारे में विस्तृत जानकारी मिलेगी।

    दिसंबर 2024 में आने वाले प्रमुख व्रत और त्यौहार

    दिसंबर 2024 कई महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों से भरा हुआ है। यहाँ इस महीने के कुछ मुख्य व्रत और त्योहार दिए गए हैं:

    1 दिसंबर 2024: मार्गशीर्ष अमावस्या

    मार्गशीर्ष अमावस्या एक महत्वपूर्ण हिंदू त्यौहार है, जो पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और मोक्ष प्राप्ति की कामना करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व है।

    6 दिसंबर 2024: विवाह पंचमी

    विवाह पंचमी भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह की वर्षगांठ है। इस दिन जोड़े विवाह के लिए प्रार्थना करते हैं और यह दिन पवित्र माना जाता है।

    11 दिसंबर 2024: मोक्षदा एकादशी

    मोक्षदा एकादशी एक महत्वपूर्ण एकादशी व्रत है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

    14 दिसंबर 2024: दत्तात्रेय जयंती

    दत्तात्रेय जयंती भगवान दत्तात्रेय के जन्मदिवस के रूप में मनाई जाती है। भगवान दत्तात्रेय त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश के अवतार माने जाते हैं।

    25 दिसंबर 2024: क्रिसमस

    ईसाई समुदाय द्वारा यीशु मसीह के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाने वाला यह उत्सव दुनिया भर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

    26 दिसंबर 2024: सफला एकादशी

    सफला एकादशी सभी एकादशी में सबसे शुभ और फलदायी मानी जाती है। इस व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, ऐसा मान्यता है।

    दिसंबर 2024 में होने वाले ग्रह गोचर

    दिसंबर 2024 में कई ग्रहों का राशि परिवर्तन होगा, जिससे विभिन्न राशियों पर प्रभाव पड़ेगा। यहां कुछ महत्वपूर्ण ग्रह गोचर दिए गए हैं:

    2 दिसंबर 2024: शुक्र का मकर राशि में गोचर

    शुक्र का मकर राशि में प्रवेश करने से कुछ राशियों के लिए आर्थिक लाभ और प्रेम जीवन में सुधार हो सकता है।

    7 दिसंबर 2024: मंगल कर्क राशि में वक्री

    मंगल का वक्री होना कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण समय हो सकता है। इस अवधि में सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है।

    11 दिसंबर 2024: बुध का वृश्चिक राशि में उदय

    बुध का उदय वृश्चिक राशि में कई राशियों के लिए बुद्धि और संचार कौशल में वृद्धि का संकेत दे सकता है।

    16 दिसंबर 2024: बुध वृश्चिक राशि में मार्गी

    बुध का मार्गी होना कई राशियों के लिए सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा, जिससे जीवन के कई क्षेत्रों में सुधार आएगा।

    दिसंबर 2024: व्रत त्यौहारों और ग्रह गोचर का महत्व

    दिसंबर 2024 में होने वाले व्रत और त्योहारों का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। ये त्योहार हमें आध्यात्मिकता और परंपराओं से जोड़ते हैं। वहीं ग्रह गोचर का ज्योतिष शास्त्र में महत्वपूर्ण स्थान है। इन परिवर्तनों से विभिन्न राशियों पर शुभ या अशुभ प्रभाव पड़ सकता है।

    Take Away Points

    • दिसंबर 2024 में कई महत्वपूर्ण व्रत, त्योहार और ग्रह गोचर होंगे।
    • इस महीने में मोक्षदा एकादशी, सफला एकादशी, विवाह पंचमी और क्रिसमस जैसे महत्वपूर्ण त्योहार आ रहे हैं।
    • कई ग्रहों का राशि परिवर्तन भी होगा, जिसका विभिन्न राशियों पर प्रभाव पड़ेगा।
    • इस कैलेंडर से आपको पूरे दिसंबर महीने के लिए व्रत, त्यौहारों और ग्रह गोचर की जानकारी मिल जाएगी।
  • बॉलीवुड और टॉलीवुड की धमाकेदार ख़बरें

    बॉलीवुड और टॉलीवुड की धमाकेदार ख़बरें

    बॉलीवुड और टॉलीवुड में क्या हुआ खास? जानिए लेटेस्ट अपडेट्स!

