आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियाँ: क्या बदल रहा है, क्या नहीं?

भारत में आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों (ईसीपी) जैसे आई-पिल या अनवांटेड-72 की बिक्री और वितरण की स्थिति यथावत बनी हुई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए कहा है कि इन्हें बिना डॉक्टरी पर्चे वाली दवाओं से डॉक्टरी पर्चे वाली दवाओं की श्रेणी में लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सीडीएससीओ ने हाल ही में इस प्रस्तावित कदम के बारे में की जा रही दावों का खंडन करते हुए कहा है कि इसके आदेश की गलत व्याख्या की गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला सीडीएससीओ, भारत में दवाओं, सौंदर्य प्रसाधनों और चिकित्सा उपकरणों के लिए राष्ट्रीय नियामक निकाय है। यह दवाओं को मंज़ूरी देने, नैदानिक परीक्षण आयोजित करने, दवाओं के लिए मानक निर्धारित करने, आयातित दवाओं की गुणवत्ता को नियंत्रित करने और राज्य दवा नियंत्रण संगठनों की गतिविधियों का समन्वय करने के लिए ज़िम्मेदार है। आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों को अवांछित गर्भधारण को रोकने के लिए एक आवश्यक उपाय माना जाता है। असुरक्षित यौन संबंध के 72 घंटों के भीतर लेने पर ये गर्भावस्था को रोक सकती हैं। सरकार के राष्ट्रीय परिवार और स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-2021) से पता चला है कि 57% महिलाओं ने बिना डॉक्टरी पर्चे के ईसीपी प्राप्त की।

आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियाँ और सीडीएससीओ का रुख

सीडीएससीओ ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में गर्भनिरोधक दवाएँ – सेंटक्रोमैन और एथिनिलोस्ट्राडियोल दवा नियमों की अनुसूची ‘H’ के अंतर्गत आती हैं, जिसका अर्थ है कि ये दवाएं केवल डॉक्टर के पर्चे पर बेची जा सकती हैं। इसके अलावा, निर्माताओं को लेबल पर यह सावधानी बरतनी होगी कि “केवल पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी के पर्चे पर खुदरा बिक्री के लिए”। हालाँकि, इन दवाओं की कुछ ताकतें, [DL-Norgestrel – 0.30 मिलीग्राम + Ethinyloestradiol – 0.30 मिलीग्राम, Levonorgestrel – 0.15 मिलीग्राम + Ethinyloestradiol – 0.03 मिलीग्राम, Centchroman – 30 मिलीग्राम, Desogestrel – 0.15 मिलीग्राम + Ethinyloestradiol – 0.03 मिलीग्राम और Levonorgestrel – 0.10 + Ethinyloestradiol – 0.02 मिलीग्राम] दवा नियमों की अनुसूची ‘K’ में भी शामिल हैं, जिसका अर्थ है कि इन विशिष्ट ताकतों के लिए डॉक्टर के पर्चे की आवश्यकता नहीं है।

अनुसूची K और अनुसूची H के अंतर्गत आने वाली गोलियाँ

सीडीएससीओ ने स्पष्ट किया है कि अनुसूची K में परिभाषित ताकतें, बिना किसी डॉक्टरी पर्चे के उपलब्ध रहेंगी, जैसा कि आज उपलब्ध हैं। और शेष सभी ताकतों के लिए, डॉक्टरी पर्चे की आवश्यकता होगी, जैसा कि आज आवश्यक है। सीडीएससीओ ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना पर्चे वाली दवाओं को पर्चे वाली दवाओं की श्रेणी में ले जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

ईसीपी की उपलब्धता और जनसंख्या पर इसका प्रभाव

आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों की उपलब्धता भारत में यौन स्वास्थ्य और प्रजनन अधिकारों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। अधिकांश महिलाएं बिना डॉक्टरी पर्चे के ही ये गोलियाँ प्राप्त करती हैं, जो उनकी आसानी से उपलब्धता को दर्शाता है, पर यह स्थिति चिंता का विषय भी हो सकती है, क्योंकि इससे कुछ महिलाएं स्वयं-निदान या ग़लत इस्तेमाल कर सकती हैं, जिससे जटिलताएँ पैदा हो सकती हैं। इससे जुड़े सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है, जहाँ कई महिलाओं के पास डॉक्टर से बात करने की सुविधा या इच्छा नहीं होती है।

जनसंख्या नियंत्रण में ईसीपी का योगदान

अवांछित गर्भधारण को रोकने में आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। यह एक ऐसी ज़रूरी दवा है जो जीवनरक्षा और महिलाओं के प्रजनन अधिकारों को प्रभावित करती है। यह यौन स्वास्थ्य और जनसंख्या नियंत्रण रणनीतियों में महत्वपूर्ण योगदान देती है। सरकार द्वारा किए गए सर्वेक्षणों से यह पता चलता है कि ईसीपी महिलाओं में काफी प्रचलित है, और यह बिना डॉक्टरी पर्चे की उपलब्धता इस प्रचलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

डॉक्टरी पर्चे की आवश्यकता और चिंताएँ

हालांकि कुछ विशिष्ट ताकतों के लिए डॉक्टरी पर्चे की ज़रूरत नहीं है, फिर भी कुछ लोगों को डर है कि डॉक्टरी पर्चे की आवश्यकता महिलाओं की ईसीपी तक पहुँच को सीमित कर सकती है, खासकर उन महिलाओं के लिए जिनके पास डॉक्टर को देखने का समय या साधन नहीं है। डॉक्टरी पर्चे महिलाओं के लिए अनावश्यक बाधा बन सकते हैं और इस प्रकार ईसीपी का इस्तेमाल कम हो सकता है जिससे अनचाहे गर्भधारण की संभावना बढ़ सकती है। यह एक ऐसी गंभीर समस्या है जिस पर ध्यान देना आवश्यक है।

सामाजिक और स्वास्थ्यगत प्रभाव

डॉक्टरी पर्चे की अनिवार्यता का सामाजिक और स्वास्थ्यगत दोनों ही पहलुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है। क्या यह ज़रूरत अनचाहे गर्भधारणों में वृद्धि का कारण बनेगी? क्या महिलाओं की स्वतंत्रता और प्रजनन अधिकारों का हनन होगा? इन प्रश्नों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

मुख्य बातें:

  • सीडीएससीओ ने स्पष्ट किया है कि आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों की बिक्री और वितरण की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है।
  • कुछ विशिष्ट ताकतों के लिए डॉक्टरी पर्चे की आवश्यकता नहीं है, जबकि अन्य के लिए डॉक्टरी पर्चे की आवश्यकता अभी भी लागू है।
  • आपातकालीन गर्भनिरोधक गोलियों की सुगमता महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण है।
  • डॉक्टरी पर्चे की अनिवार्यता महिलाओं की ईसीपी तक पहुँच को सीमित कर सकती है, जिससे अनचाहे गर्भधारणों की संभावना बढ़ सकती है।

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