बिना कर्म के भाग्य भी क्षीण हो जाता है:कथाव्यास

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कथा का तीसरा दिवस

रिपोर्ट:हर्ष यादव

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मुसाफिरखाना/अमेठी।आंख से निकला आंसू, मुख से निकला शब्द, शरीर से निकले हुए प्राण जिस तरह वापस नहीं होते उसी तरह मानव द्वारा किया हुआ पाप व पुण्य कभी वापस नहीं होता। ये बातें दादरा स्थिति हिंगलाज मंदिर में चल रही श्री रामकथा के तीसरे दिन कानपुर से पधारी कथा वाचक संगीता शास्त्री व्यास ने कहीं।कथा में कर्म प्रधान विश्व करि राखा चौपाई का विस्तार से वर्णन करते हुए कर्म दण्ड से नहीं बच पाने पर प्रवचन दिया।कथावाचक ने बताया कि मानव जन्म कर्म प्रधान है। इस जीवन मे प्राणी को बगैर काम किए फल प्राप्त नहीं होता। वह जैसा कर्म कतरा है, उसी के अनुरूप ही फल भी भोगता है। उन्होंने कहा कि सांसारिक जीव योगमाया के प्रभाव से सरलता से नहीं छूट सकता बल्कि इसके लिए केवल एक ही माध्यम भगवत भक्ति है। कृष्ण भक्ति मे लीन प्राणी को सांसारिक संताप कष्ट नहीं पहुंचा सकते। व्यास जी ने बताया कि भाग्य भी तभी साथ देता है जब कर्म किया जाए और यह कर्म सही दिशा में हो। बिना कर्म के भाग्य भी क्षीण हो जाता है। इसलिए कर्म करना चाहिए।
इस अवसर पर कृपा शंकर, अंजनी श्रीवास्तव, जितेंद्र सिंह, विजय सिंह मिंटू,सर्वेश सिंह ‘रवि’,मोहित गुप्ता,विनोद शर्मा,आद्या प्रसाद, निशांत श्रीवास्तव,रविकांत,मुकेश तिवारी,हर्ष यादव प्रशांत,निशांत,लकी,रवींद्र, राकेश तिवारी सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।


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