    आज हम आपको बॉलीवुड और टॉलीवुड की दुनिया से जुड़ी कुछ सबसे चटपटी और दिलचस्प खबरों से रूबरू कराने वाले हैं। यह खबरें आपको हैरान, चौंकाने और मनोरंजन से भर देने वाली हैं, इसलिए आइये शुरू करते हैं।

    ऐश्वर्या राय बच्चन की भाभी श्रीमा राय ने खोला राज?

    बॉलीवुड की खूबसूरत अभिनेत्री ऐश्वर्या राय बच्चन के भाभी श्रीमा राय के सोशल मीडिया अकाउंट पर हाल ही में एक पोस्ट ने तहलका मचा दिया है। श्रीमा राय की एक पोस्ट पर उनके फैंस ने कमेंट किया कि क्या ऐश्वर्या राय बच्चन उनसे अलग रहने लगी हैं? श्रीमा राय के जवाब ने और भी कौतूहल पैदा किया है।

    फैंस के सवालों ने बढ़ाई पहेली

    एक प्रशंसक ने यह सवाल पूछा की आप ऐश्वर्या जी और आराध्या जी के साथ फोटो क्यों नहीं शेयर करती हैं? क्या आप दोनों के बीच सब ठीक नहीं है? ऐसे सवालों के जवाब में हार्ट इमोजी का इस्तेमाल, ने और भी कयास लगाए हैं। इस वजह से उनके फैंस में ये बात काफी तेजी से वायरल हो रही है और तरह तरह के अनुमान लगाए जा रहे हैं। क्या सच में ऐश्वर्या और श्रीमा के रिश्तों में दरार आई है? ये एक बड़ा सवाल है, जिसका जवाब अब तक सामने नहीं आया है।

    क्या परिवार में चल रही है कोई अनबन?

    इस बात ने अटकलों को और हवा दी है कि क्या बच्चन परिवार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। हालांकि, सच्चाई क्या है ये कोई नहीं जानता। शायद ही हम कभी भी यह जान सकेंगे, क्योंकि इस तरह की निजी बातों को सार्वजनिक करना आसान नहीं होता है।

    अदिति राव हैदरी ने फिर बनी सिद्धार्थ मल्होत्रा की दुल्हन!

    अब बॉलीवुड के रोमांस की चर्चा करें तो हाल ही में अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अपनी शादी की कुछ और तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। राजस्थान के एक खूबसूरत स्थान पर हुई इस शादी में अदिति लाल रंग के लहंगे में बेहद खूबसूरत लग रही हैं। इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी है।

    शादी की दूसरी पारी

    इससे पहले कपल ने इसी साल सितंबर में शादी कर ली थी लेकिन सोशल मीडिया पर ये तस्वीरें तब आई हैं, जब शादी के 2 महीने बाद, यह तस्वीरों ने फैंस के दिलों में और भी ज्यादा खुशी भर दी।

    खेतों में शूट हुआ अनोखा ब्राइडल फोटोशूट

    खूबसूरत खेतों की पृष्ठभूमि में लाल जोड़े में अदिति ने जो फोटोशूट करवाया है वो वाकई मनमोहक है। इनकी तस्वीरें इस बात का प्रमाण है कि दोनों की जोड़ी कितनी प्यारी है और कितना प्यार है उनमे।

    सयानी गुप्ता ने की इंटीमेसी सीन्स की शिकायत!

    बोल्ड और बेबाक एक्ट्रेस सयानी गुप्ता अपनी एक्टिंग के लिए जानी जाती है, लेकिन हाल ही में उन्होंने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उन्हें सेट पर इंटीमेट सीन्स के दौरान कई बार अनकम्फ़र्टेबल फ़ील होना पड़ा।

    ‘फोर मोर शॉट्स प्लीज’ के सेट पर खराब अनुभव

    सयानी गुप्ता ने बताया कि गोवा में ‘फोर मोर शॉट्स प्लीज’ के दौरान कैसे उन्हें इंटीमेट और बिकिनी सीन करते हुए काफी अनसेफ फील हुआ। इस सेट पर बहुत से लोग मौजूद थे, जिस वजह से उनका असहज होना लाजमी था। इस बात से एक सवाल उठता है कि बॉलीवुड इंडस्ट्री में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कितनी चिंता की जा रही है?

