इस वजह से अटल बिहारी वाजपेयी सदा अविवाहित रहे !!

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राजनीति के अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेयी हमारे देश के एक ऐसे राजनेता थे जिनकी तारीफ उनके पक्ष के सदस्यों सहित विपक्षी नेता भी करते थे। अटल बिहारी वाजपेयी लगातार तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने। देश में यह मुकाम पाने वाले वह पहले गैर कांग्रेसी नेता हुए। अटल जी का जीवन राजनीति, कविता और सादगी के बीच बीता। बीते दो महीनों से किडनी में संक्रमण के कारण वह दिल्ली स्थिति एम्स अस्पताल में भर्ती हैं। हालत नाजुक है। अटल जी के जीवन से जुड़ा एक सवाल ऐसा है, जिसका सही-सही जवाब और ठोस कारण किसी को नहीं पता! सवाल यह कि अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी शादी क्यों नहीं की?

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राजनीति के अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेयी

‘अविवाहित हूं, कुंवारा नहीं’
जब कभी अटल जी और उनके अविवाहित होने का जिक्र होता है, तो सदन में उनका वह बयान याद आ जाता है। विपक्ष के हमलों के बीच तब अटल जी ने बड़ी साफगोई के साथ संसद में कहा था, ‘मैं अविवाहित जरूर हूं, लेकिन कुंवारा नहीं।’ ऐसा भी नहीं है कि आजीवन अविवाहित रहने का सवाल अटल जी से नहीं पूछा गया। हालांकि, जब कभी भी यह सवाल आया उन्घ्होंने एक ही जवाब दिया।
कहा यह भी जाता है कि अटल जी अपनी इस महिला मित्र से प्रेम करते थे। कुछ जानकार और किताबें इस बात का भी हवाला देती हैं कि वाजपेयी जी ने कॉलेज के दिनों में कौल को एक चिट्ठी लिख प्यार का इजहार भी किया था। लेकिन उसका कोई जवाब उन्घ्हें कभी नहीं मिला। हालांकि, बताया यह भी जाता है कि अटल जी ने चिट्ठी जिस किताब में रखबर लाइब्रेरी में छोड़ा था, उसी किताब में राजकुमारी कौल ने जवाब भी लिखा। लेकिन वह कभी अटल जी तक पहुंचा ही नहीं। अटल जी पर लिखी गई किताब ‘अटल बिहारी वाजपेयीः ए मैन ऑफ आल सीजंस’ में इस घटना का जिक्र है।

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राजनीति के अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेयी

लेखक और पत्रकार किंगशुक ननाग ने अटल अपनी किताब में अटल जी की लव स्टोरी का भी जिक्र किया था और इसके लिए उन्होंने खुद राजकुमारी कौल से बात की थी. राजकुमारी ने बताया था कि उन्होंने अटल बिहारी के खत का जवाब दिया था लेकिन वो उनतक पहुंच नहीं पाया था. इसी बीच राजकुमारी के पिता ने उनकी शादी एक सरकारी अफसर से करवा दी थी और अटल जी को ये खबर मिलते ही धक्का लगा था.।

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राजनीति के अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेयी

सादगी से कहते- व्यस्तता के कारण नहीं हो पाया
सार्वजनिक जीवन से लेकर कई इंटरव्यूज में अटल बिहारी से यह सवाल पूछा जाता। इस पर वह बड़ी शांति और संयमित अंदाज में जवाब देते, ‘व्यस्तता के कारण ऐसा नहीं हो पाया।’ हां, यह भी जरूर था कि हर बार यह कहकर वह धीरे से मुस्कुरा देते थे। उनके करीबियों का भी यही मानना है कि राजनीतिक सेवा को खुद को समर्पित कर देने के कारण वह आजीवन अविवाहित रहे। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लिए आजीवन अविवाहित रहने का निर्णय लिया था।

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नमिता कौल के परिवार के साथ अटल बिहारी वाजपेयी (स्रोतः ट्विटर)

कॉलेज की वो महिला मित्र
अटल जी राजनीतिक जीवन में कभी ग्वालियर तो कभी लखनऊ से चुनाव लड़ते। ग्वालियर में ही 25 दिसंबर 1924 को उनका जन्म हुआ था। वहीं विक्टोरिया कॉलेज से उन्होंने पढ़ाई की। कॉलेज के दिनों से ही उनकी एक महिला मित्र थीं राजकुमारी कौल, जो अपने आखिरी समय तक अटल जी के साथ थीं। दोनों ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मीबाई कॉलेज) में सहपाठी थे। अटल जी कॉलेज के दिनों में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में प्रचारक और जनसंघ की राजनीति में सक्रिय रहे।

