हिमाचल ने हासिल किया जैव विविधता प्रबंधन समितियां गठित करने का लक्ष्य

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शिमला। हिमाचल प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड ने राज्य में जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) के गठन का शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। पंचायतीराज एवं ग्रामीण विकास विभाग और शहरी विकास विभाग के सहयोग से राज्य जैव-विविधता बोर्ड ने प्रदेश की सभी 3370 स्थानीय निकायों में जैव विविधता समितियां गठित कर ली गई है।

बोर्ड की आज यहां आयोजित बैठक में यह जानकारी दी गई। बैठक की अध्यक्षता राज्य जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव डी.सी. राणा ने की। बैठक में राष्ट्रीय हरित अभिकरण के निर्णय के अनुसार राज्य में बीएमसी के गठन में हुई प्रगति और लोगों के जैव विविधता रजिस्टर तैयार करने पर चर्चा की गई।

डी.सी. राणा ने कहा कि जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत यह अनिवार्य है कि प्रत्येक स्थानयी निकास बीएमसी का गठन करें और जैव विविधता रजिस्टर बनाने की तैयारी करें। उन्होंने कहा कि बोर्ड इन रजिस्टर को तैयार करने में बीएमसी की सहायता करेगा। इस रजिस्टर को एनजीटी के निर्देश पर तैयार किया जाना है जो एक कानूनी दस्तावेज़ है जिसमें क्षेत्र विशेष के जैविक संसाधनों एवं सम्बध पारम्परिक ज्ञान की जानकारी उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि एनजीटी के आदेशों के अनुरूप जो बीएमसी जैव विविधता रजिस्टर तैयार करने और लोगों के जैव विविधता रजिस्टर की धनराशि तकनीकी सहायता समूहों को स्थानांतरित करने में विफल रहती है या जैव विविधता रजिस्टर बनाने में अवरोध पैदा कर रही हैं उन पर प्रति माह 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

बैठक में निर्णय लिया गया कि लोगों के जैव विविधता रजिस्टर तैयार करने में शामिल सभी संस्थाएं सम्बन्धित बीएमसी में 6 महीनों के अंदर इस कार्य को पूरा करेंगी। तकनीकी सहायता समूह बीएमसी स्तर पर रजिस्टर तैयार करने में राज्य जैव विविधता बोर्ड का सहयोग करेंगे। यह भी निर्णय लिया गया है कि रजिस्टर तैयार करने में जिला परिषदों, खण्ड समितियों के अध्यक्ष और पंचायत प्रधान अपनी-अपनी बीएमसी में इन संस्थानों को रजिस्टर तैयार करने के कार्य में सहयोग देंगे।

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