    को-स्टार ने की गलत हरकतें

    उन्होंने अपने एक को-स्टार की हरकत पर भी रोष व्यक्त किया। उन्होंने को-स्टार की गलत हरकतों से कैसे खुद को अनकंफर्टेबल महसूस किया, उस बारे में बताया। ये सवाल जरूर उठते हैं कि क्या बॉलीवुड में सभी एक्टर्स अपने काम में प्रोफेशनल रहते हैं? क्या हर किसी के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाता है?

    टॉलीवुड में खुशियों का आगमन! नागार्जुन के दोनों बेटे करने वाले शादी

    तेलुगु सिनेमा के जाने-माने अभिनेता नागार्जुन के घर में दोहरी खुशियां हैं। उनके दोनों बेटे नागा चैतन्य और अखिल अक्किनेनी शादी के बंधन में बंधने वाले हैं। नागा चैतन्य की शादी 4 दिसंबर को तय है, जबकि अखिल की शादी थोड़ी देर में होगी, जिसकी सगाई हाल ही में हुई है।

    नागार्जुन की खुशी का ठिकाना नहीं

    नागार्जुन ने जूम से बात करते हुए खुशी जाहिर करते हुए कहा की उनके परिवार में दो बहुओं का आगमन उन्हें बहुत खुशी दे रहा है और उनकी खुशी सातवें आसमान पर है। उन्होंने अखिल की शादी की डेट की जानकारी देते हुए भी सभी को अपडेट किया। ये परिवार की बड़ी ख़ुशी है, और प्रशंसक भी इस खबर से बहुत उत्साहित हैं।

    टेक अवे पॉइंट्स:

    • बॉलीवुड और टॉलीवुड में इन दिनों कुछ दिलचस्प घटनाक्रम हुए हैं।
    • ऐश्वर्या राय बच्चन की भाभी की पोस्ट ने उत्सुकता बढ़ा दी है।
    • अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ मल्होत्रा की शादी की तस्वीरें वायरल हो रही हैं।
    • सयानी गुप्ता ने इंडस्ट्री में महिलाओं की सुरक्षा पर चिंता जताई है।
    • नागार्जुन के दोनों बेटों की शादी से उनका परिवार बेहद खुश है।
  • 30 साल बाद घर लौटा राजू: क्या यह एक सच है या बड़ा धोखा?

    30 साल बाद घर लौटा राजू: क्या यह एक सच है या बड़ा धोखा?

    30 साल बाद घर लौटा राजू: एक रहस्यमयी कहानी जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया!

    क्या आपने कभी ऐसी कहानी सुनी है जो आपको रोंगटे खड़े कर दे? 30 साल बाद एक लापता लड़का घर वापस आता है, और उसकी कहानी इतनी अविश्वसनीय है कि पुलिस भी हैरान है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं गाजियाबाद के राजू की, जिसके घर वापस आने के मामले ने कई चौंकाने वाले मोड़ लिए हैं। इस दिलचस्प कहानी में शामिल हैं अपहरण, गुमशुदगी, और दो राज्यों में एक ही व्यक्ति की अलग-अलग पहचान! क्या सच में यह एक रहस्यमयी घटना है या कोई बड़ी साज़िश?

    राजू का दावा: अपहरण और 30 साल की गुलामी

    राजू के मुताबिक, 30 साल पहले कुछ लोगों ने उसका अपहरण कर लिया था, जब वह स्कूल से घर लौट रहा था। उसके बाद उसे बंधुआ मज़दूर के रूप में रखा गया, जहाँ उसे भेड़-बकरियाँ चराने का काम करना पड़ता था। कई वर्षों तक गुलामी की जिंदगी बिताने के बाद, वह किसी तरह भागने में कामयाब हुआ और गाजियाबाद पुलिस के पास पहुँचा। उसने अपनी मार्मिक कहानी सुनाई, और पुलिस ने उसके दावों पर यकीन करते हुए उसे तुलाराम के परिवार को सौंप दिया, जो उसका लापता बेटा समझ रहे थे।

