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  • सेना की वर्दी में युवक ने मचाई धूम: जानिए पूरी कहानी

    सेना की वर्दी में युवक ने मचाई धूम: जानिए पूरी कहानी

    सेना की वर्दी में युवक ने चौपाटी पर मचाई धूम!

    क्या आपने कभी सोचा है कि कोई शख्स बिना किसी वजह के सेना की वर्दी पहनकर सार्वजनिक जगह पर घूमे? जी हाँ, ऐसा ही एक मामला गुजरात के पोरबंदर से सामने आया है जहाँ एक युवक को सेना जैसी वर्दी पहनकर चोपाटी पर घूमते हुए पकड़ा गया. इस घटना ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है और लोग तरह-तरह के सवाल पूछ रहे हैं. आइये जानते हैं इस पूरे मामले की पूरी जानकारी।

    घटना का विवरण

    शनिवार की शाम को एक युवक भारतीय सेना की वर्दी जैसी पोशाक पहनकर पोरबंदर चौपाटी पर घूम रहा था. स्थानीय लोगों ने उसे देखा, लेकिन वह किसी से बात नहीं कर रहा था. कुछ पुलिस वाले वहां से गुजर रहे थे, उन्होंने इस घटना पर ध्यान दिया और युवक से पूछताछ की. युवक के गोलमोल जवाबों से पुलिस को शक हुआ और उसे हिरासत में ले लिया गया.

    युवक ने किया खुलासा

    पुलिस ने जब युवक से सख्ती से पूछताछ की तो उसने बताया कि उसका नाम संजय डोडिया है और वह 10वीं पास है. उसने बताया कि उसने सेना की परीक्षा दी थी, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाया. सेना में भर्ती होने का बहुत शौक होने की वजह से उसने सेना जैसी वर्दी पहन ली और नेम प्लेट भी बनवा ली. उसने सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें भी पोस्ट की थीं।

    पुलिस की कार्रवाई

    पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 168 के तहत संजय पर मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया. जांच में यह पता चला कि उसने सेना के नाम पर किसी के साथ कोई धोखाधड़ी नहीं की है. पुलिस को उसके फोन से सेना की वर्दी में उसकी कुछ और तस्वीरें भी मिली हैं. बाद में उसे जमानत पर रिहा कर दिया गया.

    सेना की वर्दी का गलत इस्तेमाल: क्या हैं इसके नतीजे?

    सेना की वर्दी का प्रयोग केवल सैन्य कर्मियों द्वारा ही किया जा सकता है. इसके अलावा किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा इसकी नकल करना एक अपराध है और कानून के मुताबिक, कड़ी सजा का प्रावधान है. संजय के साथ भी यही हुआ. हालांकि, संजय का इरादा गलत नहीं था लेकिन कानूनी तौर पर उसने अपराध किया है. ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां लोगों ने सेना की वर्दी का गलत इस्तेमाल किया है जिससे बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा है.

    सावधानी बरतने की आवश्यकता

    यह घटना हमें सिखाती है कि हमें कानून का पालन करना चाहिए और ऐसे कामों से बचना चाहिए जिससे देश या किसी व्यक्ति को नुकसान पहुँच सके. सेना के प्रति सम्मान रखना बहुत ज़रूरी है और सेना की वर्दी का प्रयोग बिना अनुमति के करना कानूनी तौर पर गलत है.

    Take Away Points

    • सेना की वर्दी पहनना बिना अनुमति के कानूनन अपराध है।
    • संजय डोडिया का मामला हमें सिखाता है कि हम कानून का पालन करें।
    • सेना के प्रति सम्मान दिखाना ज़रूरी है।
    • सोशल मीडिया पर भी ऐसी तस्वीरें पोस्ट ना करें जो कानूनी रूप से गलत हो।
  • बजरंग पुनिया पर 4 साल का बैन: पूरा सच और आगे क्या?

    बजरंग पुनिया पर 4 साल का बैन: पूरा सच और आगे क्या?

    बजरंग पुनिया पर 4 साल का बैन: एक चौंकाने वाला फैसला

    भारत के स्टार रेसलर बजरंग पुनिया के करियर पर एक काला साया छा गया है। नाडा (नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी) ने उन पर चार साल का प्रतिबंध लगा दिया है, जिससे देश भर में सदमे की लहर दौड़ गई है। क्या ये एक षड्यंत्र है या कोई गंभीर गलती? आइये जानते हैं इस पूरे मामले की सच्चाई और बजरंग पुनिया के भविष्य पर इसके क्या मायने हैं।

    डोपिंग परीक्षण से इनकार: बैन का कारण

    नाडा के अनुसार, बजरंग पुनिया ने 10 मार्च को डोप परीक्षण के लिए अपना नमूना देने से इनकार कर दिया था। यह घटना नेशनल टीम के चयन ट्रायल के दौरान हुई थी। इस इनकार को ही नाडा ने उनके चार साल के बैन का कारण बताया है। इस मामले में उलझनें और कई सवाल उठ रहे हैं जिनपर इस लेख में आगे चर्चा होगी।

    बृज भूषण के विरोध और बैन का कनेक्शन?

