आईपीएस अधिकारी ओम प्रकाश सिंह ने आज प्रदेश के नये पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का पदभार ग्रहण कर लिया।डीजीपी के जनसम्पर्क अधिकारी राहुल गुप्ता ने बताया कि सिंह ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। उन्होंने 31 दिसंबर को ही सेवानिवृत्त हो चुके सुलखान सिंह का स्थान लिया है।
साफ-सुथरी छवि वाले 1983 बैच के आईपीएस अफसर ओम प्रकाश सिंह इससे पहले केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के महानिदेशक थे। केन्द्र से उन्हें कार्यमुक्त करने में काफी समय लगने के कारण वह पदभार ग्रहण नहीं कर सके थे। प्रदेश में डीजीपी का पद पिछले 22 दिन से खाली था।
ओपी सिंह करीब दस महीन पुरानी प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के तीसरे डीजीपी हैं। इस सरकार में पहले डीजीपी जावीद अहमद थे। इसके बाद सुलखान सिंह को मोर्चा दिया गया। अब ओपी सिंह ने डीजीपी की कुर्सी संभाली है। ओपी सिंह प्रतिनियुक्ति बीच में छोड़कर चार वर्ष बाद प्रदेश में लौट रहे हैं। ओपी सिंह के पास प्रदेश में काम करने का लंबा अनुभव है। उनको सुलझा हुआ और व्यावहारिक पुलिसिंग का तजुर्बेकार अधिकारी माना जाता है। ओपी सिंह के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती पुलिस पर ‘जाति विशेष’ के अधिकारियों को वरीयता देने के आरोपों से भिडऩे की होगी।
सेंट जेवियर्स कॉलेज, नेशनल डिफेंस कॉलेज और दिल्ली विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर चुके सिंह आपदा प्रबन्धन में एमबीए के साथ-साथ एम.फिल डिग्रीधारी हैं। वह पूर्व में उत्तर प्रदेश तथा केन्द्र सरकार में अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
वर्ष 1992-93 में लखीमपुर खीरी जिले के पुलिस अधीक्षक पद पर रहते हुए उन्होंने आतंकवादी गतिविधियों पर सख्ती से लगाम कसी थी। इसके अलावा लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पद पर काम करते हुए उन्होंने धार्मिक जुलूसों को लेकर अर्से पुराने शिया-सुन्नी विवाद को सुलझाने में अहम भूमिका निभायी थी।
आपदा राहत बल के महानिदेशक के तौर पर सिंह ने जम्मू-कश्मीर में आयी बाढ़, नेपाल में आये विनाशकारी भूकम्प, हुदहुद तूफान तथा चेन्नई के शहरी इलाकों में आयी बाढ़ की विभीषिका से निपटने के लिये सराहनीय कार्य किये थे। सिंह को उत्कृष्ट सेवा के लिये वीरता पुरस्कार समेत कई तमगे भी मिल चुके हैं।
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