Ram Mandir पर फारूक अब्दुल्ला ने दिया चौंकाने वाला बयान, सभी हुए हैरान

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नई दिल्ली। अयोध्या में जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा नई बेंच के पास भेजने के फैसले के बाद नैशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला की तरफ से चौंकाने वाला बयान आया है। अब्दुल्ला ने कहा कि इस मुद्दे को लोगों के साथ टेबल पर चर्चा कर सुलझाया जाना चाहिए। इसे कोर्ट कोर्ट में घसीटने की क्या जरूरत है। मुझे पूरा यकीन है बातचीत के जरिए से इसे सुलझाया जा सकता है। भगवान राम पूरी दुनिया के हैं, सिर्फ हिंदुओं के नहीं। उन्होंने कहा, ‘भगवान राम से किसी को बैर नहीं है और होना भी नहीं चाहिए। कोशिश करनी चाहिए मामले को सुलझाने की और बनाने की। जिस दिन यह हो जाएगा, मैं भी एक पत्थर लगाने जाऊंगा।

आपको बतां दे कि इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि उसके द्वारा गठित एक उपयुक्त पीठ राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि मालिकाना विवाद मामले की सुनवाई की तारीख तय करने के लिए 10 जनवरी को आदेश देगी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एस के कौल की पीठ ने कहा, ‘‘एक उपयुक्त पीठ मामले की सुनवाई की तारीख तय करने के लिए 10 जनवरी को आगे के आदेश देगी।’’ सुनवाई के लिए मामला सामने आते ही प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यह राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामला है और इसपर आदेश पारित किया। अलग-अलग पक्षों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरिश साल्वे और राजीव धवन को अपनी बात रखने का कोई मौका नहीं मिला। मामले की सुनवाई 30 सेकेंड भी नहीं चली।

दूसरी तरफ, इस मामले में एक पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि इस मामले का समाधान कोर्ट से ही होना चाहिए। अंसारी ने मंदिर मामले पर पीएम मोदी के बयान का समर्थन भी किया, जिसमें उन्होंने कानून प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करने को कहा था।

वहीं, वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का जो भी फैसला होगा, वह मान्य होगा। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि पीएम मोदी के बयान पर इस मामले पर किसी भी टिप्पणी की जरूरत नहीं रह जाती है। बता दें कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 10 जनवरी को होगी। 10 जनवरी को मामला सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की स्पेशल बेंच के सामने जाएगा।
इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने वकील हरिनाथ राम की तरफ से दाखिल की गई उस पीआईएल को भी खारिज कर दिया है, जिसमें अयोध्या विवाद की रोजाना सुनवाई की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान इस कदर भीड़ थी कि पैर रखने की भी जगह नहीं थी। सीजेआई के सामने जब मामला आया तो उन्होंने कुछ ही सेकंड में 10 जनवरी को सुनवाई की बात कही।

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