Delhi| लम्बे समय से चल रहे वन्नियार आरक्षण कानून पर आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने वन्नियार आरक्षण कानून को असंवैधानिक करार देते हुए मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। तमिलनाडु में वन्नियार समुदाय को OBC में 10.5% आंतरिक आरक्षण के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा है कि वन्नियार समुदाय को किसी अन्य समूह के रूप में रखने का कोई आधार नहीं है। क्योंकि यदि ऐसा किया जाता है तो यह संविधान के अनुच्छेद 14,15 और 16 के तहत समानता के अधिकार; धर्म, जाति, वर्ण, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव; सार्वजनिक रोजगार के मामलों में अवसर की समानता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
जस्टिस एल नागेश्वर रॉव की बेंच में आए फैसले में कहा गया कि जाति आंतरिक आरक्षण का आधार हो सकती है. लेकिन यह एकमात्र आधार नहीं हो सकती है। जानकारी के लिए बात दें सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के 1 नवंबर, 2021 के फैसले को बरकरार रखा है। जिसमें तत्कालीन AIADMK के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा दिए गए वन्नियार समुदाय के लिए 10.5% आंतरिक आरक्षण को रद्द किया था।
बता दें अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाली सरकार ने अप्रैल में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले फरवरी में वन्नियार आरक्षण अधिनियम पारित किया था।
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