    देहरादून कनेक्शन: मोनू का रहस्य

    लेकिन यहाँ कहानी खत्म नहीं होती। गाजियाबाद पुलिस को पता चला कि राजू ने देहरादून में भी एक समान घटना को दोहराया है! उसने वहाँ एक और परिवार के साथ रहते हुए खुद को ‘मोनू’ के नाम से परिचित कराया, और अपनी कहानी फिर से सुनाई। इस बार भी उसने बताया कि उसका बचपन में अपहरण हो गया था, और उसे गुलामी की जिंदगी जीनी पड़ी थी। इस अविश्वसनीय घटनाक्रम के बाद देहरादून और गाजियाबाद पुलिस इस मामले की संयुक्त जांच कर रही है।

    राजू की अजीब हरकतें और शर्मा परिवार की बेचैनी

    देहरादून में आशा देवी और उनके पति कपिलदेव शर्मा ने राजू/मोनू को अपने खोए हुए बेटे के रूप में स्वीकार कर लिया था, लेकिन समय के साथ उन्हें कुछ संदेह होने लगा। राजू अक्सर उनके परिवार के सदस्यों से लड़ता-झगड़ता रहता था, उन्हें घर से निकालने की धमकी देता था। शाम के समय, वह बार-बार घर से बाहर जाने की जिद करता था, जिससे परिवार को चिंता होने लगी थी। इसलिए शर्मा परिवार ने उससे असुरक्षा का अहसास करने लगा। इस कारण उन्होंने राजू को दिल्ली काम करने के लिए जाने दिया। लेकिन क्या राजू का दिल्ली आना कोई संयोग है, या उसने अपने अपराध के सबूतों को मिटाने का प्रयास किया?

    पुलिस जाँच और सच्चाई की तलाश

    गाजियाबाद पुलिस ने राजू को हिरासत में ले लिया है, और देहरादून पुलिस के साथ मिलकर इस मामले की गहन जाँच कर रही है। तुलाराम के परिवार का कहना है कि राजू उनका बेटा लगता था लेकिन उसने अजीब हरकतें की थीं। क्या राजू का सच सामने आएगा? क्या उसके द्वारा सुनाई गई कहानी सच है या यह सब एक बड़ा धोखा है? पुलिस के पास अब पर्याप्त सबूत हैं जो इस मामले को उलझा रहे हैं, जिसमें दो राज्य शामिल हैं और कई अविश्वसनीय कहानियाँ हैं। इस पूरी कहानी में बहुत सी अस्पष्टताएँ और प्रश्नचिन्ह हैं जिनका समाधान निकट भविष्य में मिलने की उम्मीद है।

    टेक अवे पॉइंट्स

    • 30 साल बाद घर वापसी का दावा करने वाला राजू एक रहस्यमय व्यक्ति है।
    • उसने देहरादून और गाजियाबाद दोनों जगहों पर अपनी कहानी अलग-अलग परिवारों को सुनाई।
    • दोनों पुलिसों की संयुक्त जाँच से जल्द ही सच्चाई का पता चलने की उम्मीद है।
    • यह मामला अपराध और पहचान के गंभीर सवालों को उठाता है।
  • आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025: क्या होगा आगे?

    आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025: क्या होगा आगे?

    भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट संबंधों में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 एक बड़ा रोड़ा बन गई है। क्या यह टूर्नामेंट होगा या नहीं, यह सस्पेंस बना हुआ है! भारतीय क्रिकेट टीम के पाकिस्तान दौरे पर सुरक्षा चिंताओं के कारण, आईसीसी को एक कठिन फैसला करना पड़ा है जिसने पूरे क्रिकेट जगत को चौंका दिया है। क्या पाकिस्तान ‘हाइब्रिड मॉडल’ के साथ समझौता करेगा, या फिर टूर्नामेंट पूरी तरह से बदल जाएगा? आइये, विस्तार से जानते हैं इस दिलचस्प कहानी को।

    आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025: हाइब्रिड मॉडल की चुनौतियाँ

