केरल में 4 साल बाद बैलगाड़ियों की रेस, जानिए खास बातें

केरल में 4 साल बाद बैलगाड़ियों की रेस, जानिए खास बातें

 

 

केरल के राजकाड़ा में 4 साल बाद बैलगाड़ियों की दौड़ का आयोजन किया गया. इस रेस में करीब 20 बैलगाड़ियों ने हिस्सा लिया और यह रेस 6 किलोमीटर लंबी चली. बताया जाता है कि हाल ही में तमिलनाडु में होने वाले जल्लीकट्टू विवाद के दौरान इस खेल पर भी सवाल उठे थे. हालांकि बैलगाड़ियों की रेस को जानवरों के प्रति कम क्रूर बताया जाता है और शायद यही वजह थी कि बिना किसी विवाद के इसका आयोजन हो गया.

वैसे बैलों की इस रेस को केरल में अलग-अलग नाम से जाना जाता है. मारामाडी, ओरचाथैल्ली, कलप्पोट्टू ऐसे कुछ नाम हैं. इनमें से कुछ दौड़ चावल के खेतों के बीच सिर्फ बैलों के साथ की जाती हैं तो कुछ सड़कों पर बैलगाड़ियों के साथ होती हैं.

न्यूज़ 18 के संवाददाता के मुताबिक यह रेस केरल की सीमा पर रहने वाली तमिल आबादी द्वारा आयोजित की जाती है. आपको याद दिला दें कि पिछले साल तमिलनाडु में सांडों के खेल जल्लीकट्टू पर काफी विवाद हुआ था जब इस खेल पर सुप्रीम कोर्ट ने पोंगल के वक्त रोक लगा दी थी.

पशु अधिकार से जुड़ी संस्थाओं ने जल्लीकट्टू को जानवरों के लिए हानिकारक बताया, वहीं तमिलनाडु की जनता इसे अपने संस्कृति का एक अहम हिस्सा बताते हुए प्रतिबंध को वापस लेने की मांग कर रही थी.जहां केरल की यह रेस सिर्फ बैलगाड़ियों के बीच होती है, वहीं जल्लीकट्टू सांडों का खेल है जिसमें उसके सींग पर कपड़ा बांधा जाता है. जो खिलाड़ी सांड के सींग पर बांधे हुए इस कपड़े को निकाल लेता है उसे ईनाम के रूप में सिक्के या पैसे मिलते हैं.

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