बहरहाल, जीवन की गाड़ी आगे बढ़ी। अटल जी मुख्यधारा की राजनीति में सक्रिय हो गए और इसी बीच राजकुमारी कौल के पिता ने उनकी शादी एक कॉलेज प्रोफेसर ब्रिज नारायण कौल से कर दी। शादी के बाद राजकुमारी कौल का परिवार दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज कैम्पस में रहने लगा। कहा जाता है कि दिल्ली में अटल जी और राजकुमारी कौल की दोस्ती फिर से गहरी हो गई। राजकुमारी कौल ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मैंने और अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी इस बात की जरूरत नहीं महसूस की कि इस रिश्ते के बारे में कोई सफाई दी जाए।’ शादी के कुछ साल बाद राजकुमारी कौल के पति की मृत्यु हो गई थी और इस दौरान अटल बिहारी ने राजकुमारी कौल समेत उनकी बेटियों को भी अपना लिया था. राजकुमारी अपने अंतिम समय तक अटल बिहारी के साथ ही रह रही थीं और साल 2014 में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।

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राजनीति के अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेयी

एक प्रखर वक्ता, दृढ़ राजनेता और कवि हृदय वाले अटल बिहारी को कई राजनीतिक जानकार ‘आदर्श प्रेमी’ की भी संज्ञा देते हैं। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैय्यर ने अटल जी और राजकुमारी कौल के संबंध को ‘देश के राजनीतिक हलके में घटी सबसे सुंदर प्रेम कहानी’ बताया है। दिलचस्प बात यह रही कि अटल जी और राजकुमारी कौल का संबंध कभी चर्चा का कारण नहीं बना। हालांकि जब 2014 में राजकुमारी कौल की मौत हुई तो देश के कई बड़े अखबारों ने इसे प्रमुखता से छापा। कई बड़े अखबार समूह ने तो राजकुमारी कौल को अटल जी के जीवन की डोर तक बताया।

कुलदीप नैय्यर ने टेलीग्राफ में लिखा था, ‘संकोची मिस कौल अटल की सबकुछ थीं। उन्होंने जिस तरह अटल की सेवा की, वह कोई और नहीं कर सकता था। वह हमेशा उनके साथ रहीं।’ दक्षिण भारत के पत्रकार गिरीश निकम ने बताया था कि अटल जी जब प्रधानमंत्री नहीं थे, तब भी मैं उनके घर पर फोन करता था तो वही फोन उठाती थीं और कहती थीं- मैं मिसेज कौल बोल रही हूं। दोनों की दोस्घ्ती की नैतिकता ऐसी थी कि राजकुमारी कौल के पति ब्रिज नारायण कौल को भी इस पर कोई ऐतराज नहीं था। राजकुमारी कौल ने 80 के दशक में एक मैगजीन को इंटरव्यू दिया था। इसमें उन्होंने कहा, ‘अटल के साथ अपने रिश्ते को लेकर मुझे कभी अपने पति को स्पष्टीकरण नहीं देना पड़ा। हमारा रिश्ता समझबूझ के स्तर पर काफी मजबूत था।’

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राजनीति के अजातशत्रु अटल बिहारी वाजपेयी

किताब ‘अटल बिहारी वाजपेयीः ए मैन ऑफ आल सीजंस’ में राजकुमारी कौल के एक परिवारिक करीबी के हवाले से कहा गया है, ‘वास्तव में वह अटल से शादी करना चाहती थीं, लेकिन घर में इसका जबरदस्त विरोध हुआ। हालांकि अटल ब्राह्मण थे, लेकिन कौल अपने को कहीं बेहतर कुल का मानते थे। मिसेज कौल की सगाई के लिए जब परिवार ग्वालियर से दिल्ली आया, उन दिनों यहां 1947 में बंटवारे के दौरान दंगा मचा हुआ था। इसके बाद शादी ग्वालियर में हुई।’

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नमिता कौल के परिवार के साथ अटल बिहारी वाजपेयी (स्रोतः ट्विटर)

नमिता कौल के परिवार के साथ अटल बिहारी वाजपेयी (स्रोतः ट्विटर)
मोरारजी देसाई की सरकार में जब अटल बिहारी वाजपेयी विदेश मंत्री हुए तो कौल परिवार लुटियंस जोन में उनके साथ ही रहता था। अटल बिहारी वाजपेयी जब पीएम बने तो उनके सरकारी निवास पर भी राजकुमारी कौल अपनी बेटी नमिता और दामाद रंजन भट्टाचार्य के साथ रहती थीं। अटल जी ने नमिता को दत्तक पुत्री का दर्जा दिया था और कौल परिवार ही उनकी देखरेख करता था। जिस वक्त मिसेज कौल का निधन हुआ, अटल बिहारी वाजपेयी अल्जाइमर रोग से ग्रस्त हो चुके थे। बावजूद इसके मिसेज कौल के अंतिम संस्कार में लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह और सुषमा स्वराज मौजूद रहे। ज्योतिरादित्य सिंधिया भी उनके अंतिम संस्कार में पहुंचे।

(स्रोतः ट्विटर, साभार : navbharattimes.indiatimes.com, newstracklive.com)

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