    बजरंग पुनिया ने इस बैन के पीछे बृज भूषण शरण सिंह का हाथ होने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पूर्व डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के कारण उनके साथ पक्षपातपूर्ण और अनुचित व्यवहार किया गया है। क्या वाकई ये सब कुछ उन विरोध प्रदर्शनों का ही नतीजा है? यह सवाल अभी भी बहुत अहम है।

    बजरंग का दावा: नमूना देने से इनकार नहीं

    बजरंग का दावा है कि उन्होंने कभी नमूना देने से इनकार नहीं किया। उन्होंने केवल ईमेल के ज़रिए नाडा से स्पष्टीकरण माँगा था कि दिसंबर 2023 में उनके नमूने लेने के लिए एक्सपायर किट क्यों भेजी गई थीं। क्या यह नाडा की लापरवाही थी? यह भी एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू है जिसे ध्यान में रखना चाहिए।

    नाडा का पक्ष: जानबूझकर इनकार

    नाडा का दावा है कि बजरंग पुनिया ने जानबूझकर डोप परीक्षण के लिए नमूना देने से इनकार किया था। नाडा ने कहा कि एथलीट ने एंटी-डोपिंग नियम 2021 के उल्लंघन किया है। यह एक गंभीर आरोप है और इसने पूरे मामले को और भी पेचीदा बना दिया है।

    सुनवाई और कानूनी लड़ाई

    बजरंग पुनिया ने नाडा के फैसले के खिलाफ अपील की थी और सुनवाई हुई। लेकिन नाडा ने अपना फैसला कायम रखा है, जिससे उनके करियर पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा। इस फैसले को लेकर अनेक बहसें हो रही हैं।

    बजरंग पुनिया: एक दिग्गज रेसलर का सफ़र

    घुटने की चोट से जूझने के बावजूद, बजरंग पुनिया ने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया था। एक साधारण परिवार से निकलकर, उन्होंने कड़ी मेहनत और लगन से कुश्ती की दुनिया में एक अलग मुकाम हासिल किया। यह उनकी कहानी में एक बहुत बड़ा मोड़ है जिससे प्रशंसक सदमे में हैं।

    भविष्य की चुनौतियाँ

    यह चार साल का बैन बजरंग पुनिया के भविष्य के लिए बहुत बड़ा झटका है। इससे उनका करियर खत्म ही नहीं बल्कि अन्य मौकों जैसे कोचिंग जैसी चीज़ों को पाने में भी बाधा डालेगा। अब उन्हें खुद को और अपनी छवि को इस सारी उलझनों से कैसे निकालना है, ये एक बड़ी चुनौती होगी।

    टेक अवे पॉइंट्स

    • बजरंग पुनिया पर चार साल का प्रतिबंध एक विवादास्पद मामला है।
    • बैन का मुख्य कारण डोप परीक्षण से इनकार बताया जा रहा है।
    • बजरंग ने इस बैन में बृज भूषण शरण सिंह का हाथ होने का आरोप लगाया है।
    • नाडा ने कहा कि एथलीट ने एंटी-डोपिंग नियमों का उल्लंघन किया है।
    • इस फैसले से बजरंग पुनिया के करियर पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
  • दिल्ली की हवा में सांस लेना हो गया मुश्किल: जानिए क्यों और क्या है समाधान

    दिल्ली की हवा में सांस लेना हो गया मुश्किल: जानिए क्यों और क्या है समाधान

    दिल्ली की हवा में सांस लेना हो गया मुश्किल: जानिए क्यों और क्या है समाधान

    दिल्ली की प्रदूषित हवा ने एक बार फिर से चिंता बढ़ा दी है। क्या आप जानते हैं कि दिल्ली में पिछले 443 दिनों से एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब हवा साफ रही हो? जी हाँ, आपने सही सुना! यह चौंकाने वाला सच है जो आपके स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। इस लेख में हम दिल्ली के प्रदूषण के कारणों, इसके खतरों और इससे निपटने के संभावित समाधानों पर चर्चा करेंगे। ताज़ा वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़े आपको हैरान कर देंगे!

    दिल्ली का प्रदूषण: क्या है इसका असली चेहरा?

    दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ रहा है। यह प्रदूषण कई कारकों से उत्पन्न होता है, जिनमें शामिल हैं:

    वाहनों से निकलने वाला धुआँ:

    दिल्ली में बढ़ती हुई गाड़ियों की संख्या प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है। पुरानी गाड़ियों से निकलने वाला काला धुआँ हवा को जहरीला बना रहा है।

    निर्माण कार्य:

    शहर में हो रहे बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य भी हवा में धूल और प्रदूषण का स्तर बढ़ा रहे हैं। यह धूल, PM2.5 और PM10 के रूप में, फेफड़ों के लिए बहुत ही हानिकारक होती है।

    औद्योगिक प्रदूषण:

    दिल्ली के आसपास के कई उद्योग हवा में जहरीली गैसें छोड़ते हैं, जो प्रदूषण में बड़ी वृद्धि का कारण बनते हैं।

    किसानों द्वारा फसलों के अवशेष जलाना:

    दिल्ली के आसपास के इलाकों में किसान फसलों के अवशेष जलाते हैं, जिससे बड़ी मात्रा में प्रदूषण दिल्ली तक पहुँच जाता है। यह एक बड़ा पर्यावरणीय खतरा है।

    मौसमी प्रभाव:

    ठंड के मौसम में हवा में प्रदूषण की मात्रा अधिक होती है क्योंकि ठंडी हवा प्रदूषक तत्वों को जल्दी ऊपर नहीं उठा पाती, जिसके परिणामस्वरूप प्रदूषण जमीन के पास जम जाता है।

    प्रदूषण के बढ़ते खतरे और इसके प्रभाव

    दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण का असर केवल हवा की गुणवत्ता तक ही सीमित नहीं है, इसका हमारे स्वास्थ्य पर भी बेहद गंभीर असर पड़ रहा है। लगातार प्रदूषित हवा में साँस लेने से:

    श्वसन रोगों में वृद्धि:

    दिल्ली में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और अन्य श्वसन रोगों के मामले बढ़ते जा रहे हैं।

    हृदय रोगों का खतरा:

    हवा में PM2.5 और PM10 प्रदूषक हृदय रोगों का कारण बनते हैं, जिससे हृदय गति में समस्या और अन्य गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

    बच्चों का विकास प्रभावित:

    प्रदूषित हवा बच्चों के फेफड़ों के विकास और स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, जिससे वे श्वसन रोगों का शिकार अधिक आसानी से हो सकते हैं।

    कैंसर का बढ़ता खतरा:

    लंबे समय तक प्रदूषित हवा में साँस लेने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

    क्या है समाधान?

    दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए हमें ठोस कदम उठाने होंगे:

    सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा:

    लोगों को सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना होगा।

    वाहन उत्सर्जन मानकों में सुधार:

    पुराने वाहनों को सड़कों से हटाने और कड़े उत्सर्जन मानकों को लागू करना आवश्यक है।

    निर्माण कार्यों पर नियंत्रण:

    निर्माण कार्यों पर नियंत्रण और हवा में धूल को कम करने के उपाय करने चाहिए।

    उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण पर लगाम:

    उद्योगों से निकलने वाले जहरीले पदार्थों पर लगाम लगाना बहुत जरूरी है।

    फसल अवशेष जलाने पर रोक:

    किसानों को फसल अवशेष जलाने से रोकना और उन्हें बेहतर विकल्पों के बारे में जागरूक करना आवश्यक है।

    वृक्षारोपण:

    शहर में अधिक से अधिक पेड़ लगाने से प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।

    निष्कर्ष

    दिल्ली का प्रदूषण एक गंभीर समस्या है जिस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। सरकार और नागरिकों दोनों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है ताकि दिल्ली की हवा को साफ किया जा सके और लोगों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सके।

    Take Away Points

    • दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बेहद चिंताजनक है।
    • प्रदूषण के कई कारण हैं जैसे वाहनों से निकलने वाला धुआँ, निर्माण कार्य, औद्योगिक प्रदूषण, किसानों द्वारा फसलों के अवशेष जलाना और मौसमी प्रभाव।
    • दिल्ली के बढ़ते प्रदूषण से श्वसन रोगों, हृदय रोगों, कैंसर और बच्चों के विकास पर गंभीर असर पड़ रहा है।
    • इस समस्या से निपटने के लिए सरकार और नागरिकों को मिलकर प्रयास करने होंगे।
  • फेसबुक प्यार : शादीशुदा महिला का 6 साल छोटे लड़के से हुआ प्यार, घर से भाग गई

    फेसबुक प्यार : शादीशुदा महिला का 6 साल छोटे लड़के से हुआ प्यार, घर से भाग गई

    फेसबुक प्यार : शादीशुदा महिला का 6 साल छोटे लड़के से हुआ प्यार, घर से भाग गई

    क्या आप जानते हैं कि सोशल मीडिया पर एक गलत कदम आपकी जिंदगी को कैसे बदल सकता है? यह कहानी उत्तर प्रदेश के जौनपुर की एक शादीशुदा महिला की है, जिसकी जिंदगी एक फेसबुक रील से पूरी तरह बदल गई। इस महिला को एक 6 साल छोटे लड़के से प्यार हो गया और वह अपने परिवार और बच्चों को छोड़कर उस लड़के के साथ भाग गई। आइये जानते हैं पूरी कहानी…

    फेसबुक रील ने बदल दी जिंदगी

    यह महिला सोशल मीडिया, खासकर फेसबुक की बहुत शौकीन थी। एक दिन, उसकी नजर एक युवक की रील पर पड़ी। रील में युवक गाने गा रहा था और उसका अंदाज़ उसे बहुत पसंद आया। उसने उस लड़के को फेसबुक पर मैसेज किया और बातचीत शुरू हो गई। बातचीत प्यार में बदल गई, और यह प्यार इतना गहरा हुआ कि महिला ने अपने परिवार और बच्चों को छोड़कर उस लड़के के साथ भाग जाने का फैसला किया।

    पुलिस ने किया खोजबीन

    महिला के परिवार को जब इस घटना का पता चला तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत मामले में कार्रवाई की और महिला और लड़के की तलाश शुरू की। पुलिस ने तकनीकी जांच और सोशल मीडिया एक्टिविटीज की मॉनिटरिंग की मदद से दोनों को बदायूँ के पास से ढूंढ निकाला।

    महिला ने जताई साथ रहने की इच्छा

    जब महिला और लड़के को उनके परिवारों के सामने पेश किया गया, तो महिला ने अपने पति और बच्चों को छोड़कर लड़के के साथ रहने की इच्छा जताई। यह फैसला महिला के परिवार के लिए बहुत ही चौंकाने वाला था। हालांकि, पुलिस ने महिला को उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

    सोशल मीडिया पर सावधानी बरतना ज़रूरी

    यह घटना हमें सोशल मीडिया के इस्तेमाल के प्रति सावधानी बरतने की सीख देती है। सोशल मीडिया एक शक्तिशाली उपकरण है, लेकिन इसका इस्तेमाल संयम से करना बेहद ज़रूरी है। हमें अनजान लोगों से बातचीत करते वक़्त सावधानी रखनी चाहिए और किसी भी तरह के जोखिम से खुद को बचाना चाहिए।

    Take Away Points:

    • सोशल मीडिया पर अजनबियों से बात करते समय सावधानी बरतें।
    • ऐसे रिश्तों से दूर रहें जो आपकी शादीशुदा जिंदगी को खतरे में डालते हैं।
    • परिवार का साथ सबसे कीमती होता है।
    • सोशल मीडिया का उपयोग संयम से करें।
  • मार्गशीर्ष अमावस्या 2024: आध्यात्मिक अनुष्ठानों का महापर्व!

