कानपुर, आइआइटी कानपुर में साइबर सिक्योरिटी से एमटेक को हरी झंडी मिल गई है, ई-सीनेट ने नए कोर्स को स्वीकृति दे दी है। अब जल्द ही प्रस्ताव को बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीओजी) के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे कोर्स की अगले साल से शुरुआत हो सकेगी।
ई-सीनेट में सस्टेनेबल एनर्जी के नए विभाग का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन ई-सीनेट ने उसे लागू करने से इन्कार कर दिया है। अभी उसका महत्व, मांग और उपयोगिता पर जानकारी जुटाई जाएगी। इसका निर्धारण नेशनल एडवाइजरी कमेटी करेगी। इस कमेटी में कई प्रमुख तकनीकी संस्थान और सस्टेनेबल एनर्जी के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। जेईई एडवांस्ड में सुपर न्यूमरेरी के अंतर्गत 20 फीसद छात्राओं की संख्या बढ़ाने के निर्णय पर मोहर लगी है।
कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते सीनेट की बैठक ऑनलाइन हो रही है। ई-सीनेट में प्रस्तावों पर विभागाध्यक्ष, फैकल्टी और संस्थान के अन्य अधिकारी अपनी राय देते हैं। इस बार साइबर सिक्योरिटी से एमटेक कोर्स चालू कराने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे ज्यादातर ने तुरंत हां कर दिया है। कुछ फैकल्टी ने कोर्स क्रेडिट्स को लेकर सवाल रखे। एमटेक इन साइबर सिक्योरिटी नए तरह का कोर्स रहेगा, इससे साइबर सुरक्षा के अधिक से अधिक विशेषज्ञ निकलेंगे और लोगों को जागरू किया जाएगा। डिजिटल भारत के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है। आमजन मोबाइल, कंप्यूटर और लैपटॉप का इस्तेमाल कर रहे हैं।
45 से 60 होंगी सीटें
साइबर सिक्योरिटी से एमटेक के काेर्स में 45 से 60 सीटें रहेंगी। इसकी संख्या प्रारंभिक तौर पर और कम होंगी। धीरे धीरे इनको बढ़ाया जा सकेगा।
साइबर सुरक्षा में आइआइटी कानपुर आगे
साइबर सिक्योरिटी के मामले में आइआइटी कानपुर अन्य संस्थानों के मुकाबले बहुत आगे है। यहां परम संगणक नाम का सुपर कंप्यूटर पहले ही लग चुका है। सीएसएडब्ल्यू नाम से प्रतियोगिता आइआइटी कानपुर ही आयोजित करता है।
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