कलयुग के श्रवण कुमार बन मां-बाप को कांवड़ में बिठा कर चल दिये

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गाजियाबाद । हरियाणा के पलवल जिले के गांव फुलवारी निवासी चन्द्रपाल सिंह व उनकी पत्नी रूपवती अपने पांच पुत्र बंसीलाल, अशोक, राजू, महेंद्र व जगपाल के साथ गांव में रहते हैं। चन्द्रपाल सिंह के बेटे मजदूरी करके परिवार का खर्चा चलाते हैं।

चन्द्रपाल सिंह भी मजदूरी करते थे। चन्द्रपाल सिंह ने बताया कि उनकी बड़ी इच्छा थी कि वह हरिद्वार से कांवड़ लेकर आएं लेकिन ऐसा नहीं हो सका। उम्र बढ़ती गई और पैरों ने भी साथ छोड़ दिया। एक साल पहले यह बात जब उन्होंने अपने बेटों को बताई तो बेटों ने प्रण किया कि इस बार इनकी इच्छा को जरूर पूरा करेंगे।

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mata pita ki sewa

सावन शुरू होते ही बेटों ने अपने मां-बाप को कांवड़ में बिठा कर चल दिये। जब लोगों को यह पता चला कि कुछ जवान लड़के कांवड़िए का रूप धारण कर अपने मां-बाप को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से चले आ रहे है तो मुरादनगर के आईटीएस के पास उसके पहुंचते ही स्थानीय लोग उनकी ओर दौड़ पड़े। फूल-माला पहनाकर उनका स्वागत किया गया। कांवड़ यात्रा के पहले ही दिन बुजुर्ग मां बाप के प्रति पांच भाईयों के भक्तिभाव को देखकर सबने उनकी सराहना की। लोग यह कहते नजर आए कि आज भी श्रवण कुमार जैसे पुत्र इस समाज में मौजूद हैं।

चन्द्रपाल के बड़े बेटे बंसीलाल ने बताया कि हम पांच भाइयों के अलावा गांव के पांच अन्य युवकों की मदद ले रहे हैं। बंसीलाल ने बताया कि उन्होंने 12 जुलाई को हरिद्वार में माता-पिता को गंगा स्नान कराकर कांवड़ उठाई थी। अशोक के अनुसार वह दिन से आठ से दस किलोमीटर का ही सफर करते हैं।
कांवड़ियों के स्वागत में लोग दिन-रात लगे हुए हैं। इन्ही सब के बीच एक ऐसा दृश्य दिखा जो सबको रामायण काल की याद दिला गया।

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