    मार्गशीर्ष अमावस्या 2024: आध्यात्मिक अनुष्ठानों का महापर्व!

    मार्गशीर्ष अमावस्या 2024: आध्यात्मिक अनुष्ठानों का महापर्व!

    क्या आप जानते हैं कि मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व कार्तिक अमावस्या से भी अधिक है? इस वर्ष मार्गशीर्ष अमावस्या 30 नवंबर को पड़ रही है, और यह आध्यात्मिक अनुष्ठानों और पितृ तर्पण के लिए एक अद्भुत अवसर है। इस लेख में, हम आपको मार्गशीर्ष अमावस्या के महत्व, पूजन विधि, स्नान-दान के मुहूर्त और कई उपायों के बारे में विस्तार से बताएंगे। तैयार हो जाइए, इस पवित्र अवसर का लाभ उठाने के लिए!

    मार्गशीर्ष अमावस्या स्नान दान मुहूर्त: शुभ समय का महत्व

    हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष अमावस्या की तिथि 30 नवंबर को सुबह 10 बजकर 29 मिनट पर शुरू होकर 1 दिसंबर को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। स्नान दान का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 08 मिनट से सुबह 6 बजकर 02 मिनट तक है। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस शुभ समय में स्नान, दान और पूजा करने से आपको असीम पुण्य प्राप्त होगा। समय का सही उपयोग करें और अपने आध्यात्मिक जीवन में उन्नति करें।

    स्नान का महत्व: पवित्रता और शुद्धि

    मार्गशीर्ष अमावस्या पर स्नान करने से आपको शारीरिक और मानसिक शुद्धि प्राप्त होगी। पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है, परन्तु यदि यह संभव न हो तो घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें। यह आपको पापों से मुक्ति दिलाएगा और आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगा।

    दान का महत्व: पुण्य कमाने का अवसर

    इस पावन दिन, दान करना अत्यंत पुण्य का काम माना जाता है। अपनी सामर्थ्य अनुसार, अन्न, वस्त्र, धन आदि का दान करें। दान करने से आपको न केवल आध्यात्मिक शक्ति मिलेगी बल्कि आपको समाजसेवा का भी आशीर्वाद प्राप्त होगा। इससे आपके जीवन में खुशहाली और समृद्धि आएगी।

    मार्गशीर्ष अमावस्या पूजन विधि: सरल और प्रभावी अनुष्ठान

    मार्गशीर्ष अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और सभी कामों से मुक्त होकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। फिर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। पितृ तर्पण और श्राद्ध से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करें। यह पूजन विधि आपको आध्यात्मिक शांति प्रदान करेगी और आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी।

    पूजन सामग्री

    पूजन के लिए आपको निम्नलिखित सामग्री की आवश्यकता होगी: गंगाजल, धूप, दीपक, फल, फूल, मिष्ठान, चावल, और अन्य पूजन सामग्री।

    पूजन मंत्र

    अनेक मंत्र हैं जिनका जाप आप पूजन के दौरान कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, आप महामृत्युंजय मंत्र का जाप कर सकते हैं। ध्यान रहे, शुद्ध मन से की गई पूजा ही फलदायी होती है।

    मार्गशीर्ष अमावस्या का महत्व: पितृ तर्पण और आध्यात्मिक अनुग्रह

    अमावस्या को हिन्दू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सूर्य और चन्द्रमा एक साथ रहते हैं, जिससे उनकी संयुक्त ऊर्जा का प्रभाव रहता है। यह पितृ तर्पण का सबसे शुभ दिन है, क्योंकि इस दिन पितरों की उपासना करना सबसे फलदायी होता है। चन्द्रमा का अमृत जल वनस्पतियों में प्रविष्ट हो जाता है, इसलिए इस दिन सरोवरों में स्नान करना औषधि का सेवन करना शुभ माना जाता है।

    पितृ तर्पण विधि: पितरों को सम्मान और श्रद्धांजलि

    पितृ तर्पण विधि में आपको पितरों का ध्यान करके उन्हें जल, तिल और अन्य सामग्री अर्पित करनी होगी। यह क्रिया आपके पितरों को शांति प्रदान करेगी और उन्हें आपके प्रति कृतज्ञता का भाव जगायेगी।

    मार्गशीर्ष अमावस्या उपाय: जीवन में खुशहाली और सफलता

    यहाँ कुछ उपाय दिए गए हैं जिनसे आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं:

    1. पवित्र नदी में स्नान करें या अपने स्नान जल में गंगाजल मिलाएँ।
    2. हनुमान जी का पाठ करें और उन्हें लड्डू का भोग लगाएँ, या हनुमान बीज मंत्र का जाप करें और चमेली के तेल का दिया जलाएँ।
    3. मंदिर जाएँ और अन्न का दान करें।

    Take Away Points:

    • मार्गशीर्ष अमावस्या एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अवसर है, जो पितृ तर्पण और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के लिए आदर्श है।
    • स्नान-दान, और पूजन से आपको पुण्य की प्राप्ति होगी और आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि होगी।
    • पितरों का सम्मान और उनकी आत्मा की शांति के लिए पितृ तर्पण अवश्य करें।
    • उपरोक्त उपायों से आप अपने जीवन में खुशहाली और सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
  • संभल हिंसा: कांग्रेस का संभल दौरा, बढ़ता राजनीतिक तनाव

    संभल हिंसा: कांग्रेस का संभल दौरा, बढ़ता राजनीतिक तनाव

    संभल हिंसा: कांग्रेस का संभल दौरा, बढ़ती राजनीतिक तल्खी

    उत्तर प्रदेश के संभल में हुई हिंसा के बाद से राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया है. कांग्रेस नेता अजय राय के संभल दौरे की योजना ने विवाद को और तूल पकड़ लिया है. पुलिस ने सुरक्षा कारणों से उनका दौरा रोकने की कोशिश की, लेकिन राय ने साफ शब्दों में कहा है कि वो शांतिपूर्वक संभल जाएंगे. क्या इस घटनाक्रम से संभल में तनाव और बढ़ेगा? आइए जानते हैं विस्तार से.

