गूंजी सदभाव की शहनाई, एक ही मंडप पर शादी अौर कुबूल हुआ निकाह

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उपेन्द्र कुशवाहा

पडरौना,कुशीनगर : जिले के तुर्कपट्टी महुआ में केडी शाही जन जागृति संस्थान द्वारा आयोजित सामूहिक विवाह समारोह नव निकेतन ज्ञानस्थली के प्रांगण में रबिवार की रात्रि मे सद् भाव की शहनाई गूंजी तो हर तरफ खुशी का माहौल बन गया। एक ही मंडप पर एक तरफ मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे लिया गए तो दूसरी तरफ कुबूल हुआ निकाह। सद् भाव की इस अनूठी मिसाल को समाज के हर वर्ग ने सराहा। रबिवार को यह नजारा देखने को मिला सामूहिक 35 निर्धन कन्याओं के विवाह समारोह में। जहां पूरा शहर था मेहमान। दूल्हा और दुल्हन दोनों पक्षों की आवभगत की आयोजकों की टोली ने।

तुर्कपट्टी में रबिवार को सामूहिक विवाह में सामाजिक समरसता की गवाह बन गई। तुर्कपट्टी के नो लोकेशन ज्ञानस्थली के ग्राउंड में सामूहिक विवाह का आयोजन किया गया। आयोजक टीम की ओर से की चिन्हित किए गए 35 जोड़ों ने एक-दूसरे का हाथ थाम कर ज़िंदगी के नए सफर की शुरुआत की। वही हिन्दू वर कन्याओ एक साथ ने सात फेरे लेकर वैवाहिक जीवन में प्रवेश किया, तो मुस्लिमो मे दुल्हा दुल्हन के जोड़ों ने एक-दूसरे को क़ुबूल कर ज़िंदगी का नया सफर शुरू किया। पंडितो ने जहा विवाह के मंत्रोच्चार पढ़े तो मौलावनो ने निकाह पढ़ाया। ख़ास बात ये रही के देवरिया के सांसद व पुर्व केंद्रिय मंत्री कलराज मिश्रा बिधायक फाजिलनगर गंगा सिंह कुशवाहा, पूर्व विधान परिषद सदस्य धर्मेंद्र यादव ,समाजसेवी दीप नारायण अग्रवाल, नव निकेतन ज्ञान असली के प्रबंधक सुधीर शाही, हनुमान इंटर कॉलेज पडरौना के प्रिंसिपल शैलेन्द्र शुक्ला , विक्रम अग्रवाल वरिष्ठ हिंदूवादी नेता पप्पू पांडे सहित पूरे आयजककर्ताओ एक साथ 35 नए जोड़ों को आशीर्वाद देने के लिए मौजूद रहा।

केडी शाही जन जागृति संस्थान के पदाधिकारियों कि माने तो सामूहिक विवाह समारोह में हिन्दू कन्याओं का विवाह हिन्दू रिति-रिवाज से ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोचार से संपन्न करायी जाती है जबकि मुस्लिम कन्याओं के निकाह की रस्म इस्लामिक रिति-रिवाज से पूरी की जाती है।

सामूहिक विवाह समारोह के आयोजन में डाक्टर सी वी सिंह, सुमित रूगंटा, , हरिप्रसाद गोपी कृष्ण, डाक्टर अरूण कुमार गौतम, पप्पू पाण्डेय, विजय सर्राफ,अजय गुप्ता, नरेश कनोडिया, रवि अग्रवाल, प्रमोद बालोदिया, सौरभ वर्मा, रमा खेतान, प्रदीप तुलस्यान, डाक्टर इरशाद अहमद सिद्दीकी, अवध तुलस्यान, सुरेंद्र नाथ चतुर्वेदी विनीत तुलस्यान , रूस्तम अली आदि का विशेष सहयोग रहता है ।

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