मंगलुरु। मंगलुरु पुलिस कमिश्नर संदीप पाटिल ने बताया कि उन्हें आज सुबह ही एक शव मिला है। अभी इसकी पहचान होना बाकी है। पुलिस ने वीजी सिद्धार्थ के परिजनों को इसकी सूचना दे दी है। सोमवार से लापता सीसीडी के मालिक वीजी सिद्धार्थ का शव होयगे बाजार के नजदीक मुलिहितलु द्वीप के पास से मिला है। हालांकि पुलिस का कहना है कि शव की परिजनों से पहचान होनी बाकी है।
सिद्धार्थ की तलाश के लिए पुलिसकर्मी, तटरक्षक बल, गोताखोर और मछुआरे सहित लगभग 200 लोग लगाए गए थे।इससे पहले सिद्धार्थ (60) के कार चालक बसवराज पाटिल ने मेंगलुरु में एक पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया कि उनके मालिक पुल से लापता हो गए थे, जहां वह कार से उतरे थे और कुछ देर टहलना चाहते थे। चालक द्वारा दर्ज मामले के अनुसार,‘सिद्धार्थ ने नेत्रावती नदी के पुल पर कार रुकवाई और कार से उतर गए। सिद्धार्थ ने कहा कि वह थोड़ी देर सैर करना चाहते हैं।’ ड्राइवर ने बताया कि सिद्धार्थ ने उनसे पुल के दूसरे छोर पर इंतजार करने को कहा।
लगभग एक घंटे बाद भी वह नहीं लौटे तो ड्राइवर से परिवार को इसकी सूचना दी।पुलिस को शक है कि सिद्धार्थ बहती नदी में कूद गए होंगे तभी ड्राइवर को वहां नहीं मिले। सिद्धार्थ बीजेपी के वरिष्ठ नेता और यूपीए-2 सरकार में विदेश मंत्री (2009-2012) रह चुके एस. एम. कृष्णा के सबसे बड़े दामाद हैं।
कृष्णा 1999 से 2004 के बीच कर्नाटक के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। सिद्धार्थ ने 18 मार्च को 10 रुपये की फेस वैल्यू पर 980 रुपये प्रति शेयर की दर से शहर में सॉफ्टवेयर कंपनी माइंडट्री लिमिटेड में अपने कुल 20 प्रतिशत शेयर मुंबई की कंपनी लार्सन एंड टॉब्रो (एल ऐंड टी) को 3,300 करोड़ रुपये में बेच दिए थे।
वह अपनी कंपनी पर चढ़े कर्ज को चुकाना चाह रहे थे। वीजी सिद्धार्थ के लापता होने के बाद उनका एक पत्र सामने आया था। तीन दिन पहले लिखे गए इस खत में सिद्धार्थ ने अपनी परेशानियों का जिक्र किया है। पत्र में कंपनी को हो रहे नुकसान और भारी कर्ज की बात की गई है।
इसके अलावा आयकर विभाग के एक पूर्व डीजी के दबाव की भी चर्चा है। सिद्धार्थ के लापता होने के बाद यह लेटर सामने आया है जो 27 जुलाई को लिखा गया है। इसमें उन्होंने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर और सीसीडी (Cafe Coffee Day) परिवार से कहा है कि 37 साल बाद वह अपनी तमाम कोशिशों के बाद भी एक सही और फायदे वाला बिजनस मॉडल नहीं तैयार कर सके हैं।
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