    पुलिस की सुरक्षा और बैरिकेडिंग

    कांग्रेस नेताओं के संभल दौरे के मद्देनज़र लखनऊ में कांग्रेस कार्यालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और बैरिकेडिंग की गई है. प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पूरी तरह सतर्क है. कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को रोकने के लिए लोकल पुलिस के साथ दो पीएसी जवानों की बसों को भी बुलाया गया है. इस कड़े सुरक्षा इंतज़ाम से साफ है कि संभल में स्थिति कितनी नाज़ुक बनी हुई है.

    अजय राय का ऐलान: शांतिपूर्ण दौरा

    यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा है कि उन्हें पुलिस ने संभल न जाने की चेतावनी दी है लेकिन वो शांतिपूर्ण तरीके से संभल जाएंगे. उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन द्वारा किए जा रहे अत्याचारों और अन्याय का जायज़ा लेना होगा. उनका कहना है कि वो किसी भी तरह की अराजकता नहीं चाहते हैं. अजय राय के इस दृढ़ संकल्प के बावजूद, प्रशासन सतर्क है और स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए है.

    संभल में बाहरी लोगों पर रोक

    संभल में हिंसा के बाद बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक को 10 दिसंबर तक बढ़ा दिया गया है. यह प्रतिबंध शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाया गया है. समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल भी संभल का दौरा करने वाला था, लेकिन इस रोक के कारण उन्हें भी अपनी योजना में बदलाव करना पड़ा. इस कदम से ये ज़ाहिर होता है कि संभल में हालात अभी सामान्य नहीं हुए हैं.

    सपा का आर्थिक मदद का ऐलान

    समाजवादी पार्टी ने संभल हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है और यूपी सरकार से 25-25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है. सपा ने इस हिंसा के लिए बीजेपी सरकार और प्रशासन को ज़िम्मेदार ठहराया है. इस तरह, राजनीतिक दलों की तरफ से स्थिति का लाभ उठाने के साथ-साथ पीड़ितों के प्रति अपनी सहानुभूति भी दिखाई जा रही है.

    संभल घटनाक्रम: आगे क्या?

    संभल में बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच, कांग्रेस नेता अजय राय के संभल दौरे के परिणाम क्या होंगे, ये देखना बेहद दिलचस्प होगा. क्या वो शांतिपूर्ण तरीके से अपना दौरा पूरा कर पाएंगे या प्रशासन के रवैये का सामना करना पड़ेगा? यह राजनीतिक स्थिति को और भी जटिल बना सकता है.

    संभावित परिणाम और तनाव

    अजय राय के संभल दौरे से तनाव बढ़ सकता है. स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और प्रशासन को सतर्क रहना होगा. अगर अजय राय का दौरा किसी भी तरह की झड़प में बदलता है तो इससे हालात बिगड़ सकते हैं. इस तरह की घटनाएं सांप्रदायिक सौहार्द को और नुकसान पहुंचा सकती हैं.

    राजनीतिक पक्षों का रवैया

    सभी राजनीतिक दलों को जिम्मेदार रवैया अपनाने और संयम बरतने की ज़रूरत है. हिंसा से जूझ रहे लोगों की मदद करने के बजाय आरोप-प्रत्यारोप से स्थिति को और खराब न किया जाए. शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालने का प्रयास किया जाना चाहिए ताकि राज्य में सौहार्दपूर्ण माहौल बना रहे.

    Take Away Points

    • संभल हिंसा के बाद से राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं.
    • कांग्रेस नेता अजय राय का संभल दौरा विवाद का केंद्र बना हुआ है.
    • पुलिस और प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है.
    • अजय राय का कहना है कि वो शांतिपूर्वक संभल जाएंगे.
    • इस घटनाक्रम के कारण संभल में स्थिति और जटिल हो सकती है.
    • सभी राजनीतिक दलों को संयम और जिम्मेदारी से काम लेना होगा।
  • सर्दियों में शादी में लहंगा या साड़ी: स्टाइलिश और कम्फ़र्टेबल कैसे रहें?

    सर्दियों में शादी में लहंगा या साड़ी: स्टाइलिश और कम्फ़र्टेबल कैसे रहें?

    ठंड के मौसम में शादियों का सीज़न! क्या आप भी सर्दियों में शादी में स्टाइलिश दिखना चाहती हैं, बिना ठंड से परेशान हुए? यह लेख आपको बताएगा कैसे लहंगे और साड़ियों के साथ ठंड से बचाव के लिए स्टाइलिश तरीके अपनाएं! शादी के सीज़न में सबसे बड़ी चुनौती होती है स्टाइल और कम्फर्ट का सही संतुलन बनाना, खासकर जब ठंड का मौसम हो। तो चलिए जानते हैं कुछ शानदार टिप्स जिनसे आप सर्दी में लहंगे या साड़ी पहनकर भी स्टाइलिश और आरामदायक रह सकती हैं।