    आईसीसी ने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के सामने ‘हाइब्रिड मॉडल’ रखा है। इस मॉडल के तहत, कुछ मैच पाकिस्तान में और बाकी मैच तटस्थ स्थान पर खेले जा सकते हैं। लेकिन पीसीबी इसमें कुछ शर्तें रख रहा है, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण है आईसीसी के राजस्व में पाकिस्तान के हिस्सेदारी को बढ़ाना। फ़िलहाल, पाकिस्तान को सालाना 5.75% हिस्सा मिलता है, जबकि भारत को 38.50%। पीसीबी का मानना है कि यह हिस्सा बहुत कम है और उसे बढ़ाया जाना चाहिए।

    राजस्व में असंतुलन: एक बड़ी समस्या

    यह राजस्व असंतुलन एक गंभीर समस्या है, क्योंकि इससे पीसीबी आईसीसी से नाराज़ है और अपने हक़ की मांग कर रहा है। हालाँकि, आईसीसी के मौजूदा राजस्व मॉडल में भारत का योगदान सबसे ज़्यादा है, इसलिए पाकिस्तान का हिस्सा बढ़ाना आसान नहीं होगा। यह एक ऐसी स्थिति है जहाँ राजनीति और खेल, दोनों ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    2031 तक के आईसीसी टूर्नामेंट और हाइब्रिड मॉडल

    पीसीबी की एक और महत्वपूर्ण शर्त है कि 2031 तक भारत में होने वाले सभी आईसीसी टूर्नामेंट भी ‘हाइब्रिड मॉडल’ के तहत खेले जाएँ। यह मांग आईसीसी के लिए स्वीकार करना बहुत मुश्किल है। भारत को आगामी वर्षों में कई बड़े आईसीसी टूर्नामेंटों की मेजबानी करनी है और इसमें बदलाव करना मुश्किल साबित होगा।

    भारत बनाम पाकिस्तान: सुरक्षा और राजनीति का खेल

    भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण राजनीतिक संबंधों के कारण दोनों देशों के क्रिकेट बोर्डों के बीच मनमुटाव चलता रहता है। भारत ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पाकिस्तान में क्रिकेट खेलने से इनकार कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की मेजबानी को लेकर अनिश्चितता है। क्या होगा अगला कदम, यह देखना बाकी है।

    दुबई विकल्प: एक संभावित समाधान

    एक संभावित समाधान यह है कि भारत के मैच दुबई जैसे तटस्थ स्थान पर खेले जाएं। लेकिन, यह विकल्प पाकिस्तान को मेजबानी के अधिकारों से वंचित कर सकता है, जिससे वह निराश हो सकता है।

    आईसीसी की प्रतिष्ठा पर संकट

    यदि आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 स्थगित या रद्द होती है, तो आईसीसी की प्रतिष्ठा पर गहरा असर पड़ेगा। इसलिए, आईसीसी और दोनों देशों के क्रिकेट बोर्डों को एक ऐसे समझौते पर पहुँचने की ज़रूरत है जो सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य हो।

    क्या होगा आगे?

    आईसीसी और पीसीबी के बीच बातचीत जारी है और दोनों पक्ष एक ऐसे समाधान की तलाश में हैं जो सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखता हो। यदि बातचीत सफल नहीं होती है, तो आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 को स्थगित करना या हाइब्रिड मॉडल पर आगे बढ़ना ही एक विकल्प रह जाएगा। यह मुश्किल स्थिति दोनों देशों के क्रिकेट प्रशंसकों के लिए एक चुनौती है, लेकिन समाधान अवश्य निकलेगा।

    Take Away Points

    • आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2025 की मेजबानी पाकिस्तान में सुरक्षा कारणों से संभव नहीं है।
    • आईसीसी ने ‘हाइब्रिड मॉडल’ का प्रस्ताव दिया है।
    • पीसीबी अपने राजस्व हिस्सेदारी को बढ़ाने की मांग कर रहा है।
    • भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक संबंधों ने खेल पर गहरा असर डाला है।
    • आईसीसी को सभी पक्षों को संतुष्ट करने वाला एक समाधान ढूँढना होगा।
  • पूजा ठाकुर: न्याय की लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

    पूजा ठाकुर: न्याय की लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

    सुप्रीम कोर्ट का फैसला: पूजा ठाकुर को मिलेगा न्याय?

