“ग्रहण ” फिल्म बोकारो के रहने वाले सत्य व्यास की लिखित उपन्यास 84 पर निर्धारित है

बोकारो से शेखर की रिपोर्ट

वैसे तो बोकारो में हिंदी के  उपन्यास उदीयमान लेखक के रूप में उभरे हैं लेखक है इनमें से अशोक अकेला, अशोक अंश,अजय अंश, दीपक सवाल, विकास महाराज शंभू पाठक,  जी जैसे कई लोगों ने उपन्यास जगत मैं अपना नाम रोशन किया है वैसे ही आज एक  बोकारो निवासी हिंदी के युवा लेखक सत्य व्यास जी के उपन्यास साथ चर्चा जोरों से है आपको बताते जाये की बोकारो में पढ़े लिखे सत्य व्यास जी वैसे तो वह बोकारो के कोऑपरेटिव कॉलोनी निवासी व्यास ओझा जी के सबसे छोटे पुत्र हैं पिता व्यास ओझा सेवानिवृत्त बीएसएल कर्मि थे। उनकी मां देव कुमारी देवी है सत्य व्यास ने अपनी दसवीं की पढ़ाई बीएसएल हाई स्कूल 2 डी  1995 में की थी और बारहवीं बी आई बी एड 8बी 1997 से किया था।

बोकारो  के कोऑपरेटिव कॉलोनी निवासी सत्य व्यास विगत वर्ष में हिंदी के उद्यान लेखक के रूप में उभरे हैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत सत्य व्यास ने हिंदी में एक नया पाठक वर्ग तैयार कर इस धारणा को गलत साबित किया है कि हिंदू में पाठकों की कमी है सत्य व्यास की पिछली दोनों किताबें बनारस टॉकीज वह दिल्ली दरबार बेस्ट सेलर रही है दोनों पर फिल्में निर्माणाधीन है 2018 के प्रतिष्ठित द्वारका प्रसाद अग्रवाल पुस्तक से सम्मानित सत्य व्यास जी संवाद व कथानक लेखन में भी सर्कित है। जितने पढ़ने में तेज थे उतने ही वे पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ इनको लेखक में भी रूचि रखते है हिंदू युवा लेखक सत्य व्यास ने अपने उपन्यास 84 पर आधारित फिल्म ग्रहण जल्द ही ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आने वाली है सेंटा डायरेक्शन राजन चंदेल ने किया है ट्रेलर को दर्शक बेहद पसंद कर रहे हैं फिल्म 24 जून को डिजनी हॉटस्टार पर रिलीज होगी।

उपन्यास 84 के दंगों पर बनी या फिर लोगों को काफी पसंद आएगी सत्य व्यास ने बताया कि यह फिल्म 84 के दंगों पर बनी एक लव स्टोरी है पूरी फ़िल्म को 8 एपिसोड में बनाया गया है जिसमें शैलेंद्र झा एक स्टोरी लेसनर के रूप में है उपन्यास 84 पर बनी है वेब सीरीज का ट्रेलर युवा आईपीएस अमृता सिंह के एक विशेष मामलों को सौंपने जाने से शुरू होता है लेखक के अनुसार युवा आईपीएस को पता चलता है कि उसके पिता पर एक जघन अपराध का आरोप लगाया गया है अपने कर्तव्य और अपने पिता के प्रति प्यार के बीच फंसी अमृता उस पूरे मामले को जानने के लिए कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है यह मुश्किलें व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन पर क्या असर डालती है यह देखना होगा बोकारो निवासी सत्य व्यास की तीसरी किताब 84 वेब सीरीज के आधार पर वेब की दुनिया में पहुंच गई है

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