    1. थर्मल और लेगिंग्स: अदृश्य गर्मजोशी

    सबसे पहले, लहंगे या साड़ी के नीचे थर्मल इनरवियर पहनें! यह तरीका बेहद असरदार और सहज है। मार्केट में कई तरह के थर्मल टॉप और स्लीवलैस लेगिंग्स उपलब्ध हैं, जो दिखाई नहीं देते और शरीर को पूरी तरह से गर्म रखते हैं। ध्यान रखें कि थर्मल फ़ैब्रिक हल्का होना चाहिए, जिससे वह लहंगे के नीचे अच्छे से फिट हो जाए। यह टिप आपकी पार्टी को सबसे कम्फ़र्टेबल बना देगी।

    सुझाव: नायलॉन या पॉलिएस्टर फ़ैब्रिक से बने थर्मल से दूर रहें और 100% कॉटन थर्मल चुनें।

    2. जैकेट और शॉल: स्टाइलिश वार्मर

    लहंगे या साड़ी के साथ एक लंबी एथनिक जैकेट या शॉल पहनें। यह न केवल ठंड से बचाता है बल्कि आपके लुक को और भी खूबसूरत बनाता है। एक कश्मीरी शॉल या ऊनी शॉल ना सिर्फ़ स्टाइलिश बल्कि आरामदायक भी होगा। कढ़ाई वाले, भारी काम वाली जैकेट या ब्रोकेड शॉल सर्दियों में सबसे उपयुक्त रहेंगे। इनमे सिल्क, वेलवेट, या ऊन जैसी गर्म फ़ैब्रिक का होना अतिरिक्त लाभ है।

    टिप: रंगों का चुनाव आप अपने लहंगे या साड़ी के साथ मैचिंग या कंट्रास्टिंग कर सकती हैं।

    3. बूट्स: आराम और स्टाइल का संगम

    पारंपरिक ड्रेस के साथ बूट्स एक बेमिसाल कॉम्बिनेशन हैं। वेलवेट या फ्लीस लाइन वाले बूट्स ठंड से आपके पैरों को बचाएंगे और स्टाइल भी बढ़ाएंगे। बूट्स के कई डिजाइन उपलब्ध हैं, जिससे आप अपने लहंगे या साड़ी से मैचिंग बूट्स आसानी से चुन सकती हैं।

    ज़रूरी नोट: बूट्स की ऊंचाई आपके लहंगे की लंबाई पर निर्भर करेगी, बेहतर होगा कि कम एड़ी वाले बूट्स को ही पहना जाए ताकि चलने-फिरने में कोई दिक्कत न हो।

    4. पार्का जैकेट: जब सर्दी ज्यादा हो

    अगर मौसम बेहद ठंडा है या आपको लंबे समय तक बाहर रहना है तो स्टाइलिश पार्का जैकेट आपके लिए परफेक्ट ऑप्शन है। पार्का जैकेट हुड के साथ आते हैं, जो आपके सिर और गर्दन को ठंड से बचाते हैं। इसे अपने लहंगे या साड़ी के ऊपर पहन कर आप स्टाइलिश और आरामदायक दोनों रह सकती हैं।

    पसंद: अपने लहंगे के रंग के हिसाब से पार्का का चुनाव करें और रंगों के परफेक्ट कॉम्बिनेशन का ध्यान रखें।

    टेक अवे पॉइंट्स:

    • थर्मल इनरवियर ठंड से बचाएगा बिना दिखे।
    • एथनिक जैकेट या शॉल स्टाइलिश और गर्म रहेगा।
    • बूट्स आपके पैरों को आरामदायक रखेंगे।
    • पार्का जैकेट ज़्यादा ठंड में बचाएगा।

    इन टिप्स को ध्यान में रखकर आप सर्दी में भी स्टाइलिश और कंफ़र्टेबल रह सकती हैं। शादी का सीज़न मज़े से एन्जॉय करें!

  • जुस्त: इंटरनेट सेंसेशन जिसने सोशल मीडिया पर मचाई धूम

    जुस्त: इंटरनेट सेंसेशन जिसने सोशल मीडिया पर मचाई धूम

    जुस्त: इंटरनेट सेंसेशन जिसने सोशल मीडिया पर मचाई धूम

    क्या आप ‘मेरी जीत भी लेजा… मेरी हार भी लेजा…’ गाने से परिचित हैं? अगर आप सोशल मीडिया के दीवाने हैं तो ज़रूर ही! यह गाना इंटरनेट सेंसेशन जुस्त का है, जिसने हाल ही में साहित्य आजतक 2024 में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। जुस्त ने न केवल अपने अनोखे नाम के पीछे की कहानी सुनाई, बल्कि अपने मंत्रमुग्ध कर देने वाले गायन से भी सबको मोहित किया। इस लेख में, हम जुस्त के सफ़र, उनके संगीत के दर्शन, और बॉलीवुड से मिले प्रतिक्रियाओं पर गौर करेंगे।

    जुस्त नाम का रहस्य

    जुस्त का नाम अपने आप में एक रहस्य है, एक कहानी जो परियों की कहानियों से कम नहीं लगती। उन्होंने बताया कि कैसे एक रात 2 बजे, गहन ध्यान के दौरान, उन्हें अचानक अपने नाम का एहसास हुआ – ‘जुस्त’। यह कोई सोची-समझी बात नहीं थी, बल्कि एक स्वाभाविक अनुभव था, जैसे सात रंगों की बारिश। यह नाम उनके लिए, उनके संगीत के लिए, पूरी तरह से ऑर्गेनिक था।

