राष्टपति से लेकर मुख्यमंत्री की हवाई यात्रा का दस्तावेज कैसे होता लीक
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने निजी सचिव पीताम्बर यादव को हटा दिया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एसपी गोयल के पीए शिशुपाल को भी हटा दिया गया है। आरोप है कि इन दोनों ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगले बचाने के लिए दिए गए गोपनीय पत्र को लीक किया है। लेकिन सरकार शायद अपनी सुरक्षा को लेकर इतनी सर्तक नही है। राष्टपति से लेकर मुख्यमंत्री तक के हवाई कार्यक्रम की सूचना सोशल मीडिया में वायरल होना भी बड़ी चूक बन सकती हैै। वैसे तो आला अफसर से किसी खबर पर बाॅतचीत की जाए तो वह जबाब देने से कतराता है। ऐसे में राष्टपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के हवाई कार्यक्रम की दस्तावेजी प्रतिलिपि सोशल मीडिया में कैसे वायरल हो जाती है।
बता दें कि गुरुवार 16 मई को समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री योगी से उनके आवास पर मुलाकात कर एक पत्र सौंपा था। इस पत्र में मुलायम और उनके बेटे अखिलेश यादव के सरकारी बंगले को बचाने का तरीका लिखा गया था। यही पत्र अब लीक हो गया है, जिसके बाद तत्काल प्रभाव से पिताम्बर यादव और शिशुपाल को हटा दिया गया है। सीएम कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक इन पर शासन के निर्णयों के संबंध में गोपनीयता भंग करने का आरोप था। ये सीएम ऑफिस की एक्टिविटी और निर्णयों को अम्ल में आने से पहले ही एक बड़े कद्दावर नेता को लीक कर देते थे और वह नेता मामले से संबंधित ट्वीट कर दिया करते थे।इसका असर ये होता था कि ट्वीट के बाद जब सरकार कार्रवाई करती थी तो जनता में ये मैसेज जाता था कि उनके (कद्दावर) के ट्वीट के बाद हरकत में आई सरकार।
बता दें कि पीताम्बर यादव अखिलेश यादव की सरकार में मुख्यमंत्री के निजी सचिव के पद पर तैनात थे। जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचम तल पर आकर अपना काम संभाला तो पिताम्बर यादव अपनी तैनाती बरकरार रखने में कामयाब रहे। वैसे भी ज्ञात हो कि बड़ी और सनसनी खेज रिपोर्टिग के नाम पर सचिवालय स्तर के अधिकारियों से दोस्ती कर कुछ लोगों ने राष्टपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के हवाई कार्यक्रम का दस्तावेज तक सोशल मीडिया में वायरल करना शुरू कर दिया है। क्या यह सुरक्षा की दृष्टि से गलत नही है। सरकार को छोटी मोटी बाॅते छोडकर सुरक्षा सम्बंधी दस्तावेजों के प्रति ज्यादा सर्तक रहना होगा।
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