कुशीनगर में आबकारी विभाग का जांच,खेल या…..?

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रिपोर्ट उपेंद्र कुशवाहा
कुशीनगर। समय समय पर शराब तस्करी के खेल को लेकर जहां प्रशासन पर आरोप लग रहा है, वहीं इसपर पूरी तरह अंकुश लगाने का जिम्मा सम्भाल रहे आबकारी विभाग बिहार सीमा के नजदीक एन एच 28 पर टोल प्लाजा के आगे माल वाहक वाहनों से जांच के बहाने कुछ और ही खेल, खेल रहे है । जानकारी के अनुसार बिहार प्रान्त में शराब बंदी और लोकसभा चुनाव को लेकर शराब की मांग बढ़ गयी है। इस मौत के अवैध कारोबार में हाथ आजमा रहे, कारोबारी अपने कारोबार में आ रहे रुकावट का सामना न हो इस लिए हर युक्ति अपना रहे है। जानकारों का मानना है कि अवैध शराब की खेप पहले की तरह अब भी बिहार पहुँच रहा है।
जानकर बताते है कि कुछ पुलिस अधिकारी बाहरी कारोबारियों तक पहुँचने के लिए जाल बिछा रहें है तो वहीं कुछ दागदार पुलिस कर्मी अपने भी विभाग के जाल को भेदने में तस्करों के मददगार भी साबित हो रहे है। जिसका प्रमाण गुरुवार को डीसीएम से बिहार जा रहे सैकडों पेटी अवैध शराब के बरामदगी के बाद एक अधिकारी का अपने ही साथी पर शब्द बाड़ के साथ आंखे तरेरने की बात की चर्चा आम होते ही बहुत कुछ स्पष्ट कर देती है।
उधर अवैध शराब के कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की जिम्मेदारी जिले के आबकारी विभाग का है। आबकारी विभाग ने हर क्षेत्र में अपनी उपस्थिति भी दर्ज करा रही है, लेकिन उसके काम करने के तरीका ही सवालों के घेरे में आ जाता है। आजकल आबकारी विभाग के लोग एन एच 28 पर बिहार प्रान्त के नजदीक और टोल प्लाजा टड़वा के आगे हर माल वाहकों को रोककर जांच कर रहे है। जांच करना जरूरी भी है, लेकिन जांच के बहाने जो खेल हो रहा वह लोगों को हैरत में डाल देता है। तभी तो आम आदमी आबकारी विभाग के इस खेल को अपने भाषा में जिस तरह समझा रहा है, वह……….? जानकर बताते है कि आबकारी विभाग के जांच के पीछे बड़ा खेल हो रहा है, आबकारी विभाग जब भी जांच को यहां पहुँचता है, तो समझ ले खेल हो गया। कारण अब तक के जांच में आबकारी विभाग को कोई सफलता हाथ नही लगी। मतलब ………? जांच के दौरान माल वाहकों के चालकों एवं आबकारी विभाग के अधिकारियों के बीच नोक झोंक तक होने की चर्चा करते हुए ग्रामीण बताते है, की जांच के दौरान ट्रकों से वसूली को लेकर चालक और आबकारी सिपाही उलझते रहते है।
अब तक के बड़े अवैध शराब के बरामदगी पर नजर डालें तो एक भी ऐसा मामला नही मिलेगा, जिसमें आबकारी विभाग का भूमिका रहा हो। यह दीगर बात है कि कुछ बड़ी बरामदगी पुलिस विभाग से इतर प्रशासनिक अधिकारियों ने किया और आबकारी विभाग को बरामद शराब सौप आवश्यक कार्यवाही का निर्देश दिया था, जिसमे आबकारी विभाग अपनी उपस्थिति दर्ज करा सरकारी अभिलेखों में खुद ही अपनी पीठ थपथपाता रहा है। बिहार सीमा से जुड़े सूत्र बताते है कि अवैध शराब का कारोबार के पीछे आबकारी विभाग का हाथ नही है, और पुलिस विभाग ही उसका जिम्मेदार है, यह किसी जोक्स से कम नही होगा। जिला आबकारी अधिकारी का पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल पर सम्पर्क किया गया। लेकिन उनका फोन कवरेज एरिया से बाहर तो कभी बन्द बता रहा था।

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