    सीमित नहीं, अपार संगीत

    जुस्त का संगीत अनियंत्रित है, स्वतंत्र है, बंधन से मुक्त। वे अपनी संगीत यात्रा को ‘चोर’ गाने से जोड़ते हैं। उन्होंने बताया कि अपने संगीत की शुरुआत से ही उनका लक्ष्य रहा है, अपने शब्दों को ईमानदारी से कहना, किसी झूठ या छल के बिना। वे रवीन्द्रनाथ टैगोर और बॉब डिलन जैसे कवियों से प्रभावित हैं, जिन्होंने अपने शब्दों के अर्थ को सीमित नहीं किया। जुस्त के ‘चोर’ गाने के कई अर्थ हैं, हर श्रोता अपनी व्याख्या करता है, और हर व्याख्या सही है। यही जुस्त के संगीत का जादू है, एक ऐसा संगीत जो स्वतंत्र है, अपार है, और हर किसी के लिए कुछ ना कुछ रखता है।

    बॉलीवुड से प्रतिक्रियाएं: एक अनूठा रास्ता

    बॉलीवुड ने जुस्त के काम की खूब प्रशंसा की है और कई प्रमुख निर्देशकों ने उन्हें काम करने के लिए आमंत्रित भी किया। लेकिन जुस्त का दृष्टिकोण अनूठा है। वह बॉलीवुड के संगीत के चलन से आगे जाना चाहते हैं। वे अपनी कहानी को अपनी तरह से बताना चाहते हैं, बिना किसी बाधा के, बिना किसी ट्रेंड को फॉलो किये। वे रवीन्द्रनाथ टैगोर और कोल्डप्ले जैसे कलाकारों से प्रेरणा लेते हैं, जो अपनी कहानी, अपने शब्दों से ही कहना चाहते हैं।

    जुस्त का संदेश: संगीत से परे एक दर्शन

    जुस्त का संगीत केवल संगीत नहीं है, बल्कि एक दर्शन है। यह ईमानदारी, स्वतंत्रता, और आत्म-अभिव्यक्ति का संदेश देता है। जुस्त के काम से यह साफ़ पता चलता है कि अगर आप अपने दिल की सुनते हैं और अपनी सच्ची आवाज़ को बुलंद करते हैं तो सफलता आपके कदम चूमेगी, फिर चाहे आपके रास्ते में कितनी भी बाधाएँ आ जाएं। यह आज के समय में बेहद ज़रूरी संदेश है जब हमारे चारों तरफ कई झूठी बातें और दिखावे बिखरे पड़े हैं।

    Take Away Points:

    • जुस्त का संगीत अपनी ईमानदारी और आत्म-अभिव्यक्ति के लिए जाना जाता है।
    • जुस्त ने अपने संगीत के माध्यम से एक अलग पहचान बनाई है, और अपने तरीके से लोगों के दिलों को छुआ है।
    • जुस्त बॉलीवुड के ऑफर से दूर रहना पसंद करते हैं क्योंकि वे खुद को और अपनी संगीत की अदभुत दुनिया बनाना चाहते हैं।
    • जुस्त का संगीत हर किसी को अपना बना लेता है और लोगों के विचारों में एक क्रांति ला देता है।
  • अहमदाबाद सड़क हादसा: नशे में धुत ड्राइवर ने दो डॉक्टरों को मारी टक्कर!

    अहमदाबाद सड़क हादसा: नशे में धुत ड्राइवर ने दो डॉक्टरों को मारी टक्कर!

    अहमदाबाद में भीषण सड़क हादसा: नशे में धुत ड्राइवर ने दो डॉक्टरों को मारी टक्कर!

    क्या आप कल्पना कर सकते हैं? सुबह की ताज़ी हवा, सड़क पर साइकिल चलाते हुए दो डॉक्टर, और अचानक एक तेज रफ़्तार कार की जोरदार टक्कर! यह सचमुच हुआ अहमदाबाद में, जहाँ एक नशे में धुत ड्राइवर ने दो साइकिल सवार डॉक्टरों को अपनी कार से टक्कर मार दी और मौके से फरार हो गया। यह हादसा इतना भीषण था कि एक डॉक्टर के पैर में फ्रैक्चर हो गया और दूसरा 10 फीट दूर जा गिरा। लेकिन अब इस ख़तरनाक घटना के पीछे का अपराधी पकड़ा गया है! आइए जानते हैं इस दिल दहला देने वाली घटना की पूरी कहानी।

    घटना का सच: कैसे हुआ हादसा?

    23 नवंबर की सुबह करीब 6:30 बजे, अहमदाबाद के सोला फ्लाईओवर पर दो साइकिल सवार डॉक्टर, डॉ. कृष्ण शुक्ला और डॉ. अनीश तिवारी अपनी नियमित सुबह की सैर पर थे। अचानक एक तेज रफ़्तार काले रंग की कार ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। यह कार इतनी तेज़ थी कि दोनों डॉक्टर ज़मीन पर गिर पड़े। डॉ. कृष्ण शुक्ला के पैर में गंभीर फ्रैक्चर हुआ और डॉ. अनीश तिवारी को भी चोटें आईं। दोनों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। घायल डॉक्टरों ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई, जिससे इस लापरवाह ड्राइवर को पकड़ने की जाँच शुरू हो गई।

    सीसीटीवी कैमरे बने पुलिस की मददगार

    पुलिस ने आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की। हालांकि, कार का नंबर साफ़ नहीं दिख रहा था, पर पुलिस ने हार नहीं मानी। लगभग 100 से ज़्यादा सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद, पुलिस ने कार के एक हिस्से पर दिख रहे आधे नंबर प्लेट से जांच शुरु की. धीरे-धीरे जाँच ने ड्राइवर परम उदयकुमार वोरा की ओर इशारा किया जो एक सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट का काम करता है.

    पुलिस की तेज कार्रवाई: आरोपी गिरफ्तार!

