बीजेपी का पुराना खिलाड़ी ‘रानी’ को देगा मात?

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नई दिल्ली। कांग्रेस ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को 32 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की जिसमें सबसे प्रमुख नाम पूर्व सांसद मानवेंद्र सिहं का है जो मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को झालरापाटन विधानसभा में चुनौती देंगे। भाजपा ने मानवेंद्र की उम्मीदवारी को ज्यादा तवज्जो नहीं देने की कोशिश करते हुए कहा कि इससे झालरापाटन में मुख्यमंत्री की जीत की संभावना पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दूसरी तरफ, मानवेंद्र ने कहा कि वह वसुंधरा के खिलाफ चुनौती स्वीकार करते हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उन्हें ‘बाहरी चेहरा’ करार दिया है। झालरापाटन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सीट है जहां से उन्होंने अपना नामांकन शनिवार को दाखिल किया। कांग्रेस ने शनिवार को अपने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की जिसमें 32 नाम हैं। इसमें सबसे प्रमुख नाम मानवेंद्र सिंह का है। भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे जसवंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र सिंह इसी अक्टूबर माह में कांग्रेस में शामिल हुए हैं।
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 कांग्रेस ने 15 नवंबर की रात 152 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी। इस तरह पार्टी अब तक 184 सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। पहली सूची में अशोक गहलोत, सचिन पायलट और सी पी जोशी जैसे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के नाम थे। गहलोत सरदारपुरा विधानसभा सीट से, सचिन पायलट टोंक से और सीपी जोशी नाथद्वारा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। राज्य की 200 सदस्यीय विधानसभा के लिए आगामी सात दिसंबर को मतदान होगा।
मानवेंद्र को वसुंधरा के खिलाफ उतारने के कांग्रेस के कदम पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा हम सीट जीतेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘राजपूत घराने में ही जन्म लेने से कोई बड़ा नहीं हो जाता, बड़ा तो गुणों से होता है। यह (मानवेंद्र) कोई बडाघ् नाम नहीं। हम सीट जीतते आए हैं और जीतेंगे।’’
वहीं, झालरापाटन में नामांकन दाखिल करने के बाद मुख्यमंत्री राजे ने कहा कि कांग्रेस को उनके सामने कोई स्थानीय चेहरा नहीं मिल रहा था इसलिए वह बाहरी (मानवेंद्र) को ले आयी। उन्होंने समर्थकों से कहा,‘‘झालावाड़ (जिले) में किसी परिवार की लड़ाई नहीं है बल्कि पूरे राजस्थान की लड़ाई है।’ उनकी सरकार द्वारा करवाए गए विकास कार्यों की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा,‘‘अभी तो ट्रेलर देखा है पूरी फिल्म बाकी है।’’ इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन भी उनके साथ थे।
मानवेंद्र सिंह ने कहा कि वसुंधरा के खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती उन्हें स्वीकार है, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह मुख्यमंत्री या किसी दूसरे पद के दावेदार नहीं हैं। उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद मानवेंद्र ने दिल्ली में ‘भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘राहुल गांधी और केंद्रीय चुनाव समिति ने मुझ पर विश्वास जताया है। मैं उनका आभारी हूं। यह एक चुनौती है जिसे स्वीकार करता हूं।’’
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झालरापाटन की सीट पारंपरिक रूप से भाजपा के खाते में रही है। मुख्यमंत्री राजे 2003 से यहां से तीन बार विधायक चुनी जा चुकी हैं और चैथी बाद दावेदारी कर रही हैं। 2013 के पिछले विधानसभा चुनाव में वह 60869 वोटों से जीती थीं। उन्हें 63.14ः वोट मिले तो दूसरे स्थान पर रही मीनाक्षी चंद्रावत की झोली में 29.53ः वोट आए थे। इस सीट पर कुल लगभग ढाई लाख मतदाता हैं।
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मानवेंद्र सिंह के पिता और भाजपा के वरिष्ठतम नेताओं में से एक रहे जसवंत सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। पार्टी ने 2014 में जसवंत सिंह को टिकट नहीं दिया था। माना जाता है कि मानवेंद्र व उनके परिवार की मुख्यमंत्री राजे से रिश्ते अच्छे नहीं थे। मानवेंद्र ने अक्टूबर में बाड़मेर में ‘स्वाभिमान’ रैली की और भाजपा से औपचारिक रूप से अलग हो गए। इसके बाद वह पिछले महीने कांग्रेस में शामिए हुए।

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