बाईपास सर्जरी भी हुई अब बाईपास, अपोलो मेडिक्स में इंट्रावैस्कुलर लीथोट्रिप्सी के प्रयोग से ब्लॉक हुई आर्टरीज को खोलना हुआ आसान

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मरीज कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी करने को तैयार नहीं  था और मरीज को दिल का गंभीर दौरा पड़ा था।  मरीज  को तुरंत ही बाईपास सर्जरी की सलाह दी गयी, मरीज की हालत देखते हुए डॉ अजय बहादुर ने नई तकनीक  इंट्रावैस्कुलर लीथोट्रिप्सी, जिसमें शॉक वेव्स से जमी हुई कैलसियम की परतों को तोड़ कर बंद नसों को खोला जाता है।
उन्होंने बताया कि यह काफी जटिल प्रक्रिया है जो  भारत के कुछ चुनिंदा हॉस्पिटल में ही की जाती है और अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल एक ऐसा संस्थान है जहां पर यह सर्जरी की गयी है, सर्जरी  के बाद मरीज स्वस्थ है और डिस्चार्ज हो कर घर जा चुका है।

इंट्रावैस्कुलर लीथोट्रिप्सी की नई पद्धति के प्रयोग किए जाने पर अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल लखनऊ के एमडी व सीईओ डॉ मयंक सोमानी ने कहा, “ इंट्रावैस्कुलर लीथोट्रिप्सी पद्धति की मदद से अब हम गंभीर एंजियोप्लास्टी वाले मरीजों का इलाज करने में सक्षम हैं। एंजियोप्लास्टी द्वारा कैल्शियम की कड़ी परत का इलाज करना एक बड़ी चुनौती है। इस नई तकनीक की मदद से अब ऐसे ब्लॉकेज को खोलना आसाना हो गया है, जिसके परिणाम व्यक्ति के जीवन को लंबे समय के लिए बेहतर बनाते हैं। उत्तर प्रदेश में चिकित्सा के क्षेत्र में अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल लखनऊ प्रतिदिन नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। कोरोना महामारी के कारण दिल्ली मुंबई जैसे शहरों में जाकर इलाज कराना एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में हमारा प्रयास है कि हम, सभी लोगों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करा सकें जिससे कि उन्हें अच्छे उपचार के लिए कहीं भटकना न पड़े। मैं डॉ अजय बहादुर और उनकी टीम को बधाई देता हूँ और सभी को विश्वास दिलाता हूँ कि अपोलोमेडिक्स हॉस्पिटल निरंतर सभी को उत्कृष्ट उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराता रहेगा।”

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