    पुलिस ने परम वोरा की SUV एक्सयूवी700 को ट्रेस किया। परम ने पुलिस को बताया की वह नशे में धुत था और गलत तरीके से ओवरटेक करने की कोशिश कर रहा था। टक्कर मारने के बाद उसने अपनी कार को सर्विस सेंटर में छोड़ दिया और उदयपुर भाग गया था। लेकिन पुलिस ने उसे उदयपुर से ही गिरफ़्तार कर लिया! यह पुलिस की तेज और प्रभावी कार्रवाई का एक बड़ा उदाहरण है।

    नशे में गाड़ी चलाना है जानलेवा

    यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि नशे में गाड़ी चलाना कितना खतरनाक हो सकता है। परम वोरा की लापरवाही से दो डॉक्टरों की ज़िन्दगी खतरे में पड़ गई। इसलिए, हम सभी को सतर्क रहना चाहिए और नशे में गाड़ी चलाने से बचना चाहिए। अपनी और दूसरों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है।

    ध्यान देने योग्य बातें

    • इस घटना से हमें नशे में गाड़ी चलाने के ख़तरे के बारे में जागरूक होना चाहिए।
    • तेज रफ़्तार से गाड़ी चलाना भी बहुत ख़तरनाक है, इससे दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
    • पुलिस की इस कार्रवाई से साफ़ होता है कि वे अपराधियों को पकड़ने में पूरी लगन से काम करते हैं।

    Take Away Points

    • सड़क सुरक्षा बहुत ज़रूरी है, हमें सतर्क रहना चाहिए।
    • नशे में गाड़ी न चलाएँ, दूसरों की जान को खतरा न बनें।
    • ज़िम्मेदारी से गाड़ी चलाएँ, तेज रफ़्तार से बचें।
  • राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया: संसद में हुई ऐतिहासिक मुलाकात

    राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया: संसद में हुई ऐतिहासिक मुलाकात

    राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया: संसद में हुई मुलाकात ने खींचा सबका ध्यान

    क्या आप जानते हैं कि हाल ही में संसद में एक ऐसी मुलाक़ात हुई जिसने सबको चौंका दिया? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पूर्व सहयोगी, अब बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की। दोनों नेताओं की यह मुलाक़ात सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है और लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएँ हैं। क्या आप जानना चाहेंगे कि आखिर इन दोनों नेताओं के बीच क्या बात हुई? क्या उनके बीच फिर से दोस्ती हो रही है? चलिए जानते हैं इस दिलचस्प घटना के बारे में सब कुछ।

    पुरानी दोस्ती और राजनीतिक फूट

    राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया, एक समय पर बेहद करीबी दोस्त थे। दोनों नेताओं के बीच गहरी दोस्ती राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय हुआ करती थी। उन्होंने मिलकर कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने के कई प्रयास किए और युवा नेताओं को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई। सिंधिया कांग्रेस के लिए एक प्रभावशाली चेहरा थे, और राहुल गांधी उन पर पूरा भरोसा करते थे। लेकिन राजनीति के रंगमंच में अक्सर दोस्ती भी बदल जाती है।

    मध्य प्रदेश चुनाव और राजनीतिक मतभेद

    2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में सिंधिया ने कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर उनका कमलनाथ से मतभेद हुआ जिसके बाद उनके समर्थकों में असंतोष बढ़ने लगा। सिंधिया को मुख्यमंत्री पद से वंचित किये जाने से उनके समर्थक काफी नाराज़ हुए और यह पार्टी के अंदरूनी विवाद का कारण बना। यह विवाद आगे चलकर एक बड़े राजनीतिक परिवर्तन का कारण बना।

    कांग्रेस से बीजेपी का सफ़र: एक बड़ा मोड़

    साल 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी को अलविदा कह दिया और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो गए। उन्होंने कांग्रेस पर जमीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और नेतृत्व की कमज़ोरियों के आरोप लगाए। यह घटना कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका थी और पार्टी के भीतर काफी हलचल मच गई थी। इस घटनाक्रम के बाद से ही राहुल गांधी और सिंधिया के बीच की खाई और गहरी होती गई।

    संसद में हुई मुलाकात: क्या है इसका मतलब?

    हाल ही में संसद के सेंट्रल हॉल में राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया आमने-सामने हुए। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत की। यह मुलाक़ात कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में हुई। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं और तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। क्या यह दोनों नेताओं के बीच सुलह का संकेत है? या फिर केवल औपचारिक मुलाकात थी?

    क्या है आगे की राजनीति?

    इस मुलाक़ात के बाद से राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएँ हैं। कुछ लोग मानते हैं कि यह दोनों नेताओं के बीच एक नई शुरुआत का संकेत हो सकता है, जबकि कुछ का मानना है कि यह महज़ एक औपचारिक मुलाक़ात थी। आगे क्या होता है, यह देखना दिलचस्प होगा। क्या दोनों नेता एक बार फिर से साथ काम करेंगे? क्या यह राजनीतिक समीकरणों में कोई बदलाव लाएगा? हमें इंतज़ार करना होगा और देखना होगा कि आने वाला समय क्या लेकर आता है।

    Take Away Points

    • राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया की संसद में हुई मुलाक़ात ने सबका ध्यान खींचा है।
    • दोनों नेताओं के बीच एक समय पर बेहद गहरी दोस्ती थी।
    • मध्य प्रदेश चुनावों के बाद दोनों के बीच मतभेद बढ़ गए।
    • 2020 में सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन कर ली।
    • इस मुलाक़ात के राजनीतिक निहितार्थों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएँ हो रही हैं।