    क्या आप जानते हैं ऐसी प्रतिभाशाली एथलीट जिसने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता हो, उसे नौकरी देने से इनकार कर दिया गया हो? यह कहानी है पूजा ठाकुर की, एक ऐसी खिलाड़ी जिसने देश का नाम रोशन किया, लेकिन उसके बाद सरकारी तंत्र में अटकी हुई है। क्या हिमाचल प्रदेश सरकार के इस फैसले से खेलों को बढ़ावा मिलता है या यह एक बड़ा झटका है? आइए, इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करते हैं और जानते हैं सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा है।

    हिमाचल प्रदेश सरकार का ‘निराशाजनक’ रवैया

    पूजा ठाकुर ने 2014 के एशियाई खेलों में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था। एक ऐसी उपलब्धि जिस पर हर देशवासी को गर्व होना चाहिए। लेकिन, इसके बाद जो हुआ, वो बेहद निराशाजनक है। हिमाचल प्रदेश सरकार ने उन्हें खेल कोटे के तहत प्रथम श्रेणी अधिकारी पद देने से इनकार कर दिया। सात साल तक पूजा ठाकुर को इधर-उधर भटकना पड़ा, एक ऐसी लड़ाई लड़नी पड़ी जो किसी खिलाड़ी को नहीं लड़नी चाहिए।

    सुप्रीम कोर्ट की गहरी निराशा

    सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हिमाचल प्रदेश सरकार के रवैये पर गहरी निराशा जताई। जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सरकार से सवाल किया, “क्या यह खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने का तरीका है?” यह सवाल बेहद गंभीर है, क्योंकि यह दिखाता है कि खिलाड़ियों को मिलने वाला सम्मान और सराहना कितनी कम है। कोर्ट ने सरकार से कहा कि उन्हें व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था।

    खिलाड़ियों के हितों की अनदेखी?

    यह मामला सिर्फ पूजा ठाकुर का नहीं है, बल्कि देश के उन सभी खिलाड़ियों का है जिनके साथ ऐसा व्यवहार होता है। क्या सरकारें खेलों और खिलाड़ियों के प्रति इतना ही उदासीन रवैया रखती हैं? क्या हमारे खिलाड़ियों को देश के लिए मेडल जीतने के बाद भी इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा? यह सवाल हमें सभी को सोचने पर मजबूर करता है।

    उच्च न्यायालय का फैसला और सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया

    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पूजा ठाकुर को जुलाई 2015 से एक्साइज और टैक्सेशन ऑफिसर के पद पर नियुक्त करने का आदेश दिया था। लेकिन, राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। इसका मतलब है कि राज्य सरकार को अब हाईकोर्ट के आदेश का पालन करना होगा।

    सुप्रीम कोर्ट का साफ संदेश

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से साफ संदेश जाता है कि सरकारों को खिलाड़ियों के योगदान का सम्मान करना होगा। उन्हें खेलों को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, न कि खिलाड़ियों का मनोबल तोड़ने वाले फैसले लेने चाहिए। यह फैसला एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो आने वाले समय में खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा करने में मदद करेगा।

    क्या बदल सकता है इस फैसले से?

    यह फैसला न सिर्फ पूजा ठाकुर के लिए, बल्कि देश के सभी खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा है। इस फैसले से भविष्य में राज्य सरकारें खिलाड़ियों के साथ बेहतर व्यवहार करेंगी और उनके योगदान को सम्मान देंगी। खिलाड़ियों को उनका हक दिलाने के लिए सरकारें अब ज्यादा सक्रिय होंगी।

    आशा की किरण

    यह फैसला एक आशा की किरण है, जो बताता है कि हमारे खिलाड़ी अभी भी अपनी मेहनत और प्रतिभा के लिए न्याय पा सकते हैं। यह फैसला एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भविष्य के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करेगा और उन्हें यह विश्वास दिलाएगा कि उनकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी।

    Take Away Points

    • सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार के रवैये पर गहरी निराशा व्यक्त की।
    • पूजा ठाकुर को हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार नौकरी मिलेगी।
    • यह फैसला सभी खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
    • इस फैसले से आशा है कि भविष्य में खिलाड़ियों के अधिकारों की रक्षा होगी।